मिट्टियां (भारत का भूगोल)Total Questions: 171. मिट्टी की अम्लीय प्रकृति ....... की उच्च सांद्रता द्वारा दर्शायी जाती है। [CGL (T-I) 13 अप्रैल, 2022 (I-पाली)](a) नाइट्रोजन(b) हाइड्रोजन(c) फॉस्फोरस(d) ऑक्सीजनCorrect Answer: (b) हाइड्रोजनSolution:मिट्टी की अम्लीय प्रकृति हाइड्रोजन की उच्च सांद्रता द्वारा दर्शाई जाती है।pH का महत्वमिट्टी का pH मिट्टी के घोल में हाइड्रोजन आयनों (H⁺) की सांद्रता को मापता है, जहाँ pH 7 से कम होने पर मिट्टी अम्लीय मानी जाती है।अधिक H⁺ आयन अम्लता बढ़ाते हैंजबकि OH⁻ आयनों की अधिकता क्षारीयता का कारण बनती है।फसलों के लिए आदर्श pH 6.5 से 7.5 के बीच होता है, जहाँ पोषक तत्व सबसे अधिक उपलब्ध होते हैं।अम्लीय मिट्टी के कारणअम्लीय मिट्टी मुख्य रूप से अत्यधिक वर्षा से बनती हैजो कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे क्षारक तत्वों को धो देती है।अमोनियम-आधारित उर्वरकों का अधिक उपयोग, जैविक पदार्थों का अपघटन (जो कार्बनिक अम्ल उत्पन्न करता है)एल्यूमीनियम की उच्च मात्रा भी अम्लता बढ़ाती है। लेटराइट मिट्टी जैसी प्रकार उच्च वर्षा वाले क्षेत्रों में अम्लीय होती हैं।प्रभाव और समस्याएँअम्लीय मिट्टी में फॉस्फोरस, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व कम उपलब्ध होते हैंजबकि एल्यूमीनियम और मैंगनीज की विषाक्तता बढ़ जाती है, जो जड़ों को नुकसान पहुँचाती है।सूक्ष्मजीवों की गतिविधि घटने से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है और फसल उत्पादन कम हो जाता है।लंबे समय में यह मिट्टी की संरचना को भी खराब कर सकती है।सुधार के उपायअम्लीय मिट्टी को चूना (कैल्शियम कार्बोनेट) या डोलोमाइट डालकर तटस्थ किया जा सकता हैजो H⁺ आयनों को बेअसर करता है। कार्बनिक खाद जैसे कम्पोस्ट का उपयोग अम्लता कम करने में मदद करता है।नियमित pH परीक्षण और संतुलित उर्वरक प्रयोग से समस्या नियंत्रित रहती है।2. निम्नलिखित में से कौन-सा एक पर्यावरण कार्य (environment function) नहीं है? [MTS (T-I) 16 मई, 2023 (II-पाली)](a) जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाना(b) संसाधनों की आपूर्ति करना(c) अपशिष्ट का संचय(d) जीवन निर्वाहCorrect Answer: (c) अपशिष्ट का संचयSolution:अपशिष्ट का संचय पर्यावरण कार्य नहीं है, जबकि जीवन निर्वाह, संसाधनों की आपूर्ति करना तथा जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाना पर्यावरण कार्य के अंतर्गत शामिल हैं।मिट्टी के संदर्भ में पर्यावरण कार्यों की चर्चा अक्सर मिट्टी की पारिस्थितिक भूमिकाओं पर केंद्रित होती हैलेकिन प्रश्न "निम्नलिखित में से कौन-सा एक पर्यावरण कार्य नहीं है?" MCQ शैली का लगता है जहाँ विकल्प दिए जाते हैं।सामान्यतः मिट्टी के पर्यावरण कार्यों में जल संरक्षण, पोषक चक्रण, कार्बन संग्रहण आदि शामिल होते हैंजबकि अम्लीयता या H⁺ सांद्रता मिट्टी की एक रासायनिक स्थिति है, न कि कार्य।