प्रमुख सूचकांक (अद्यतन सामान्य ज्ञान)Total Questions: 131. ....... के आदिवासी नर्तक और गायक, अर्जुन सिंह धुर्वे को वर्ष 2022 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। [MTS (T-I) 01 सितंबर, 2023 (II-पाली)](a) तमिलनाडु(b) कर्नाटक(c) मध्य प्रदेश(d) आंध्र प्रदेशCorrect Answer: (c) मध्य प्रदेशSolution:उन्होंने पारंपरिक 'Saila' और 'Karma' नृत्य शैलियों को संरक्षित और लोकप्रिय बनाया है।उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2022 में पद्मश्री से सम्मानित किया।उनका कार्य जनजातीय संस्कृति और लोककला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।जीवन परिचयअर्जुन सिंह धुर्वे बैगा जनजाति से आते हैं, जो मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा में निवास करने वाली एक प्राचीन आदिवासी समुदाय है।वे डिंडोरी जिले के रहने वाले हैं और पिछले दो दशकों से अधिक समय से बैगा नृत्य को जीवंत रखने का कार्य कर रहे हैं।उनका जन्म और प्रारंभिक जीवन आदिवासी संस्कृति से गहराई से जुड़ा रहा, जहां उन्होंने बचपन से ही पारंपरिक नृत्य और संगीत सीखा।बैगा नृत्य में योगदानबैगा नृत्य बैगा जनजाति का पारंपरिक लोक नृत्य है, जो उनके दैनिक जीवन, संस्कृति, उत्सवों और प्रकृति पूजा को दर्शाता है।इस नृत्य की विशेषता इसमें प्रयुक्त अनोखे वेशभूषा, संगीत वाद्ययंत्र (जैसे मांदल, टिम्की) और ऊर्जावान मुद्राएं हैंजो जनजाति की जीवन शैली को जीवंत करती हैं। अर्जुन सिंह धुर्वे ने इसे न केवल संरक्षित कियाबल्कि देश-विदेश में प्रस्तुतियां देकर वैश्विक मंच पर पहुंचाया, जिससे यह कला रूप लुप्त होने से बची।वे गायक भी हैं और नृत्य के साथ-साथ लोक गीतों के माध्यम से बैगा संस्कृति का प्रचार करते हैं।पद्मश्री सम्मानभारत सरकार ने 25 जनवरी 2022 को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा कीजिसमें अर्जुन सिंह धुर्वे को कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्मश्री प्रदान किया गया।यह पुरस्कार भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान के रूप में जाना जाता है।राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मार्च 2022 में नई दिल्ली के राष्ट्रीय तापमान भवन में आयोजित समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और अन्य नेताओं ने भी उनके इस उपलब्धि पर बधाई दी।उपलब्धियां और प्रभावअर्जुन सिंह धुर्वे ने बैगा नृत्य को आधुनिक मंचों जैसे दूरदर्शन, ऑल इंडिया रेडियो और सांस्कृतिक उत्सवों तक पहुंचाया।उन्होंने युवा पीढ़ी को प्रशिक्षित कर इस कला को जीवित रखा, जिससे जनजातीय संस्कृति का संरक्षण सुनिश्चित हुआ।उनके प्रयासों से बैगा नृत्य को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली और यह आदिवासी कलाओं के पुनरुद्धार का प्रतीक बना।सांस्कृतिक महत्वबैगा जनजाति को 'प्रकृति पुजारी' कहा जाता है, और उनका नृत्य कृषि चक्र, विवाह, त्योहारों जैसे दीवाली, हरेला आदि पर आधारित होता है।अर्जुन के माध्यम से यह नृत्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक संदेशवाहक भी बन गया हैजो पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी अधिकारों को रेखांकित करता है।पद्मश्री प्राप्ति के बाद उनकी लोकप्रियता बढ़ी, और वे आदिवासी कलाकारों के लिए प्रेरणा स्रोत बने।उनके कार्य से पता चलता है कि कैसे एक व्यक्ति पारंपरिक कला को आधुनिक संदर्भ में जीवित रख सकता है, जिससे भारत की सांस्कृतिक विविधता मजबूत होती है।2. वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक रिपोर्ट 2022 के अनुसार, पिछले ....... में भारत में कुल 415 मिलियन लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले हैं। [MTS (T-I) 12 सितंबर, 2023 (I-पाली)](a) 20 वर्ष(b) 5 वर्ष(c) 10 वर्ष(d) 15 वर्षCorrect Answer: (d) 15 वर्षSolution:वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक रिपोर्ट 2022 के अनुसार, पिछले 15 वर्षों के अंतराल (2005/06-2019/21) में भारत में कुल 415 मिलियन लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले हैं।वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) 2022 रिपोर्ट का अवलोकनयह रिपोर्ट स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के तीन आयामों में 10 संकेतकों पर बहुआयामी गरीबी को मापती है।रिपोर्ट में 110 विकासशील देशों के 6.3 अरब लोगों का आकलन किया गयाजिसमें वैश्विक स्तर पर 19.3% आबादी (1.2 अरब लोग) बहुआयामी गरीबी में पाई गई।भारत में 415 मिलियन लोगों का गरीबी से बाहर निकलनारिपोर्ट के अनुसार, पिछले 15 वर्षों (2005-06 से 2019-21 तक) में भारत में कुल 415 मिलियन (41.5 करोड़) लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले हैं।इस दौरान बहुआयामी गरीबी की दर 55.1% से घटकर 14.96% (लगभग 16.4%) रह गई।यह प्रगति भारत की सबसे तेज गरीबी न्यूनीकरण दरों में से एक है, जो सभी संकेतकों में सुधार को दर्शाती है।समयावधि और प्रमुख आंकड़ेसमयावधि: 2005-06 से 2019-21 तक, यानी ठीक 15 वर्ष। यह अवधि भारत की विभिन्न कल्याण योजनाओं जैसे स्वच्छ भारतआयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना और पीएम आवास योजना से जुड़ी है।गरीबी में कमी: 415 मिलियन लोगों का बाहर निकलना दक्षिण एशिया में सबसे बड़ा योगदान है, जहां कुल 41.5 करोड़ का आंकड़ा वैश्विक प्रगति का बड़ा हिस्सा है।क्षेत्रीय प्रभाव: सभी राज्यों, ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों और सामाजिक समूहों (जैसे SC/ST, बच्चे) में कमी दर्ज की गई। उदाहरणस्वरूप, सबसे गरीब राज्य भी तेजी से प्रगति कर रहे हैं।राज्यों और समूहों में प्रगतिशीर्ष राज्य: उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक लोग (5.94 करोड़) गरीबी से बाहर निकले, उसके बाद बिहार (3.77 करोड़)।सामाजिक समूह: अनुसूचित जाति/जनजाति और मुस्लिम समुदायों में भी तेज कमी। बच्चों में गरीबी 50% से अधिक घटी।ग्रामीण vs शहरी: ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक प्रभावी कमी (32.5% से कम)। यह प्रगति सभी वर्गों में समान रूप से फैली हुई है।वैश्विक संदर्भ और भारत की उपलब्धिवैश्विक MPI में दक्षिण एशिया (38.9 करोड़ गरीब) और उप-सहारा अफ्रीका (53.4 करोड़) सबसे प्रभावित हैं।भारत ने 2005-16 के बीच वैश्विक स्तर पर सबसे तेज प्रगति की (17.1% कमी), और 2015-21 में भी निरंतर सुधार जारी रहा।रिपोर्ट भारत सरकार की योजनाओं की सराहना करती हैजो बहुआयामी गरीबी को लक्षित करती हैं। हालांकि, अभी भी 22.8 करोड़ भारतीय बहुआयामी गरीब हैं (दुनिया में सबसे अधिक)।निष्कर्ष और आगे की चुनौतियांयह उपलब्धि ऐतिहासिक है, लेकिन रिपोर्ट COVID-19 जैसी चुनौतियों के बावजूद प्रगति पर जोर देती है।आगे स्वास्थ्य और शिक्षा में निवेश आवश्यक हैशेष गरीबों को बाहर निकाला जा सके। भारत का यह प्रदर्शन SDG 1 (गरीबी उन्मूलन) के लिए मॉडल है।