पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी (भारत का भूगोल) (भाग-I)

Total Questions: 30

11. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत में सबसे बड़े क्षेत्र में फैले हुए वन का प्रकार है? [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन
Solution:
  • उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन भारत में सबसे बड़े क्षेत्र में फैले हुए वन के प्रकार हैं। ये वन 70-200 सेमी. वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
  • विस्तृत उत्तर:
    • अवरोधक तौर पर India में वन आवृत्ति और क्षेत्रफल के अनुसार सबसे बड़ा वन क्षेत्र उष्णकटिबंधीय पर्णपाती (टेम्परate/टेम्परेचर से गर्म) वन माना जाता है
    • यह प्रकार देश के कई राज्यों में व्यापक रूप से फैला है
    • विशेषकर छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार, झारखंड, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, 그리고 तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में प्रमुखता से मिलता है.​
    • यह प्रकार सामान्यतः गर्म और आर्द्र जलवायु वाले क्षेत्रों में उगते हैं
    • वर्षा के बड़े-बड़े वर्षा-चक्र के कारण घने, घुम्बद-आकार वाले जंगल बनाते हैं
    • इनमें कुछ क्षेत्र में सतत वर्षा के साथ द्रुत वृद्धि वाले पौधों की विविधता भी नजर आती है.​
    • भारतीय वन प्रकारों में उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन के साथ कुछ अन्य प्रमुख प्रकार भी हैं
    • जैसे उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन, मैंग्रोव आदि, पर क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे बड़ा हिस्सा उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन का है.​
  • एक स्पष्ट तुलना (संक्षेप में):
    • सबसे बड़े क्षेत्र वाले भारतीय वन प्रकार: उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन
    • इसके प्रमुख क्षेत्र: मध्य-पूर्वी और दक्षिणी भारत के कई राज्यों में विस्तृत
    • अन्य प्रमुख वन प्रकार (कुल मिलाकर): उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन, मैंग्रोव वन, पर्वतीय वन आदि, पर क्षेत्रफल में पर्णपाती का क्षेत्रफल सबसे बड़ा है​
    • वन प्रकारों के क्षेत्रफल और राज्यों के आधार पर अद्यतन आँकड़े समय के साथ बदल सकते हैं
    • हाल के सरकारी/शैक्षणिक स्रोतों से नवीनतम आँकड़े देखना उपयोगी होगा (जैसे वन आच्छादन वार्षिक रिपोर्ट्स).​

12. निम्नलिखित में से किस एक प्रकार की वनस्पति हिमालय क्षेत्र में पाई जाती है? [CHSL (T-I) 14 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (a) अल्पाइन
Solution:
  • अल्पाइन प्रकार की वनस्पति हिमालय क्षेत्र में पाई जाती है। प्रायः 3600 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर अल्पाइन वन पाए जाते हैं।
  • सिल्वर फर, जूनिपर, पाइन तथा बर्च इन वनों के मुख्य वृक्ष हैं।
  • ऊँचाई के आधार पर प्राकृतिक आवास विभाजन
    • उपोष्णकटिबंधीय से समशीतोष्ण पर्णपाती और मिश्रित दालान: यह स्तर हिमालय के निचले से मध्य भागों में दिखाई देता है
    • जहाँ साल, शीशम, ओक, बर्ग आदि पेड़ मिलते हैं। तापमान और वर्षा के अनुसार यह क्षेत्र विविध पौधों का घर है [संदर्भ 1].
    • समशीतोष्ण से अल्पाइन पर्वतीय क्षेत्र: उच्च elevations पर पौधों की विशेषता कम झाड़ीदार, गहराई से घनी बर्फपात के अनुकूल जड़ें वाले पौधे और सदाबहार वृक्ष मिलते हैं
    • जैसे देवदार, फिर, पाइन और birch। यहाँ की घनी घास-घासनी और फूल-पुष्प भी प्रचुर मात्रा में होते हैं [संदर्भ 2].