मिट्टी के प्रमुख पर्यावरण कार्यमिट्टी जल को फिल्टर कर भूजल रिचार्ज करती है, जैव विविधता को समर्थन देती हैवायुमंडलीय CO₂ को संग्रहीत कर जलवायु संतुलन बनाए रखती है। यह अपक्षय के माध्यम से खनिज चक्रित करती हैसूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटन प्रक्रिया चलाती है।ये सभी पारिस्थितिक सेवाएँ मिट्टी को पर्यावरण का आधार बनाती हैं।गैर-पर्यावरण कार्य की पहचानपिछले प्रश्न से जुड़ते हुए, "मिट्टी की अम्लीय प्रकृति H⁺ की उच्च सांद्रता द्वारा दर्शायी जाती हैएक गुण या विशेषता है, न कि कार्य। पर्यावरण कार्य सक्रिय प्रक्रियाएँ हैंजैसे मृदा अपरदन रोकना या ऑक्सीजन उत्पादन, जबकि अम्लता मापन मात्र है।अन्य सामान्य विकल्पों में "बीज उत्पादन" या "फसल वृद्धि" जैसा कुछ कार्य-विशेष न हो सकता है।कार्यों का वर्गीकरणजल चक्रण और शुद्धिकरण: मिट्टी वर्षा जल को अवशोषित कर प्रदूषण हटाती है।पोषक तत्व चक्रण: नाइट्रोजन फिक्सेशन और फॉस्फोरस रिलीज।जैविक नियंत्रण: सूक्ष्मजीव रोगजनकों को नियंत्रित करते हैं।गैर-कार्य उदाहरण: pH स्तर या रंग, जो केवल वर्णन हैं।महत्वपूर्ण प्रभावगलत कार्य की पहचान से मिट्टी प्रबंधन में भ्रम होता है, जो प्रदूषण बढ़ा सकता है।सही समझ से जैविक खेती और संरक्षण संभव है।3. स्तरीकृत रेत और बजरी की एक लंबी, विसर्पी कटक को ....... के रूप में जाना जाता है। [Phase-XI 27 जून, 2023 (IV-पाली)](a) एस्केर(b) वोर्ल(c) लोप(d) आर्कCorrect Answer: (a) एस्केरSolution:स्तरीकृत रेत और बजरी की एक लंबी, विसर्पी कटक को एस्केर के रूप में जाना जाता है।एस्कर की परिभाषाएस्कर हिमनदों के नीचे या उनके भीतर बहने वाली पिघले पानी की धाराओं द्वारा रेत, बजरी और अन्य महीन तलछटों को जमा करने से बनने वाली लंबी, सर्पिलाकार रिज होती है।ये कटक आमतौर पर 1 से 10 किलोमीटर लंबे और 10-30 मीटर ऊंचे हो सकते हैं, जो हिमयुग के बाद भी स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।वैज्ञानिक इन्हें अध्ययन करके प्राचीन हिमनदों की दिशा और जलप्रवाह समझते हैं।निर्माण प्रक्रियाहिमनद के भीतर सुरंगों या चैनलों में बहता पिघला पानी तलछटों को ढोकर ले जाता हैजो जमाव बिंदु पर स्तरित (stratified) रूप से जमा हो जाती है। जब हिमनद पिघल जाता हैतो यह जमा ऊंची रिज के रूप में उभर आती है।ये विसर्पी (winding) आकार ग्लेशियर के भीतर नदी के मेहराबों के कारण बनते हैंजो कुंडलदार पथों का अनुसरण करते हैं।अन्य संबंधित आकृतियांमोरैन (Moraine): हिमनद द्वारा धकेली गई मिट्टी और चट्टानों का ढेर, जो एस्कर से भिन्न असंरचित होता है।ड्रमलिन (Drumlin): अंडाकार कटक, लेकिन रेत-बजरी के बजाय मृदा प्रधान।एरेटिक (Erratic): हिमनद द्वारा दूर ले जाई गई विशाल चट्टानें।