भूकंप एवं ज्वालामुखी (विश्व का भूगोल)

Total Questions: 10

1. अधिकेंद्र से किस डिग्री पर भूकंप सूचक यंत्र (सिस्मोग्राफ) P-तरंगों के आगमन को रिकॉर्ड करता है लेकिन S-तरंगों के आगमन को रिकॉर्ड नहीं करता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) 145° से ऊपर
Solution:
  • अधिकेंद्र से 145° से परे (Beyond) भूकंप सूचक यंत्र (सिस्मोग्राफ) P तरंगों के आगमन को रिकॉर्ड कर सकता है
  • लेकिन S तरंगों के आगमन को रिकॉर्ड नहीं करता है।
  • भूकंप तरंगें
    • P-तरंगें (प्राथमिक, compressional) ठोस और द्रव दोनों में चलती हैं और कम से कम दूरी पर भी पहुँच सकती हैं।
    • S-तरंगें (द्वितीयक, shear) केवल ठोस पदार्थों में यात्रा करती हैं, और द्रवों में नहीं चल पातीं।
  • उत्केंद्र से इन तरंगों का प्रसार
    • पृथ्वी के अंदर पाई जाने वाली द्रव बाहर के कारण, S-तरंगें द्रव बाह्य कोर को पार नहीं कर पातीं
    • उसी कारण S-तरंगों का एक छाया क्षेत्र बनता है।
    • P-तरंगें द्रव और ठोस दोनों परतों से गुजर सकती हैं
    • उनके लिए छाया क्षेत्र बनता है लेकिन यह S-तरंगों के लिए लागू नहीं होता।
  • अधिकेंद्र (epicenter) के कोणीय संदर्भ
    • भूकंप केंद्र से कुछ कोणीय दूरी पर ऐसे क्षेत्रों में P-तरंगें रिकॉर्ड होती हैं
    • जबकि S-तरंगें रिकॉर्ड नहीं होतीं; यह विशिष्ट रूप से उस कोण पर निर्भर है जहाँ द्रव बाह्य कोर अवरोधक बनता है।
    • अक्सर भू-विज्ञान में यह बताने के लिए एक सामान्य मार्गदर्शिका दी जाती है
    • P-तरंगें किस दूरी या कोण पर प्राथमिक रिकॉर्ड बनाती हैं और S-तरंगों का आगमन वहाँ क्यों नहीं होता।
  • तालिका-तुलना (संक्षेप)
  • P-तरंगें
    • Traversal: ठोस और द्रव दोनों
    • छाया क्षेत्र: संभव, लेकिन वह सीमा P-तरंगों के लिए विशेष कोणों पर सीमित हो सकता है
    • रिकॉर्डिंग: कई स्थानों पर रिकॉर्ड होती हैं
  • S-तरंगें
    • Traversal: केवल ठोस
    • छाया क्षेत्र: द्रव बाह्य कोर के कारण विशाल क्षेत्र में
    • रिकॉर्डिंग: बहुतेरे क्षेत्रों में नहीं मिलतीं जहां द्रव कोर अवरुद्ध हो

2. निम्नलिखित में से किसे स्ट्रैटो ज्वालामुखी के रूप में भी जाना जाता है, जो एक बड़ा ज्वालामुखी है जो आमतौर पर लावा प्रवाह, पायरोक्लास्टिक निक्षेप, मडफ्लो निक्षेप और साथ ही लावा गुंबदों से बना है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) समग्र ज्वालामुखी
Solution:
  • समग्र ज्वालामुखी (Composite Volcano) को स्ट्रैटो जवालामुखी के रूप में भी जाना जाता है
  • जो एक बड़ा ज्वालामुखी है, जो आमतौर पर लावा प्रवाह, पायरोक्लास्टिक निक्षेप, मडफ्लो निक्षेप और साथ ही लावा गुंबदों से बना है।
  • संरचना और बनावट
    • जो समय के साथ चिपचिपे सिलिका-समृद्ध मैग्मा के लगातार फटने और जमाव से बनते हैं।
    • इनकी सतह पर मजबूत पथरोटियाँ, राख की चादरें और गैस-समृद्ध लावा के उभरते स्तंभ देखे जाते हैं।
  • विस्फोटक चक्र
    • इनमें उच्च-विस्फोटकता का चक्र देखा जाता है, क्योंकि चिपचिपा मैग्मा गैसों के अधिक घुलन के कारण दबाव बनाता है
    • बार-बार फटकर राख-गैस-लावा का मिश्रण बाहर निकलता है।
    • सामान्य घटनाक्रम में लावा प्रवाह के साथ-साथ पायरोक्लास्टिक निक्षेप, राख-ग्लायश आदि बाहर निकलते हैं।
  • उत्पाद और निक्षेप