  • प्रमुख पेड़-पौधे (क्षेत्रीय विविधता के साथ)
    • देवदार (Cedrus spp.) और चीड़ (Pinus spp.): ऊँचाई पर मुख्य वृक्ष, मजबूत लकड़ी और ठंडी जलवायु में ढाल के रूप में निभाते हैं [संदर्भ 3].
    • बिर्च (Betula spp.) और ओक (Quercus spp.): उच्च ऊँचाई के नीचे और कुछ निचले क्षेत्रों में मिलते हैं; बर्फ पड़ी परिस्थितियों में भी लचीला रहते हैं [संदर्भ 3].
    • अन्य महत्त्वपूर्ण समूह: रोडोडेंड्रोन, एलबस (alnus), एपीलैनेट जैसे छोटे पेड़-पौधे और नम, गीले क्षेत्रों में मार्ग-यंत्र इंसानों के साथ सहजीवी पौधे भी पाये जाते हैं [संदर्भ 1].
  • आवासी जलवायु के अनुसार विविधता
    • गर्म (較 गरम) और आर्द्र धाराएँ: नीचे के इलाकों में सस्ते जलवायु और व्यापक वर्षा से घने साल-शीशम-ओक-बीच वन बनते हैं।
    • यहाँ जीव-जंतुओं के लिए संतुलित आवास मिलते हैं [संदर्भ 1].
    • ठंडी और शुष्क ऊँचे क्षेत्र: उच्च हिमाकारी में घास-फूस और छोटी झाड़ियाँ प्रमुख हो जाती हैं
    • कुछ जगहों पर अफ़ग़ान-रोडोडेंड्रॉन जैसे फूलदार झाड़ भी दिखते हैं [संदर्भ 2].
  • आकृति और संरचना
    • विविध आयु-स्तर के पेड-फर्न-घास का मिश्रण, जहां बृहत्तर वृक्षों के नीचे छोटे पौधे, घास और डेंड्राइट प्रजातियाँ उगती हैं।
    • अल्पाइन क्षेत्रों में घनी पत्तेदार-जंगल कम और दानवाकारी स्पेस के साथ, सुपारी-पर्यावरण के अनुरूप पौधों का छोटा आकार होता है
    • ताकि ऊँचाई वाले ठंडे मौसम में पानी की कमी न हो [संदर्भ 2].
    • हिमालय की वनस्पति क्षेत्र-विशेष है और ऊँचाई के अनुसार बदलती रहती है
    • पूरी सघनता के साथ समझने के लिए स्थानीय जलवायु, वर्षा-चक्र, और ऊँचाई का विश्लेषण जरूरी है [संदर्भ 3].
    • हिमालयी क्षेत्र के अध्ययन के लिए समकालीन जैव-विविधता सर्वे, वन आच्छादन डेटा और क्षेत्रीय वन ब्लॉग/शिक्षण स्रोतों की नवीनतम जानकारी देखकर अल्पाइन-वृक्षावली की सटीक पहचान बेहतर रहती है [संदर्भ 1].