वैश्विक उदाहरणउत्तरी अमेरिका, आयरलैंड और स्कैंडिनेविया में प्रसिद्ध एस्कर पाए जाते हैंजैसे न्यूयॉर्क के पास के क्षेत्र। भारत में हिमालयी क्षेत्रों में समान संरचनाएं अध्ययन का विषय हैं।ये पर्यावरणीय परिवर्तनों के प्रमाण प्रदान करते हैं।4. ....... भारत के बाढ़ वाले मैदानों में सु-अपवाहित (well-drained) उपजाऊ मृदा पर अच्छी तरह से उगता है, जहां प्रत्येक वर्ष मृदा नवीनीकृत होती रहती है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (II-पाली)](a) केसर(b) जूट(c) बाजरा(d) प्राकृतिक रेशमCorrect Answer: (b) जूटSolution:जूट भारत के बाढ़ वाले मैदानों में सु-अपवाहित मृदा पर अच्छी तरह से उगता है, जहां प्रत्येक वर्ष मृदा नवीनीकृत होती रहती है।बाजरा की फसल विशेषताएंबाजरा (Pennisetum glaucum या Pearl Millet) एक प्रमुख खरीफ फसल है जो शुष्क और अर्ध-शुष्क जलवायु में उगाई जाती हैलेकिन बाढ़ प्रभावित मैदानों की अच्छी जल निकासी वाली जलोढ़ मिट्टी में सर्वोत्तम पैदावार देती है।यह मिट्टी में पोटाश, फॉस्फोरिक अम्ल और चूने की प्रचुरता के कारण उपजाऊ बनी रहती हैजो बाढ़ के दौरान निक्षेपित गाद से सालाना नवीनीकरण होता है। बाजरा की जड़ें गहरी होती हैंजो इसे सूखा प्रतिरोधी बनाती हैं और 25-35 डिग्री सेल्सियस तापमान पर 400-500 मिमी वर्षा में अच्छा विकास करता है।उपयुक्त मिट्टी और क्षेत्रभारत के इंडो-गंगा मैदानों (उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब) में जलोढ़ मिट्टी (खादर प्रकार) बाजरा के लिए आदर्श हैक्योंकि यह रेतीली दोमट होती है और जल निकासी अच्छी रखती है। बाढ़ के बाद नई गाद मिट्टी को पोषक तत्वों से भर देती हैजिससे नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम की उपलब्धता बढ़ जाती है।अन्य क्षेत्रों में राजस्थान, गुजरात और हरियाणा के अर्ध-शुष्क भागों में भी लाल और काली मिट्टी पर उगाया जाता हैलेकिन बाढ़ वाले मैदानों में इसकी पैदावार 25-30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंचती है।खेती की विधि और लाभबाजरा की बुवाई जून-जुलाई में होती है, 20-25 किग्रा बीज प्रति हेक्टेयर दर से, और कटाई अक्टूबर में।यह मिट्टी की अम्लता सहनशील है (pH 5.5-8.5) और कम उर्वरक (40-50 किग्रा N, 20-30 किग्रा P) की जरूरत पड़ती है।फसल चारा, अनाज और स्वास्थ्यवर्धक मिलेट के रूप में उपयोगी हैजो ग्लूटेन-मुक्त और उच्च प्रोटीन (11-12%) वाली होती है।भारत में कुल मिलेट उत्पादन का 40% बाजरा है।5. मृदा के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही है? [CHSL (T-I) 14 मार्च, 2023 (IV-पाली)](I) वन मृदा - वे नदी घाटी के किनारों में दोमट और सिल्टदार होती है।(II) काली मृदा - सामान्यतः फॉस्फोरस की मात्रा कम होती है। (a) न तो (I) और न ही (II)(b) (I) और (II) दोनों(c) केवल (I)(d) केवल (II)Correct Answer: (b) (I) और (II) दोनोंSolution:वन मृदा का निर्माण उन वन क्षेत्रों में होता है, जहां पर्याप्त वर्षा होती है।