संविधान संशोधन

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1. 2011 के 97वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम ने ....... से संबंधित एक नया राज्य का नीति निदेशक सिद्धांत जोड़ा। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (III-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (I-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 29 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) सहकारी समितियों
Solution:
  • भारतीय संविधान के 97वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2011 द्वारा जोड़े गए अनुच्छेद 19 (1) (ग) में भारत के सभी नागरिकों को संगम या संघ के साथ-साथ सहकारी समिति बनाने का मूल अधिकार अंतःस्थापित किया गया।
  • संविधान के अनुच्छेद 43ख में राज्य सहकारी समिति के ऐच्छिक गठन, स्वायत्त कार्यवाही, लोकतांत्रिक नियंत्रण और व्यावसायिक प्रबंधन में वृद्धि करने हेतु राज्य सरकार के लिए नीति निदेशक तत्व निर्धारित किए गए हैं।
  •  यह संशोधन सहकारी समितियों को सामाजिक-आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण साधन मानते हुए उन्हें संवैधानिक मान्यता प्रदान करता है।​
  • संशोधन का पृष्ठभूमि
    • 97वां संशोधन अधिनियम दिसंबर 2011 में पारित हुआ और 15 फरवरी 2012 से प्रभावी हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य सहकारी समितियों को मजबूत बनाना था
    • जो कृषि, डेयरी, बैंकिंग और आवास जैसे क्षेत्रों में लाखों लोगों को लाभ पहुंचाती हैं। इससे पहले सहकारी समितियां केवल राज्य कानूनों के अधीन थीं
    • लेकिन इस संशोधन ने उन्हें मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 19(1)(c)) और DPSP दोनों में स्थान दिया।​
  • अनुच्छेद 43B का पाठ और अर्थ
    • अनुच्छेद 43B कहता है: "राज्य, सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कार्यप्रणाली, लोकतांत्रिक नियंत्रण, पेशेवर प्रबंधन और सदस्यों के पारस्परिक सहयोग के सिद्धांतों को बढ़ावा देने के प्रयास करेगा।
    • यह DPSP के भाग IV में सामाजिकistic सिद्धांतों की श्रृंखला में जुड़ता है, जो राज्य को कल्याणकारी नीतियां बनाने के लिए निर्देशित करता है।
    • अनुच्छेद मौलिक अधिकारों की तरह प्रवर्तनीय नहीं है, लेकिन नीति निर्माण में बाध्यकारी है।​
  • अन्य प्रावधान और प्रभाव
    • संशोधन ने भाग IXB (अनुच्छेद 243ZH से 243ZT) जोड़ा, जो सहकारी समितियों के निगमन, नियमन और समापन के लिए ढांचा प्रदान करता है।
    • अनुच्छेद 19(1)(c) में "या सहकारी समितियों" शब्द जोड़े गए, जिससे इन्हें मौलिक अधिकार बना दिया।
    • इससे राज्यों को सहकारिता कानून बनाने के लिए दिशानिर्देश मिले, जैसे बहु-राज्य सहकारी समितियों का नियमन।​
  • न्यायिक व्याख्या और चुनौतियां
    • सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में जूनीचालिया संग्राम सुरक्षित सहकारी समिति बनाम गुजरात राज्य के मामले में संशोधन के कुछ हिस्सों (भाग IXB के अनुच्छेद 243ZI को छोड़कर) को असंवैधानिक घोषित किया, क्योंकि राज्यों की विधायी शक्तियों का अतिक्रमण था।
    • फिर भी, अनुच्छेद 43B बरकरार है और सहकारिता को बढ़ावा देने वाली नीतियों का आधार बना हुआ है।
    • यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में सहायक रहा है।​

