राज्य की नीति के निदेशक तत्व

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21. भारतीय संविधान का निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद राज्य द्वारा जीविकोपार्जन मजदूरी, सभ्य जीवन स्तर सुनिश्चित करने वाली कार्य की स्थितियां और अवकाश और सामाजिक एवं सांस्कृतिक अवसरों की संपूर्ण सुविधा प्रदान करने से संबंधित है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 3 दिसंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) अनुच्छेद 43
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 43 राज्य को सभी श्रमिकों के लिए जीविकोपार्जन मजदूरी (living wage), एक सभ्य जीवन स्तर सुनिश्चित करने वाली कार्य की स्थितियाँ, अवकाश, और सामाजिक एवं सांस्कृतिक अवसरों की संपूर्ण सुविधा प्रदान करने का प्रयास करने का निर्देश देता है।
  • यह सिद्धांत सुनिश्चित करता है कि आर्थिक विकास का लाभ समाज के सबसे निचले तबके तक पहुँचे और उन्हें गरिमापूर्ण जीवन जीने का अवसर मिले।
  • अनुच्छेद 43 का पूरा पाठ
    • संविधान के भाग IV (राज्य नीति के निर्देशक तत्व) में शामिल यह अनुच्छेद राज्य को निर्देश देता है
    • वह उपयुक्त विधान, आर्थिक संगठन या अन्य किसी उपाय द्वारा सभी श्रमिकों (कृषि, उद्योग या अन्य)
    • जीविकोपार्जन मजदूरी सुनिश्चित करने का प्रयास करे, जो उन्हें सभ्य जीवन स्तर प्रदान करे
    • कार्य की ऐसी स्थितियां प्रदान करे जो सभ्य जीवन स्तर सुनिश्चित करती हों
    • मातृत्व राहत का प्रावधान करे
    • अवकाश का पूर्ण उपभोग तथा सामाजिक एवं सांस्कृतिक अवसरों की पूर्ण सुविधा प्रदान करे।
    • यह अनुच्छेद श्रमिक कल्याण को मौलिक रूप से मजबूत बनाता है, हालांकि यह न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं है।​
  • महत्वपूर्ण विशेषताएं
    • जीविकोपार्जन मजदूरी: न्यूनतम मजदूरी से भिन्न, यह भोजन, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और बीमा जैसी व्यापक आवश्यकताओं को कवर करती है।​
    • कार्य स्थितियां: सभ्य जीवन स्तर वाली सुरक्षित, स्वस्थ और मानवीय परिस्थितियां सुनिश्चित करना।​
    • अवकाश और अवसर: श्रमिकों को पर्याप्त छुट्टी, सामाजिक-सांस्कृतिक भागीदारी के अधिकार।​
      ये तत्व समाजवादी सिद्धांतों पर आधारित हैं, जो असमानता कम करने का लक्ष्य रखते हैं।​
  • संबंधित संदर्भ
    • अनुच्छेद 43 अनुच्छेद 42 (मानवीय कार्य स्थितियां और मातृत्व राहत) से जुड़ा है, लेकिन विशेष रूप से मजदूरी और अवकाश पर केंद्रित है।
    • इसे लागू करने के लिए न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 और कोड ऑन वेजेज, 2019 जैसे कानून बने।
    • संविधान सभा बहसों में डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने इसे श्रमिक अधिकारों की आधारशिला बताया।

22. राज्य के नीति निदेशक तत्वों की उत्पत्ति निम्नलिखित में से किसमें खोजी जा सकती है? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) कराची प्रस्ताव
Solution:
  • राज्य के नीति निदेशक तत्वों (DPSP) की उत्पत्ति की खोज स्वतंत्रता आंदोलन के शुरुआती चरणों में की जा सकती है।
  • कराची प्रस्ताव (1931), जिसे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पारित किया था, मौलिक अधिकारों और आर्थिक नीति से संबंधित था।
  • इसमें सामाजिक और आर्थिक कल्याण के लिए कई ऐसे सिद्धांत शामिल थे जो बाद में भारतीय संविधान के DPSP में दिखाई दिए
  • जैसे कि न्यूनतम मजदूरी और काम की बेहतर स्थितियाँ।