13. निम्नलिखित में से हिमालय के गिरिपद पर पाया जाने वाला वन कौन-सा है? [CHSL (T-I) 9 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) पर्णपाती
Solution:
  • हिमालय के गिरिपद पर पाया जाने वाला वन पर्णपाती है।
  • परिचय
    • गिरिपद हिमालय के तलहटी क्षेत्र में स्थित ऊँचाई के हिसाब से विविध वन प्रणाली देता है।
    • गिरिपद क्षेत्र में जो वनों की पहली कविता-सी संरचना बनती है, उसे अक्सर पर्णपाती (deciduous) वनों के रूप में पहचाना जाता है
    • क्योंकि ये पेड़ मौसम के अनुसार अपने पत्ते गिरा लेते हैं।
    • यह विवरण हिमालय के तलहटी की तराई-डुआर (terai-duar) और घास-भूमियों के साथ जुड़ता है.​
  • पर्णपाती वन की मुख्य विशेषताएँ
    • तापमानीय विविधता के साथ वर्षा का स्तर थोड़ा-बहुधा मध्यम होता है, जिससे पेड़ पत्ते गिराकर सूखे और ठंडे मौसम से बचते हैं।
    • इस प्रकार के वन हिमालय के तराई क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर मिलते हैं.​
    • इनमें मौसमी बहुविधता के बावजूद जीव-जंतु विविधता अधिक रहती है
    • क्योंकि पर्णपाती वनों में हरित पर्णों के वर्षा-आहार और शाखाओं के बीच कई प्रजातियाँ एक दूसरे के साथ सह-अस्तित्व बनाती हैं.​
  • अन्य संबंधित वन प्रकार (तुलनात्मक संदर्भ)
    • समशीतोष्ण वनों (temperate forests) भी हिमालयीय क्षेत्र में पाए जाते हैं
    • लेकिन गिरिपद क्षेत्र की मुख्य पहचान पर्णपाती तराई-वन के रूप में मानी जाती है.​
    • ऊँचाई बढ़ने पर पर्वतीय शंकुधारी वन और अल्पाइन वन आते हैं
    • गिरिपद के परिप्रेक्ष्य में मुख्य वन प्रकार पर्णपाती तराई-वृक्षावली ही है.​
  • उपयुक्त पेड़-प्रजातियाँ (संभावित)
    • क्लासिक पर्णपाती वन समुदायों में उच्च-उच्च ओक, बर्च आदि पर्णपाती प्रजातियाँ सम्मिलित हो सकती हैं
    • हिमालयी तलहटी में पर्णपाती वन अक्सर मिश्रित-वन संरचना बनाते हैं और इनमें स्थानीय जलवायु के अनुसार विविध पेड़ मिलते हैं.​
  • निष्कर्ष
    • हिमालय के गिरिपद पर पाया जाने वाला वन प्रकार मुख्यतः पर्णपाती तराई-दुआर/तराई-वन है
    • जो तापमान और वर्षा के विशिष्ट संयोजन में विकसित होता है।
    • यह क्षेत्रीय जैव विविधता के लिए महत्त्वपूर्ण है और बारीकी से अन्य तपशीलों के साथ मिलकर क्षेत्र के पर्यावरण-प्रणालियों को आकार देता है.​

14. भारत में ताड़, नारियल, केवड़ा, ऐंगार निम्नलिखित में से किस वन में सामान्यतः पाए जाने वाले वृक्ष हैं? [CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) मैंग्रोव वन
Solution:
  • भारत में ताड़, नारियल, केवड़ा, ऐगार मैंग्रोव वन क्षेत्र के अंतर्गत पाए जाने वाले वृक्ष हैं।
  • ये वनस्पतियां तटवर्ती क्षेत्रों में, जहां ज्वार-भाटा आते हैं, की सबसे महत्वपूर्ण वनस्पति है।
  • गंगा, ब्रह्मपुत्र, महानदी, गोदावरी, कृष्णा तथा कावेरी नदियों के डेल्टा भाग में यह वनस्पति मिलती है।
  • मैंग्रोव वनों की विशेषताएँ
    • मैंग्रोव वन नमकीन पानी और कीचड़ भरी मिट्टी वाले तटीय डेल्टा क्षेत्रों में उगते हैं
    • जहाँ जड़ें पानी में डूबी रहती हैं। गंगा-ब्रह्मपुत्र, महानदी, कृष्णा, गोदावरी और कावेरी डेल्टा इनके प्रमुख उदाहरण हैं।
    • इन वनों में सुंदरी के पेड़ प्रमुख होते हैं, जो कठोर लकड़ी देते हैं
    • साथ ही ताड़, नारियल, केवड़ा और अगर भी डेल्टा के कुछ हिस्सों में उगते हैं।​
  • इन वृक्षों का महत्व
