प्रकाश और प्रकाशिकी (भौतिक विज्ञान) (Part-IV)

Total Questions: 50

31. खतरे का संकेत देने वाली लाइटों के लिए लाल रंग को क्यों वरीयता दी जाती है? [RRB JE 24/05/2019 (Afternoon)]

Correct Answer: (d) क्योंकि लाल रंग के प्रकाश की तरंग दैर्ध्य उच्चतम होती है और यह कोहरे और धुएं से सबसे कम प्रकीर्णित होता है।
Solution:
  • तरंग दैर्ध्य प्रकाश तरंग के दो क्रमिक शिखरों (क्रेस्ट्स) या गर्तों (ट्राउट्स) के बीच की दूरी। आवृत्ति और तरंग दैर्ध्य एक दूसरे के व्युत्क्रमानुपाती होते हैं।
  • खतरे का संकेत देने वाली लाइटों के लिए लाल रंग को वरीयता इसलिए दी जाती है
  • क्योंकि इसकी तरंगदैर्ध्य सबसे अधिक (~650-700 nm) होती है
  • जिससे यह सबसे कम प्रकीर्णित होता है और दूर तक स्पष्ट दिखाई देता है।
  • मुख्य कारण
  • दूरदराज दृश्यता
    • लाल प्रकाश वायुमंडल में सबसे कम विकृत होता है
    • रात/धुंध में भी 1-2 किमी दूर तक स्पष्ट दिखता है
    • मानव आँख लाल रंग को सबसे पहले पहचानती है
  • ऐतिहासिक/मनोवैज्ञानिक
    • लाल = खतरा की वैश्विक स्वीकृति (Stop, Danger, Fire)
    • तेज प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है
  • वैज्ञानिक तथ्य
    • वायु अणुओं से लाल प्रकाश ~16 गुना कम बिखरता है
    • धुंध के कणों (1-10 μm) से भी कम प्रकीर्णन
    • सूर्यास्त में भी लाल ही दिखता है (लंबा पथ)

32. प्रकीर्णित प्रकाश का रंग किस कारक पर निर्भर करता है? [RRB JE 25/05/2019 (Afternoon)]

Correct Answer: (d) प्रकीर्णित कणों के आकार पर
Solution:
  • प्रकाश का प्रकीर्णन जब प्रकाश की किरणें किसी बाधा जैसे धूल या गैस के अणुओं, जलवाष्प आदि से टकराने पर अपने सीधे पथ से विचलित हो जाती हैं।
  • उदाहरण सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य का लाल रंग, आकाश का नीला रंग, दोपहर के समय आकाश का सफेद रंग।
  • यह प्रकाश की तरंगदैर्घ्य, कणों की प्रकृति, प्रकाश के आपतित कोण, प्रकाश के ध्रुवीकरण पर निर्भर करता है।
  • प्रकीर्णित प्रकाश का रंग प्रकीर्णन करने वाले कणों के आकार और प्रकाश की तरंगदैर्ध्य पर निर्भर करता है।
  • मुख्य कारक
  • साफ आकाश (नीला)
    • वायु अणु (~0.1 nm) बहुत छोटे → रेleigh प्रकीर्णन
    • नीला प्रकाश (~450 nm) सबसे अधिक बिखरता है → नीला आकाश
  • सूर्यास्त (लाल)
    • लंबा पथ → नीला प्रकीर्णित, लाल बच जाता है
  • बादल (सफेद)
    • जलकण (~10 μm) बड़े → सभी रंग समान बिखरते हैं
  • धुंध (ग्रे/सफेद)
    • धूल कण मध्यम → Mie प्रकीर्णन → सफेद दिखता है
  • सूत्र
  • रेleigh प्रकीर्णन:
    • तरंगदैर्ध्य
    • कण व्यास

33. गोलीय दर्पण के ध्रुव P से मुख्य फोकस F की दूरी को क्या कहा जाता है? [RRB JE 26/05/2019 (Morning)]

