संविधान संशोधन

Total Questions: 35

21. भारत के संविधान का पहला संशोधन अधिनियम ....... में आया था। [CGL (T-I) 18 अप्रैल, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) 1951
Solution:
  • भारतीय संविधान में पहला संशोधन वर्ष 1951 में किया गया था। इस संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा अनुच्छेद 15, 19, 85, 87, 174, 176, 341, 342, 372, 376 में संशोधन किए गए तथा दो नए अनुच्छेद 31 (क) और 31 (ख) को जोड़ा गया और 9वीं अनुसूची को भी संविधान में जोड़ा गया।
  • पारित होने की प्रक्रिया
    • यह संशोधन विधेयक 10 मई 1951 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा अंतरिम संसद (प्रावधान संसद) में पेश किया गया
    • जो संविधान सभा का ही विस्तार था।
    • संसद द्वारा 2 जून 1951 को पारित होने के बाद, राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 18 जून 1951 को इसे स्वीकृति प्रदान की, और उसी दिन यह प्रवर्तित हो गया।
    • डॉ. बी.आर. अम्बेडकर जैसे कानून मंत्री की असहमति के बावजूद, यह जल्दबाजी में पारित हुआ ताकि अदालती चुनौतियों का सामना किया जा सके।​
  • प्रमुख कारण और पृष्ठभूमि
    • पहला संशोधन मुख्य रूप से सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों के जवाब में लाया गया
    • जैसे मद्रास राज्य बनाम चंपक दोराइराजन (1951) जहां जाति-आधारित आरक्षण को असंवैधानिक ठहराया गया
    • रोमेश थापर मामले में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को व्यापक व्याख्या दी गई।
    • इसके अलावा, बिहार भूमि सुधार अधिनियम-1950 जैसे कानूनों को अनुच्छेद 14, 19 और 31 के उल्लंघन में असंवैधानिक घोषित करने से जमींदारी उन्मूलन और भूमि पुनर्वितरण कार्यक्रम प्रभावित हो रहे थे।
    • सरकार ने इसे सामाजिक-आर्थिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक माना।​
  • मुख्य प्रावधान
    • अनुच्छेद 15(4) जोड़ा गया, जो राज्य को SC/ST और सामाजिक-शैक्षिक पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रावधान (आरक्षण) करने की अनुमति देता है।​
    • अनुच्छेद 19(2) में संशोधन कर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर "सार्वजनिक व्यवस्था", "विदेशी राज्यों से मैत्रीपूर्ण संबंध" और "अपराध उकसाना" जैसे नए प्रतिबंध जोड़े गए।​
    • अनुच्छेद 31A और 31B तथा नौवीं अनुसूची का सृजन, जो भूमि सुधार कानूनों को मौलिक अधिकारों की न्यायिक समीक्षा से बचाती है।​
  • दीर्घकालिक प्रभाव
    • शंकरी प्रसाद सिंह देव बनाम भारत संघ (1951) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इसकी वैधता को बरकरार रखा
    • स्थापित करते हुए कि संसद संविधान संशोधन कर मौलिक अधिकारों को सीमित कर सकती है।
    • नौवीं अनुसूची में समय के साथ 284 कानून जोड़े गए, लेकिन बाद के फैसलों जैसे इरावुम्मन थम्मई (2010) ने इसकी सीमाएं तय कीं।
    • कुल मिलाकर, यह संशोधन संविधान की लचीलापन को रेखांकित करता है और आज भी भूमि सुधार व आरक्षण बहसों में प्रासंगिक है।

22. भारतीय संविधान के निम्नलिखित में से किस संवैधानिक संशोधन अधिनियम ने लोक सभा और राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचन के लिए मतदान की आयु 21 से घटाकर 18 कर दी है? [CHSL (T-I) 16 मार्च, 2023 (II-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 29 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) 61वां
Solution:
  • भारतीय संविधान के 61वें संशोधन अधिनियम, 1988 द्वारा अनुच्छेद 326 में संशोधन करके लोक सभा
  • राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचन के लिए मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की गई है।
