पादप कार्यिकी (जीव विज्ञान)Total Questions: 191. यीस्ट में जनन ....... की प्रक्रिया से होता है। [CHSL (T-I) 20 मार्च, 2023 (IV-पाली)](a) बीजाणु गठन(b) मुकुलन(c) निषेचन(d) खंडनCorrect Answer: (b) मुकुलनSolution:यीस्ट में जनन मुकुलन (Budding) की प्रक्रिया से होता है।इस प्रक्रिया में कोशिका से बाह्य वृद्धि होकर एक या एक से अधिक छोटी रचनाएं बन जाती हैंकेंद्रक सूत्री विभाजन (Mitosis) द्वारा विभाजित होकर दो भागों में बंट जाता है।मुकुलन प्रक्रिया काफी तेज होती है, जिसके कारण यीस्ट कोशिकाओं की श्रृंखला सी बन जाती हैजिसे आभासी कवक जाल (Pseudomycelium) कहते हैं।मुकुलन प्रक्रिया के चरणअंत में, मुकुल एक संकीर्ण स्थान (neck) से जनक से अलग हो जाता हैस्वतंत्र नई यीस्ट कोशिका बन जाता है, जो आगे बढ़कर परिपक्व हो जाती है।विशेषताएँ और लाभमुकुलन प्रोफ़ेज़ (प्रजनन अवस्था) में तेज़ी से होता हैखासकर गर्म, नम और पोषक तत्वों से भरपूर वातावरण में। कभी-कभी नई मुकुल से ही नये मुकुल निकल आते हैंजिससे मुकुलों की श्रृंखला (pseudohyphae) बन जाती है।यह विधि यीस्ट को द्रुत रूप से वृद्धि करने में मदद करती है, जैसे ब्रेड या बीयर बनाने में।लैंगिक जनन की संभावनाहालांकि मुकुलन मुख्य विधि है, प्रतिकूल परिस्थितियों में यीस्ट लैंगिक जनन भी कर सकता हैजिसमें ऐस्कोस्पोर (ascospores) बनते हैं। लेकिन सामान्यतः अलैंगिक मुकुलन ही प्राथमिक प्रक्रिया रहती है।2. निम्नलिखित में से कौन-सा पौधों में प्रजनन का अलैंगिक रूप नहीं है? [CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (I-पाली)](a) कायिक प्रवर्धन(b) मुकुलन(c) परागण(d) बीजाणु निर्माणCorrect Answer: (c) परागणSolution:अलैंगिक जनन की क्रिया में पौधे प्रायः अपने समान अर्थात जनक (Parent) के एकदम समान उत्पन्न करती हैंइसलिए अलैंगिक जनन को एकल जीव जनन कहते हैं। अलैंगिक जनन की प्रमुख विधियां निम्नलिखित हैंकायिक प्रवर्धन, मुकुलन, बीजाणु निर्माण, कलिका, पुनरुद्भवन आदि।परागण लैंगिक जनन का भाग है, जिसमें परागकणों के परागकोश (Anther) से वर्तिकाग्र (Stigma) तक पहुंचने की क्रिया को परागण (Pollination) कहते हैं।अलैंगिक प्रजनन के मुख्य प्रकारपौधों में अलैंगिक प्रजनन के प्रमुख रूप वानस्पतिक प्रवर्धन, बीजाणु निर्माण, मुकुलन, विखंडन, पुनर्जनन और एपोमिक्सिस हैं।वानस्पतिक प्रवर्धन: जड़, तना या पत्ती के भागों से नए पौधे उगते हैंजैसे आलू के कंद, ब्रायोफिलम की पत्ती या गन्ने का प्रकंद।बीजाणु निर्माण: फ़र्न और मॉस जैसे पौधों में स्पोर बनते हैं जो बिना निषेचन के नए पौधे विकसित करते हैं।मुकुलन और विखंडन: कुछ सरल पौधों में शरीर का भाग अलग होकर या उभार बनाकर प्रजनन होता है।एपोमिक्सिस और पार्थेनोजेनेसिस: बीज बिना निषेचन के बनते हैं, जैसे कुछ घासों में।यौन प्रजनन से अंतरयौन प्रजनन में परागण और निषेचन आवश्यक होता हैजिसमें नर और मादा गैमेट्स का संलयन होता है, जिससे आनुवंशिक विविधता आती है।