Correct Answer: (d) फोकस दूरी (f)
Solution:
  • उत्तल लेंस और उत्तल दर्पण के लिए फोकस दूरी को धनात्मक (+) माना जाता है।
  • इसे अवतल लेंस और अवतल दर्पण के लिए ऋणात्मक (-) माना जाता है।
  • वस्तु की दूरी (u) - वस्तु और दर्पण के ध्रुव के बीच की दूरी। प्रतिबिंब की दूरी (v) प्रतिबिंब और दर्पण के ध्रुव के बीच की दूरी।
  • गोलीय दर्पण के ध्रुव P से मुख्य फोकस F की दूरी फोकस दूरी (Focal Length) कहलाती है। इसे प्रतीक f से दर्शाया जाता है।
  • परिभाषा
    • फोकस दूरी (f) वह दूरी है जो दर्पण के ध्रुव (P) और मुख्य फोकस (F) के बीच होती है।
    • यह दर्पण की प्रकाश अभिसरण/अपसरण क्षमता को निर्धारित करती है।
  • संबंध
    • फोकस दूरी = वक्रता त्रिज्या का आधा भाग
    • जहाँ R = ध्रुव P से वक्रता केंद्र C तक की दूरी।
  • महत्व
  • दर्पण सूत्र:
    • फोकस दूरी से ही प्रतिबिंब की स्थिति, आकार और प्रकृति निर्धारित होती है।
    • उदाहरण: यदि R = 20 cm, तो f = 10 cm। अवतल दर्पण में f = -10 cm।

34. गोलीय दर्पणों द्वारा प्रकाश के परावर्तन के दौरान किस चिन्ह परिपाटी का पालन किया जाता है? [RRB JE 26/05/2019 (Afternoon)]

Correct Answer: (b) नवीन कार्तीय चिन्ह परिपाटी
Solution:
  • इस परिपाटी में दर्पण के ध्रुव (P) को मूल बिंदु के रूप में लिया जाता है।
  • दर्पण के मुख्य अक्ष को समन्वय प्रणाली के x-अक्ष के रूप में लिया जाता है।
  • चिन्ह परिपाटी इस प्रकार हैं: वस्तु को हमेशा दर्पण के बाईं ओर रखा जाता है।
  • मुख्य अक्ष के समानांतर सभी दूरियाँ दर्पण के ध्रुव से मापी जाती हैं।
  • मूल बिंदु के दाईं ओर (+x-अक्ष के अनुदिश) मापी गई सभी दूरियां धनात्मक मानी जाती हैं
  • जबकि मूल बिंदु के बाईं ओर (-x-अक्ष के अनुदिश) मापी गई सभी दूरियां ऋणात्मक मानी जाती हैं।
  • मुख्य अक्ष के लंबवत् और उसके ऊपर (+y-अक्ष के अनुदिश) मापी गई दूरियाँ धनात्मक मानी जाती हैं
  • मुख्य अक्ष के नीचे (-y-अक्ष के अनुदिश) मापी गई दूरियाँ ऋणात्मक मानी जाती हैं।
  • मूल बिंदु (Origin)
    • दर्पण का ध्रुव (P) मूल बिंदु होता है।
  • अक्ष (Axis)
    • दर्पण का मुख्य अक्ष X-अक्ष होता है।
    • प्रकाश हमेशा बाएँ से दाएँ आपतित होता है।
  • दर्पण सूत्र
    • 1/v + 1/u = 1/f
    • सभी चिन्हों सहित उपयोग होता है।
  • आवर्धन सूत्र
    • m = h'/h = -v/u
    • ऋणात्मक चिन्ह उल्टे प्रतिबिंब दर्शाता है।

35. जब श्वेत प्रकाश, जो सात रंगों का मिश्रण है, कांच के प्रिज्म से होकर गुजरता है तो उसका प्रकीर्णन क्यों होता है? [RRB JE 26/05/2019 (Evening)]

