मुद्रा एवं बैंकिंग (अर्थव्यवस्था) (भाग-I)

Total Questions: 50

1. ....... 12 जुलाई, 1982 को RBI के कृषि ऋण (agricultural credit) संबंधी कार्यों और उस समय के कृषि पुनर्वित्त और विकास निगम (Agricultural Refinance and Development Corporation) के पुनर्वित्त संबंधी कार्यों को स्थानांतरित करके अस्तित्व में आया था। [CHSL (T-I) 16 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD)
Solution:
  • राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) 12 जुलाई, 1982 को
  • कृषि ऋण संबंधी कार्यों और उस समय के कृषि पुनर्वित्त और विकास निगम के पुनर्वित्त संबंधी कार्यों को स्थानांतरित करके अस्तित्व में आया था।
  • स्थापना का उद्देश्य
    • NABARD की स्थापना का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण भारत, विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में एकीकृत विकास को बढ़ावा देना था।
    • RBI के कृषि ऋण कार्यों को लेकर यह संस्था ग्रामीण उन्नति, सहकारी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) और वाणिज्यिक बैंकों के माध्यम से ऋण प्रवाह को मजबूत करने के लिए बनी।
    • इसे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 5 नवंबर 1982 को राष्ट्र को समर्पित किया।​
  • संगठनात्मक संरचना
    • NABARD भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अधीन कार्य करता है, हालांकि RBI इसका प्रमुख शेयरधारक है।
    • इसका मुख्यालय मुंबई में स्थित है और देशभर में 32 क्षेत्रीय कार्यालय हैं।
    • यह एक विकास बैंक के रूप में नीति निर्माण, योजना और ग्रामीण ऋण के संचालन में सक्रिय भूमिका निभाता है
    • जिसमें वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना भी शामिल है।​
  • प्रमुख कार्य
    • ग्रामीण बुनियादी ढांचे, जैसे सिंचाई, सड़कें और भंडारण के लिए ऋण प्रदान करना।
    • सहकारी संस्थाओं और RRBs को पुनर्वित्त सुविधाएं उपलब्ध कराना।
    • ग्रामीण विकास योजनाओं की निगरानी और क्षमता निर्माण करना।​
    • NABARD ने ARDC के विपरीत, जो मुख्यतः पुनर्वित्त पर केंद्रित था
    • RBI के सीधे ऋण कार्यों को भी ग्रहण किया
    • जिससे यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था का शीर्ष नियामक बना।​
  • महत्वपूर्ण योगदान
    • NABARD ने ग्रामीण भारत में ऋण प्रवाह को क्रांतिकारी रूप दिया
    • विशेष रूप से सूक्ष्म वित्त, किसान उत्पादक संगठन (FPO) और जलवायु परिवर्तन अनुकूल कृषि को बढ़ावा देकर।
    • 2025 तक इसके व्यवसाय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
    • यह संस्था ग्रामीण विकास की रीढ़ बनी हुई है।​