    • ताड़ और नारियल इन वनों को स्थिरता प्रदान करते हैं
    • जबकि केवड़ा सुगंधित होता है और अगर कीमती लकड़ी के लिए जाना जाता है।
    • ये वृक्ष मिट्टी कटाव रोकते हैं और जैव विविधता बनाए रखते हैं।
    • रॉयल बंगाल टाइगर, मगरमच्छ, कछुए और साँप जैसे जीव इनका हिस्सा हैं।​
  • अन्य वनों से तुलना
    • उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन पश्चिमी घाट और अंडमान में भारी वर्षा वाले क्षेत्रों तक सीमित हैं
    • जहाँ ऊँचे पेड़ (60 मीटर तक) बहुस्तरीय संरचना बनाते हैं।
    • उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन (मानसून वन) 70-200 सेमी वर्षा वाले बड़े हिस्सों में फैले हैं
    • शुष्क मौसम में पत्ते गिराते हैं। कांटेदार वन शुष्क क्षेत्रों में होते हैं, लेकिन ये चारों वृक्ष मैंग्रोव के विशिष्ट हैं।​

15. भारत में किस प्रकार के वन के वृक्ष शुष्क ग्रीष्मकाल में लगभग छः से आठ सप्ताह तक अपनी पत्तियां गिराते हैं? [CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन
Solution:
  • उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन शुष्क ग्रीष्मकाल में लगभग छः से आठ सप्ताह तक अपनी पत्तियां गिराते हैं।
  • इन्हें मानसूनी वन भी कहते हैं और ये उन क्षेत्रों में विस्तृत हैं जहां 70 सेमी. से 200 सेमी. तक वर्षा होती है।
  • वनों का वितरण और जलवायु
    • ये वन उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहां वार्षिक वर्षा 70 से 200 सेमी तक होती है
    • जैसे उत्तर-पूर्वी राज्य, हिमालय की तलहटी, पश्चिमी घाट के पूर्वी ढलान, ओडिशा और मध्य भारत।
    • शुष्क ग्रीष्म में पेड़ पानी की कमी से बचने के लिए पत्तियां गिरा देते हैं, जिससे वन नंगे दिखाई देते हैं।
    • नम पर्णपाती वनों में 100-200 सेमी वर्षा वाले इलाके प्रमुख हैं, जबकि शुष्क पर्णपाती में 70-100 सेमी वर्षा होती है।​
  • प्रमुख वृक्ष प्रजातियां
    • इन वनों में साल, सागौन, शीशम, महुआ, तेंदू, पलास, अमलतास, खैर, बेल और नीम जैसे वृक्ष प्रमुख हैं।
    • प्रत्येक प्रजाति का पत्ता गिरने का समय थोड़ा अलग होता है
    • लेकिन समग्र रूप से ग्रीष्म में छह-अष्ट सप्ताह की अवधि में वन पर्णरहित हो जाते हैं।
    • ये चौड़ी पत्ती वाले पर्णपाती वृक्ष होते हैं जो वर्षा ऋतु में फिर से हरे-भरे हो जाते हैं।​
  • अन्य वनों से अंतर
    • उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों में पत्तियां कभी पूरी तरह नहीं गिरतीं
    • क्योंकि वहां भारी वर्षा (200 सेमी से अधिक) होती है। कांटेदार वनों में शुष्कता अधिक होती है
    • (50 सेमी से कम वर्षा), लेकिन पत्तियां इतनी व्यवस्थित रूप से नहीं गिरतीं।
    • मैंग्रोव तटीय होते हैं और पर्णपाती विशेषता नहीं रखते।​

16. कंटीले वन तथा झाड़ियां भारत के किन भागों में पाए जाते हैं? [MTS (T-I) 11 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) उत्तरी-पश्चिमी
Solution:
  • उष्णकटिबंधीय कंटीले वन भारत के उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहां वर्षा 70 सेमी. से कम होती है।
  • इन वनों में प्राकृतिक वनस्पति के रूप में कंटीले वन, झाड़ियां एवं कई प्रकार की घासें पाई जाती हैं।
  • ये वन मुख्यतः भारत के उत्तर-पश्चिमी भागों में पाए जाते हैं।
  • प्रमुख क्षेत्र
    • ये वन गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में फैले हुए हैं।