    • लावा प्रवाह के अलावा पायरोक्लास्टिक (बड़े टुकड़े), लैपिली (पत्थरों के छोटे-छोटे कण), प्यूमिस (फूला हुआ गैस-फ्रैक्चर), राख और धूल आदि निकलते हैं।
    • लावा गुंबद सामान्यतः धीमी गति से बाहर निकलकर ठंडा होकर गुंबद बनाते हैं।
  • भू-आकृतिक संदर्भ
    • स्ट्रैटो ज्वालामुखी सामान्यतः अधिस्खर (subduction) सीमाओं पर बनते हैं
    • जहां सिलिका-समृद्ध मैग्मा बनता है और ऊपरी पपड़ी के साथ ज्वालामुखी क्रिया चलती है।
  • उदाहरण
    • इटली का विक्टरियन-एटना क्षेत्र, जापान, इरान आदि जगहों पर कई प्रसिद्ध स्ट्रैटो ज्वालामुखी मौजूद हैं।

3. भूकंप के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) भूकंप से लहरें पैदा होती हैं जो एक दिशा में फैलती हैं।
Solution:
  • भूकंप एक प्राकृतिक घटना है। यह (भूकंप) पृथ्वी के हिलने की एक प्रक्रिया है।
  • भूकंप से लहरें पैदा होती हैं जो सभी दिशाओं में फैलती हैं।
  • (संक्षेप)
    • इनमें से गलत कथन वह है जिसमें कहा गया हो कि “रिक्टर पैमाने पर 3.0 की तीव्रता का भूकंप सूनामी को उत्प्रेरित कर सकता है
    • (या इसी प्रकार का असत्य दावा)। सामान्यतः सुनामी मुख्यतः बड़े, ताकतवर भूकंप (उच्च तीव्रता), विशिष्ट उपरिकेंद्र स्थितियाँ (खासकर समुद्री क्षेत्र के नीचे) और पानी की गहराई के साथ जुड़ी होती है
    • 3.0 की माप से सूनामी की संभावना अत्यंत कम रहती है।
    • इसलिए यह कथन गलत माना जा सकता है।
    • लेकिन ध्यान दें कि भूकंप-और-सूनामी के संबंध कथनों की सही/गलतता क्षेत्र और संदर्भ-विशिष्ट हो सकती है।
  • विस्तृत विश्लेषण (तथ्य-आधारित व्याख्या)
    • भूकंप क्या है: भू-पर्पटी (टेक्टोनिक प्लेटों) के तनाव के कारण अचानक होने वाली ऊर्जा విడుదల है, जो भू-लिथोस्फीयर में तरंगें बनाते हैं
    • यह ऊर्जा पृथ्वी की सतह तक पहुँचती है और झटके पैदा करती है.​
    • फोकस और केन्द: भूकंप के उत्पन्न बिंदु को फोकस कहा जाता है
    • इसके ठीक ऊपर सतह पर वह बिंदु उपरिकेंद्र कहलाता है
    • जहाँ से तरंगें अनुभव में आती हैं. अधिकेंद्र से दूरी बढ़ने पर भूकंप की तीव्रता घटती है.​
    • रिक्टर स्केल और सुनामी: भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर मापी जाती है
    • अक्सर 7.5 से ऊपर के बड़े भूकंप, विशेष परिस्थितियों में, महासागरों में सुनामी पैदा कर सकते हैं।
    • नीचे की माप (जैसे 3.0) पर सुनामी की संभावना सामान्यतः नहीं होती, यह कथन आमतः असत्य माना जाता है.​
    • मानव-निर्मित या प्राकृतिक कारण: ज्वालामुखी विस्फोट, बांधों में जल-भार आदि भी भू-तंत्र में असंतुलन पैदा कर सकते हैं
    • सुनामी के लिए मुख्यतः समुद्री भूकंप या बड़े पथ-खंडीय हिलनों की आवश्यकता होती है.​
  • कौन सा कथन मिथ्या/गलत हो सकता है
    • एक सामान्य गलत कथन यह हो सकता है
    • कम-तीव्रता भूकंप (जैसे 3.0) भी सूनामी उत्पन्न कर सकता है” या “हर भूकंप से सूनामी स्वतः आती है।
    • वास्तविकता में, सुनामी के लिए बड़े और विशेष प्रकार के भूकंप जरूरी होते हैं
    • सभी भूकंप से सुनामी नहीं आती; 3.0 की तीव्रता से सूनामी आने की संभावना अत्यंत कम मानी जाती है। इसलिए इस प्रकार का कथन गलत है.​
    • अन्य संभावित गलत कथन ऐसी बात हो सकती है कि “भूकंप केवल गहराई से जुड़ा होता है