वन मृदा नदी घाटी के किनारों में दोमट और सिल्टदार होती है।काली मिट्टी जिसे स्थानीय रूप से रेगुर / रेगड़ के नाम से जाना जाता हैइसमें फॉस्फोरस की मात्रा कम होती है।मृदा का संकल्पना और प्रमुख तत्त्वमृदा पृथ्वी की सतह पर beschikbaar x तत्वों का मिश्रण है: खनिज कण, ह्यूमस (सजीव अवशेष), जल और वायुयह उपरिमृदा (फूलदार ऊपर की परत) में अधिक स्पष्ट होती है। [जवाब संदर्भ: सामान्य मृदा परिभाषा और संरचना]ह्यूमस जल धारण क्षमता, पोषक तत्व प्रदाने और सूक्ष्मजीवों के लिए भोजन-स्रोत प्रदान करता है।साथ ही मृदा संरचना बनावट में crumb structure बनाकर जल-आ जाने-रोधी व्यवहार को प्रभावित करता है।[उद्धरण: Doubtnut/विकिपीडिया जैसी स्रोतों का सारांश]मृदा के प्रकार उनके कण आकार, अवशोषित पोषक तत्व और जल-निकासी गुणों पर निर्भर करते हैंजैसे काली मृदा, लैटेराइट मृदा आदि। [उद्धरण: सामान्य पाठ]युग्म: सही/गलत कथन के आधार परवन मृदा- घाटी के किनारों में दोमट और गादयुक्त होती हैं।ट्रैकिंग: वन मृदा (या वनावरण मृदा) अक्सर हल्की से मध्यम भारी हो सकती हैजिसमें जैविक पदार्थ अधिक होते हैं, पर “हर वन-मृदा” ऐसा कहना ठीक नहीं; कई स्थानों पर गादयुक्त या दोमट मृदा पायी जाती हैलेकिन यह सार्वभौमिक नहीं है। इस युग्म का सही/गलत होना स्थान-विशिष्ट है। [related sources discussion]काली मृदा- आम तौर पर फास्फोरस की मात्रा कम होती है।सामान्य अस्मिता: काली मृदा (Black soil/Regur) प्रायः उच्च फास्फोरस स्टोरेज क्षमता दिखाती हैक्योंकि इसमें फास्फोरस सहित पोषक तत्व अधिक रहते हैं और पंछी-रेशमी सामग्री ऊर्जावान होती है।अतः यह कथन सामान्यीकृत रूप से गलत हो सकता है। [उच्च पोषक तत्व, खासकर फास्फोरस]लैटेराइड मृदाएं- लोह और ऐलुमिनियम से समृद्ध होती हैं परंतु नाइट्रोजन और पोटेशियम से हीन होती हैं।लैटेराइड मृदा सामान्यतः Fe-Al ह्यूमस से समृद्ध होती है और जल-निकास कुछ स्थानों पर कम होते हैंपोषक तत्वों की स्थिति क्षेत्र-विशिष्ट होती है। कुछ स्रोतों में इन्हें N, K से कम बताया गया है, पर यह पूर्णतः निश्चित नहीं होता।इस युग्म में बिंदु-स्तर पर स्पष्टता के लिए क्षेत्रीय संदर्भ चाहिए।निष्कर्षक्षेत्र-विशिष्ट विवरण और सत्यापन के बगैर उपरोक्त युग्मों में “सही/गलत” की क्लियर-सी काट निश्चित करना कठिन है।पाठ्य-पुस्तक/प्रश्न-समाधान में स्पष्ट रूप से कौन-सा युग्म सही हैयह सामान्यतः किसी विशेष पाठ्य-पुस्तक/शिक्षण संस्थान के अनुसार तय होता है।अतः अगर आप किसी विशेष शिक्षण बोर्ड/पाठ्यक्रम के प्रश्न बैंक का संदर्भ दे सकेंतो उसी प्रश्न पर सटीक उत्तर और स्पष्टीकरण दिया जा सकता है।मृदा की परिभाषा, संरचना एवं ह्यूमस का भूमिका सामान्य पाठ्य-सामग्री में मिलती है [उच्च-स्तरीय संदर्भ] .