प्रकाश और प्रकाशिकी (भौतिक विज्ञान) (Part-I)

Total Questions: 50

1. निम्न में से किस प्रकार की प्रतिबिंब पर्दे पर प्राप्त की जा सकती हैं? [RRC Group D 17/08/2022 (Morning)]

(A) वास्तविक और बड़ा
(B) वास्तविक और छोटा
(C) आभासी और बड़ा
(D) आभासी और छोटा

Correct Answer: (c) (A) और (B) दोनों
Solution:
  • (A) और (B) दोनों। वस्तु को वक्रता केंद्र (C) और फोकस (F) (अवतल दर्पण) के बीच रखने पर,
  • जब वस्तु फोकस (F,) और वक्रता केंद्र (2F,) (उत्तल लेंस) के बीच रखी जाती है
  • तो वास्तविक और बड़ा प्रतिबिंब प्राप्त होता है वास्तविक और छोटा जब कोई वस्तु अवतल दर्पण में वक्रता केंद्र (C) से परे और उत्तल लेंस में (2F.) से परे रखी जाती है।
  • आभासी और बड़ा (Virtual and enlarged) उत्तल लेंस ।
  • आभासी और छोटा - एक उत्तल दर्पण हमेशा एक आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिम्ब बनाता है, चाहे वस्तु की स्थिति कुछ भी हो।
  • वास्तविक प्रतिबिंब (Real Image) की विशेषताएँ
    • निर्माण प्रक्रिया: वास्तविक प्रतिबिंब तब बनता है
    • जब प्रकाश किरणें परावर्तन या अपवर्तन के बाद वास्तविक रूप से एक बिंदु पर अभिसरित (Converge) हो जाती हैं।
    • किरणें आगे बढ़कर मिलती हैं, पीछे की ओर बढ़ाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
    • पर्दे पर प्राप्ति: यह पर्दे, स्क्रीन या दीवार पर स्पष्ट रूप से प्राप्त किया जा सकता है
    • क्योंकि किरणें वास्तव में उस स्थान पर एकत्रित होती हैं।
    • उदाहरण के लिए, सिनेमाघर के प्रोजेक्टर में फिल्म की वास्तविक प्रतिबिंब पर्दे पर दिखाई देती है।
    • अभिविन्यास: हमेशा उल्टा (Inverted) होता है, अर्थात वस्तु के ऊर्ध्वाधर अक्ष के सापेक्ष नीचे की ओर।
    • आकार: वस्तु से बड़ा, छोटा या बराबर हो सकता है।
  • उदाहरण:
    • अवतल दर्पण (Concave Mirror): जब वस्तु फोकस बिंदु (F) से बाहर रखी जाती है
    • तो वास्तविक प्रतिबिंब बनता है। जैसे, दाढ़ी बनाने वाले दर्पण में।
    • उत्तल लेंस (Convex Lens): वस्तु को फोकस से बाहर रखने पर वास्तविक प्रतिबिंब बनता है। जैसे, कैमरा या प्रोजेक्टर लेंस।
    • नोट: वास्तविक प्रतिबिंब को छूया या पकड़ा जा सकता है, क्योंकि यह वास्तविक किरणों से बनता है।
  • आभासी प्रतिबिंब (Virtual Image) की विशेषताएँ
    • निर्माण प्रक्रिया: आभासी प्रतिबिंब तब बनता है जब प्रकाश किरणें परावर्तन या अपवर्तन के बाद छिटकती (Diverge) हैं
    • इन्हें पीछे की ओर बढ़ाने पर एक बिंदु पर मिलती हुई प्रतीत होती हैं। किरणें वास्तव में उस बिंदु पर नहीं मिलतीं।
    • पर्दे पर प्राप्ति: पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि किरणें फैल चुकी होती हैं कोई वास्तविक अभिसरण नहीं होता। इसे केवल आँख से देखा जा सकता है।
    • अभिविन्यास: हमेशा सीधा (Erect) होता है, वस्तु के समान दिशा में।
    • आकार: सामान्यतः वस्तु से छोटा, लेकिन कभी-कभी बड़ा भी।
  • उदाहरण:
    • उत्तल दर्पण : हमेशा आभासी प्रतिबिंब बनाता है। जैसे, वाहनों के साइड मिरर।
    • उत्तल लेंस: वस्तु को फोकस के अंदर रखने पर।
    • अवतल लेंस: हमेशा आभासी।
  • क्यों केवल वास्तविक प्रतिबिंब पर्दे पर प्राप्त होता है? (विस्तृत व्याख्या)
    • पर्दा एक अपारदर्शी सतह है जो प्रकाश को रोकती है।
    • वास्तविक प्रतिबिंब के लिए किरणें पहले से ही एक बिंदु पर मिल चुकी होती हैं
    • इसलिए पर्दे पर वे एक छवि बनाती हैं (जैसे, उल्टा चित्र)। आभासी प्रतिबिंब में किरणें फैली हुई आती हैं
    • इसलिए पर्दे पर कोई स्पष्ट छवि नहीं बनती—केवल धुंधला धब्बा या कुछ नहीं।
    • यह भौतिकी का मूल सिद्धांत है, जो NCERT कक्षा 10 विज्ञान में वर्णित है।
    • प्रयोग: उत्तल लेंस से सूर्य की किरणें एक कागज पर केंद्रित करने पर वास्तविक प्रतिबिंब (स्पॉट) बनता है, जो जल जाता है।
  • व्यावहारिक अनुप्रयोग
    • वास्तविक प्रतिबिंब: टेलीस्कोप, माइक्रोस्कोप, कैमरा, सिनेमाटोग्राफ।
    • आभासी प्रतिबिंब: शेविंग मिरर, रियरव्यू मिरर, चश्मा।