    • जो गलत है क्योंकि भूकंप की गतिशीलता फोकस-उदा्गम (उत्पन्न बिंदु) और सतह पर प्रभाव से भी जुड़ी होती है.​
  • संदर्भित तथ्यों के उद्धरण
    • भूकंप ऊर्जा की अचानक रिहाई से तरंगें बनाते हैं, जो लिथोस्फीयर में फैलती हैं.​
    • फोकस वह बिंदु है जहाँ भूकंप उत्पन्न होता है
    • उपरिकेंद्र वह बिंदु है जो फोकस के ठीक ऊपर सतह पर अनुभव होता है.​
    • रिक्टर तीव्रता और सुनामी के बीच सामान्य संबंध: बड़े भूकंप सुनामी पैदा कर सकते हैं
    • 3.0 जैसी कम तीव्रता से सुनामी की संभावना नहीं रहती.​

4. सीस्मोग्राफ का उपयोग ....... को मापने के लिए किया जाता है। [CGL (T-I) 17 जुलाई, 2023 (1-पाली)]

Correct Answer: (a) भूकंप
Solution:
  • भूकंप को मापने के लिए सीस्मोग्राफ का उपयोग किया जाता है।
  • एंडोस्कोप के माध्यम से शरीर के आंतरिक अंगों की जांच की जाती है। थर्मामीटर से शरीर के ताप का मापन किया जाता है।
  • क्या है सीस्मोग्राफ
    • सीस्मोग्राफ एक ऐसा यंत्र है जो पृथ्वी में होने वाले कंपन को रिकॉर्ड करता है।
    • यह भूकंप की दिशा, तीव्रता और गहराई को समझने में मदद करता है।
    • कई स्रोतों के अनुसार इसे कभी-कभी सीस्मोमीटर भी कहा जाता है
    • जो इसे और भी विशिष्ट बनाता है क्योंकि यह पृथ्वी की आंतरिक गतिविधियों को मापता है ।​
  • मुख्य उद्देश्य
    • भू-आकृतियों के भीतर होने वाली तरंगों को ट्रैक करना और उनका रिकॉर्ड बनाना, ताकि भूकंप की स्टिर, स्थान और वेग का आकलन किया जा सके।​
    • ज्वालामुखी विस्फोट, भूस्खलन जैसी अन्य भूकंपीय घटनाओं की निगरानी भी संभव है ।​
  • मापी जाने वाली चीजें
    • सतह (पीठ) पर पहुँचने वाली P-तरंगें और S-तरंगें जैसी साइट-विशिष्ट भूकंपीय तरंगें रिकॉर्ड होती हैं
    • जिससे समर्थित डेटा से भूआकृतिक संरचना, संरचनात्मक स्वास्थ्य, औरtectonic plate movements का विश्लेषण किया जा सकता है ।​
    • भूकंप की तीव्रता, स्थान, गहराई, और समय-सीमा निर्धारित करने में यह प्रमुख रूप से उपयोगी है ।​
  • कैसे काम करता है (सरल शब्दों में)
    • एक संलग्न द्रव्यमान और एक स्थिर आधार के साथ यंत्र में कंपन आने पर द्रव्यमान गतिमान रहता है
    • जबकि आधार कम्पन के कारण गतिशील रहता है जिससे पृथ्वी की सतह पर आये कंपन के संकेत रिकॉर्ड होते हैं।
    • यह रिकॉर्डिंग भूगतिक डेटा में रूपांतरित होकर विश्लेषण के लिए उपलब्ध कराई जाती है ।​
  • उपयोग के क्षेत्र
    • भूकंप के तीव्रता का आकलन और उसकी प्रवृत्ति समझना
    • भू-आकृतिक संरचना की पढ़ाई और पर्त-स्तर में स्पंदन की पहचान
    • भूकंप पूर्व चेतावनी/निगरानी प्रणालियों का भाग
    • संरचनात्मक सुरक्षा परीक्षण जैसे बांध, पुल, और परमाणु संयंत्र के पास निगरानी ।​
  • निष्कर्ष
    • सीस्मोग्राफ भूकंपों के कण्ठ-चाल, तरंगों के समय-स्केल और आवृत्ति विश्लेषण के लिए सबसे प्रमुख उपकरण है
    • जो पृथ्वी के आंतरिक कंड़क्शन और सतह पर मानवीय सुरक्षा के लिए आवश्यक डेटा प्रदान करता है ।​

5. निम्नलिखित में से कौन-सा तब होता है जब दो टेक्टोनिक प्लेटें अलग-अलग गति से एक-दूसरे से आगे बढ़ रही होती है? [MTS (T-I) 19 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) भूकंप
Solution:
  • भूकंप टेक्टोनिक प्लेटों की गति के कारण आते हैं। जब दो प्लेटें अलग-अलग गति से आगे बढ़ती हैं