2. उलट रेपो दर (Reverse Repo Rate) का अर्थ क्या है? [MTS (T-I) 11 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) वह दर जिस पर आरबीआई (RBI) व्यावसायिक बैंकों से ऋण लेती है
Solution:
  • वह दर जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक व्यावसायिक बैंकों से ऋण लेती है उसे उलट रेपो दर (रिवर्स रेपो रेट) कहते हैं
  • जबकि जिस दर पर भारतीय रिजर्व बैंक व्यावसायिक बैंकों को ऋण देता है, उसे रेपो दर (Repo rate) कहते हैं।
  • परिभाषा और कार्यप्रणाली
    • रिवर्स रेपो दर रेपो दर के उलट प्रक्रिया पर आधारित है। रेपो में RBI बैंकों को सरकारी प्रतिभूतियों के बदले उधार देता है
    • जबकि रिवर्स रेपो में RBI बैंकों से प्रतिभूतियां खरीदता है और अल्पकालिक उधार लेता है
    • जिसके लिए बैंकों को ब्याज चुकाता है। यह ओवरनाइट या अल्प अवधि के लिए होता है
    • जहां बैंक अपनी अतिरिक्त राशि को सुरक्षित रूप से RBI में जमा कर ब्याज कमाते हैं।​
  • अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
    • रिवर्स रेपो दर बढ़ाने पर बैंक अपनी अतिरिक्त निधि RBI में जमा करने को प्रोत्साहित होते हैं
    • जिससे बाजार में पैसों की आपूर्ति कम होती है और मुद्रास्फीति पर नियंत्रण रहता है।
    • इसके विपरीत, दर घटाने से बैंक बाजार में अधिक धन लाते हैं, जो उधार और निवेश को बढ़ावा देता है।
    • यह उपकरण RBI को लिक्विडिटी मैनेजमेंट में मदद करता है
    • विशेषकर सरकारी खर्च या मौसमी कारकों से उत्पन्न अतिरिक्त नकदी को अवशोषित करने में।​
  • वर्तमान संदर्भ और महत्व
    • मौद्रिक नीति समिति (MPC) द्वारा हर दो माह में इस दर की समीक्षा की जाती है।
    • उदाहरणस्वरूप, अतिरिक्त सरकारी व्यय या विदेशी निवेश से बाजार में नकदी बढ़ने पर RBI रिवर्स रेपो दर का उपयोग करता है
    • ताकि ब्याज दरों को स्थिर रखा जा सके और वित्तीय स्थिरता बनी रहे।
    • यह आम लोगों के लिए अप्रत्यक्ष रूप से लोन दरों, EMI और बचत पर प्रभाव डालती है।​

3. रिवर्स रेपो रेट (Reverse Repo Rate) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है? [CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) जब बैंक अपना अधिशेष धन आरबीआई में जमा करता है, तो आरबीआई उस बैंक को कुछ ब्याज देता है। इस ब्याज को रिवर्स रेपो रेट के नाम से जाना जाता है।
Solution:
  • वह दर जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों की RBI में जमाओं पर ब्याज देता है, रिवर्स रेपो दर कहलाता है।
  • परिभाषा और कार्यप्रणाली
    • रिवर्स रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर RBI कमर्शियल बैंकों से अल्पकालिक उधार लेता है
    • अर्थात् जब बैंकों के पास अतिरिक्त नकदी होती है
    • तो वे इसे RBI को प्रतिभूतियों (जैसे सरकारी बॉन्ड्स) के बदले उधार देते हैं
    • बदले में ब्याज कमाते हैं। यह प्रक्रिया आमतौर पर रात भर (ओवरनाइट) या कुछ दिनों के लिए होती है
    • जहां RBI प्रतिभूतियों को "खरीदता" है और बाद में उन्हें वापस खरीदने का वादा करता है।
    • इसके विपरीत, रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को उधार देता है
    • जबकि रिवर्स रेपो तरलता अवशोषित करने का उपकरण है।
  • आर्थिक प्रभाव
    • रिवर्स रेपो रेट बढ़ाने से बैंकों को RBI के पास धन पार्क करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है
    • जिससे बाजार में घूमने वाली नकदी कम होती है और मुद्रास्फीति नियंत्रित होती है।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि महंगाई बढ़ रही हो
    • तो RBI इस दर को ऊंचा करके बैंकों को उधार देने के बजाय जमा करने के लिए प्रेरित करता है।
    • कम करने पर तरलता बढ़ती है, जो ऋण सस्ते बनाती है
    • आर्थिक विकास को बढ़ावा देती है, लेकिन मुद्रास्फीति का जोखिम बढ़ सकता है।
  • वर्तमान दरें और ऐतिहासिक संदर्भ
    • 2022-2024 तक की जानकारी के अनुसार, रिवर्स रेपो रेट 3.35% के आसपास रही
    • जबकि रेपो रेट 5.90% और MSF दर 6.15% थी।
    • ये दरें मौद्रिक नीति समिति (MPC) द्वारा द्विमासिक समीक्षा में तय होती हैं।
    • यह दर खुला बाजार परिचालन (OMO) के साथ मिलकर कार्य करती है
    • जहां सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री से तरलता समायोजित होती है।
  • सामान्य कथनों की सत्यता
    • प्रश्न में "निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?" का संदर्भ MCQ जैसा प्रतीत होता है
    • जहां सही कथन अक्सर होता है: "रिवर्स रेपो दर वह दर है
    • जिस पर बैंक RBI के पास अधिशेष धन पार्क करने पर ब्याज अर्जित करते हैं।
    • अन्य गलत कथन हो सकते हैं
    • जैसे "यह RBI द्वारा बैंकों से उधार लेने की दर नहीं है" या "रेपो के समान तरलता बढ़ाती है"।

4. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प भारत में ऋण का एक संस्थागत स्रोत है? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) वाणिज्यिक बैंक
Solution:
  • वाणिज्यिक बैंक भारत में ऋण का एक संस्थागत स्रोत है। ध्यातव्य है
  • वाणिज्यिक बैंक भारतीय रिजर्व बैंक के नियंत्रण के अधीन हैं।
  • मुख्य संस्थागत स्रोत
    • उद्योग, कृषि, व्यापार तथा व्यक्तिगत आवश्यकताओं के लिए ऋण देते हैं।
    • ये सार्वजनिक क्षेत्र (जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया), निजी क्षेत्र (जैसे HDFC बैंक
    • विदेशी बैंक तथा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी) शामिल करते हैं।
    • सहकारी बैंक और सहकारी समितियाँ भी महत्वपूर्ण हैं
    • विशेषकर ग्रामीण और कृषि क्षेत्र में, जहाँ प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ (PACS) लघु-मध्यम अवधि के ऋण प्रदान करती हैं।​
  • गैर-संस्थागत स्रोतों से अंतर
    • साहूकार, कमीशन एजेंट, व्यापारी या जमींदार जैसे स्रोत अनौपचारिक होते हैं
    • क्योंकि वे RBI की निगरानी से बाहर कार्य करते हैं और उच्च ब्याज दरें लगाते हैं
    • इसके विपरीत, संस्थागत स्रोत कम ब्याज दरों, पारदर्शी प्रक्रियाओं और कानूनी सुरक्षा प्रदान करते हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, NABARD ग्रामीण ऋण के लिए सहकारी बैंकों और आरआरबी को पुनर्वित्त देता है।​
  • कृषि और ग्रामीण ऋण में भूमिका
    • क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी) ग्रामीण ऋण के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए हैं
    • 1975 के अधिनियम के तहत स्थापित हैं।
    • भूमि विकास बैंक दीर्घकालिक कृषि ऋण (15-20 वर्ष) देते हैं।
    • विकास वित्तीय संस्थान (DFI) जैसे IFCI उद्योगों को लंबी अवधि का वित्त प्रदान करते हैं।​
  • नियमन और महत्व
    • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) सभी औपचारिक स्रोतों की निगरानी करता है
    • ऋण वितरण समावेशी हो। ये स्रोत अर्थव्यवस्था की वृद्धि में योगदान देते हैं
    • विशेषकर छोटे व्यवसायों और किसानों को सशक्त बनाकर। 2026
    • ये संस्थान डिजिटल लेंडिंग और प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) के माध्यम से विस्तार कर रहे हैं।​