2. निम्नलिखित में से किस संवैधानिक संशोधन अधिनियम ने भारत में केंद्रशासित प्रदेशों का निर्माण किया है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) सातवां
Solution:
  • सातवां संशोधन (1956) द्वारा भाषायी आधार पर राज्यों का पुनर्गठन किया गया, जिसमें अगली तीन श्रेणियों में राज्यों के वर्गीकरण को समाप्त करते हुए राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में उन्हें विभाजित किया गया।
  • इनके अनुरूप केंद्र एवं राज्य की विधान पालिकाओं में सीटों को पुनर्व्यवस्थित किया गया।
  • संशोधन का ऐतिहासिक संदर्भ
    • 1950 के दशक में स्वतंत्र भारत में भाषाई राज्यों की मांग तेज हो गई थी, जिसके फलस्वरूप राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन हुआ।
    • सातवें संशोधन ने संविधान के भाग A, B, C और D राज्यों की पुरानी श्रेणियों को समाप्त कर दिया और राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों की नई संरचना स्थापित की।
    • इससे पहले संविधान में 'राज्य' की चार श्रेणियां थीं, लेकिन अब केवल 'राज्य' और 'केंद्रशासित प्रदेश' शब्दावली बची।
    • यह संशोधन 19 अक्टूबर 1956 को पारित हुआ और 1 नवंबर 1956 से प्रभावी हुआ।​
  • प्रमुख प्रावधान
    • अनुच्छेद 1 में संशोधन: भारत को 'राज्यों का संघ' घोषित किया गया, जिसमें राज्य और केंद्रशासित प्रदेश शामिल हुए।​
    • प्रथम अनुसूची में बदलाव: केंद्रशासित प्रदेशों की सूची जोड़ी गई, जैसे दिल्ली, अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप आदि।​
    • उच्च न्यायालयों का अधिकार क्षेत्र: केंद्रशासित प्रदेशों पर उच्च न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र का विस्तार।​
    • भाग VIII (अनुच्छेद 239-242): केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन के लिए राष्ट्रपति को नियम बनाने की शक्ति।​
  • केंद्रशासित प्रदेशों का महत्व
    • ये प्रदेश केंद्र सरकार के सीधे नियंत्रण में होते हैं, मुख्यतः रणनीतिक, प्रशासनिक या सुरक्षा कारणों से। उदाहरणस्वरूप, दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी होने से और चंडीगढ़ दो राज्यों की साझा राजधानी होने से।
    • वर्तमान में 8 केंद्रशासित प्रदेश हैं: अंडमान-निकोबार, चंडीगढ़, दादरा-नगर हवेली और दमन-दीव, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, लक्षद्वीप और पुडुचेरी।
    • बाद के संशोधनों जैसे 69वें (1991) ने दिल्ली को विशेष दर्जा दिया, लेकिन मूल निर्माण सातवें से ही हुआ।​

3. निम्नलिखित में से किस संवैधानिक संशोधन अधिनियम के द्वारा एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 3 दिसंबर, 2023 (I-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) 7वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम
Solution:
  • अनुच्छेद 153 के अनुसार, प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होता है, लेकिन सातवें संविधान संशोधन अधिनियम, 1956 से एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल भी नियुक्त किया जा सकता है।
  • भारतीय संविधान के सातवें संशोधन अधिनियम, 1956 ने एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त करने का प्रावधान किया।​
  • संशोधन का पृष्ठभूमि
    • स्वतंत्र भारत में भाषाई आधार पर राज्यों का पुनर्गठन होने से कई छोटे राज्य बने, जिससे प्रत्येक के लिए अलग राज्यपाल नियुक्ति का वित्तीय और प्रशासनिक बोझ बढ़ गया।
    • इस संशोधन ने अनुच्छेद 153 में संशोधन कर "एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों के लिए राज्यपाल नियुक्त किए जाने" की अनुमति दी, जिससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ी।​
  • अनुच्छेद 153 का महत्व
    • अनुच्छेद 153 मूल रूप से कहता है कि प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा, लेकिन सातवें संशोधन के बाद इसमें प्रावधान जोड़ा गया कि यह एक ही व्यक्ति को कई राज्यों का राज्यपाल बनाने से रोके नहीं।
    • राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 155 के तहत राज्यपाल की नियुक्ति होती है, और यह पद राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत रहता है।
    • इस बदलाव से छोटे राज्यों जैसे छोटा नागपुर या आसपास के क्षेत्रों में एक राज्यपाल कई राज्यों की जिम्मेदारी संभाल सकता है।​
  • अन्य प्रभाव और उदाहरण
    • इस संशोधन ने राज्यपाल के वेतन और भत्तों को भी राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित अनुपात में संबंधित राज्यों के बीच साझा करने का प्रावधान किया।
    • वर्तमान में कई उदाहरण हैं, जैसे एक राज्यपाल गुजरात और महाराष्ट्र दोनों के राज्यपाल रह चुके हैं। यह संघीय ढांचे को मजबूत बनाता है
    • हालांकि राज्यपाल की राजनीतिक तटस्थता पर बहस बनी रहती है।​
  • राज्यपाल की भूमिका
    • राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है, जो विधानमंडल सत्र बुलाने, विधेयक पर हस्ताक्षर करने और मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करता है।
    • अनुच्छेद 163-162 इनकी शक्तियों को परिभाषित करते हैं। यह संशोधन संघ और राज्यों के बीच समन्वय को आसान बनाता है।​

4. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा भारतीय संविधान में निम्नलिखित में से कौन-से नए शब्द जोड़े गए थे? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

A. समाजवादी

B. अखंडता

C. भाईचारा

D. धर्मनिरपेक्ष

E. समानता

Correct Answer: (e) केवल A & B
Solution:
  • प्रस्तावना में समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता शब्द 42वें संविधान संशोधन अधिनियम (1976) की धारा 2 द्वारा जोड़े गए थे।
  • उल्लेखनीय है कि भारतीय संविधान में पंथनिरपेक्ष शब्द का उल्लेख किया गया है न कि धर्मनिरपेक्ष शब्द का।
  • संशोधन का परिचय
    • यह संशोधन 18 दिसंबर 1976 को लागू हुआ और इसे "लघु संविधान" कहा जाता है क्योंकि इसने संविधान के 59 अनुच्छेदों में बदलाव किया।
    • इंदिरा गांधी सरकार द्वारा आपातकाल के दौरान पारित, इसका उद्देश्य समाजवादी लक्ष्यों को मजबूत करना और केंद्र की शक्तियों को बढ़ाना था।
    • प्रस्तावना मूल रूप से "संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य" थी, जिसे "संप्रभु समाजवादी धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य" तथा "राष्ट्र की एकता" को "राष्ट्र की एकता और अखंडता" में बदला गया।​
  • नए शब्दों का अर्थ
    • समाजवादी: आर्थिक समानता और संसाधनों के समान वितरण पर जोर, निजी संपत्ति पर राज्य नियंत्रण को वैध बनाता है।
    • धर्मनिरपेक्ष: राज्य का किसी धर्म से तटस्थ रहना, सभी धर्मों के प्रति समान व्यवहार सुनिश्चित करता है।
    • अखंडता: राष्ट्र की क्षेत्रीय और भावनात्मक एकता को मजबूत करने के लिए जोड़ा गया।​
  • अन्य प्रमुख बदलाव
    • इसने मौलिक कर्तव्यों को अनुच्छेद 51A में जोड़ा, राज्य नीति के निदेशक सिद्धांतों में पर्यावरण संरक्षण (अनुच्छेद 48A) और समान न्याय (39A) शामिल किए।
    • न्यायपालिका की शक्ति सीमित की गई और संसद को संविधान संशोधन में असीमित शक्ति दी, हालांकि 44वें संशोधन ने कुछ उलट दिया।​
  • ऐतिहासिक संदर्भ
    • आपातकालीन शक्तियों के दुरुपयोग के आरोपों के बीच यह संशोधन विवादास्पद रहा।
    • सुप्रीम कोर्ट ने मूल संरचना सिद्धांत के तहत कुछ प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित किया। फिर भी, ये शब्द आज भी संविधान का अभिन्न अंग हैं।​