  • राज्य के नीति निदेशक तत्व (Directive Principles of State Policy - DPSP) भारतीय संविधान के भाग IV (अनुच्छेद 36 से 51) में वर्णित हैं, और इनकी उत्पत्ति मुख्य रूप से आयरिश संविधान (1937) से खोजी जा सकती है।​
  • उत्पत्ति का स्रोत
    • ये तत्व आयरलैंड के संविधान से प्रेरित हैं, जहां इन्हें स्पेनिश संविधान (1931) से लिया गया था।
    • भारतीय संविधान निर्माताओं ने आयरिश मॉडल को अपनाया, क्योंकि अमेरिकी संविधान में ऐसे सकारात्मक दिशानिर्देश नहीं थे।​
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • संविधान सभा ने इनकी अवधारणा को गांधीवादी विचारों, मानवाधिकार घोषणा तथा 1935 के भारत सरकार अधिनियम से भी प्रभावित माना।
    • डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने इन्हें संविधान की 'निचली धुरी' कहा, जो राज्य को सामाजिक-आर्थिक न्याय की दिशा देते हैं।​
  • विशेषताएं और उद्देश्य
    • DPSP राज्य को नीति निर्माण में मार्गदर्शन देते हैं, लेकिन न्यायोचित नहीं हैं (अनुच्छेद 37)। ये मौलिक अधिकारों के पूरक हैं
    • कल्याणकारी राज्य स्थापित करने का लक्ष्य रखते हैं।​
  • वर्गीकरण
    • समाजवादी: आर्थिक समानता (अनु. 38-39)।
    • गांधीवादी: ग्राम पंचायतें (अनु. 40)।
    • उदारवादी-बौद्धिक: पर्यावरण संरक्षण (अनु. 48A)।​

23. राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों का स्रोत क्या है? [MTS (T-I) 06 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) भारत सरकार अधिनियम, 1935 से निर्देशों का साधन
Solution:
  • राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत (DPSP) का सबसे निकटतम और प्रत्यक्ष स्रोत भारत सरकार अधिनियम, 1935 में दिया गया 'निर्देशों का साधन' (Instrument of Instructions) है।
  • ये वे निर्देश थे जो ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत के गवर्नर-जनरल और गवर्नरों को दिए जाते थे।
  • संविधान निर्माताओं ने इन्हीं निर्देशों को स्वतंत्र भारत की सरकारों के लिए नैतिक मार्गदर्शिका के रूप में DPSP के रूप में अपनाया।
  • इनका स्रोत मुख्य रूप से आयरिश संविधान (1937) है, जो स्वयं स्पेनिश संविधान (1931) से प्रेरित था।
  • ये सिद्धांत राज्य को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए नीतियां बनाने का निर्देश देते हैं, लेकिन ये न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं।​
  • उत्पत्ति और स्रोत
    • DPSP की अवधारणा स्पेनिश संविधान से शुरू हुई, जहां से यह आयरिश संविधान के अनुच्छेद 45 में स्थानांतरित हुई।
    • भारतीय संविधान सभा ने इन्हें आयरलैंड से अपनाया, साथ ही 1935 के भारत सरकार अधिनियम के कुछ प्रावधानों से भी प्रभावित हुए।
    • डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने इनकी महत्ता पर जोर दिया, इन्हें संविधान का 'नया तत्व' बताया।​
  • विशेषताएं
    • ये सिद्धांत राज्य पर सकारात्मक दायित्व लगाते हैं, जबकि मौलिक अधिकार नकारात्मक प्रतिबंध हैं।
    • अनुच्छेद 37 स्पष्ट करता है कि इन्हें कानून बनाते समय प्राथमिकता दी जाएगी, लेकिन न्यायिक प्रवर्तन नहीं होगा।
    • ये समाजवादी, गांधीवादी और उदारवादी सिद्धांतों पर आधारित हैं।​
  • वर्गीकरण
    • समाजवादी: अनुच्छेद 38 (कल्याणकारी राज्य), 39 (संसाधनों का वितरण), 41 (रोजगार-अधिकार), 43 (न्यूनतम मजदूरी), 47 (पोषण स्तर)।​
    • गांधीवादी: अनुच्छेद 40 (ग्राम पंचायत), 43बी (सहकारिता), 46 (SC/ST कल्याण), 47 (नशामुक्ति), 48 (गौ-रक्षा)।​
    • उदारवादी-बौद्धिक: अनुच्छेद 44 (समान नागरिक संहिता), 45 (शिक्षा-अधिकार), 48ए (पर्यावरण संरक्षण), 49 (स्मारकों की रक्षा), 50 (न्यायपालिका पृथक्करण)।​
