मुद्रा एवं बैंकिंग (अर्थव्यवस्था) (भाग-I)Total Questions: 501. ....... 12 जुलाई, 1982 को RBI के कृषि ऋण (agricultural credit) संबंधी कार्यों और उस समय के कृषि पुनर्वित्त और विकास निगम (Agricultural Refinance and Development Corporation) के पुनर्वित्त संबंधी कार्यों को स्थानांतरित करके अस्तित्व में आया था। [CHSL (T-I) 16 मार्च, 2023 (I-पाली)](a) भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI)(b) राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD)(c) भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI)(d) भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)Correct Answer: (b) राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD)Solution:राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) 12 जुलाई, 1982 कोकृषि ऋण संबंधी कार्यों और उस समय के कृषि पुनर्वित्त और विकास निगम के पुनर्वित्त संबंधी कार्यों को स्थानांतरित करके अस्तित्व में आया था।स्थापना का उद्देश्यNABARD की स्थापना का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण भारत, विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में एकीकृत विकास को बढ़ावा देना था।RBI के कृषि ऋण कार्यों को लेकर यह संस्था ग्रामीण उन्नति, सहकारी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) और वाणिज्यिक बैंकों के माध्यम से ऋण प्रवाह को मजबूत करने के लिए बनी।इसे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 5 नवंबर 1982 को राष्ट्र को समर्पित किया।संगठनात्मक संरचनाNABARD भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अधीन कार्य करता है, हालांकि RBI इसका प्रमुख शेयरधारक है।इसका मुख्यालय मुंबई में स्थित है और देशभर में 32 क्षेत्रीय कार्यालय हैं।यह एक विकास बैंक के रूप में नीति निर्माण, योजना और ग्रामीण ऋण के संचालन में सक्रिय भूमिका निभाता हैजिसमें वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना भी शामिल है।प्रमुख कार्यग्रामीण बुनियादी ढांचे, जैसे सिंचाई, सड़कें और भंडारण के लिए ऋण प्रदान करना।सहकारी संस्थाओं और RRBs को पुनर्वित्त सुविधाएं उपलब्ध कराना।ग्रामीण विकास योजनाओं की निगरानी और क्षमता निर्माण करना।NABARD ने ARDC के विपरीत, जो मुख्यतः पुनर्वित्त पर केंद्रित थाRBI के सीधे ऋण कार्यों को भी ग्रहण कियाजिससे यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था का शीर्ष नियामक बना।महत्वपूर्ण योगदानNABARD ने ग्रामीण भारत में ऋण प्रवाह को क्रांतिकारी रूप दियाविशेष रूप से सूक्ष्म वित्त, किसान उत्पादक संगठन (FPO) और जलवायु परिवर्तन अनुकूल कृषि को बढ़ावा देकर।2025 तक इसके व्यवसाय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।यह संस्था ग्रामीण विकास की रीढ़ बनी हुई है।