पत्रिकाएं, पुस्तकें और उनके लेखक (आधुनिक भारतीय इतिहास)

Total Questions: 8

1. राजा राममोहन राय की पुस्तक 'गिफ्ट टू मोनोथिस्ट्स' मूल रूप से किस भाषा में लिखी गई थी ? [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) फ़ारसी
Solution:
  • राजा राममोहन राय की पुस्तक 'गिफ्ट टू मोनोथिस्ट्स' ('तुहफ़त-उल-मुवाहिद्दीन') मूल रूप से फ़ारसी भाषा में 1803 में लिखी गई थी।
  •  मुगल काल के दौरान फ़ारसी भारत में व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली भाषा थी और अदालत की भाषा थी।
  • राजा राम मोहन राय एक प्रमुख समाज सुधारक और विद्वान थे जिन्होंने भारतीय पुनर्जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • एकेश्वरवादियों को उपहार, बहुदेववाद की आलोचना और एकेश्वरवादी धर्मों की श्रेष्ठता के लिए एक तर्क था।
    Other Information
  •  अरबी मुख्य रूप से इस्लाम से जुड़ी भाषा है और धार्मिक ग्रंथों और अनुष्ठानों में इसका व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
  •  सेमेटिक भाषा अरबी के अधिकांश वक्ता अरब जगत में पाए जाते हैं।
  • इसका नाम अरब लोगों के नाम पर रखा गया है और यह पहली बार पहली शताब्दी ईस्वी में सामने आया था।
  •  बांग्ला पूर्वी भारत और बांग्लादेश के बंगाली लोगों की भाषा है और इसकी एक समृद्ध साहित्यिक परंपरा है।
  • यह पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और असमिया बराक घाटी की आधिकारिक भाषा है।
  •  संस्कृत भारत की एक प्राचीन भाषा है और यह हिंदू धर्म और पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणालियों से जुड़ी है।
  •  कांस्य युग के अंत के दौरान उत्तरपश्चिम से अपनी पूर्ववर्ती भाषाओं के फैलाव के बाद, इसकी उत्पत्ति दक्षिण एशिया में हुई।
  •  उस समय फारसी भाषा भारत में व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाती थी और यह मुगल अदालत की भाषा भी थी।
  • राजा राममोहन राय ने इस पुस्तक में बहुदेववाद की आलोचना करते हुए एकेश्वरवादी धर्म की श्रेष्ठता के लिए तर्क प्रस्तुत किए।
  • इस कृति का बांग्ला और अन्य भाषाओं में बाद में अनुवाद भी किया गया, लेकिन मूल रचना फारसी में ही है.​
  • राजा राममोहन राय एक प्रमुख समाज सुधारक और विद्वान थे, जिन्होंने भारतीय पुनर्जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • उन्होंने सामाजिक सुधार जैसे सती प्रथा के खिलाफ आवाज उठाई और ब्राह्मो सभा की स्थापना की।
  • 'गिफ्ट टू मोनोथिस्ट्स' उनके एकेश्वरवाद संबंधी विचारों का पहला दार्शनिक और धार्मिक वक्तव्य माना जाता है.​
  • इस पुस्तक का नाम फारसी में 'तुल्फत-उल-मुवाहिदीन' है जिसका अर्थ है "एकेश्वरवादियों को उपहार"।
  • यह कृति धार्मिक बहुदेववाद का विरोध करती है और एकेश्वरवादी विचारधारा को प्रस्तुत करती है।
  • फारसी भाषा का इस्तेमाल उस समय के विचारक और समाज सुधारक इस प्रकार के ग्रंथों में इसलिए करते थे
  • क्योंकि यह भाषा उच्च शिक्षा का माध्यम थी और समाज के शिक्षित वर्ग के बीच समझी जाती थी