काली मृदा, लैटेराइड आदि प्रकारों के पोषक तत्वों के वितरण के बारे में विविध स्रोतों पर चर्चा मिलती हैलेकिन संपूर्ण कथन-समूह के लिए पाठ्य-स्तर का स्पष्ट स्रोत आवश्यक है। [उद्धरण-उल्लेखित स्रोतों के सार]6. गेहूं की खेती किस प्रकार की मृदा में सर्वोत्तम ढंग से होती है? [MTS (T-I) 08 मई, 2023 (I-पाली)](a) काली मृदा(b) सु-अपवाहित दोमट मृदा(c) पीली मृदा(d) लाल मृदाCorrect Answer: (b) सु-अपवाहित दोमट मृदाSolution:गेहूं की खेती सु-अपवाहित दोमट मृदा में सर्वोत्तम ढंग से होती है।तथा मिट्टी से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण पहलूजल निकास और जल धारण क्षमता: बेहतर जल निकास वाली मिट्टी (दुमट/बलुई-मिट्टी) रोग-सम्बन्धी समस्या कम करती हैपौधे के विकास के लिए पर्याप्त नमी बनाये रखती है ।पएच स्तर: सामान्यतः गेहूं के लिए हल्के से मध्यम पीएच वाली मिट्टी उपयुक्त रहती हैअत्यधिक पीएच (बहुत अधिक संतुलन और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी) से नुकसान हो सकता है ।खाद-खाद्य संतुलन: मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्व जैसे NPK, फॉस्फोरस, पोटाश, मोलिब्डेनम आदि की पर्याप्तता जरूरी हैकुछ मिट्टीयों में विशेष तत्वों की कमी होने पर विशेष अनुपूरक/खाद डालना पड़ सकता है ।उर्वरक-प्रबंधन: पीएच और मिट्टी प्रकार के अनुसार उर्वरक का चयन करें; खाद-खाद से संतुलन बनाए रखना पैदावार बढ़ाने में अहम है ।भारतीय संदर्भ में अभ्यासरबी मौसम में बोई जाने वाली गेहूं की फसल के लिए आम तौर पर दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सर्वोत्तम मानी जाती हैक्योंकि इनमें पानी की उपलब्धता और आक्सीजन की आपूर्ति स्वस्थ रहती है ।कुछ क्षेत्रों में लाल मिट्टी, काली मिट्टी आदि पर गेहूं उगाया जाता हैकिन्तु वहाँ भी जलनियंत्रण, खाद-उन्नयन और सही जल-संयोजन के साथ फलन संभव है ।फसल-चयन और मिट्टी-निर्भर निर्णयमिट्टी की गहराई और पानी-निकासी की स्थिति के अनुसार किस्म चयन करेंबलुई दोमट और दोमट मिट्टी पर अच्छी प्रकार से उगने वाली किस्में अधिकतम उत्पादन दे सकती हैं ।अगर मिट्टी की जलधारण क्षमता कम हैतो सिंचाई योजना और उन्नत खेती तकनीकों (जैसे बुवाई-खालसू, किण्वन/ड्रिप आदि) अपनाने चाहिए ताकि फसल को पर्याप्त पानी मिल सके ।उच्च गुणवत्ता वाले स्रोतों से संक्षेप निष्कर्षगेहूं के लिए सबसे उपयुक्त मिट्टी सामान्यतः दोमट/बलुई दोमट हैजिसमें जल निकास अच्छा हो और पानी-उत्पादन संतुलित रहे ।किसी भी मिट्टी पर गेहूं उगाने के पहले मिट्टी परीक्षण कराकर PH और पोषक तत्व स्थिति जाँच लेना बेहतर रहता हैताकि सही प्रकार के उर्वरक और सुधारात्मक कदम उठाये जा सकें ।7. मिट्टी की किस परत में ह्यूमस की सांद्रता सर्वाधिक होती है? [MTS (T-I) 19 जून, 2023 (I-पाली)](a) पेरेंट रॉक(b) ऊपरी मृदा(c) उपमृदा(d) अपक्षयित चट्टान सामग्रीCorrect Answer: (b) ऊपरी मृदाSolution:मिट्टी की ऊपरी मृदा परत में ह्यूमस की सांद्रता सर्वाधिक होती है।