पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी (भारत का भूगोल) (भाग-II)

Total Questions: 30

21. अजैविक के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा दावा गलत है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) वे पारिस्थितिकी तंत्र के जीवित घटक हैं
Solution:
  • पारिस्थितिकी तंत्र में जैविक और अजैविक दोनों घटक होते हैं।
  • अजैविक कारक जैसे-पानी, मिट्टी और वायु एक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्जीव घटक हैं।
  • मुख्य निष्कर्ष
    • अजैविक घटक वह निर्जीव हिस्सा है जो जीवित प्रणालियों के जीवन, विकास, पुनरुत्पादन आदि को प्रभावित करते हैं
    • ये जीवन के बिना बनाए जाते हैं और जैविक घटकों पर निर्भर नहीं होते हैं। गलत दावे ऐसे होते हैं
    • जो अजैविक घटकों को जीवित तत्व समझते हैं
    • उनके बारे में जीवन के साथ स्थायित्व/आचरण के कारण भ्रम पैदा करते हैं।
  • अजैविक घटक से संबंधित स्पष्ट परिभाषा
    • अजैविक घटक: निर्जीव (non-living) तत्व जिनमें सूर्य का प्रकाश, तापमान, जल, हवा, मिट्टी आदि शामिल हैं
    • ये जीवन नहीं होते पर पारिस्थितिकी व्यवस्था के कामकाज, ऊर्जा प्रवाह और पदार्थों के चक्रण को संचालित/प्रभावित करते हैं ।​
    • जैविक घटक के विपरीत, अजैविक घटक जैविक जीवन के अस्तित्व के लिए सीधे जीवित शरीर नहीं होते, पर ये उनके अस्तित्व और वितरण को निर्धारित करते हैं (जैसे जल संसाधन, मिट्टी की संरचना, तापमान आदि) ।​
  • निम्न दावों में से कौन-सा गलत है? (आमतौर पर पूछे जाने वाले दावों और उनके सत्यापन)
    • दावे: अजैविक घटक में सूर्य का प्रकाश, तापमान, जल आदि आते हैं—यह सत्य है
    • इन्हें निर्जीव environmental factors कहा जाता है ।​
    • दावे: अजैविक घटक जीवित संरचना को बदलते हैं और उनके व्यवहार को सीधे नियंत्रित करते हैं
    • यह थोड़ा भ्रमित करने वाला है; सही व्याख्या यह है कि अजैविक घटक पर्यावरण के निर्जीव रासायनिक/भौतिक भाग होते हैं
    • जो जीवित जीवन के विकास, रखरखाव और प्रजनन को प्रभावित करते हैं, पर वे स्वयं जीवित नहीं होते ।​
    • दावे: अजैवगण (abiotic) घटक_GEN_ARCH_ के रूप में बजाय निर्जीव पदार्थों के on-the-ground व्यवहार को प्रभावित करते हैं
    • यह बिलकुल सही है और व्यापक रूप से स्वीकारी जाती है ।​