अलैंगिक प्रजनन में ऐसा कोई संलयन नहीं होता, इसलिए यह यौन प्रक्रिया का हिस्सा नहीं माना जाता।प्रश्न का उत्तरप्रश्न में विकल्प स्पष्ट नहीं दिए गए हैंलेकिन सामान्यतः ऐसे प्रश्नों में "परागण" अलैंगिक प्रजनन का रूप नहीं होताक्योंकि यह यौन प्रजनन की प्रारंभिक प्रक्रिया है।अन्य विकल्प जैसे नवोद्भव, बीजाणु निर्माण या वानस्पतिक प्रसार अलैंगिक हैं।3. एक अर्धपारगम्य झिल्ली के माध्यम से पानी डालें और दूषित पदार्थों को हटा दें। [CHSL (T-I) 16 अगस्त, 2023 (IV-पाली)](a) परासरण(b) आसवन(c) निस्पंदन(d) क्वथनCorrect Answer: (a) परासरणSolution:एक अर्धपारगम्य झिल्ली (Semipermeable membrane) के माध्यम से विलायक (Solvent) अर्थात पानी डालने पर उसके अणु झिल्ली के आर-पार जा सकते हैंलेकिन विलेय (Solute) अर्थात जो दूषित पदार्थ के अणु झिल्ली के आर- पार नहीं जा सकते या हटा दिए जाते हैंउसे परासरण (Osmosis) कहते हैं।प्रक्रिया का आधारपरासरण एक प्राकृतिक प्रक्रिया हैजहां शुद्ध पानी कम सांद्रता वाले घोल से अधिक सांद्रता वाले घोल की ओर अर्धपारगम्य झिल्ली के माध्यम से चला जाता हैताकि सांद्रता संतुलित हो। विपरीत परासरण में इस प्रवाह को उलटने के लिए बाहरी दाब (आमतौर पर 10-50 बार या अधिक) लगाया जाता हैजो पानी के अणुओं को झिल्ली के सूक्ष्म छिद्रों (0.0001 से 0.001 माइक्रोन आकार) से गुजरने देता हैजबकि नमक, बैक्टीरिया, वायरस, भारी धातु, रसायन और अन्य दूषित पदार्थ पीछे रह जाते हैं।यह झिल्ली केवल पानी के अणुओं को पारगम्य होने देती है।चरणबद्ध कार्यप्रणालीRO प्रणाली में पानी शुद्धिकरण कई चरणों में होता है:पूर्व-निस्पंदन: पानी को पहले सेडिमेंट फिल्टर से गुजारा जाता हैरेत, मिट्टी जैसी बड़ी अशुद्धियां हटें; फिर कार्बन फिल्टर से क्लोरीन और गंध दूर होती है।उच्च दाब पंप: पानी को RO झिल्ली तक पहुंचाने के लिए दाब बढ़ाया जाता है।RO झिल्ली पारगमन: दाब से पानी शुद्ध होकर "पर्मिएट" के रूप में निकलता हैजबकि दूषित पदार्थ "कंसन्ट्रेट" या "रिजेक्ट वाटर" में चले जाते हैं।उत्तर-निस्पंदन: शुद्ध पानी को मिनरल कार्ट्रिज या UV लैंप से गुजारा जाता हैताकि आवश्यक खनिज जोड़े जाएं और बैक्टीरिया नष्ट हों।हटाए जाने वाले दूषित पदार्थयह प्रक्रिया 95-99% तक प्रभावी होती है और निम्नलिखित को हटा देती है:घुले हुए लवण (TDS जैसे सोडियम, कैल्शियम)।सूक्ष्मजीव (बैक्टीरिया, वायरस, प्रोटोजोआ)।रासायनिक प्रदूषक (आर्सेनिक, फ्लोराइड, नाइट्रेट, कीटनाशक)।भारी धातुएं (लेड, मरकरी)।हालांकि, कुछ गैसें या छोटे अणु (जैसे CO2) पूरी तरह नहीं हटते, इसलिए अतिरिक्त फिल्टर जोड़े जाते हैं।लाभ और सीमाएंपेयजल के लिए आदर्श, खासकर भूजल या समुद्री जल शुद्धिकरण में।घरेलू RO यूनिट सरल और किफायती।पर्यावरण-अनुकूल, कोई रसायन नहीं।30-50% पानी बर्बाद होता है (रिजेक्ट वाटर)।झिल्ली समय के साथ गंदी हो जाती है, नियमित सफाई/बदलाव जरूरी।