  •  लोकसभा और राज्यों की विधान सभाओं के चुनावों के लिए मतदान की आयु 21 से घटाकर 18 करने वाला संवैधानिक संशोधन अधिनियम 1988 का 61वां संविधान संशोधन अधिनियम है।
  •  इस संशोधन ने भारत में मतदान की आयु को कम कर दिया, इसे और अधिक समावेशी बना दिया
  • आबादी के एक बड़े वर्ग को चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति दी।
    Other Information
  • संवैधानिक संशोधन अधिनियमों को आम तौर पर समाज की बदलती जरूरतों और आकांक्षाओं के लिए एक संविधान को अपनाने के लिए महत्वपूर्ण उपकरण माना जाता है।
  • हालांकि, संवैधानिक परिवर्तनों के महत्व और संभावित लंबे समय तक चलने वाले प्रभावों के कारण
  • उन्हें अक्सर सावधानीपूर्वक विचार-विमर्श, सार्वजनिक परामर्श और व्यापक सहमति की आवश्यकता होती है
  • ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे वास्तव में लोगों की इच्छा को प्रतिबिंबित करते हैं और संवैधानिक ढांचे की अखंडता को बनाए रखते हैं।
  • पृष्ठभूमि और उद्देश्य
    • स्वतंत्र भारत में शुरू में मतदान की आयु 21 वर्ष निर्धारित थी, लेकिन युवाओं की बढ़ती संख्या और उनकी राजनीतिक भागीदारी की मांग को देखते हुए इस बदलाव की आवश्यकता महसूस हुई।
    • तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व वाली सरकार ने 1988 में इस विधेयक को पेश किया
    • जो युवा मतदाताओं को लोकतंत्र में अधिक प्रतिनिधित्व प्रदान करने का लक्ष्य रखता था।
    • इससे लोकसभा और विधानसभाओं में युवा वर्ग का प्रभाव बढ़ा, जिससे नीतियां अधिक समावेशी बनीं।
  • संशोधन की मुख्य विशेषताएं
    • अनुच्छेद 326 का संशोधन: इस अनुच्छेद ने वयस्क मताधिकार को परिभाषित किया, जहां "वयस्क" शब्द को 18 वर्ष से जोड़ा गया।
    • लागू होने की तिथि: 20 दिसंबर 1988 को संसद से पारित, लेकिन 28 मार्च 1989 से क्रियान्वित।
    • प्रभाव क्षेत्र: केवल लोकसभा और राज्य विधानसभाओं तक सीमित; राज्यसभा या राष्ट्रपति चुनावों पर असर नहीं।
  • ऐतिहासिक संदर्भ
    • यह संशोधन 1980 के दशक में युवा आंदोलनों और जनसंख्या वृद्धि के संदर्भ में आया, जब 18-21 वर्ष के युवा मताधिकार से वंचित थे।
    • इससे भारत की मतदाता सूची में लाखों नाम जुड़े, जो लोकतंत्र को व्यापक बनाया। बाद में, लोकसभा चुनावों में इसकी सफलता देखी गई।

23. भारत के नागरिकों के लिए मतदान की न्यूनतम आयु क्या है? [MTS (T-I) 01 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) 18 वर्ष
Solution:
  •  भारतीय संविधान के 61वें संशोधन अधिनियम, 1988 द्वारा अनुच्छेद 326 में संशोधन करके लोक सभा राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचन के लिए मतदान की आयु 21 वर्ष   से घटाकर 18 वर्ष की गई है।
  •  संशोधन का उद्देश्य देश की चुनावी प्रक्रिया में युवाओं की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करना था।
  •  यह भारतीय सरकार द्वारा युवा नागरिकों की परिपक्वता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में योगदान देने की क्षमता को मान्यता देने का प्रतीक है।
    Other Information
  • भारत के संविधान के 61वें संशोधन द्वारा मतदान आयु कम कर दी गई थी, जिसे 1988 में अधिनियमित किया गया था।
  •  संशोधन से पहले 1950 में अपनाए गए मूल संविधान के अनुसार न्यूनतम मतदान आयु 21 वर्ष थी।
  •  यह परिवर्तन अधिक युवा लोगों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने और यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया था
  •  देश के युवाओं को देश के शासन में अपनी बात रखने का अधिकार हो।
