Correct Answer: (c) इनमें सामान्यतः ह्यूमस काफी मात्रा में होते हैं।
Solution:- लैटेराइट मृदा उष्णकटिबंधीय प्रदेशों की अपक्षालित मृदा है।
- इस मिट्टी की उर्वरता कम होती है। साथ ही इस मिट्टी में ह्यूमस की कमी होती है।
- मूल जानकारी
- लैटेराइट मृदा उष्णकटिबन्धीय आर्द्र क्षेत्र में विकसित होती है जहाँ उच्च तापमान और भारी वर्षा होती है।
- यह उच्च आर्द्रता और गर्म मौसम के कारण मिट्टी में क्षरण और सिलिका का कमी हो जाता है
- जिससे लोहे और अल्यूमीनियम ऑक्साइड का उच्च मात्रा में अवशोषण होता है।
- यह सामान्यतः लाल/रक्त-लाल रंग की मिट्टी होती है। [संदर्भ: सामान्य भूगोलीय चरित्र, लैटेराइट के निर्माण की पारंपरिक धारणाएँ]
- सही कथन (आमतौर पर सत्य)
- लैटेराइट मिट्टी अक्सर उष्णकटिबंधीय आर्द्र जलवायु क्षेत्र में पाई जाती है। [यह सामान्य तथ्य है]
- इसका रंग लाल या गुलाबी होता है, जो मुख्यतः आयरन ऑक्साइडों के कारण है। [सामान्य तथ्य]
- इसका विकास मानसून के चक्र और तापमान के साथ होने वाले परिवर्तनों पर निर्भर है
- इसलिए वर्षा-आधारित जलवृत्ति के साथ-साथ तेज धूप भी इसमें भूमिका निभाती है। [आमतौर पर मान्य]
- संभावित गलत (गलत/संदिग्ध) कथन
- लैटेराइट मिट्टी में बिल्कुल भी उर्वरक तत्वों की कमी नहीं होती: यह गलत है।
- वास्तव में लैटेराइट मिट्टी में कई बार नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, और पोटाश जैसी प्रमुख पोषक तत्वों की कमी पाई जा सकती है
- जबकि कुछ क्षेत्रों में यह पोषक तत्व थोड़ा-बहुत मौजूद होते हैं।
- अतः इसे सामान्यतः उर्वरक के बिना फसल उगाने के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता; कृषि के लिए उर्वरक और अन्य सुधारों की आवश्यकता पड़ती है।
- [यह सामान्य कृषिगत निष्कर्श है]
- लैटेराइट मिट्टी केवल कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु जैसे दखिन-पूर्वी भारतीय राज्यों तक सीमित है: यह गलत है।
- लैटेराइट मिट्टी भारत के कई भागों में पाई जाती है
- खासकर प्रायद्वीपीय पठार और उससे सटे क्षेत्रीय भागों में, तथा महाराष्ट्र, ओड़िशा, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों में भी मौजूद हो सकती है।
- अतः क्षेत्रीय वितरण के दायरे को सीमित करना सही नहीं है। [उच्च संभव地域 वितरण के प्रमाण]
- स्पष्ट दायरे से बाहर होने वाले बयान
- लैटेराइट मिट्टी का उपयोग मुख्यतः ईंट बनाने के लिए किया जाता है
- क्योंकि कठोरता में आग पर पकने पर मजबूत ईंट बनती है
- यह सामान्य धारणा है, पर यह पूरी तरह सही नहीं है कि हर लैटेराइट मिट्टी से ईंट बने।
- कुछ लैटेराइट स्रोतों में संरचना और जल तत्वों के कारण ईंट निर्माण के लिए उपयुक्त हो सकता है
- लेकिन सभी लैटेराइट ईंट के लिए उपयुक्त नहीं होते; इसके चयन, धुलाई, संरचना और कैल्शियम/सीए तत्वों पर निर्भर करता है।
- इसलिए “हर लैटेराइट ईंट के लिए उपयुक्त है” जैसी सामान्यीकरण गलत हो सकता है।
- [कम से कम सही तथ्य: कुछ लैटेराइट ईंट बनती हैं; यह परिस्थितिक निर्भरता पर है]
- संक्षिप्त निष्कर्ष
- सही नहीं होने वाली प्रमुख कथन की पहचान: लैटेराइट मिट्टी में सामान्यतः पोषक तत्वों की कमी नहीं होती
- यह कथन अक्सर गलत माना जाता है; वास्तविकता यह है कि पोषक तत्वों की कमी क्षेत्रीय रूप से हो सकती है
- उर्वरक/संरक्षण के उपायों की आवश्यकता पड़ती है। साथ ही, वितरण का दायरा केवल कुछ राज्यों तक सीमित नहीं है
- यह अधिक व्यापक है। इसलिए “लैटेराइट मिट्टी में उर्वरक तत्वों की कमी नहीं होती” जैसा कथन गलत हो सकता है
- यह सिर्फ एक ही राज्यों में पाई जाती है” जैसी सीमित धारणा भी गलत है।
- कृपया चाहें तो नीचे दिए गए बिंदुओं के अनुसार विकल्प-वार विश्लेषण के साथ आपके विशेष प्रश्न के साथ संलग्न कथनों की सूची दे दें
- ताकि सटीक विकल्प-निर्णय किया जा सके:
- कथन: लैटेराइट मिट्टी उष्ण कटिबंधीय आर्द्र क्षेत्र में विकसित होती है – सही
- कथन: लैटेराइट मिट्टी में आयरन ऑक्साइड की उच्च मात्रा होती है – सही
- कथन: लैटेराइट मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी नहीं पाई जाती – गलत/संभावित रूप से गलत
- कथन: लैटेराइट मिट्टी केवल कुछ राज्यों में ही पाई जाती है – गलत (वितरण व्यापक है)
- कथन: लैटेराइट मिट्टी ईंट बनाने के लिए हर स्थिति में उपयुक्त है – गलत (स्थिति-निर्भर)