    • राजस्थान के थार मरुस्थल और गुजरात के रण ऑफ कच्छ जैसे स्थानों पर ये घने रूप में दिखाई देते हैं।
    • इन क्षेत्रों में कम वर्षा के कारण पेड़ कम ऊंचाई वाले और कंटीले होते हैं।​​
  • विशेषताएं
    • कंटीले वनों में बबूल, कैक्टस, यूफोर्बिया, खेजड़ी और खजूर जैसी प्रजातियां प्रमुख हैं, जिनकी जड़ें गहरी होती हैं
    • ताकि कम पानी में जीवित रह सकें।
    • पेड़ों के तने मोटे और गूदेदार होते हैं जो जल संरक्षण में मदद करते है
    • पत्तियां छोटी या कंटीली होती हैं।
    • ये वन मिट्टी के कटाव को रोकने और जैव विविधता बनाए रखने में महत्वपूर्ण हैं।​
  • अन्य विस्तार
    • कुछ स्रोतों के अनुसार, ये काली मिट्टी वाले क्षेत्रों जैसे उत्तर, पश्चिम, मध्य और दक्षिण भारत के हिस्सों में भी पाए जाते हैं
    • लेकिन मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिमी भाग ही इनका केंद्र हैं।
    • 50 सेंटीमीटर से कम वर्षा वाले क्षेत्रों में ये अधिक शुष्क रूप धारण कर लेते हैं।​

17. किस जीवमंडल को 2009 में भारत के 16वें जैव आरक्षित क्षेत्र के रूप में घोषित किया गया था, जो रेड फॉक्स (Red Fox), ब्लू रॉक पिजन (Blue Rock Pigeon) और लेमर्जियर (Lammergeier) के संरक्षण के लिए विख्यात है? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) कोल्ड डेजर्ट
Solution:
  • कोल्ड डेजर्ट (शीत मरुस्थल) जीवमंडल को वर्ष 2009 में भारत के 16वें जैव आरक्षित क्षेत्र के रूप में घोषित किया गया था।
  • यह 'मरुस्थल' हिमालय में स्थित है।
  • इसका विस्तार लद्दाख से लेकर हिमाचल प्रदेश तक है।
  •  शिमलीपाल ओडिशा में 1994 से जैव संरक्षित क्षेत्र के रूप में माना गया था और 2009 में यूनेस्को की जैव मंडल सूची में नहीं था
  • 2009 में घोषित 16वां जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र सूची में अंशतः अंकीय विभाजन के कारण भ्रम होता है।
  • अधिक विश्वसनीय जानकारी के लिए आप आधिकारिक सूची देखें: भारत के जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र (Biosphere Reserves) की पूर्ण सूची में 2009 में एक नया क्षेत्र जोड़ा गया था
  • यह स्रोत-विशिष्ट तालिका पर निर्भर करता है।
  • [यहाँ एक से अधिक विश्वसनीय स्रोतों में 2009 के समय पर सूचीभेद रहता है]​
  • जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र (Biosphere Reserves) एक बहुउद्देश्यीय संरक्षण क्षेत्र है
  • जिसमें पर्यावरण, जैव विविधता और अनुसंधान के लिए क्षेत्र होता है
  • भारत में कुल 18 जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र हैं
  • जिनमें से कई को यूनेस्को ने जैव मंडल नेटवर्क में शामिल किया है.​
  • 2009 में भारत में कुछ क्षेत्रों को यूनेस्को की सूची में स्थान मिला, पर 16वां किस क्षेत्र के रूप में मान्यता किस स्रोत के अनुसार आयी, स्पष्टता के लिए आधिकारिक विकिपीडिया/सरकारी पन्ने एक जैसे नहीं हैं; छात्र-उपयोग के लिए यह पड़ताल आवश्यक है.​
  • यदि चाहें, इस प्रश्न का सटीक, स्रोत-उद्धृत उत्तर पाने के लिए मैं निम्न तरीकों से मदद कर सकता हूँ:
    • 2009 के समय की आधिकारिक USB/CSIR.geog.gov.in या MoEF&CC (भारत सरकार) के जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र की सूचियाँ निकालना और उसकी क्रम संख्या के अनुसार 16वां कौन था, यह स्पष्ट करना [citation needed].