  •  भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, और युवा मतदाताओं को शामिल करने से चुनावी प्रक्रिया की मजबूती और प्रतिनिधित्व में वृद्धि होती है।
  • इतिहास
    • मतदान की आयु पहले 21 वर्ष थी, जिसे 1988 के 61वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा घटाकर 18 वर्ष किया गया।
    • यह संशोधन 28 मार्च 1989 से प्रभावी हुआ और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 में बदलाव लाया। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 में यह प्रावधान है
    • जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों को वयस्क मताधिकार पर आधारित बनाता है।​
  • पात्रता शर्तें
    • 18 वर्ष पूरा करने वाले भारतीय नागरिक, जो जाति, धर्म, लिंग या अन्य आधार पर अयोग्य न हों, मतदान कर सकते हैं।
    • मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए निर्वाचन आयोग के नियमों का पालन आवश्यक है। कोई साक्षरता या धन संबंधी बाधा नहीं है।​
  • वर्तमान स्थिति
    • 2025 तक यह आयु 18 वर्ष ही बनी हुई है, हालांकि कुछ प्रस्तावों में इसे 16 या 17 वर्ष करने की चर्चा हुई लेकिन लागू नहीं।
    • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों ने 16 वर्ष की गई, पर भारत में कोई बदलाव नहीं। युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।

24. भारत के संविधान में निम्नलिखित में से कौन-सा संशोधन भाषा के आधार पर भारतीय राज्यों के पुनर्गठन को संवैधानिक रूप से बदलने के प्राथमिक उद्देश्य के साथ पारित किया गया था? [CGL (T-I) 13 अप्रैल, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) सातवां संशोधन
Solution:
  • प्रश्नानुसार, भारत के संविधान में सातवां संशोधन (वर्ष 1956) राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों को लागू करने और परिणामिक परिवर्तनों को शामिल करने के उद्देश्य से किया गया था।
  • इस संशोधन को भाषा के आधार पर भारतीय राज्यों के पुनर्गठन को संवैधानिक रूप से बदलने के प्राथमिक उद्देश्य के साथ पारित किया गया था।
  • पृष्ठभूमि
    • स्वतंत्रता के बाद भारत में राज्यों की व्यवस्था अस्थायी थी, जिसमें भाग A, B, C और D राज्यों का वर्गीकरण था।
    • भाषाई आधार पर राज्यों की मांग तेज हुई, विशेषकर आंध्र प्रदेश (1953) के गठन के बाद, जिसने अन्य क्षेत्रों को प्रेरित किया।
    • राज्य पुनर्गठन आयोग (फजल अली आयोग, 1953) ने भाषा को प्रमुख आधार माना, लेकिन 'एक भाषा-एक राज्य' को अस्वीकार किया।​
  • संशोधन का उद्देश्य
    • सातवें संशोधन अधिनियम ने संविधान की पहली और चौथी अनुसूची में बदलाव कर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की नई सूची बनाई।
    • यह राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के साथ प्रभावी हुआ, जिसने 14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश बनाए।
    • इसका मुख्य लक्ष्य भाषाई एकरूपता से प्रशासनिक दक्षता, सांस्कृतिक समायोजन और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना था।​
  • प्रभाव और महत्व
    • इसने पुरानी वर्गीकरण प्रणाली को समाप्त कर संघीय ढांचे को भाषाई विविधता के अनुरूप बनाया। भाषाई पुनर्गठन ने क्षेत्रीय दलों को बढ़ावा दिया
    • विविधता में एकता के सिद्धांत को साकार किया, हालांकि बाद में नई मांगें (जैसे तेलंगाना) उठीं। 2025 तक यह आधार नए राज्यों के गठन में प्रासंगिक बना हुआ है।​
    • भारत के संविधान में सातवां संशोधन भाषा के आधार पर भारतीय राज्यों के पुनर्गठन को संवैधानिक रूप से सांकेतिक शब्दों में बदलने के प्राथमिक उद्देश्य के साथ पारित किया गया था।
