राज्य की नीति के निदेशक तत्व

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1. भारत में निम्नलिखित में से कौन-सा राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों का गांधीवादी सिद्धांत है? [CHSL (T-I) 02 अगस्त, 2023 (I-पाली), MTS (T-I) 6 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) ग्राम पंचायत का गठन करना
Solution:
  • यह सिद्धांत महात्मा गांधी के 'ग्राम स्वराज' की अवधारणा पर आधारित है। अनुच्छेद 40 राज्य को ग्राम पंचायतों को संगठित करने और उन्हें स्व-शासन की इकाइयों के रूप में कार्य करने के लिए आवश्यक शक्तियाँ और अधिकार प्रदान करने का निर्देश देता है।
  • गांधीजी का मानना था कि भारत की आत्मा गाँवों में बसती है, और विकेन्द्रीकृत शासन ही सच्चा लोकतंत्र ला सकता है।
  • भारत के संविधान में राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत (Directive Principles of State Policy - DPSP) भाग IV (अनुच्छेद 36 से 51) में वर्णित हैं, जो राज्य को सामाजिक-आर्थिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
  • इनमें से गांधीवादी सिद्धांत महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज, विकेंद्रीकरण, कुटीर उद्योग और आत्मनिर्भरता जैसे विचारों से प्रेरित हैं।
  • इन सिद्धांतों का प्रमुख उदाहरण ग्राम पंचायतों का संगठन है, जो अनुच्छेद 40 में निहित है।​
  • गांधीवादी सिद्धांत की पहचान
    • ग्राम पंचायतों का आयोजन या संगठन राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों में गांधीवादी सिद्धांत के रूप में स्पष्ट रूप से पहचाना जाता है।
    • अनुच्छेद 40 राज्य को निर्देश देता है कि वह ग्राम पंचायतों का संगठन करे और उन्हें ऐसे अधिकार प्रदान करे जो उन्हें स्वशासन के योग्य बनाएं।
    • यह गांधीजी के ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने और सत्ता के विकेंद्रीकरण के दर्शन को प्रतिबिंबित करता है।​
  • अन्य गांधीवादी सिद्धांत
  • DPSP में गांधीवादी सिद्धांतों की सूची निम्नलिखित है:
    • अनुच्छेद 40: ग्राम पंचायतों का संगठन।
    • अनुच्छेद 43: ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना और कामगारों के लिए उचित जीवन स्तर सुनिश्चित करना।
    • अनुच्छेद 46: अनुसूचित जातियों, जनजातियों और कमजोर वर्गों का आर्थिक हितों का संवर्धन।
    • अनुच्छेद 47: पोषण स्तर और जीवन स्तर में सुधार तथा नशीले पदार्थों का निषेध।
    • अनुच्छेद 48: कृषि और पशुपालन का आधुनिकीकरण।​
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • ये सिद्धांत आयरिश संविधान से प्रेरित हैं, लेकिन गांधीवादी तत्व संविधान सभा में गांधीजी के अनुयायियों द्वारा जोड़े गए।
    • 73वें संवैधानिक संशोधन (1992) ने पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा देकर अनुच्छेद 40 को व्यावहारिक रूप प्रदान किया
    • जिससे ग्राम, ब्लॉक और जिला स्तर पर तीन-स्तरीय पंचायती राज प्रणाली स्थापित हुई। यह गांधीजी के 'ग्राम स्वराज' के सपने को साकार करता है।​
  • अन्य सिद्धांतों से अंतर
    • DPSP को समाजवादी (जैसे अनुच्छेद 38-39), उदारवादी (जैसे अनुच्छेद 44, 50) और गांधीवादी में वर्गीकृत किया जाता है।
    • उदाहरणस्वरूप, न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग करना (अनुच्छेद 50) उदारवादी है
    • जबकि समान नागरिक संहिता (अनुच्छेद 44) भी उदारवादी श्रेणी में आता है। गांधीवादी सिद्धांत ग्रामीण आत्मनिर्भरता पर केंद्रित हैं।​

2. भारतीय संविधान का निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद 'कार्यपालिका से न्यायपालिका के पृथक्करण' से संबंधित है? [MTS (T-I) 11 मई, 2023 (I-पाली), CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) अनुच्छेद 50
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 50 राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों के अंतर्गत आता है
  • इसका लक्ष्य कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच पृथक्करण सुनिश्चित करना है।
  • यह राज्य को लोक सेवाओं में न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग करने के लिए कदम उठाने का निर्देश देता है।