2. निम्नलिखित में से कौन-सा उपन्यास मुल्क राज आनंद द्वारा नहीं लिखा गया है? [MTS (T-I) 01 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) द गाइड
Solution:
  • 'द गाइड' उपन्यास प्रसिद्ध भारतीय लेखक आर.के. नारायण द्वारा लिखा गया था, न कि मुल्क राज आनंद द्वारा।
  • मुल्क राज आनंद के उपन्यास 'कुली' और 'प्राइवेट लाइफ ऑफ एन इंडियन प्रिंस' हैं।
  • मुल्क राज आनंद द्वारा नहीं लिखा गया उपन्यास "द गाइड" है।
  • जिन्होंने खासकर भारत की जाति व्यवस्था, गरीबों, दलितों और सामाजिक अन्याय पर अपने उपन्यासों के माध्यम से प्रकाश डाला।
  • उनके प्रमुख उपन्यासों में "अनटचेबल" (1935), जो अछूत समस्या पर आधारित है, "कुली" (1936), "टू लीव्स एंड अ बड" (1937), "द विलेज" (1939), "अक्रॉस द ब्लैक वाटर्स" (1939), "द स्वॉर्ड एंड द सिकल" (1942), "द बिग हार्ट" (1945) जैसी पुस्तकें शामिल हैं।
  • ये उपन्यास मुख्य रूप से ब्रिटिश कालीन भारत की सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों को दर्शाते हैं।
  • उन्होंने गरीबों और शोषित वर्गों के जीवन को सहानुभूति और यथार्थवाद के साथ चित्रित किया।
  • वहीं, "द गाइड" उपन्यास आर. के. नारायण द्वारा लिखा गया है, जिसे भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर केंद्रित एक अलग शैली में माना जाता है।
  • यह उपन्यास मुल्क राज आनंद के लेखन से बिलकुल अलग है और उनका हिस्सा नहीं है।
  • इस प्रकार, अगर विकल्पों में "द गाइड" या कोई अन्य प्रसिद्ध उपन्यास है जो ऊपर बताई गई सूची में नहीं आता, तो वह उपन्यास मुल्क राज आनंद द्वारा लिखा हुआ नहीं होगा।
  • इसलिए, जिन उपन्यासों को उन्होंने नहीं लिखा, उनमें "द गाइड" प्रमुख है।
  • Other Information
  • मुल्क राज आनंद के उपन्यास: अनटचेबल, कुली, टू लीव्स एंड अ बड, द विलेज, अक्रॉस द ब्लैक वाटर्स, द स्वॉर्ड एंड द सिकल आदि
  • मुल्क राज आनंद द्वारा नहीं लिखा गया उपन्यास: द गाइड (आर. के. नारायण का साहित्य).​
  • यह जानकारी मुल्क राज आनंद की प्रमुख कृतियों और उनके साहित्यिक योगदान पर आधारित है।

3. भारत के इंग्लैंड को धन निकासी का सिद्धांत देने वाला पहला राष्ट्रवादी कौन था? [CGL (T-I) 24 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) दादाभाई नौरोजी
Solution:
  • दादाभाई नौरोजी ने अपनी पुस्तक 'पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' के माध्यम से सबसे पहले 'धन की निकासी' (Drain of Wealth) का सिद्धांत दिया था
  • जिसमें उन्होंने बताया कि भारत का धन किस प्रकार इंग्लैंड जा रहा था।
  • उन्होंने इस सिद्धांत को 19वीं सदी में प्रस्तुत किया था, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे ब्रिटिश शासन के दौरान भारत से संपत्ति और धन इंग्लैंड भेजे जा रहे थे
  • जिससे भारत आर्थिक रूप से प्रभावित हुआ। 1867 में अपने लेख "Poverty and Un-British Rule in India" में नौरोजी ने ब्रिटिश उपनिवेशवाद के आर्थिक शोषण को उजागर किया और बताया कि भारत की संपत्ति ब्रिटेन निर्यात हो रही थी
  • जिसका भारत को कोई लाभ नहीं मिल रहा था। इस सिद्धांत ने भारत में आर्थिक और राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और यह भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की नींव भी बनी।
  • दादाभाई नौरोजी एक पारसी बुद्धिजीवी और समाज सुधारक थे, जिन्हें "ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ इंडिया" भी कहा जाता था।
  • उन्होंने भारत के आर्थिक शोषण के खिलाफ पहले आंदोलन चलाये और लंदन इंडियन सोसाइटी व ईस्ट इंडिया एसोसिएशन की स्थापना में भी योगदान दिया।
  • उनका यह सिद्धांत ब्रिटिश शासन के आर्थिक शोषण को एक राजनीतिक मुद्दा बनाकर भारतीयों को जागरूक करने वाला पहला राष्ट्रवादी विचार था।
  • संक्षेप में, दादाभाई नौरोजी ने भारत से इंग्लैंड की ओर धन के निष्कासन का सिद्धांत देकर यह स्पष्ट किया
  • ब्रिटिश शासन भारत की आर्थिक ताकत और संसाधनों का लाभ उठाकर भारत को गरीब कर रहा था, और इससे राष्ट्रीय संघर्ष की नींव पड़ी.​​