22. निम्नलिखित में से कौन उत्पादक से लेकर मांसाहारी तक की खाद्य श्रृंखला का गठन करता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) छोटे पौधे! कीड़े! मछली! पक्षियों! टाइगर्स
Solution:
  • आहार श्रृंखला (खाद्य श्रृंखला) का प्रत्येक चरण अथवा कड़ी एक पोषी स्तर बनाते हैं।
  • स्वपोषी अथवा उत्पादक प्रथम पोषी स्तर हैं तथा सौर ऊर्जा का स्थिरीकरण करके उसे विषमपोषियों अथवा उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध कराते हैं।
  • शाकाहारी अथवा प्राथमिक उपभोक्ता द्वितीय पोषी स्तर, छोटे मांसाहारी अथवा द्वितीयक उपभोक्ता तीसरे पोषी स्तर तथा बड़े मांसाहारी अथवा तृतीयक उपभोक्ता चौथे पोषी स्तर का निर्माण करते हैं।
  • प्रश्नगत विकल्पों में खाद्य श्रृंखला का सही अनुक्रम इस प्रकार है-छोटे पौधे ! कीड़े ! मछली ! पक्षियों! टाइगर्स।
  • परिभाषा
    • खाद्य श्रृंखला (food chain) वह क्रम है जिसमें एक जीव भोजन के रूप में दूसरे जीव को खाता है
    • ऊर्जा/आहार तत्व एक दिशा में प्रवाहित होते हैं। सामान्यतः यह सूर्य से ऊर्जा प्राप्त करने वाले उत्पादकों से शुरू होता है
    • उच्च trophic levels तक बढ़ता है, जिसमें हर चरण को पोषी स्तर (trophic level) कहा जाता है।​
  • प्रमुख स्तर
    • उत्पादक (primary producers): हरे पौधे या शैवाल जो प्रकाश संश्लेषण से अपना भोजन बनाते हैं
    • ऊर्जा का प्रवेश स्रोत सूर्य है। उदाहरण: घास, अल्गा, पौधे प्लवक आदि।​
    • प्राथमिक उपभोक्ता (primary consumers): शाकाहारी जीव जो उत्पादकों को खाते हैं
    • उदाहरण: बकरी, खरगोश, हिरण, लोम आदि।​
    • द्वितीयक उपभोक्ता (secondary consumers): छोटे मांसाहारी या carnivores जो प्राथमिक उपभोक्ताओं को खाते हैं
    • उदाहरण: मिड-स्तर के पक्षी या छोटे शिकारी जीव।​
    • तृतीयक उपभोक्ता (tertiary consumers): बड़े मांसाहारी जो द्वितीयक उपभोक्ताओं को खाते हैं
    • उदाहरण: बड़े शिकारी जैसे सियार, बाज, शहत, आदि।​
  • धारा और जाल
    • ऊर्जा के प्रवाह की दिशा एक ही रहती है—उत्पादन से उपभोक्ताओं के ऊपरी स्तर तक।
    • कई पारिस्थितिक तंत्रों में एक खाद्य श्रृंखला कई अन्य खाद्य श्रृंखलाओं से मिलकर खाद्य जाल बनाती है
    • इससे यह स्पष्ट होता है कि वास्तविक जीवन में आहार नेटवर्क जटिल होता है, केवल एक सरल श्रृंखला से नहीं।​
  • सामान्य उदाहरण
    • चराई खाद्य श्रृंखला (Grazing chain) का उदाहरण: घास → हिरण → बाज/चील (या घास → बकरी → मानव)। यह दिखाता है
    • ऊर्जा कैसे उत्पादन से शुरू होकर उच्च trophic levels तक जाती है।​
  • गलत या स्पष्ट गलत समझ
    • अक्सर प्रश्न में कहा जाता है कि “घास, बकरी और मानव” एक खाद्य श्रृंखला बनाते हैं
    • यह सही है क्योंकि यह एक स्पष्ट, आदर्श खाद्य श्रृंखला है
    • जो उत्पादक-प्राथमिक उपभोक्ता-मानव के स्तर को दर्शाती है।​
  • क्यों यह संरचना महत्त्वपूर्ण है
    • यह बताती है कि ऊर्जा का प्रवाह कैसे होता है
    • किस स्तर पर ऊर्जा खो जाती है (जैसे respiration, heat loss)।
    • यह पारिस्थितिक संतुलन, मध्यम स्तर के उपभोक्ताओं के प्रकार और यदि ऊर्जा का प्रवाह बाधित हो तो मौसम/आहार श्रृंखला पर प्रभाव क्या हो सकता है
    • इन सभी के आकलन में खाद्य श्रृंखला एक मौलिक मॉडल है।​
    • डिस्कस करते समय ध्यान दें कि वास्तविक पारिस्थितिकी में एक से अधिक खाद्य श्रृंखलाओं का मेल भोजन जाल बनाता है
    • कुछ प्रजातियाँ एक से अधिक प्रकार के खाद्य स्रोतों पर निर्भर हो सकती हैं।​

23. पीड़कनाशकों, कीटनाशकों और अकार्बनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग मानव स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है। ऐसा किस परिघटना के कारण है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) जैव-आवर्धन
Solution:
  • विभिन्न फसलों को रोग एवं पीड़कों से बचाने के लिए पीड़कनाशक, कीटनाशक तथा अकार्बनिक रसायनों का प्रयोग किया जाता है।
  • ये रसायन बह कर मिट्टी में अथवा जल स्रोत में चले जाते हैं।
  • मिट्टी से इन पदार्थों का पौधों द्वारा जल एवं खनिजों के साथ-साथ अवशोषण हो जाता है
  • जलाशयों से यह जलीय पौधों एवं जंतुओं में प्रवेश कर जाते हैं।
  • ये पदार्थ जैव निम्नीकृत हैं, यह प्रत्येक पोषी स्तर पर उत्तरोत्तर संगृहीत होते जाते हैं।
  • क्योंकि किसी भी आहार-श्रृंखला में मनुष्य शीर्षस्थ है
  • अतः हमारे शरीर में यह रसायन सर्वाधिक मात्रा में संचित हो जाते हैं। इसे जैव आवर्धन कहते हैं।
  • परिभाषा
    • खाद्य श्रृंखला (food chain) वह क्रम है जिसमें एक जीव भोजन के रूप में दूसरे जीव को खाता है
    • ऊर्जा/आहार तत्व एक दिशा में प्रवाहित होते हैं। सामान्यतः यह सूर्य से ऊर्जा प्राप्त करने वाले उत्पादकों से शुरू होता है
    • उच्च trophic levels तक बढ़ता है
    • जिसमें हर चरण को पोषी स्तर (trophic level) कहा जाता है।​
  • प्रमुख स्तर
    • उत्पादक (primary producers): हरे पौधे या शैवाल जो प्रकाश संश्लेषण से अपना भोजन बनाते हैं
    • ऊर्जा का प्रवेश स्रोत सूर्य है। उदाहरण: घास, अल्गा, पौधे प्लवक आदि।​
    • प्राथमिक उपभोक्ता (primary consumers): शाकाहारी जीव जो उत्पादकों को खाते हैं
    • उदाहरण: बकरी, खरगोश, हिरण, लोम आदि।​
    • द्वितीयक उपभोक्ता (secondary consumers): छोटे मांसाहारी या carnivores जो प्राथमिक उपभोक्ताओं को खाते हैं
    • उदाहरण: मिड-स्तर के पक्षी या छोटे शिकारी जीव।​
    • तृतीयक उपभोक्ता (tertiary consumers): बड़े मांसाहारी जो द्वितीयक उपभोक्ताओं को खाते हैं
    • उदाहरण: बड़े शिकारी जैसे सियार, बाज, शहत, आदि।​
  • धारा और जाल
    • ऊर्जा के प्रवाह की दिशा एक ही रहती है—उत्पादन से उपभोक्ताओं के ऊपरी स्तर तक।
    • कई पारिस्थितिक तंत्रों में एक खाद्य श्रृंखला कई अन्य खाद्य श्रृंखलाओं से मिलकर खाद्य जाल बनाती है
    • इससे यह स्पष्ट होता है कि वास्तविक जीवन में आहार नेटवर्क जटिल होता है, केवल एक सरल श्रृंखला से नहीं।​
  • सामान्य उदाहरण
    • चराई खाद्य श्रृंखला (Grazing chain) का उदाहरण: घास → हिरण → बाज/चील (या घास → बकरी → मानव)। यह दिखाता है
    • ऊर्जा कैसे उत्पादन से शुरू होकर उच्च trophic levels तक जाती है।​
  • गलत या स्पष्ट गलत समझ
    • अक्सर प्रश्न में कहा जाता है कि “घास, बकरी और मानव” एक खाद्य श्रृंखला बनाते हैं
    • यह सही है क्योंकि यह एक स्पष्ट, आदर्श खाद्य श्रृंखला है
    • जो उत्पादक-प्राथमिक उपभोक्ता-मानव के स्तर को दर्शाती है।​
  • क्यों यह संरचना महत्त्वपूर्ण है
    • यह बताती है कि ऊर्जा का प्रवाह कैसे होता है और किस स्तर पर ऊर्जा खो जाती है (जैसे respiration, heat loss)।
    • यह पारिस्थितिक संतुलन, मध्यम स्तर के उपभोक्ताओं के प्रकार और यदि ऊर्जा का प्रवाह बाधित हो तो मौसम/आहार श्रृंखला पर प्रभाव क्या हो सकता है
    • इन सभी के आकलन में खाद्य श्रृंखला एक मौलिक मॉडल है।​
    • डिस्कस करते समय ध्यान दें कि वास्तविक पारिस्थितिकी में एक से अधिक खाद्य श्रृंखलाओं का मेल भोजन जाल बनाता है
    • कुछ प्रजातियाँ एक से अधिक प्रकार के खाद्य स्रोतों पर निर्भर हो सकती हैं।​

