मूल अधिकार (भारतीय राजव्यवस्था) (भाग-II)

Total Questions: 32

1. X अपनी आजीविका कमाने के लिए चेन्नई अपनी व्यापार की स्वतंत्रता का प्रयोग कर रहा है। [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

भारतीय संविधान के निम्नलिखित में से किस अनुच्छेद में व्यापार की स्वतंत्रता प्रदान की गई है?

Correct Answer: (a) अनुच्छेद 19
Solution:

अनुच्छेद 19(1)(g) भारत के सभी नागरिकों को कोई भी पेशा अपनाने, या कोई भी व्यवसाय, व्यापार या कारोबार करने का मौलिक अधिकार प्रदान करता है।

  • यह अधिकार नागरिकों को अपनी आजीविका कमाने के लिए अपनी पसंद की आर्थिक गतिविधि में शामिल होने की स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है, जैसा कि X चेन्नई में कर रहा है। हालांकि,
  • यह स्वतंत्रता सार्वजनिक हित में उचित प्रतिबंधों के अधीन है, जो राज्य को कुछ व्यवसायों के लिए पेशेवर या तकनीकी योग्यता निर्धारित करने की अनुमति देता है।
  • अनुच्छेद 18 उपाधियों के उन्मूलन से संबंधित है, जबकि अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता को समाप्त करता है।
  • अनुच्छेद 16 सार्वजनिक रोजगार के मामलों में अवसर की समानता की बात करता है।
  • भारत का संविधान अपने नागरिकों को विभिन्न मौलिक अधिकारों की गारंटी देता है, जिनमें भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार, जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार,
  • समानता का अधिकार, शिक्षा का अधिकार और शोषण के खिलाफ अधिकार शामिल हैं।
  • व्यापार और वाणिज्य की स्वतंत्रता आजीविका के अधिकार का एक अनिवार्य हिस्सा है, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है।
    Other Information
  •  भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 सभी व्यक्तियों को कानून के समक्ष समानता और कानून के समान संरक्षण की गारंटी देता है।
  •  अनुच्छेद 15 धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव पर रोक लगाता है।
  •  अनुच्छेद 21A छह से चौदह वर्ष की आयु के सभी बच्चों को शिक्षा का अधिकार प्रदान करता है।
  •  अनुच्छेद 23 मानव तस्करी और जबरन श्रम पर रोक लगाता है।

2. भारतीय संविधान के निम्नलिखित में से किस अनुच्छेद के तहत "अवसरों की समानता में नागरिकों के पिछड़े वर्ग के लिए उचित वर्गीकरण और प्रावधान शामिल हैं" का प्रावधान किया गया है? [CHSL (T-I) 8 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) अनुच्छेद 16
Solution:

अनुच्छेद 16 सार्वजनिक रोज़गार के मामलों में अवसरों की समानता का प्रावधान करता है। इसका उपखंड 16(4) राज्य को यह शक्ति देता है कि वह नागरिकों के पिछड़े वर्ग के पक्ष में नियुक्तियों या पदों के आरक्षण के लिए कोई भी प्रावधान कर सके, यदि राज्य की राय में उनका राज्य के अधीन सेवाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है।