2. यदि प्रकाश की किरण अवतल दर्पण के वक्रता केंद्र से होकर गुजरती है, तो आपतित किरण और परावर्तित किरण के बीच बनने वाला कोण के बराबर होगा ? [RRC Group D 17/08/2022 (Morning)]

Correct Answer: (a) 0°
Solution:
  •  जैसे ही प्रकाश की किरण एक अवतल दर्पण के वक्रता केंद्र से होकर गुजरती है, यह दर्पण पर अभिलम्ब के साथ टकराती है
  • (अर्थात यह दर्पण पर 90 डिग्री और अभिलम्ब के साथ ० डिग्री पर आपतित होती है)।
  • अतः आपतित किरण अभिलम्ब के संपाती है। इसलिए आपतन कोण 0 डिग्री है।
  • अवतल दर्पण के मूलभूत सिद्धांत
    • अवतल दर्पण (Concave Mirror) एक गोलीय दर्पण है
    • जिसकी परावर्तक सतह अंदर की ओर घुमावदार होती है। इसके प्रमुख बिंदु हैं:
    • ध्रुव (P): दर्पण का मध्य बिंदु।
    • मुख्य अक्ष : ध्रुव और वक्रता केंद्र को जोड़ने वाली रेखा।
    • वक्रता केंद्र (C): दर्पण के गोले का केंद्र, जो मुख्य अक्ष पर ध्रुव से 2f (f = फोकल लंबाई) दूरी पर होता है।
    • फोकस (F): मुख्य अक्ष पर ध्रुव से f दूरी पर, जहाँ C के बीच f = R/2 (R = वक्रता त्रिज्या)।
  • परावर्तन का नियम:
    • आपतन कोण (i) = परावर्तन कोण (r)।
    • आपतित किरण, परावर्तित किरण और सामान्य (Normal) एक ही विमान में।
    • सामान्य वह रेखा है जो दर्पण सतह पर आपतन बिंदु से लंबवत् निकलती है।
    • वक्रता केंद्र से गुजरने वाली किरण का व्यवहार (चित्रण सहित व्याख्या)
    • जब कोई प्रकाश किरण वक्रता केंद्र C से होकर दर्पण पर आपतित होती है:
    • आपतन बिंदु पर सामान्य की दिशा: वक्रता केंद्र C गोले का केंद्र है, इसलिए दर्पण के किसी भी बिंदु पर सामान्य हमेशा C से होकर गुजरती है।
    • अर्थात, C से आने वाली किरण दर्पण पर ठीक सामान्य के अनुदिश (Along the Normal) पड़ेगी।
  • परावर्तन नियम का अनुप्रयोग:
    • चूँकि किरण सामान्य के समांतर है, इसलिए आपतन कोण i = 0°।
    • परावर्तन नियम से r = i = 0°।
    • इसलिए, परावर्तित किरण भी सामान्य के ही अनुदिश यानी उसी पथ पर वापस चली जाएगी।
  • कोण मापन:
    • आपतित किरण दर्पण की ओर आ रही है।
    • परावर्तित किरण उसी दर्पण से वापस उसी मार्ग पर लौट रही है।
    • दोनों किरणें एक ही सीधी रेखा पर हैं, लेकिन विपरीत दिशा में।
    • अतः, आपतित और परावर्तित किरण के बीच का कोण 180° होता है (सीधी कोण)।
  • क्यों ऐसा होता है? (गहन कारण)
    • ज्यामितीय कारण: दर्पण गोलीय है, इसलिए परावर्तक सतह पर कोई भी बिंदु C से समान दूरी (R) पर होता है।
    • सामान्य C से लंबवत् होती है, अतः C से आने वाली किरण सामान्य के सह-अनुदिश है।
    • उत्तल दर्पण में भिन्नता: उत्तल दर्पण में किरण C को छूती नहीं
    • लेकिन C की ओर निर्देशित होने पर भी सामान्य के कारण उसी पथ पर वापस प्रतिबिंबित होती है।
    • प्रमाण: यदि i ≠ 0° होता, तो r भी बदलता, लेकिन i=0° होने से प्रतिबिंब उसी मार्ग पर।
  • अन्य महत्वपूर्ण किरण नियम (तुलना के लिए)
  • व्यावहारिक उदाहरण और अनुप्रयोग
    • प्रयोग: अवतल दर्पण में सूर्य की किरण को C से होकर भेजें—वह वापस स्रोत पर ही केंद्रित हो जाएगी।
  • उपकरण:
    • खगोलशास्त्र: टेलीस्कोप में C-संबंधित गणना।
    • हेडलाइट्स: किरण ट्रेसिंग में उपयोग।
    • प्रतियोगी परीक्षाएँ: SSC, रेलवे, NEET में MCQ जैसे: "कोण = 180°" सही विकल्प।
    • त्रुटि सुधार: यदि किरण C से न गुजरे, तो कोण भिन्न (जैसे फोकस से: समांतर)।
  • बहुविकल्पीय प्रश्नों में सही उत्तर
    • 150° → गलत।
    • 0° → गलत (0° का अर्थ समान दिशा)।
    • 180° → सही
    • 90° → सामान्य पर लंबवत् गिरने पर।

3. निम्नलिखित चित्र में आपतित किरण और निर्गत किरण को क्रमशः किसके द्वारा दर्शाया गया है? [RRC Group D 17/08/2022 (Afternoon)]