2. उलट रेपो दर (Reverse Repo Rate) का अर्थ क्या है? [MTS (T-I) 11 मई, 2023 (II-पाली)](a) वह दर जिस पर आरबीआई (RBI) विदेशी बैंक से ऋण लेती है(b) वह दर जिस पर व्यावसायिक बैंक आरबीआई (RBI) से ऋण लेते हैं(c) वह दर जिस पर व्यावसायिक बैंक विदेशी बैंकों से ऋण लेते हैं(d) वह दर जिस पर आरबीआई (RBI) व्यावसायिक बैंकों से ऋण लेती हैCorrect Answer: (d) वह दर जिस पर आरबीआई (RBI) व्यावसायिक बैंकों से ऋण लेती हैSolution:वह दर जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक व्यावसायिक बैंकों से ऋण लेती है उसे उलट रेपो दर (रिवर्स रेपो रेट) कहते हैंजबकि जिस दर पर भारतीय रिजर्व बैंक व्यावसायिक बैंकों को ऋण देता है, उसे रेपो दर (Repo rate) कहते हैं।परिभाषा और कार्यप्रणालीरिवर्स रेपो दर रेपो दर के उलट प्रक्रिया पर आधारित है। रेपो में RBI बैंकों को सरकारी प्रतिभूतियों के बदले उधार देता हैजबकि रिवर्स रेपो में RBI बैंकों से प्रतिभूतियां खरीदता है और अल्पकालिक उधार लेता हैजिसके लिए बैंकों को ब्याज चुकाता है। यह ओवरनाइट या अल्प अवधि के लिए होता हैजहां बैंक अपनी अतिरिक्त राशि को सुरक्षित रूप से RBI में जमा कर ब्याज कमाते हैं।अर्थव्यवस्था पर प्रभावरिवर्स रेपो दर बढ़ाने पर बैंक अपनी अतिरिक्त निधि RBI में जमा करने को प्रोत्साहित होते हैंजिससे बाजार में पैसों की आपूर्ति कम होती है और मुद्रास्फीति पर नियंत्रण रहता है।इसके विपरीत, दर घटाने से बैंक बाजार में अधिक धन लाते हैं, जो उधार और निवेश को बढ़ावा देता है।यह उपकरण RBI को लिक्विडिटी मैनेजमेंट में मदद करता हैविशेषकर सरकारी खर्च या मौसमी कारकों से उत्पन्न अतिरिक्त नकदी को अवशोषित करने में।वर्तमान संदर्भ और महत्वमौद्रिक नीति समिति (MPC) द्वारा हर दो माह में इस दर की समीक्षा की जाती है।उदाहरणस्वरूप, अतिरिक्त सरकारी व्यय या विदेशी निवेश से बाजार में नकदी बढ़ने पर RBI रिवर्स रेपो दर का उपयोग करता हैताकि ब्याज दरों को स्थिर रखा जा सके और वित्तीय स्थिरता बनी रहे।यह आम लोगों के लिए अप्रत्यक्ष रूप से लोन दरों, EMI और बचत पर प्रभाव डालती है।3. रिवर्स रेपो रेट (Reverse Repo Rate) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है? [CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (III-पाली)](a) जब बैंक अपना अधिशेष धन आरबीआई में जमा करता है, तो आरबीआई उस बैंक को कुछ ब्याज देता है। इस ब्याज को रिवर्स रेपो रेट के नाम से जाना जाता है।(b) रिवर्स रेपो रेट एक ऐसी स्थिति है, जिसमें समय के साथ पैसे का मूल्य घटता जाता है और कीमतें बढ़ती जाती हैं।(c) जब आरबीआई 1 से 90 दिनों के बीच अल्पावधि के लिए बैंक को ऋण प्रदान करता है, तो आरबीआई बैंक से कुछ ब्याज लेता है जिसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं।(d) जब एक दिन से अधिक से लेकर 14 दिनों तक के लिए धन ऋण पर लिया या दिया जाता है, तो इसे रिवर्स रेपो रेट कहा जाता है।Correct Answer: (a) जब बैंक अपना अधिशेष धन आरबीआई में जमा करता है, तो आरबीआई उस बैंक को कुछ ब्याज देता है। इस ब्याज को रिवर्स रेपो रेट के नाम से जाना जाता है।Solution:वह दर जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों की RBI में जमाओं पर ब्याज देता है, रिवर्स रेपो दर कहलाता है।परिभाषा और कार्यप्रणालीरिवर्स रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर RBI कमर्शियल बैंकों से अल्पकालिक उधार लेता हैअर्थात् जब बैंकों के पास अतिरिक्त नकदी होती हैतो वे इसे RBI को प्रतिभूतियों (जैसे सरकारी बॉन्ड्स) के बदले उधार देते हैंबदले में ब्याज कमाते हैं। यह प्रक्रिया आमतौर पर रात भर (ओवरनाइट) या कुछ दिनों के लिए होती हैजहां RBI प्रतिभूतियों को "खरीदता" है और बाद में उन्हें वापस खरीदने का वादा करता है।