    • यूनेस्को जैव मंडल नेटवर्क की भारत में सूची का क्रॉस-चेक करना ताकि कौन सा क्षेत्र 2009 में 16वां माना गया, वह स्पष्ट हो सके [citation needed].

18. किस बायोस्फीयर रिजर्व में सबसे बड़ा लुप्तप्राय समुद्री स्तनपायी डुगोंग अर्थात् ड्यूगोंग और समुद्री कछुए भी पाए जाते हैं? [CGL (T-I) 25 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) मन्नार की खाड़ी बायोस्फीयर रिजर्व
Solution:
  • मन्नार की खाड़ी बायोस्फीयर रिजर्व लुप्तप्राय समुद्री स्तनपायी डुगोंग अर्थात् ड्यूगोंग और समुद्री कछुओं की विभिन्न प्रजातियों की सबसे बड़ी आबादी का घर है।
  • यह रिजर्व भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित है।
  • बायोस्फीयर रिजर्व का अवलोकन
    • जो लगभग 10,500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है।
    • यह क्षेत्र समुद्री घास के मैदानों, प्रवाल भित्तियों और मैंग्रोव वनों से समृद्ध है
    • जो डुगोंग के प्रमुख भोजन स्रोत समुद्री घास प्रदान करते हैं।
    • यहां डुगोंग की सबसे बड़ी आबादी निवास करती है
    • साथ ही ओलिव रिडले, हरे समुद्री कछुए और अन्य प्रजातियां भी पाई जाती हैं।​
  • डुगोंग की विशेषताएं और महत्व
    • डुगोंग (Dugong dugon) दुनिया का एकमात्र पूरी तरह समुद्री शाकाहारी स्तनपायी है
    • जिसे "समुद्री गाय" कहा जाता है। यह IUCN रेड लिस्ट में संकटग्रस्त (Vulnerable) श्रेणी में है
    • मुख्य रूप से उथले तटीय जल में समुद्री घास पर निर्भर रहता है।
    • मन्नार की खाड़ी में इसकी बड़ी आबादी होने के कारण यह रिजर्व वैश्विक संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है
    • जहां यह प्रवाल भित्तियों और मछली प्रजातियों के पारिस्थितिक संतुलन में योगदान देता है।​
  • समुद्री कछुओं का निवास
    • इस रिजर्व में चार प्रजातियों के समुद्री कछुए पाए जाते हैं, जिनमें ओलिव रिडले (Lepidochelys olivacea) सबसे प्रमुख है
    • जो यहां घोंसला बनाते हैं। ये कछुए समुद्री घास और प्रवालों पर निर्भर हैं, जो डुगोंग के समान आवास साझा करते हैं।
    • रिजर्व प्रबंधन इनकी सुरक्षा के लिए निगरानी और संरक्षण प्रयास करता है।​
  • संरक्षण चुनौतियां और प्रयास
    • डुगोंग और कछुओं को मछली पकड़ने के जाल, आवास विनाश और प्रदूषण से खतरा है।
    • भारत सरकार ने यहां डुगोंग संरक्षण रिजर्व स्थापित किया है, साथ ही समुद्री कछुआ कार्य योजना लागू की है।
    • स्थानीय मछुआरों को जागरूकता और वैकल्पिक आजीविका प्रदान की जा रही है।

19. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत का एक जैवमंडल संरक्षित क्षेत्र (biosphere reserve) नहीं है? [MTS (T-I) 20 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) गिर वन
Solution:
  • गिर वन भारत के जैवमंडल संरक्षित क्षेत्र के अंतर्गत नहीं आता है।
  • गिर राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य भारत के गुजरात राज्य में स्थित है।
  • पहला भाग: क्या यह प्रश्न क्या पूछ रहा है
    • उद्देश्य: दिए गए विकल्पों में से वह बायोस्फीयर रिज़र्व (biosphere reserve) जो भारत का नहीं है, उसे पहचाना जाए।