  • इसका उद्देश्य न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखना है, जो एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए आवश्यक है।
  • न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग करने का उद्देश्य न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है
  • जो कानून के शासन और व्यक्तिगत अधिकारों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
  • यह पृथक्करण सुनिश्चित करता है कि कार्यपालिका न्यायपालिका के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं करती है
  • न्यायपालिका बिना किसी बाहरी प्रभाव के निष्पक्ष निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है।
  • न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच शक्तियों का पृथक्करण भारतीय संविधान का एक मूलभूत सिद्धांत है और लोकतंत्र के समुचित कार्य के लिए आवश्यक है।
    Other Information
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 40 ग्राम पंचायतों के संगठन से संबंधित है।
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में कहा गया है कि राज्य पूरे भारत में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा।
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 46 में कहा गया है कि राज्य लोगों के कमजोर वर्गों और विशेष रूप से अनुसूचित जातियों
  • अनुसूचित जनजातियों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को विशेष ध्यान से बढ़ावा देगा।

3. भारतीय संविधान में राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों की विशेषता ....... के संविधान से ली गई है। [MTS (T-I) 08 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) आयरलैंड
Solution:
  • भारतीय संविधान में राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों (DPSP) की अवधारणा आयरलैंड के संविधान से ली गई है।
  • आयरिश संविधान में इन्हें 'Directive Principles of State Policy' कहा जाता है।
  • संविधान निर्माताओं ने इस भाग को भारत में सामाजिक और आर्थिक न्याय सुनिश्चित करने वाले कल्याणकारी राज्य की स्थापना के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण माना।
  • भारतीय संविधान के भाग IV (अनुच्छेद 36 से 51 तक) में वर्णित राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों (Directive Principles of State Policy - DPSP) की विशेषता आयरलैंड के संविधान से ली गई है.​
  • उत्पत्ति और स्रोत
    •  ये सिद्धांत राज्य को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश प्रदान करते हैं, लेकिन ये न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं।
    • अनुच्छेद 37 स्पष्ट करता है कि ये मौलिक सिद्धांत हैं जिन्हें राज्य को कानून बनाने में प्राथमिकता देनी चाहिए।​
  • प्रमुख विशेषताएं
    • गैर-न्यायिक प्रवर्तनीयता: DPSP मौलिक अधिकारों (भाग III) के विपरीत अदालत में लागू नहीं कराए जा सकते, लेकिन ये राज्य की नीतियों का आधार बनते हैं।​
    • कल्याणकारी राज्य की स्थापना: ये सामाजिक-आर्थिक समानता, गांधीवादी सिद्धांतों (जैसे पंचायती राज, गौ-रक्षा) और उदारवादी विचारों को बढ़ावा देते हैं।​
    • राज्य की व्यापक परिभाषा: अनुच्छेद 36 के अनुसार, राज्य में केंद्र, राज्य सरकारें, स्थानीय निकाय और सभी सार्वजनिक अधिकारी शामिल हैं।​
  • वर्गीकरण
    • DPSP को तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा जाता है:
    • समाजवादी सिद्धांत: संपत्ति वितरण (अनु. 39), समान कार्य के लिए समान वेतन (अनु. 39A)।​
    • गांधीवादी सिद्धांत: कुटीर उद्योग, पशु वध निषेध (अनु. 40, 48)।​
    • उदारवादी बौद्धिक सिद्धांत: अंतरराष्ट्रीय शांति, न्यायिक समीक्षा (अनु. 51)।​
  • महत्व और आलोचना
    • ये सिद्धांत मौलिक अधिकारों के पूरक हैं, जो राज्य को जनकल्याणकारी नीतियां बनाने का मार्गदर्शन करते हैं, जैसे पंचवर्षीय योजनाएं।
    • हालांकि, इनकी गैर-प्रवर्तनीयता पर आलोचना होती है, फिर भी 42वें, 44वें संशोधनों ने इन्हें मजबूत किया। संविधान सभा ने इन्हें स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों से प्रेरित बनाया।

4. राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत भारतीय संविधान के किस भाग के अंतर्गत आते हैं? [MTS (T-I) 14 जून, 2023 (I-पाली), CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) भाग IV
Solution:
  • राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत (DPSP) भारतीय संविधान के भाग IV के अंतर्गत शामिल किए गए हैं। ये सिद्धांत अनुच्छेद 36 से 51 तक विस्तृत हैं।
  • ये सरकार के लिए नैतिक निर्देश हैं, जिनका उद्देश्य देश में सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना करना है
  • हालाँकि ये न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय (non-justiciable) नहीं हैं।
  • राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत (DPSP) भाग IV में निहित हैं, जिसका उद्देश्य देश में सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र स्थापित करना है।
  • ये सिद्धांत किसी भी न्यायालय द्वारा लागू नहीं किए जा सकते हैं, लेकिन निर्धारित सिद्धांतों को देश के शासन में मौलिक माना जाता है।
  • नीति निदेशक सिद्धांत भारत की केंद्र और राज्य सरकारों के लिए कानून और नीतियां बनाने के लिए दिशानिर्देश के रूप में कार्य करते हैं।
    Other Information
  •  ऐतिहासिक संदर्भ
    •  नीति निदेशक सिद्धांतों की अवधारणा आयरिश संविधान से ली गई थी जिसने इसे स्पेनिश संविधान से लिया था।
    •  ये सिद्धांत उन आदर्शों को दर्शाते हैं जिन्हें संविधान के निर्माताओं ने लंबे समय में प्राप्त करने का लक्ष्य रखा था।
  •  DPSP की श्रेणियाँ
    •  DPSP को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है: समाजवादी, गांधीवादी और उदार-बौद्धिक।
    • समाजवादी सिद्धांतों का उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक न्याय प्रदान करना है, गांधीवादी सिद्धांत महात्मा गांधी की विचारधारा को दर्शाते हैं
    • उदार-बौद्धिक सिद्धांत नागरिकों के अधिकारों पर केंद्रित हैं।
  •  न्यायसंगत नहीं है
    •  DPSP कानून द्वारा लागू नहीं किए जा सकते हैं, जिसका अर्थ है कि वे न्यायालय में न्यायसंगत नहीं हैं।
    •  हालाँकि, वे देश के शासन में मौलिक हैं और कानून बनाने में इन सिद्धांतों को लागू करना राज्य का कर्तव्य है।
  • मुख्य अनुच्छेद
    • अनुच्छेद 39: राज्य को लोगों के कल्याण को बढ़ावा देने के लिए एक सामाजिक व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश देता है।
    • अनुच्छेद 40: राज्य को ग्राम पंचायतों का संगठन करने तथा उन्हें स्वायत्त शासन की इकाइयों के रूप में कार्य करने हेतु आवश्यक शक्तियां और अधिकार प्रदान करने का निर्देश देता है।
    • अनुच्छेद 45: राज्य को छह वर्ष की आयु पूरी करने तक सभी बच्चों के लिए प्रारंभिक बाल देखभाल और शिक्षा प्रदान करने का निर्देश देता है।

5. निम्नलिखित में से कौन-सा राज्य का एक नीति निदेशक सिद्धांत नहीं है? [MTS (T-I) 05 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) भारत के किसी भी हिस्से में निवास
Solution:
  • भारत के किसी भी हिस्से में निवास (अनुच्छेद 19(1)(e)) करना एक मौलिक अधिकार है जो संविधान के भाग III में उल्लिखित है।
  • मौलिक अधिकार न्यायसंगत (justiciable) होते हैं, जबकि राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत (DPSP) न्यायसंगत नहीं होते।
  • अन्य विकल्प, जैसे न्यायपालिका का पृथक्करण (अनुच्छेद 50), समान नागरिक संहिता (अनुच्छेद 44), और स्मारकों का संरक्षण (अनुच्छेद 49), DPSP हैं।
  • राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत (Directive Principles of State Policy – DPSP) वे मार्गदर्शक सिद्धांत हैं जो संविधान के भाग IV (अनुच्छेद 36–51) में दिए गए हैं
  • जिनका उद्देश्य कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना है। किसी भी प्रश्न में यदि विकल्पों में “मौलिक अधिकार” से जुड़ी बात, “सूचना का अधिकार”, “मतदान का अधिकार” या किसी विशिष्ट कानूनी अधिकार (जैसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत अधिकार) दिया हो, तो वह सामान्यतः राज्य का नीति निदेशक सिद्धांत नहीं होता।​
  • राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत क्या हैं?