इसके विपरीत, रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को उधार देता हैजबकि रिवर्स रेपो तरलता अवशोषित करने का उपकरण है।आर्थिक प्रभावरिवर्स रेपो रेट बढ़ाने से बैंकों को RBI के पास धन पार्क करने के लिए प्रोत्साहन मिलता हैजिससे बाजार में घूमने वाली नकदी कम होती है और मुद्रास्फीति नियंत्रित होती है।उदाहरणस्वरूप, यदि महंगाई बढ़ रही होतो RBI इस दर को ऊंचा करके बैंकों को उधार देने के बजाय जमा करने के लिए प्रेरित करता है।कम करने पर तरलता बढ़ती है, जो ऋण सस्ते बनाती हैआर्थिक विकास को बढ़ावा देती है, लेकिन मुद्रास्फीति का जोखिम बढ़ सकता है।वर्तमान दरें और ऐतिहासिक संदर्भ2022-2024 तक की जानकारी के अनुसार, रिवर्स रेपो रेट 3.35% के आसपास रहीजबकि रेपो रेट 5.90% और MSF दर 6.15% थी।ये दरें मौद्रिक नीति समिति (MPC) द्वारा द्विमासिक समीक्षा में तय होती हैं।यह दर खुला बाजार परिचालन (OMO) के साथ मिलकर कार्य करती हैजहां सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री से तरलता समायोजित होती है।सामान्य कथनों की सत्यताप्रश्न में "निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?" का संदर्भ MCQ जैसा प्रतीत होता हैजहां सही कथन अक्सर होता है: "रिवर्स रेपो दर वह दर हैजिस पर बैंक RBI के पास अधिशेष धन पार्क करने पर ब्याज अर्जित करते हैं।अन्य गलत कथन हो सकते हैंजैसे "यह RBI द्वारा बैंकों से उधार लेने की दर नहीं है" या "रेपो के समान तरलता बढ़ाती है"।4. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प भारत में ऋण का एक संस्थागत स्रोत है? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (II-पाली)](a) कमीशन एजेंट(b) व्यापारी(c) साहूकार(d) वाणिज्यिक बैंकCorrect Answer: (d) वाणिज्यिक बैंकSolution:वाणिज्यिक बैंक भारत में ऋण का एक संस्थागत स्रोत है। ध्यातव्य हैवाणिज्यिक बैंक भारतीय रिजर्व बैंक के नियंत्रण के अधीन हैं।मुख्य संस्थागत स्रोतउद्योग, कृषि, व्यापार तथा व्यक्तिगत आवश्यकताओं के लिए ऋण देते हैं।ये सार्वजनिक क्षेत्र (जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया), निजी क्षेत्र (जैसे HDFC बैंकविदेशी बैंक तथा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी) शामिल करते हैं।सहकारी बैंक और सहकारी समितियाँ भी महत्वपूर्ण हैंविशेषकर ग्रामीण और कृषि क्षेत्र में, जहाँ प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ (PACS) लघु-मध्यम अवधि के ऋण प्रदान करती हैं।गैर-संस्थागत स्रोतों से अंतरसाहूकार, कमीशन एजेंट, व्यापारी या जमींदार जैसे स्रोत अनौपचारिक होते हैंक्योंकि वे RBI की निगरानी से बाहर कार्य करते हैं और उच्च ब्याज दरें लगाते हैंइसके विपरीत, संस्थागत स्रोत कम ब्याज दरों, पारदर्शी प्रक्रियाओं और कानूनी सुरक्षा प्रदान करते हैं।उदाहरणस्वरूप, NABARD ग्रामीण ऋण के लिए सहकारी बैंकों और आरआरबी को पुनर्वित्त देता है।