24. ग्रीन हाउस गैसों का सही समूह चुनें। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) CH₄, N₂O, CO₂, O₃
Solution:
  • ग्रीन हाउस गैसों का सही समूह इस प्रकार है-CH, N₂O, CO₂, O,।
  • ग्रीन हाउस गैसें पृथ्वी के वातावरण या जलवायु में परिवर्तन और अंततः भूमंडलीय ऊष्मीकरण के लिए उत्तरदायी होते हैं।
  • मुख्य ग्रीन हाउस गैसों का समूह
    • कार्बन डाइऑक्साइड (CO2): सबसे प्रमुख प्राकृतिक और मानव-जनित स्रोतों से उत्सर्जन होता है
    • यह पृथ्वी के ऊष्मा अवशोषण में बड़ा योगदान देता है।
    • मीथेन (CH4): कृषि (जैव अपघटन, गाडियाँ, चिपचिपे स्थान), ऊर्जा क्षेत्र और प्राकृतिक स्रोतों से निकलता है
    • प्रभाव समय के साथ CO2 से अधिक ऊष्मा अवशोषित करने की क्षमता रखता है।
    • नाइट्रस ऑक्साइड (N2O): कृषि उर्वरक और औद्योगिक प्रक्रियाओं से निकल सकता है
    • ग्रीनहाउस प्रभाव में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
    • जल वाष्प (H2O): वातावरण का सबसे अधिक मात्रा में पाया जाने वाला ग्रीनहाउस गैस है
    • यह प्राकृतिक चक्र से नियंत्रित होता है और अन्य गैसों के प्रभाव को बढ़ाने/घटाने में भूमिका निभाता है।
    • क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) और अन्य ह्यूमिड-प्लान्ट गैसें: ट्रेस स्तर पर होती हैं
    • ओज़ोन परत और ऊष्मा अवशोषण पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती हैं।
    • ओज़ोन (O3) (ट्रोपोस्फेरिक ओज़ोन): सतही ओज़ोन ऊष्मा कब्जे में योगदान दे सकता है
    • जबकि स्ट्रैटोस्पेस ओज़ोन पृथ्वी की ऊष्मा संतुलन को अलग तरह से प्रभावित करता है।
  • गंभीरता और समय-परिप्रेक्ष्य
    • CO2 सबसे लंबे समय तक वातावरण में रहते हुए दीर्घकालिक ऊष्मा आकर्षण बनाये रखता है
    • इसलिए इसे प्राथमिक ग्रीनहाउस गैस माना جاتا है।
    • CH4 की ताकत CO2 से कुछ दशकों तक अधिक हो सकती है, पर इसका जीवनकाल CO2 से कम है।
    • H2O प्राकृतिक चक्र से नियंत्रित होता है; मानव क्रियाओं द्वारा सीधे जल वाष्प के स्तर में स्थायी बदलाव कम होता है
    • लेकिन अन्य गैसों के परिवर्तन जल वाष्प के वातावरणीय अंश को प्रभावित करते हैं।
  • इनके अलावा गहरे शोध से जुड़े कुछ गैसों के समूह भी ग्रीनहाउस गैस की सूची में आते हैं
    • फटाफट बदलाव में HFCs, PFCs, SF6 जैसे फ्रेटेड गैसें (synthesized fluorinated greenhouse gases)
    • ये अक्सर उद्योग में उपयोग होते हैं और मजबूत अवशोषण क्षमताओं के कारण ऊष्मा बनाए रखते हैं।
    • ओजोन (O3) और कुछ अन्य प्राकृतिक या मानव-निर्मित गैसें भी ग्रीनहाउस प्रभाव में योगदान कर सकती हैं, खासकर स्थानिक स्तरों पर।
  • संक्षेप में
    • सही समूह CO2, CH4, N2O, H2O, O3, CFCs और अन्य फ्यूरेशन गैसों का सम्मिलन है
    • जल वाष्प सबसे अधिक मात्रा में मौजूद ग्रीनहाउस गैस है और CO2 सबसे प्रमुख मानव-संरक्षित योगदान देती गैस है ।​
  • अधिक तकनीकी विवरण के लिए नीचे दिए गए प्रमुख बिंदुओं को देखें:
    • CO2: औद्योगिक क्रिया, ऊर्जा उत्पादन, परिवहन आदि से उत्सर्जन; दीर्घकालिक ऊष्मा अवशोषण ।​
    • CH4: कृषि, अपशिष्ट प्रबंधन, जीवित पदार्थों के अपघटन आदि से उत्सर्जन; उच्च ग्लोबल वार्मिंग पोटेंशियल (GWP) के साथ kısa-कालिक प्रभाव ।​
    • N2O: उर्वरक और صنعتی प्रक्रियाओं से उत्सर्जन; ग्रीनहाउस प्रभाव में मजबूत योगदान ।​
    • H2O: प्राकृतिक चक्रीयरण, अन्य गैसों के प्रभाव से जल वाष्प का स्तर बदला सकता है; सबसे अधिक मात्रा में गैस ।​