3. लिंकन सूचकांक क्या मापता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 जून, 2023 (IV-पाली)](a) जनसंख्या जन्म दर(b) जनसंख्या घनत्व(c) जनसंख्या का आकार(d) जनसंख्या मृत्यु दरCorrect Answer: (c) जनसंख्या का आकारSolution:लिंकन सूचकांक पारिस्थितिकी में जनसंख्या का आकार (Population Size) मापने के लिए प्रयोग होता है।यह “Capture–Mark–Recapture” विधि पर आधारित है, जिसके माध्यम से किसी प्रजाति की आबादी का अनुमान लगाया जाता है।यह वन्यजीवों और मछलियों की संख्या निर्धारण में विशेष रूप से उपयोगी है।इतिहास और उत्पत्ति हालांकि यह लिंकन-पीटर्सन विधि के नाम से भी जाना जाता हैक्योंकि सी.जी. जोहान्स पीटर्सन ने इससे संबंधित मार्क एंड रीकैप्चर तकनीक का पहले उपयोग किया था।यह विधि मूल रूप से वन्यजीवों की जनसंख्या अनुमानित करने के लिए विकसित की गईलेकिन बाद में प्रजातियों की विविधता, शब्दावली विश्लेषण या अन्य दोहराए जाने वाले घटनाओं के अनुमान में भी लागू हुई।दो अवलोककों द्वारा अलग-अलग किए गए सर्वेक्षणों में ओवरलैप (साझा खोज) के आधार पर यह कुल संख्या का अनुमान लगाती है।उदाहरण के लिए, यदि दो सर्वेक्षक क्रमशः 100-100 प्रजातियाँ पाते हैं लेकिन केवल 5 साझा हैं, तो कुल प्रजातियाँ बहुत अधिक होंगी।सूत्र और गणनालिंकन सूचकांक का मूल सूत्र सरल है:यहाँ:पहला अवलोकनकर्ता द्वारा देखी गई प्रजातियों (या आइटम्स) की संख्या।दूसरा अवलोकनकर्ता द्वारा देखी गई प्रजातियों की संख्या।दोनों अवलोकनकर्ताओं द्वारा साझा देखी गई प्रजातियों की संख्या (ओवरलैप)।यह सूत्र अनुमानित कुल जनसंख्या देता है। यदि हो तो अनुमान मोटा होता हैबहुत अनिश्चित, और पर अपरिभाषित। यह स्वतंत्र सर्वेक्षणों पर निर्भर करता हैयदि विधियाँ भिन्न हों (जैसे एक बड़ा जीव खोजे, दूसरा छोटा), तो परिणाम गलत हो सकता है।अनुप्रयोगजनसंख्या अनुमानयह मुख्यतः मछलियों, पक्षियों या कीड़ों जैसी मोबाइल प्रजातियों की कुल संख्या अनुमानित करने में उपयोगी हैजहाँ पूर्ण गणना असंभव हो। मार्क-रिकैप्चर संस्करण में कुछ जानवरों को चिह्नित कर छोड़ा जाता है, फिर दूसरी बार पकड़कर कुल अनुमान लगाया जाता है।प्रजाति विविधतादो सर्वेक्षकों द्वारा पौधों या जानवरों की प्रजातियों की गिनती में, यह कुल उपलब्ध प्रजातियों का अनुमान देता है।यदि ओवरलैप कम हो, तो कुल संख्या अधिक मानी जाती है। यह जैव-विविधता अध्ययन में महत्वपूर्ण है।अन्य क्षेत्रपुरातत्व/शब्दकोश: प्राचीन स्थलों पर आर्टिफैक्ट्स या भाषा विश्लेषण में शब्दों की कुल संख्या अनुमानित करने के लिए।सॉफ्टवेयर टेस्टिंग: बग्स की कुल संख्या अनुमान लगाने में।यह विधि तब प्रभावी होती है जब प्रत्यक्ष गणना कठिन हो।सीमाएँ और सावधानियाँओवरलैप की कमी: यदि बहुत कम हो, अनुमान अविश्वसनीय।स्वतंत्रता: सर्वेक्षण स्वतंत्र न हों तो (जैसे दोनों एक ही जगह देखें), परिणाम पक्षपाती।नमूना आकार: छोटे नमूनों पर अशुद्धि बढ़ जाती है।परिवर्तनशीलता: जनसंख्या में प्रवास या मृत्यु से प्रभावित।उन्नत संस्करण जैसे चैपमैन अनुमानक इन कमियों को कम करते हैं।वास्तविक अध्ययनों में सांख्यिकीय परीक्षण (जैसे 95% विश्वास अंतराल) जोड़े जाते हैं।उदाहरणमान लीजिए एक तालाब में मछलियाँ गिननी हैंपहली बार 100 मछलियाँ पकड़ीं, 20 को चिह्नित कर छोड़ा। दूसरी बार 80 पकड़ींजिनमें 4 चिह्नित। कुल अनुमान: 。 यह सरल लेकिन प्रभावी है।4. मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार के अनुसार, 2022 में दुग्ध उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान था? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (II-पाली)](a) पांचवां(b) तीसरा(c) दूसरा(d) पहलाCorrect Answer: (d) पहलाSolution:मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अनुसार, भारत विश्व में दुग्ध उत्पादन में प्रथम स्थान पर है।भारत विश्व के कुल दूध उत्पादन का लगभग 23% से अधिक हिस्सा अकेले देता है।उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और पंजाब प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्य हैं।भारत का वैश्विक नेतृत्वभारत 1998 से लगातार विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बना हुआ है।2022 में वैश्विक दुग्ध उत्पादन में भारत का योगदान लगभग 25 प्रतिशत थाजो अमेरिका, चीन, पाकिस्तान और ब्राजील जैसे देशों से काफी आगे है।मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2022 के दौरान विश्व दुग्ध उत्पादन में केवल 0.51 प्रतिशत की मामूली वृद्धि हुई, जबकि भारत ने अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी।उत्पादन के आंकड़े2022-23 में भारत का कुल दुग्ध उत्पादन 230.58 मिलियन टन तक पहुंच गयाजो पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता 459 ग्राम प्रतिदिन रहीजो विश्व औसत 322 ग्राम से कहीं अधिक है। उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा उत्पादक राज्य था15.72 प्रतिशत हिस्सेदारी), उसके बाद राजस्थान (14.44 प्रतिशत), मध्य प्रदेश, गुजरात और आंध्र प्रदेश।यह वृद्धि 2014-15 के 146.3 मिलियन टन से शुरू होकर निरंतर जारी रही।विकास के कारकपिछले दशक में दुग्ध उत्पादन में 63.56 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसमें मवेशियों की उत्पादकता में 27.39 प्रतिशत का योगदान रहायह वैश्विक औसत से दोगुना है। मंत्रालय की योजनाओं जैसे राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (एनपीडीडी), सहकारिता के माध्यम से डेयरी, और पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एलएचडीसीपी) ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।इनके तहत शीतलन सुविधाएं, प्रसंस्करण इकाइयां, नस्ल सुधार और टीकाकरण पर जोर दिया गया। महिलाओं की भागीदारी भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक रही।भविष्य की प्रगति2023-24 तक उत्पादन 239.3 मिलियन टन हो गया, जो 5.7 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर दर्शाता है।मंत्रालय द्वारा जारी बुनियादी पशुपालन सांख्यिकी 2025 में भी भारत का प्रथम स्थान पुष्टि हुई।प्रति व्यक्ति उपलब्धता 471 ग्राम प्रतिदिन से अधिक हो गई, जो पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करती है।सोशल मीडिया अभियानों से दुग्ध के लाभों की जागरूकता भी बढ़ाई जा रही है।5. नीति (NITI) आयोग के बहुआयामी गरीबी सूचकांक (2021) के अनुसार, निम्नलिखित में से किस राज्य में गरीबी अनुपात सबसे कम है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (I-पाली)](a) केरल(b) सिक्किम(c) तमिलनाडु(d) गोवाCorrect Answer: (a) केरलSolution:नीति (NITI) आयोग के बहुआयामी गरीबी सूचकांक (2021) के अनुसार, केरल राज्य में गरीबी अनुपात सबसे कम है, जबकि बिहार में गरीबी सबसे उच्चतम है।रिपोर्ट का अवलोकनइसमें कुपोषण, मातृ स्वास्थ्य, विद्यालय शिक्षा, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, आवास, बैंक खाता, जन्म पंजीकरण, रसोई गैस और संपत्ति जैसे संकेतक शामिल हैं।