कृषि और ग्रामीण ऋण में भूमिकाक्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी) ग्रामीण ऋण के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए हैं1975 के अधिनियम के तहत स्थापित हैं।भूमि विकास बैंक दीर्घकालिक कृषि ऋण (15-20 वर्ष) देते हैं।विकास वित्तीय संस्थान (DFI) जैसे IFCI उद्योगों को लंबी अवधि का वित्त प्रदान करते हैं।नियमन और महत्वभारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) सभी औपचारिक स्रोतों की निगरानी करता हैऋण वितरण समावेशी हो। ये स्रोत अर्थव्यवस्था की वृद्धि में योगदान देते हैंविशेषकर छोटे व्यवसायों और किसानों को सशक्त बनाकर। 2026ये संस्थान डिजिटल लेंडिंग और प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) के माध्यम से विस्तार कर रहे हैं।5. निम्नलिखित में से क्या मुद्रा का कार्य नहीं है? [CGL (T-I) 17 जुलाई, 2023 (III-पाली)](a) आस्थगित भुगतान का मानक(b) मूल्य की माप(c) विनिमय का माध्यम(d) भंडारण में समस्याCorrect Answer: (d) भंडारण में समस्याSolution:मुद्रा वह है जो मुद्रा का कार्य करे। मुद्रा के निम्नलिखित कार्य हैंमूल्य का मापक, विनिमय का माध्यम और आस्थगित भुगतान का मानक तथा मूल्य का संचयन आदि।मुद्रा के मुख्य कार्यविनिमय का माध्यम के रूप में मुद्रा वस्तु-विनिमय की जटिलताओं को दूर करती हैजहां प्रत्येक वस्तु के लिए दूसरी वस्तु की आवश्यकता होती थी।मूल्य का मापक के रूप में यह सभी वस्तुओं और सेवाओं को एक समान इकाई में मापने की सुविधा देती हैजैसे कि 1 किलो चावल की कीमत 50 रुपये। मूल्य का भंडार के रूप में मुद्रा को भविष्य के लिए संचित किया जा सकता हैबिना मूल्यह्रास के (मुद्रास्फीति को छोड़कर), और भुगतान का मानक के रूप में यह ऋण या भविष्य के लेन-देन को तय करने में सहायक होती है।जो कार्य मुद्रा का नहीं हैमुद्रा का कार्य "कीमतों का स्थिरीकरण" नहीं है, क्योंकि यह केंद्रीय बैंक या सरकारी नीतियों का उद्देश्य हैउदाहरणस्वरूप, भारतीय रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति नियंत्रण के लिए ब्याज दरें समायोजित करता हैलेकिन मुद्रा स्वयं कीमतें स्थिर नहीं रखती। इसी प्रकार, "पूंजी निर्माण" (capital formation) मुद्रा का कार्य नहींबल्कि बचत को उत्पादक निवेश में बदलने की प्रक्रिया है।वस्तु विनिमय प्रणाली" तो मुद्रा के आगमन से पहले की प्रथा हैजो मुद्रा ने ही प्रतिस्थापित की। ये विकल्प परीक्षाओं में अक्सर भ्रमित करने के लिए दिए जाते हैं।विस्तृत व्याख्या और उदाहरणवस्तु-विनिमय प्रणाली में यदि किसान को जूते चाहिएबढ़ई को अनाज, तो दोनों की इच्छा समान होनी चाहिएजो असंभव था—मुद्रा ने इसे हल किया।मूल्य भंडारण में सोना या नकदी लंबे समय तक मूल्य बनाए रखती है।आधुनिक समय में डिजिटल मुद्रा (जैसे UPI) भी इन्हीं कार्यों को निभाती है।हालांकि, हाइपरइन्फ्लेशन (जैसे जिम्बाब्वे में) में मुद्रा भंडारण का कार्य विफल हो जाता है।कुल मिलाकर, मुद्रा अर्थव्यवस्था को सुगम बनाती हैलेकिन मूल्य स्थिरीकरण उसका अंतर्निहित कार्य नहीं।