4. रास्त गोफ्तार (Rast-Goftar) नामक समाचार-पत्र ने किसके लिए सामाजिक-धार्मिक सुधारों के संदेशों का प्रचार किया ? [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (I-पाली), MTS (T-I) 06 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) पारसी
Solution:
  • 'रास्त गोफ्तार' (सत्य बताने वाला) एक गुजराती समाचार-पत्र था, जिसकी शुरुआत दादाभाई नौरोजी ने 1851 में की थी।
  • इसका उद्देश्य पारसी समुदाय के भीतर सामाजिक और धार्मिक सुधारों को बढ़ावा देना था।
  •  इसकी शुरुआत 1854 में दादाभाई नौरोजी और खरशेदजी कामा ने मुंबई में की थी।
  • यह आंग्ल-गुजराती समाचार-पत्र पश्चिमी भारत में पारसियों के बीच पारसी सामाजिक रीति-रिवाजों के आधुनिकीकरण, धार्मिक रूढ़िवादिता के खिलाफ अभियान
  • विशेषतः लड़कियों की शिक्षा, शादी और महिलाओं की सामाजिक स्थिति में सुधार के संदेश फैलाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता था।
  • रास्त गोफ्तार ने पारसियों के धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में व्याप्त रूढ़िवादिता को चुनौती दी और धार्मिक ग्रंथों के स्थानीय भाषाओं में अनुवाद तथा अनुष्ठानों के सरलीकरण को बढ़ावा दिया।
  • इसने पूजा को अधिक व्यक्तिगत और तर्कसंगत अनुभव बनाने की दिशा में काम किया। पारसी समुदाय में शिक्षा के प्रसार, खासकर महिलाओं की शिक्षा के लिए भी रास्त गोफ्तार ने प्रयास किए।
  • इस समाचार-पत्र ने पारसियों के सामाजिक जीवन को आधुनिक बनाने और धार्मिक सुधारों को आगे बढ़ाने में प्रमुख योगदान दिया।
  • इसके माध्यम से पारसियों में न केवल धार्मिक सुधार बल्कि सामाजिक जागरूकता और राष्ट्रीय चेतना की नींव भी रखी गई।
  • रास्त गोफ्तार ने नए विचारों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तर्कसंगत सोच को अपनाने के लिए पारसी समाज को प्रेरित किया
  • जो उस समय के सामाजिक बदलावों और सुधार आंदोलनों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच था।
  • कुल मिलाकर, रास्त गोफ्तार ने पारसी समाज में सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक सुधारों को व्यापक रूप से प्रसारित किया और सुधारवादी प्रवृत्तियों को प्रोत्साहित किया।
  • इस प्रकार, रास्त गोफ्तार मुख्य रूप से पारसी समुदाय के लिए सामाजिक-धार्मिक सुधारों के संदेशों को प्रचारित करने वाला एक महत्वपूर्ण समाचार-पत्र था
  • जिसने 19वीं सदी में भारतीय समाज में पारसियों के सांस्कृतिक और सामाजिक आधुनिकीकरण में बड़ी भूमिका निभाई