Correct Answer: (b) AB और CD
Solution:
  • AB और CDI आपतित किरण (Incident Ray) = AB और आपाती (निर्गत) किरण (Emergent Ray) = CD ।
  • अपवर्तित किरण (Refracted Ray) = BC | आपतित किरण प्रकाश की एक सरलरेखीय किरण होती है
  • जो किसी सतह से टकराती है। आपाती किरण परावर्तन या अपवर्तन या परिक्षेपण के बाद निकलने वाली किरण है।
  • प्रश्न का संदर्भ और मानक चित्र
    • चूँकि क्वेरी में "निम्नलिखित चित्र" उल्लिखित है, लेकिन चित्र दृश्यमान नहीं है
    • यह प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे RRB, SSC) के मानक प्रिज्म अपवर्तन आरेख को संदर्भित करता है।
    • ऐसे चित्रों में प्रिज्म (ABC या ABCD) दिखाया जाता है, जहाँ प्रकाश किरण आपतित (Incident), अपवर्तित (Refracted) और निर्गत (Emergent) होती है।
    • आपतित किरण : बाहरी माध्यम से प्रिज्म के पहले पृष्ठ (AB) पर गिरने वाली किरण AB (A से B तक)।
    • अपवर्तित किरण : प्रिज्म के अंदर B से C की ओर।
    • निर्गत किरण : प्रिज्म के दूसरे पृष्ठ (AC) से निकलने वाली किरण CD (C से D तक)।
  • आपतित किरण (Incident Ray) की परिभाषा और विशेषताएँ
    • परिभाषा: वह प्रकाश किरण जो किसी सतह (दर्पण, प्रिज्म, लेंस) पर पहली बार आपतित (टकराती) होती है।
    • चित्र में लेबलAB—प्रिज्म के पहले सतह पर प्रवेश करने से पहले।
  • विशेषताएँ:
    • आपतन कोण (i) सामान्य से बनाता है।
    • परावर्तन/अपवर्तन का प्रारंभ बिंदु।
  • उदाहरण:
    • प्रिज्म में PQ या AB।
  • निर्गत किरण (Emergent Ray) की परिभाषा और विशेषताएँ
    • परिभाषा: वह प्रकाश किरण जो माध्यम (प्रिज्म, स्लैब) से बाहर निकलती है। अपवर्तन के बाद अंतिम किरण।
    • चित्र में लेबलCD—प्रिज्म के दूसरे सतह से बाहर।
  • विशेषताएँ:
    • निर्गत कोण (e) बनाता है।
    • विचलन कोण (δ) = आपतित और निर्गत के बीच का कोण।
  • उदाहरण :
    • प्रिज्म से QR या CD।
  • परावर्तन vs अपवर्तन चित्रों में अंतर (पूर्व संदर्भ से)
    • पूर्व प्रश्न अवतल दर्पण पर थे, जहाँ:
    • आपतित किरण: दर्पण पर गिरने वाली।
    • परावर्तित किरण : वापस लौटने वाली (निर्गत नहीं कहते)।
    • लेकिन "निर्गत किरण" शब्द अपवर्तन (Refraction) के लिए विशिष्ट है (NCERT कक्षा 10, अध्याय 9-10)।
  • अपवर्तन सिद्धांत और चित्र निर्माण
    • स्नेल का नियम: sin i / sin r = μ (अपवर्तनांक)।
    • प्रिज्म में दो अपवर्तन: प्रवेश पर i1 → r1, निकास पर i2 → e।
    • न्यूनतम विचलन: δ_m = 2i - A (A=प्रिज्म कोण)।
  • चित्र बनाने के नियम:
    • प्रिज्म ABC खींचें (तीक्ष्ण कोण A ऊपर)।
    • आपतित किरण AB पर i कोण से।
    • सामान्य B पर, अपवर्तित BC की ओर।
    • C पर दूसरा सामान्य, निर्गत CD।
  • परीक्षा उपयोगिता (SSC/RRB/NEET)
    • MCQ विकल्प: (a) PQ, QR (b) AB, CD (c) BC, CD।
    • सही: AB (आपतित), CD (निर्गत)।
    • संबंधित: स्लैब में आपतित-निर्गत समांतर, पाश्विक विस्थापन।

4. एक गोलीय दर्पण के ध्रुव और वक्रता केंद्र के बीच की दूरी, इसकी फोकस दूरी f के पदों में, ............. के बराबर है। [RRC Group D 17/08/2022 (Afternoon)]

Correct Answer: (d) 2f
Solution:
  • 2F I F = R/2, इसलिए R = 2F I वक्रता की त्रिज्या (R) (गोलाकार दर्पण की) - उस वृत्त की त्रिज्या जिसका गोलीय दर्पण एक भाग है।
  • वक्रता का केंद्र (गोलाकार दर्पण का) इसे उस गोले के केंद्र के रूप में परिभाषित किया गया है
  • जिसका गोलीय दर्पण एक हिस्सा है। फोकस दूरी (f) (गोलाकार दर्पण की) यह ध्रुव और दर्पण के मुख्य फोकस के बीच की दूरी है।
  • गोलीय दर्पण के मूलभूत तत्व
    • गोलीय दर्पण (Spherical Mirror) एक चमकदार धातु की सतह है जो गोले के खंड के रूप में होती है। ये दो प्रकार के होते हैं:
    • अवतल दर्पण (Concave Mirror): परावर्तक सतह अंदर की ओर घुमावदार।
    • उत्तल दर्पण (Convex Mirror): परावर्तक सतह बाहर की ओर घुमावदार।
  • मुख्य तत्व:
    • ध्रुव : दर्पण का केंद्र बिंदु।
    • वक्रता केंद्र : गोले का केंद्र बिंदु, जहाँ से दर्पण का वक्र बनता है।
    • मुख्य अक्ष : ध्रुव P और वक्रता केंद्र C को जोड़ने वाली रेखा।
    • मुख्य फोकस : मुख्य अक्ष पर वह बिंदु जहाँ मुख्य अक्ष के समांतर आपतित किरणें परावर्तित होकर मिलती हैं (अवतल) या मिलती प्रतीत होती हैं (उत्तल)।
    • वक्रता त्रिज्या : ध्रुव P और वक्रता केंद्र C के बीच की दूरी।
  • मुख्य संबंध: R = 2f
    • गोलीय दर्पण सूत्र का मूल सिद्धांत है कि वक्रता त्रिज्या R हमेशा फोकस दूरी f के दोगुने** होती है**:
    • R = 2f  या  f = R/2
    • यह सभी गोलीय दर्पणों (अवतल, उत्तल, दोनों) के लिए लागू होता है।
  • आरेखीय स्पष्टीकरण:
    • अवतल दर्पण:        P ----- F ----- C
    • दूरी:              f      f      f
    • कुल PC = PF + FC = f + f = 2f = R
    • उत्तल दर्पण:        C ----- F ----- P
    • दूरी (ऋणात्मक चिह्न): सभी दूरी ऋणात्मक, लेकिन |R| = 2|f|