    •  भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के संबंध में राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए भारतीय संविधान के 7वें संशोधन की आवश्यकता थी।
    •  इसने A, B, C और D श्रेणियों में राज्यों के वर्गीकरण को समाप्त करने का मार्ग प्रशस्त किया और केंद्र शासित प्रदेशों की शुरुआत की।
    • भारत के संविधान का दसवां संशोधन, जिसे आधिकारिक तौर पर संविधान (दसवां संशोधन) अधिनियम, 1961 के रूप में जाना जाता है
    • संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन करके दादरा और नगर हवेली को भारत के सातवें केंद्र शासित प्रदेश के रूप में शामिल किया।

25. भारतीय संविधान के नवासीवें संशोधन अधिनियम, 2003 ने निम्नलिखित में से किस आयोग की स्थापना की थी? [CHSL (T-I) 17 मार्च, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग
Solution:
  • भारतीय संविधान के 89वें संशोधन अधिनियम, 2003 ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की स्थापना की थी।
  • आयोग की स्थापना अनुसूचित जनजातियों के हितों की रक्षा एवं उनके विकास को सुनिश्चित करने के लिए की गई थी।
  • आयोग के पास निम्नलिखित शक्तियां और कार्य हैं:
    •  संविधान और अन्य कानूनों के तहत अनुसूचित जनजातियों के लिए प्रदान किए गए सुरक्षा उपायों के कार्यान्वयन की जांच और निगरानी करना।
    •  अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों और सुरक्षा उपायों से वंचित होने की विशिष्ट शिकायतों की जांच करना।
    •  अनुसूचित जनजातियों के कल्याण से संबंधित सभी मामलों पर केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को सलाह देना।
    •  अनुसूचित जनजातियों के संरक्षण, विकास और उन्नति के लिए सिफारिशें करना।
    •  इसकी गतिविधियों और निष्कर्षों पर रिपोर्ट प्रकाशित करना।
    •  आयोग का प्रमुख एक अध्यक्ष होता है जिसे भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है।
    •  अध्यक्ष की सहायता के लिए एक उपाध्यक्ष और कुछ सदस्य होते हैं।
    •  आयोग का मुख्यालय नई दिल्ली में है और देश के विभिन्न हिस्सों में इसके क्षेत्रीय कार्यालय हैं।
  • अधिनियम का उद्देश्य
    • जिससे पहले एकीकृत राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग को दो अलग आयोगों में विभाजित किया गया:
    • राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST).​
    • यह विभाजन अनुसूचित जनजातियों की विशिष्ट समस्याओं पर अधिक केंद्रित ध्यान देने के लिए किया गया
    • जिसमें उनकी सुरक्षा उपायों का कार्यान्वयन, शिकायतों की जांच और सामाजिक-आर्थिक विकास शामिल है.​
    • आयोग 19 फरवरी 2004 से पूर्ण रूप से कार्यरत है, और इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है.​
  • आयोग की संरचना
    • NCST में एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और तीन अन्य सदस्य होते हैं, जिनकी नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है.​
    • आयोग के पास नागरिक अदालतों के समान शक्तियां हैं, जैसे दस्तावेज मांगना, गवाहों को बुलाना और जांच करना.​
    • देशभर में क्षेत्रीय कार्यालय होने से स्थानीय स्तर पर अनुसूचित जनजातियों की समस्याओं का समाधान संभव होता है.​
  • प्रमुख कार्य और शक्तियां
    • आयोग संविधान, कानूनों या सरकारी आदेशों के तहत अनुसूचित जनजातियों के लिए बने सुरक्षा प्रावधानों की निगरानी करता है.​
    • यह विशिष्ट शिकायतों की जांच करता है, जहां जनजातियों के अधिकारों का हनन होता है, और योजना प्रक्रिया में सलाह देता है.​
    • वार्षिक रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपी जाती है, जो संसद में प्रस्तुत की जाती है, जिससे नीतिगत सुधार सुनिश्चित होते हैं.

