मुगलकालीन प्रशासन (UPPCS)

Total Questions: 32

1. मुगल प्रशासन के दौरान जिले को किस नाम से जाना जाता था? [Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2004]

Correct Answer: (d) सरकार
Solution:

मुगल प्रशासन के दौरान जिले को 'सरकार' के नाम से जाना जाता था। शासन की सुविधा के लिए प्रत्येक सूबा (प्रांत) कई सरकारों (जिलों) में बंटा होता था। सरकार को पुनः परगना या महल में विभाजित किया गया था।

मुगल प्रशासनिक विभाजन 

प्रशासनिक इकाईआधुनिक समकक्षमुख्य अधिकारी
सूबाराज्यसूबेदार / नाज़िम
सरकारजिलाफौजदार (सैन्य) और अमलगुजार (राजस्व)
परगनातहसीलशिकदार और आमिल
ग्रामगाँवमुकद्दम और पटवारी

2. मुगल काल में जनपद (जिला) क्या कहलाता था? [U.P. Lower Sub. (Pre) 2009]

Correct Answer: (b) सरकार
Solution:

उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।

3. मुगल काल में सेना का प्रधान निम्न में से कौन था? [U.P. P.C.S. (Pre) 1992]

Correct Answer: (b) मीर बख्शी
Solution:

मुगल काल में मीर बख्शी सैन्य विभाग का प्रधान था। उच्चाधिकारियों सहित सभी श्रेणियों के मनसबदारों की नियुक्ति के आदेश उसी के द्वारा दिए जाते थे। घोड़ों को दागने और सिपाहियों का मुआयना करने का काम भी उसी के जिम्मे था।

अन्य महत्वपूर्ण सैन्य अधिकारी

• मीर-ए-आतिश: यह शाही तोपखाने का प्रधान होता था। इसकी अनुमति के बिना किले के भीतर तोपों का संचालन नहीं होता था।

• मीर-ए-बहर: यह नौसेना और शाही नौकाओं का प्रबंधन देखता था, साथ ही नदियों के ऊपर पुल बनाने का काम भी इसी के अधीन था।

• अहदी: ये बादशाह के व्यक्तिगत सैनिक होते थे, जो किसी मनसबदार के अधीन न होकर सीधे बादशाह के प्रति वफादार थे।

4. मुगल शासन में मीर बख्शी का कर्तव्य था- [U.P. P.C.S. (Spl.) Pre 2004]

Correct Answer: (d) भू-राजस्व अधिकारियों का पर्यवेक्षण
Solution:

मुगल शासन में मीर बख्शी भू-राजस्व अधिकारियों का पर्यवेक्षण करता था तथा साथ ही सैन्य विभाग के वेतन के लिए भी उत्तरदायी था।  वह मनसबदारों की नियुक्ति के लिए बादशाह को सिफारिश करता था और उनका रिकॉर्ड रखता था। घोड़ों को दागने (दाग) और सैनिकों का विवरण दर्ज करने (चेहरा/हुलिया) की व्यवस्था की देखरेख करना भी उसका काम था। सर जदुनाथ सरकार ने मीर बख्शी को 'वेतनाधिकारी' कहा है। किंतु वेतनाधिकारी का कार्य मीर बख्शी का नियमित एवं स्थायी कार्य नहीं था। वेतनाधिकारी का कार्य 'दीवान-ए-तन' करता था।

5. नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिसमें से एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है- [U.P.P.C.S. (Pre) 2021]

अभिकथन (A) : मुगल साम्राज्य मूल रूप से एक सैनिक राज्य था।
कारण (R) : केंद्रीय शासन व्यवस्था के विकास की प्राणशक्ति उसकी सैनिक शक्ति पर निर्भर थी।

नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए।
कूट :

Correct Answer: (a) (A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
Solution:

यद्यपि यह विवाद का विषय है कि मुगल साम्राज्य एक सैनिक राज्य था, परंतु अधिकतर इतिहासकार यह मानते हैं कि लगभग सभी मनसबदारों को सैन्य दायित्व प्रदान किया गया था। साथ ही मुगलों के पास एक बड़ी सेना थी, जिसने मुगल साम्राज्य के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

6. निम्नलिखित में से किसे मुगल सेना में चिकित्सक नियुक्त किया गया था? [U. P. P. C. S. (Spl.) (Mains) 2008]

Correct Answer: (c) मनूची को
Solution:

निकोलो मनूची को मुगल सेना में चिकित्सक नियुक्त किया गया था। वह एक इतालवी यात्री था। इसने भारत आकर दारा शिकोह की सेना में तोपची के रूप में नौकरी की। 1659 ई. में दारा शिकोह की मृत्यु के बाद इसने चिकित्सक का पेशा अपना लिया। बाद में वह औरंगजेब के पुत्र शहजादा शाह आलम (बहादुर शाह प्रथम) का निजी चिकित्सक बना। उसने 'स्टोरियो दो मोगोर' नामक पुस्तक लिखी, जिसे 17वीं सदी के भारत का सबसे विस्तृत विवरण माना जाता है।

7. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए, अहदी वे घुड़सवार सिपाही थे- [I.A.S. (Pre) 1998]

1. जिन्होंने अपनी सेवाएं एकाकी प्रदान कीं
2. जिन्होंने किसी सरदार के साथ अपने को संलग्न नहीं किया
3. सम्राट ही जिनका आसन्न कर्नल था
4. जिन्होंने अपने को मिर्जाओं के साथ संलग्न किया

इन कथनों में से-

Correct Answer: (b) 1, 2 और 3 सही हैं।
Solution:

मुगलकाल में मनसबदारों के सैनिकों के अतिरिक्त दो प्रकार के और घुड़सवार सैनिक थे, जो 'अहदी' तथा 'दाखिली' कहलाते थे। 'अहदी' सैनिक बादशाह द्वारा नियुक्त किए जाते थे तथा उसके अंगरक्षक के रूप में कार्य करते थे। यद्यपि इनका मनसबदारों से कोई संबंध नहीं था, किंतु बादशाह के प्रत्यक्ष आदेश से इन्हें मनसबदारों के साथ नियुक्त कर दिया जाता था। ये प्रत्यक्ष रूप से बादशाह के अधीन होते थे तथा इनकी भर्ती, वेतन, वस्त्र एवं घोड़े सब राज्य की ओर से दिए जाते थे। इनके लिए पृथक् दीवान एवं बख्शी की व्यवस्था की गई थी। एक अहदी घुड़सवार को 500 रु. वेतन देने का उल्लेख मिलता है, जबकि एक साधारण घुड़सवार को 12 रु. से 15 रु. तक ही वेतन दिया जाता था। ये बादशाह के सबसे योग्य और वफादार सैनिक माने जाते थे।

8. मुगल प्रशासन में 'मुहतसिब' था- [47th B.P.S.C. (Pre) 2005]

Correct Answer: (c) लोक आचरण अधिकारी
Solution:

मुगल प्रशासन में मुहतसिब लोक आचरण (नैतिकता) का निरीक्षण करने वाला अधिकारी था, जिसे औरंगजेब ने जन आचरण को शुद्ध रखने और शरिया कानून के अनुसार सार्वजनिक जीवन को संचालित करने के लिए नियुक्त किया था। वह एक प्रकार का 'नैतिक पुलिस' अधिकारी था, जो मदिरा, जुआ और अवैध कामों पर रोक लगाता था।  आचरण को शुद्ध बनाए रखने के लिए अकबर ने नगरों में मदिरा की बिक्री तथा वेश्याओं का निवास निषिद्ध घोषित कर दिया था।

9. मध्यकालीन भारत में मनसबदारी प्रथा खासतौर पर इसलिए चालू की गई थी, ताकि - [I.A.S. (Pre) 1996]

Correct Answer: (d) साफ-सुथरा प्रशासन लागू हो सके
Solution:

मनसबदारी व्यवस्था एक विशिष्ट प्रशासनिक व्यवस्था थी, जिसका प्रचलन मुगल शासक अकबर द्वारा किया गया था। संभवतः दशमलव प्रणाली पर आधारित मंगोलों की सैन्य व्यवस्था ही, जिसकी कुछ छाप दिल्ली सल्तनत के सैन्य संगठन पर दिखाई पड़ती है, मुगलों की सैन्य व्यवस्था का आधार रही होगी। दिए गए विकल्पों में मनसबदारी प्रथा को लागू करने का मुख्य उद्देश्य एक साफ-सुथरा प्रशासन को लागू करना था।

10. मुगल मनसबदारी व्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए कौन उत्तरदायी होता था ? [Jharkhand P.C.S. (Pre) 2023]

Correct Answer: (c) मीर बक्शी
Solution:

मुगल मनसबदारी व्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए 'मीर बक्शी' उत्तरदायी होता था। इसकी तुलना दिल्ली सल्तनत के 'दीवान-ए-अर्ज' से की जा सकती है, किंतु उसका प्रभाव दीवान-ए-अर्ज से भी ज्यादा था। मीर बक्शी, घोड़ों को दागने और सैन्य टुकड़ियों का निरीक्षण भी करता था। यह 'सरखत' नामक प्रमाण-पत्र पर दस्तखत करके सैनिकों के मासिक वेतन का निर्धारण भी करता था। अकबर के शासनकाल के 19वें वर्ष में मनसबदारी व्यवस्था का प्रारंभ माना जाता है।