5. 'हिंद स्वराज' या 'इंडियन होम रूल' निम्नलिखित में से किस स्वतंत्रता सेनानी ने लिखा था ? [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) महात्मा गांधी
Solution:
  • 'हिंद स्वराज' पुस्तक महात्मा गांधी ने 1909 में गुजराती भाषा में लिखी थी। इसमें उन्होंने स्वशासन, आधुनिक सभ्यता की आलोचना और निष्क्रिय प्रतिरोध (सत्याग्रह) पर अपने विचारों की रूपरेखा प्रस्तुत की थी।
  • 'इसमें गांधीजी ने स्वराज (आत्म शासन) के सिद्धांत, आधुनिक सभ्यता की आलोचना, और ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारतीयों के अहिंसक प्रतिरोध की बात की है।
  • गांधीजी ने इस पुस्तक में बताया कि भारत में ब्रिटिश शासन भारतीयों के सहयोग से कायम था, और अगर भारतियों ने सहयोग बंद कर दिया होता तो ब्रिटिश शासन खत्म हो जाता।
  • यह पुस्तक मूलतः गुजराती भाषा में लिखी गई थी और बाद में अंग्रेज़ी में अनुवादित हुई। ब्रिटिश सरकार ने इसे 1910 में सशक्त विरोध के कारण प्रतिबंधित भी किया था।
  • महात्मा गांधी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख नेता थे, जो सत्याग्रह और अहिंसा के मार्गदर्शक थे।
  • उनकी रचनाएं भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा देने वाली मानी जाती हैं। 'हिंद स्वराज' गांधीजी की विचारधारा का प्रतिनिधित्व करती है
  • जिसमें उन्होंने भारतीय जनता को स्वराज के लिए प्रेरित किया और विदेशी शासन के वैधता पर सवाल उठाए।
  • इस पुस्तक का महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसमें गांधीजी ने राजनीतिक आज़ादी के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक पुनरुद्धार की बात की, जो भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के विचारों को गहरा और व्यापक बनाता है।
  • सारांश में, 'हिंद स्वराज' का लेखक महात्मा गांधी हैं, जिन्होंने यह पुस्तक 1909 में लिखी थी जो भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के लिए एक महत्वपूर्ण पाठ बन गई थी

6. 'माई स्टोरी' (My Story) किस महिला लेखिका की आत्मकथा है? [MTS (T-I) 01 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) कमला दास
Solution:
  • 'माई स्टोरी' (My Story) महिला लेखिका कमला दास (अन्य नाम - कमला सुरैय्या, माधवीकुट्टी) की आत्मकथा है।
  • यह पुस्तक उनकी जीवनगाथा को दर्शाती है, जिसमें वे अपने बचपन, परिवारिक परिवेश, प्रेम, लेखन, और जीवन संघर्षों का विस्तृत वर्णन करती हैं।
  • कमला दास की यह आत्मकथा हिंदी में "मेरी कहानी" के नाम से भी प्रकाशित हुई है, और यह पुस्तक काफी विवादास्पद होने के साथ-साथ बहुत लोकप्रिय भी रही है।
  • इसे पंद्रह से अधिक विदेशी भाषाओं में अनूदित किया गया है।
  • कमला दास ने अपनी आत्मकथा में न केवल अपनी व्यक्तिगत यात्रा बयान की है
  • बल्कि एक महिला के रूप में समाज में आने वाली चुनौतियों, प्रेम के अनुभवों, और एक लेखिका के रूप में अपने संघर्षों को भी साझा किया है।
  • उनकी लेखनी में व्यक्तिगत और सामाजिक दोनों ही दृष्टिकोणों का समावेश होता है
  • जिससे यह आत्मकथा महिलाओं के जीवन के विभिन्न पहलूओं को उजागर करती है।
  • इस किताब ने भारतीय साहित्य और महिलाओं की लेखनी में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया है क्योंकि इसने महिलाओं के अनुभवों और भावनाओं को नए सिरे से समझाया और समाज की रूढ़ीवादी सोच को चुनौती दी।
  • कमला दास की आत्मकथा उनके व्यक्तित्व, सांस्कृतिक संवेदनाओं और लेखकीय दक्षता का परिचायक है।
  • इस प्रकार, 'माई स्टोरी' कमला दास की आत्मकथा है, जो उनके जीवन, संघर्ष और लेखन के अनुभवों को समर्पित है
  • महिला लेखिका के दृष्टिकोण से एक महत्त्वपूर्ण साहित्यक कृति है