25. पारिस्थितिक अनुक्रम के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा से कथन सत्य है/हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

कथन 1 : यह किसी दिए गए क्षेत्र के जातीय संघटन में क्रमिक और स्पष्ट पूर्वानुमेय परिवर्तन है।

कथन 2 : यह पारिस्थितिकी संरक्षण की विधि है।

Correct Answer: (d) केवल कथन 1 सत्य है
Solution:
  • लंबी अवधि में समय के साथ किसी पारिस्थितिक समुदाय के प्रजातीय संरचना का क्रमशः बदल जाना पारिस्थितिक अनुक्रम कहलाता है।
  • यह किसी दिए गए क्षेत्र के जाति संघटन में क्रमिक और स्पष्ट पूर्वानुमेय परिवर्तन है।
  • अनुक्रमण के दौरान कुछ प्रजातियां एक क्षेत्र में नयी बस्ती बसा लेती हैं
  • इनकी जनसंख्या अनगिनत हो जाती है, जबकि दूसरी प्रजातियों की संख्या घटती चली जाती है
  • यहां तक कि अदृश्य हो जाती है। यह पारिस्थितिकी संरक्षण की विधि नहीं है
  • परिभाषा और विशेषताएं
    • पारिस्थितिक अनुक्रम को उस क्रमिक परिवर्तन के रूप में परिभाषित किया जाता है
    • जिसमें एक क्षेत्र में प्रजातियों और निवास का मिश्रण समय के साथ बदलता है
    • अंततः चरम समुदाय (climax community) की स्थापना होती है जो पर्यावरण से संतुलित रहता है।
    • यह प्रक्रिया गतिशील होती है और इसमें मूल अन्वेषक (pioneer) प्रजातियां पहले आती हैं
    • जो मिट्टी निर्माण और पर्यावरण संशोधन करती हैं।
    • चरम समुदाय स्थायी होता है जब तक कोई बाहरी हस्तक्षेप न हो।​
  • प्रकार
    • प्राथमिक अनुक्रमण: बंजर या नंगे क्षेत्रों (जैसे नई चट्टानें, लावा प्रवाह) पर शुरू होता है
    • जहां कोई मिट्टी या जीव नहीं होते; इसमें न्यूडेशन, आक्रमण, प्रतिस्पर्धा, प्रतिक्रिया और स्थायीकरण जैसे चरण होते हैं।​
    • द्वितीयक अनुक्रमण: पहले मौजूद समुदाय के विनाश (जैसे आग, बाढ़) के बाद होता है
    • जहां मिट्टी पहले से उपलब्ध होती है, इसलिए तेजी से आगे बढ़ता है।​
  • प्रक्रिया के चरण
    • अनुक्रमण सामान्यतः निम्न चरणों से गुजरता है:
    • न्यूडेशन: बंजर क्षेत्र का निर्माण।
    • आक्रमण: मूल अन्वेषक प्रजातियों (लाइकेन, शैवाल) का प्रवेश।
    • प्रतिस्पर्धा और सहक्रिया: प्रजातियों के बीच संघर्ष, जहां अनुकूलित प्रजातियां जीवित रहती हैं।
    • प्रतिक्रिया: समुदाय पर्यावरण को बदलते हैं, जिससे नई प्रजातियां आती हैं।
    • स्थायीकरण: चरम समुदाय की स्थापना।​
  • उदाहरण
    • शुष्कारम्भी (xerarch) अनुक्रमण नंगी चट्टानों पर लाइकेन से शुरू होकर ब्रायोफाइट, शाक, झाड़ी और अंत में वन तक पहुंचता है।
    • जलारम्भी (hydrosere) तालाबों में प्लवक शैवाल से रीड स्वाम्प, सेजमीडो और वन तक विकसित होता है।
    • ये उदाहरण दर्शाते हैं कि अनुक्रमण पर्यावरण को स्थिर बनाता है।​