    • संविधान में नीति निदेशक सिद्धांत वे सिद्धांत हैं जिन्हें ध्यान में रखकर केंद्र और राज्य सरकारें नीतियाँ तथा कानून बनाती हैं
    • जैसे सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय स्थापित करना, आय और अवसरों की असमानता कम करना, श्रमिकों के लिए उचित जीवन स्तर सुनिश्चित करना आदि।
    • यह सिद्धांत न्यायालयों द्वारा लागू नहीं कराए जा सकते, लेकिन देश के शासन में इन्हें मौलिक माना गया है और संविधान राज्य से अपेक्षा करता है
    • वह इन्हें यथासंभव लागू करने का प्रयास करे।​
  • प्रमुख उदाहरण (जो वास्तव में नीति निदेशक सिद्धांत हैं)
    • राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों में broadly तीन तरह की धाराएँ मानी जाती हैं – समाजवादी, गांधीवादी और उदार–बौद्धिक सिद्धांत। उदाहरण के रूप में:​
    • मद्यनिषेध (नशा–विरोध) का प्रावधान, यानी राज्य का कर्तव्य कि वह स्वास्थ्य के हित में मादक द्रव्यों के सेवन पर रोक लगाए।​
    • गौ एवं अन्य दुधारू पशुओं की रक्षा और सुधार से संबंधित प्रावधान।​
    • पर्यावरण, वन और वन्य जीवों की रक्षा तथा सुधार को प्रोत्साहित करना।​
    • सभी बच्चों को 14 वर्ष की आयु तक निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान (यह निर्देश मूल रूप से नीति निदेशक सिद्धांतों में था
    • जिसे बाद में अनुच्छेद 21A के रूप में मौलिक अधिकार भी बनाया गया)।​
    • इन जैसे प्रावधान यदि किसी प्रश्न के विकल्पों में हों, तो वे सामान्यतः “राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत” ही माने जाते हैं।​
  • कौन-सा नहीं होता? (सामान्य पैटर्न)
    • पिछले वर्षों के प्रश्नों में बार–बार पूछा गया है कि “निम्नलिखित में से कौन राज्य का नीति निदेशक सिद्धांत नहीं है?” और वहाँ प्रायः विकल्पों में कुछ ऐसा दिया जाता है
    • जो या तो मौलिक अधिकार है या बाद में बने किसी विशेष कानून/अधिकार से संबंधित है। उदाहरण के तौर पर:​
    • सूचना का अधिकार (Right to Information) एक वैधानिक तथा अब संवैधानिक रूप से संरक्षित अधिकार है, पर यह नीति निदेशक सिद्धांतों की सूची में नहीं आता।​
    • मतदान का अधिकार (Right to Vote) चुनाव कानूनों के तहत एक कानूनी अधिकार है, नीति निदेशक सिद्धांत नहीं।​
    • इसी तरह यदि विकल्पों में “मौलिक अधिकारों” से सीधे जुड़े सिद्धांत हों, जैसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता आदि
    • तो वे भी नीति निदेशक सिद्धांत नहीं माने जाते, बल्कि भाग III के अन्तर्गत मौलिक अधिकार हैं।​
  • परीक्षा के लिए याद रखने की व्यावहारिक ट्रिक
    • जो बातें “राज्य को करना चाहिए” के रूप में लिखी हों (जैसे – नशाबंदी, पर्यावरण संरक्षण, समान कार्य के लिए समान वेतन, पंचायतों को सशक्त करना, कमजोर वर्गों का उत्थान) – वे प्रायः नीति निदेशक सिद्धांत हैं।​
    • जो बातें “व्यक्ति के enforceable अधिकार” के रूप में जानी जाती हैं (जैसे सूचना का अधिकार, मतदान का अधिकार, संवैधानिक उपचार का अधिकार) – वे नीति निदेशक सिद्धांत नहीं, बल्कि मौलिक/कानूनी अधिकार हैं।​
    • इस प्रकार किसी भी प्रश्न में यदि विकल्पों में “सूचना का अधिकार”, “मतदान का अधिकार” या कोई साफ–साफ मौलिक अधिकार दिया हो और बाकी विकल्प मद्यनिषेध, गौ–संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, निःशुल्क शिक्षा आदि हों, तो वह गैर–DPSP विकल्प ही सही उत्तर होगा, यानी वह “राज्य का नीति निदेशक सिद्धांत नहीं है।”​

6. राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है? [MTS (T-I) 01 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) केवल पुरुषों के लिए समान कार्य के लिए समान पारिश्रमिक सुनिश्चित करना
Solution:
  • कथन (c) सही नहीं है। अनुच्छेद 39(d) राज्य को पुरुषों और स्त्रियों दोनों के लिए समान कार्य के लिए समान पारिश्रमिक सुनिश्चित करने का निर्देश देता है।
  • DPSP का उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक समानता स्थापित करना है, इसलिए यह केवल पुरुषों तक सीमित नहीं है, बल्कि लैंगिक समानता को बढ़ावा देता है।
  • राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत (DPSP) भारतीय संविधान के भाग IV (अनुच्छेद 36 से 51) में वर्णित हैं, जो राज्य को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश प्रदान करते हैं।
  • ये सिद्धांत आयरिश संविधान से प्रेरित हैं और कल्याणकारी राज्य की स्थापना का लक्ष्य रखते हैं, लेकिन ये न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं।​
  • मुख्य विशेषताएँ
    • DPSP मौलिक अधिकारों से भिन्न हैं क्योंकि वे नकारात्मक या निषेधात्मक नहीं, बल्कि सकारात्मक निर्देश हैं जो राज्य की नीतियों को मार्गदर्शित करते हैं।
    • अनुच्छेद 37 स्पष्ट करता है कि ये सिद्धांत मौलिक हैं, किंतु कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं, अर्थात् इन्हें लागू न करने पर कोई नहीं रोक सकता।
    • ये समाजवादी (अनु. 38-39), गांधीवादी (अनु. 40-48) और उदारवादी सिद्धांतों पर आधारित हैं।​
  • गलत कथन की पहचान
    • प्रश्न में विकल्पों का उल्लेख नहीं है, किंतु सामान्यतः "ये सिद्धांत न्यायोचित (justiciable) हैं" वाला कथन सही नहीं है, क्योंकि DPSP गैर-न्यायोचित हैं
    • अदालत इन्हें लागू नहीं करा सकती। अन्य सामान्य गलत कथन हो सकता है कि "ये केवल केंद्र सरकार के लिए हैं"
    • (हकीकत में केंद्र व राज्य दोनों के लिए) या "ये मौलिक अधिकारों का हिस्सा हैं" (वे अलग भाग में हैं)।​
  • महत्व और आलोचना
    • DPSP ने कई कानूनों जैसे समान वेतन अधिनियम (अनु. 39) और पंचायती राज (अनु. 40) को प्रेरित किया है।
    • आलोचना यह है कि इनकी गैर-बाध्यकारी प्रकृति से कार्यान्वयन में कमी रहती है, फिर भी ये नीति-निर्माण का आधार हैं। संविधान के अनु. 39A, 43A आदि बाद में जोड़े गए।​

7. भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद यह आदेश देता है कि राज्य को कलात्मक या ऐतिहासिक रुचि के प्रत्येक स्मारक या स्थान की रक्षा करनी चाहिए? [MTS (T-I) 11 सितंबर, 2023 (III-पाली), CHSL (T-I) 9 अगस्त, 2023 (I-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 29 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) अनुच्छेद 49
Solution:
  • अनुच्छेद 49 भारतीय संविधान के राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों का हिस्सा है। यह राज्य को यह दायित्व सौंपता है
  • वह राष्ट्रीय महत्व के घोषित किए गए कलात्मक, ऐतिहासिक रुचि के प्रत्येक स्मारक, स्थान और वस्तु को नुकसान, विनाश, हटाने, बेचने या निर्यात करने से संरक्षित करे।
  • यह भारतीय संस्कृति और विरासत के संरक्षण पर जोर देता है।
  • यह अनुच्छेद राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों के अंतर्गत आता है, जो सरकार द्वारा कानून बनाने के लिए दिशानिर्देश हैं।