7. निम्नलिखित में से कौन 'द हिंदू' समाचार-पत्र के एक संस्थापक हैं, जिसकी स्थापना 1878 ई. में की गई थी? [SSC JE मैकेनिकल परीक्षा 27 अक्टूबर, 2020 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) जी. सुब्रमनिया अय्यर
Solution:
  • चेन्नई (मद्रास) से प्रकाशन प्रारंभ करने वाला 'द हिंदू' न्यूज पेपर अंग्रेजी भाषा का दैनिक समाचार-पत्र है। इसकी स्थापना जी
  • सुब्रमनिया अय्यर ने 1878 ई. में की थी। प्रारंभ में यह समाचार-पत्र साप्ताहिक था; परंतु 1889 ई. से इसने दैनिक समाचार -पत्र का रूप ले लिया।
  • 'द हिंदू' समाचार-पत्र की स्थापना 1878 में एक समूह द्वारा की गई थी, जिनमें प्रमुख संस्थापक जी. सुब्रमण्यम अय्यर और एमz वीरराघवाचार्य शामिल थे।
  • यह समाचार पत्र शुरू में साप्ताहिक के रूप में प्रकाशित हुआ और बाद में 1889 में दैनिक समाचार पत्र बन गया। जी. सुब्रमण्यम अय्यर 'द हिंदू' का पहला संपादक भी थे
  • उन्होंने इसकी स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एम. वीरराघवाचार्य पेशे से वकील थे और अखबार की संपादकीय नीतियों को निर्धारित करने में सहायक रहे।
  • संस्थापक समूह में कुल छह युवक थे, जिन्होंने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ जनमत को आकार देने के लिए इस अखबार की नींव रखी।
  • इस समाचार पत्र ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और आज भी यह भारत के शीर्ष अंग्रेजी दैनिकों में गिना जाता है।
  • द हिंदू का मुख्यालय चेन्नई में स्थित है और इसके संस्थापक पत्रकार, समाज सुधारक, और स्वतंत्रता सेनानी थे।
  • इस प्रकार, 'द हिंदू' के संस्थापक मुख्यतः जी. सुब्रमण्यम अय्यर और एम. वीरराघवाचार्य थे
  • जिनके नेतृत्व में यह 1878 में स्थापित हुआ था और बाद में भारतीय पत्रकारिता में एक महत्वपूर्ण धरोहर बन गया

8. वर्ष 2021-22 में, भारत में किस भाषा में सर्वाधिक समाचार-पत्र प्रकाशित हुए? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 14 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) हिंदी
Solution:
  • भारत के समाचार पत्रों के पंजीयक (RNI) की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021-22 में भारत में हिंदी भाषा में सर्वाधिक संख्या में समाचार-पत्रों (और पत्रिकाओं) का प्रकाशन हुआ था।
  • उदाहरण के लिए, दैनिक जागरण, हिंदुस्तान और अमर उजाला जैसे हिंदी समाचार पत्र भारत के सबसे अधिक पढ़े और वितरित समाचार पत्रों में शामिल हैं।
  • हिंदी समाचार पत्रों की संख्या वर्ष 2021-22 में लगभग 4496 थी, जो अन्य भाषाओं की तुलना में सबसे अधिक है।
  • भारत में हिंदी भाषा विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, और हरियाणा जैसे राज्यों में व्यापक रूप से बोली जाती है
  • जिससे इन क्षेत्रों में हिंदी समाचार पत्रों की मांग अधिक रहती है। इसके अलावा, हिंदी समाचार पत्रों का पाठक वर्ग इसकी पहुंच को और बढ़ाता है।
  • अंग्रेजी भाषा के समाचार पत्र भी महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उनका मुख्य पाठक वर्ग महानगरों और शहरी क्षेत्रों तक सीमित है।
  • दूसरे स्थान पर उर्दू भाषा में समाचार पत्र आते हैं, जिनकी संख्या लगभग 1123 है
  • और उनका प्रसार उर्दू भाषी क्षेत्रों जैसे हैदराबाद, कश्मीर, और उत्तर प्रदेश में होता है। अन्य क्षेत्रीय भाषाओं जैसे बंगाली, मराठी, तेलुगु, आदि में भी समाचार पत्र प्रकाशित होते हैं
  • लेकिन संख्या और प्रसार हिंदी के सामने कम हैं। अतः, हिंदी भाषा वर्ष 2021-22 में भारत में सर्वाधिक समाचार पत्र प्रकाशित होने वाली भाषा थी.​