राजभाषा

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1. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 350 क ....... से संबंधित है। [CHSL (T-I) 21 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की सुविधाएं
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 350क प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की सुविधाओं से संबंधित है।
  • यह भाषायी अल्पसंख्यकों से संबंधित बच्चों को शिक्षा के प्राथमिक चरण में मातृभाषा में शिक्षा हेतु पर्याप्त सुविधाएं प्रदान करने के लिए राज्यों के प्रयत्न को एक कर्तव्य प्रदान करता है। राष्ट्रपति किसी भी राज्य को ऐसे निर्देश जारी करने के लिए अधिकृत है।
  • यह प्रावधान संविधान के भाग XVII (आधिकारिक भाषा) के अंतर्गत आता है और इसका उद्देश्य भाषाई बाधाओं को दूर कर नागरिकों को प्रशासनिक न्याय तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना है।​​
  • अनुच्छेद का पाठ
    • अनुच्छेद 350 में स्पष्ट रूप से कहा गया है: "प्रत्येक व्यक्ति किसी व्यथा के निवारण के लिए संघ या राज्य के किसी अधिकारी या प्राधिकारी को, यथास्थिति, संघ में या राज्य में प्रयोग होने वाली किसी भाषा में अभ्यावेदन देने का हकदार होगा।
    • यह अधिकार हर नागरिक को प्राप्त है, चाहे उनकी मातृभाषा कुछ भी हो, ताकि भाषा की कमी के कारण कोई न्याय से वंचित न रहे।
    • इससे जुड़े अनुच्छेद जैसे 350A (भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए प्राथमिक शिक्षा में मातृभाषा की सुविधा) और 350B (भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी) इसकी पूरक भूमिका निभाते हैं।​​
  • महत्व और उद्देश्य
    • यह अनुच्छेद बहुभाषी भारत में प्रशासनिक समावेशिता को बढ़ावा देता है, जहां हिंदी, अंग्रेजी और राज्य भाषाओं का प्रयोग होता है।
    • कर्नाटक हाईकोर्ट जैसे मामलों में अदालतों ने जोर दिया कि शिकायतों पर अनिश्चित काल तक विचार न किया जाए, अन्यथा यह अनुच्छेद का उल्लंघन होगा।
    • इसका व्यावहारिक महत्व प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, SSC) में भी है, जहां भाषा नीति के संदर्भ में पूछा जाता है।​​
  • संबंधित प्रावधान
    • अनुच्छेद 343-351: आधिकारिक भाषाओं का ढांचा प्रदान करते हैं, जिसमें हिंदी को संघ की राजभाषा का दर्जा मिला है।​
    • अनुच्छेद 29: सांस्कृतिक और भाषाई अधिकारों की रक्षा।​
    • राष्ट्रपति को निर्देश जारी करने का अधिकार भाषाई सुविधाओं के लिए (अनुच्छेद 350A से प्रेरित)।​
    • यह प्रावधान संवैधानिक मूल्यों जैसे समानता और न्याय को मजबूत करता है।

2. राज्य विधान परिषद की संरचना के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं? [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

A. परिषद के सदस्यों की अधिकतम संख्या विधानसभा की कुल संख्या के एक-तिहाई पर निर्धारित की गई है।

B. परिषद की न्यूनतम शक्ति 40 निर्धारित की गई है।

C. परिषद के सदस्यों की कुल संख्या में से कुल 5/6 सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित होते हैं और 16 सदस्य मनोनीत होते हैं।

D. राज्यपाल द्वारा किए गए मनोनयन (मनोनीत सदस्य) को न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है।

Correct Answer: (c) केवल A, B और C
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 171 विधान परिषदों की संरचना के बारे में प्रावधान करता है
  • जिसके अनुसार विधान परिषद वाले राज्य की विधान परिषद के सदस्यों की कुल संख्या उस राज्य की विधानसभा के सदस्यों की कुल संख्या के 1/3 से अधिक नहीं होगी।
  • परंतु किसी राज्य की विधान परिषद के सदस्यों की कुल संख्या किसी भी स्थिति में 40 से कम नहीं होगी।
  • परिषद के सदस्यों की कुल संख्या में से कुल 5/6 सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित होते हैं तथा 1/6 सदस्य मनोनीत होते हैं।
  • राज्यपाल द्वारा मनोनीत किए गए सदस्यों के संदर्भ में किसी न्यायालय में चुनौती देने का प्रावधान नहीं है, इस प्रकार कथन A, B, C सत्य एवं D कथन असत्य है।
  • राज्य विधान परिषद (State Legislative Council) भारत के कुछ राज्यों में द्विसदनीय विधानमंडल का ऊपरी सदन होती है
  • जिसकी संरचना संविधान के अनुच्छेद 171 द्वारा निर्धारित है।​
  • सदस्य संख्या सीमाएं
    • विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या राज्य विधानसभा की कुल सदस्यता के एक तिहाई से अधिक नहीं हो सकती
    • लेकिन किसी भी स्थिति में 40 से कम सदस्य नहीं होते। संसद कानून द्वारा अन्य प्रावधान कर सकती है, अधिकतम एक तिहाई की सीमा मूलभूत है।
    • वर्तमान में आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में विधान परिषदें कार्यरत हैं।​
  • सदस्यों का निर्वाचन
    • परिषद के सदस्यों का एक तिहाई भाग राज्य विधानसभा के सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं
    • एक तिहाई स्थानीय निकायों (जैसे नगर निगम, जिला परिषद) के प्रतिनिधियों द्वारा
    • शेष एक तिहाई स्नातकों, शिक्षकों तथा राज्यपाल द्वारा नामित सदस्यों से भरा जाता है।
    • राज्यपाल द्वारा नामित 1/6 सदस्यों में राज्य के साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता और सामाजिक कार्य क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल होते हैं।
    • यह संरचना परिषद को स्थायी सदन बनाती है, जहां 1/6 सदस्य प्रत्येक दो वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं।​
  • गठन और विघटन
    • विधान परिषद का गठन या विघटन संविधान के अनुच्छेद 169 के तहत राज्य विधानसभा के विशेष बहुमत (कुल सदस्यों का बहुमत और उपस्थित-मतदान करने वालों के 2/3 बहुमत) से प्रस्ताव पारित कर संसद द्वारा साधारण बहुमत से होता है।
    • उदाहरणस्वरूप, आंध्र प्रदेश ने 2020 में इसे भंग करने का प्रस्ताव पारित किया था। परिषद विधानसभा के निर्णयों पर पुनर्विचार करती है
    • लेकिन अंतिम शक्ति विधानसभा के पास रहती है।​