  • इन सिद्धांतों का उद्देश्य ऐसी सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां निर्मित करना है जिनके तहत नागरिक अच्छा जीवन जी सकें।
  • यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर देता है।
    Other Information
  • भारत का संविधान 26 नवम्बर 1949 को संविधान सभा द्वारा अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।
  • यह मौलिक राजनीतिक सिद्धांतों को परिभाषित करने वाला ढांचा तैयार करता है, सरकारी संस्थाओं की संरचना, प्रक्रियाएं, शक्तियां और कर्तव्य स्थापित करता है।
  • तथा मौलिक अधिकार, नीति निर्देशक सिद्धांत और नागरिकों के कर्तव्यों को निर्धारित करता है।
  • भारत का संविधान दुनिया के किसी भी देश का सबसे लंबा लिखित संविधान है।
  • यह भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित करता है
  • अपने नागरिकों को न्याय, समानता और स्वतंत्रता का आश्वासन देता है, और भाईचारे को बढ़ावा देने का प्रयास करता है।
  • राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांत संविधान के भाग IV में अनुच्छेद 36 से 51 तक निहित हैं।
  • ये सिद्धांत किसी भी अदालत द्वारा लागू नहीं किए जा सकते हैं, लेकिन देश के शासन में इन्हें मौलिक माना जाता है।
  • उनका उद्देश्य ऐसी सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां बनाना है
  • जिनके तहत नागरिक अच्छा जीवन जी सकें और लोगों के कल्याण को बढ़ावा दिया जा सके।

8. निम्नलिखित में से कौन-सा महात्मा गांधी के आदर्शों पर आधारित निदेशक सिद्धांत नहीं है? [MTS (T-I) 08 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) शहरी क्षेत्रों में औद्योगीकरण को बढ़ावा देना
Solution:
  • गांधीजी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था, विकेंद्रीकरण और कुटीर उद्योगों (b) को बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया। उन्होंने नशीले पेयों पर रोक (c) और ग्राम पंचायतों का गठन (d) की भी वकालत की।
  • इसके विपरीत, शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर औद्योगीकरण को बढ़ावा देना समाजवादी या उदार-बौद्धिक सिद्धांतों के अंतर्गत आता है, न कि शुद्ध गांधीवादी विचारधारा के।
  • महात्मा गांधी के आदर्शों पर आधारित राज्य नीति के निदेशक सिद्धांत भारतीय संविधान के भाग IV (अनुच्छेद 36 से 51) में वर्णित हैं, जो गांधीजी के ग्रामीण विकास, स्वावलंबन, अहिंसा और पंचायती राज जैसे विचारों से प्रेरित हैं।
  • इनमें से "शहरी क्षेत्रों में औद्योगीकरण को बढ़ावा देना" महात्मा गांधी के आदर्शों पर आधारित नहीं है, क्योंकि गांधीजी बड़े पैमाने के औद्योगीकरण के विरोधी थे
  • स्वदेशी तथा ग्रामीण कुटीर उद्योगों को प्राथमिकता देते थे।​
  • गांधीवादी सिद्धांतों की मुख्य सूची
    • संविधान में गांधीवादी निदेशक सिद्धांत मुख्य रूप से निम्नलिखित हैं:
    • ग्राम पंचायतों का संगठन (अनुच्छेद 40) – गांधीजी के ग्राम स्वराज के विचार पर आधारित।​
    • ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योगों को बढ़ावा (अनुच्छेद 43) – आत्मनिर्भरता और स्वदेशी को प्रोत्साहन।​
    • मद्य पान का निषेध (अनुच्छेद 47) – नैतिकता और स्वास्थ्य संरक्षण के लिए।​
    • गोवध पर निषेध (अनुच्छेद 48) – पशु संरक्षण और अहिंसा के सिद्धांत से प्रेरित।​
    • कृषि एवं पशुपालन का संगठन (अनुच्छेद 48) – ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने हेतु।​
  • शहरी औद्योगीकरण क्यों अप्रासंगिक?
