Solution:भारत के संविधान के 42वें संशोधन अधिनियम, 1972 को इंदिरा गांधी की अध्यक्षता वाली भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सरकार द्वारा आपातकाल (25 जून, 1975-21 मार्च, 1977) के दौरान लागू किया गया था। संशोधन के अधिकांश प्रावधान 3 जनवरी, 1977 को लागू हुए, अन्य 1 फरवरी से लागू किए गए और धारा 127 अप्रैल, 1977 से लागू हुई।
42वें संशोधन अधिनियम, 1976 की प्रमुख बातें:
• प्रस्तावना में संशोधन: प्रस्तावना में "संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य" को बदलकर "संप्रभु समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य" किया गया और "राष्ट्र की एकता" को "राष्ट्र की एकता और अखंडता" में बदला गया।
• लघु-संविधान (Mini-Constitution): इसमें 50 से अधिक अनुच्छेदों में बदलाव किए गए, इसीलिए इसे 'लघु-संविधान' कहा जाता है।
• मौलिक कर्तव्य: नागरिकों के लिए 10 मौलिक कर्तव्य जोड़े गए (भाग IV-A, अनुच्छेद 51A), जो सरदार स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों पर आधारित थे।
• सर्वोच्चता का केंद्रीकरण: संसद को न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) से मुक्त कर दिया गया और यह प्रावधान किया गया कि संवैधानिक संशोधनों को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।
• समवर्ती सूची में बदलाव: शिक्षा, वन, वन्यजीवों का संरक्षण, माप-तौल और न्याय का प्रशासन जैसे 5 विषयों को राज्य सूची से समवर्ती सूची में स्थानांतरित किया गया।
• राष्ट्रपति पर बाध्यता: राष्ट्रपति को केंद्रीय मंत्रिमंडल की सलाह मानने के लिए बाध्य कर दिया गया।
• न्यायपालिका की शक्ति में कमी: सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों की न्यायिक समीक्षा की शक्ति को काफी कम कर दिया गया।
इस संशोधन द्वारा राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों (DPSP) को मौलिक अधिकारों पर वरीयता दी गई थी। बाद में, 44वें संशोधन (1978) द्वारा इसके कई विवादास्पद प्रावधानों को संशोधित या निरस्त कर दिया गया था।