  • महत्व और आलोचना
    • ये भारत को कल्याणकारी राज्य बनाने के आदर्श स्थापित करते हैं, नीतियों को दिशा देते हैं।
    • हालांकि, गैर-प्रवर्तनीय होने से आलोचना होती है, लेकिन संशोधनों जैसे 42वें (1976) ने इन्हें मौलिक अधिकारों के समकक्ष मजबूत किया।
    • सर्वोच्च न्यायालय ने मिनर्वा मिल्स मामले (1980) में कहा कि DPSP मौलिक अधिकारों के पूरक हैं।​

24. निम्नलिखित में से किस संशोधन अधिनियम ने राज्य के नीति निदेशक तत्वों में चार नए विषयों (अनुच्छेद 39, 39A, 43A, 48A) को जोड़ा ? [CGL (T-I) 20 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) 42वां संशोधन अधिनियम, 1976
Solution:
  • 42वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 (जिसे 'लघु संविधान' भी कहा जाता है) ने राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों में चार नए विषयों को जोड़ा:
  • जोड़े गए नए अनुच्छेद
    • अनुच्छेद 39A: राज्य समान न्याय को बढ़ावा देने और गरीबों को निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए प्रयास करेगा।
    • यह सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जोड़ा गया।​
    • अनुच्छेद 43A: राज्य उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिक वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएगा।
    • इससे श्रमिकों को निर्णय प्रक्रिया में शामिल किया गया।​
    • अनुच्छेद 48A: राज्य पर्यावरण की रक्षा और सुधार करने तथा वनों और वन्यजीवों की रक्षा करने का प्रयास करेगा।
    • यह पर्यावरण संरक्षण का पहला संवैधानिक प्रावधान था।​
    • अनुच्छेद 39 में पहले से मौजूद सिद्धांतों को विस्तार दिया गया, विशेष रूप से बच्चों के स्वस्थ विकास और समान अवसरों पर।​
  • संशोधन का ऐतिहासिक संदर्भ
    • यह संशोधन 18 दिसंबर 1976 को पारित हुआ और 3 अप्रैल 1977 को प्रभावी हुआ।
    • आपातकालीन शक्तियों के दुरुपयोग के बाद 44वें संशोधन (1978) ने कुछ बदलाव किए, लेकिन DPSP में जोड़े गए इन प्रावधानों को बरकरार रखा।
    • इन नए तत्वों ने DPSP को समाजवादी, गांधीवादी और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से मजबूत बनाया।​
  • प्रभाव और महत्व
    • इन प्रावधानों ने कानूनी सहायता (जैसे लीगल सर्विसेज अथॉरिटी एक्ट, 1987), श्रमिक भागीदारी (ट्रेड यूनियन सुधार) और पर्यावरण संरक्षण (वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के बाद मजबूती) जैसे कानूनों को जन्म दिया। DPSP गैर-न्यायिक हैं, लेकिन नीति निर्माण में मार्गदर्शक हैं।​

25. भारतीय संविधान के राज्य के नीति निदेशक तत्व किस देश से गृहीत किए गए थे? [CGL (T-I) 24 जुलाई, 2023 (III-पाली), MTS (T-I) 12 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) आयरलैंड
Solution:
  • भारतीय संविधान में राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP) की अवधारणा आयरलैंड के संविधान से ली गई थी। आयरिश संविधान ने इन्हें स्पेन से गृहीत किया था।
  • संविधान निर्माताओं ने इन सिद्धांतों को एक कल्याणकारी राज्य की स्थापना के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में शामिल किया
  • जो भारत में सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र सुनिश्चित कर सके।
  • राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत सरकार के लिए नीतियों और कानूनों को तैयार करने के लिए दिशानिर्देशों का एक सेट हैं
  • जो लोगों के कल्याण को बढ़ावा देते हैं और एक न्यायपूर्ण और समतावादी समाज की स्थापना करते हैं।
