धातुएं, खनिज, अयस्क: गुणधर्म, उपयोग (रसायन विज्ञान)

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11. ऑक्सीकृत पारे का सबसे आम अयस्क कौन-सा है जो ज्वालामुखी गतिविधि और उष्ण स्रोत (hot springs) से संबंधित दानेदार परतों या शिराओं (granular crusts or veins) में होता है? [MTS (T-I) 06 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) सिनेबार
Solution:
  • ऑक्सीजन पारे का सबसे आम अयस्क सिनेबार (Cinnabar) है
  • जो ज्वालामुखी गति विधि और उष्ण स्रोत (hot spring) से संबंधित दानेदार परतों या शिराओं (grannular crusts or viens) में होता है। सिनाबार का रासायनिक सूत्र HgS है।
  • रासायनिक संरचना
    • सिनेबार का रासायनिक सूत्र HgS है, जो पारा सल्फाइड का रूप है।
    • हालांकि प्रश्न में "ऑक्सीकृत पारे" का उल्लेख है
    • भूवैज्ञानिक संदर्भ में सिनेबार को पारे का प्राथमिक अयस्क माना जाता है
    • जो सल्फाइड रूप में ऑक्सीकरण प्रक्रियाओं से जुड़ा होता है।
    • यह चमकदार लाल रंग का खनिज होता है और प्राकृतिक रूप से ज्वालामुखीय क्षेत्रों में बनता है।
  • भूवैज्ञानिक संरचना
    • सिनेबार ज्वालामुखी गतिविधियों और गर्म झरनों (hot springs) से संबंधित हाइड्रोथर्मल शिराओं में दानेदार परतों या क्रस्ट्स के रूप में जमता है।
    • यह सल्फर-समृद्ध गैसों और गर्म जल के माध्यम से पारे के वाष्पीकरण से उत्पन्न होता है
    • जो चट्टानों में शिराओं या परतों का निर्माण करता है।
    • ऐसे भूवैज्ञानिक वातावरण में यह अन्य खनिजों जैसे रियोलाइट या बेसाल्ट के साथ पाया जाता है।
  • प्राप्ति और उपयोग
    • सिनेबार ऐतिहासिक रूप से रंगद्रव्य (वर्मिलियन) के रूप में उपयोग होता रहा है
    • आधुनिक समय में पारे का मुख्य स्रोत है। इसका निष्कर्षण roasting द्वारा किया जाता है
    • जिसमें HgS को Hg और SO₂ में बदल दिया जाता है।
    • हालांकि पारा विषैला होने के कारण इसके उपयोग में कमी आई है।
  • अतिरिक्त तथ्य
    • पारे के अन्य अयस्क जैसे मेटाकिन्नाबराइट (HgS का काला रूप) या मोन्टroydite (Hg₂O) कम सामान्य हैं
    • सिनेबार जितने व्यापक नहीं। सिनेबार के खनन में पर्यावरणीय सावधानियां आवश्यक हैं
    • क्योंकि पारा प्रदूषण तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है।

12. प्लास्टर ऑफ पेरिस का रासायनिक नाम ....... है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 29 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट
Solution:
  • प्लास्टर ऑफ पेरिस का रासायनिक नाम कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट (Calcium Sulphate Hemihydrate) है
  • जिसका रासायनिक सूत्र CaSO₄.1/2H₂O है.