  • तो इससे घर्षण और दबाव पैदा होता है, जिससे भूकंप आता है।
  • प्लेट टेक्टोनिक्स का आधारभूत परिचय
    • प्लेटें पृथ्वी की सबसे ऊपरी परत—क्रस्ट और ऊपरी मृदु-आंतरिक भाग—पर स्थिर नहीं, हल्की-हल्की आंतु-गतिशील होती हैं।
    • इनकी गति मिलिमीटर से सेंटीमीटर प्रति वर्ष की रेंज तक हो सकती है.​
    • तीन मुख्य प्रकार की सीमाएँ होती हैं: अभिसारी (कॉंवरजेंट), अपसारी (डाइवर्जेंट), और संरक्षित/रैखिक (Transform boundary).​
  • अब अलग-अलग गति के कारण होने वाले परिणाम
    • अगर दो प्लेटें एक-दूसरे के साथ असमान गति से बढ़ें और कभी-कभी एक दूसरी की गति से आगे निकलें, तो यह तनाव (stress) बनाता है
    • जो प्लेटों के किनारों पर संचय होता है।
    • इस तनाव के कारण क्षेत्रीय भूकंप, ज्वालामुखीय क्रियाकलाप, और सतही उन्नयन/घटाव हो सकता है।
    • गति में असमानता से “कम्बाइन्ड shear” और “slip” घटनाएं होती हैं
    • खासकर ट्रांसफॉर्म सीमाओं पर, जहां प्लेटें एक-दूसरे के आस-पास ही फिसलती रहती हैं।
    • यह सीमाओं पर बड़े भूकंपों के लिए ज़िम्मेदार हो सकता है (उदा., सैन Andreas Fault जैसे क्षेत्र).​
    • अभिसारी सीमाओं पर तेज़ गति वाले भारी प्लेट नीचे धंसते हैं
    • ऊपरी प्लेटों को खींचते हैं; यहाँ गति के भिन्न-भिन्न ढंग से होने पर पृथ्वी की सतह पर पर्वत-संगठन और भूकंपीय तरंगें पैदा हो सकती हैं.​
    • अपसारी सीमाओं पर प्लेटें अलग-अलग दिशा में बढ़ती हैं
    • जिससे समुद्री या महाद्वीपीय प्लेटों के किनारे विशाल रिक्तता बनती है
    • नई धरातलीय संरचनाओं का निर्माण होता है; ऐसे क्षेत्र भी भू-आकृतिक रूप से महत्त्वपूर्ण होते हैं.​
  • कौन-सी विशिष्ट घटनाओं के संकेत मिलते हैं
    • ट्रांसफॉर्म सीमाओं के पास असमान गति से फिसलन के कारण लगातार छोटे-बीच के भूकंप और तनाव निर्माण होते रहते हैं
    • इनके विश्लेषण से भूवैज्ञानिक इतिहास और क्षेत्रीय जोखिम समझ में आते हैं.​
    • अभिसारी सीमाओं पर बड़े भूकंप अक्सर एक साथ दोनों प्लेटों के किनारों के ऊपरी भागों में तनाव release करके आते हैं
    • साथ ही साथ ऊंचे पर्वत, गहरी खाइयाँ और ज्वालामुखी-सीरीज़ बनना सामान्य होता है.​
    • उपयुक्त पठन-संदर्भों में ट्रांसफॉर्म फॉल्ट के कारण प्लेट edge के पास “sliding” गति को दर्शाने वाले दृश्य दिए जाते हैं
    • जो वास्तविक दुनिया में विभिन्न स्थानों पर देखे जाते हैं.​
  • महत्वपूर्ण नोट्स (यस/नो)
    • यह स्थिति “अभिसारी” नहीं है कि केवल एक दिशा में बढ़ना है
    • बल्कि गतिशीलता, क्षेत्रीय धुरी, और mantle convection के कारण डायनेमिक तनाव बनता है
    • जो समय-समय पर भूकंपीय रिएक्शन देता है.​
    • हर भौगोलिक क्षेत्र में गति का सापेक्ष मान भिन्न होता है; कुछ क्षेत्रों में गति 1-3 सेमी/वर्ष के करीब भी देखी जाती है
    • जबकि अन्य में यह तेज हो सकती है.​
    • ट्रांसफॉर्म सीमाओं के अलावा अन्य प्रकार की सीमाओं पर भी असमान गति से होने वाले विन्यास से भूकंपीय और आग्नेय घटनाओं में बदलाव आता है
    • इसलिए स्थानीय भूवैज्ञानिक मानचित्रण और जोखिम आकलन आवश्यक हैं.​
  • संदर्भ और आगे पढ़ना
    • (प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत)—भूवैज्ञानिक घटनाओं के प्रकार और सीमाओं के बारे में स्पष्ट विवरण.​