    • गांधीजी का दर्शन बड़े उद्योगों और शहरीकरण के बजाय ग्रामीण आत्मनिर्भरता पर केंद्रित था; वे रचनात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से गांधी टोपी, चरखा और ग्रामोद्योग को बढ़ावा देते थे।
    • शहरी औद्योगीकरण समाजवादी या उदारवादी सिद्धांतों से अधिक जुड़ा है, न कि गांधीवादी ग्राम-केंद्रित मॉडल से। यह सिद्धांत संविधान में स्पष्ट रूप से गांधीवादी श्रेणी में नहीं आता।​
  • अन्य सिद्धांतों का वर्गीकरण
    • निदेशक सिद्धांतों को समाजवादी (जैसे समान वेतन, अनुच्छेद 39), गांधीवादी, उदारवादी (जैसे पर्यावरण संरक्षण, अनुच्छेद 48A) और बौद्धिक (अंतर्राष्ट्रीय शांति, अनुच्छेद 51) में विभाजित किया जाता है।
    • गांधीवादी सिद्धांत विकेंद्रीकरण, नैतिक शासन और सामाजिक न्याय पर जोर देते हैं, जबकि शहरीकरण इनसे विरोधाभासी है।​

9. भारतीय संविधान के निम्नलिखित राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों में से कौन-सा सिद्धांत समाजवादी सिद्धांतों के अंतर्गत आता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) पुरुषों और महिलाओं के लिए समान काम के लिए समान वेतन
Solution:
  • पुरुषों और महिलाओं के लिए समान काम के लिए समान वेतन (अनुच्छेद 39(d)) एक समाजवादी सिद्धांत है।
  • समाजवादी सिद्धांत सामाजिक और आर्थिक न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से हैं।
  • यह सिद्धांत धन और आय की असमानता को कम करने और संसाधनों के उचित वितरण को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखता है, जिससे समाज में समानता सुनिश्चित हो सके।
  • भारतीय संविधान के राज्य नीति के निदेशक सिद्धांत (Directive Principles of State Policy - DPSP) भाग IV में अनुच्छेद 36 से 51 तक वर्णित हैं
  • जो राज्य को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
  • इनमें समाजवादी, गांधीवादी तथा उदारवादी-समाजवादी सिद्धांत शामिल हैं, जिनमें से समाजवादी सिद्धांत मुख्य रूप से आर्थिक समानता, धन के वितरण तथा कल्याणकारी राज्य की स्थापना पर केंद्रित हैं।​
  • समाजवादी सिद्धांतों का वर्गीकरण
    • समाजवादी सिद्धांत DPSP के मूलभूत हिस्से हैं, जो आयरिश संविधान से प्रेरित हैं और भारत को समाजवादी कल्याणकारी राज्य बनाने का लक्ष्य रखते हैं।
    • अनुच्छेद 38 राज्य को निर्देशित करता है कि वह सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक न्याय को बढ़ावा देकर तथा आय, सुविधाओं एवं अवसरों की असमानताओं को कम करके कल्याणकारी व्यवस्था स्थापित करे।
    • अनुच्छेद 39 में राज्य नीतियों को इस प्रकार निर्देशित किया गया है कि धन एवं उत्पादन के साधनों का स्वामित्व सामुदायिक रूप से वितरित हो
    • आर्थिक एकाधिकार न हो, श्रमिकों को समान कार्य के लिए समान वेतन मिले तथा शोषण समाप्त हो।​
  • प्रमुख समाजवादी अनुच्छेदों का विवरण
    • अनुच्छेद 39A: राज्य मुफ्त कानूनी सहायता को संगठित करेगा ताकि आर्थिक या अन्य अक्षमताओं के कारण न्याय से वंचित न रहें।