5. निम्नलिखित में से क्या मुद्रा का कार्य नहीं है? [CGL (T-I) 17 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) भंडारण में समस्या
Solution:
  • मुद्रा वह है जो मुद्रा का कार्य करे। मुद्रा के निम्नलिखित कार्य हैं
  • मूल्य का मापक, विनिमय का माध्यम और आस्थगित भुगतान का मानक तथा मूल्य का संचयन आदि।
  • मुद्रा के मुख्य कार्य
    • विनिमय का माध्यम के रूप में मुद्रा वस्तु-विनिमय की जटिलताओं को दूर करती है
    • जहां प्रत्येक वस्तु के लिए दूसरी वस्तु की आवश्यकता होती थी।
    • मूल्य का मापक के रूप में यह सभी वस्तुओं और सेवाओं को एक समान इकाई में मापने की सुविधा देती है
    • जैसे कि 1 किलो चावल की कीमत 50 रुपये। मूल्य का भंडार के रूप में मुद्रा को भविष्य के लिए संचित किया जा सकता है
    • बिना मूल्यह्रास के (मुद्रास्फीति को छोड़कर), और भुगतान का मानक के रूप में यह ऋण या भविष्य के लेन-देन को तय करने में सहायक होती है।​
  • जो कार्य मुद्रा का नहीं है
    • मुद्रा का कार्य "कीमतों का स्थिरीकरण" नहीं है, क्योंकि यह केंद्रीय बैंक या सरकारी नीतियों का उद्देश्य है
    • उदाहरणस्वरूप, भारतीय रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति नियंत्रण के लिए ब्याज दरें समायोजित करता है
    • लेकिन मुद्रा स्वयं कीमतें स्थिर नहीं रखती। इसी प्रकार, "पूंजी निर्माण" (capital formation) मुद्रा का कार्य नहीं
    • बल्कि बचत को उत्पादक निवेश में बदलने की प्रक्रिया है।
    • वस्तु विनिमय प्रणाली" तो मुद्रा के आगमन से पहले की प्रथा है
    • जो मुद्रा ने ही प्रतिस्थापित की। ये विकल्प परीक्षाओं में अक्सर भ्रमित करने के लिए दिए जाते हैं।​
  • विस्तृत व्याख्या और उदाहरण
    • वस्तु-विनिमय प्रणाली में यदि किसान को जूते चाहिए
    • बढ़ई को अनाज, तो दोनों की इच्छा समान होनी चाहिए
    • जो असंभव था—मुद्रा ने इसे हल किया।
    • मूल्य भंडारण में सोना या नकदी लंबे समय तक मूल्य बनाए रखती है।
    • आधुनिक समय में डिजिटल मुद्रा (जैसे UPI) भी इन्हीं कार्यों को निभाती है।
    • हालांकि, हाइपरइन्फ्लेशन (जैसे जिम्बाब्वे में) में मुद्रा भंडारण का कार्य विफल हो जाता है।
    • कुल मिलाकर, मुद्रा अर्थव्यवस्था को सुगम बनाती है
    • लेकिन मूल्य स्थिरीकरण उसका अंतर्निहित कार्य नहीं।​​

6. निम्नलिखित में से किसकी स्थापना हिल्टन यंग कमीशन की सिफारिश पर की गई थी? [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) आरबीआई (RBI)
Solution:
  • भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की स्थापना 1 अप्रैल, 1935 को हुई। ध्यातव्य है
  • हिल्टन यंग कमीशन की सिफारिश पर इसकी स्थापना की गई थी।
  • यह देश का केंद्रीय बैंक है। देश में मौद्रिक नीति का निर्धारण RBI के तहत स्थापित मौद्रिक नीति समिति द्वारा किया जाता है।
  • हिल्टन यंग कमीशन का परिचय
    • हिल्टन यंग कमीशन, जिसे औपचारिक रूप से भारतीय मुद्रा और वित्त पर रॉयल कमीशन कहा जाता है
    • 1925 में ब्रिटिश सरकार द्वारा गठित किया गया था। इसका नेतृत्व सर एडवर्ड हिल्टन यंग ने किया
    • इसका मुख्य उद्देश्य भारत की मुद्रा नीति, वित्तीय प्रणाली तथा केंद्रीय बैंकिंग की आवश्यकता की जांच करना था।
    • कमीशन ने 1926 में अपनी रिपोर्ट में भारत में एक स्वतंत्र केंद्रीय बैंक स्थापित करने की सिफारिश
    • जो मुद्रा जारी करने, क्रेडिट नियंत्रण और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करे।​
  • RBI की स्थापना प्रक्रिया
    • कमीशन की सिफारिशों के आधार पर भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम
    • 1934 विधानसभा में पेश किया गया और पारित हो गया।
    • RBI ने 1 अप्रैल 1935 को कलकत्ता (अब कोलकाता) में कार्य शुरू किया
    • हालांकि 1937 में इसका मुख्यालय मुंबई स्थानांतरित हो गया। प्रारंभ में यह निजी शेयरधारकों का बैंक था
    • लेकिन 1 जनवरी 1949 को इसका राष्ट्रीयकरण हो गया
    • यह भारत सरकार के पूर्ण स्वामित्व में आ गया। RBI भारत का केंद्रीय बैंक है
    • जो मुद्रा प्रबंधन, बैंकों का नियमन और आर्थिक नीतियां बनाता है।​
  • कमीशन की प्रमुख सिफारिशें
    • भारत में एकल मुद्रा प्राधिकरण (currency authority) की स्थापना।
    • सोने के मानक के साथ स्वतंत्र रिज़र्व बैंक।
    • नोट जारी करने का एकाधिकार और वाणिज्यिक बैंकों का पर्यवेक्षण।
    • ये सिफारिशें उस समय की आर्थिक चुनौतियों जैसे विनिमय दर अस्थिरता और मुद्रा प्रबंधन को ध्यान में रखकर की गईं।
    • डॉ. भीमराव अंबेडकर ने भी कमीशन के समक्ष अपनी राय रखी
    • जिसमें RBI की कार्यप्रणाली पर दिशानिर्देश सुझाए।​
  • RBI का महत्व
    • RBI ने स्वतंत्र भारत में मौद्रिक नीति का आधार प्रदान किया
    • आज भी महंगाई नियंत्रण, विदेशी मुद्रा प्रबंधन तथा वित्तीय समावेशन में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
    • इसकी स्थापना औपनिवेशिक काल में हुई
    • लेकिन यह आधुनिक भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनी हुई है।​