6. निम्नलिखित में से किसकी स्थापना हिल्टन यंग कमीशन की सिफारिश पर की गई थी? [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (III-पाली)](a) एसबीआई (SBI)(b) आरबीआई (RBI)(c) सेबी (SEBI)(d) नाबार्ड (NABARD)Correct Answer: (b) आरबीआई (RBI)Solution:भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की स्थापना 1 अप्रैल, 1935 को हुई। ध्यातव्य हैहिल्टन यंग कमीशन की सिफारिश पर इसकी स्थापना की गई थी।यह देश का केंद्रीय बैंक है। देश में मौद्रिक नीति का निर्धारण RBI के तहत स्थापित मौद्रिक नीति समिति द्वारा किया जाता है।हिल्टन यंग कमीशन का परिचयहिल्टन यंग कमीशन, जिसे औपचारिक रूप से भारतीय मुद्रा और वित्त पर रॉयल कमीशन कहा जाता है1925 में ब्रिटिश सरकार द्वारा गठित किया गया था। इसका नेतृत्व सर एडवर्ड हिल्टन यंग ने कियाइसका मुख्य उद्देश्य भारत की मुद्रा नीति, वित्तीय प्रणाली तथा केंद्रीय बैंकिंग की आवश्यकता की जांच करना था।कमीशन ने 1926 में अपनी रिपोर्ट में भारत में एक स्वतंत्र केंद्रीय बैंक स्थापित करने की सिफारिशजो मुद्रा जारी करने, क्रेडिट नियंत्रण और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करे।RBI की स्थापना प्रक्रियाकमीशन की सिफारिशों के आधार पर भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम1934 विधानसभा में पेश किया गया और पारित हो गया।RBI ने 1 अप्रैल 1935 को कलकत्ता (अब कोलकाता) में कार्य शुरू कियाहालांकि 1937 में इसका मुख्यालय मुंबई स्थानांतरित हो गया। प्रारंभ में यह निजी शेयरधारकों का बैंक थालेकिन 1 जनवरी 1949 को इसका राष्ट्रीयकरण हो गयायह भारत सरकार के पूर्ण स्वामित्व में आ गया। RBI भारत का केंद्रीय बैंक हैजो मुद्रा प्रबंधन, बैंकों का नियमन और आर्थिक नीतियां बनाता है।कमीशन की प्रमुख सिफारिशेंभारत में एकल मुद्रा प्राधिकरण (currency authority) की स्थापना।सोने के मानक के साथ स्वतंत्र रिज़र्व बैंक।नोट जारी करने का एकाधिकार और वाणिज्यिक बैंकों का पर्यवेक्षण।ये सिफारिशें उस समय की आर्थिक चुनौतियों जैसे विनिमय दर अस्थिरता और मुद्रा प्रबंधन को ध्यान में रखकर की गईं।डॉ. भीमराव अंबेडकर ने भी कमीशन के समक्ष अपनी राय रखीजिसमें RBI की कार्यप्रणाली पर दिशानिर्देश सुझाए।RBI का महत्वRBI ने स्वतंत्र भारत में मौद्रिक नीति का आधार प्रदान कियाआज भी महंगाई नियंत्रण, विदेशी मुद्रा प्रबंधन तथा वित्तीय समावेशन में केंद्रीय भूमिका निभाता है।इसकी स्थापना औपनिवेशिक काल में हुईलेकिन यह आधुनिक भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनी हुई है।7. सूक्ष्म ऋण या सूक्ष्म वित्त, गरीबों के साथ बैंकिंग करने का एक नया दृष्टिकोण है। इस दृष्टिकोण में गरीबों को ....... के माध्यम से बैंक ऋण प्रदान किया जाता है। [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (IV-पाली)](a) आंगनबाड़ी(b) स्वयं सहायता समूह(c) आर.बी.आई. (RBI)(d) सहकारी क्रेडिट सोसायटीCorrect Answer: (b) स्वयं सहायता समूहSolution:सूक्ष्म ऋण या सूक्ष्म वित्त, गरीबों के साथ बैंकिंग करने का एक नया दृष्टिकोण है।ध्यातव्य है कि इस दृष्टिकोण में गरीबों को स्वयं सहायता समूह (SHG) के माध्यम से बैंक ऋण प्रदान किया जाता है।यह गरीबी उन्मूलन के साथ महिला सशक्तीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।सूक्ष्म ऋण की अवधारणाक्योंकि यह बिना गारंटी या संपार्श्विक के गरीबोंविशेषकर ग्रामीण महिलाओं और लघु उद्यमियों को छोटी राशि के ऋण उपलब्ध कराता है।