  • रासायनिक सूत्र
    • इसका रासायनिक सूत्र \ceCaSO4⋅12H2O है।
    • यह जिप्सम (\ceCaSO4⋅2H2O) से बनता है
    • जब जिप्सम को 373 K तापमान पर गर्म किया जाता है।
  • निर्माण प्रक्रिया
    • जिप्सम को नियंत्रित ताप पर calcine करने से प्लास्टर ऑफ पेरिस प्राप्त होता है
    • यह प्रक्रिया अधपकाई (hemihydrate) रूप बनाती है
    • जो सफेद पाउडर के रूप में उपलब्ध होता है।
  • गुण और कठोर होना
    • पानी मिलाने पर यह तुरंत कठोर हो जाता है
    • यह एक्सोथर्मिक प्रतिक्रिया है
    • जो जिप्सम क्रिस्टल बनाती है और संरचना को मजबूत करती है।
  • उपयोग
    • चिकित्सा में टूटी हड्डियों के लिए प्लास्टर बैंडेज।
    • मूर्तियों, सजावट और दीवार प्लास्टरिंग के सांचे बनाने में।
    • प्रयोगशालाओं में एयर-टाइट सीलिंग के लिए।

13. निम्नलिखित में से कौन-से उपधातु हैं? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) बोरॉन, सिलिकॉन, एंटीमनी
Solution:
  • वे तत्व जिनमें धातु तथा अधातु दोनों के गुण पाए जाते हैं, उन्हें उपधातु कहा जाता है।
  • बोरॉन, सिलिकॉन, एंटीमनी, आर्सेनिक, जर्मेनियम, टेल्यूरियम और पोलोनियम उपधातु हैं।
  • आधुनिक आवर्त सारणी में उपधातु की संख्या 7 है।
  • उपधातुओं की परिभाषा
    • उपधातु ऐसे तत्व हैं जिनमें धातु (जैसे चमक, प्रत्यास्थता) और अधातु (जैसे भंगुरता, कम विद्युत चालकता) दोनों के गुण संयुक्त रूप से पाए जाते हैं।
    • ये आवर्त सारणी के p-ब्लॉक समूह में स्थित होते हैं
    • विशेषकर 13 से 16 समूह के तिरछे भाग में।
    • कुल मिलाकर इन्हें 7 मुख्य उपधातु माना जाता है
    • हालांकि कभी-कभी 8 तक गिना जाता है।
  • मुख्य उपधातुओं की सूची
    • आवर्त सारणी में निम्नलिखित तत्व उपधातु के रूप में वर्गीकृत हैं:
    • बोरॉन (Boron, B)
    • सिलिकॉन (Silicon, Si)
    • जर्मेनियम (Germanium, Ge)
    • आर्सेनिक (Arsenic, As)
    • एंटीमनी (Antimony, Sb)
    • टेल्यूरियम (Tellurium, Te)
    • पोलोनियम (Polonium, Po)
    • कुछ स्रोतों में एस्टैटीन (Astatine, At) को भी शामिल किया जाता है
    • लेकिन यह रेडियोएक्टिव होने से कम चर्चित रहता है।
  • गुण और विशेषताएँ
    • उपधातु आधे चालक (semiconductors) होते हैं
    • अर्थात् तापमान या अशुद्धियों के आधार पर उनकी चालकता बदल जाती है।
    • ये चमकीले दिखते हैं लेकिन हथौड़े से पीटने पर टूट जाते हैं।
    • रासायनिक रूप से ये अम्लों या क्षारों के साथ प्रतिक्रिया कर सकते हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, सिलिकॉन कांच और सिरेमिक में उपयोग होता है।
  • उपयोग और महत्व
    • सिलिकॉन: कम्प्यूटर चिप्स, सोलर पैनल।
    • जर्मेनियम: ट्रांजिस्टर, फाइबर ऑप्टिक्स।
    • आर्सेनिक: कीटनाशक, अर्धचालक।
    • ये आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स में महत्वपूर्ण हैं।

14. निम्नलिखित में से किस तत्व की परिवर्ती संयोजकता होती है? [CGL (T-I) 25 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) आयरन
Solution:
  • प्रश्न में दिए गए विकल्प के अनुसार, आयरन (Fe) तत्व की परिवर्ती संयोजकता होती है।
  • आयरन की संयोजकता 2 और 3 दोनों हो सकती है।
  •  क्योंकि उनके d-ऑर्बिटल्स में इलेक्ट्रॉन की उपलब्धता विभिन्न संयोजकताएँ उत्पन्न करने की अनुमति देती है।
  • लेकिन सामान्यतः ऐसे बहुविकल्पीय प्रश्नों में आयरन (Fe), सल्फर (S), सोडियम (Na) या मैग्नीशियम (Mg) जैसे तत्व दिए जाते हैं
  • जिनमें से आयरन (Fe) परिवर्ती संयोजकता का प्रमुख उदाहरण है ।
  • परिवर्ती संयोजकता क्या है?