  • वे किसी भी अदालत द्वारा लागू करने योग्य नहीं हैं, लेकिन उन्हें देश के शासन में मौलिक माना जाता है।
    Other Information
  • आयरलैंड के संविधान में निदेशक सिद्धांतों का एक सेट भी शामिल है, जो भारत के समान प्रकृति के हैं।
    • हालांकि भारतीय संविधान के विपरीत आयरिश संविधान में मौलिक अधिकार भी शामिल हैं जो उचित हैं।
    • अमेरिकी संविधान में निदेशक सिद्धांत नहीं हैं, लेकिन इसमें एक अधिकार विधेयक है जो अपने नागरिकों को कुछ मौलिक अधिकारों की गारंटी देता है।
    • USSR (सोवियत सोशलिस्ट रिपब्लिक संघ) एक संघीय समाजवादी राज्य था जो 1922 से 1991 तक अस्तित्व में था।
    • इसके संविधान में भी सिद्धांतों और अधिकारों का एक सेट था, लेकिन वे समाजवादी आदर्शों और संपत्ति के सामूहिक स्वामित्व को बढ़ावा देने के लिए तैयार थे।
    • दूसरी ओर, चीन में एक समाजवादी संविधान है जो शासन में कम्युनिस्ट पार्टी की भूमिका और अल्पसंख्यकों और महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर देता है।
  • उत्पत्ति और प्रेरणा
    • ये तत्व आयरलैंड के 1937 के संविधान के अनुच्छेद 45 से प्रेरित हैं, जहां समान अवधारणा मौजूद है।
    • भारतीय संविधान निर्माताओं ने इन्हें कल्याणकारी राज्य स्थापित करने के लिए अपनाया, जो सामाजिक-आर्थिक न्याय सुनिश्चित करते हैं।
    • DPSP को गैर-न्यायसंगत (non-justiciable) बनाया गया, अर्थात इन्हें अदालत में लागू नहीं कराया जा सकता, लेकिन ये राज्य नीतियों का आधार हैं।​
  • संवैधानिक स्थिति
    • भारतीय संविधान के भाग IV (अनुच्छेद 36 से 51) में ये शामिल हैं। अनुच्छेद 37 स्पष्ट करता है
    • ये राज्य के प्रशासन के लिए मौलिक हैं, किंतु बाध्यकारी नहीं। इन्हें समाजवादी, गांधीवादी और उदारवादी सिद्धांतों में वर्गीकृत किया जाता है
    • जो भारत की विशिष्ट परिस्थितियों के अनुरूप हैं।​
  • अन्य प्रभाव
    • संविधान सभा ने विश्व के विभिन्न संविधानों से विशेषताएं लीं, लेकिन DPSP विशेषकर आयरलैंड से हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, आयरलैंड से ही राज्यसभा नामांकन और राष्ट्रपति चुनाव जैसे प्रावधान भी आए।
    • ये तत्व मौलिक अधिकारों (भाग III) के पूरक हैं, जो समग्र संवैधानिक ढांचे को मजबूत बनाते हैं।​

26. भारत सरकार एक स्वास्थ्य योजना, आयुष्मान भारत योजना मुहैया करा रही है। इस प्रकार के सरकारी प्रयास राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों के ....... अंतर्गत आते हैं। [CHSL (T-I) 02 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) अनुच्छेद 47
Solution:
  • भारत सरकार की स्वास्थ्य योजनाएँ, जैसे आयुष्मान भारत योजना, मुख्य रूप से अनुच्छेद 47 के अंतर्गत आती हैं।
  • यह अनुच्छेद राज्य को लोगों के पोषण स्तर और जीवन स्तर को ऊँचा उठाने तथा लोक स्वास्थ्य में सुधार करने का निर्देश देता है।
  • स्वास्थ्य सेवाएँ मुहैया कराना लोक स्वास्थ्य में सुधार करने की दिशा में एक प्रत्यक्ष कदम है।
  • भारत सरकार द्वारा आयुष्मान भारत योजना (आधिकारिक रूप से आयुष्मान भारत - प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना या PM-JAY) गरीब और कमजोर परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान करती है
  • जो द्वितीयक और तृतीयक चिकित्सा सेवाओं के लिए कैशलेस उपचार सुनिश्चित करती है। यह योजना राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों के अनुच्छेद 47 के अंतर्गत आती है।
  • अनुच्छेद 47 राज्य को सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार करने, जीवन स्तर बढ़ाने और चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करने का कर्तव्य सौंपता है।​