26. पादपप्लवक (फाइटोप्लांकटन) ....... होते हैं। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) तालाब पारिस्थितिकी तंत्र में उत्पादक
Solution:
  • एक तालाब उथले पानी वाला एक जल निकाय है, जिसमें एक पारितंत्र के सभी मूलभूत घटक बेहतर ढंग से प्रदर्शित होते हैं।
  • पानी एक अजैविक घटक है, जिसमें कार्बनिक एवं अकार्बनिक तत्व तथा प्रचुर मृदा निक्षेप तालाब की तली में जमा होते हैं।
  • सौर निवेश, ताप का चक्र, दिन की अवधि तथा अन्य जलवायुवीय परिस्थितियां संपूर्ण तालाब की क्रियाशीलता की दर को नियमित करते हैं।
  • स्वपोषी घटक जैसे पादपप्लवक, कुछ शैवाल आदि एवं निमग्न तथा किनारों पर सीमांत पादप तालाब के किनारों पर पाए जाते हैं।
  • अतः पादपप्लवक तालाब पारिस्थितिक तंत्र में उत्पादक होते हैं
  • क्या हैं पादपप्लवक
    • परिभाषा: पादपप्लवक वे सूक्ष्म प्लवक जीव होते हैं जो पानी में स्वतंत्र रूप से तैरते रहते हैं
    • प्रकाश संश्लेषण के द्वारा अपना भोजन स्वतः निर्माण कर लेते हैं। यह नाम ग्रीक भाषा से है
    • "फाइटो" मतलब पौधे और "प्लांक्टन" मतलब तैरना/आवारा।​
    • प्रकार्य: वे जल पर्यावरण के प्राथमिक उत्पादक (primary producers) होते हैं
    • अर्थात वे सूर्य की रोशनी से ऊर्जा लेते हुए जैविक पदार्थ बनाते हैं
    • संपूर्ण जल खाद्य जाल का आधार बनते हैं।​
  • मुख्य गुण और भूमिका
    • प्रकाश संश्लेषण: फाइटोप्लांकटन प्रकाश संश्लेषण द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड से ऑर्गैनिक पदार्थ बनाते हैं
    • ऑक्सीजन मुक्त करते हैं, जिसके कारण वे वातावरण-जल दोनों में गैस संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं।​
    • जैविक संरचना: इनकी संरचना विविध होती है—कुछ समूहों में डायटम्स जैसी सिलसिलेवार ढाँचें भी रहते हैं
    • अन्य समूहों में हरित शालजीव आदि शामिल होते हैं; ये सभी मिलकर जलाशयों के जैविक कार्बन चक्र और खाद्य चक्र को संचालित करते हैं।​
    • खाद्य जाल का आधार: वे छोटे मछलियाँ, ज़ूब्लांकटन आदि के लिए भोजन का प्रमुख स्रोत होते हैं
    • बड़े पौधे-चक्र के भीतर वे पहले पायदान पर आते हैं और फिर शिकारियों के लिए पोषण सुनिश्चित करते हैं।​
  • प्रमुख प्रकार एवं उप-वर्ग
    • दो मुख्य प्रकार: फाइटोप्लांकटन के भीतर अलग-अलग समूह होते हैं
    • हरित शालजीव (ग्रीन algae), डायटम्स (फायाटो प्लेट्स), सायनोबैक्टीरिया आदि
    • जिनमें प्रकाश संश्लेषण की क्षमता होती है। इनके आकार और रासायनिक संरचना में विविधता मिलती है।​
    • वितरण: ये जल की सतह पर विशेषकर सूर्य के प्रकाश तक पहुँच वाले क्षेत्र में पाये जाते हैं
    • प्रकाश उपलब्धता के अनुसार इनकी वृद्धि तथा वितरण नियंत्रित होती है।​
  • महत्वपूर्ण बातें
    • जलवायु और कार्बन चक्र: पादपप्लवक कार्बन डाइऑक्साइड को जैविक यौगिकों में परिवर्तित कर वे ग्रह के कार्बन चक्र में योगदान देते हैं
    • ऑक्सीजन का विशिष्ट भाग पैदा करते हैं—यह पृथ्वी पर जीवन के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।​
    • HABs (हैज़र्ड शैवाल ब्लूम्स): पोषक तत्वों (नाइट्रेट, phosphates) की अप्रत्याशित वृद्धि से फाइटोप्लांकटन का अत्यधिक विकास हो सकता है
    • जिसे HABs कहा जाता है; HABs मछलियाँ और अन्य जीवों के लिए विषाक्त हो सकता है
    • पारिस्थितिकी तंत्र पर दबाव डाल सकता है।​
    • पर्यावरणीय प्रभाव: औद्योगिक प्रदूषण के कारण जल-स्तर में कुछ तत्वों की मात्रा बढ़ने से फाइटोप्लांकटन वृद्धि प्रभावित हो सकती है
    • समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के लिए नए जोखिम पैदा होते हैं।​
  • समझने में आसान तुलना (संक्षेप)
    • भूमिका: प्राथमिक उत्पादक बनाते हैं और खाद्य जाल का आधार बनते हैं; अन्य जीव उनके ऊपर निर्भर होते हैं।
    • उन्नत प्रभाव: ऑक्सीजन उत्पादन और जल-कार्बन संतुलन में योगदान, HABs के कारण जोखिम भी पैदा होते हैं।
    • वितरण: प्रकाश के उपलब्ध क्षेत्रों में होते हैं, विशेषकर सतही जल में।