5. निम्नलिखित में से किस संविधान संशोधन अधिनियम ने अनुच्छेद 38 में संशोधन किया, जिसे राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों के तहत गिना गया और जिसने राज्य को आय, स्थिति, सुविधाओं और अवसरों में असमनताओ को कम करने का निर्देश ' दिया ? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) 44
Solution:
  • 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 ने अनुच्छेद 38 में संशोधन किया, जिसे राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों के तहत गिना गया और जिसने 'राज्य को आय, स्थिति, सुविधाओं और अवसरों में असमानताओं को कम करने का निर्देश दिया।
  • संशोधन का ऐतिहासिक संदर्भ
    • यह संशोधन जनता पार्टी सरकार द्वारा 1977 के आम चुनाव के बाद लाया गया, जो 1975-77 के आपातकाल के दौरान 42वें संशोधन के कई प्रावधानों को सुधारने के उद्देश्य से था।
    • अधिनियम 20 दिसंबर 1978 को पारित हुआ और मुख्य रूप से मौलिक अधिकारों को मजबूत करने, आपातकालीन प्रावधानों को सीमित करने तथा राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों को समृद्ध करने पर केंद्रित था।
    • अनुच्छेद 38 का संशोधन राज्य को सामाजिक-आर्थिक न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में अधिक स्पष्ट जिम्मेदारी सौंपता है।​
  • अनुच्छेद 38 में किए गए बदलाव
    • मूल अनुच्छेद 38 राज्य को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय वाली व्यवस्था स्थापित करने का निर्देश देता था।
    • 44वें संशोधन ने उप-खंड (2) जोड़ा, जिसमें राज्य को विशेष रूप से आय की असमानताओं को कम करने तथा व्यक्तियों व समूहों (क्षेत्रों और व्यवसायों के आधार पर) के बीच प्रतिष्ठा, सुविधाओं और अवसरों की असमानताओं को समाप्त करने का प्रयास करने का आदेश दिया गया।
    • यह संशोधन DPSP के समाजवादी चरित्र को मजबूत करता है, जो भाग IV (अनुच्छेद 36-51) का हिस्सा है।​
  • अन्य प्रमुख प्रावधान
    • संपत्ति का अधिकार (अनुच्छेद 19(1)(f) और 31) को मौलिक अधिकारों से हटाकर अनुच्छेद 300A के तहत विधिक अधिकार बनाया गया।
    • लोकसभा और विधानसभाओं का कार्यकाल 6 से घटाकर 5 वर्ष किया गया (अनुच्छेद 83, 172)।
    • राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) केवल 'सशस्त्र विद्रोह' पर घोषित हो सकेगा, न कि 'आंतरिक अशांति' पर; संसदीय मंजूरी 1 माह में अनिवार्य।
    • अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) की अवधि सीमित तथा न्यायिक समीक्षा योग्य बनाया गया।​
  • महत्व और प्रभाव
    • यह संशोधन संविधान को आपातकालीन दुरुपयोग से बचाने वाला माना जाता है, जो लोकतंत्र को मजबूत करता है।
    • अनुच्छेद 38(2) ने राज्य की कल्याणकारी भूमिका को विस्तार दिया, जो बाद में नीतियों जैसे गरीबी हटाओ तथा समावेशी विकास में परिलक्षित हुआ।
    • न्यायपालिका ने इसे मौलिक अधिकारों के साथ सामंजस्य स्थापित करने में उपयोग किया।

6. निम्नलिखित में से किस संवैधानिक संशोधन अधिनियम द्वारा भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्यों को जोड़ा गया? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (II-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (III-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) 42वें
Solution:
  • भारतीय संविधान के भाग 4क के तहत अनुच्छेद 51क के अंतर्गत मूल कर्तव्यों का प्रावधान है।
  • स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा मूल कर्तव्यों को संविधान में जोड़ा गया है।
  • भारतीय संविधान मूल रूप से केवल मौलिक अधिकारों पर केंद्रित था, लेकिन 1976 में इंदिरा गांधी सरकार के दौरान स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों पर मौलिक कर्तव्यों को शामिल करने का निर्णय लिया गया।
  • मौलिक कर्तव्यों की सूची
  • अनुच्छेद 51A में वर्णित मुख्य कर्तव्य निम्न हैं:
    • संविधान का पालन करना और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज व राष्ट्रगान का सम्मान करना।
    • स्वतंत्रता संग्राम के उच्च आदर्शों को जीवंत रखना।
    • भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करना।
    • देश की रक्षा करना और राष्ट्र सेवा के आह्वान पर योगदान देना।
    • सभी भारतीयों में समरसता की भावना विकसित करना तथा महिलाओं के प्रति असम्मानजनक प्रथाओं का त्याग करना।​
    • ये कर्तव्य गैर-न्यायसंगत हैं, अर्थात् इन्हें अदालत द्वारा सीधे लागू नहीं किया जा सकता, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें मौलिक अधिकारों के समकक्ष महत्वपूर्ण माना है।​
  • बाद के संशोधन
    • 2002 के 86वें संशोधन ने 11वां कर्तव्य जोड़ा: 6 से 14 वर्ष के बच्चे को शिक्षा का अवसर उपलब्ध कराना।
    • 44वां संशोधन (1978) ने 42वें संशोधन के कुछ प्रावधानों को संशोधित किया, लेकिन मौलिक कर्तव्यों को अप्रभावित रखा।
    • ये कर्तव्य नागरिकों के नैतिक दायित्वों को मजबूत करते हैं।​

