परिवहन (भारत का भूगोल)

Total Questions: 30

1. निम्नलिखित में से कौन-सा बंदरगाह भारत के पश्चिमी तट पर स्थित नहीं है? [CGL (T-I) 24 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) हल्दिया
Solution:
  • हल्दिया बंदरगाह भारत के पश्चिम बंगाल राज्य में स्थित है। जो कि पूर्वी तट पर स्थित है।
  • कांडला बंदरगाह (दीनदयाल बंदरगाह) भारत के गुजरात में, मंगलुरू, कर्नाटक राज्य में तथा मर्मागाओ बंदरगाह गोवा में स्थित है।
  • ये तीनों बंदरगाह भारत के पश्चिमी तट पर स्थित हैं।
  • पश्चिमी तट पर स्थित प्रमुख बंदरगाह
    • पश्चिमी तट गुजरात का कांडला, महाराष्ट्र का मुंबई, कर्नाटक का न्यू मैंगलोर, गोवा/मोरमुगाओ, केरल का कोच्चि आदि आते हैं।
    • इनका नियंत्रण और प्रशासन केंद्रीय पोर्ट ट्रस्ट अधिनियम के तहत होता है
    • इनका भौगोलिक क्षेत्र दक्षिण-पूर्वी किनारों के बजाय पश्चिमी समुद्री किनारे की तरफ होता है.​
    • उदाहरण: कांडला (गुजरात), मुंबई (महाराष्ट्र), न्यू मैंगलोर (कर्नाटक), कोच्चि (केरल) पश्चिमी तट के प्रमुख बंदरगाह हैं.​
  • पूर्वी तट के प्रमुख बंदरगाह
    • पूर्वी तट पर प्रमुख बंदरगाहों में कोलकाता, हल्दिया, पारादीप (ओडिशा), विशाखापत्तनम, चेन्नई, एन्नोर, तूतीकोरिन आदि आते हैं.​
    • ये बंदरगाह बंगाल की खाड़ी या उत्तर-प उत्तरी अरब सागर के साथ जुड़ते हैं और पश्चिमी तट के विपरीत पूर्वी तट पर स्थित होते हैं.​
  • निष्कर्ष
    • अगर विकल्प में पारादीप, विशाखापत्तनम, कोलकाता/हल्दिया, चेन्नई आदि पूर्वी तट के बंदरगाह थे
    • अन्य पश्चिमी तट के नाम थे, तब सही उत्तर वही होगा जो पूर्वी तट का है।
    • इस प्रकार, प्रश्न में पूछा गया “कौन सा बंदरगाह भारत के पश्चिमी तट पर स्थित नहीं है
    • अगर वही सूची में पारादीप/विशाखापत्तनम/ह्ल्दिया/कोलकाता/चेन्नई आदि है
    • तो ये सभी पूर्वी तट के हैं, और पश्चिमी तट पर स्थित नहीं होते।
  • जरूरी विवरण के लिए स्रोत संकेत:
    • पश्चिमी तट के प्रमुख बंदरगाहों की सूची और उनका भौगोलिक स्थान.​
    • पूर्वी तट के प्रमुख बंदरगाहों की सूची और उनका स्थान.​

2. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत का एकमात्र रैक रेलवे है, जिसे 2005 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था? [CGL (T-I) 25 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) नीलगिरि माउंटेन रेलवे
Solution:
  • नीलगिरि माउंटेन रेलवे भारत की एकमात्र परिचालनगत रैक रेलवे है
  • जिसे 2005 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है।
  • रैक रेलवे की विशेषता
    • रैक रेलवे एक विशेष प्रकार की पर्वतीय रेल प्रणाली है
    • जिसमें खड़ी चढ़ाई वाले इलाकों में ट्रेन को चलाने के लिए रैक-एंड-पिनियन सिस्टम का उपयोग होता है।