    • Transform boundaries और sliding motion पर सारगर्भित परिचय—कम-आकार के भूकंप और फॉल्ट संरचनाओं की भूमिका.​
    •  (विकिपीडिया/हिंदी संदर्भ)—गति (m/m वर्ष) और प्लेट-किनारों की गतिशीलता के आंकड़े.​

6. भूतल पर वह बिंदु जो भूकंप के उद्गम केंद्र के समीपतम होता है ....... कहलाता है। [MTS (T-I) 20 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) अधिकेंद्र
Solution:
  • भूतल पर वह बिंदु जो भूकंप के उद्गम केंद्र के समीपतम होता है
  • उसे अधिकेंद्र कहते हैं। अतः सही उत्तर विकल्प (d) होगा।
  •  यह वह स्थान होता है जहां भूकंपीय तरंगें पृथ्वी की सतह पर सबसे पहले पहुंचती हैं और क्षति का प्रभाव सबसे अधिक महसूस होता है।​
  • भूकंप की संरचना
    • भूकंप पृथ्वी की आंतरिक परतों में चट्टानों के टूटने या खिसकने से उत्पन्न होता है।
    • उद्गम केंद्र (Focus) पृथ्वी के अंदर गहराई पर स्थित होता है, जबकि अधिकेंद्र सतह पर उसके ठीक ऊपर या निकटतम बिंदु है।
    • अधिकेंद्र से भूकंपीय लहरें (P-तरंगें, S-तरंगें और सतही तरंगें) चारों ओर फैलती हैं, जिससे कंपन महसूस होता है।​
  • भूकंपीय तरंगों का प्रभाव
    • अधिकेंद्र के आसपास प्राथमिक (P) तरंगें सबसे पहले पहुंचती हैं, जो संपीड़न वाली होती हैं।
    • उसके बाद द्वितीयक (S) तरंगें आती हैं, जो पक्षीय गति पैदा करती हैं।
    • सतही तरंगें अधिकेंद्र पर सबसे अधिक क्षति पहुंचाती हैं, जैसे भवनों का ढहना।​
  • मापन और अध्ययन
    • भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल या मॉमेंट मैग्नीट्यूड स्केल से मापी जाती है
    • जबकि अधिकेंद्र का स्थान सीस्मोग्राफ से निर्धारित किया जाता है।
    • वैज्ञानिक ट्रायंगुलेशन विधि से उद्गम केंद्र और अधिकेंद्र की गहराई व दूरी का पता लगाते हैं

7. निम्नलिखित में से कौन-सा ज्वालामुखी के सबसे विस्फोटक प्रकार का उदाहरण है? [CHSL (T-I) 13 अक्टूबर, 2020 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) कॉल्डेरा (कुंड) ज्वालामुखी
Solution:
  • कॉल्डेरा (कुंड) ज्वालामुखी पृथ्वी पर पाए जाने वाले सबसे अधिक विस्फोटक ज्वालामुखी हैं।
  • आमतौर पर ये इतने विस्फोटक होते हैं कि जब इनमें विस्फोट होता है
  • तब वे ऊंचा ढांचा बनाने के बजाय स्वयं नीचे धंस जाते हैं।
  • धंसे हुए विध्वंस गर्त (लावा के गिरने से जो गड्ढे बनते हैं) ही ज्वालामुखी कुंड (Coldera) कहलाते हैं।
  • ज्वालामुखी कुंड क्या है
    • ज्वालामुखी कुंड वह विशाल क्रेटर-सी संरचना है
    • जिसे अक्सर बड़े पैमाने पर विस्फोटों के बाद दुर्घटनात्मक रूप से उच्च ऊँचाई तक फैलते हुए lava, गैसों और राख के कारण बनाया गया होता है
    • यह संरचना मॉडर्न भूविज्ञान में सबसे “थर्मल” और विनाशकारी विस्फोटों के साथ जुड़ी होती है.​
  • क्यों इसे सबसे विस्फोटक माना जाता है
    • कुंड विस्फोटों की तीव्रता और पैमाना बहुत बड़ा होता है; इनका उद्गार अक्सर magma chamber के भीतर गैसों के अत्यधिक संचित होने से होता है
    • जिससे एक बड़ा विस्फोट होता है और ढांचे का अपघटन या collapse भी हो सकता है.​
    • इतिहास में कल्पनातीत रूप से बड़े आकर के विस्फोट दर्ज हुए हैं
    • जिनमें कैल्डेरा-प्रकार के ज्वालामुखी प्रमुख उदाहरण रहे हैं
