Correct Answer: (d) 7वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम
Solution:- अनुच्छेद 153 के अनुसार, प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होता है, लेकिन सातवें संविधान संशोधन अधिनियम, 1956 से एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल भी नियुक्त किया जा सकता है।
- भारतीय संविधान के सातवें संशोधन अधिनियम, 1956 ने एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त करने का प्रावधान किया।
- संशोधन का पृष्ठभूमि
- स्वतंत्र भारत में भाषाई आधार पर राज्यों का पुनर्गठन होने से कई छोटे राज्य बने, जिससे प्रत्येक के लिए अलग राज्यपाल नियुक्ति का वित्तीय और प्रशासनिक बोझ बढ़ गया।
- इस संशोधन ने अनुच्छेद 153 में संशोधन कर "एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों के लिए राज्यपाल नियुक्त किए जाने" की अनुमति दी, जिससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ी।
- अनुच्छेद 153 का महत्व
- अनुच्छेद 153 मूल रूप से कहता है कि प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा, लेकिन सातवें संशोधन के बाद इसमें प्रावधान जोड़ा गया कि यह एक ही व्यक्ति को कई राज्यों का राज्यपाल बनाने से रोके नहीं।
- राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 155 के तहत राज्यपाल की नियुक्ति होती है, और यह पद राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत रहता है।
- इस बदलाव से छोटे राज्यों जैसे छोटा नागपुर या आसपास के क्षेत्रों में एक राज्यपाल कई राज्यों की जिम्मेदारी संभाल सकता है।
- अन्य प्रभाव और उदाहरण
- इस संशोधन ने राज्यपाल के वेतन और भत्तों को भी राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित अनुपात में संबंधित राज्यों के बीच साझा करने का प्रावधान किया।
- वर्तमान में कई उदाहरण हैं, जैसे एक राज्यपाल गुजरात और महाराष्ट्र दोनों के राज्यपाल रह चुके हैं। यह संघीय ढांचे को मजबूत बनाता है
- हालांकि राज्यपाल की राजनीतिक तटस्थता पर बहस बनी रहती है।
- राज्यपाल की भूमिका
- राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है, जो विधानमंडल सत्र बुलाने, विधेयक पर हस्ताक्षर करने और मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करता है।
- अनुच्छेद 163-162 इनकी शक्तियों को परिभाषित करते हैं। यह संशोधन संघ और राज्यों के बीच समन्वय को आसान बनाता है।