  • यह प्रावधान सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने और पिछड़े वर्गों को समान अवसर प्रदान करने के लिए उचित वर्गीकरण की अनुमति देता है।
  • जो समानता के सिद्धांत को संतुलित करता है। यह प्रावधान सामाजिक न्याय को बढ़ावा देता है।​
  • सभी नागरिकों के लिए अवसरों की समानता में पिछड़े वर्गों के लिए उचित वर्गीकरण और विशेष प्रावधान का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 16(4) एवं अनुच्छेद 15(4) के तहत किया गया है;
  • विशेष रूप से सार्वजनिक नियुक्तियों (सरकारी रोजगार) में वर्गीकरण और आरक्षण की अनुमति अनुच्छेद 16(4) में निहित है और नागरिकों के विरुद्ध भेदभाव व विशेष प्रावधान के सामान्य प्रमाण के संदर्भ में अनुच्छेद 15(4) भी लागू होता है.​
  • मुख्य प्रावधान
    • अनुच्छेद 16(4): यह बताता है कि सार्वजनिक रोजगारों (public employment) में किसी वर्ग के प्रति आरक्षण (reasonable classification / reservation) करना उचित माना जा सकता है
    • सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों को बराबरी के अवसर मिल सकें; इस अनुच्छेद के आधार पर सरकार सार्वजनिक सेवाओं में ओबीसी, एससी तथा एसटी के लिए आरक्षण लागू कर सकती है.​
    • अनुच्छेद 15(4): यह अनुच्छेद सामान्य रूप से कहता है कि राज्य सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की उन्नति के लिए विशेष प्रावधान कर सकता है;
    • इसे संविधान के मूल समता प्रावधान (अनुच्छेद 15 के अंतरगत) के अपवाद के रूप में देखा जाता है जिससे पिछड़ों के लिए भेदभाव-रोधी नियमों के बीच आवश्यक सकारात्मक कदम उठाए जा सकें.​
  • संवैधानिक और कानूनी संदर्भ
    • अनुच्छेद 15(4) और 16(4) को अवधारणा तथा व्यवहार दोनों स्तरों पर पिछड़े वर्गों (जैसे OBCs) के लाभ के लिए विशेष उपबंधों के संवैधानिक अधिकार के रूप में सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों ने मान्यता दी है;
    • सरकारें इन अनुच्छेदों के आधार पर आरक्षण नीतियाँ बनाती हैं और न्यायालय इन नीतियों की संवैधानिकता का परीक्षण करते रहे हैं.​
    • अन्य संबंधित प्रावधानों में आयोगों और पहचान से जुड़े अनुच्छेद (जैसे अनुच्छेद 338/338B और अनुच्छेद 342A के तहत NCBC और पिछड़े वर्गों की सूची) भी शामिल हैं, जो पिछड़ों की पहचान, निगरानी और शिकायत निवारण से संबंधित हैं और व्यापक नीति-कार्यान्वयन में सहायक हैं.​
    • यदि सार्वजनिक-नियोजन (employment) में अवसर समानता के संदर्भ में विशिष्ट कानूनी भाषा, न्यायिक मिसालें (case law) या किसी परीक्षा/प्रश्नोत्तरी के स्तर पर संक्षिप्त उत्तर चाहिए तो बताएं; आवश्यकतानुसार अनुच्छेदों की शब्दशः व्याख्या और प्रमुख सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के संक्षेप दिए जाएंगे.​