  • अनुच्छेद 47 का महत्व
    • भारतीय संविधान के भाग IV में शामिल नीति निदेशक सिद्धांत (DPSP) राज्य को सामाजिक-आर्थिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करते हैं
    • लेकिन ये न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं होते। अनुच्छेद 47 स्पष्ट रूप से राज्य के कर्तव्य पर जोर देता है
    • वह नागरिकों के पोषण स्तर और जीवन मानक को ऊंचा उठाए तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करे, जिसमें महामारी नियंत्रण और चिकित्सा सुविधाएं शामिल हैं।
    • आयुष्मान भारत जैसी योजनाएं इसी सिद्धांत को मूर्त रूप प्रदान करती हैं, क्योंकि यह गरीबी रेखा से नीचे के लगभग 50 करोड़ लोगों को लक्षित करती है।​
  • आयुष्मान भारत योजना का विवरण
    • यह योजना 2018 में शुरू हुई थी और राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 पर आधारित है, जो सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) का लक्ष्य रखती है।
    • इसके तहत पात्र परिवारों को सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों में 1,400 से अधिक प्रक्रियाओं (जैसे सर्जरी, कैंसर उपचार, डायलिसिस) के लिए निःशुल्क इलाज मिलता है।
    • योजना का कार्यान्वयन राज्य स्वास्थ्य एजेंसियों के माध्यम से होता है, जिसमें केंद्र और राज्य सहयोगी संघवाद पर आधारित है।​
  • अन्य संबंधित DPSP
    • अनुच्छेद 45: बच्चों को 6-14 वर्ष तक निःशुल्क शिक्षा का प्रावधान, जो स्वास्थ्य से अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ा है।
    • अनुच्छेद 46: SC/ST जैसे कमजोर वर्गों के शैक्षिक-आर्थिक हितों की रक्षा, जिसमें स्वास्थ्य शामिल हो सकता है।
    • ये सिद्धांत आयुष्मान भारत को मजबूत नींव देते हैं, लेकिन अनुच्छेद 47 सबसे प्रत्यक्ष रूप से लागू होता है।​
  • योजना की उपलब्धियां और चुनौतियां
    • अब तक करोड़ों लाभार्थियों को लाभ पहुंचा चुकी है, लेकिन ग्रामीण पहुंच, धोखाधड़ी रोकथाम और सभी राज्यों में पूर्ण एकीकरण चुनौतियां बनी हुई हैं। यह सतत विकास लक्ष्यों (SDG 3) से जुड़ी है।​

27. राज्य को सभी श्रमिकों को आजीविका और एक सम्मानजनक जीवन स्तर उपलब्ध कराने का प्रयास करना चाहिए। भारत के परिप्रेक्ष्य में दिए गए कथन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प सही है? [CHSL (T-I) 10 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) संविधान के 43वें अनुच्छेद में इसका उल्लेख है।
Solution:
  • यह कथन अनुच्छेद 43 में दिए गए सिद्धांत को दर्शाता है, जो राज्य को श्रमिकों के लिए जीविकोपार्जन मजदूरी (living wage), काम की सभ्य स्थितियाँ, और एक सम्मानजनक जीवन स्तर सुनिश्चित करने का निर्देश देता है।
  • यह एक समाजवादी सिद्धांत है, जिसका उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
  • संवैधानिक प्रावधान
    • अनुच्छेद 43 स्पष्ट रूप से कहता है कि राज्य उपयुक्त विधान, आर्थिक संगठन या अन्य किसी भी तरीके से सभी कृषि, औद्योगिक या अन्य श्रमिकों को कार्य की सुविधा, जीविका मजदूरी और सभ्य जीवन स्तर प्रदान करने का प्रयास करेगा।
    • यह सिद्धांत समाजवादी विचारधारा से प्रेरित है और श्रमिकों के कल्याण को प्राथमिकता देता है। DPSP गैर-न्यायसंगत हैं
    • अर्थात् इन्हें अदालत में लागू नहीं कराया जा सकता, लेकिन ये सरकार के नीति निर्माण के लिए बाध्यकारी दिशानिर्देश हैं।​
  • भारत में कार्यान्वयन
    • भारत सरकार ने विभिन्न कानूनों और योजनाओं के माध्यम से इस सिद्धांत को लागू करने का प्रयास किया है