7. सूक्ष्म ऋण या सूक्ष्म वित्त, गरीबों के साथ बैंकिंग करने का एक नया दृष्टिकोण है। इस दृष्टिकोण में गरीबों को ....... के माध्यम से बैंक ऋण प्रदान किया जाता है। [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) स्वयं सहायता समूह
Solution:
  • सूक्ष्म ऋण या सूक्ष्म वित्त, गरीबों के साथ बैंकिंग करने का एक नया दृष्टिकोण है।
  • ध्यातव्य है कि इस दृष्टिकोण में गरीबों को स्वयं सहायता समूह (SHG) के माध्यम से बैंक ऋण प्रदान किया जाता है।
  • यह गरीबी उन्मूलन के साथ महिला सशक्तीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • सूक्ष्म ऋण की अवधारणा
    • क्योंकि यह बिना गारंटी या संपार्श्विक के गरीबों
    • विशेषकर ग्रामीण महिलाओं और लघु उद्यमियों को छोटी राशि के ऋण उपलब्ध कराता है।
    • इस दृष्टिकोण का मूल आधार सामूहिक जिम्मेदारी है
    • जहां समूह के सदस्य एक-दूसरे की गारंटी बनते हैं, जिससे डिफॉल्ट का जोखिम कम होता है।
    • भारत में NABARD की स्वयं सहायता समूह-बैंक लिंकेज योजना (SHG-BLP) ने लाखों गरीबों को सशक्त बनाया है।​
  • कार्यप्रणाली
    • समूह गठन: 10-20 सदस्यों (मुख्यतः महिलाओं) का होमोजीनियस समूह बनता है, जो नियमित बचत करता है।
    • आंतरिक उधार: समूह अपनी बचत से आपसी ऋण देता है
    • फिर बैंक से सामूहिक ऋण लेता है (₹1-2 लाख तक प्रति समूह)।
    • चुकौती: साप्ताहिक/मासिक किस्तें, जिसमें सामाजिक दबाव डिफॉल्ट रोकता है।
    • ब्याज दर सामान्यतः 10-12% होती है।​
    • बैंक ऋण समूह को देते हैं, जो इसे सदस्यों में वितरित करता है
    • इससे बैंक का लेन-देन न्यूनतम रहता है।​
  • लाभ और प्रभाव
    • सूक्ष्म ऋण न केवल आय बढ़ाता है, बल्कि बचत आदतें, वित्तीय साक्षरता और उद्यमिता को प्रोत्साहित करता है।
    • यह गरीबी उन्मूलन में सहायक है, क्योंकि इससे परिवार शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास सुधार पाते हैं।
    • अध्ययनों से पता चलता है कि SHG सदस्यों की आय 20-50% बढ़ती है और डिफॉल्ट दर मात्र 2-5% रहती है।​
  • चुनौतियाँ
    • अधिक ब्याज दरें: कुछ MFIs 20-24% वसूलती हैं, जो गरीबों पर बोझ बन सकती हैं।​
    • ओवर-इंडेब्टेडनेस: एकाधिक ऋणों से कर्ज का जाल।
    • नियमन की कमी: AP की माइक्रोफाइनेंस संकट (2010) ने सबक सिखाया।​
    • सरकार ने RBI के दिशानिर्देशों से सर्कुलर डेट (एक व्यक्ति पर कुल ऋण) सीमित किया है।
  • वैश्विक संदर्भ और भविष्य
    • बांग्लादेश के ग्रामीण बैंक (मुहम्मद यूनुस) ने सूक्ष्म वित्त को जन्म दिया
    • जो नोबेल पुरस्कार विजेता मॉडल है। भारत में 2026 तक 100% वित्तीय समावेशन का लक्ष्य है
    • जिसमें डिजिटल बैंकिंग (जैसे जन धन) SHG को मजबूत करेगा।
    • कुल मिलाकर, यह गरीबों को "बैंकिंग के साथ" जोड़ने का सशक्त माध्यम है।​