3. भारतीय संविधान का निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद स्वतंत्रता के अधिकार से संबंधित है? [CHSL (T-I) 8 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) अनुच्छेद 19
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 स्वतंत्रता के अधिकार से संबंधित है। यह नागरिकों को छह प्रकार की स्वतंत्रताएँ प्रदान करता है, जिनमें भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण और बिना हथियारों के इकट्ठा होने की स्वतंत्रता, संघ या सहकारी समितियाँ बनाने की स्वतंत्रता,
  • भारत के पूरे क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से घूमने की स्वतंत्रता, भारत के किसी भी हिस्से में निवास करने की स्वतंत्रता, और कोई भी पेशा, व्यापार या कारोबार करने की स्वतंत्रता शामिल है।
  • सीधा उत्तर: स्वतंत्रता के अधिकार भारतीय संविधान में अनुच्छेद 19 से अनुच्छेद 22 तक सम्मिलित हैं; विशेष रूप से अनुच्छेद 19 प्रमुख स्वतंत्रताएँ (वाक्-स्वातंत्र्य आदि) देता है जबकि अनुच्छेद 20–22 संबंधित संरक्षण और स्वतंत्रता के अधिकार देते हैं।
  • अनुच्छेद 19 का सार
    • अनुच्छेद 19 नागरिकों को छह प्रमुख व्यक्तिगत स्वतंत्रताएँ देता है — (1) वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, (2) शांतिपूर्वक सभा करने की स्वतंत्रता, (3) संघ (association) बनाने की स्वतंत्रता, (4) आंदोलनों/जुलूस की स्वतंत्रता, (5) किसी पेशे/व्यवसाय/कारोबार को करने की स्वतंत्रता, और (6) भारत के किसी भाग में निवास तथा भ्रमण की स्वतंत्रता।
    • ये अधिकार सरकारी कथित हस्तक्षेप से सुरक्षित हैं पर संसद द्वारा "सामान्य हित" या अन्य मान्य ground के आधार पर सीमित किए जा सकते हैं।
  • अनुच्छेद 20–22 का सार
    • अनुच्छेद 20: आपराधिक मामलों में सुरक्षितियाँ देता है—पूर्व-पाप दोषसिद्धि (ex post facto laws) के खिलाफ सुरक्षा, द्वि-पीड़ितता (double jeopardy) का निषेध, तथा स्वयं के विरुद्ध साक्ष्य के लिए मजबूर न करने का अधिकार।
    • अनुच्छेद 21: किसी व्यक्ति के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार; यह कहता है कि जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप ही रोका/छीन जा सकता है। न्यायालयों ने इस अनुच्छेद को व्यापक व्याख्या दी है (गोपनीयता, स्वच्छ पर्यावरण, इलाज तक पहुँच आदि समेत)।
    • अनुच्छेद 22: गिरफ्तारी और हिरासत में रखे गए व्यक्ति के संरक्षण से संबंधित प्रक्रियात्मक अधिकार (सूचना, प्रवक्ता से मिलने, तथा कुछ मामलों में पेशी/रिमांड नियम) देता है; कुछ सीमाएँ आपातकालीन स्थितियों में लागू हो सकती हैं।
  • व्यवहारिक और न्यायिक महत्व
    • अनुच्छेद 19–22 मिलकर "स्वतंत्रता के अधिकार" (Right to Freedom) समूह बनाते हैं जो नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतन्त्रता की बुनियादी गारंटी करते हैं।
    • इन अधिकारों पर सीमाएँ संवैधानिक रूप से मान्य हैं जब वे विधि के अनुरूप, आवश्यक और आनुपातिक (proportionate) हों; सर्वोच्च न्यायालय ने कई मामलों में इन अधिकारों की व्याख्या कर सीमाओं की वैधता पर निर्णय दिए हैं।

4. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में कहा गया है कि 'किसी भी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक बार से ज्यादा सजा नहीं मिलेगी'? [MTS (T-I) 08 जुलाई, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) अनुच्छेद 20
Solution:
  • अनुच्छेद 20 अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण से संबंधित है। इसका उपखंड 20(2) यह प्रावधान करता है कि 'किसी भी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक बार से ज्यादा सजा नहीं मिलेगी'। इसे दोहरे खतरे से संरक्षण (protection against double jeopardy) के रूप में जाना जाता है।
  • यह एक मौलिक विधिक सिद्धांत है जो राज्य की दमनकारी शक्तियों के खिलाफ व्यक्तियों की रक्षा करता है और सुनिश्चित करता है कि न्यायपालिका एक ही आपराधिक कृत्य के लिए किसी व्यक्ति को बार-बार दंडित न करे।
  • अनुच्छेद 20 का मूल भाव
    • अनुच्छेद 20 आपराधिक मामलों में आरोपी व्यक्तियों की सुरक्षा देता है और तीन मुख्य सुरक्षा-सूचनाएँ प्रदान करता है:
    • (1) पूर्वव्यापी दण्डों (ex post facto laws) के खिलाफ सुरक्षा, (2) एक ही अपराध के लिए दोहरी सजा/दो बार मुकदमे के निषेध, और (3) आत्म-आरोपण के लिए मजबूर न करने का अधिकार; उपर्युक्त दोहरी सजा संबंधी प्रावधान विशेषकर अनुच्छेद 20(2) में निहित है.​
  • अनुच्छेद 20(2) की व्याख्या और सीमाएँ
    • अनुच्छेद 20(2) का उद्देश्य व्यक्ति को "double jeopardy" से बचाना है ताकि कोई भी व्यक्ति एक ही अपराध के लिए बार-बार मुकदमे या सजा के खतरे में न रहे।​
    • व्यवहार में कानून और न्यायालयों ने अनुच्छेद 20(2) की सीमा और दायरा निर्धारित किए हैं; उदाहरण के लिए, उसी व्यक्ति के खिलाफ अलग-अलग न्यायिक/न्यायिक पदानुक्रमों में एक ही कार्यवाही के रूप में नहीं बल्कि अलग-अलग अपराधों के लिए नये मुकदमों की अनुमति या रोक के मामलों में अदालतें विशिष्ट स्थिति देखकर निर्णय करती हैं।​
    • दंड प्रक्रिया (CrPC) में भी इसी सिद्धांत को लागू करने वाले प्रावधान हैं, जो मुकदमे के पुराने निष्कर्षों के बाद उसी अपराध के लिए नये मुकदमों पर रोक लगाते हैं; परन्तु कुछ परिस्थितियों (जैसे अपील/री-ट्रायल के तकनीकी पहलू) में विवादात्मक व्याख्याएँ पैदा हुई हैं जिन पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय मार्गदर्शक होते हैं।​

5. जनता को राज्य के दमनकारी कार्यों से बचाने के लिए मौलिक अधिकारों की गारंटी दी गई है; न्यायिक निर्णय भारतीय संविधान के ....... द्वारा परिभाषित राज्य शब्द के दायरे का विस्तार करते हैं। [CHSL (T-I) 8 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (a) अनुच्छेद 12
Solution:
  • अनुच्छेद 12 भारतीय संविधान के भाग III (मौलिक अधिकार) के उद्देश्य के लिए 'राज्य' शब्द को परिभाषित करता है।
  • इसमें भारत सरकार और संसद, राज्यों की सरकारें और विधानमंडल, सभी स्थानीय प्राधिकरण, और भारत के क्षेत्र के भीतर या सरकार के नियंत्रण में आने वाले अन्य प्राधिकरण शामिल हैं।
  • न्यायिक निर्णयों ने इस दायरे का विस्तार किया है ताकि उन सभी संस्थाओं को शामिल किया जा सके जो राज्य के उपकरणों के रूप में कार्य करती हैं, जिससे जनता को राज्य के दमनकारी कार्यों से बचाने के लिए मौलिक अधिकारों की गारंटी सुनिश्चित हो सके।
  • राज्य' शब्द को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत परिभाषित किया गया है, जिसमें भारत की सरकार और संसद, प्रत्येक राज्य की सरकार और
    विधानमंडल, और भारत के क्षेत्र के भीतर या भारत सरकार नियंत्रण के तहत सभी स्थानीय या अन्य प्राधिकरण शामिल हैं।
  •  न्यायपालिका द्वारा 'राज्य' शब्द का दायरा बढ़ाकर सार्वजनिक कार्य करने वाले निजी निकायों या व्यक्तियों को शामिल कर लिया गया है, जिसके कारण उनके खिलाफ भी
    मौलिक अधिकारों का प्रयोग शुरू हो गया है।
    Other Information
  •  अनुच्छेद 14 :-
    •  यह भारत के क्षेत्र के भीतर कानून के समक्ष समानता के अधिकार और कानूनों की समान सुरक्षा की गारंटी देता है।
  •  अनुच्छेद 15 :-
    •  यह धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव पर रोक लगाता है।
  •  अनुच्छेद 13 :-
    •  यह घोषणा करता है कि मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाला कोई भी कानून अमान्य होगा।