    • इतिहास/पर्यावरणीय संदर्भ: भारत में 18 आधिकारिक जैवमंडल रिज़र्व हैं, जिनमें प्रमुख उदाहरण नोकरेक, मानस, सुंदरवन, मन्नार की खाड़ी, बड़ा निकोबार, नंदा देवी, पंचमढ़ी, कच्छ, शिशेचालम, पन्ना आदि शामिल हैं।
    • इनमें से कुछ क्षेत्र पूर्व-स्वीकृतियों के अनुसार 1980s से 2010s तक घोषित हुए हैं.​
    • महत्वपूर्ण नोट: फूलों की घाटी (Foolon ki Ghati) एक राष्ट्रीय उद्यान है, न कि जैवमंडल रिज़र्व; इसे जैवमंडल रिज़र्व के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है
    • इसलिए यह आमतौर पर इस प्रकार के प्रश्न में गलत विकल्प माना जाता है.​
  • दूसरा भाग: आम तौर पर पूछे जाने वाले विकल्पों पर स्पष्टता
    • नोकरेक (Nokrek), मानस (Manas), सुंदरवन (Sundarbans), मन्नार की खाड़ी (Mannar / Gulf of Mannar), बड़ा निकोबार (Great Nicobar), नंदा देवी (Nanda Devi) आदि—ये सभी भारत के जैवमंडल रिज़र्व हैं (आधिकारिक सूची में क्रमशः 1988–2013 के बीच घोषित).​
    • फूलों की घाटी (Valley of Flowers) को जैवमंडल रिज़र्व के रूप में संयुक्त राष्ट्र के “Man and Biosphere Programme” के अंतर्गत सूचीबद्ध नहीं किया गया है
    • यह वास्तव में एक राष्ट्रीय उद्यान है, और यह एक स्वतंत्र biosphere reserve के रूप में नहीं है.​
  • तीसरा भाग: नीति/स्रोत संदर्भ
    • भारत के biosphere reserves की अद्यतन सूची में 18 रिज़र्व शामिल हैं; इन्हें следованы: नोकरेक (Meghalaya, 1988), मानस (Assam, 1989), सुंदरवन (West Bengal, 1989), मन्नार की खाड़ी (Tamil Nadu, 1989), बड़ा निकोबार (Andaman and Nicobar Islands, 1989), नंदा देवी (Uttarakhand, 2004), पंचमढ़ी (Madhya Pradesh, 1999/2009-घोषणा स्वरूप), कच्छ (Gujarat, 2008), पन्ना (Madhya Pradesh, 2011/2020), अलंकारिक others जैसे अगस्त्यमलाई (Kerala), सिमलीपाल (Odisha) आदि—यह सूची 1980s से 2020s तक विस्तृत है.​
    • फूलों की घाटी केवल एक राष्ट्रीय उद्यान है, और इसे biosphere reserve के रूप में दर्ज नहीं किया गया है
    • इस कारण इसे आमतौर पर इस प्रकार के प्रश्न में गलत विकल्प माना जाएगा.​
  • छोटे-छोटे निष्कर्ष (कन्क्रिट फैक्ट्स)
    • भारत का जैवमंडल रिज़र्व नहीं होने वाला विकल्प: फूलों की घाटी (Foolons ki Ghati / Flowers Valley).​
    • भारत के 18 biosphere reserves में से कोई भी उत्तरदायित्व के अनुसार वही क्षेत्र नहीं है
    • जो फूलों की घाटी के बराबर आता हो, क्योंकि फूलों की घाटी एक राष्ट्रीय उद्यान है
    • जबकि biosphere reserves की वैश्विक मान्यता के अनुसार एक बहु-परिसर संरक्षित क्षेत्र है.​
  • यदि चाहें, इन स्रोतों से आप एक-एक विकल्प के लिए त्वरित तथ्य-उद्धरण बना सकते हैं:
    • संख्यात्मक सूची और घोषित वर्ष: नोकरेक, मानस, सुंदरवन, मन्नार की खाड़ी, बड़ा निकोबार, सिमिलीपाल, पंचमढ़ी, कच्छ, पन्ना, अगस्त्यमलाई, कंचनजंगा, नंदा देवी, आदि—ये सभी biosphere reserves हैं.​
    • फूलों की घाटी: राष्ट्रीय उद्यान, biosphere reserve नहीं.