    • जैसे कि काल्डेरा क्षेपक और अन्य बड़े बुलबुले जैसे संरचनात्मक प्रभाव बनाए रहते हैं.​
  • अन्य प्रमुख विस्फोटक प्रकारों की तुलना
    • मैग्मैटिक (magmatic) विस्फोट अपेक्षाकृत शामिल गैसों के कारण लावा extrusion के साथ होते हैं
    • कुंड-स्तर के विस्फोट से कम व्यापक आपदा हो सकती है.​
    • फ्रीएटोमैग्मेटिक (phreatomagmatic) विस्फोट जल/गैस के द्रव संकेतन से प्रेरित होते हैं
    • ये भी शक्तिशाली हो सकते हैं, पर कुंडों जितना विशाल नहीं कहा जाता है.​
    • मिश्रित/रिंग-प्रकार के ज्वालामुखी (stratovolcanoes आदि) कभी-कभी बड़े विस्फोट दिखाते हैं
    • कुंड इनके मुकाबले विशिष्ट 厚 स्तरीय ध्वंस नहीं देते हैं.​
  • वास्तविक उदाहरण और दृश्य प्रभाव
    • काल्डेरा-प्रकार के ज्वालामुखी एक बार फुल फोर्स में विस्फोट करते हैं
    • तो विशाल craters बनाते हैं, और कभी-कभी क्षेत्रीय भू-भाग को ही नीचे धँसाकर नई सतह बनाते हैं
    • यह प्रक्रिया स्थानीय भू-विज्ञान में “collapse caldera” के रूप में भी जानी जाती है.​
    • इन विस्फोटों के परिणामस्वरूप बड़े मात्रा में राख, गैस, और पायरोक्लास्टिक पत्थर ऊँचे स्तर तक फैलते हैं
    • जिससे वैश्विक जलवायु और स्थानीय जीवन-यापन पर प्रभाव पड़ सकता है.​

8. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन 'प्रशांत अग्नि वलय' से सबसे अच्छा संबंधित है? [MTS (T-I) 01 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) ज्वालामुखी और भूकंप के लिए जाना जाता है
Solution:
  • रिंग ऑफ फायर प्रशांत महासागर क्षेत्र में भूकंप तथा ज्वालामुखी से प्रभावित क्षेत्र है।
  • यह प्रशांत महासागर के समानांतर वह क्षेत्र है जहां अत्यधिक सक्रिय ज्वालामुखी हैं
  • संपूर्ण विश्व के लगभग 90 प्रतिशत भूकंप यहीं आते हैं। अतः सही उत्तर विकल्प (c) होगा।
  • परिचय
    • प्रशांत अग्नि वलय, जिसे अक्सर Ring of Fire कहा जाता है, प्रशांत महासागर के किनारे फैला एक विशाल भू-भौतिक क्षेत्र है
    • जहाँ भारी मात्रा में ज्वालामुखी विस्फोट और भूकंप होते रहते हैं
    • यह क्षेत्र दुनिया के सक्रिय भू-गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता है.​
  • क्यों यह कथन सही है
    • सबसे स्पष्ट तात्पर्य वाला तथ्य यह है कि इस वलय में ज्वालामुखी गतिविधि और भूकंपीय गतिविधियाँ उच्चतम स्तर पर रहती हैं
    • इस कारण इसे "ज्वालामुखी और भूकंप का क्षेत्र" कहा जाता है.​
    • लगभग 75% सक्रिय और निष्क्रिय ज्वालामुखियाँ इस वलय के भीतर पाई जाती हैं
    • बहुत से बड़े भूकंप भी इस क्षेत्र से जुड़े होते हैं, जिसे प्रशांत प्लेट की गतिशीलता से समझा जाता है.​​
  • क्षेत्रीय देश और प्रभाव
    • जापान, इंडोनेशिया, फिलीपींस, न्यूजीलैंड आदि प्रशांत अग्नि वलय के प्रमुख देश हैं
    • जिन्होंने इस भू-गतिकी के कारण गह्रभूकंपीय घटनाओं का अनुभव किया है.​​
  • व्यावहारिक महत्व
    • भूविज्ञान, भूकंप-पूर्व चेतावनी और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में Ring of Fire की समझ बेहद महत्वपूर्ण है
    • क्योंकि यह पृथ्वी की सतह की संरचना, प्लेट टेकरिंग, और जलवायवीय प्रभाव को प्रभावित करती है.​

9. पृथ्वी के ज्वालामुखियों में सबसे अधिक विस्फोटक कौन से हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 22 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) कॉल्डेरा