26. भारतीय संविधान का निम्नलिखित में से कौन-सा संवैधानिक संशोधन एक राज्य के रूप में सिक्किम के गठन से संबंधित है? [CHSL (T-I) 20 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) 36वां
Solution:
  • भारतीय संविधान का 36वां संवैधानिक संशोधन एक राज्य के रूप में सिक्किम के गठन से संबंधित है।
  • इस संविधान संशोधन के द्वारा सिक्किम को भारतीय संघ का एक पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया तथा सिक्किम को राज्य सभा और लोक सभा में एक-एक सीट आवंटित किया गया।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • सिक्किम 19वीं सदी से ब्रिटिश संरक्षण के अधीन था और 1947 में स्वतंत्र भारत के साथ संधि के तहत एक संरक्षित राज्य बना रहा।
    • 1970 के दशक में राजनीतिक अस्थिरता और लोकतांत्रिक आंदोलनों के कारण सिक्किम के चोग्याल (राजा) की शक्ति कम हुई
    • जिसके फलस्वरूप 1974-75 में भारत के साथ उसके एकीकरण की प्रक्रिया तेज हुई।
    • पहले 35वें संशोधन (1974) ने सिक्किम को "सहयोगी राज्य" (Associate State) का दर्जा दिया, लेकिन 36वें संशोधन ने इसे पूर्ण राज्य बना दिया।​
  • 36वें संशोधन की मुख्य विशेषताएं
    • यह संशोधन 16 मई 1975 को पारित हुआ और सिक्किम को संविधान की प्रथम अनुसूची में 22वें राज्य के रूप में शामिल किया।
    • अनुच्छेद 371F जोड़ा गया, जो सिक्किम की विशेष परिस्थितियों (जैसे पुरानी राजशाही कानूनों का संरक्षण और विधानसभा चुनावों में जनजातीय प्रतिनिधित्व) को मान्यता देता है।
    • साथ ही, अनुच्छेद 80 और 81 में संशोधन कर लोकसभा में 1 और राज्यसभा में 1 सीट सिक्किम के लिए आरक्षित की गई।​
  • प्रक्रिया और प्रभाव
    • 1975 में सिक्किम विधानसभा ने पूर्ण राज्यत्व की मांग की और एक जनमत संग्रह (ओपिनियन पोल) में 97% समर्थन मिल
    • जिसके आधार पर यह संशोधन लागू हुआ। इससे सिक्किम भारत का अविभाज्य हिस्सा बना, चोग्याल की शक्ति समाप्त हुई
    • राज्यपाल-प्रधानमंत्री शासन व्यवस्था लागू हुई।
    • सुप्रीम कोर्ट ने सिक्किम राज्य बनाम सुरेंद्र प्रसाद शर्मा (1994) में इसकी वैधता की पुष्टि की।

27. भारतीय संविधान के 42वें संविधान संशोधन द्वारा निम्नलिखित में से कौन-सा सिद्धांत शामिल किया गया था? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) पर्यावरण की रक्षा और सुधार और वनों और वन्य जीवन की रक्षा करना।
Solution:
  • भारतीय संविधान के 42वें संविधान संशोधन द्वारा राज्य की नीति के निदेशक तत्वों में अनुच्छेद 48क को जोड़ा गया
  • जिसमें पर्यावरण की रक्षा और संवर्धन एवं वनों तथा वन्य जीवों की रक्षा करना है।
  • यह संशोधन आपातकाल के दौरान पारित हुआ और इसे "मिनी संविधान" कहा जाता है क्योंकि इसने 59 अनुच्छेदों में बदलाव किए।​
  • ऐतिहासिक संदर्भ
    • 42वां संशोधन 18 दिसंबर 1976 को संसद द्वारा पारित हुआ, जब इंदिरा गांधी की सरकार आपातकाल (1975-77) चला रही थी।
    • इसका उद्देश्य राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों को मजबूत करना, संसद की शक्तियों को बढ़ाना और न्यायपालिका की समीक्षा को सीमित करना था।
    • इसने अनुच्छेद 39A (निःशुल्क कानूनी सहायता), 43A (श्रमिक भागीदारी) और 48A (पर्यावरण संरक्षण) जैसे नए निर्देशक सिद्धांत जोड़े।​
  • प्रमुख सिद्धांत और प्रावधान