20. भारत में महोगनी (Mahogany), रोज़वुड (Rosewood) और सिनकोना (Cinchona) के पेड़ किस प्रकार के वनों में पाए जाते हैं? [MTS (T-I) 05 सितंबर, 2023 (II-पाली), CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन
Solution:
  • उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों के मुख्य वृक्ष सिनकोना, रबड़, महोगनी, एबोनी (आबनूस), नारियल, बांस तथा आयरनवुड हैं।
  • ये वन भारत के अत्यधिक आर्द्र तथा उष्ण भागों में मिलते हैं।
  • इन क्षेत्रों में औसत वार्षिक वर्षा 200 सेमी. से अधिक तथा सापेक्ष आर्द्रता 70 प्रतिशत से अधिक होती है।
  • वन प्रकार का विवरण
    • ये वन उच्च वर्षा (200 सेमी से अधिक) वाले क्षेत्रों में विकसित होते हैं, जहाँ तापमान गर्म और नमीपूर्ण रहता है।
    • पेड़ों की ऊँचाई 60 मीटर तक पहुँच सकती है, और पत्तियाँ पूरे वर्ष हरी रहती हैं क्योंकि कोई निश्चित शुष्क मौसम नहीं होता।
    • इन वनों में बहु-स्तरीय संरचना होती है—ऊपरी स्तर पर ऊँचे पेड़, मध्य में झाड़ियाँ और निचले स्तर पर लताएँ।​
  • इन पेड़ों की विशेषताएँ
    • महोगनी (Mahogany): कठोर लकड़ी वाला व्यावसायिक पेड़, जिसकी लकड़ी फर्नीचर और जहाज निर्माण में उपयोगी।
    • यह सदाबहार प्रकृति का है और तेज़ी से बढ़ता है।
    • रोज़वुड (Rosewood): सुगंधित और मजबूत लकड़ी के लिए प्रसिद्ध, मुख्यतः निर्यात होता है।
    • इसके पेड़ घने छायादार क्षेत्रों में फलते-फूलते हैं।
    • सिनकोना (Cinchona): क्विनाइन औषधि का स्रोत, मलेरिया 치료 में महत्वपूर्ण।
    • यह मूल रूप से दक्षिण अमेरिका का है लेकिन भारत के नम क्षेत्रों में रोपा गया।​
  • भारत में वितरण क्षेत्र
    • ये वन पश्चिमी घाट (केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र), पूर्वी हिमालय (असम, अरुणाचल प्रदेश), अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह और लक्षद्वीप में प्रमुख हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, पश्चिमी घाट के वर्षा छाया वाले भागों में ये प्रचुर मात्रा में उगते हैं
    • जबकि मानसूनी वनों (जैसे साल-सागौन वाले) में ये कम पाए जाते हैं।​