Solution:भारत में विधिवत मूर्ति पूजा की नींव रखने का श्रेय महायान बौद्ध धर्म को जाता है, जिसने ईसा की प्रथम शताब्दी के आसपास बुद्ध के प्रतीकात्मक स्वरूप को त्यागकर उन्हें मानवीय रूप में पूजने की परंपरा को स्थापित किया। इससे पूर्व, वैदिक धर्म में अग्नि, जल और प्राकृतिक शक्तियों की पूजा के साथ-साथ प्रतीकों (जैसे वेदिका, पदचिह्न या स्तूप) को अधिक महत्व दिया जाता था, लेकिन महायान विचारधारा ने बुद्ध को एक दिव्य और अनुकंपाशील देवता के रूप में प्रतिष्ठित किया, जिससे मंदिर और प्रतिमाओं का महत्व बढ़ गया।