    • यह सिस्टम रेल की पटरियों के बीच एक दांतेदार रैक (cogwheel) पर ट्रेन के इंजन का पिनियन घूमकर ट्रेन को ऊपर-नीचे खींचता या धकेलता है
    • जो सामान्य रेलवे से अलग है। भारत में केवल नीलगिरि माउंटेन रेलवे ही इस तकनीक का उपयोग करता है
    • जबकि अन्य पर्वतीय रेलवे जैसे कालका-शिमला या दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे नैरो गेज पर आधारित हैं लेकिन रैक सिस्टम नहीं।​
  • इतिहास और निर्माण
    • इस रेलवे का निर्माण ब्रिटिश काल में 1890 के दशक में शुरू हुआ और 1908 में पूरी तरह चालू हो गया।
    • तमिलनाडु के मेट्टुपलायम (Mettupalayam) से नीलगिरि पहाड़ियों के ऊपर ऊटी (Ooty) तक 46 किलोमीटर लंबा यह मार्ग 1,000 मीटर ऊंचाई पर चढ़ता है।
    • इसमें 208 कर्व, 16 सुरंगें और 250 से अधिक पुल हैं, जो इसे इंजीनियरिंग का चमत्कार बनाते हैं।
    • अभी भी भाप इंजन (steam locomotives) का उपयोग होता है, जो यात्रा को ऐतिहासिक अनुभव प्रदान करता है।​
  • यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा
    • 2005 में यूनेस्को ने इसे "भारत की पर्वतीय रेलवे" श्रेणी में शामिल किया, जिसमें दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे (1999) और कालका-शिमला रेलवे (2008) भी हैं।
    • यह मान्यता इसकी प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक महत्व और ब्रिटिश इंजीनियरिंग कौशल के लिए दी गई।
    • यात्रा औसतन 7.5 किमी/घंटा की गति से होती है, जो इसे दुनिया की सबसे धीमी ट्रेनों में से एक बनाती है।​

3. ऐतिहासिक शेरशाह सूरी मार्ग ....... के बीच से होकर गुजरता है। [MTS (T-I) 14 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) दिल्ली और अमृतसर
Solution:
  •  जिसे 16वीं शताब्दी में शेरशाह सूरी के शासनकाल के दौरान बनाया गया था।
  • यह सड़क सोनारगांव (बांग्लादेश) को काबुल (अफगानिस्तान) से जोड़ती है।
  • यह दिल्ली तथा अमृतसर से होकर गुजरती है।
  • प्राचीन उत्पत्ति और शेरशाह का योगदान
    • शेरशाह सूरी (1540-1545) ने मौर्य काल के उत्तरापथ को पुनर्निर्मित कर इसे सड़क-ए-आजम या बादशाही सड़क के नाम से विकसित किया
    • जो बंगाल (सोनारगांव) से दिल्ली होते हुए अफगानिस्तान के काबुल तक फैला था।
    • उन्होंने सड़क को 15 मीटर चौड़ा पक्का बनवाया, दोनों ओर छायादार पेड़ (जैसे बरगद) लगवाए, हर कुछ मील पर सरायें, कुएँ, मस्जिदें और मील के पत्थर स्थापित किए।
    • घुड़सवार डाक प्रणाली (दाक चौकी) शुरू कर संचार को तेज किया, जो व्यापारियों के लिए भी उपलब्ध थी।​
  • आधुनिक मार्ग का विवरण
    • भारत में शेरशाह सूरी मार्ग विशेष रूप से दिल्ली-अमृतसर खंड को संदर्भित करता है
    • जो लगभग 450 किमी लंबा है और पंजाब की आर्थिक राजधानी अमृतसर को राष्ट्रीय राजधानी से जोड़ता है।
    • पूरा ग्रैंड ट्रंक रोड (GT रोड) कोलकाता से पेशावर तक 2500+ किमी का है