6. निम्नलिखित में से कौन-सा भारतीय संविधान में स्वतंत्रता के अधिकार का एक प्रकार नहीं है? [CHSL (T-I) 16 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) सशस्त्र सभा के लिए अपराध
Solution:
  • स्वतंत्रता के अधिकार का एक प्रकार जो नहीं है, वह है सशस्त्र सभा। अनुच्छेद 19(1)(b) नागरिकों को शांतिपूर्ण और बिना हथियारों के इकट्ठा होने की स्वतंत्रता देता है।
  • एक सशस्त्र सभा इस मौलिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करती है और यह सार्वजनिक व्यवस्था के हित में आपराधिक दंड के अधीन है
  • इसलिए यह स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा नहीं हो सकता। अन्य विकल्प स्वतंत्रता के अधिकार के विभिन्न पहलू हैं (अनुच्छेद 19, 21, 20)।
  • स्वतंत्रता का अधिकार
  • भारतीय संविधान का उद्देश्य विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और पूजा की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है।
  • इसलिए भारतीय संविधान में अनुच्छेद 19 से 22 तक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लेख किया गया है।
  • इनमें देश के सभी वर्गों के लोगों को ध्यान में रखते हुए प्रावधान दिए गए हैं, ताकि कोई भी व्यक्ति अपने मन का कोई भी काम कर सके, लेकिन वह काम गैरकानूनी और
    असंवैधानिक नहीं होना चाहिए
  • वह काम किसी के द्वारा किया जाना चाहिए। अन्य व्यक्ति ऐसा कि मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो।
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 इस संबंध में सबसे महत्वपूर्ण है।
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 में वर्तमान में देश के नागरिकों के लिए केवल 6 स्वतंत्रताओं का वर्णन किया गया है, जो इस प्रकार हैं
  • विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
  • हथियारों और शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता.
  • समुदाय और संघ की स्वतंत्रता
  • यात्रा की स्वतंत्रता
  • निवास की स्वतंत्रता
  • व्यापार की स्वतंत्रता (इसलिए विकल्प 1 सही है)
  • अनुच्छेद 20 अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में सुरक्षा प्रदान करता है। (इसलिए विकल्प 4 सही है)
  • अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा प्रदान करता है। (इसलिए विकल्प 2 सही है)
  • अनुच्छेद 22 कुछ मामलों में गिरफ़्तारी और हिरासत से सुरक्षा प्रदान करता है।