    • जैसे न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 (जिसे वेतन संहिता 2019 द्वारा मजबूत किया गया), प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना, स्किल इंडिया मिशन और सामाजिक सुरक्षा कोड।
    • ये उपाय अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, कौशल प्रशिक्षण और उचित वेतन प्रदान करने पर केंद्रित हैं
    • हालांकि पूर्ण कार्यान्वयन में चुनौतियां जैसे प्रवर्तन की कमी और अनौपचारिक रोजगार की व्यापकता बनी हुई हैं।
    • वेतन संहिता 2019 न्यूनतम वेतन को वैधानिक बनाती है और जीवन स्तर को ध्यान में रखते हुए इसे संशोधित करने का प्रावधान करती है।​
  • महत्व और चुनौतियां
    • यह कथन श्रमिक अधिकारों को मजबूत करने, गरीबी उन्मूलन और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक है।
    • लैंगिक समावेशन, कॉर्पोरेट उत्तरदायित्व और डेटा-आधारित निगरानी जैसे कदम उत्पादकता बढ़ाने और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने में योगदान देते हैं।
    • फिर भी, अनौपचारिक श्रमिकों (जैसे निर्माण और कृषि क्षेत्र में) की संख्या अधिक होने से पूर्ण सफलता में बाधा आती है।

28. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भारतीय संविधान के राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों के संबंध से सही है? [CHSL (T-I) 10 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

  • (A) ये नकारात्मक प्रकृति के होते हैं।
  • (B) इनके नैतिक और राजनीतिक प्रतिबंध हैं।
  • (C) ये अमीरों के कल्याण को बढ़ावा देते हैं।
  • (D) ये सकारात्मक प्रकृति के होते हैं।
Correct Answer: (b) (B) और (D)
Solution:
  •  ये नकारात्मक प्रकृति के होते हैं:
    • यह असत्य है। DPSP सकारात्मक प्रकृति के होते हैं, क्योंकि वे राज्य को कुछ करने का निर्देश देते हैं (कल्याणकारी कार्य)।
    • मौलिक अधिकार नकारात्मक होते हैं (राज्य को कुछ करने से रोकते हैं)।
  • इनके नैतिक और राजनीतिक प्रतिबंध हैं:
    • यह सत्य है। भले ही ये न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय न हों, इन सिद्धांतों का पालन करने का सरकारों पर नैतिक और राजनीतिक दायित्व होता है।
  •  ये अमीरों के कल्याण को बढ़ावा देते हैं:
    • यह असत्य है। DPSP का उद्देश्य लोक कल्याण और गरीबों के उत्थान को बढ़ावा देना है।
  •  ये सकारात्मक प्रकृति के होते हैं:
    • यह सत्य है, जैसा कि ऊपर बताया गया है।
    • भारतीय संविधान के राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत (Directive Principles of State Policy - DPSP) भाग IV (अनुच्छेद 36-51) में वर्णित हैं
    • जो राज्य को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए नीतियां बनाने का निर्देश देते हैं।
    • ये सिद्धांत आयरिश संविधान से प्रेरित हैं और मौलिक अधिकारों के पूरक के रूप में कार्य करते हैं, लेकिन गैर-न्यायसंगत (non-justiciable) हैं।​
  • विशेषताएं
    • ये सिद्धांत राज्य को कल्याणकारी राज्य स्थापित करने के लिए बाध्यकारी दिशानिर्देश प्रदान करते हैं
    • जैसे जीविका के पर्याप्त साधन (अनु. 39), समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता (अनु. 39A), तथा ग्राम पंचायतों का संगठन (अनु. 40)।
    • अनुच्छेद 37 स्पष्ट करता है कि इन्हें अदालत द्वारा लागू नहीं कराया जा सकता, लेकिन प्रशासन में मूलभूत हैं।
    • राज्य में केंद्र, राज्य सरकारें, स्थानीय निकाय और सभी सरकारी अधिकारी शामिल हैं।​
  • वर्गीकरण