जैसे-जैसे हम गहराई में जाते हैं ह्यूमस की मात्रा कम होती जाती है। ऐसा इसलिए हैक्योंकि अधिकांश जीवित जीव एवं वनस्पति मिट्टी की सबसे ऊपरी परत में ही जीवाश्म के रूप में दबे रहते हैं।पृष्ठभूमिमृदा प्रोफाइल में कार्बनिक पदार्थ का अधिकांश भाग सामान्यतः ऊपरी मृदा परत में जमा होता हैजहाँ पौधे के अवशेष, प्रकाशन और जीवाश्मों का अपघटन अधिक तेज़ी से होता हैइसी कारण ह्यूमस की मात्रा सबसे अधिक ऊपरी मृदा में रहती है.ऊपरी मृदा की भूमिकाऊपरी मृदा (A horizon) वह परत है जिसमें कार्बनिक पदार्थ और खनिज पदार्थ मिलकर एक पोषक-समृद्ध परत बनाते हैं।यहाँ ह्यूमस का स्तर ऊँचा रहता है और यह पौधों के पोषक तत्वों के भंडारण व विमोचन में प्रमुख भूमिका निभाता है.इसके विपरीत नीचे की परतों (जैसे एल्यूवियल/खनि-युक्त परतें) में ह्यूमस की मात्रा घट जाती हैक्योंकि वहाँ कार्बनिक पदार्थों का प्रकृति से सम्बन्ध कम और खनिज पदार्थ अधिक होता है.मुख्य कारणपौधों के पत्ते-बायोमास के सड़न-घटाव, साइट पर जलवायु, प्रबंधन practices (जैसे कम्पोस्टिंग, जैविक खेती) आदि कारणों से ऊपरी मृदा में ह्यूमस अधिक बनता और संरक्षित रहता है।जलवायु-जनित निर्भरता और भूमि-उपयोग की प्रथाओं से ऊपरी मृदा में कार्बनिक सामग्री का प्रवाह अधिक रहता हैजिससे ह्यूमस की सतत आपूर्ति होती है.किसानों और प्रबंधकों के लिए प्रभावऊपरी मृदा में उच्च ह्यूमस का अर्थ है बेहतर जल धारण क्षमतापोषक तत्वों का लंबा बनना और मिट्टी की संरचना का सुधरना; यह फसलों की उत्पादकता और स्थायित्व में योगदान देता है.ह्यूमस-समृद्ध ऊपरी मृदा पानी की कमी के समय भी पौधों के लिए अधिक स्थिर आपूर्ति बनाए रख सकती हैजिससे सूखे की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.संक्षेप मेंसर्वाधिक ह्यूमस concentration ऊपरी मिट्टी में ही पाई जाती है, जिसे A-horizon या ऊपरी मृदा परत कहा जाता है।यह परत कार्बनिक पदार्थों का प्रमुख भंडार है और मिट्टी के स्वास्थ्य-उन्नयन में सबसे अधिक प्रभावी होती है.उद्धरण/स्रोत (केवल संदर्भ के रूप में संबंधित पंक्तियाँ)ऊपरी मृदा में ह्यूमस की अधिकतम सांद्रता की भूमिका और कारण.ऊपरी मृदा की परतों में कार्बनिक पदार्थ और खनिज पदार्थ का मिश्रण, और ह्यूमस का संचय.ह्यूमस से जल धारणता, पोषक तत्व भंडार और मिट्टी संरचना पर प्रभाव.8. दक्कन के पठार के पूर्वी और दक्षिणी भाग में कम वर्षा वाले क्षेत्रों में क्रिस्टलीय आग्नेय चट्टानों पर ....... विकसित होती है। [CGL (T-I) 20 अप्रैल, 2022 (III-पाली)](a) काली मिट्टी(b) जलोढ़ मिट्टी(c) शुष्क मिट्टी(d) लाल मिट्टीCorrect Answer: (d) लाल मिट्टीSolution:दक्कन के पठार के पूर्वी और दक्षिणी भाग में कम वर्षा वाले क्षेत्रों में क्रिस्टलीय आग्नेय चट्टानों पर लाल मिट्टी विकसित होती है।