Solution:लेवी स्ट्रास का विचार है कि 'अगम्यगमन निषेध' (In cest Taboo) व्यापक समाज के साथ सम्बन्ध बनाने में सहायक होता है। उन्होंने अपनी पुस्तक द एलिमेन्ट्री स्ट्रक्चर्स ऑफ किनशिप' (1949) में 'अगम्यगमन निषेध' की प्रथा को सार्वभौमिक मानते हुए इसकी व्याख्या की है।उन्होंने इस निषेध को विवाह की संस्था को नियंत्रित करने वाले नियमों के रूप में देखा है। वे कहते हैं कि सरल समाजों में विवाह के सकारात्मक नियम होते हैं, अर्थात एक व्यक्ति नातेदारी के किस वर्ग में विवाह कर सकता है। इस दृष्टि से आदिवासी समाजों में 'विलिंग सहोदरज विवाह' (ममेरे फूफेरे भाई-बहिन विवाह) की अनुमति दी गई है।
इसके विपरीत, जटिल समाजों (आधुनिक समाज) में विवाह के नकारात्मक नियमों की अधिकता होती है अर्थात् एक व्यक्ति को नातेदारी समूह के कुछ विशिष्ट वर्ग के व्यक्तियों के साथ विवाह करने की अनुमति नहीं होती।
इस वर्ग में सामान्यतः निकटतम संबंधी अथवा अपने कुल (गोत्र) समूह के सदस्य होते हैं जिसके साथ विवाह करना निषेधित होता है। विवाह के ये नियम न केवल सामाजिक संरचना को प्रभावित करते हैं, अपितु ये सामाजिक संरचना का निर्माण भी करते हैं।