Correct Answer: (c) श्वेत प्रकाश के 7 रंग कांच के प्रिज्म से अलग - अलग चाल से गुजरते हैं।
Solution:
  • प्रकाश का प्रकीर्णन - एक पारदर्शी
  • माध्यम से गुजरने पर श्वेत प्रकाश की किरण को उसके सात घटक रंगों में विभाजित करने की घटना है।
  • इसकी खोज सर आइजैक न्यूटन ने की थी।
  • दैनिक जीवन में प्रकाश प्रकीर्णन के उदाहरणः इंद्रधनुष का निर्माण, कॉम्पैक्ट डिस्क, जल पर गिरा पेट्रोलियम, साबुन के बुलबुले, प्रिज्म, प्लास्टिक रूलर।
  • वर्ण-विक्षेपण का कारण
  • मूल सिद्धांत
    • श्वेत प्रकाश में सभी दृश्य रंग (VIBGYOR) होते हैं। प्रत्येक रंग की तरंगदैर्ध्य अलग होती है:
  • कांच का अपवर्तनांक तरंगदैर्ध्य पर निर्भर
    • अपवर्तनांक (μ) =  (c = निर्वात में चाल, v = माध्यम में चाल)
    • महत्वपूर्ण: अपवर्तनांक तरंगदैर्ध्य के व्युत्क्रमानुपाती होता है:
    • μ ∝ 1/λ
    • छोटी तरंगदैर्ध्य → उच्च अपवर्तनांक → अधिक अपवर्तन
  • प्रिज्म में प्रक्रिया (चरणबद्ध)
    • चरण 1: प्रिज्म में प्रवेश (पहली सतह)
    • हवा (μ≈1) → कांच (μ≈1.5)
    • श्वेत प्रकाश आपतित → सभी रंग अभिलंब की ओर झुकते हैं।
    • बैंगनी सबसे अधिक, लाल सबसे कम झुकता है।
  • चरण 2: प्रिज्म के अंदर
    • प्रकाश पूर्ण आंतरिक परावर्तन के बिना दूसरी सतह की ओर जाता है।
    • चरण 3: प्रिज्म से बाहर निकास (दूसरी सतह)
    • कांच → हवा
    • सभी रंग अभिलंब से दूर झुकते हैं।
  • विक्षेपण कोण (δ):
    • बैंगनी: δ सबसे अधिक (~2°)
    • लाल: δ सबसे कम (~1°)
  • न्यूटन का प्रयोग
    • 1666 में न्यूटन ने प्रिज्म प्रयोग से सिद्ध किया:
    • श्वेत प्रकाश → प्रिज्म → VIBGYOR स्पेक्ट्रम
    • दूसरा प्रिज्म → सभी रंग → श्वेत प्रकाश (पुनर्संयोजन)
  • गणितीय व्याख्या
    • स्नेल का नियम:
    • प्रिज्म कोण A के लिए विचलन कोण (δ):
    • δ = (μ - 1)A

36. किसी पदार्थ का अपवर्तनांक हवा में प्रकाश की चाल से किस प्रकार संबंधित होता है? [RRB JE 27/05/2019 (Morning)]

Correct Answer: (d) अपवर्तनांक = हवा में प्रकाश की चाल / पदार्थ में प्रकाश की चाल
Solution:
  • अपवर्तनांक (अपवर्तन सूचकांक) एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाने पर प्रकाश की किरण के झुकने का माप है।
  • पदार्थ का अपवर्तनांक - पानी (1.33), मिट्टी का तेल (1.44), क्राउन ग्लास (1.52), कैनेडा बाल्सम (1.54), सेंधा नमक (1.54), हीरा (2.42) होता है।
  • गणितीय संबंध
    • अपवर्तनांक की परिभाषा:
    • n=c/v
    • जहाँ:
    • c = हवा/निर्वात में प्रकाश की चाल (3×10^8 m/s)
    • v = पदार्थ में प्रकाश की चाल
    • सूत्र: v=c/n
  • विद्युतचुंबकीय क्षेत्र
    • प्रकाश विद्युतचुंबकीय तरंग है। पदार्थ के परमाणु विद्युत क्षेत्र के साथ संनादति हैं, जिससे:
    • निर्वात → तरंग बिना बाधा
    • पदार्थ → तरंग विलंबित → चाल कम
  • घनत्व प्रभाव
    • अधिक घनत्व → अधिक परमाणु → अधिक संनादन → चाल कम → n अधिक
    • व्यावहारिक परिणाम
  • अपवर्तन (झुकाव):
    • n₁ < n₂ → किरण अभिलंब की ओर झुकती है
    • स्नेल का नियम: n_1 sin⁡i=n_2 sin⁡r
  • वर्ण-विक्षेपण:
    • लाल (λ = 700 nm): n कम → कम झुकाव
    • बैंगनी (λ = 400 nm): n अधिक → अधिक झुकाव
  • महत्वपूर्ण तथ्य
    • पूर्ण आंतरिक परावर्तन: n_1>n_2 + विशिष्ट आपतन कोण
    • प्रिज्म: विभिन्न n → VIBGYOR
    • ऑप्टिकल फाइबर: n₁ > n₂ → प्रकाश कैद
  • गणना उदाहरण
    • कांच का n = 1.5
    • v=(3×10^8)/1.5=2×10^8 m/s
    • प्रकाश 1/3 धीमा हो जाता है।

37. निम्नलिखित पदार्थों को उनके संबंधित अपवर्तनांकों के आरोही क्रम में व्यवस्थित करें - [RRB JE 27/05/2019 (Afternoon)]