    • लेकिन भारत-पाकिस्तान सीमा पर विभाजित हो गया।
    • आज यह ट्रक, यात्री वाहनों और वाणिज्यिक यातायात का प्रमुख माध्यम है।​
  • ऐतिहासिक और आर्थिक महत्व
    • यह मार्ग मौर्य, मुगल, ब्रिटिश और आधुनिक काल में व्यापार (मसाले, कपड़ा, अनाज), सेना संचालन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का केंद्र रहा।
    • ब्रिटिश काल में इसे GT रोड नाम मिला और 1830s में पक्का किया गया।
    • शेरशाह के नवाचारों ने प्रशासनिक दक्षता बढ़ाई, जो अकबर जैसे मुगलों ने अपनाई।​
  • वर्तमान स्थिति और सांस्कृतिक विरासत
    • आज NH-1 के रूप में अपग्रेडेड, यह व्यस्ततम राजमार्गों में से एक है
    • लेकिन पुरानी सरायें (जैसे अली मरदान खान सराय) और कोस मीनारें पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।
    • जालंधर जैसे क्षेत्रों में इसके अवशेष बाकी हैं।
    • यह दक्षिण एशिया की सबसे प्राचीन निरंतर उपयोगी सड़क है।​

4. भारत के कौन-से दो शहर ग्रैंड ट्रंक रोड द्वारा जुड़े हुए हैं? [CHSL (T-I) 10 अगस्त, 2023 (II-पाली), CGL (T-I) 02 दिसंबर, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) अमृतसर-कोलकाता
Solution:
  • ग्रैंड ट्रंक रोड (पुरानी मुगल रोड) सोनारगांव (बांग्लादेश) से काबुल (अफगानिस्तान) तक जाती है। यह भारत में अमृतसर को कोलकाता से जोड़ती है।
  • अमृतसर और कोलकाता।
    • यह सड़क उत्तर भारत से पूर्वी भारत तक फैली हुई है और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रही है।​
  • रोड का इतिहास
    • ग्रैंड ट्रंक रोड एशिया की सबसे पुरानी और लंबी सड़कों में से एक है
    • जिसकी शुरुआत कम से कम चौथी शताब्दी ईसा पूर्व से मानी जाती है।
    • 16वीं शताब्दी में शेरशाह सूरी ने इसे पक्का बनवाया, जो सोनारगाँव (बंगाल) से लेकर सिंध तक फैला था।
    • ब्रिटिश काल में लॉर्ड डलहौजी ने इसे आधुनिक रूप दिया, जिसे बाद में ग्रैंड ट्रंक रोड नाम मिला।​
    • यह सड़क व्यापारियों, तीर्थयात्रियों और सेनाओं के लिए सदियों से उपयोगी रही, जिसने भारतीय उपमहाद्वीप के विकास में کلیدی भूमिका निभाई।​
  • मार्ग और प्रमुख शहर
    • GT रोड भारत में अमृतसर से कोलकाता तक लगभग 2,400 किमी लंबी है।
    • यह अमृतसर, जालंधर, लुधियाना, अम्बाला, दिल्ली, आगरा, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, पटना होते हुए कोलकाता तक जाती है।​
    • अमृतसर (पंजाब) से शुरू होकर वाघा बॉर्डर तक।
    • दिल्ली के माध्यम से पूर्व की ओर।
    • कोलकाता (पश्चिम बंगाल) तक समाप्त।
    • आधुनिक समय में यह NH-1 (दिल्ली-अमृतसर) और NH-2 (दिल्ली-कोलकाता) के रूप में जाना जाता है।​
  • महत्व और वर्तमान स्थिति
    • यह सड़क स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना का हिस्सा है
    • जो भारत के प्रमुख शहरों को जोड़ती है।