इस दृष्टिकोण का मूल आधार सामूहिक जिम्मेदारी हैजहां समूह के सदस्य एक-दूसरे की गारंटी बनते हैं, जिससे डिफॉल्ट का जोखिम कम होता है।भारत में NABARD की स्वयं सहायता समूह-बैंक लिंकेज योजना (SHG-BLP) ने लाखों गरीबों को सशक्त बनाया है।कार्यप्रणालीसमूह गठन: 10-20 सदस्यों (मुख्यतः महिलाओं) का होमोजीनियस समूह बनता है, जो नियमित बचत करता है।आंतरिक उधार: समूह अपनी बचत से आपसी ऋण देता हैफिर बैंक से सामूहिक ऋण लेता है (₹1-2 लाख तक प्रति समूह)।चुकौती: साप्ताहिक/मासिक किस्तें, जिसमें सामाजिक दबाव डिफॉल्ट रोकता है।ब्याज दर सामान्यतः 10-12% होती है।बैंक ऋण समूह को देते हैं, जो इसे सदस्यों में वितरित करता हैइससे बैंक का लेन-देन न्यूनतम रहता है।लाभ और प्रभावसूक्ष्म ऋण न केवल आय बढ़ाता है, बल्कि बचत आदतें, वित्तीय साक्षरता और उद्यमिता को प्रोत्साहित करता है।यह गरीबी उन्मूलन में सहायक है, क्योंकि इससे परिवार शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास सुधार पाते हैं।अध्ययनों से पता चलता है कि SHG सदस्यों की आय 20-50% बढ़ती है और डिफॉल्ट दर मात्र 2-5% रहती है।चुनौतियाँअधिक ब्याज दरें: कुछ MFIs 20-24% वसूलती हैं, जो गरीबों पर बोझ बन सकती हैं।ओवर-इंडेब्टेडनेस: एकाधिक ऋणों से कर्ज का जाल।नियमन की कमी: AP की माइक्रोफाइनेंस संकट (2010) ने सबक सिखाया।सरकार ने RBI के दिशानिर्देशों से सर्कुलर डेट (एक व्यक्ति पर कुल ऋण) सीमित किया है।वैश्विक संदर्भ और भविष्यबांग्लादेश के ग्रामीण बैंक (मुहम्मद यूनुस) ने सूक्ष्म वित्त को जन्म दियाजो नोबेल पुरस्कार विजेता मॉडल है। भारत में 2026 तक 100% वित्तीय समावेशन का लक्ष्य हैजिसमें डिजिटल बैंकिंग (जैसे जन धन) SHG को मजबूत करेगा।कुल मिलाकर, यह गरीबों को "बैंकिंग के साथ" जोड़ने का सशक्त माध्यम है।8. फिशर के मात्रा सिद्धांत को उनके द्वारा ....... के रूप में दिए गए प्रसिद्ध समीकरण के माध्यम से समझाया गया है। [CGL (T-I) 14 जुलाई, 2023 (II-पाली)](a) MT = PV(b) MP = VT(c) MV = PT(d) PV = MVCorrect Answer: (c) MV = PTSolution:फिशर के मात्रा सिद्धांत का उनके द्वारा MV = PT के रूप में दिए गए प्रसिद्ध समीकरण के माध्यम से समझाया जा सकता है।ध्यातव्य है कि इस समीकरण में M धन की आपूर्ति, V- धन का वेग, P- मूल्य स्तर और T लेन-देन के स्तर के बीच - संबंध को व्यक्त करता है।सिद्धांत का परिचयइरווिंग फिशर ने 1911 में अपनी पुस्तक में इस सिद्धांत को विस्तार से प्रतित किया। यह सिद्धांत बताता हैअर्थव्यवस्था में मुद्रा की कुल मात्रा (M) और उसके संचलन की गति (V) का गुणनफल कुल लेन-देन के मूल्य (PT) के बराबर होता हैजहां P मूल्य स्तर और T लेन-देन की कुल मात्रा है।फिशर के अनुसार, यदि V और T स्थिर रहेंतो मुद्रा आपूर्ति (M) में वृद्धि सीधे मूल्य स्तर (P) में वृद्धि का कारण बनेगीजिससे मुद्रास्फीति उत्पन्न होती है। यह सिद्धांत क्लासिकल अर्थशास्त्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैमुद्रा नीति के विश्लेषण में उपयोगी है।समीकरण के घटकफिशर का समीकरण MV = PT चार मुख्य चरों पर आधारित है:M (मुद्रा आपूर्ति): अर्थव्यवस्था में प्रचलन में मौजूद नकद मुद्रा, सिक्के और साख मुद्रा (जैसे बैंक जमा) की कुल मात्रा।