आवश्यक खनिज भी हट जाते हैं, इसलिए रिमिनरलाइजेशन की जरूरत।4. भ्रूण की वह अवस्था जिसमें सभी शारीरिक भागों की पहचान हो सके ....... कहलाता है। [MTS (T-I) 09 मई, 2023 (II-पाली)](a) युग्मनज(b) गर्भाशय(c) गर्भ(d) डिंबोत्सर्जनCorrect Answer: (c) गर्भSolution:भ्रूण (embryo) के विकास की वह अवस्था जिसमें प्रमुख शारीरिक अंग बन जाते हैंपहचाने जा सकते हैं, गर्भ (fetus) कहलाती है। यह आमतौर पर मानव गर्भावस्था के 8-9 सप्ताह के बाद होता है।भ्रूण विकास के चरणमानव गर्भावस्था को तीन मुख्य चरणों में बांटा जाता है: युग्मनज (Zygote), भ्रूण (Embryo) और भ्रूण (Foetus)।युग्मनज चरण (गर्भाधान के बाद 0-2 सप्ताह): निषेचित अंडा ब्लास्टोसिस्ट बनता हैगर्भाशय में प्रत्यारोपित होता है।भ्रूण चरण (3-8 सप्ताह): बुनियादी अंग प्रणालियां (जैसे हृदय, मस्तिष्क, रीढ़) बनने लगती हैंलेकिन आकार छोटा और अपरिपक्व होता है—सभी भाग स्पष्ट पहचान योग्य नहीं होते।भ्रूण चरण (9वें सप्ताह से जन्म तक): यहां सभी शारीरिक भाग पहचान योग्य हो जाते हैंतेजी से वृद्धि, हड्डी-मांसपेशी परिपक्वता और कार्यक्षमता विकसित होती है।भ्रूण अवस्था की मुख्य विशेषताएंइस चरण में भ्रूण मानवाकृति ग्रहण कर लेता है:12वें सप्ताह तक: सभी प्रमुख अंग (हाथ, पैर, उंगलियां, चेहरे की विशेषताएं, हृदय, फेफड़े, किडनी) बन जाते हैं।अल्ट्रासाउंड पर स्पष्ट दिखाई देते हैं।16-20 सप्ताह: भ्रूण हिलता-डुलता है, निगलता है, ध्वनि सुनता है; बाल, नाखून उगते हैं।24-40 सप्ताह: फेफड़े परिपक्व होते हैं, वजन बढ़ता है (लगभग 3-4 किग्रा तक), जन्म के लिए तैयार।5. वे जीव जो पादपों द्वारा संश्लेषित भोजन ग्रहण करते हैं, ....... कहलाते हैं। [MTS (T-I) 04 मई, 2023 (III-पाली)](a) विषमपोषी(b) स्वपोषी(c) मृतजीवी(d) प्रकाशपोषीCorrect Answer: (a) विषमपोषीSolution:वे जीव जो पादपों द्वारा संश्लेषित भोजन ग्रहण करते हैं, विषमपोषी कहते हैंजैसे मनुष्य, गाय, बिल्ली, हिरण आदि। पौधे प्रकाश संश्लेषण क्रिया द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैंजिस कारण इन्हें स्वपोषी कहते हैं।विषमपोषी की परिभाषाविषमपोषी ऐसे जीव हैं जो जटिल कार्बनिक पदार्थों को भोजन के रूप में ग्रहण करते हैंक्योंकि वे प्रकाश संश्लेषण या रसायन संश्लेषण द्वारा अपना भोजन स्वयं नहीं संश्लेषित कर सकते। पौधे स्वपोषी होते हैंजो सूर्य प्रकाश, CO₂ और जल से ग्लूकोज बनाते हैंजबकि विषमपोषी इन्हीं पौधों के उत्पादित भोजन पर निर्भर रहते हैं।प्रकारविषमपोषी मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं:परपोषी (Parasites): ये स्वस्थ जीवों पर रहकर उनका भोजन चुराते हैंजैसे मलेरिया का प्लास्मोडियम या कृमि।सहजीवी (Saprotrophs): ये मृत कार्बनिक पदार्थों को विघटित कर पचाते हैंजैसे कवक और कुछ बैक्टीरिया जो मृत पौधों या जंतुओं को सड़ाते हैं।उपभोक्ता (Holozoic): ये ठोस भोजन ग्रहण कर पचाते हैंजैसे गाय जो घास खाती है या शेर जो मांसाहारी होता है।