    • व्यापार, परिवहन और पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण, यह अब चार-लेन हाईवे में बदली जा रही है।​

5. राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 के अंतर्गत कितने अंतर्देशीय जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया गया है? [CGL (T-I) 20 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) 111
Solution:
  • अधिनियम की पृष्ठभूमि
    • राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 का उद्देश्य भारत के भीतर जलमार्ग परिवहन को बड़े पैमाने पर विकसित करना और अंतर्देशीय जल मार्गों के नेटवर्क को सुपुष्ट बनाना था।
    • इसके तहत पहले से घोषित पांच जलमार्गों सहित कुल 111 जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया गया।
    • यह जानकारी केंद्रीय नौवहन मंत्रालय के स्रोतों और सार्वजनिक प्रस्तुतियों में स्पष्ट है।
    • [उद्धरण: PIB/अन्य सरकारी प्रेस रिलीज़ आदि के संक्षेप, सार्वजनिक दस्तावेज]
  • संख्या और संरचना
    • इनमें पूर्व में पहले से मान्यता प्राप्त 5 NWs शामिल हैं (जो पहले से राष्ट्रीय जलमार्ग के रूप में दर्ज थीं)।
    • शेष 106 जलमार्ग नए पहचाने गए थे और इन्हें NW के रूप में घोषित किया गया।
    • यह विभाजन अधिनियम-2016 के दायरे में प्रस्तुत किया गया है। [उद्धरण: सरकारी सारांश/सरकारी प्रेस रिलीज़]
  • प्रमुख नदियाँ और जलमार्ग
    • NW-1 से NW-111 तक फैले ये जलमार्ग गंगा, यमुना, नर्मदा, कावेरी, बराक आदि प्रमुख नदियों और नहर-नीत जलमार्गों को कवर करते हैं।
    • IWAI (Indian Inland Waterways Authority) के द्वारा इन जलमार्गों का मानकीकरण, गेट-टू-गेट पोर्ट-कनेक्शन, बुनियादी ढांचा और सुरक्षा मानकों के साथ विकास योजनाएं चल रही हैं। [उद्धरण: IWAI/PIB के संदर्भ]
  • महत्व और उद्देश्य
    • अंतर्देशीय जलमार्गों का विस्तार आर्थिक विकास, सुविधाजनक परिवहन, और ईंधन-खर्च में कमी के लक्ष्य के लिए किया गया
    • यह सड़क और रेल मार्गों का पूरक साधन माना गया। 2016 के बाद से कई NWs के लिए विस्तृत विकास योजनाएं, टर्मिनल निर्माण, जल-यातायात नियम
    • ग्राउंड-वर्क जारी है। [उद्धरण: सरकारी विश्लेषण/प्रेस रिलीज़]
  • हालिया स्थिति और अपडेट
    • 111 NWs के घोषित होने की पुष्टि सार्वजनिक स्रोतों में पाई जाती है
    • 2020s-2025 के दौरान इन NWs के कार्यान्वयन, टर्मिनल और इन-फ्रेम परियोजनाओं के बारे में निरंतर जानकारी प्रकाशित होती रही है।
    • [उद्धरण: PIB/सरकारी अपडेट]
    • यदि चाहें, तो इस विषय पर मैं एक विस्तृत सूचिका बना सकता हूँ
    • जिसमें हर NW का नंबर, प्रमुख नदी/नहर, राज्य, और हालिया विकास/status के साथ शामिल होगा.
    • क्या आप NWs की पूरी सूची बनवाना चाहते हैं या किसी विशेष NW (जैसे NW-1, NW-2, आदि) के बारे में गहराई से विवरण चाहिए?
    • राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 के अंतर्गत 111 अंतर्देशीय जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया गया है [PIB/सरकारी प्रेस रिलीज़ के सारांश]

6. आसनसोल, हावड़ा, मालदा और सियालदह मंडल भारत के किस रेलवे जोन के अंतर्गत आते हैं? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) पूर्व रेलवे
Solution:
  • आसनसोल, हावड़ा, मालदा और सियालदह मंडल भारत के पूर्व रेलवे जोन के अंतर्गत आते हैं।
  • पूर्व रेलवे जोन का मुख्यालय कोलकाता में स्थित है।
  • पूर्व रेलवे का इतिहास
    • पूर्व रेलवे की स्थापना 14 अप्रैल 1952 को हुई थी, जब ईस्ट इंडियन रेलवे (सियालदह, हावड़ा, आसनसोल और दानापुर मंडल) और बंगाल नागपुर रेलवे को मिलाकर इसे बनाया गया।
    • बाद में दानापुर मंडल को अलग कर दिया गया
    • 1975 में मालदा मंडल का गठन हुआ
    • जो मूल रूप से हावड़ा मंडल से अलग हुआ।
    • यह जोन यात्री और माल ढुलाई के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है
    • जो पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों को कवर करता है।​
  • मंडलों का विवरण
    • पूर्व रेलवे के चार मुख्य मंडल हैं: हावड़ा, आसनसोल, सियालदह और मालदा।
    • प्रत्येक मंडल का संचालन एक डिवीजनल रेलवे मैनेजर (DRM) द्वारा किया जाता है
    • जो जोनल महाप्रबंधक को रिपोर्ट करते हैं।
    • हावड़ा मंडल: कोलकाता के निकट स्थित, यह सबसे व्यस्त मंडलों में से एक है
    • जो हावड़ा स्टेशन जैसे प्रमुख केंद्रों को संभालता है।
    • आसनसोल मंडल: कोयला परिवहन के लिए जाना जाता है
    • झारखंड और पश्चिम बंगाल के हिस्सों को कवर करता है।
    • सियालदह मंडल: 1854 में स्थापित, कोलकाता के उपनगरीय ट्रेनों का केंद्र, मुख्यालय सियालदह में।
    • मालदा मंडल: 1975 में बना, सबसे छोटा मंडल (517.64 रूट किमी), बिहार (242.37 किमी), झारखंड (152.76 किमी) और पश्चिम बंगाल (122.51 किमी) में फैला।​
  • जोन की पहुंच और महत्व
    • पूर्व रेलवे में कुल 2815 रूट किलोमीटर ट्रैक हैं, जिनमें से 2118 विद्युतीकृत हैं
    • (अक्टूबर 2019 तक)। यह जोन भारतीय रेल के विशाल नेटवर्क का हिस्सा है
    • जो 68,000 किमी से अधिक फैला है और 70 मंडलों में विभाजित 19 जोनों में संगठित है।
    • ये मंडल रेल संचालन, रखरखाव और यात्री सेवाओं का प्रबंधन करते हैं।​

7. (नवंबर, 2021 तक) संपूर्ण भारत के विभिन्न शहरों में यातायात को कम करने के लिए 'भारतमाला परियोजना' के चरण- I के तहत रिंग रोड के लिए कितने शहरों की पहचान की गई? [CGL (T-I) 27 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) 28
Solution:
  • भारत माला परियोजना सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा संचालित राजमार्ग क्षेत्र के लिए एक व्यापक कार्यक्रम है।
  • इस परियोजना के चरण-1 के तहत रिंग रोड के लिए 28 शहरों की पहचान की गई।
  • परियोजना का अवलोकन
    • भारतमाला परियोजना की घोषणा 2015 में की गई थी, और चरण-I को अक्टूबर 2017 में मंजूरी मिली, जिसमें कुल 34,800 किलोमीटर सड़कों का निर्माण लक्ष्य रखा गया
    • जिसकी अनुमानित लागत 5,35,000 करोड़ रुपये है।
    • इस चरण में आर्थिक कॉरिडोर (9,000 किमी), इंटर-कॉरिडोर एवं फीडर रूट (6,000 किमी), राष्ट्रीय कॉरिडोर दक्षिणता सुधार (5,000 किमी), सीमा एवं अंतरराष्ट्रीय संपर्क सड़कें (2,000 किमी), तटवर्ती एवं बंदरगाह संपर्क सड़कें (2,000 किमी) तथा रिंग रोड (800 किमी) शामिल हैं।
