यू.जी.सी. NTA नेट (दिसम्बर) परीक्षा, 2019 दृश्य कला

Total Questions: 100

91. निम्नलिखित पेंटिंग मूर्तिशिल्प छाया चित्र का सावधानीपूर्वक अवलोकन करें और चित्र के अनुसार निम्न प्रश्नों का सही उत्तर दें।


इस चित्र का शीर्षक क्या है?

Correct Answer: (c) द ट्रिब्यूट मनी
Solution:

इस चित्र का शीर्षक है- 'द ट्रिब्यूट मनी' (The Tribute Money)
चित्रकार - मसच्चियों
समय - 1425 ई.

92. कलाकार ने इस चित्र में इस प्रकार के परिप्रेक्ष्य का उपयोग किया है?

Correct Answer: (a) रेखीय परिप्रेक्ष्य
Solution:

कलाकार ने चित्र में रेखीय परिप्रेक्ष्य' का उपयोग किया है। रेखा द्विआयामी होती है, किन्तु विशेष पद्धति से प्रयोग करने पर रेखाओं से त्रिआयामी प्रभाव भी उत्पन्न किये जा सकते हैं।
गहरे बलों से युक्त तथा मोटी रेखाएँ निकटता प्रदर्शित करती है, और हल्के बलों वाली बारीक रेखाएँ दूरी प्रदर्शित करती है।
विभिन्न कोणों का उपयोग करने वाली रेखाएँ वस्तुओं के घनत्व अथवा विभिन्न तत्वों को प्रदर्शित करती है।
रेखा-वर्तना द्वारा वस्तुओं के उभरे तथा गहरे तलों अथवा प्रकाश छाया वालें भागों को भी स्पष्ट किया जा सकता है। इस विधि में रेखा का अपना स्वतन्त्र अस्तित्व समाप्त हो जाता है।

93. इस चित्र में चित्रित दृष्य उस विषय का वर्णन करता है, जिसमें:

Correct Answer: (b) करसंग्राहक ईसा से प्रवेश शुल्क मांग रहा है
Solution:दृश्य उस विषय का वर्णन करता है जिसमें- 'करसंग्राहक ईसा से प्रवेश शुल्क मांग रहा है।

94. इस चित्र में कितने एपिसोड्स चित्रित किए गए हैं:

Correct Answer: (c) तीन एपिसोड
Solution:चित्र में 'तीन एपिसोड' का चित्रण किया गया है।

95. इस चित्र में झील के निकट पुरुष क्या कर रहा है?

Correct Answer: (a) मछली से धन एकत्रित कर रहा है
Solution:झील के निकट पुरूष 'मछली से धन एकत्रित कर रहा।'

96. निम्नलिखित पेंटिंग मूर्तिशिल्प छाया चित्र का सावधानीपूर्वक अवलोकन करें और चित्र के अनुसार निम्न प्रश्नों का सही उत्तर दें।


इस मूर्ति में शिव पैरों तले किसे कुचल रहे हैं?

Correct Answer: (a) अपस्मार पुरुष
Solution:

हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार अपस्मार एक बौना है जो आध्यात्मिक अज्ञानता और निरर्थक भाषण का प्रयोग करता है उन्हें मुयालका या मुलकान के नाम से भी जाना जाता है। अप्सरा कोवश में करने के लिए भगवान शिव ने Naueraja के रूप में अपनाया नृत्य के भगवान और ताव के लौकिक नृत्य का प्रदर्शन किया। इस नृत्य के दौरान नटराजा ने अपने दाहिने पैर से कुचल कर अपस्मान को दर्शाया। जैसा कि अपस्मार के लिए नियत कुछ राक्षसों में से एक है, ऐसा माना जाता है भगवान शिव हमेशा के लिए अपस्मार के दबाने वाले अपने श्रीकृष्ण रूप में हमेशा बने रहते हैं।

97. नटराज की प्रतिमा किस शैली से संबंधित है?

Correct Answer: (c) चोल
Solution:

'नटराज की कांस्य मूर्ति' चोल वंश से संबंधित है। 'नटराज' का अर्थ है- ताण्डव नृत्य की मुद्रा में शिव ।
चोलो के समय में निर्मित धातु मूर्तियों में 'नटराज शिव की कांस्य प्रतिमा को विश्व के श्रेष्ठतम मूर्ति शिल्प में से एक माना जाता है।
चोल शासक राजाराज प्रथम ने तंजोर में राजराजेश्वर अथवा वृहदीश्वर मंदिर का निर्माण करवाया था तथा उसके पुत्र राजेन्द्र प्रथम ने ग कोडचोलपुरम् में वृहदीश्वर मंदिर का निर्माण करवाया था।

98. शिव की वाम अग्र हस्त मुद्रा क्या कहलाती है?

Correct Answer: (d) गज हस्त मुद्रा
Solution:शिव का ऊपर का बायां हाथ, दण्ड हस्त या गजहस्त मुद्रा कहलाता है। यह उनके उठे हुए पाव की ओर इंगित करता है। जहाँ इस संसार को आश्रय मिलेगा। बायां पैर शरीर को काटते हुए मुड़ा होता है।

99. प्रतिमा में शिव की मुद्रा क्या कहलाती है?

Correct Answer: (b) अतिभंग
Solution:

चोलकालीन नटराज मूर्ति की मुद्राएँ या भंगिमा 'अंतिभंग' मुद्रा में है। चोल शासन काल में निर्मित “चिदम्बरम् का नटराज मन्दिर" यह मंदिर तमिलनाडु के अर्काट जिले में स्थित है, चिदम्बरम् मंदिर के प्रवेशद्वार के कपाट पर नटराज की 108 नृत्य मुद्राओं का अंकन दर्शित हैं, जो 'अंतिभंग मुद्रा का सापेक्ष उदाहरण है।
इस स्वरूप में शिव कलाओं के आधार है शिव का ताण्डव नृत्य प्रसिद्ध है।
चोल कालीन 'शिव प्रतिमा' नटराज रूप' मेट्रोपोलिटन कला संग्रहायल न्यूयार्क सिटी में रखा गया है।

100. 'नटराज' प्रतिमा किस धातु की है?

Correct Answer: (a) कांस्य
Solution:

नटराज की प्रतिमा 'कांस्य' से बनी है जो चोल वंश से संबंधित है। नटराज शिवजी का एक नाम है। उस रूप में जिसमें वह सबसे उत्तम नर्तक है। ब्रह्माण्ड में स्थित सारा जीवन उनकी गति कम्पन तथा ब्रह्माण्ड से परिशून्य की निःशब्दता सभी कुछ एक शिव में निहित है।
• इस स्वरूप में शिव कलाओं के आधार है। जो चोल वंश से संबंधित है। नटराज शिवजी का एक नाम है। उस रूप में जिसमें वह सबसे उत्तम नर्तक है। ब्राह्माण्ड में स्थित सारा जीवन उनकी गति कम्पन तथा ब्राह्माण्ड से परिशून्य की निःशब्दता सभी कुछ एक शिव में निहित है।
• इस स्वरूप में शिव कलाओं के आधार हैं। शिव का तांडव नृत्य प्रसिद्ध है।