6. थैलोफाइटा में कौन-से पौधे शामिल हैं? [C.P.O.S.I. (T-I) 11 नवंबर, 2022 (III-पाली)](a) लाइकेन, संवहनी पादप और टेरिडोफाइटा(b) नोस्टॉक, गुलाब और तरबूज(c) उल्वा, कारा और क्लैडोफोरा(d) गुलाब, कमल और लाइकेनCorrect Answer: (c) उल्वा, कारा और क्लैडोफोराSolution:थैलोफाइटा पादप जगत का सबसे निचला समूह है जिसमें ऐसे पौधे शामिल हैंजिनका शरीर जड़, तना और पत्ती में विभेदित नहीं होता (थैलस जैसी संरचना)।इसमें मुख्य रूप से शैवाल (जैसे उल्वा, कारा, क्लैडोफोरा) और कुछ कवक शामिल हैं।विशेषताएँइनकी कोशिका भित्ति सेलूलोज से बनी होती है, और यौन अंग सरल व एककोशिकीय होते हैंजिसमें निषेचन के बाद भ्रूण का निर्माण नहीं होता। ये पौधे स्वपोषी (शैवाल) या परपोषी (कवक) हो सकते हैंक्लोरोफिल युक्त होने पर प्रकाश संश्लेषण करते हैं।वर्गीकरणथैलोफाइटा को दो मुख्य भागों में बांटा जाता है: शैवाल और कवक।शैवाल (Algae): ये क्लोरोफिल युक्त जलीय पौधे हैं, जो स्वपोषी होते हैं।इनमें एककोशिकीय से बहुकोशिकीय रूप तक विविधता है।कवक (Fungi): ये परपोषी होते हैं, क्लोरोफिल का अभाव होता है,हायफी से बने मायसेलियम के रूप में विकसित होते हैं। यीस्ट इनका एककोशिकीय उदाहरण है।प्रमुख उदाहरणथैलोफाइटा में निम्नलिखित पौधे प्रमुख हैं:उल्वा (Ulva): हरा शैवाल, समुद्री जल में पाया जाता है, पत्ती जैसा थैलस।चारा (Chara): ताजे पानी का हरा शैवाल, स्टोनों और नोड्स वाला।क्लैडोफोरा (Cladophora): ताजे जल का हरा शैवाल, फिलामेंटस संरचना।अन्य शैवाल: स्पाइरोगायरा, नॉट्री, सरजेनरम।कवक उदाहरण: म्यूकर, राइज़ोपस, यीस्ट, एगेरिकस (मशरूम)।पारिस्थितिक महत्वये पौधे जलाशयों के प्राथमिक उत्पादक हैं और लिकेन के रूप में सहजीवी संबंध बनाते हैंजहां शैवाल भोजन बनाता है और कवक सुरक्षा प्रदान करता है।आधुनिक वर्गीकरण में कवक को पादप जगत से अलग किया गया है, लेकिन पारंपरिक रूप से थैलोफाइटा में शामिल हैं।7. निम्नलिखित में से कौन-सा, टेरिडोफाइटा (Pteridophyta) का उदाहरण नहीं है? [MTS (T-I) 12 जुलाई, 2022 (III-पाली)](a) इक्वीसीटम(b) सिलैजिनेला(c) टैरिस(d) फ्यूनेरियाCorrect Answer: (d) फ्यूनेरियाSolution:टेरिडोफाइटा समूह के पौधे नमी, छायादार स्थानों, जंगलों एवं पहाड़ों पर अधिकता से पाए जाते हैं।पौधे का शरीर जड़, तना एवं पत्तियों में विभेदित रहता है। पौधे बीजाणु जनक होते हैंजनन की क्रिया बीजाणु द्वारा होती है।इक्वीसीटम (Equisetum), सिलैजिनेला (Selaginella), टेरिस (Pteris), लाइकोपोडियम, ड्रायोप्टेरिस आदि टेरिडोफाइटा के उदाहरण हैंकिंतु फ्यूनेरिया (Funaria) टेरिडोफाइटा का उदाहरण नहीं है, बल्कि ब्रायोफाइटा समूह का उदाहरण है।टेरिडोफाइटा की विशेषताएँये पौधे जड़, तना और पत्ती में विभेदित होते हैं, संवहनी ऊतक (जाइलम व फ्लोएम) मौजूद होते हैंलेकिन फूल व बीज का अभाव होता है। प्रजनन स्पोरों द्वारा होता हैजीवन चक्र में स्पोरोफाइट प्रमुख अवस्था होती है। ये आर्द्र छायादार स्थानों पर उगते हैं।