7. सरकार भारतीय संविधान के ....... के तहत, श्रमिकों के लिए मानव गरिमा के अनुकूल जीवन को सुरक्षित करने के लिए अधिनियमित सामाजिक कल्याण और श्रम कानूनों का पालन सुनिश्चित करने के लिए बाध्य हैं। [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) अनुच्छेद 21
Solution:
  • अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा से संबंधित है। सर्वोच्च न्यायालय ने इसकी व्याख्या व्यापक रूप से की है
  • 'जीवन' का अर्थ पशुवत अस्तित्व से कहीं अधिक है, बल्कि इसमें गरिमा के साथ जीवन शामिल है।
  • इस व्यापक व्याख्या के तहत, श्रमिकों के लिए मानव गरिमा के अनुकूल जीवन (जैसे उचित वेतन, सुरक्षित कार्य दशाएँ, सामाजिक सुरक्षा) सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक कल्याण और श्रम कानूनों का पालन सुनिश्चित करना राज्य का संवैधानिक दायित्व बन जाता है।
  •  जो श्रमिकों को मानव गरिमा के अनुकूल जीवन देने के उद्देश्य से बनाए गए हैं। यह अनुच्छेद केवल जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा नहीं करता, बल्कि न्यायालयों ने इसके दायरे का विस्तार कर श्रमिकों के लिए मानवीय और सम्मानजनक जीवन परिस्थितियों को भी इसमें शामिल किया है।​
  • संबंधित संवैधानिक प्रावधान
    • अनुच्छेद 21 को संविधान का मूल अधिकार माना जाता है, जो प्रत्येक व्यक्ति के लिए "जीवन" को केवल शारीरिक अस्तित्व तक सीमित न रखकर सम्मानजनक जीवन, स्वास्थ्य, सुरक्षा और न्यूनतम मानवीय आवश्यकताओं तक विस्तृत रूप में समझता है।
    • न्यायपालिका ने अनेक निर्णयों में कहा है कि यदि श्रम कानूनों का पालन न हो, मजदूरी न दी जाए या कार्यस्थल अमानवीय हो, तो यह अनुच्छेद 21 के उल्लंघन के समान है।​
    • साथ ही, नीति निदेशक तत्वों के अंतर्गत अनुच्छेद 39, 41, 42, 43 आदि राज्य पर यह दायित्व डालते हैं कि वह श्रमिकों के लिए पर्याप्त आजीविका, न्यायोचित एवं मानवीय कार्यदशा और सभ्य जीवन स्तर जैसी सुविधाएँ सुनिश्चित करे।
    • इन प्रावधानों को अनुच्छेद 21 की व्याख्या में सहायक माना गया है, जिससे “मानव गरिमा के अनुकूल जीवन” की अवधारणा और मजबूत होती है।​
  • श्रमिकों के लिए सरकार के दायित्व
    • अनुच्छेद 21 के आलोक में सरकार पर यह दायित्व है कि वह जो भी सामाजिक सुरक्षा, कल्याण एवं श्रम संबंधी कानून बनाए गए हैं
    • उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करे ताकि श्रमिकों को मात्र जीवित रहने भर नहीं, बल्कि सम्मानपूर्वक जीने के अवसर मिलें।
    • इसलिए विभिन्न श्रम कानूनों—जैसे न्यूनतम मजदूरी, काम के घंटे, सुरक्षा, स्वास्थ्य, मातृत्व लाभ आदि—को लागू करवाना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी बनती है, न कि केवल नीतिगत विकल्प।​
    • इस प्रकार प्रश्न में दिए गए वाक्य में रिक्त स्थान की सही पूर्ति “अनुच्छेद 21” से होगी, क्योंकि यही वह प्रावधान है
    • जिसके तहत सरकार श्रमिकों के लिए मानव गरिमा के अनुकूल जीवन को सुरक्षित करने वाले सामाजिक कल्याण और श्रम कानूनों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है।​

8. भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद चौदह वर्ष से कम आयु के बच्चों को कारखानों, खानों आदि में नियोजित करने से रोकता है? [CGL (T-I) 18 अप्रैल, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) 24
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 24 शोषण के विरुद्ध अधिकार के तहत आता है। यह स्पष्ट रूप से चौदह वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी कारखाने, खान या अन्य खतरनाक रोज़गार में नियोजित करने से रोकता है।
  • इसका उद्देश्य बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और नैतिक कल्याण की रक्षा करना है, जिससे वे देश के स्वस्थ नागरिक के रूप में विकसित हो सकें।
  •  अनुच्छेद 24
    •  चौदह वर्ष से कम आयु के किसी भी बच्चे को किसी कारखाने या खदान में काम करने के लिए या किसी अन्य खतरनाक रोजगार में नहीं लगाया जाएगा।
       Other Information
  •  अनुच्छेद 23
    • मानव तस्करी और जबरन श्रम के रूपों को प्रतिबंधित किया गया है और इस प्रावधान का कोई भी उल्लंघन कानून के अनुसार दंडनीय अपराध होगा।
    • इस अनुच्छेद में कोई बात राज्य को सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए अनिवार्य सेवा अधिरोपित करने से निवारित नहीं करेगी।
    • ऐसी सेवा अधिरोपित करने में राज्य केवल धर्म, मूलवंश, जाति या वर्ग या इनमें से किसी के आधार पर कोई विभेद नहीं करेगा।
  •  अनुच्छेद 25:
    •  अंतःकरण की ओर धर्म की अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार की स्वतंत्रता।
  •  अनुच्छेद 26:
    •  धार्मिक विषयक कार्यों के प्रबंधन की स्वतंत्रता।
  •  अनुच्छेद 27:
    •  धर्म के प्रचार के लिए कराधान से मुक्ति।
  •  अनुच्छेद 28:
    •  धार्मिक शिक्षा में भाग लेने से स्वतंत्रता।
  •  अनुच्छेद 34:
    •  अनुच्छेद 34 कहता है कि जब किसी क्षेत्र में सेना विधि प्रवृत्त है तब मौलिक अधिकारों को प्रतिबंधित किया जा सकता है।
  •  अनुच्छेद 21A:
    •  अनुच्छेद 21A शिक्षा का अधिकार प्रदान करता है।
    •  अनुच्छेद 21A के तहत राज्य 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करता है।
  •  अनुच्छेद 31:
    •  अनुच्छेद 31 कहता है कि संपत्ति का अधिकार अब मौलिक अधिकार नहीं रहा।
    •  संपत्ति का अधिकार हालांकि अभी भी एक संवैधानिक अधिकार है, मौलिक अधिकार नहीं।