8. फिशर के मात्रा सिद्धांत को उनके द्वारा ....... के रूप में दिए गए प्रसिद्ध समीकरण के माध्यम से समझाया गया है। [CGL (T-I) 14 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) MV = PT
Solution:
  • फिशर के मात्रा सिद्धांत का उनके द्वारा MV = PT के रूप में दिए गए प्रसिद्ध समीकरण के माध्यम से समझाया जा सकता है।
  • ध्यातव्य है कि इस समीकरण में M धन की आपूर्ति, V- धन का वेग, P- मूल्य स्तर और T लेन-देन के स्तर के बीच - संबंध को व्यक्त करता है।
  • सिद्धांत का परिचय
    • इरווिंग फिशर ने 1911 में अपनी पुस्तक में इस सिद्धांत को विस्तार से प्रतित किया। यह सिद्धांत बताता है
    • अर्थव्यवस्था में मुद्रा की कुल मात्रा (M) और उसके संचलन की गति (V) का गुणनफल कुल लेन-देन के मूल्य (PT) के बराबर होता है
    • जहां P मूल्य स्तर और T लेन-देन की कुल मात्रा है।
    • फिशर के अनुसार, यदि V और T स्थिर रहें
    • तो मुद्रा आपूर्ति (M) में वृद्धि सीधे मूल्य स्तर (P) में वृद्धि का कारण बनेगी
    • जिससे मुद्रास्फीति उत्पन्न होती है। यह सिद्धांत क्लासिकल अर्थशास्त्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है
    • मुद्रा नीति के विश्लेषण में उपयोगी है।​​
  • समीकरण के घटक
    • फिशर का समीकरण MV = PT चार मुख्य चरों पर आधारित है:
    • M (मुद्रा आपूर्ति): अर्थव्यवस्था में प्रचलन में मौजूद नकद मुद्रा, सिक्के और साख मुद्रा (जैसे बैंक जमा) की कुल मात्रा।​
    • V (मुद्रा का वेग): मुद्रा की एक इकाई एक निश्चित अवधि (जैसे एक वर्ष) में कितनी बार लेन-देन में उपयोग होती है।
    • यह भुगतान प्रणाली, आदतों और आर्थिक गतिविधियों पर निर्भर करता है।​
    • P (मूल्य स्तर): सभी वस्तुओं और सेवाओं का औसत मूल्य
    • जो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) या थोक मूल्य सूचकांक (WPI) से मापा जाता है।​
    • T (कुल लेन-देन): अर्थव्यवस्था में एक वर्ष में होने वाले सभी मौद्रिक लेन-देन की संख्या
    • जिसमें उत्पादन, बिक्री और पुनर्विक्रय शामिल हैं।​
    • कभी-कभी इसे विस्तारित रूप MV + M'V' = PT में लिखा जाता है, जहां M' साख मुद्रा और V' उसका वेग है।​
  • सिद्धांत की मान्यताएँ
    • फिशर का सिद्धांत निम्नलिखित प्रमुख मान्यताओं पर टिका है:
    • V (मुद्रा वेग) और T (लेन-देन) दीर्घकाल में स्थिर रहते हैं और उत्पादन क्षमता से स्वतंत्र होते हैं।
    • मूल्य स्तर (P) एक निष्क्रिय चर है, जो M के परिवर्तनों से प्रभावित होता है।
    • M और M' का अनुपात स्थिर रहता है, अर्थात् नकद और साख मुद्रा का संतुलन अपरिवर्तित रहता है।
    • यह पूर्ण रोजगार वाली अर्थव्यवस्था मानता है, जहां T उत्पादन के बराबर होता है।​
  • व्याख्या और उदाहरण
    • समीकरण के अनुसार, MV = PT से स्पष्ट है
    • बायीं ओर मुद्रा की कुल आपूर्ति (MV) दायीं ओर मांग (PT) के बराबर होती है।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि M = 100 करोड़ रुपये, V = 4 (प्रति रुपये 4 लेन-देन), T = 200 करोड़ इकाइयाँ
    • तो P = (100 × 4) / 200 = 2 रुपये प्रति इकाई होगा।
    • अब यदि M दोगुना होकर 200 करोड़ हो जाए (V और T स्थिर)
    • तो P भी दोगुना होकर 4 रुपये हो जाएगा, जो मुद्रास्फीति दर्शाता है।
    • यह संबंध 45 डिग्री की रेखा P = f(M) द्वारा दिखाया जाता है।​
  • आलोचनाएँ
    • फिशर के सिद्धांत की कई आलोचनाएँ हैं:
    • अवास्तविक मान्यताएँ: V और T वास्तव में स्थिर नहीं रहते; वे आर्थिक चक्रों से प्रभावित होते हैं।​
    • मुद्रा आपूर्ति पर अधिक जोर: मांग पक्ष (PT) को कम महत्व दिया गया है।
    • T का मापन कठिन: कुल लेन-देन (T) को मापना जटिल है
    • जबकि आधुनिक अर्थशास्त्र में उत्पाद (Y) का उपयोग होता है (केंब्रिज संस्करण: MV = PY)।​
    • केन्सियन आलोचना: मंदी में M की वृद्धि से उत्पादन बढ़ सकता है, न कि केवल P।​
  • आधुनिक प्रासंगिकता
    • फिशर का सिद्धांत आज भी केंद्रीय बैंकों (जैसे RBI) की मुद्रा नीति में आधारभूत है।
    • यह मात्रावादियों (Monetarists) जैसे मिल्टन फ्राइडमैन को प्रभावित करता है।
    • वर्तमान में (जनवरी 2026 तक), उच्च मुद्रा आपूर्ति वृद्धि मुद्रास्फीति नियंत्रण के लिए प्रासंगिक बनी हुई है।​