बिहार सबसे गरीब राज्य (51.91%) उभरा, जबकि केरल शीर्ष पर रहा।सबसे कम गरीबी वाले राज्यकेरल के बाद अन्य राज्य इस प्रकार हैं:गोवा: 3.76%सिक्किम: 3.82%तमिलनाडु: 4.89%पंजाब: 5.59%ये राज्य सूचकांक में सबसे निचले पायदान पर हैं, जो उनकी बेहतर सामाजिक सेवाओं व विकास को दर्शाता है।सबसे अधिक गरीबी वाले राज्यइसके विपरीत, बिहार (51.91%), झारखंड (42.16%), उत्तर प्रदेश (37.79%), मध्य प्रदेश (36.65%) और मेघालय (32.67%) सबसे गरीब राज्य हैं।बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में MPI स्कोर 0.286 हैजबकि शहरी में 0.117। किशनगंज बिहार का सबसे गरीब जिला (64.75%) है।केंद्र शासित प्रदेशों की स्थितिकेंद्र शासित प्रदेशों में पुडुचेरी (1.72%) सबसे कम गरीबी वाला हैउसके बाद लक्षद्वीप (1.82%)। दादरा और नगर हवेली (27.36%) सबसे गरीब रहा।महत्वपूर्ण निष्कर्ष व प्रभावयह MPI आय-आधारित गरीबी से अलग है, जो बहुआयामी अभावों पर केंद्रित है।रिपोर्ट से पता चलता है कि दक्षिणी व पूर्वोत्तर राज्य बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।नीति आयोग ने NFHS-5 (2019-21) आधारित अपडेट रिपोर्ट भी जारी कीजिसमें गरीबी में 13.5 करोड़ की कमी दिखीलेकिन 2021 की आधारभूत रिपोर्ट में केरल स्पष्ट विजेता है। यह डेटा नीति निर्माण के लिए मार्गदर्शक है।6. नीति आयोग द्वारा तैयार किए गए और नवंबर, 2021 में जारी किए गए पहले बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-सा राज्य सबसे गरीब राज्य के रूप में उभरा ? [CGL (T-I) 14 जुलाई, 2023 (I-पाली)](a) उत्तर प्रदेश(b) बिहार(c) मिजोरम(d) मध्य प्रदेशCorrect Answer: (b) बिहारSolution:नीति आयोग के पहले बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) के अनुसार, बिहार भारत का सबसे गरीब राज्य उभरा।बिहार में लगभग 51.9% आबादी बहुआयामी गरीबी में थी।इसके बाद झारखंड और उत्तर प्रदेश का स्थान रहा।रिपोर्ट का अवलोकनयह रिपोर्ट NFHS-5 (2019-21) के आंकड़ों पर आधारित थी और स्वास्थ्य, शिक्षा तथा जीवन स्तर के तीन मुख्य आयामों पर 12 संकेतकों का मूल्यांकन करती है।बिहार में 51.91% आबादी बहुआयामी गरीबी रेखा से नीचे पाई गई, जो देश में सर्वाधिक दर है।इसके अलावा, बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में MPI स्कोर 0.286 रहा, जबकि शहरी क्षेत्रों में 0.117, जो ग्रामीण गरीबी की गंभीरता दर्शाता है।अन्य गरीब राज्यरिपोर्ट में झारखंड (42.16%), उत्तर प्रदेश (37.79%), मध्य प्रदेश (36.65%) तथा मेघालय (32.67%) भी शीर्ष गरीब राज्यों में शामिल थे।वहीं, केरल सबसे कम गरीबी वाला राज्य रहा (0.71%), उसके बाद गोवा, सिक्किम, तमिलनाडु और पंजाब का स्थान आया।प्रमुख संकेतक बिहार मेंकुपोषण: बिहार में 51.88% आबादी कुपोषित थी, जो देश में सबसे अधिक।मातृ स्वास्थ्य: कई श्रेणियों जैसे मातृ स्वास्थ्य, शिक्षा से वंचन, स्वच्छ ईंधन और बिजली की कमी में बिहार सबसे निचले पायदान पर।कुल स्कोर: बिहार का MPI स्कोर 0.265 रहा।रिपोर्ट का महत्वयह पहला राष्ट्रीय MPI था, जो UNDP-Oxford की वैश्विक विधि पर आधारित थाराज्य-स्तरीय गरीबी मापन को मजबूत बनाता है।केंद्र शासित प्रदेशों में दादरा और नगर हवेली (27.36%) सबसे गरीब उभरा।बाद की रिपोर्टों (जैसे 2023) में प्रगति दिखीजहां उत्तर प्रदेश और बिहार में करोड़ों लोग गरीबी से बाहर आए, लेकिन 2021 की बेसलाइन में बिहार शीर्ष पर था।