5. एक छात्र किसी गोलीय दर्पण का उपयोग करके एक कागज पर सूर्य का एक स्पष्ट प्रतिबिम्ब फोकस करता है, जो कुछ समय बाद जलने लगता है। दर्पण के बारे में इनमे में से कौन से कथन सही हैं? [RRC Group D 17/08/2022 (Evening)]

(A) यह अवतल गोलीय दर्पण है
(B) इसकी फोकस दूरी धनात्मक है
(C) यह एक अभिसारी दर्पण है 

Correct Answer: (a) (A) और (C) दोनों
Solution:
  • (A) और (C) दोनों। अवतल दर्पण एक अभिसारी दर्पण होता है जिस पर जब समानांतर किरणें पड़ती हैं
  • तो सभी किरणें एक बिंदु पर अभिसरित हो जाती हैं जिसे अवतल दर्पण का फोकस कहा जाता है
  • चूंकि सभी किरणें एक बिंदु पर मिलती हैं तो उस बिंदु पर तीव्रता बढ़ जाती है
  • इसीलिए जब किसी कागज़ को अवतल दर्पण से गुजरने वाले सूर्य के प्रकाश के संपर्क में रखा जाता है
  • तो कागज में आग लग जाती है। अवतल दर्पण एक आभासी और आवर्धित प्रतिबिंब बनाता है।
  • अवतल दर्पण की फोकस दूरी ऋणात्मक होती है क्योंकि अवतल दर्पण का फोकस, दर्पण के सामने होता है।
  • क्यों अवतल दर्पण?
    • अभिसारी प्रकृति: समांतर किरणें F पर मिलती हैं (वास्तविक प्रतिबिंब)।
    • उत्तल दर्पण: अपसारी—किरणें फैलती हैं, पर्दे पर प्रतिबिंब नहीं बनता।
    • कथनों का विश्लेषण (कार्टेरियन चिह्न सम्मेलन)
  • दर्पण सूत्र (सूर्य के लिए u = -∞):
    • 1/v + 1/u = 1/f
    • 1/v + 0 = 1/f → v = f
    • प्रतिबिंब फोकस पर, वास्तविक और उल्टा।
  • किरण नियम (अवतल दर्पण):
    • मुख्य अक्ष समांतर → F पर।
    • F से → समांतर।
    • C से → उसी पथ पर वापस।
    • सूर्य किरणें #1 का पालन।
  • ऊर्जा संकेंद्रण:
    • सूर्य विकिरण ~1366 W/m²।
    • दर्पण व्यास d → क्षेत्र π(d/2)²।
    • फोकस पर तीव्रता ~ (d/f)² गुना → 1000°C+ ताप।
  • चिह्न सम्मेलन (NCERT मानक)
    • दिशा ← वस्तु/प्रकाश की दिशा
    • - वस्तु दूरी u: हमेशा ऋणात्मक।
    • - अवतल f: ऋणात्मक (F सामने)।
    • - v ऋणात्मक: वास्तविक प्रतिबिंब।
    • उदाहरण: f = -10 cm → सूर्य v = -10 cm (कागज वहाँ)।
  • सावधानियाँ:
    • आँखों पर न फोकस करें (चोट)।
    • छोटा f → अधिक ताप।
  • परीक्षा MCQ (Testbook/NCERT Exemplar)
    • प्रश्न: कागज जलाने वाला दर्पण?
    • सही: (A) & (C)।
    • संबंधित: "अभिसारी = अवतल दर्पण"।

6. एक प्रकाश किरण दो माध्यमों को पृथक करने वाले एक इंटरफ़ेस पर उसके अभिलम्ब के अनुदिश आपतित होती है। आपतित किरण और अपवर्तित किरण के बीच का कोण ______ के बराबर होता है।   [RRC Group D 17/08/2022 (Evening)]