V (मुद्रा का वेग): मुद्रा की एक इकाई एक निश्चित अवधि (जैसे एक वर्ष) में कितनी बार लेन-देन में उपयोग होती है।यह भुगतान प्रणाली, आदतों और आर्थिक गतिविधियों पर निर्भर करता है।P (मूल्य स्तर): सभी वस्तुओं और सेवाओं का औसत मूल्यजो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) या थोक मूल्य सूचकांक (WPI) से मापा जाता है।T (कुल लेन-देन): अर्थव्यवस्था में एक वर्ष में होने वाले सभी मौद्रिक लेन-देन की संख्याजिसमें उत्पादन, बिक्री और पुनर्विक्रय शामिल हैं।कभी-कभी इसे विस्तारित रूप MV + M'V' = PT में लिखा जाता है, जहां M' साख मुद्रा और V' उसका वेग है।सिद्धांत की मान्यताएँफिशर का सिद्धांत निम्नलिखित प्रमुख मान्यताओं पर टिका है:V (मुद्रा वेग) और T (लेन-देन) दीर्घकाल में स्थिर रहते हैं और उत्पादन क्षमता से स्वतंत्र होते हैं।मूल्य स्तर (P) एक निष्क्रिय चर है, जो M के परिवर्तनों से प्रभावित होता है।M और M' का अनुपात स्थिर रहता है, अर्थात् नकद और साख मुद्रा का संतुलन अपरिवर्तित रहता है।यह पूर्ण रोजगार वाली अर्थव्यवस्था मानता है, जहां T उत्पादन के बराबर होता है।व्याख्या और उदाहरणसमीकरण के अनुसार, MV = PT से स्पष्ट हैबायीं ओर मुद्रा की कुल आपूर्ति (MV) दायीं ओर मांग (PT) के बराबर होती है।उदाहरणस्वरूप, यदि M = 100 करोड़ रुपये, V = 4 (प्रति रुपये 4 लेन-देन), T = 200 करोड़ इकाइयाँतो P = (100 × 4) / 200 = 2 रुपये प्रति इकाई होगा।अब यदि M दोगुना होकर 200 करोड़ हो जाए (V और T स्थिर)तो P भी दोगुना होकर 4 रुपये हो जाएगा, जो मुद्रास्फीति दर्शाता है।यह संबंध 45 डिग्री की रेखा P = f(M) द्वारा दिखाया जाता है।आलोचनाएँफिशर के सिद्धांत की कई आलोचनाएँ हैं:अवास्तविक मान्यताएँ: V और T वास्तव में स्थिर नहीं रहते; वे आर्थिक चक्रों से प्रभावित होते हैं।मुद्रा आपूर्ति पर अधिक जोर: मांग पक्ष (PT) को कम महत्व दिया गया है।T का मापन कठिन: कुल लेन-देन (T) को मापना जटिल हैजबकि आधुनिक अर्थशास्त्र में उत्पाद (Y) का उपयोग होता है (केंब्रिज संस्करण: MV = PY)।केन्सियन आलोचना: मंदी में M की वृद्धि से उत्पादन बढ़ सकता है, न कि केवल P।आधुनिक प्रासंगिकताफिशर का सिद्धांत आज भी केंद्रीय बैंकों (जैसे RBI) की मुद्रा नीति में आधारभूत है।यह मात्रावादियों (Monetarists) जैसे मिल्टन फ्राइडमैन को प्रभावित करता है।वर्तमान में (जनवरी 2026 तक), उच्च मुद्रा आपूर्ति वृद्धि मुद्रास्फीति नियंत्रण के लिए प्रासंगिक बनी हुई है।9. निम्न में से किसे सकल मौद्रिक संसाधन के रूप में जाना जाता है? [CGL (T-I) 20 जुलाई, 2023 (IV-पाली)](a) M₁ + डाकघर बचत बैंकों के पास बचत जमा(b) M₁ + वाणिज्यिक बैंकों की निवल सावधि जमा(c) जनता द्वारा धारित मुद्रा (नोट के साथ सिक्के) और वाणिज्यिक बैंकों द्वारा धारित मांग जमा(d) M₃ + डाकघर बचत संगठनों के पास कुल जमा (राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र को छोड़कर)Correct Answer: (c) जनता द्वारा धारित मुद्रा (नोट के साथ सिक्के) और वाणिज्यिक बैंकों द्वारा धारित मांग जमाSolution:किसी अर्थव्यवस्था में उपलब्ध धन की कुल मात्रा को सकल मौद्रिक संसाधन कहा जाता है।