    • रिंग रोड घटक विशेष रूप से शहरी यातायात जाम को कम करने के लिए डिजाइन किया गया
    • जो शहरों के बाहरी इलाकों में ट्रैफिक को डायवर्ट करेगा।​
  • रिंग रोड के उद्देश्य और लाभ
    • इन 28 शहरों में रिंग रोड बनाने से यातायात की भीड़भाड़ में कमी आएगी, परिवहन की दक्षता बढ़ेगी तथा क्षेत्रीय संपर्क मजबूत होगा
    • जिससे अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन मिलेगा। यह परियोजना मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्कों (24 पार्क) के साथ सागरमाला परियोजना से भी जुड़ी है
    • जो बंदरगाहों एवं तटीय क्षेत्रों को रेल-रोड से जोड़ेगी। नवंबर 2021 तक, चरण-I के तहत कई प्रोजेक्ट शुरू हो चुके थे
    • हालांकि कोविड-19 तथा भूमि अधिग्रहण जैसी चुनौतियों से विलंब हुआ।​
  • प्रगति और अपडेट (2021 तक)
    • नवंबर 2021 तक, भारतमाला चरण-I के अंतर्गत 17,555 किलोमीटर सड़कों को स्वीकृति मिल चुकी थी
    • कुल 2,921 किलोमीटर का निर्माण पूर्ण हो चुका था।
    • उदाहरणस्वरूप, नासिक (महाराष्ट्र) में द्वारका सर्किल से दत्ता मंदिर चौक तक 5.9 किमी सड़क तथा मध्य प्रदेश का अटल प्रोग्रेस-वे (7,000 करोड़ रुपये लागत) को चरण-I में शामिल किया गया। मूल लक्ष्य 2021-22 तक पूरा करना था
    • लेकिन इसे 2027-28 तक बढ़ा दिया गया।​

8. भारत का सबसे बड़ा कंटेनर बंदरगाह कौन-सा है? [CGL (T-I) 26 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह
Solution:
  • जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह भारत का सबसे बड़ा कंटेनर बंदरगाह है। यह नवी मुंबई में स्थित है।
  • यह बंदरगाह कर्नाटक, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के लिए प्रमुख कार्गो हब के रूप में कार्य करता है।
  • स्थिति और परिचय
    • जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह (JNPT) भारत के पश्चिमी तट पर स्थित है और इसे Nhava Sheva के नाम से भी जाना जाता है।
    • यह नागर विमानन/समुद्री मार्गों के लिए मुख्य कंटेनर शिपिंग केंद्र है [citations: web sources about JNPT’s prominence].
    • यह बंदरगाह लगभग 1989 में चालू हुआ और आज भी पश्चिमी भारत के लिए कंटेनर यातायात का प्रमुख प्रवेश द्वार है [citations: historical/official summaries].
  • क्षमता और कार्य
    • JNPT की कंटेनर हैंडलिंग क्षमता उच्चतम मानी जाती है
    • यह देश के सबसे बड़े कंटेनर टर्मिनल के रूप में काम करता है और भारत के कुल कंटेनर यातायात का बड़ा हिस्सा संभालता है [citations: summaries of throughput and market share].
    • यह 20 फुट इक्ववलेंट यूनिट (TEU) के रूप में बड़ेもの में निर्यात-आयात के लिए एक केन्द्र के रूप में कार्य करता है
    • विशेषकर पश्चिमी क्षेत्र के उद्योगों के लिए गेटवे के रूप में [citations: throughput capacity statements].
  • तुलनात्मक संदर्भ
    • कांडला, मुंबई पोर्ट आदि भी महत्वपूर्ण बंदरगाह हैं, पर कंटेनर थ्रूपुट और समकालीन क्षमता के संदर्भ में JNPT सर्वोच्च स्थिति में मानी जाती है
    • कुछ स्रोतों में “सबसे बड़ा प्राकृतिक बंदरगाह” की बात हो सकती है
    • आधुनिक कंटेनर यातायात के संदर्भ में सबसे बड़ा कंटेनर पोर्ट के रूप में JNPT ही प्रमुख माना जाता है [citations: संदर्भात्मक लेखन].