9. निम्न में से किसे सकल मौद्रिक संसाधन के रूप में जाना जाता है? [CGL (T-I) 20 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) जनता द्वारा धारित मुद्रा (नोट के साथ सिक्के) और वाणिज्यिक बैंकों द्वारा धारित मांग जमा
Solution:
  • किसी अर्थव्यवस्था में उपलब्ध धन की कुल मात्रा को सकल मौद्रिक संसाधन कहा जाता है।
  • सकल मौद्रिक संसाधन—
  • M3 (व्यापक मुद्रा) = M1 + वाणिज्यिक बैंकों की निवल सावधि जमा जहाँ M1 = प्रचलन में करेंसी + मांग जमा + अन्य जमा
  • M3 की परिभाषा
    • M3 मुद्रा आपूर्ति का सबसे व्यापक माप है
    • जिसमें M1 (प्रचलन में मुद्रा + मांग जमा + RBI के पास अन्य जमा) के साथ-साथ वाणिज्यिक बैंकों की सावधि जमाएँ शामिल होती हैं।
    • इसका सूत्र है: M3 = M1 + बैंकों की सावधि जमाएँ।
    • RBI मौद्रिक नीति निर्धारण और तरलता मूल्यांकन के लिए M3 को प्राथमिक उपाय के रूप में परिभाषित करता है।​
  • महत्व और उपयोग
    • RBI M3 के आंकड़ों का उपयोग मुद्रास्फीति नियंत्रण, ब्याज दर निर्धारण और आर्थिक स्थिरता के लिए करता है।
    • यह साख सृजन की क्षमता को भी मापता है
    • क्योंकि सावधि जमाएँ बैंक ऋण प्रदान करने का आधार बनती हैं।
    • वर्तमान में (जनवरी 2026 तक), M3 में वृद्धि आर्थिक विकास का संकेत देती है
    • लेकिन अत्यधिक वृद्धि मुद्रास्फीति का जोखिम बढ़ाती है।​