27. एक तालाब पारिस्थितिकी तंत्र में पहले पोषी स्तर में ....... शामिल होता है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 3 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) पादप प्लवक
Solution:
  • एक तालाब पारिस्थितिकी तंत्र में पहले पोषी स्तर में पादप प्लवक शामिल होते हैं।
  • पादप प्लवक समुदाय के स्वपोषी घटक हैं। तालाब पारिस्थितिकी तंत्र का एक प्रमुख हिस्सा है। अतः विकल्प (b) सही उत्तर होगा।
  • पहले पोषी स्तर क्या होते हैं
    • पोषी स्तर या trophic level वह क्रम है जिसमें ऊर्जा से चलने वाले जीव एक दूसरे के ऊपर-नीचे रहते हैं
    • ऊर्जा प्रवाह अधिकतम सूर्य-प्रकाश से शुरू होकर उत्पादकों से उपभोक्ताओं तक जाता है।
    • तालाब जैसे जल-तंत्र में इसे अक्सर “प्रोड्यूकर्स” स्तर कहा जाता है। [उच्च-स्तरीय जैविक सिद्धांत]
  • तालाब में पहले पोषी स्तर के मुख्य घटक
    • फाइटोप्लांकटन: यह जल में रहने वाले फोटोसिंथेसिस करने वाले सूक्ष्म पौधे हैं
    • जो सूर्य-ऊर्जा को रसायनिक ऊर्जा में बदलते हैं और तालाब के सभी अन्य जीवों के लिए основ ऊर्जा स्रोत बनाते हैं।
    • इसलिए तालाब के पहले पोषी स्तर की प्रमुख भागीदारी फाइटोप्लांकटन है। [उत्पादन-स्तर का स्रोत: फाइटोप्लांकटन]
  • उपयुक्त उदाहरण और स्पष्टता
    • कुछ तालाबों में बैक्टीरिया या सूक्ष्म जीव भी थोड़ा-बहुत प्रकाश संश्लेषण करते हैं
    • लेकिन वे मुख्यतः decomposers या प्राथमिक उपभोक्ताओं के रूप में भूमिका निभाते हैं
    • उत्पादन का प्रधान स्रोत फाइटोप्लांकटन ही रहता है। [तालाब-आधारित शिक्षा स्रोत]
  • क्यों महत्त्वपूर्ण है
    • फोटोसिंथेसिस के कारण ऊर्जा स्थिर रहती है और अन्य स्तरों (प्राथमिक उपभोक्ता, द्वितीयक उपभोक्ता, आदि) के लिए खाद्य श्रृंखला की शुरुआत होती है।
    • अगर उत्पादन घटेगा तो पूरे खाद्य जाल पर प्रभाव पड़ेगा। [ऊर्जा प्रवाह का सामान्य नियम]

28. निम्नलिखित में से कौन-से समूह में, पारिस्थितिक तंत्र के केवल अजैविक तत्व शामिल होते हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 3 दिसंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) मृदा, खनिज पदार्थ, पवन और वर्षा
Solution:
  • एक पारिस्थितिकी तंत्र वह तंत्र है, जहां जीवित जीवों का एक समुदाय अपने पर्यावरण के निर्जीव के साथ मिलकर रहता है।
  • मृदा, खनिज पदार्थ, पवन और वर्षा अजैविक तत्व के अंतर्गत आते हैं।
  • अजैविक बनाम जैविक संरचना
    • जैविक घटक: प्लांट्स, जानवर, सूक्ष्मजीव आदि जीवित या дег्रेडेशन से बने पदार्थ भी शामिल होते हैं।
    • अजैविक घटक: निर्जीव भौतिक-रासायनिक घटक, जो जैविक घटक के साथ पारिस्थितिकी तंत्र को संचालित करते हैं।
    • [जैविक एवं अजैविक घटक पारिस्थितिकी तंत्र के मूल दो भाग हैं]​
  • अजैविक समूह की पहचान कैसे करें
    • यदि समूह में केवल निर्जीव तत्व हों, जैसे जल, हवा, मृदा, प्रकाश, तापमान, पोषक तत्व आदि, तो वह समूह अजैविक होगा।
    • पर्यावरण के परिप्रेक्ष्य में अजैविक घटक पारिस्थितिकी तंत्र की संरचना और प्रक्रिया को आकार देते हैं
    • जैसे पोषक तत्व चक्रण, जलवायु-आधारित वितरण आदि। [जैविक-अजैविक विभाजन का सामान्य ज्ञान]​
  • बहुविध उदाहरण
    • अजैविक घटक समूह के कुछ स्पष्ट उदाहरण: जल (H2O), वायुमंडलीय गैसें (O2, CO2 आदि), प्रकाशनीय ऊर्जा, तापमान, ऋतुएँ, मिट्टी की संरचना, pH और खनिज पोषक तत्व, वर्षा और जल प्रवाह। [नीति/शिक्षा स्रोतों के सामान्य विवरण]​
    • इन अजैविक घटकों के कारण जैविक घटक कैसे प्रभावित होते हैं
    • यह पारिस्थितिक तंत्र के कार्य-प्रवाह (ऊर्जा प्रवाह, पोषक तत्व चक्र) को संचालित करता है। [जैविक-अजैविक अंतःक्रिया]​
  • आम गलतफहमी से बचना
    • “पारिस्थितिक तंत्र के घटक कौन से हैं?” जैसे प्रश्न में अक्सर कहा जाता है कि अजैविक घटक वे तत्व हैं
    • जो निर्जीव हैं; यह जैविक घटकों (पौधे, जानवर, माइक्रोऑर्गनिज्म आदि) से भिन्न है। [मानक शिक्षण-स्तर विवरण]​
    • अजैविक घटक अकेले पारिस्थितिकी तंत्र नहीं बनाते; वे जैविक घटकों के साथ मिलकर तंत्र बनाते हैं। [दो घटक वाली परिभाषा]​
  • यदि चाहें, इस विषय को और स्पष्ट करने हेतु:
    • एक छोटे-से प्रश्न-पत्र के साथ अजैविक घटकों के हर प्रकार के उदाहरण दिए जा सकते हैं।
    • जैविक और अजैविक घटकों के बीच ऊर्जा-सम्बन्ध (ऊर्जा प्रवाह) और पोषक तत्व चक्र (कार्बन/नाइट्रोजन चक्र) के प्रमुख चरण भी देखे जा सकते हैं।