    • अनुच्छेद 41: राज्य शिक्षा, बेरोजगारी, वृद्धावस्था, बीमारी आदि में सहायता के अधिकार को कार्यान्वित करेगा।
    • अनुच्छेद 42: कार्य की न्यायसंगत एवं मानवीय दशाएं तथा मातृत्व सहायता सुनिश्चित करेगा।
    • अनुच्छेद 43: सभी श्रमिकों के लिए उचित मजदूरी, अच्छी जीवन-स्तर तथा अवकाश का अधिकार देगा, साथ ही कुटीर उद्योगों को बढ़ावा।​

10. राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत ....... में दिए गए 'निर्देशों के लिखत' के समान हैं। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20, 30 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) भारत सरकार अधिनियम, 1935
Solution:
  • राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत (DPSP) भारत सरकार अधिनियम, 1935 में शामिल 'निर्देशों के लिखत' (Instrument of Instructions) से बहुत मिलते-जुलते हैं।
  • ये लिखत ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत के गवर्नर-जनरल और गवर्नरों को दिए गए निर्देश थे।
  • संविधान निर्माताओं ने इन्हीं निर्देशों को DPSP के रूप में स्वतंत्र भारत की विधायिका और कार्यपालिका के लिए एक कल्याणकारी राज्य के लक्ष्य के साथ अपनाया।
  • भारतीय संविधान के राज्य नीति के निदेशक सिद्धांत (Directive Principles of State Policy - DPSP) भाग IV में अनुच्छेद 36 से 51 तक वर्णित हैं
  • जो राज्य को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
  • इनमें समाजवादी, गांधीवादी तथा उदारवादी-समाजवादी सिद्धांत शामिल हैं
  • जिनमें से समाजवादी सिद्धांत मुख्य रूप से आर्थिक समानता, धन के वितरण तथा कल्याणकारी राज्य की स्थापना पर केंद्रित हैं।​
  • समाजवादी सिद्धांतों का वर्गीकरण
    • समाजवादी सिद्धांत DPSP के मूलभूत हिस्से हैं, जो आयरिश संविधान से प्रेरित हैं और भारत को समाजवादी कल्याणकारी राज्य बनाने का लक्ष्य रखते हैं।
    • अनुच्छेद 38 राज्य को निर्देशित करता है कि वह सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक न्याय को बढ़ावा देकर तथा आय, सुविधाओं एवं अवसरों की असमानताओं को कम करके कल्याणकारी व्यवस्था स्थापित करे।
    • अनुच्छेद 39 में राज्य नीतियों को इस प्रकार निर्देशित किया गया है कि धन एवं उत्पादन के साधनों का स्वामित्व सामुदायिक रूप से वितरित हो
    • आर्थिक एकाधिकार न हो, श्रमिकों को समान कार्य के लिए समान वेतन मिले तथा शोषण समाप्त हो।​
  • प्रमुख समाजवादी अनुच्छेदों का विवरण
    • अनुच्छेद 39A: राज्य मुफ्त कानूनी सहायता को संगठित करेगा ताकि आर्थिक या अन्य अक्षमताओं के कारण न्याय से वंचित न रहें।
    • अनुच्छेद 41: राज्य शिक्षा, बेरोजगारी, वृद्धावस्था, बीमारी आदि में सहायता के अधिकार को कार्यान्वित करेगा।
    • अनुच्छेद 42: कार्य की न्यायसंगत एवं मानवीय दशाएं तथा मातृत्व सहायता सुनिश्चित करेगा।
    • अनुच्छेद 43: सभी श्रमिकों के लिए उचित मजदूरी, अच्छी जीवन-स्तर तथा अवकाश का अधिकार देगा, साथ ही कुटीर उद्योगों को बढ़ावा।​