सकल मौद्रिक संसाधन—M3 (व्यापक मुद्रा) = M1 + वाणिज्यिक बैंकों की निवल सावधि जमा जहाँ M1 = प्रचलन में करेंसी + मांग जमा + अन्य जमाM3 की परिभाषाM3 मुद्रा आपूर्ति का सबसे व्यापक माप हैजिसमें M1 (प्रचलन में मुद्रा + मांग जमा + RBI के पास अन्य जमा) के साथ-साथ वाणिज्यिक बैंकों की सावधि जमाएँ शामिल होती हैं।इसका सूत्र है: M3 = M1 + बैंकों की सावधि जमाएँ।RBI मौद्रिक नीति निर्धारण और तरलता मूल्यांकन के लिए M3 को प्राथमिक उपाय के रूप में परिभाषित करता है।महत्व और उपयोगRBI M3 के आंकड़ों का उपयोग मुद्रास्फीति नियंत्रण, ब्याज दर निर्धारण और आर्थिक स्थिरता के लिए करता है।यह साख सृजन की क्षमता को भी मापता हैक्योंकि सावधि जमाएँ बैंक ऋण प्रदान करने का आधार बनती हैं।वर्तमान में (जनवरी 2026 तक), M3 में वृद्धि आर्थिक विकास का संकेत देती हैलेकिन अत्यधिक वृद्धि मुद्रास्फीति का जोखिम बढ़ाती है।10. निम्नलिखित में से किसे मुद्रा की पूर्ति की M₁ माप में सम्मिलित किया गया है? [CHSL (T-I) 9 अगस्त, 2023 (IV-पाली)](A) जनता के पास करेंसी(B) डाकघर के पास आवधिक जमा(C) व्यावसायिक बैंकों/सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के आरबीआई में मांग जमा(a) A और C दोनों(b) केवल A(c) B और C दोनों(d) केवल BCorrect Answer: (a) A और C दोनोंSolution:एक निश्चित समय में लोगों में संचरण करने वाली कुल मुद्रा को मुद्रा की पूर्ति कहते हैं।भारतीय रिजर्व बैंक मुद्रा की पूर्ति के वैकल्पिक मापों को चार रूपों में प्रकाशित करता है, नामतः M1, M2, M3 और M4M₁ = CU + DD M₂ = M, + डाकघर बचत बैंकों में बचत जमाएं 2 M₁ = M₁ + व्यावसायिक बैंकों की निवल आवधिक जमाएं 3 1 M₁ = M₁ + डाकघर बचत संस्थाओं में कुल जमाएं (राष्ट्रीय 3 बचत प्रमाणपत्रों को छोड़कर) जहां CU लोगों द्वारा रखी गई करेंसी (नोट और सिक्के) है।DD व्यावसायिक बैंकों द्वारा रखी गई निवल मांग जमा है। अतः इसका अभीष्ट उत्तर विकल्प (a) होगा।M1 के घटकM1 को निम्नलिखित तीन मुख्य भागों में विभाजित किया जाता है:प्रचलन में मुद्रा : जनता के पास उपलब्ध नोट और सिक्के (बैंकों की नकदी को छोड़कर), जो तत्काल खर्च योग्य होती है।मांग जमा : वाणिज्यिक बैंकों में चालू खातों (करंट अकाउंट) या बचत खातों में रखी राशिजो बिना सूचना के निकाली जा सकती है। अंतर-बैंक जमा इससे बाहर रहते हैं।RBI के पास अन्य जमा : विदेशी केंद्रीय बैंकों, वित्तीय संस्थानों और सरकारी संस्थाओं द्वारा RBI में रखी गई जमा राशियाँ।सूत्र: M1 = CU + DD + RBI के पास अन्य जमा। यह संकीर्ण मुद्रा (Narrow Money) कहलाती हैक्योंकि इसमें केवल उच्चतम तरलता वाली संपत्तियाँ शामिल हैं।महत्व और RBI का उपयोगभारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) M1 को अर्थव्यवस्था में तत्काल उपलब्ध तरल धन मापने के लिए प्राथमिक उपकरण मानता हैजो मुद्रास्फीति, ब्याज दरों और आर्थिक नीतियों को प्रभावित करता है।यह साख सृजन (Credit Creation) की प्रक्रिया को समझने में सहायक होता हैक्योंकि DD बैंक ऋणों का आधार बनती हैं। जनवरी 2026 तक, RBI साप्ताहिक/मासिक M1 आंकड़े जारी करता हैतरलता प्रबंधन हो सके।Submit Quiz12345Next »