    • प्रस्तावना में संशोधन: "समाजवादी", "धर्मनिरपेक्ष" और "अखंडता" जोड़कर संविधान के मूल चरित्र को परिभाषित किया
    • जो पहले निहित थे लेकिन स्पष्ट रूप से नहीं लिखे।​
    • मौलिक कर्तव्य: अनुच्छेद 51A में 10 कर्तव्य जोड़े, जैसे पर्यावरण संरक्षण, समरसता बढ़ाना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना।​
    • नीति निर्देशक सिद्धांतों का विस्तार: भाग IV को मजबूत बनाया, जिसे कुछ मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 14, 19, 31) पर प्राथमिकता दी गई (बाद में मिनर्वा मिल्स केस, 1980 में असंवैधानिक घोषित)।​
  • न्यायपालिका और संघीय प्रभाव
    • संशोधन ने अनुच्छेद 32, 226 और 368 में बदलाव कर न्यायिक समीक्षा सीमित की तथा संसदीय संशोधनों को असामान्य रूप से शक्तिशाली बनाया।
    • अनुच्छेद 31C का विस्तार किया गया ताकि निर्देशक सिद्धांत लागू करने वाले कानूनों को चुनौती न दी जा सके।
    • 44वें संशोधन (1978) ने कई प्रावधान उलटे, जैसे संपत्ति अधिकार को कानूनी अधिकार बनाना।

28. निम्नलिखित में से किस संशोधन अधिनियम द्वारा भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्यों को शामिल किया गया है? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) 42वां संशोधन अधिनियम
Solution:
  •  भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्यों को सरदार स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा शामिल किया गया है।
  •  वर्तमान में मौलिक कर्तव्यों की संख्या 11 है।
  •  इस संशोधन ने संविधान में एक नया भाग भाग IVA जोड़ा, जिसमें एक ही अनुच्छेद, अनुच्छेद 51A है।
  •  अनुच्छेद 51A में भारतीय नागरिकों के लिए दस मौलिक कर्तव्यों की सूची दी गई है
  •  जिसमें संविधान, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना और सद्भाव और साझा भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना शामिल है।
  •  मौलिक कर्तव्यों का विचार पूर्व सोवियत संघ के संविधान से लिया गया था।
  •  मौलिक कर्तव्यों को शामिल करने का उद्देश्य नागरिकों को याद दिलाना था कि जबकि वे अधिकारों का आनंद लेते हैं, उनके पास निभाने के लिए कर्तव्य भी हैं।
    Other Information
  •  42वाँ संशोधन को "मिनी-संविधान" के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि इसमें संविधान में व्यापक परिवर्तन किए गए थे।
  •  इस संशोधन ने प्रस्तावना, सातवीं अनुसूची और संविधान के विभिन्न अन्य भागों में भी महत्वपूर्ण परिवर्तन लाए।
  •  मौलिक कर्तव्य कानून द्वारा लागू नहीं किए जा सकते हैं, लेकिन वे नागरिकों को उनकी जिम्मेदारियों की निरंतर याद दिलाते हैं।
  • मूल रूप से दस मौलिक कर्तव्य थे; 2002 में 86वें संशोधन अधिनियम द्वारा ग्यारहवाँ कर्तव्य जोड़ा गया था
  • पृष्ठभूमि
    • भारतीय संविधान मूल रूप से केवल मौलिक अधिकारों पर केंद्रित था
    • लेकिन 1976 में इंदिरा गांधी सरकार के दौरान आपातकाल के समय स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों पर मौलिक कर्तव्यों को जोड़ा गया।
    • इससे संविधान के भाग IV-A में अनुच्छेद 51A जोड़ा गया, जिसमें शुरू में 10 कर्तव्य शामिल थे।
    • यह संशोधन सोवियत संघ के संविधान से प्रेरित था, जो नागरिकों के अधिकारों के साथ कर्तव्यों को जोड़ता है।​
  • मुख्य प्रावधान