7. उस विकल्प का चयन कीजिए, जो भारत के निम्नलिखित पड़ोसी देशों की रैंकिंग को मानव विकास सूचकांक (HDI) 2021-22 के अनुसार आरोही क्रम में व्यवस्थित करता है। [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (I-पाली)](A) श्रीलंका (B) मालदीव (C) भूटान (D) बांग्लादेश(a) A-B-C-D(b) A-B-D-C(c) B-A-D-C(d) B-A-C-DCorrect Answer: (a) A-B-C-DSolution:नवीनतम एचडीआई रिपोर्ट के अनुसार, श्रीलंका चार देशों में सर्वोच्च रैंक पर है, एचडीआई मूल्य 0.782 है और 191 देशों में से 73 वें स्थान पर है। यह उच्च मानव विकास श्रेणी में आता है।मालदीव का एचडीआई मान 0.743 और 191 देशों में से 90 वें स्थान के साथ चार देशों में दूसरा सर्वोच्च रैंक है। यह उच्च मानव विकास श्रेणी में भी आता है।भूटान का एचडीआई मान 0.654 और 191 देशों में से 127 वें स्थान के साथ चार देशों में तीसरा सर्वोच्च स्थान है। यह मध्यम मानव विकास श्रेणी में आता है।बांग्लादेश का एचडीआई मान 0.647 और 191 देशों में से 129 वें स्थान के साथ चारों देशों में सबसे निचला स्थान है। यह भी मध्यम मानव विकास श्रेणी में आता है।HDI 2021-22 क्या है?मानव विकास सूचकांक (HDI) संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा जारी एक समग्र मापक हैजो देशों की जीवन प्रत्याशा, शिक्षा और प्रति व्यक्ति आय जैसे तीन प्रमुख आयामों पर आधारित होता है।2021-22 की रिपोर्ट में 191 देशों/क्षेत्रों को रैंक किया गया, जहां HDI मूल्य 0 से 1 के बीच होता है।आरोही क्रम का अर्थ है सबसे कम HDI (निम्न रैंक) से सबसे अधिक HDI (उच्च रैंक) की ओर।भारत की रैंक 132 थी (HDI 0.633), जो मध्यम मानव विकास श्रेणी में आता है।भारत के पड़ोसी देशों की HDI रैंकिंग (आरोही क्रम)2021-22 HDI रिपोर्ट के अनुसार भारत के पड़ोसी देशों की रैंकिंग आरोही क्रम (निचली से उच्चतर HDI की ओर) इस प्रकार है:अफगानिस्तान: रैंक 169 (HDI 0.478) – सबसे निम्न, संघर्ष और आर्थिक अस्थिरता के कारण।पाकिस्तान: रैंक 161 (HDI लगभग 0.544) – शिक्षा और स्वास्थ्य में कमियां।म्यांमार: रैंक 149 (HDI लगभग 0.585) – राजनीतिक अस्थिरता का प्रभाव।नेपाल: रैंक 143 (HDI लगभग 0.602) – प्रगति लेकिन भूकंप और गरीबी चुनौतियां।भूटान: उच्च श्रेणी, रैंक लगभग 125 (HDI 0.681) – स्थिर लेकिन कम जनसंख्या वाला।बांग्लादेश: रैंक लगभग 129 (HDI 0.661) – तेज सुधार, गरीबी उन्मूलन में सफल।चीन: रैंक 75 (HDI 0.788) – बहुत उच्च श्रेणी, आर्थिक विकास मजबूत।श्रीलंका: रैंक 73 (HDI 0.782) – पड़ोसियों में सर्वोच्च, शिक्षा और स्वास्थ्य में मजबूत।इसलिए आरोही क्रम में पूर्ण क्रम: अफगानिस्तान < पाकिस्तान < म्यांमार < नेपाल < भूटान < बांग्लादेश < चीन < श्रीलंका।संभावित विकल्प और सही चयनप्रश्न बहुविकल्पीय लगता है (जैसे Testbook/UPSC स्टाइल), जहां विकल्प दिए जाते हैं जैसे:भूटान - बांग्लादेश - मालदीव - श्रीलंका (गलत, क्योंकि मालदीव ~95 रैंक पर उच्च है)।सही विकल्प संभवतः: a-b-c-d जहां a=पाकिस्तान/अफगानिस्तान (निम्न), b=नेपाल, c=भूटान, d=श्रीलंका (उच्च)। लेकिन पूर्ण विकल्प न दिए होने परआरोही क्रम अफगानिस्तान, पाकिस्तान, म्यांमार, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, चीन, श्रीलंका है।यदि विकल्प श्रीलंका, मालदीव, भूटान, बांग्लादेश हैंतो आरोही: बांग्लादेश < भूटान < मालदीव < श्रीलंका (नोट: मालदीव HDI ~0.747, रैंक ~95)।8. 