    • परिवर्ती संयोजकता का अर्थ है कि एक ही तत्व अलग-अलग यौगिकों में भिन्न संयोजक अंक (valency) दिखाता है
    • जो ऑक्सीकरण संख्या (oxidation number) से जुड़ा होता है।
    • उदाहरणस्वरूप, संक्रमण तत्वों के आंशिक रूप से भरे d-उपकोश (d-subshell) के कारण वे ns और (n-1)d इलेक्ट्रॉनों को विभिन्न संख्याओं में खो सकते हैं।
    • यह गुण मुख्यतः d-ब्लॉक और f-ब्लॉक तत्वों में देखा जाता है
    • जबकि s-ब्लॉक और p-ब्लॉक के अधिकांश तत्वों में संयोजकता निश्चित होती है।
    • लेन्थेनॉइड्स और एक्टिनॉइड्स भी इस गुण को प्रदर्शित करते हैं ।
  • आयरन (Fe) में परिवर्ती संयोजकता
    • आयरन (Fe) तत्व परिवर्ती संयोजकता का सबसे सामान्य उदाहरण है।
    • इसकी संयोजकता +2 से +6 तक हो सकती है, लेकिन सबसे प्रचलित +2 (फेरस, Fe²⁺) और +3 (फेरिक, Fe³⁺) हैं।
    • फेरस ऑक्साइड (FeO) में Fe की संयोजकता +2 है।
    • फेरिक ऑक्साइड (Fe₂O₃) में Fe की संयोजकता +3 है।
    • इसके अलावा, Fe +6 अवस्था में पोटैशियम फेरेट (K₂FeO₄) में पाया जाता है।
    • यह परिवर्तन द-इलेक्ट्रॉनों की भागीदारी से होता है ।
  • अन्य तत्वों की तुलना
    • सल्फर जैसे अधातु भी परिवर्ती संयोजकता दिखाते हैं
    • लेकिन प्रश्नों में धातुओं (विशेषकर संक्रमण धातुओं) पर जोर दिया जाता है।
    • सोडियम और मैग्नीशियम जैसे क्षारीय/क्षारीय मृदा धातुओं में संयोजकता निश्चित रहती है ।
  • कारण और महत्व
    • परिवर्ती संयोजकता का मुख्य कारण d-ऑर्बिटल्स में इलेक्ट्रॉनों की आसान गतिशीलता है
    • जो विभिन्न इलेक्ट्रॉन निकासी की अनुमति देती है।
    • इससे रंगीन यौगिक, उत्प्रेरक गुण और जटिल संरचनाएँ बनती हैं।
    • उदाहरणतः, क्रोमियम (Cr) +2 से +6 तक संयोजकता दिखाता है।
    • यह गुण जैव रसायन (जैसे हीमोग्लोबिन में Fe) और उद्योग (जंग प्रतिरोध) में महत्वपूर्ण है ।

15. जब एक लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के ....... रंग के घोल में डुबोया जाता है, जो उसका रंग ....... में बदल जाता है। [CHSL (T-I) 16 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) नीले, हरे
Solution:
  • जब लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के नीले रंग के घोल में डुबोया जाता है
  • तो उसका रंग हरे रंग में परिवर्तित हो जाता है।
  • Fe(s) + CuSO4 (aq) → Fe(SO₂)(aq) + Cu(s)
  • अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण
    • लोहा (Fe) कॉपर (Cu) से अधिक अभिक्रियाशील धातु है
    • इसलिए यह कॉपर सल्फेट (CuSO₄) के घोल से कॉपर को विस्थापित कर देता है। अभिक्रिया इस प्रकार है:
    • Fe(s) + CuSO₄(aq) → FeSO₄(aq) + Cu(s)
    • यहाँ कॉपर सल्फेट का नीला रंग फेरस सल्फेट (FeSO₄) के हरे रंग से प्रतिस्थापित हो जाता है।
  • रंग परिवर्तन का कारण
    • कॉपर सल्फेट (CuSO₄) का जलीय विलयन गहरा नीला होता है
    • क्योंकि Cu²⁺ आयन नीले रंग का प्रदर्शन करते हैं।