9. स्वतंत्रता के अधिकारों में सबसे प्रमुख अधिकार ....... है। [CGL (T-I) 01 दिसंबर, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार
Solution:
  • अनुच्छेद 21 में निहित जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार स्वतंत्रता के अधिकारों में सबसे प्रमुख है।
  • इसे भारतीय संविधान के सबसे महत्वपूर्ण और मौलिक अधिकारों में से एक माना जाता है क्योंकि यह मानव अस्तित्व और गरिमा का आधार है।
  • सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इसकी व्याख्या बहुत व्यापक है और इसमें स्वास्थ्य, आजीविका, पर्यावरण, और सम्मान सहित गरिमापूर्ण जीवन के सभी पहलू शामिल हैं।
  • भारतीय संविधान के भाग III में वर्णित स्वतंत्रता के अधिकार (अनुच्छेद 19 से 22) में सबसे प्रमुख अधिकार जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 21) है।
  • यह अधिकार सभी मौलिक अधिकारों की आधारशिला माना जाता है क्योंकि यह किसी व्यक्ति को कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अतिरिक्त उसके जीवन या स्वतंत्रता से वंचित होने से बचाता है।​
  • अनुच्छेद 21 का महत्व
    • अनुच्छेद 21 मूल रूप से संकीर्ण व्याख्या के अधीन था, लेकिन मनeka गांधी बनाम भारत संघ (1978) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने इसे व्यापक बनाया, जिसमें कहा गया कि जीवन का अर्थ केवल जीवित रहना नहीं, बल्कि गरिमापूर्ण जीवन जीना है।
    • इस अधिकार के अंतर्गत निहित हैं आजीविका का अधिकार, निजता का अधिकार, स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार, स्वास्थ्य का अधिकार, त्वरित न्याय का अधिकार आदि।
    • यह अन्य स्वतंत्रताओं जैसे अभिव्यक्ति (अनुच्छेद 19) को भी समर्थन देता है, क्योंकि बिना जीवन के कोई स्वतंत्रता संभव नहीं।​
  • अन्य स्वतंत्रता अधिकारों से तुलना
    • स्वतंत्रता के अधिकार अनुच्छेद 19 में छह स्वतंत्रताएं शामिल हैं: भाषण-अभिव्यक्ति, शांतिपूर्ण सभा, संघ बनाने, देश में घूमने-फिरने, निवास और व्यवसाय की स्वतंत्रता।
    • हालांकि, ये प्रतिबंधों के अधीन हैं (जैसे सार्वजनिक व्यवस्था), जबकि अनुच्छेद 21 को आपातकाल में भी निलंबित नहीं किया जा सकता (अनुच्छेद 20 और 21 अपवाद)।
    • अनुच्छेद 20 अपराधों के लिए संरक्षण और अनुच्छेद 22 गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान करता है, लेकिन अनुच्छेद 21 सबसे व्यापक है।​
  • ऐतिहासिक एवं न्यायिक विकास
    • संविधान सभा ने अमेरिकी बिल ऑफ राइट्स से प्रेरित होकर ये अधिकार दिए। केस जैसे ए.के. गोपालन (1950) में इसे संकीर्ण रखा गया
    • लेकिन बाद के फैसलों (जैसे पुत्तास्वामी मामले में निजता को अनुच्छेद 21 का हिस्सा माना) ने इसे विस्तार दिया।
    • यह अधिकार राज्य की मनमानी से बचाव करता है और लोकतंत्र की रक्षा करता है।