7. किस भारतीय मंत्रालय ने जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन विधेयक, 2019 पेश किया था? [MTS (T-I) 15 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) गृह मंत्रालय
Solution:
  • गृह मंत्रालय ने जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन विधेयक, 2019 पेश किया था। यह विधेयक जम्मू और कश्मीर राज्य को पुनर्गठित करता है-
  • (i) विधान सभा के साथ जम्मू और कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश
  • (ii) बिना विधानसभा वाला केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख ।
  • पेश करने का विवरण
    • 5 अगस्त 2019 को गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में इस विधेयक को प्रस्तुत किया।
    • यह विधेयक जम्मू और कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू और कश्मीर (विधानसभा सहित) तथा लद्दाख (विधानसभा रहित)—में विभाजित करने का प्रावधान करता था।
    • उसी दिन राज्यसभा में पारित होने के बाद 6 अगस्त को लोकसभा ने इसे स्वीकृति दी, और 9 अगस्त 2019 को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने अधिनियम के रूप में मंजूरी प्रदान की।​
  • प्रमुख प्रावधान
    • विधेयक ने अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के बाद राज्य की संरचना में आमूलचूल परिवर्तन किया।
    • जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा का कार्यकाल 5 वर्ष रखा गया, जबकि लेफ्टिनेंट गवर्नर को महत्वपूर्ण शक्तियां दी गईं।
    • संसद को इस क्षेत्र के सभी मामलों पर कानून बनाने का अधिकार प्राप्त हुआ, जिसमें राज्य सूची के विषय (पुलिस और लोक व्यवस्था को छोड़कर) शामिल थे।
    • उच्च न्यायालय दोनों क्षेत्रों के लिए साझा रहा।​
  • राजनीतिक संदर्भ
    • यह कदम मोदी सरकार की 2019 की महत्वपूर्ण पहल थी, जो क्षेत्र में एकीकरण और विकास को बढ़ावा देने का दावा करती थी।
    • विपक्ष ने इसे असंवैधानिक बताया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में इसे वैध ठहराया।
    • गृह मंत्रालय ने विधेयक का प्रारूप तैयार किया और संसदीय प्रक्रिया का संचालन किया।​​

8. तमिलनाडु राज्य के संबंध में, संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 2022 तमिलनाडु में अनुसूचित जनजातियों की सूची में ....... और कुरीविकरन (Kurivikkaran) समुदायों को शामिल करेगा। [MTS (T-I) 08 सितंबर, 2023 (III-पाली), MTS (T-I) 01 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) नारिकोरावन
Solution:
  • तमिलनाडु राज्य के संबंध में संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2022 तमिलनाडु में अनुसूचित जनजातियों की सूची में नारिकोरावन (Nari- koravan) और कुरीविकरन (Kurivikkaran) समुदायों को शामिल करेगा।
  • इन समुदायों को शामिल करने का उद्देश्य उन्हें भारत के संविधान के अंतर्गत अनुसूचित जनजातियों को उपलब्ध लाभ और सुरक्षा प्रदान करना है।
  • यह संशोधन देश में विविध जनजातीय समुदायों को मान्यता देने और उन्हें समर्थन देने के लिए चल रहे प्रयासों का हिस्सा है।
  • अनुसूचित जनजातियों को शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में आरक्षण सहित विभिन्न सकारात्मक कार्रवाई के उपाय प्रदान किए जाते हैं
  • ताकि उनका विकास सुनिश्चित हो सके और उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल किया जा सके।
    Other Information
  •  भारतीय संविधान विभिन्न अनुच्छेदों और अनुसूचियों के माध्यम से अनुसूचित जनजातियों की मान्यता और संरक्षण के लिए एक विस्तृत रूपरेखा प्रदान करता है।
  • संविधान का अनुच्छेद 342 अनुसूचित जनजातियों के विनिर्देशन से संबंधित है।
    भारत के राष्ट्रपति को संबंधित राज्य के राज्यपाल के परामर्श से अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल की जाने वाली जनजातियों या जनजातीय समुदायों को निर्दिष्ट करने का अधिकार है।
  •  सामाजिक-आर्थिक मानदंडों और राज्य सरकारों तथा अन्य हितधारकों की सिफारिशों के आधार पर समुदायों को शामिल करने या बहिष्कृत करने के लिए सूची में समय-समय पर संशोधन किए जाते हैं।
  •  किसी समुदाय को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल करने से उसके सदस्यों को उनके सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए विभिन्न संवैधानिक सुरक्षा और कल्याणकारी उपायों का लाभ उठाने की सुविधा मिलती है।