मिट्टी का प्रकारलाल मिट्टी (Red Soil) दक्कन पठार के इन क्षेत्रों में प्रमुख रूप से पाई जाती हैजो क्रिस्टलीय आग्नेय चट्टानों जैसे ग्रेनाइट और ग्नाइस के अपक्षय से बनती है।कम वर्षा (50-75 सेमी सालाना) के कारण यह मिट्टी लौह ऑक्साइड से भरपूर हो जाती हैजिससे इसका लाल रंग बनता है, जबकि चूना और नाइट्रोजन की कमी रहती है।निर्माण प्रक्रियाक्रिस्टलीय आग्नेय चट्टानों का धीमा अपक्षय कम वर्षा वाले इलाकों में होता हैजहाँ जलवायु शुष्क-उपोष्णकटिबंधीय होती है।इस प्रक्रिया में लौह तत्वों का ऑक्सीकरण प्रमुख होता हैजो मिट्टी को लालिमा प्रदान करता है; साथ ही, उच्च तापमान और कम आर्द्रता से कार्बनिक पदार्थ कम बनते हैं।दक्कन के पूर्वी भाग (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना) और दक्षिणी भाग (तमिलनाडु, कर्नाटक के कुछ हिस्से) में यह मिट्टी 30-50% क्षेत्र को कवर करती है।विशेषताएँपीएच मान 6-7 के बीच होता है, जो अम्लीय से तटस्थ की ओर झुका रहता है।रेतीली-दोमट संरचना के कारण जल निकासी अच्छी होती हैलेकिन जल धारण क्षमता कम रहती है।पोटाश और फॉस्फोरस की मात्रा मध्यमलेकिन नाइट्रोजन, चूना और ह्यूमस की कमी प्रमुख समस्या है।वितरण और प्रभावदक्कन पठार के पूर्वी भाग में महानदी घाटी से लेकर पूर्वी घाट तक, तथा दक्षिणी भाग में नर्मदा-सह्याद्रि के दक्षिण में यह मिट्टी फैली हुई है।कम वर्षा के कारण यहाँ काली मिट्टी (बेसाल्टिक क्षेत्रों में) की तुलना में लाल मिट्टी अधिक प्रचलित हैजो ज्वालामुखीय ट्रैप के बजाय प्राचीन क्रिस्टलीय चट्टानों पर आधारित है।कृषि उपयोगयह मिट्टी बाजरा, ज्वार, मूँगफली, दालें और तंबाकू जैसी कम पानी वाली फसलों के लिए उपयुक्त है।उर्वरता बढ़ाने हेतु जैविक खाद, हरी खाद और मृदा संरक्षण आवश्यक होता हैक्योंकि क्षरण की समस्या आम है। दक्षिण भारत के इन क्षेत्रों में यह मिट्टी कृषि अर्थव्यवस्था का आधार बनी हुई है।9. पंजाब राज्य निम्नलिखित में से किस प्राकृतिक संसाधन से समृद्ध है? [MTS (T-I) 05 सितंबर, 2023 (I-पाली)](a) उपजाऊ मिट्टी(b) सिलिकॉन(c) कोयला(d) पेट्रोलियमCorrect Answer: (a) उपजाऊ मिट्टीSolution:पंजाब राज्य उपजाऊ मिट्टी के प्राकृतिक संसाधन से समृद्ध है।पंजाब को उपजाऊ कृषि भूमि के कारण "भारत का अन्न भंडार" कहा जाता है।जल संसाधन और सिंचाईपंजाब भारत के सबसे सिंचित राज्यों में से एक है; सरकारी नहरें और कुएँ मुख्य स्रोत हैंजिससे गेहूं, चावल जैसी प्रमुख फसलों की खेती संभव होती हैअनुसार पंजाब की सिंचाई व्यवस्था जिलेवार भिन्नippy होते हुए भी राज्य की कृषि आय का आधार हैयह जल-संरक्षण और पानी-प्रबंधन के लिए महत्त्वपूर्ण है.मिट्टी और कृषि उपजपंजाब की भूमि उपजाऊ मानी जाती है और कृषि क्षेत्र राज्य की बड़ी आबादी के जीवन-यापन का आधार हैगेहूं और चावल के साथ कपास, गन्ना, तिलहन आदि प्रमुख फसलें इन्हीं मिट्टी और जल संसाधनों से समर्थित हैंपंजाब का योगदान खेतों से देश के खाद्यान्न भंडारों में महत्वपूर्ण रहा है.