29. निम्नलिखित विकल्पों में से कौन-सा/से शस्यभूमि पारिस्थितिकी तंत्र के संबंध में सही है/हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 14 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

कथन 1. शस्यभूमि एक मानव निर्मित पारिस्थितिकी तंत्र है।

कथन 2. शस्यभूमि पारिस्थितिकी तंत्र में बहुत कम आनुवांशिक विविधता पाई जाती है।

Correct Answer: (c) कथन 1 और 2 दोनों सही हैं
Solution:
  • शस्यभूमि एक मानव निर्मित पारिस्थितिकी तंत्र है। इस पारिस्थितिकी तंत्र में बहुत कम आनुवांशिक विविधता पाई जाती है। अतः विकल्प (b) सही उत्तर होगा।
  • परिचय
    • शस्यभूमि, जिसका अर्थ है अभ्यासित या कृषिगत भूमि जिसमें फसलें उगाई जाती हैं
    • पारिस्थितिकी के एक विशिष्ट प्रकार का कार्य बताती है।
    • यह तंत्र प्राकृतिक जैव-एजेंटों और अजैव घटकों के इंटरैक्शन से निर्मित होता है, और मानवीय गतिविधियों से भी संचालित हो सकता है।​
  • संरचना और घटक
    • पारिस्थितिकी तंत्र में जैविक घटक (पादप, जीव-जंतु, माइक्रोऑर्गैनिज्म) और अजैविक घटक (जल, मिट्टी, तापमान, प्रकाश, खनिज) सम्मिलित होते हैं।
    • शस्यभूमि में इनका अंतःक्रिया भोजन जाल, पोषक तत्व चक्र, और ऊर्जा प्रवाह को संचालित करता है।​
  • ऊर्जा प्रवाह और पोषक चक्र
    • सूर्य ऊर्जा प्रवाह के साथ जलवायु और मिट्टी के घटक मिलकर उत्पादक (पादप) से उपभोक्ता और अपरदहारी तक ऊर्जा और पोषक तत्वों के चक्र को चलाते हैं।​
  • जैव विविधता और संरचना
    • शस्यभूमि की जैव विविधता (कौन सी फसलें, कौन से खर-पतवार और सहजीवी जीव) संरचना को निर्धारित करती है
    • उत्पादकता, रोग-प्रबंधन, और स्थायित्व में भूमिका निभाती है। कम अनुवांशिक विविधता अक्सर स्थायित्व कम कर सकती है
    • जबकि विविध विविध फसल-घनत्व ऊर्जा चक्र को संतुलित करते हैं।​
  • मानव क्रिया का प्रभाव
    • कृषि पद्धतियाँ, जल-नियोजन, मिट्टी के स्वास्थ्य का प्रबंधन, रसायन उर्वरक का उपयोग, और संरक्षण-खेत की तकनीकें शस्यभूमि के पारिस्थितिकी को सुनियंत्रित करती हैं।
    • कुछ कथनों के अनुसार शस्यभूमि कृत्रिम या मानव-निर्मित हिस्से बन सकते हैं
    • परन्तु प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्रों जैसी खुली ऊर्जा-आपूर्ति और पोषक-चक्र के महत्व को भी बनाए रखते हैं।​​
  • कथन 1: शस्यभूमि एक मानव निर्मित पारिस्थिकी तंत्र है।
    • यह अक्सर हाइब्रिड रूप में होता है: कुछ भाग मानव-निर्मित, कुछ भाग प्राकृतिक प्रक्रियाओं पर निर्भर। पूर्ण रूप से प्राकृतिक नहीं कहा जा सकता, परंतु यह एक पारिस्थितिक तंत्र है
    • जिसमें मानव क्रिया महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
    • इसलिए “मानव निर्मित” विभागकता केवल आंशिक रूप से सही हो सकती है
    • परन्तु यह सत्य नहीं कि यह पूरी तरह कृत्रिम है।
    • संपूर्ण कथन जटिल है और मामला-पर-परिदृश्य भिन्न हो सकता है।​​
  • कथन 2: शस्यभूमि पारिस्थिकी तंत्र में बहुत कम अनुवांशिक विविधता पाई जाती है।
    • सामान्यतः शस्यभूमि में खास फसल-द्रव्य और खर-पतवार की चयनित प्रजातियाँ होती हैं
    • जिससे अनुवांशिक विविधता सीमित हो सकती है, परन्तु यह कहना कि “बहुत कम” अनुवांशिक विविधता हमेशा होती है
    • यह सभी स्थितियों पर लागू नहीं है; कुछ systemen में सहजीवी प्रजातियाँ और खर-पतवार भी विविधता बढ़ाते हैं।
    • अतः यह कथन अक्सर गलत या आंशिक रूप से गलत माना जा सकता है।​
  • साक्ष्य-आधार निष्कर्ष
    • सामान्य शिक्षा-संदेश के अनुसार शस्यभूमि पारिस्थितिकी तंत्र में जैविक और अजैविक घटक, ऊर्जा प्रवाह, पोषक चक्र, और मानव क्रियाओं का संयुक्त प्रभाव रहता है।
    • इसलिए, उपरोक्त दोनों कथनों का पूर्ण सत्यापन स्थिति-विशेष पर निर्भर है
    • परन्तु उपलब्ध स्रोतों के अनुसार कथन 1 और 2 दोनों अक्सर असत्य/आंशिक सत्य माने जाते हैं।​