वर्गीकरणटेरिडोफाइटा को चार मुख्य वर्गों में बांटा जाता है:साइलोप्सिडा (Psilopsida): सरल संरचना, जड़ अनुपस्थित, उदाहरण - साइलोटम (Psilotum), टेमेसिप्टेरिस (Tmesipteris)।लाइकोप्सिडा (Lycopsida): माइक्रोफिल्स वाली पत्तियाँ, उदाहरण - लाइकोपोडियम (Lycopodium), सिलेजिनेला (Selaginella), इशियोटीस (Isoetes)।स्फेनोप्सिडा (Sphenopsida): संयुक्त तना, उदाहरण - इक्विसेटम (Equisetum)।प्टेरोप्सिडा (Pteropsida): मैक्रोफिल्स (फर्न पत्तियाँ), उदाहरण - ड्रायोप्टेरिस (Dryopteris), एडिएंटम (Adiantum), मार्सिलिया (Marsilea)।गैर-उदाहरण (सामान्य भ्रम)यदि विकल्पों में ब्रायोफाइटा (जैसे मॉस - Funaria) या थैलोफाइटा (जैसे स्पाइरोगायरा) शामिल होंतो वे टेरिडोफाइटा के उदाहरण नहीं हैं। मॉस में संवहनी ऊतक का अभाव होता हैजबकि थैलोफाइटा में थैलस शरीर होता है। चारा (Chara) भी थैलोफाइटा (शैवाल) का उदाहरण है, न कि टेरिडोफाइटा।महत्वये पौधे विकास की दृष्टि से ब्रायोफाइटा और जिम्नोस्पर्म्स के बीच पुल हैंमिट्टी संरक्षण में सहायक। आधुनिक वर्गीकरण में इन्हें ट्रेकियोफाइट्स कहा जाता है।8. जिम्नोस्पर्म के बारे में गलत कथन का चयन कीजिए। [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (III-पाली)](a) जिम्नोस्पर्म काष्ठीय झाड़ियों (woody shrubs), पेड़ों या लिआनास के रूप में पाए जाते हैं और इनमें कोई वास्तविक जलीय शामिल नहीं होता है और कुछ एपिफाइट्स (epiphytes) शामिल होते हैं।(b) जिम्नोस्पर्म बीज रहित फूल वाले पौधे हैं।(c) जिम्नोस्पर्म आमतौर पर प्रजनन के मामले में धीमे होते हैं; परागण और निषेचन के बीच एक वर्ष तक का समय लग सकता है और बीज की परिपक्वता के लिए 3 वर्ष की आवश्यकता हो सकती है।(d) जिम्नोस्पर्म शंकु या स्ट्रोबिली और अनावृत्त बीज प्रदर्शित करते हैं, लेकिन फूल नहीं।Correct Answer: (b) जिम्नोस्पर्म बीज रहित फूल वाले पौधे हैं।Solution:जिम्नोस्पर्म (Gymnosperm) बीजीय पौधों (Spermatophytes) का वह उपसंघ (Subphylum) हैजिसके अंतर्गत वे पौधे आते हैं जिनमें बीज तो बनते हैंपरंतु वे बीज नग्न रूप से पौधे पर लगे रहते हैं।अर्थात बीजाण्ड (Ovules) अथवा उनसे विकसित बीज (Seeds) किसी खोल, भित्ति या फल में बंद नहीं होते हैं।जिम्नोस्पर्म में प्रायः वायु-परागण (Wind pollination) होता है, जो तीव्र होता है। इस प्रकार (b) का कथन गलत है।जिम्नोस्पर्म की परिभाषा इनमें फूल अनुपस्थित होते हैं और प्रजनन संरचनाएँ शंकु (cones) के रूप में होती हैं।गलत कथनजिम्नोस्पर्म के बारे में सबसे सामान्य गलत कथन यह है कि "जिम्नोस्पर्म बीजरहित फूल वाले पौधे हैंयह कथन पूर्णतः गलत है क्योंकि:जिम्नोस्पर्म बीज पैदा करते हैं, वे बीजरहित नहीं होते। बीजरहित पौधे तो pteridophytes या शैवाल होते हैं।ये फूल रहित होते हैं, न कि फूल वाले। फूल तो केवल angiosperms (आवृतबीजी) में पाए जाते हैं।