जल, कांच, वायु

Correct Answer: (c) वायु, पानी, कांच
Solution:
  • जब प्रकाश की किरण एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में तिरछी गमन करती है
  • तो दूसरे माध्यम में उसकी दिशा परिवर्तित हो जाती है।
  • माध्यम के किसी दिए गए जोड़े में दिशा में होने वाले परिवर्तन की सीमा को अपवर्तनांक, "स्थिरांक" के रूप में व्यक्त किया जाता है।
  • इससे पता चलता है कि प्रकाश अलग-अलग माध्यम में अलग-अलग गति से फैलता है। माध्यम 1 के संबंध में माध्यम 2 का अपवर्तनांक
  • आरोही क्रम (निम्न से उच्च)
    • निर्वात (1.000) < वायु (1.0003) < बर्फ (1.31) < जल (1.33) < अल्कोहल (1.36) < केरोसिन (1.44) < कांच (1.50) < बेंजीन (1.50) < फ्लिंट कांच (1.65) < हीरा (2.42)
  • विशेष नोट
  • प्रकाश चाल का संबंध
    • v = c/n
    • हीरा में सबसे धीमी (1.24×10⁸ m/s), वायु में सबसे तेजी (लगभग c)।
  • प्रायोगिक क्रम (प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए):
    • वायु < जल < कांच < हीरा
  • परीक्षा उपयोगी तथ्य
    • सबसे कम n: वायु (~1)
    • सबसे अधिक n: हीरा (2.42)
    • कांच का मान: 1.5 याद रखें
    • जल का मान: 4/3 या 1.33

38. आंख की वह संरचना, जो प्रकाश किरणों को अपवर्तित करने और रेटिना पर केन्द्रित करने का कार्य करती है, उसे क्या कहा जाता है? [RRB JE 27/05/2019 (Afternoon)]

Correct Answer: (b) लेंस
Solution:
  • कॉर्निया यह नेत्रगोलक के बाहरी आवरण का स्पष्ट, पारदर्शी, अग्रभाग है। प्रकाश की किरणें इसी परत में प्रवेश करती हैं।
  • कॉर्निया आंख की कुल प्रकाशीय शक्ति का दो-तिहाई हिस्सा होता है। पुतली यह परितारिका के केंद्र में परिवर्तनशील आकार का एक छिद्र है
  • जो नेत्रगोलक में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करता है।
  • आइरिस यह कॉर्निया के पीछे और लेंस के बिंदु पर रंगीन झिल्ली होती है
  • जिसमें अलग-अलग आकार का छिद्र होता है जिसे पुतली कहा जाता है।
  • इसमें एक गोलाकार और लंबा मांसपेशीय तंतू (फाइबर) होता है।
  • आइरिस सिलिअरी (ciliary) अंग से जुड़ा होता है। रेटिना - यह आंख का एक मुख्य भाग है जो देखने में सक्षम बनाता है।
  • क्रिस्टलीय लेंस की विशेषताएँ
    • लेंस एक पारदर्शी, उभयावतल (biconvex) संरचना है जो परितारिका और पुतली के पीछे स्थित होती है।
    • यह सिलिअरी मांसपेशियों द्वारा आकार परिवर्तित होकर समायोजन (accommodation) करता है।
  • कार्यप्रणाली
  • प्रकाश अपवर्तन
    • कॉर्निया (60% अपवर्तन) + लेंस (40% अपवर्तन) → रेटिना पर स्पष्ट प्रतिबिंब
    • कॉर्निया स्थिर अपवर्तन देता है, लेंस परिवर्तनीय।
    • लेंस की त्रुटि → दृष्टि दोष:
  • महत्वपूर्ण तथ्य
    • लेंस का अपवर्तनांक: ~1.39-1.42
    • मोतियाबिंद: लेंस अपारदर्शी → दृष्टि हानि
    • फैकोइमल्सीफिकेशन: आधुनिक मोतियाबिंद शल्य चिकित्सा

39. अवतल लेंस के प्रकाशीय केंद्र से होकर गुजरने वाली प्रकाश की किरण, अपवर्तन के बाद............. निकलेगी [RRB JE 27/05/2019 (Evening)]