10. निम्नलिखित में से किसे मुद्रा की पूर्ति की M₁ माप में सम्मिलित किया गया है? [CHSL (T-I) 9 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

(A) जनता के पास करेंसी

(B) डाकघर के पास आवधिक जमा

(C) व्यावसायिक बैंकों/सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के आरबीआई में मांग जमा

Correct Answer: (a) A और C दोनों
Solution:
  • एक निश्चित समय में लोगों में संचरण करने वाली कुल मुद्रा को मुद्रा की पूर्ति कहते हैं।
  • भारतीय रिजर्व बैंक मुद्रा की पूर्ति के वैकल्पिक मापों को चार रूपों में प्रकाशित करता है, नामतः M1, M2, M3 और M4
  • M₁ = CU + DD
    M₂ = M, + डाकघर बचत बैंकों में बचत जमाएं 2
    M₁ = M₁ + व्यावसायिक बैंकों की निवल आवधिक जमाएं 3 1
    M₁ = M₁ + डाकघर बचत संस्थाओं में कुल जमाएं (राष्ट्रीय 3 बचत प्रमाणपत्रों को छोड़कर)
    जहां CU लोगों द्वारा रखी गई करेंसी (नोट और सिक्के) है।
  • DD व्यावसायिक बैंकों द्वारा रखी गई निवल मांग जमा है। अतः इसका अभीष्ट उत्तर विकल्प (a) होगा।
  • M1 के घटक
    • M1 को निम्नलिखित तीन मुख्य भागों में विभाजित किया जाता है:
    • प्रचलन में मुद्रा : जनता के पास उपलब्ध नोट और सिक्के (बैंकों की नकदी को छोड़कर), जो तत्काल खर्च योग्य होती है।​
    • मांग जमा : वाणिज्यिक बैंकों में चालू खातों (करंट अकाउंट) या बचत खातों में रखी राशि
    • जो बिना सूचना के निकाली जा सकती है। अंतर-बैंक जमा इससे बाहर रहते हैं।​
    • RBI के पास अन्य जमा : विदेशी केंद्रीय बैंकों, वित्तीय संस्थानों और सरकारी संस्थाओं द्वारा RBI में रखी गई जमा राशियाँ।​
    • सूत्र: M1 = CU + DD + RBI के पास अन्य जमा। यह संकीर्ण मुद्रा (Narrow Money) कहलाती है
    • क्योंकि इसमें केवल उच्चतम तरलता वाली संपत्तियाँ शामिल हैं।​
  • महत्व और RBI का उपयोग
    • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) M1 को अर्थव्यवस्था में तत्काल उपलब्ध तरल धन मापने के लिए प्राथमिक उपकरण मानता है
    • जो मुद्रास्फीति, ब्याज दरों और आर्थिक नीतियों को प्रभावित करता है।
    • यह साख सृजन (Credit Creation) की प्रक्रिया को समझने में सहायक होता है
    • क्योंकि DD बैंक ऋणों का आधार बनती हैं। जनवरी 2026 तक, RBI साप्ताहिक/मासिक M1 आंकड़े जारी करता है
    • तरलता प्रबंधन हो सके।​