10. भारतीय संविधान का निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय जाने के अधिकार से संबंधित है? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) अनुच्छेद 32
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 32 मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिए सीधे सर्वोच्च न्यायालय जाने के अधिकार से संबंधित है।
  • यह अपने आप में एक मौलिक अधिकार है, जिसे डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने संविधान की आत्मा और हृदय कहा था।
  • यह न्यायालय को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट (जैसे बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश) जारी करने का अधिकार देता है
  • जिससे यह सुनिश्चित होता है कि मौलिक अधिकार केवल कागजी अधिकार न रहें बल्कि वास्तविक और प्रवर्तनीय हों।
  • यह घोषित करता है कि संविधान के प्रारंभ से पहले भारत में लागू कोई भी कानून, जो मौलिक अधिकारों के प्रावधानों के साथ असंगत है, उसकी असंगति की सीमा तक शून्य होगा।
  • यह अनुच्छेद यह भी सुनिश्चित करता है कि राज्य ऐसा कोई कानून नहीं बना सकता है जो संविधान के भाग III द्वारा प्रदत्त अधिकारों को कम करे या छीन ले।
  •  यह मनमाने कानूनों के खिलाफ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और मौलिक अधिकारों के प्रावधानों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए एक तंत्र प्रदान करता है।
  • अनुच्छेद 13 को भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने में एक आधारशिला माना जाता है, जो किसी भी असंवैधानिक कानून को बनाने से रोकता है।
  • न्यायपालिका अनुच्छेद 13 की व्याख्या करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और उन कानूनों या प्रावधानों को रद्द करने की शक्ति रखती है जो मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।
    Other Information
  •  अनुच्छेद 42
  • अनुच्छेद 42 राज्य के नीति निदेशक तत्वों का हिस्सा है और राज्य को काम करने की न्यायसंगत और मानवीय परिस्थितियों और मातृत्व राहत के लिए प्रावधान करने का
    निर्देश देता है।
  •  यह सीधे मौलिक अधिकारों से संबंधित नहीं है, लेकिन सामाजिक और आर्थिक न्याय प्रदान करने का लक्ष्य रखता है।
  • अनुच्छेद 30
  • अनुच्छेद 30 अल्पसंख्यकों को कुछ अधिकार प्रदान करता है, जिससे वे अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और प्रशासन कर सकते हैं।
  • यह अनुच्छेद अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों की रक्षा करता है, लेकिन मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाले कानूनों को संबोधित नहीं करता है।
  •  अनुच्छेद 32
  • अनुच्छेद 32 को संवैधानिक उपचारों का अधिकार के रूप में जाना जाता है और नागरिकों को अपने मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए सर्वोच्च न्यायालय में जाने का
    अधिकार प्रदान करता है।
  • यह मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण प्रावधान है, लेकिन राज्य को ऐसे कानून बनाने से स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित नहीं करता है जो इन अधिकारों का
    उल्लंघन करते हैं।