Correct Answer: (b) 0°
Solution:
  • 0°. आपतित कोण - आपतित किरण और सतह के अभिलम्ब के बीच का कोण। आपतित किरण - प्रकाश की वह किरण जो सतह से टकराती है।
  • परावर्तित किरण वह किरण जो दूर परावर्तित हो जाती है। परावर्तन किसी वस्तु की सतह से प्रकाश के लौटने की घटना जब उस पर प्रकाश पड़ता है।
  • अपवर्तन एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाने वाली तरंग की दिशा में परिवर्तन।
  • महत्वपूर्ण परिभाषाएँ:
    • आपतित किरण (Incident Ray): इंटरफेस पर पहली बार टकराने वाली किरण।
    • अभिलम्ब (Normal): आपतन बिंदु पर इंटरफेस के लंबवत (90°) खींची गई काल्पनिक रेखा।
    • आपतन कोण (i): आपतित किरण और अभिलम्ब के बीच का कोण।
    • अपवर्तित किरण (Refracted Ray): दूसरे माध्यम में प्रवेश करने वाली किरण।
    • अपवर्तन कोण (r): अपवर्तित किरण और अभिलम्ब के बीच का कोण।
  • स्नेल का नियम:
    • sin i / sin r = μ₂/μ₁ (अपवर्तनांक अनुपात)
    • यह चित्र आपतन कोण (i) और अपवर्तन कोण (r) को दर्शाता है, जहाँ अभिलम्ब सामान्य है।
  • विशेष स्थिति: आपतित किरण अभिलम्ब के अनुदिश (i = 0°)
    • जब आपतित किरण अभिलम्ब के सह-अनुदिश** (Along the Normal) होती है**:
    • आपतन कोण i = 0° (क्योंकि आपतित किरण अभिलम्ब के साथ 0° कोण बनाती है)।
    • sin i = sin 0° = 0।
    • स्नेल नियम:
    • sin 0° / sin r = μ₂/μ₁
    • 0 / sin r = μ₂/μ₁
    • sin r = 0 → r = 0°
    • निष्कर्ष: अपवर्तन कोण r = 0°
  • परिणाम:
    • आपतित किरण और अपवर्तित किरण एक ही सीधी रेखा पर होती हैं।
    • दोनों अभिलम्ब के सह-अनुदिश।
    • आपतित और अपवर्तित के बीच कोण = i + r = 0° + 0° = 0°।
    • तीन किरणें (आपतित, अभिलम्ब, अपवर्तित) एक ही रेखा पर → कोण 0°।
  • क्यों ऐसा होता है? (भौतिक कारण)
    • कोणीय विचलन शून्य: अपवर्तन कोण पर निर्भर करता है। i=0° पर कोई कोणीय परिवर्तन नहीं।
    • वेग परिवर्तन: केवल प्रकाश का वेग बदलता है (μ₂ ≠ μ₁), दिशा नहीं।
    • हवा → कांच: वेग कम (c/1 → c/1.5)।
    • कांच → हवा: वेग बढ़।
    • ज्यामिति: अभिलम्ब के सह-अनुदिश किरण सामान्य है → विचलन शून्य।
    • समानता: यह दर्पण सामान्य पर आपतन जैसा (i=0° → परावर्तन भी उसी पथ पर)।
  • प्रमाणन प्रयोग
    • प्रयोग: लेजर/टॉर्च को कांच की स्लैब पर लंबवत गिराएँ।
    • परिणाम: किरण सीधी निकलती है, कोई झुकाव नहीं।
    • पाश्विक विस्थापन: मोटाई के कारण थोड़ा shift, लेकिन कोण शून्य।
    • NCERT उदाहरण: अध्याय 10, "सामान्य आपतन" → कोण विचलन शून्य।
  • व्यावहारिक अनुप्रयोग
    • प्रिज्म न्यूनतम विचलन: i=0° के निकट स्थिति।
    • ऑप्टिकल फाइबर: सह-अनुदिश प्रकाश → कोई हानि।
    • माइक्रोस्कोप/टेलीस्कोप: सामान्य आपतन → अधिक तीव्रता।
    • प्रयोगशाला: स्लैब अपवर्तन मापन में i=0° calibration।
  • परीक्षा उपयोगिता (SSC/NEET/RRB)
  • MCQ विकल्प:
    • (A) 0° → सही।
    • (B) 90° → गलत (लंबवत् आपतन पर)।
    • (C) 180° → गलत (परावर्तन सामान्य पर)।
    • (D) r → गलत (r भी 0° है)।
    • संबंधित प्रश्न: "सामान्य आपतन पर अपवर्तन कोण?" → 0°।
  • सावधानियाँ
    • परावर्तन से भ्रम: सामान्य परावर्तन में भी 180° (वापस), लेकिन अपवर्तन सीधी।
    • चिह्न: कोण हमेशा धनात्मक, अभिलम्ब से मापा।
    • सीमा: केवल पैराक्सियल किरणें (NCERT मानक)।

7. निम्नलिखित में से कौन से कथन सही हैं? [RRC Group D 18/08/2022 (Morning)]

(A) किसी लेंस के लिए, पहला मुख्य फोकस उस वस्तु की स्थिति है जिसका प्रतिबिंब अनंत पर है।

(B) किसी लेंस के लिए पहला मुख्य फोकस उस वस्तु की स्थिति होती है जिसका प्रतिबिम्ब फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर बनता है।

(C) किसी लेंस के लिए दूसरा मुख्य फोकस वास्तविक प्रतिबिम्ब की स्थिति है जिसकी वस्तु अनंत पर स्थित है।

(D) किसी लेंस के लिए दूसरा मुख्य फोकस उस वस्तु की स्थिति है जिसका प्रतिबिंब फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर बनता है।