  • रणनीतिक महत्व
    • JNPT भारत की आर्थिक लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन के लिए एक प्रमुख आधार है
    • क्योंकि यह महाराष्ट्र और नजदीकी राज्यों के लिए निर्यात-आयात मार्ग प्रदान करता है
    • संयुक्त अरब-भारतीय-यूरोपीय गलियारे जैसे वैश्विक मार्गों को जोड़ता है [citations: व्यापक व्यাখ्या].
  • हालिया विस्तार और भविष्य की योजना
    • सरकार और संबंधित प्राधिकरणों ने कई पूंजीगत योजनाओं के माध्यम से टर्मिनल विस्तार, गहराई बढ़ाने और रेलवे/रास्ता कनेक्टिविटी में सुधार की योजनाएं घोषित की हैं
    • ताकि क्षमता बढ़ सके और औद्योगिक अभियानों को सुविधा मिल सके [citations: नीति/प्रोजेक्ट विवरण].

9. निम्नलिखित में से किस परियोजना का उद्देश्य, तटवर्ती भागों से लगे हुए राज्यों की सड़कों का विकास सीमावर्ती भागों तथा छोटे बंदरगाहों को जोड़ना है? [CHSL (T-I) 10 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) भारतमाला
Solution:
  • भारतमाला परियोजना का उद्देश्य, तटवर्ती भागों से लगे हुए राज्यों की सड़कों का विकास सीमावर्ती भागों तथा छोटे बंदरगाहों को जोड़ना है।
  • प्रमुख बिंदु और संदर्भ:
    •  ताकि देश के आंतरिक हिस्सों से सीमावर्ती क्षेत्रों और तटीय क्षेत्रों के बीच दूरी कम हो सके, आवाजाही आसान हो और व्यापार-परिवहन मार्ग सुधरे।
    • यह नीति-स्तर पर “सीमांत सड़कों” और “सीमा सड़क मार्ग” जैसे कार्यक्रमों के भीतर आता है।
    • [श्रोत: सरकारी तथा शैक्षणिक/पारिवारिक संदर्भों में सीमांत क्षेत्र के सड़क विकास की चर्चा]​
    • एक विशिष्ट और प्रमुख योजना जो इस दिशा में सक्रिय रूप से चर्चा में है
    • सीमांत सड़कें/सीमा सड़क मार्ग” के अंतर्गत राज्यों की सतत तटवर्ती सड़कें और सीमाओं के पास स्थित राज्य-स्तरीय सड़क नेटवर्क का विकास, विशेषकर सीमांत क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की बहाली के लिए।
    • यह एक सामान्य संकल्पना है जो कई योजनाओं में झलकती है।​
    • साथ ही, भारत सरकार की समग्र तटीय/सीमा-सम्बन्धी परियोजनाओं के अंतर्गत सागरमाला जैसी पहलें भी तटीय क्षेत्र और बंदरगाहों के विकास को साझा करती हैं
    • जिनका लक्ष्य तटीय क्षेत्रों को आंतरिक परिवहनों से जोड़ना है
    • यह सीधे “सीमावर्ती राज्यों की सड़कें” जोड़ने की एकल उद्देश्य वाली परियोजना के समान नहीं है, बल्कि समग्र कनेक्टिविटी का हिस्सा है।​
  • संभावित उत्तर-निर्णय (विकल्प-आधारित):
    • यदि इन विकल्पों में से एक को स्पष्ट नाम देना हो, तो यह सामान्यतः “सीमा सड़क मार्ग” (Border Roads) या “सीमांत सड़कें” जैसी परियोजना-संकेत है
    • जो सीमावर्ती राज्यों की सड़क प्रणालियों को मजबूत कर सीमाओं के निकट के क्षेत्रों को देश के आंतरिक नेटवर्क से जोड़ती है।
    • यह भी संकेत मिलता है कि ऐसी योजना सीमावर्ती क्षेत्र, छोटे बंदरगाहों के साथ-साथ तटीय क्षेत्रों को जोड़ने पर केंद्रित होती है।​