9. 1978 के 44वें संशोधन अधिनियम द्वारा भारतीय संविधान में मूल सूची के कितने निर्देशक तत्वों में संशोधन किया गया था ? [Phase-XI 27 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) एक
Solution:
  • 44वें संविधान संशोधन, 1978 द्वारा एक नीति निर्देशक सिद्धांत अनुच्छेद 38(2) जोड़ा गया।
  • संशोधित निर्देशक तत्व
    • यह संशोधन अनुच्छेद 38 में किया गया, जो मूल रूप से राज्य को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करने का निर्देश देता था।
    • 44वें संशोधन ने अनुच्छेद 38 में एक नया खंड (2) जोड़ा, जिसमें राज्य को आय में आर्थिक असमानताओं को कम करने तथा व्यक्तियों और समूहों के बीच स्थिति, सुविधाओं एवं अवसरों की असमानताओं को समाप्त करने का प्रयास करने का निर्देश दिया गया।
    • यह संशोधन 42वें संशोधन के प्रभावों को सुधारने के उद्देश्य से लाया गया था, जो आपातकालीन प्रावधानों को मजबूत करने के बाद संतुलन बहाल करने का प्रयास था।​
  • ऐतिहासिक संदर्भ
    • 44वां संशोधन जनता पार्टी सरकार द्वारा 1978 में पारित किया गया, मुख्यतः 1975-77 के आपातकाल के दौरान 42वें संशोधन से हुए बदलावों को उलटने के लिए।
    • DPSP की मूल सूची (अनुच्छेद 36-51) में अन्य कोई संशोधन नहीं हुआ; केवल अनुच्छेद 38 को विस्तारित किया गया।
    • इससे निर्देशक सिद्धांतों को अधिक समावेशी बनाया गया, लेकिन मौलिक अधिकारों पर इसका प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ा।​
  • अन्य प्रमुख बदलाव
    • हालांकि प्रश्न DPSP पर केंद्रित है, अधिनियम ने संपत्ति के अधिकार (अनुच्छेद 19(1)(f) और 31) को मौलिक अधिकारों से हटाकर अनुच्छेद 300A के तहत विधिक अधिकार बना दिया।
    • राष्ट्रपति की शक्तियों को मंत्रिपरिषद की सलाह बाध्यकारी बनाया गया और अनुच्छेद 368 में बुनियादी ढांचे के संशोधन के लिए जनमत संग्रह की व्यवस्था जोड़ी गई।
    • ये बदलाव संविधान को अधिक लोकतांत्रिक बनाने के उद्देश्य से थे।

10. संविधान की 'मूल संरचना' को प्रभावित किए बिना संविधान के किसी भी भाग में कौन संशोधन कर सकता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) संसद
Solution:
  • भारतीय संसद संविधान की 'मूल संरचना' को प्रभावित किए बिना संविधान के किसी भी भाग में (अनुच्छेद 368) संशोधन कर सकती है।
  • संशोधन की प्रक्रिया
    • संविधान संशोधन विधेयक को संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है।
    • इसे दोनों सदनों में कुल सदस्यता के बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से पारित करना होता है।
    • कुछ मामलों में, जैसे संघीय ढांचे से जुड़े संशोधनों के लिए, कम से कम आधे राज्यों की विधानसभाओं से अनुमोदन आवश्यक होता है
    • उसके बाद राष्ट्रपति की सहमति से यह प्रभावी हो जाता है।​​
  • मूल संरचना सिद्धांत
    • केशवानंद भारती मामले (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने स्थापित किया कि संसद की संशोधन शक्ति असीमित नहीं है
    • संविधान की मूल संरचना—जैसे लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, संघीय ढांचा, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, मौलिक अधिकारों का मूल स्वरूप आदि—को नष्ट या परिवर्तित नहीं किया जा सकता।
    • इस सिद्धांत ने गोलकनाथ मामले (1967) के बाद संसद की शक्ति पर सीमा लगाई, जहां मौलिक अधिकारों को अस्पृश्य घोषित किया गया था
    • लेकिन 24वें संशोधन (1971) ने इसे संशोधित किया।​
  • संशोधन के प्रकार
    • साधारण बहुमत वाले: नए राज्यों का गठन, सीमाओं में बदलाव आदि, जो अनुच्छेद 368 से बाहर हैं।
    • विशेष बहुमत वाले: अधिकांश संशोधन, जैसे मौलिक अधिकारों में सीमित बदलाव।
    • विशेष बहुमत + राज्यों का अनुमोदन: राष्ट्रपति चुनाव, राज्यसभा की शक्तियां आदि। राष्ट्रपति को विधेयक पर वीटो का अधिकार नहीं है।​
    • यह प्रक्रिया संविधान को लचीला बनाती है, लेकिन न्यायिक समीक्षा सुनिश्चित करती है कि मूल ढांचा सुरक्षित रहे।