2021 में चीन का मानव विकास सूचकांक (HDI) मान क्या था? [CHSL (T-I) 02 अगस्त, 2023 (IV-पाली)](a) 0.750(c) 0.645(b) 0.557(d) 0.768Correct Answer: (d) 0.768Solution:संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की 2021 रिपोर्ट के अनुसार, चीन का HDI मान 0.768 था।इस रैंकिंग के आधार पर चीन “High Human Development” श्रेणी में आता है और उसका स्थान लगभग 79वां रहा।HDI क्या है?मानव विकास सूचकांक (HDI) एक समग्र मापक हैजो किसी देश के लंबे और स्वस्थ जीवन, ज्ञान तक पहुंच, तथा सभ्य जीवन स्तर जैसे तीन मुख्य आयामों पर आधारित औसत उपलब्धियों को मापता है।यह सूचकांक 0 से 1 के बीच की संख्या में व्यक्त किया जाता है—जितना अधिक मूल्य, उतना बेहतर मानव विकास।UNDP द्वारा गणना किया जाने वाला HDI डेटा संग्रहण के कारण थोड़ी देरी से जारी होता है, जैसे 2021 का डेटा 2022 में।2021 में श्रेणियाँHDI मूल्यों को चार श्रेणियों में बांटा जाता है:0.800 और ऊपर: बहुत उच्च मानव विकास0.700-0.799: उच्च मानव विकास (चीन यहीं आता है)0.550-0.699: मध्यम मानव विकास0.550 से नीचे: निम्न मानव विकासचीन की स्थिति2021 में चीन का HDI 0.768 था, जिससे यह 191 देशों में 79वें स्थान पर रहा।यह उच्च श्रेणी दर्शाता है, जो स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर में उल्लेखनीय प्रगति को इंगित करता है।HDI तीन घटकों पर आधारित है: स्वास्थ्य (जन्म के समय अपेक्षित आयु), शिक्षा (स्कूली वर्षों की औसत और अपेक्षित), तथा जीवन स्तर (प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय)।ऐतिहासिक संदर्भचीन का HDI 1990 में 0.499 था, जो निम्न स्तर से बढ़कर 2021 तक उच्च स्तर पहुंचा।2022 में यह 0.788 हो गया, रैंक 75वीं।HDI असमानता, गरीबी या सुरक्षा जैसे कुछ पहलुओं को पूरी तरह कवर नहीं करता, इसलिए यह सरलीकृत मापक है।9. 2023 में नीति आयोग के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में किसे नियुक्त किया गया? [CHSL (T-I) 4 अगस्त, 2023 (IV-पाली)](a) परमेश्वरन(b) बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम(c) राजीव कुमार(d) अमिताभ कांतCorrect Answer: (b) बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यमSolution:मार्च 2023 में वरिष्ठ IAS अधिकारी बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम को नीति आयोग का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया।उन्होंने अमिताभ कांत का स्थान लिया, जो इसके पहले CEO थे।सुब्रह्मण्यम जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव और वाणिज्य सचिव भी रह चुके हैं।बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम को 2023 में नियुक्त किया गया।2023 में नीति आयोग के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में श्री बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम को नियुक्त किया गया था।यह नियुक्ति कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने फरवरी 2023 में मंजूर की, और उन्होंने 25 फरवरी 2023 को पदभार ग्रहण किया।नियुक्ति का विवरणकेंद्र सरकार ने अमिताभ कांत के स्थान पर बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम की नियुक्ति को मंजूरी दी, जो 2016 से 2023 तक CEO रहे।यह फैसला 20 फरवरी 2023 को लिया गयाजब मौजूदा CEO परमेश्वरन अय्यर को वर्ल्ड बैंक का कार्यकारी निदेशक बनाया गया।नीति आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, सुब्रह्मण्यम ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर और वाणिज्य मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सेवा दी।बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम का पृष्ठभूमिवे छत्तीसगढ़ कैडर के 1987 बैच के IAS अधिकारी हैं।नियुक्ति से पहले, उन्होंने मई 2021 से वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में सचिव के रूप में कार्य किया और 30 सितंबर 2022 को सेवानिवृत्त हुए।2019 में जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव रहते हुए अनुच्छेद 370 निरस्त होने के बाद प्रशासनिक स्थिरता बहाल करने में प्रमुख भूमिका निभाई।नीति आयोग की भूमिकानीति आयोग 2015 में योजना आयोग की जगह एक नीति थिंक टैंक के रूप में स्थापित हुआ।CEO संगठन की गतिविधियों की देखरेख करता है और विकास संबंधी नीतियों को सरकार के विजन से जोड़ता है।सुब्रह्मण्यम के नेतृत्व में आयोग सहकारी संघवाद और सतत विकास पर जोर दे रहा है।अन्य उम्मीदवारों की जानकारीअमिताभ कांत: पूर्व CEO (2016-2023), जिनकी जगह सुब्रह्मण्यम ने ली।राजीव कुमार: 2017-2022 तक उपाध्यक्ष रहे।परमेश्वरन अय्यर: पूर्व CEO, जिन्हें वर्ल्ड बैंक भेजा गया।10. अक्टूबर, 2022 में, संयुक्त राष्ट्र बहुआयामी निर्धनता सूचकांक (Multidimensional poverty Index (MPI) के अनुसार विश्व में सबसे ज्यादा निर्धन लोग किस देश में हैं? [CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (III-पाली)](a) नाइजीरिया(b) भारत(c) इंडोनेशिया(d) पाकिस्तानCorrect Answer: (b) भारतSolution:UNDP और Oxford Poverty & Human Development Initiative (OPHI) की 2022 रिपोर्ट के अनुसार, विश्व में सर्वाधिक निर्धन लोग भारत में हैं।हालांकि भारत में गरीबी दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, परंतु जनसंख्या के आकार के कारण निर्धन व्यक्तियों की संख्या अब भी सबसे अधिक है।MPI 2022 की पृष्ठभूमियह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल (OPHI) द्वारा 16 अक्टूबर 2022 को जारी की गई थी।MPI 111 देशों के सबसे हालिया आंकड़ों पर आधारित था, जो 6.1 बिलियन लोगों को कवर करता था।वैश्विक स्तर पर लगभग 2 बिलियन लोग बहुआयामी गरीबी में थे, जिनमें से आधे से अधिक गंभीर गरीबी में।भारत में शीर्ष स्थान का विवरणभारत में 228.9 मिलियन लोग बहुआयामी निर्धन थे, जो नाइजीरिया (96.7 मिलियन) से लगभग दोगुने थे।इनमें से दो-तिहाई घरों में कम से कम एक सदस्य पोषण से वंचित था।बिहार भारत का सबसे निर्धन राज्य था, लेकिन 2015-16 में वहां सबसे तेज कमी दर्ज की गई।गोवा, जम्मू-कश्मीर, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई।वैश्विक संदर्भविश्व में बहुआयामी गरीबों का आधा हिस्सा (593 मिलियन) 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे थे।उप-सहारा अफ्रीका (579 मिलियन) और दक्षिण एशिया (385 मिलियन) में कुल 83% गरीब थे।MPI तीन आयामों—स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर—के 10 संकेतकों पर आधारित है, जैसे पोषण, स्कूली शिक्षा, स्वच्छ ईंधन, बिजली आदि।निर्धनता की विशेषताएँरिपोर्ट ने 'निर्धनता बंडल्स' की पहचान की, जो गरीबी के बार-बार आने वाले पैटर्न हैं।यह विकास प्रयासों के लिए नई 'गरीबी प्रोफाइल' प्रदान करती है, जो एक साथ कई वंचनाओं को लक्षित करने में मदद करती है।भारत में 2015/16 से 2019/21 तक 415 मिलियन लोगों ने गरीबी छोड़ी, जो SDG लक्ष्य 1.2 को प्राप्त करने की संभावना दर्शाता है।Submit Quiz12Next »