    • 42वें संशोधन ने संविधान को "समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता" शब्दों से युक्त किया तथा मौलिक कर्तव्यों को अनिवार्य बनाया।
    • ये कर्तव्य नागरिकों पर नैतिक दायित्व हैं
    • हालांकि इन्हें अदालत द्वारा प्रवर्तनीय नहीं माना जाता। 2002 के 86वें संशोधन ने 11वां कर्तव्य जोड़ा: 6-14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अवसर देना।​
  • मौलिक कर्तव्य सूची
    • संविधान और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना।​
    • भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करना।​
    • देश की रक्षा करना और राष्ट्रीय सेवा में योगदान देना।​
    • सभी लोगों में सद्भाव और समान भाईचारा बढ़ाना, महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक प्रथाओं का त्याग।​
    • पर्यावरण, वन्यजीव, स्मारकों और धरोहर की रक्षा।​
    • वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद और सुधार की भावना विकसित करना।​
    • सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा और हिंसा का परित्याग।​
    • उत्कृष्टता की ओर प्रयास करना।​
    • स्वतंत्रता संग्राम के स्वाधीनता सेनानियों के आदर्शों को दिल में बसाना।​
    • प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा (86वें संशोधन से विस्तारित)।​

29. भारतीय संविधान में निम्नलिखित में से किस संशोधन ने संपत्ति के अधिकार को मूल अधिकार के स्थान पर कानूनी अधिकार बना दिया ? [CGL (T-I) 17 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) 44वें
Solution:
  • संपत्ति के मौलिक अधिकार को 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा समाप्त कर दिया गया तथा इसे संविधान के अनुच्छेद 300क में रखा गया।
  • अब यह एक विधिक या कानूनी अधिकार है। अनुच्छेद 300क के अनुसार, किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से विधि के प्राधिकार से ही वंचित किया जाएगा, अन्यथा नहीं।
  • मूल संविधान में स्थिति
    • भारतीय संविधान के मूल प्रावधानों में संपत्ति का अधिकार मौलिक अधिकार के रूप में अनुच्छेद 19(1)(f) और अनुच्छेद 31 के तहत मान्यता प्राप्त था।
    • अनुच्छेद 19(1)(f) नागरिकों को संपत्ति अर्जित करने, धारण करने और निपटान करने का अधिकार देता था
    • जबकि अनुच्छेद 31 में कहा गया था कि कानून के अधिकार के अतिरिक्त किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा।
    • ये प्रावधान भूमि सुधारों और राष्ट्रीयकरण नीतियों के खिलाफ न्यायिक चुनौतियों का सामना कर रहे थे, जिसके कारण कई संशोधन हुए।​
  • प्रारंभिक संशोधन और विवाद
    • स्वतंत्रता के बाद पहला संशोधन (1951) ने संपत्ति अधिकार पर प्रतिबंध लगाए, लेकिन न्यायालयों ने कई भूमि अधिग्रहण कानूनों को असंवैधानिक घोषित किया।
    • इसके बाद 4था, 17वां और 25वां संशोधन आए, जिन्होंने अनुच्छेद 31 को संशोधित किया और 'क्षतिपूर्ति' को 'राशि' से बदल दिया।
    • 42वें संशोधन (1976) ने इसे सामाजिक कल्याण नीति के अनुरूप मजबूत किया, लेकिन जनता पार्टी सरकार आने पर बदलाव की मांग बढ़ी।​
  • 44वें संशोधन का विवरण
    • 1978 में लागू 44वें संविधान संशोधन अधिनियम (जून-सितंबर 1979 तक प्रभावी) ने अनुच्छेद 19(1)(f) और 31 को पूरी तरह समाप्त कर दिया।