Correct Answer: (c) (A) और (C) दोनों
Solution:
  • (A) और (C) दोनों। उत्तल लेंस द्वारा प्रतिबिंब निर्माण वस्तु स्थिति (प्रतिबिंब स्थिति, प्रतिबिंब की प्रकृति) अनंत पर (फोकस F₂ पर, अत्यधिक छोटा, वास्तविक और उल्टा)
  • 2F₁ पर (2F₁ पर, समान आकार, वास्तविक और उल्टा), F₁ और 2F₁ के बीच (2F₂ से परे, बड़ा), वास्तविक और उल्टा), फोकस F₁ पर (अनंत पर, अत्यधिक विस्तारित, वास्तविक और उल्टा)
  • फोकस F₁ और ऑप्टिकल सेंटर ० के बीच (लेंस के उसी तरफ, जिस तरफ वस्तु है, बड़ा, आभासी और सीधा), 2F₁ से परे (F₂ और 2F₂ के बीच, छोटा, वास्तविक और उल्टा)।
  • संदर्भ: प्रकाशिकी श्रृंखला के सही कथन (Conversation Context)
    • हमारी पूर्ववर्ती चर्चा (5 प्रश्नों) के आधार पर, निम्न कथन सत्य हैं। ये NCERT कक्षा 10 भौतिकी के मूल सिद्धांत हैं:
    • पर्दे पर केवल वास्तविक प्रतिबिंब प्राप्त होते हैं✅सही
    • वास्तविक प्रतिबिंब: किरणें अभिसरित → पर्दे पर छवि।
    • आभासी: किरणें छिटकी → पर्दे पर नहीं।
  • अवतल दर्पण के वक्रता केंद्र से गुजरने वाली किरण पर 180° कोण बनता हैसही
    • C ←--- आपतित किरण ---→ परावर्तित किरण ---→ C (180°)
    • i = 0° (सामान्य सह-अनुदिश) → r = 0° → कुल कोण 180°
  • ध्रुव-वक्रता केंद्र दूरी = 2f सही
    • P ----- f ----- F ----- f ----- C
    • कुल PC = 2f = R (वक्रता त्रिज्या)
    • सर्वत्र मान्य: अवतल/उत्तल दोनों।
  • कागज जलाने वाला दर्पण अवतल + अभिसारी हैसही
    • सूर्य (∞) → u = -∞ → v = f → कागज F पर जलता है
    • f ऋणात्मक (अवतल), अभिसारी प्रकृति।
  • अभिलम्ब के अनुदिश आपतन पर आपतित-अपवर्तित कोण = 0° सही
    • sin i / sin r = μ → i=0° → r=0° → कोण = 0°
    • स्नेल नियम का विशेष मामला।
    • सभी कथनों की तालिका (सत्यापन)
  • परीक्षा दृष्टिकोण (SSC/RRB/NEET)
    • ऐसे प्रश्न बहुविकल्पीय होते हैं:
    • (A) केवल 1,2 सही
    • (B) 2,3,4 सही
    • (C) **सभी सही**
    • (D) केवल 5 सही
    • उत्तर: (C) सभी सही।
  • मूलभूत सिद्धांत संक्षेप
    • दर्पण सूत्र: 1/v + 1/u = 1/f (f = R/2)
    • स्नेल नियम: sin i/sin r = μ
    • वास्तविक प्रतिबिंब: पर्दे पर → अवतल/उत्तल लेंस

8. एक लड़का एक लेंस का उपयोग करके एक दूरस्थ वस्तु का एक स्पष्ट प्रतिबिंब एक पर्दे पर फोकस करता है। लेंस और पर्दे के बीच की दूरी लगभग________ के बराबर होगी। [RRC Group D 18/08/2022 (Morning)]

Correct Answer: (d) f
Solution:
  • f (फोकस दूरी)। एक उत्तल लेंस एक वास्तविक प्रतिबिंब बनाने के लिए दूर की वस्तु से आने वाली सभी किरणों को अपने फोकस पर केंद्रित करता है।
  • यदि प्रतिबिम्ब लेंस के फोकस बिन्दु पर रखी स्क्रीन पर प्राप्त होता है, तो लेंस तथा स्क्रीन के बीच की दूरी लेंस की फोकस दूरी (f) होगी।
  • उत्तर: लेंस और पर्दे के बीच की दूरी लगभग लेंस की फोकस दूरी (f)** के बराबर होगी।**
  • विस्तृत व्याख्या (Full Detail):
    • यह प्रश्न उत्तल लेंस (Convex Lens) के गुणों पर आधारित है
    • जहाँ एक दूरस्थ वस्तु (distant object) का स्पष्ट प्रतिबिंब पर्दे पर बनाया जा रहा है। आइए चरणबद्ध तरीके से समझते हैं:
  • उत्तल लेंस का मूल सूत्र (Lens Formula):
    • 1/v - 1/u = 1/f
    • u = वस्तु से लेंस की दूरी (object distance, हमेशा ऋणात्मक)
    • v = प्रतिबिंब से लेंस की दूरी (image distance, वास्तविक प्रतिबिंब के लिए धनात्मक)
    • f = लेंस की फोकस दूरी (focal length, उत्तल लेंस के लिए धनात्मक)
  • दूरस्थ वस्तु का अर्थ:
    • दूरस्थ वस्तु से तात्पर्य u ≈ ∞ (अनंत) से है। उदाहरण: सूर्य, दूर का पेड़ या पहाड़।
    • जब u → ∞, तो 1/u → 0 हो जाता है।
    • सूत्र सरल हो जाता है: 1/v = 1/f ⇒ v = f
    • निष्कर्ष: प्रतिबिंब लेंस के पहले फोकस बिंदु (F) पर ही बनेगा। इसलिए, लेंस से पर्दे की दूरी = f।
  • रेय ट्रेसिंग (Ray Diagram) से समझें:
    • दूरस्थ वस्तु (∞) ────平行 किरणें───→ लेंस → F (पहला फोकस) पर प्रतिबिंब
    • समानांतर किरण (Parallel Ray): वस्तु अनंत पर होने से किरणें लेंस के मुख्य अक्ष के समांतर आती हैं। ये लेंस से गुजरकर पहले फोकस F पर मिलती हैं।
    • स्पष्ट प्रतिबिंब पाने के लिए पर्दा ठीक F पर रखें।
    • लेंस और पर्दे के बीच दूरी = f (लगभग, क्योंकि वस्तु "लगभग अनंत" है)।
  • प्रयोगिक सत्यापन (Experimental Verification):
    • प्रयोग: दूर के पेड़/टॉवर का प्रतिबिंब बनाएं।
    • लेंस को खींचकर पर्दा हिलाएं → स्पष्ट image f दूरी पर बनेगी।
    • f मापना: इसी विधि से फोकस दूरी ज्ञात करते हैं (Optical Bench प्रयोग)।
    • नोट: यदि वस्तु "लगभग दूरस्थ" है (u बहुत बड़ा), तो v ≈ f (समीकरण से 1/v ≈ 1/f)।
  • गणितीय उदाहरण:
    • मान लीजिए f = 20 cm।
    • u = ∞ → v = 20 cm।
    • यदि u = 1000 cm (लगभग ∞), तो 1/v = 1/20 + 1/(-1000) = 0.05 - 0.001 = 0.049 → v ≈ 20.4 cm (लगभग f)।
  • महत्वपूर्ण बिंदु :
    • उत्तल लेंस ही पर्दे पर वास्तविक प्रतिबिंब बनाता है (अवतल लेंस नहीं)।
    • पर्दे की आवश्यकता: वास्तविक प्रतिबिंब के लिए (आभासी नहीं दिखता)।
    • MCQ विकल्प: सामान्यतः 2f, f, ∞ आदि → सही: f।
    • अनुप्रयोग: कैमरा, प्रोजेक्टर में दूर की वस्तु का image f पर फोकस।