प्राकृतिक संसाधन के अन्य आयामपंजाब में मिट्टी का प्रकार, जल निकायों की उपलब्धता और सिंचाई-आधारित कृषि-व्यवस्था इसे agro-resource rich बनाती हैभूगोलिक संरचना और नदियों का संयोजन कृषिउत्पादन के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है.समग्र दृष्टिकोणपंजाब का प्राकृतिक संसाधन चित्र मुख्यतः कृषि-आधारित है, जिसमें जल संसाधन, उपजाऊ मिट्टी और विकसित सिंचाई नेटवर्क प्रमुख हैंयह राज्य के आर्थिक विकास और खाद्यान्न सुरक्षा के लिए अहम हैअन्य प्राकृतिक संसाधनों के संदर्भ में पंजाब के बारे में सामान्य ज्ञान स्रोत भी यही संकेत करते हैंकृषि-प्रधान संसाधन इस राज्य की वास्तविक ताकत है.10. निम्नलिखित में से कौन-सी मिट्टी द्वारा प्रदत्त किए जाने वाले सूक्ष्म पोषक तत्व का एक उदाहरण है? [MTS (T-I) 13 जून, 2023 (II-पाली)](a) सल्फर(b) कैल्शियम(c) पोटैशियम(d) आयरनCorrect Answer: (d) आयरनSolution:आयरन मिट्टी द्वारा प्रदत्त किए जाने वाले सूक्ष्म पोषक तत्व का उदाहरण है।मृदा से प्राप्त सूक्ष्म पोषक तत्व इस प्रकार हैं-बोरॉन, कॉपर, आयरन, मैंगनीज, मोलिब्डेनम, निकल, जिंक आदि।नीचे की धारा “पृथ्वी से पौधों तक” में मिट्टी के पोषक तत्व तीन समूहों में आते हैं:सूक्ष्म पोषक तत्व (trace elements): Zn, Fe, Mn, Cu, B, Mo, Cl, Ni आदि।इनमें से एक स्पष्ट उदाहरण के रूप में Zn रखना पाठ्यक्रम के अनुसार प्रमुख माना जाता है[उल्लेख: सामान्य भू-उपयोग/मिट्टी विज्ञान स्रोत] [citation].यह खनिज पौधों के क्लोरोफिल के निर्माण, एंजाइम क्रियाओं और जैव रासायनिक प्रक्रियाओं में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।उदाहरणतः Zn क्लोरोफिल निर्माण और एंजाइम फंक्शन के लिए आवश्यक होता है [citation].मिट्टी से मिलने वाले Zn की कमी आमतौर पर पौधों की वृद्धि, पत्तों की रंगीनता और फसल उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैZn की कमी के संकेत सामान्यतः पत्तियों पर क्लोरोफिल क्षय, मंद वृद्धि आदि हो सकते हैं [citation].मिट्टी में ज़िंक के साथ तुलनात्मक स्थलों पर:आयरन (Fe) और मैग्नीज (Mg) भी महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक तत्व हैंजो Zn की तरह पौधे के कई विशिष्ट जैव-रासायनिक कार्यों में भाग लेते हैं [citation].फिर भी प्रश्न “निम्नलिखित में से कौन-सी मिट्टी द्वारा प्रदत्त किए जाने वाले सूक्त पोषक तत्व का एक उदाहरण हैलिए एक स्पष्ट उत्तर के रूप में Zn को चुना जा सकता है क्योंकि यह सूक्ष्म पोषक तत्वों में से एक हैअक्सर अध्ययन/शोध में प्राथमिक उदाहरण के रूप में उद्धृत होता है [citation].संरचित उत्तर—कुंजी निष्कर्ष:उदाहरण मिट्टी से मिलने वाले सूक्ष्म पोषक तत्वों में से एक: Zinc (Zn).Submit Quiz12Next »