Solution:
  • कॉल्डेरा ज्वालामुखी पृथ्वी के ज्वालामुखियों में सबसे अधिक विस्फोटक है।
  • मुख्य बिंदु
    •  विस्फोट: पृथ्वी के सबसे शक्तिशाली ज्वालामुखी घटनाओं में से कुछ caldera-स्तर के विस्फोट होते हैं।
    • इन विस्फोटों के दौरान विशाल मात्रा में magma chamber ढहता है, जिससे बड़ा गड़्ढा बनता है
    • बड़े पैमाने पर राख, गैसें और विस्फोटक पदार्थ निकलते हैं। घटनाएं वैश्विक जलवायु पर प्रभाव डाल सकती हैं
    • भू-आक्रांत क्षेत्रों के परिदृश्य को बदल देती हैं 。​
    •  संबंध: येलोस्टोन काल्डेरा दुनिया के सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली caldera-प्रकार के उदाहरणों में गिनी जाती है
    • 1815 का विस्फोट भी ऐतिहासिक रूप से दर्ज सबसे बड़े क्लासिक विस्फोटों में से एक माना जाता है
    • जिसका प्रभाव बड़े पैमाने पर वैश्विक जलवायु पर देखा गया था ।​
    • s का दायरा: "सुपरविस्फोट" या शब्द आम तौर पर 8+ magnitude के विस्फोटों के लिए प्रयोग होता है
    • जिनमें caldera-समुच्चय बनते हैं और लाखों-करोड़ों टन राख आकाश में पहुँच जाते हैं ।​
  • विस्तृत विवरण
    • कौन से तत्व सबसे विस्फोटक बनाते हैं: Magma chamber के भीतर गैसों की उच्च मात्रा, महाविस्फोटक गैसों का आघात
    • गाड़ी जैसी उच्च viscosity वाली चट्टानें, मिलकर बड़े विस्फोट को जन्म देती हैं।
    • ऐसे विस्फोट राख, पायरोक्लास्टिक प्रवाह, गैसों के भारी मिश्रण और ضخ्यमान ध्वनि तरंगों के साथ होते हैं ।​
    • क्यों caldera स्तर का विस्फोट इतना विनाशकारी होता है: जब magma chamber अस्थिर होकर ढहता है
    • तो बड़े क्षेत्र में गड्ढे बनते हैं और विशाल मात्रा में राख/गैस बाहऱ निकलती है
    • इस प्रकार के विस्फोट वैश्विक जलवायु को ठंडक प्रदान कर सकते हैं
    • मौसम-परिवर्तन के चक्र को प्रभावित कर सकते हैं ।​
    • ऐतिहासिक उदाहरण:
    • इसका लगातार ഗുരुत गतिविधि इतिहास है
    • इसे सबसे शक्तिशाली recorded विस्फोटों में गिना जाता है
    • पूर्णतः कैल्डेरा-स्तर का ग्रहण प्रभाव दिखा सकता है।
    • Mount Tambora (1815): इस eruption ने "Year Without a Summer" जैसी वैश्विक जलवायु-प्रभावें छोड़ीं, जो कि सुपरविस्फोटों के प्रभाव की स्पष्ट मिसाल है।
    • अन्य बड़े calderas में Toba (Sumatra) और Campi Flegrei जैसी साइटें शामिल हैं
    • जो बड़े पैमाने पर caldera-स्तर के विस्फोटों के लिए प्रसिद्ध हैं
  • कैसे समझें विस्फोट के प्रकार
    •  विस्फोट: magma chamber के ढहने से बड़े crater-आकार के अवसादन बनते हैं
    • राख और गैसों का विशाल ऊँचा ऊपरी वातावरण में फैलना, जिससे वैश्विक स्तर पर जलवायु-प्रभाव होते हैं।
    •  ये आम तौर पर उच्‍चित मात्रा में लावा और राख के मिश्रण से फूटते हैं
    • स्तर के विस्फोट इतने विशाल नहीं होते जितनी caldera-घटनाएं होती हैं।
    • विशाल बेसाल्ट-आधारित प्रवाहों के कारण बड़े क्षेत्र को कवर करते हैं, पर वे कैल्डेरा-स्तर के विस्फोट नहीं होते।

10. मध्य हिमालय के नीचे महाद्वीपीय भूपर्पटी की मोटाई ....... की कोटि की है, जो इस क्षेत्र में ज्वालामुखी गतिविधि के अंत को चिह्नित करती है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) 35-37 किमी.