इस कथन में दोहरी त्रुटि है - बीजरहित और फूल वाले दोनों गलत हैं।अन्य विशेषताएँजिम्नोस्पर्म ब्रायोफाइट्स या शैवाल से अधिक प्रजातियों वाले होते हैंविभिन्न पर्यावरणों में अनुकूलित पाए जाते हैं। इनका प्रजनन धीमा होता हैपरागण से निषेचन तक एक वर्ष और बीज परिपक्वता तक 3 वर्ष लग सकते हैं।ये मुख्यतः वृक्ष या झाड़ियों के रूप में होते हैं, जलीय या एपिफाइट कम होते हैं।महत्वये वनस्पति तेल, राल, कागज आदि के स्रोत हैं और पारिस्थितिकी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।गलत कथनों से बचने के लिए याद रखें कि जिम्नोस्पर्म = नग्न बीजी + फूल रहित।9. पादपों में ....... मध्य पटल (middle lamella), प्राथमिक भित्ति और द्वितीयक मित्तियों में मौजूद होता है और यह भित्ति विस्तार के समय विकास के प्रारंभिक चरणों में संचित होता है। [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (III-पाली)](a) काइटिन(b) एल्गिनेट(c) जिलेटिन(d) पेक्टिनCorrect Answer: (d) पेक्टिनSolution:पादपों की कोशिका भित्ति तीन परतों की बनी होती हैपहला अंतराकोशिका पदार्थ या मध्य पटल दूसरा प्राथमिक भित्तितीसरा द्वितीयक भित्ति पादपों में पेक्टिन (Pectin) मध्य पटल, प्राथमिक भित्ति और द्वितीयक भित्तियों में मौजूद होता हैयह भित्ति विस्तार के समय विकास के प्रारंभिक चरणों में संचित होता है।पेक्टिन की संरचनामध्य पटल में यह कैल्शियम पेक्टेट के रूप में प्रचुर मात्रा में पाया जाता हैजो आसन्न कोशिकाओं को जोड़ने का कार्य करता है।प्राथमिक भित्ति में पेक्टिन कोशिका वृद्धि के समय लचीलापन प्रदान करता है, जबकि द्वितीयक भित्ति में यह कम मात्रा में होता है।कोशिका भित्ति के घटकपादप कोशिका भित्ति तीन मुख्य परतों से बनी होती है:मध्य पटल: सबसे बाहरी परत, मुख्यतः पेक्टिन से निर्मित, जो दो कोशिकाओं के बीच सीमेंट की तरह कार्य करती है।प्राथमिक भित्ति: पतली और लचीली, जिसमें सेल्यूलोज (30-40%), हेमीसेल्यूलोज (20-30%) और पेक्टिन (20-30%) शामिल होते हैं; यह कोशिका विस्तार के दौरान बनती है।द्वितीयक भित्ति: आंतरिक और मोटी, जिसमें सेल्यूलोज अधिक, लिग्निन और कम पेक्टिन होता हैजो कोशिका को कठोरता प्रदान करती है।विकास प्रक्रिया में भूमिकाकोशिका विभाजन के बाद कोशिका प्लेट बनने पर सबसे पहले पेक्टिन जमा होता हैजो मध्य पटल का निर्माण करता है। प्रारंभिक विकास चरणों में कोशिका दीर्घीकरण (elongation) के समय पेक्टिन प्राथमिक भित्ति में संचित होकर turgor दबाव सहन करने में मदद करता है।जैसे-जैसे कोशिका परिपक्व होती है, पेक्टिन का विघटन या परिवर्तन होता है, जिससे द्वितीयक भित्ति का निर्माण संभव होता है।अन्य महत्वपूर्ण तथ्यपेक्टिन न केवल संरचनात्मक है, बल्कि कोशिका आसंजन (cell adhesion), जल धारण और रोग प्रतिरोध में भी सहायक है।प्लास्मोडेस्माटा नामक संरचनाएँ मध्य पटल को पार करके कोशिकाओं के बीच संचार स्थापित करती हैं।पेक्टिन की यह विशेषता पादप ऊतकों को मजबूती और लचीलापन प्रदान करती है।