9. एक अवतल लेंस के मुख्य फोकस पर एक वस्तु रखी जाती है। निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प निर्मित प्रतिबिंब की विशेषताओं का प्रतिनिधित्व करता है? [RRC Group D 18/08/2022 (Morning)]

Correct Answer: (b) आभासी और अत्यधिक छोटा
Solution:
  • आभासी और अत्यधिक छोटा (Virtual and highly diminished) ।
  • अवतल लेंस द्वारा प्रतिबिंब का बनना वस्तु स्थिति (प्रतिबिंब स्थिति, प्रतिबिंब की प्रकृति तथा आकारअनंत पर (फोकस पर, आभासी और अत्यधिक छोटा), लेंस और अनंत के बीच (लेंस और एक ही तरफ फोकस पर, आभासी और छोटा)।
  • अवतल लेंस की मूलभूत विशेषताएँ:
    • अपसारी लेंस (Diverging Lens): समानांतर किरणें लेंस से गुजरकर फैल जाती हैं (अभिसरण प्रतीत होती हैं)।
    • फोकस दूरी (f): हमेशा ऋणात्मक (f < 0)।
    • सर्वत्र एकसमान: किसी भी स्थिति में वस्तु रखने पर प्रतिबिंब आभासी (Virtual), सीधा (Erect) और छोटा (Diminished) ही बनता है। वास्तविक प्रतिबिंब असंभव।
    • प्रकाशिकी सिद्धांत: लेंस फोकस के बाएँ ओर (वस्तु पक्ष) आभासी प्रतिबिंब बनाता है।
  • Lens Formula का उपयोग:
    • 1/v - 1/u = 1/f
    • u = -f (वस्तु मुख्य फोकस पर, convention: वस्तु दूरी ऋणात्मक)।
    • f = -|f| (अवतल लेंस)।
    • 1/v - 1/(-f) = 1/(-|f|)
    • 1/v + 1/f = -1/|f|
    • 1/v = -1/|f| - 1/f = -2/|f|
    • v = -|f|/2
  • निष्कर्ष:
    • v < 0 → आभासी प्रतिबिंब (लेंस के बाएँ ओर, |v| = |f|/2)।
    • मैग्नीफिकेशन (m): m = hᵢ/hₒ = v/u = (-|f|/2)/(-f) = 1/2 → छोटा (0.5 गुना)।
    • यदि f = -20 cm: u = -20 cm → v = -10 cm (लेंस से 10 cm बाएँ), m = 0.5।
  • किरण आरेख (Ray Diagram) से स्पष्टता:
    • वस्तु (O) at F ───→ लेंस → फैली हुई किरणें → आभासी F' पर प्रतिबिंब (I)
  • मानक किरणें (3 मुख्य):
    • मुख्य अक्ष के समांतर किरण: लेंस से गुजरकर आभासी फोकस (F) की ओर फैलती प्रतीत।
    • प्रधान अक्ष से गुजरने वाली किरण: सीधी गुजरती (कोई अपवर्तन नहीं)।
    • ऑप्टिकल सेंटर से गुजरने वाली किरण: सीधी बिना विचलन के।
    • ये 3 किरणें लेंस के बाएँ ओर F और O के बीच** आभासी बिंदु I पर मिलती हैं।**
    • प्रतिबिंब: O से आधा, सीधा, लेंस के बाएँ।
    • यह आरेख अवतल लेंस में विभिन्न दूरी पर वस्तु के लिए किरण पथ दर्शाता है
    • जहाँ मुख्य फोकस पर वस्तु रखने पर प्रतिबिंब F और O के बीच आभासी बिंदु पर बनता है।
  • अवतल लेंस द्वारा प्रतिबिंब निर्माण की पूर्ण तालिका:
    • MCQ विकल्पों का विश्लेषण (सामान्य प्रश्न पैटर्न):
    • वास्तविक और बड़ा → गलत (अवतल लेंस वास्तविक नहीं बनाता)
    • आभासी और बड़ा → गलत (बड़ा असंभव)
    • वास्तविक और छोटा → गलत (वास्तविक असंभव)
    • आभासी और बहुत छोटा → सही [web:11][web:12]
  • प्रयोगिक सत्यापन (Lab Experiment):
    • सेटअप: ऑप्टिकल बेंच, अवतल लेंस (f = -15 cm), वस्तु को F (-15 cm) पर रखें।
    • परिणाम: आभासी प्रतिबिंब आँख से देखने पर लेंस के बाएँ, O-F के बीच, छोटा और सीधा।
    • पर्दा परीक्षण: कोई प्रतिबिंब नहीं (क्योंकि आभासी)।
  • वैज्ञानिक कारण (Why Always Virtual & Diminished?):
    • अपवर्तन: किरणें फैलती हैं, अभिसरण बिंदु वस्तु पक्ष पर।
    • मैग्नीफिकेशन: |m| = |v/u| < 1 (v < u हमेशा)।
    • उत्तल लेंस से तुलना: उत्तल लेंस F पर वस्तु → अनंत पर वास्तविक, बड़ा।
  • अनुप्रयोग (Applications):
    • चश्मा: निकट दृष्टि दोष (Myopia) सुधार।
    • वीक्षण यंत्र: दूरबीन, माइक्रोस्कोप में फील्ड लेंस।
    • प्रतियोगी परीक्षा टिप: अवतल लेंस = "Virtual, Erect, Diminished" याद रखें (VED Formula)।
  • गणितीय उदाहरण (Numerical Example):
    • f = -30 cm, u = -30 cm (F पर)
    • 1/v = 1/f + 1/u = -1/30 + 1/(-30) = -2/30
    • v = -15 cm
    • m = v/u = (-15)/(-30) = +0.5 → छोटा, सीधा
    • ग्राफिकल: प्रतिबिंब लेंस से 15 cm बाएँ।
    • यह अवधारणा कक्षा 10-12 भौतिकी (Ray Optics - Chapter 9/10) का मूल है।
    • NEET/JEE में Ray Diagram और Sign Convention पर आधारित प्रश्न आम हैं।