    • कुछ स्रोतों में यह भी उल्लेख मिलता है कि ऐसी योजनाओं के अंतर्गत 7000 किलोमीटर से अधिक राज्य सड़कों की फाइनेंसिंग/विकास शामिल है
    • ताकि सीमावर्ती और तटीय हिस्से एकीकृत रूप से जुड़ सकें।​
  • सावधानी और स्पष्टता:
    • वास्तविक प्रश्न-परिचय के अनुसार, एक सटीक नाम पुख्ता करने के लिए विश्वसनीय स्रोत से फिर पुष्टि करना उपयुक्त होगा (जैसे भारत सरकार के राजमार्ग मंत्रालय के आधिकारिक दस्तावेज या सागरमाला/सेतु भारतम् जैसी योजनाओं के विस्तृत प्रलेखन)।
    • ऊपर दिए संदर्भ इससे संबन्धित प्रमुख विचार प्रस्तुत करते हैं
    • सही परियोजना नाम सुनिश्चित करने हेतु स्रोत-आधारित सत्यापन चाहिए।​
  • उपयोगी संदर्भ (यदि चाहें तो विश्लेषण हेतु):
    • सीमांत/सीमा सड़क मार्ग पर चर्चा और प्रासंगिक विवरण: भारत में सीमांत क्षेत्रों के सड़क-निर्माण और उनका आर्थिक-व्यापार से सम्बद्ध प्रभाव।​
    • सीमांत क्षेत्रों के विकास के लिएimientos: रणनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से सीमावर्ती राज्यों के सड़क नेटवर्क का विस्तार।​
  • सलाह:
    • यदि संभव हो, प्रश्न के साथ विकल्पों की सूची दें ताकि सही नाम का एक-ही-एक चयन किया जा सके।
    • महत्त्वपूर्ण है कि नाम को सही पहचानने के लिए आधिकारिक दस्तावेज़ या विश्वसनीय प्रशासनिक सारांश देखे जाएँ।

10. ....... भारत के चार बड़े मेट्रो शहरों दिल्ली-मुंबई-चेन्नई-कोलकाता को जोड़ता है। [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (IV-पाली), MTS (T-I) 15 जून, 2023 (III-पाली), CGL (T-I) 13 सितंबर, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) स्वर्णिम चतुर्भुज
Solution:
  • स्वर्णिम चतुर्भुज भारत के चार बड़े मेट्रो शहरों दिल्ली-मुंबई- चेन्नई-कोलकाता को जोड़ता है।
  • परियोजना का इतिहास
    • यह राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना (NHDP) का हिस्सा है और 2012 में पूरी हुई।
    • नेटवर्क मैप पर चतुर्भुज के आकार का दिखता है, इसलिए इसका नाम पड़ा।​
  • लंबाई और संरचना
    • यह नेटवर्क कुल 5,846 किलोमीटर लंबा है, जो दुनिया के सबसे लंबे राजमार्गों में से एक है।
    • इसमें चार से छह लेन वाली सड़कें शामिल हैं
    • जो चार मुख्य शहरों के अलावा अहमदाबाद, पुणे, बेंगलुरु, जयपुर, कानपुर जैसे अन्य शहरों और बंदरगाहों को जोड़ती हैं।
    • दिल्ली से शुरू होकर यह मुंबई, चेन्नई और कोलकाता तक फैला हुआ है।​
  • महत्वपूर्ण लाभ
    • स्वर्णिम चतुर्भुज ने यात्रा समय कम किया, माल ढुलाई की लागत घटाई और आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया।
    • इससे व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
    • यह भारत की सड़क कनेक्टिविटी का प्रतीक माना जाता है।​
  • अन्य संबंधित परियोजनाएं
    • यह सड़क परियोजना है, जबकि डायमंड चतुर्भुज उच्च गति रेल नेटवर्क है
    • जो समान शहरों को बुलेट ट्रेनों से जोड़ने की योजना है।
    • उत्तर-दक्षिण गलियारा श्रीनगर से कन्याकुमारी तक अलग परियोजना है।