10. प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के दौरान निम्नलिखित चरणों के सही क्रम का चयन कीजिए। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (I-पाली)]i. क्लोरोफिल प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित करने में सहायता करता है।ii. प्रकाश ऊर्जा, रासायनिक ऊर्जा में रूपांतरित हो जाती है और जल का अणु ऑक्सीजन और हाइड्रोजन अणुओं में विभाजित हो जाता है।iii. कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बोहाइड्रेट में रूपांतरित हो जाती है।(a) ये सदैव i > ii > iii के क्रम में क्रमिक रूप से घटित होते हैं।(b) चरण i एवं चरण ii सदैव एक साथ घटित होते हैं और चरण iii किसी भी अन्य समय घटित हो सकता है।(c) इन चरणों का एक के बाद एक तुरंत घटित होना आवश्यक नहीं है।(d) चरण । पहले आता है और चरण ii एवं iii अगले चरण में एक साथ घटित होते हैं।Correct Answer: (a) ये सदैव i > ii > iii के क्रम में क्रमिक रूप से घटित होते हैं।Solution:प्रकाश-संश्लेषण की प्रक्रिया के दौरान क्लोरोफिल प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित करने में सहायता करता है।प्रकाश ऊर्जा, रासायनिक ऊर्जा में रूपांतरित हो जाती हैजल का अणु ऑक्सीजन और हाइड्रोजन अणुओं में विभाजित हो जाता हैअंत में कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बोहाइड्रेट में रूपांतरित हो जाती है।अतः प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया सदैव i > ii > iii के क्रम में घटित होती है।प्रकाशीय अभिक्रियायह चरण क्लोरोप्लास्ट के थायलाकॉइड झिल्ली में होता है, जहां क्लोरोफिल प्रकाश के फोटॉन अवशोषित करता है।जल के अपघटन (फोटोलिसिस) से ऑक्सीजन मुक्त होती हैATP और NADPH जैसे ऊर्जा वाहक उत्पन्न होते हैं। प्रकाश तंत्र II (PS II) और प्रकाश तंत्र I(PS I) क्रमशः सक्रिय होते हैं, जहां इलेक्ट्रॉन परिवहन श्रृंखला के माध्यम से ऊर्जा संचित की जाती है।अप्रकाशीय अभिक्रियायह चरण क्लोरोप्लास्ट के स्ट्रोमा में होता है और प्रकाश की आवश्यकता नहीं होती।यहां CO₂ का स्थिरीकरण कैल्विन चक्र (या C3 पथ) द्वारा होता हैजिसमें ATP और NADPH का उपयोग ग्लूकोज जैसे कार्बोहाइड्रेट संश्लेषण के लिए किया जाता है।RuBP (रिबुलोज बाइसफॉस्फेट) स्वीकारक के रूप में कार्य करता हैचक्र तीन चरणों—कार्बन स्थिरीकरण, कमीकरण और पुनर्जनन—में पूर्ण होता है।विस्तृत क्रमप्रकाश संश्लेषण का पूर्ण क्रम इस प्रकार है(1) प्रकाश अवशोषण और जल अपघटन, (2) इलेक्ट्रॉन परिवहन एवं ATP/NADPH उत्पादन, (3) CO₂ स्थिरीकरण, (4) कार्बन कमीकरण, (5) RuBP पुनर्जनन।यह क्रम सभी हरे पौधों में समान है, हालांकि C4 और CAM पौधों में भिन्नताएं हैं।महत्वयह प्रक्रिया पृथ्वी पर ऑक्सीजन और जैविक भोजन का प्रमुख स्रोत हैखाद्य श्रृंखला की आधारशिला। पर्यावरणीय कारक जैसे प्रकाश, CO₂ और तापमान इसकी गति प्रभावित करते हैं।Submit Quiz12Next »