30. निम्नलिखित में से किसे हरित क्रांति द्वारा प्रतिस्थापित किया गया था? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 14 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) जैविक खाद का प्रयोग
Solution:
  • हरित क्रांति के फलस्वरूप भारत में सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए उच्च उत्पादक बीजों का प्रयोग प्रारंभ हुआ।
  • इसके अतिरिक्त सिंचाई के लिए भूजल का इस्तेमाल तथा उर्वरकों के अधिक प्रयोग पर भी विशेष बल दिया गया।
  • इसके तहत पारंपरिक जैविक खाद के स्थान पर अकार्बनिक खाद के प्रयोग को बढ़ावा दिया गया, जिससे खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि किया जा सके।
  • उत्पादन-केन्द्रित परिवर्तन
    • HYV बीज और उन्नत खेती: उच्च उपज देने वाली बीज किस्मों की शुरूआत से वार्षिक उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि संभव हो सकी, जिससे निश्चित तौर पर उत्पादन-गुणांक बढ़ा।
    • यह परिवर्तन पारंपरिक बीज (स्थानीय/उच्च-जोखिम भरे) की जगह अधिक नियंत्रित और पूर्वानुमान योग्य फसल उत्पादन की दिशा में गया.​
    • बढ़ी हुई सिंचाई और जल-व्यवस्था: बड़े बांध, नहरें और पानी की पंरपरा ने वर्षा-आधारित कृषि को सिंचित कृषि में बदला, जिससे पानी-निर्भर फसलों में स्थिरता और उत्पादकता बढ़ी.​
    • उर्वरक-आधारित पोषण: उच्च मात्रा में उर्वरकों के प्रयोग से पौधों के पौष्टिक तत्वों की उपलब्धता बढ़ी, जिससे फसलों की उपज में वृद्धि संभव हुई.​
    • कीटनाशक और खरपतवारनाशी: रोग-कीट और खरपतवार नियंत्रण हेतु रसायनों के उपयोग से क्षति घटी और थ्रेसहोल्ड उपज बढ़ी.​
  • आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन
    • किसान आय और पूंजीनिष्ठ खेती: इन आधुनिक इनपुट्स के कारण बड़े किसानों ने लाभ देखा, जिससे पूंजी-आधारित खेती (capitalist farming) बढ़ी और ग्रामीण आय-स्तर में परिवर्तन आया.​
    • बफर स्टॉक्स और खाद्यान्न सुरक्षा: उत्पादन वृद्धि के साथ अनाज के सुरक्षित भंडार बनाए गए, जो विपरीत मौसम या आपदा के समय सुरक्षा का स्रोत बने.​
    • छोटे किसानों पर प्रभाव: अवसर बढ़े, परंतु पूरक प्रभावों में असमानता भी दिखी
    • कुछ किसानों को आधुनिक उपकरणों और इनपुट्स तक बेहतर पहुँच मिली, जबकि छोटे किसान marginalized हो गए या भूमि-स्वामित्व के बदलाव से प्रभावित हुए (समाज-आर्थिक पहलुओं पर संतुलन).​
  • निष्कर्ष
    • हरित क्रांति ने पारंपरिक कृषि को प्रतिस्थापित करते हुए इनपुट-भारी, उच्च-उत्पादन-केंद्रित मॉडल को प्राथमिकता दी, जो देश की खाद्यान्न आत्मनिर्भरता और आपदा-पूर्व सुरक्षा के लिए pivotal माना गया।
    • जबकि लाभों में उत्पादन-उन्नति और ग्रामीण आय-स्तर में सुधार रहा, साथ ही सामाजिक-आर्थिक असमानताएं और पर्यावरणीय दबाव भी पैदा हुए
    • जिनका विस्तृत आकलन नीति-निर्माताओं के लिए निरंतर आवश्यक रहा.​