    • अभिक्रिया के बाद Fe²⁺ आयन बनते हैं, जो हल्का हरा रंग देते हैं
    • शुद्ध कॉपर धातु कील पर लाल-भूरी परत के रूप में जम जाती है।
    • धीरे-धीरे नीला रंग मलिन होकर हरा हो जाता है।
  • धातु सक्रियता श्रेणी
    • धातु सक्रियता श्रेणी के अनुसार क्रम है: K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Cu
    • लोहा कॉपर से ऊपर होने के कारण इसे विस्थापित कर सकता है
    • लेकिन उलटा नहीं। यह अभिक्रिया धातुओं की अभिक्रियाशीलता को प्रदर्शित करने के लिए प्रयोगशाला में की जाती है।
  • अवलोकन और परिणाम
    • आरंभिक अवस्था: नीला घोल, चमकदार लोहे की कील।
    • अंतिम अवस्था: हरा घोल, कील पर भूरी कॉपर परत।
    • यह अभिक्रिया बहुउष्ण (exothermic) होती है तथा रासायनिक समीकरण संतुलन के नियम का पालन करती है।

16. अपक्षय की प्रक्रिया के दौरान सर्वाधिक स्थायी खनिज कौन-सा है? [CHSL (T-I) 10 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) क्वार्ट्ज
Solution:
  • अपक्षय की प्रक्रिया के दौरान, क्वार्ट्ज (Quartz) सबसे अधिक स्थायी खनिज है
  • क्योंकि यह रासायनिक और भौतिक अपक्षय के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी है
  • क्वार्ट्ज मुख्य रूप से सिलिकॉन डाइऑक्साइड (SiO₂) से बना होता है. 
  • अपक्षय क्या है?
    • अपक्षय चट्टानों और खनिजों का विघटन या टूटने की प्रक्रिया है
    • जो उनके मूल स्थान पर ही होती है। यह तीन मुख्य प्रकारों में विभाजित है
    • भौतिक (तापमान परिवर्तन, हिमांकन आदि से), रासायनिक (जल, ऑक्सीजन, अम्लों से प्रतिक्रियाएँ) और जैविक (पौधों, जीवों की क्रिया से)।
    • रासायनिक अपक्षय में खनिजों की स्थिरता सबसे महत्वपूर्ण होती है
    • क्योंकि यहाँ चट्टानें रासायनिक रूप से परिवर्तित हो जाती हैं ।
    • उच्च तापमान-दबाव वाले खनिज जल्दी अपक्षयित होते हैं
    • जबकि कम तापमान वाले अधिक टिकाऊ रहते हैं।
  • गोल्डिच विघटन श्रेणी
    • गोल्डिच ने 1938 में खनिज स्थिरता की एक श्रेणी प्रस्तुत की
    • जो बोवेन की अभिक्रिया श्रेणी पर आधारित है। यह श्रेणी अपक्षय के क्रम को दर्शाती है:
    • सबसे स्थिर: क्वार्ट्ज़ ।
    • क्वार्ट्ज़ (SiO₂) की टेट्राहेड्रल संरचना मजबूत होती है
    • जो जल अपघटन या ऑक्सीकरण से अप्रभावित रहती है।
    • अन्य खनिज आसानी से नए मिट्टी खनिजों (जैसे काओलिनाइट) में बदल जाते हैं।
  • क्वार्ट्ज़ की स्थिरता के कारण
    • क्वार्ट्ज़ शीशीय संरचना वाला खनिज है, जिसमें सिलिकॉन-ऑक्सीजन बॉन्ड बहुत मजबूत होते हैं।
    • यह अम्लों, क्षारों और तापमान परिवर्तनों से प्रभावित नहीं होता।
    • अपक्षय के दौरान यह चट्टानों से मुक्त होकर रेत या बजरी के रूप में संचित रहता है
    • जबकि अन्य खनिज मिट्टी में घुल जाते हैं
    • उदाहरणस्वरूप, ग्रेनाइट में क्वार्ट्ज़ लंबे समय तक बचा रहता है
    • जबकि फेल्डस्पार जल्दी विघटित हो जाता है।