Correct Answer: (a) बिना किसी विचलन के
Solution:
  • उत्तल लेंस जिसमें सतह से परावर्तित किरणों को प्रकाश के परावर्तन का उपयोग करके समानांतर पथ में प्रसारित किया जाता है।
  • इसकी फोकल लंबाई धनात्मक होती है। बना प्रतिबिम्ब वास्तविक और उल्टा होता है।
  • हाइपरमेट्रोपिया में उत्तल लेंस का प्रयोग किया जाता है।
  • अवतल लेंस एक अवतल लेंस स्रोत से सीधी प्रकाश किरण को विकृत, सीधी आभासी प्रतिबिंब में परिवर्तित कर देता है।
  • अवतल लेंस में बनने वाला प्रतिबिम्ब आभासी, सीधा तथा आकार में छोटा होता है।
  • अवतल दर्पण में आभासी फोकस और ऋणात्मक फोकस लंबाई होती है।
  • अवतल लेंस का आवर्धन एक से कम होता है। निकट दृष्टि दोष में अवतल लेंस का प्रयोग किया जाता है।
  • कारण
    • प्रकाशीय केंद्र वह बिंदु है जहाँ से गुजरने वाली किरण दोनों सतहों पर अभिलंब पड़ती है।
    • आपतन कोण (i) = 0°
    • अपवर्तन कोण (r) = 0°
  • चित्रण
    • वस्तु → किरण → O (प्रकाशीय केंद्र) → सीधी किरण (बिना मुड़े)
  • व्यावहारिक महत्व
    • किरण आरेख बनाते समय सबसे सरल किरण
    • सभी वस्तु स्थितियों में स्थिर संदर्भ रेखा
    • छवि निर्माण में आसान गणना
  • अध्याय 10: प्रकाश का परावर्तन और अपवर्तन में स्पष्ट उल्लेख:
    • "प्रकाशीय केंद्र से गुजरने वाली किरण अपवर्तन के बाद अपने मूल पथ पर ही चलती रहती है।"
    • निष्कर्ष: यह लेंसों का सार्वभौमिक नियम है।
    • प्रकाशीय केंद्र से गुजरने वाली किरण उत्तल हो या अवतल, हमेशा सीधी रेखा में निकलती है।

40. उत्तल लेंस द्वारा अपवर्तन के बाद 2F, पर वस्तु के समान आकार का प्रतिबिंब प्राप्त करने के लिए 'वस्तु को कहां रखा जाना चाहिए? [RRB JE 28/05/2019 (Afternoon)]

Correct Answer: (a) 2F, पर
Solution:
  • उत्तल लेंस (अभिसारी लेंस): एक लेंस जिसमें दो गोलाकार सतहें होती हैं, जो बाहर की ओर उभरी होती हैं
  • उभयोत्तल (double convex) लेंस या (उत्तल लेंस) कहलाती हैं। यह किनारों की तुलना में बीच में अधिक मोटा होता है।
  • उत्तल लेंस के नियम (वस्तु 2F₁ पर)
    • स्थिति: वस्तु को लेंस के 2F₁ (वक्रता केंद्र C के समान दूरी) पर रखें।
    • परिणाम: प्रतिबिंब 2F₂ पर बनेगा, वस्तु के समान आकार का, वास्तविक और उलटा।
  • गणितीय प्रमाण
    • लेंस सूत्र: 1/v-1/u=1/f
    • दिए गए: u=-2f (2F₁ पर), f=+f (उत्तल लेंस)
    • 1/v - 1/(-2f) = 1/f
    • 1/v + 1/(2f) = 1/f
    • 1/v = 1/f - 1/(2f) = 1/(2f)
    • v = +2f = 2F₂
    • आवर्धन: m=v/u=(+2f)/(-2f)=-1
    • नकारात्मक m = उलटा प्रतिबिंब, |m| = 1 = समान आकार।
  • किरण आरेख
    • वस्तु (2F₁) → मुख्य अक्ष समांतर किरण → 2F₂ पर
    • → F₁ से गुजरने वाली किरण → 2F₂ पर
    • → प्रकाशिक केंद्र → सीधी → 2F₂ पर
  • व्यावहारिक उपयोग
    • फोटोकॉपी मशीन: दस्तावेज़ 2F पर → समान आकार
    • प्रोजेक्टर: स्लाइड 2F पर → समान आकार स्क्रीन पर
    • माइक्रोस्कोप उद्देश्य: समान आकार मध्यवर्ती प्रतिबिंब
    • निष्कर्ष: 2F₁ पर वस्तु → 2F₂ पर समान आकार उत्तल लेंस का विशेष गुण है। यह कक्षा 10 NCERT प्रकाश अपवर्तन का मूल सिद्धांत है।