'विश्लेषण' शब्द प्राचीन यूनानी पद 'स्नालुसिस' से प्राप्त किया गया है। उत्सर्ग 'एना' का तात्पर्य 'ऊपर' और लुसिस का तात्पर्य गंवाना, नियुक्ति करना या पृथक्कीकरण है जिसमें 'एनालुसिस' का तात्पर्य ढीला होना' था 'विलीनीकरण' है। यह पद तत्परता से समस्या के समाधान या विलीन करने तक विस्तारित किया गया और इस अर्थ में इसको प्राचीन यूनानी ज्यमिति और दर्शनशास्त्र में प्रयुक्त किया गया। प्राचीन यूनानी ज्यमिति में विकसित की गई विश्लेषण विधि का प्लेटो और अरस्तु दोनों पर प्रभाव पड़ा।
लेकिन, सुकरात के परिभाषा के साथ सरोकार का प्रभाव भी महत्वपूर्ण है जिसमें आधुनिक अवधारणात्मक विश्लेषण की जड़े पाई जा सकती है। हमारे पास जो यूनानी विचारधारा है, वह अब कार्यविधियों का एक जटिल जाल है, जिसमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण सुकरात की परिभाषा है, जिसकी प्लेटो ने अपनी विभाजन विधि और उनसे सम्बन्धित परिकल्पना विधि में व्याख्या की, जो ज्यमितीय विश्लेषण और अरस्तु द्वारा विकसित एनालिटिक्स पर आधारित है।
पिहली दो सहशब्दियो से भी अधिक समय से इस बोर में सहमति न होने से आज इन कार्यविधियों के बीच सम्बन्ध बढ़ते विवाद का विषय बन गए है।
इन सभी के केन्द्र में मेनो के अन्तविरोध द्वारा उठाई गई दार्शनिक समस्याएँ है, जिसको हम अब विश्लेषण के अन्तविरोध के रूप में जनित है, जो इस बात से सम्बन्धित है, कि किस प्रकार कोई विश्लेषण सही और सूचनात्मक दोनों हो सकता है तथा (प्लेटो के) अनुस्मरण सिद्धान्त के माध्यम से समाधान के प्रयास ने स्वयं इन सिद्धान्त के विषय में वृहत साहित्य को जन्म दिया है।
प्लेटो ने सुकरात की परिभाषा को किसमें विस्तारित किया।