Solution:
  • मध्य हिमालय के नीचे महाद्वीपीय भूपर्पटी की मोटाई लगभग 35-37 किमी. की कोटि की है
  • जो इस क्षेत्र में ज्वालामुखी गतिविधि के अंत को चिह्नित करती है।
  • परिचय और महत्व
    • यह मोटाई क्षेत्र की संरचनात्मक स्थिति और भू-रासायनिक परिघटना को समझने में ключी है।​
  • मध्य हिमालय क्या है
    • मध्य हिमालय (Middle Himalaya) उसे भाग के रूप में जाना जाता है
    • जिसे “निम्न हिमालय” के रूप में भी माना जाता है।
    • यहाँ की धारियाँ, घाटियाँ और उच्च पर्वत शृंखलाएं टकराव के परिणामस्वरूप विकसित हुईं हैं।
    • हाल की tectonic studies के अनुसार इसकी क्रस्ट मोटाई लगभग 70–72 किमी के दायरे में मानी जाती है।​
  • क्यों मोटाई इतनी अधिक है
    • क्षेत्र में सतही रूप से ऊँचे पर्वतीय ढांचे का निर्माण गहरी क्रस्टल shortening और thickening के कारण हुआ है।
    • इस मोटाई के कारण magma ascent की प्रक्रिया में बाधाएं आती हैं
    • जिससे ज्वालामुखी गतिविधि अपेक्षाकृत कम होती है या समाप्त हो जाती है
    • खासकर सतही ज्वालामय गतिविधि के लिए magma के सतह तक पहुँचने में खाई/चौड़ी क्रस्ट बाधाओं का सामना करना पड़ता है।​
  • अन्य संबंधित तथ्य
    • महासागरीय बनाम महाद्वीपीय crust की तुलना: महाद्वीपीय crust सामान्यतः 30–50 किमी मोटा होता है
    • जबकि हिमालय-प्रकार के क्षेत्र में यह मोटाई बहुत अधिक हो सकती है
    • जैसा कि मध्य हिमालय में 70–72 किमी के आसपास मापा गया है।
    • ऐसी मोटाई tectonic convergence के समय crustal shortening के परिणामस्वरूप बनती है।​
    • हिमालय के अन्य भागों में भी मोटाई विभिन्न होती है, परंतु मध्य हिमालय में मोटाई सबसे अधिक मानी जाती है
    • जो इसे विश्व के सबसे मोटे महाद्वीपीय क्रस्टों में से एक बनाती है।​
  • संक्षेप में एक उद्धारण
    • मोटाई: लगभग 70–72 किमी
    • क्षेत्रीय कारण: प्लेट टकराव से Crustal Shortening और Thickening
    • प्रभाव: magma ascent पर रोक/समाप्ति के संकेत, ज्वालामुखी गतिविधि के घटने का संकेत
  • युक्तियाँ और संदर्भ
    • अगर चाहें तो मैं ऑनलाइन स्रोतों से और विस्तृत अध्ययन-नतीजे, मानचित्र, और संख्यात्मक डेटा भी दे सकता हूँ
    • ताकि आप अपने अध्ययन या संदर्भ हेतु स्पष्ट आंकड़े प्राप्त कर सकें।​
    • यह जानकारी सामान्य भू-विज्ञान के पाठ्यक्रमों में Medieval/Modern Himalaya के संदर्भ के अनुसार प्रस्तुत की जाती है
    • शिक्षा-उद्देश्यों के लिए उपयुक्त है।​