10. एक प्रकाशिक उपकरण ४ की फोकस दूरी धनात्मक है। Y एक.................. है। [RRC Group D 18/08/2022 (Afternoon)]

Correct Answer: (c) या तो उत्तल लेंस या उत्तल दर्पण
Solution:
  • उत्तल लेंस की फोकस दूरी धनात्मक होती है क्योंकि मुख्य अक्ष के समानांतर एक प्रकाश किरण, लेंस के दूसरी ओर फोकस से होकर गुजरती है।
  • उपयोग आवर्धक कांच के रूप में, हाइपरमेट्रोपिया (दूरदृष्टि दोष) को ठीक करने के लिए।
  • उत्तल दर्पण की फोकस दूरी प्रकाशिक केंद्रों के दाहिनी ओर होती है, इसलिए इसे धनात्मक लिया जाता है।
  • उपयोगः धूप के चश्मे में, ऑटोमोबाइल में रियर-व्यू (rear view) मिरर के रूप में और स्ट्रीट लाइट के लिए परावर्तक के रूप में उपयोग किया जाता है।
  • उत्तर: एक प्रकाशिक उपकरण Y उत्तल लेंस (Convex Lens)** है।**
    • विस्तृत व्याख्या (Full Detail and Long Answer):
    • यह प्रश्न प्रकाशिकी (Ray Optics) के चिन्ह परिपाटी (Sign Convention) पर आधारित है
    • जहाँ फोकस दूरी (f) का चिन्ह प्रकाशिक उपकरण की प्रकृति निर्धारित करता है।
    • प्रश्न में "४ की फोकस दूरी धनात्मक" → f > 0।
    • आइए सभी उपकरणों, सूत्र, Ray Diagram, तुलना, प्रयोग और प्रतियोगी परीक्षा टिप्स सहित पूर्ण विश्लेषण करें:
  • कार्टेशियन चिन्ह परिपाटी (New Cartesian Sign Convention - NCERT):
    • दिशा: प्रकाश की आपतन दिशा ← (वाम से दक्षिण)
    • - प्रकाश की दिशा → धनात्मक (+)
    • - विपरीत दिशा ← ऋणात्मक (-)
  • उत्तल लेंस - क्यों f धनात्मक? (Ray Diagram):
    • समानांतर किरणें → लेंस → F (दाहिनी ओर) पर अभिसरण
    • ∞ ───平行───→ लेंस ───→ **F (+f दूरी पर)**
    • अभिसारी (Converging): किरणें वास्तविक फोकस F पर मिलती हैं → f > 0।
    • Lens Formula: 1/v - 1/u = 1/f (f धनात्मक)।
    • निष्कर्ष: f धनात्मक → उत्तल लेंस या उत्तल दर्पण। प्रश्न संदर्भ = उत्तल लेंस।
  • गणितीय सिद्धांत (Mathematical Proof):
    • उत्तल लेंस: f = +20 cm
    • u = -∞ → 1/v = 1/20 → v = +20 cm (F पर वास्तविक)
    • अवतल लेंस: f = -20 cm
    • u = -∞ → 1/v = -1/20 → v = -20 cm (बाईं ओर आभासी)
    • चिन्ह: f > 0 → अभिसरण दाहिनी ओर = उत्तल लेंस।
  • MCQ विकल्प विश्लेषण (Standard Options):
    • अवतल लेंस → f ऋणात्मक → गलत
    • उत्तल लेंस** → f धनात्मक → सही [web:25]
    • अवतल दर्पण → f ऋणात्मक → गलत
    • उत्तल दर्पण → f धनात्मक → आंशिक सही (लेकिन लेंस संदर्भ)
  • प्रयोगिक सत्यापन (Optical Bench Experiment):
    • सेटअप: लेंस → समानांतर किरणें (दूर वस्तु)
    • उत्तल लेंस: पर्दा **दाहिनी ओर f** पर → स्पष्ट image
    • अवतल लेंस: **कोई वास्तविक image नहीं**
    • f मापन: u=2f → v=2f → 1/f = 2/u → f धनात्मक सिद्ध।
  • Lens Maker Formula से समझें:
    • 1/f = (μ-1)(1/R₁ - 1/R₂)
    • उत्तल लेंस: R₁=+ , R₂=- → 1/f > 0 → f > 0।
  • प्रतियोगी परीक्षा टिप्स (NEET/JEE/Board):
    • **याद रखें:** "C = +, D = -"
    • - **C**onvex Lens = **+**f
    • - **D**iverging Lens = **-**f
    • RRB/SSC: अक्सर "उत्तल लेंस" ही सही विकल्प।
    • Sign Convention भूलें नहीं: प्रकाश दिशा → +ve।
  • गणितीय उदाहरण:
    • u = -30 cm, f = +20 cm (उत्तल लेंस)
    • 1/v = 1/20 + 1/(-30) = 1/60
    • v = +60 cm → वास्तविक, बड़ा (m = -2)
    • f = -20 cm (अवतल): v = -12 cm → आभासी, छोटा।