    • इसके स्थान पर भाग XII में नया अनुच्छेद 300A जोड़ा गया, जो कहता है: "कानून के अधिकार के अतिरिक्त किसी भी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा।
    • यह अब मौलिक अधिकार नहीं, बल्कि संवैधानिक/कानूनी अधिकार है, जिसका अर्थ है कि उल्लंघन पर सामान्य कानूनी उपाय उपलब्ध हैं
    • लेकिन अनुच्छेद 32 या 226 के तहत सीधा रिट नहीं।​
  • प्रभाव और न्यायिक व्याख्या
    • इस बदलाव ने सरकार को भूमि सुधार, शहरीकरण और औद्योगीकरण के लिए संपत्ति अधिग्रहण आसान बनाया, बिना न्यायिक हस्तक्षेप के डर के।
    • मिनर्वा मिल्स (1980) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने इसे बरकरार रखा, लेकिन संपत्ति अधिकार को संवैधानिक सुरक्षा प्रदान की।
    • कलकत्ता उच्च न्यायालय जैसे मामलों में भी अनुच्छेद 300A की रक्षा पर जोर दिया गया। आज यह अधिकार पूर्ण नहीं, बल्कि विनियमित है।​

30. भारतीय संविधान के किस संशोधन ने संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों की सूची से हटा दिया? [CGL (T-I) 27 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) 44वें
Solution:
  • संपत्ति के मौलिक अधिकार को 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा समाप्त कर दिया गया तथा इसे संविधान के अनुच्छेद 300क में रखा गया।
  • अब यह एक विधिक या कानूनी अधिकार है। अनुच्छेद 300क के अनुसार, किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से विधि के प्राधिकार से ही वंचित किया जाएगा, अन्यथा नहीं।
  • मूल प्रावधान
    • संविधान के मूल रूप में संपत्ति का अधिकार अनुच्छेद 19(1)(f) के तहत नागरिकों को संपत्ति अर्जित करने, धारण करने और निपटान करने का अधिकार देता था
    • जबकि अनुच्छेद 31 में संपत्ति अधिग्रहण के विरुद्ध सुरक्षा थी। ये प्रावधान भूमि सुधारों और राष्ट्रीयकरण के लिए बाधा बन रहे थे
    • जिससे प्रारंभिक संशोधन जैसे पहला (1951), चौथा (1955) और 25वां (1971) हुए। 42वें संशोधन ने इसे मजबूत किया, लेकिन 44वें ने इसे समाप्त कर दिया।​
  • 44वें संशोधन की मुख्य विशेषताएं
    • यह अधिनियम 20 दिसंबर 1978 को पारित हुआ और 1979 में प्रभावी। अनुच्छेद 19(1)(f) और 31 को हटाकर भाग III (मौलिक अधिकार) से संपत्ति अधिकार निकाल दिया गया।
    • इसके स्थान पर भाग XII में अनुच्छेद 300A जोड़ा गया: "कानून के अधिकार के अतिरिक्त किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा।
    • अब यह विधिक/संवैधानिक अधिकार है, जिसकी रक्षा अनुच्छेद 32 या 226 के तहत सीधे नहीं हो सकती।​
  • पृष्ठभूमि और कारण
    • आपातकाल (1975-77) के बाद जनता पार्टी ने 42वें संशोधन के कई प्रावधान उलटे।
    • संपत्ति अधिकार को हटाने का कारण था न्यायालयों द्वारा भूमि अधिग्रहण कानूनों को असंवैधानिक ठहराना (जैसे गोलकनाथ, केशवानंद भारती मामले)। केशवानंद (1973) में अदालत ने कहा कि यह मूल संरचना का हिस्सा नहीं। इससे सरकार को नीतिगत स्वतंत्रता मिली।​
  • प्रभाव और न्यायिक विकास
    • मौलिक अधिकारों की संख्या 7 से घटकर 6 हो गई। सरकार को अधिग्रहण आसान हुआ
    • लेकिन अनुच्छेद 300A पर सुप्रीम कोर्ट ने जतिया सिंह (1984) और अन्य मामलों में सुरक्षा दी।
    • हाल के प्रॉपर्टी ओनर्स एसोसिएशन मामले (2024) में अधिग्रहण सीमित किया गया। यह बदलाव समाजवादी नीतियों को बढ़ावा देता है।​