    • DPSP को समाजवादी (अनु. 38-39: आर्थिक समानता), गांधीवादी (अनु. 40, 43, 46-48: ग्रामीण विकास, कुटीर उद्योग), उदारवादी-बौद्धिक
    • (अनु. 44-45: समान नागरिक संहिता, शिक्षा) तथा पर्यावरणीय (अनु. 48A, 51A(g)) में वर्गीकृत किया जाता है।
    • 42वें, 44वें और 97वें संशोधनों ने इन्हें मजबूत किया, जैसे शिक्षा का मौलिक अधिकार बनाना।​
  • महत्व और सीमाएं
    • ये सिद्धांत नीति निर्माण का आधार हैं, जैसे पंचायती राज, न्यूनतम वेतन और MGNREGA जैसी योजनाओं में परिलक्षित।
    • हालांकि, गैर-प्रवर्तनीय होने से आलोचना होती है, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने इन्हें मौलिक अधिकारों के साथ सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास किया है।
    • जनता चुनावों के माध्यम से इनका पालन सुनिश्चित करती है।

29. भारतीय संविधान का निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद राज्य को 'समान नागरिक संहिता' का प्रावधान का निर्देश देता है? [CHSL (T-I) 4 अगस्त, 2023 (II-पाली), MTS (T-I) 15 मई, 2023 (I-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (I-पाली), MTS (T-I) 14 अक्टूबर, 2021 (I-पाली), MTS (T-I) 22 अक्टूबर, 2021 (III-पाली), CHSL (T-I) 31 जनवरी, 2017 (III-पाली), CGL (T-I) 4 जून, 2019 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) अनुच्छेद 44
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 44 राज्य को भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) प्राप्त करने का निर्देश देता है।
  • यह उदार-बौद्धिक सिद्धांतों के अंतर्गत आता है और इसका उद्देश्य कानून के समक्ष सभी नागरिकों को समान बनाना है, चाहे वे किसी भी धर्म के हों।
  • यह प्रावधान राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों (Directive Principles of State Policy) का हिस्सा है, जो संविधान के भाग IV में आता है।
  • अनुच्छेद 44 स्पष्ट रूप से कहता है: "राज्य भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता प्राप्त कराने का प्रयास करेगा।"​
  • अनुच्छेद 44 का पाठ और महत्व
    • अनुच्छेद 44 एक गैर-न्यायिक रूप से प्रवर्तनीय (non-justiciable) निर्देशक सिद्धांत है, अर्थात् इसे अदालत द्वारा बाध्यकारी नहीं बनाया जा सकता, लेकिन यह राज्य की नीतियों को प्रभावित करने वाला नैतिक और नीतिगत दायित्व है।
    • इसका उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेना और संपत्ति जैसे व्यक्तिगत कानूनों (personal laws) को धर्मनिरपेक्ष और एकसमान बनाना है
    • ताकि सभी नागरिकों पर एक ही कानून लागू हो, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो।
    • यह संविधान सभा की बहसों में लंबे विवाद का विषय रहा, जहां डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने इसका समर्थन किया, लेकिन कुछ सदस्यों ने धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर विरोध जताया।​
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • संविधान सभा में अनुच्छेद 44 को 1948 में अपनाया गया, जो मूल रूप से अनुच्छेद 35 था। गोवा में पुर्तगाली नागरिक संहिता (1867) के आधार पर पहले से UCC जैसा प्रावधान मौजूद है, जो भारत का एकमात्र ऐसा राज्य है।
    • सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों जैसे शाह बानो केस (1985), सारला मुद्गल केस (1995) और जॉन वालिंगटन केस (2023) में अनुच्छेद 44 का हवाला देकर केंद्र और राज्यों को UCC लागू करने का निर्देश दिया, लेकिन इसे अनिवार्य नहीं ठहराया।
    • हाल ही में उत्तराखंड ने 2024 में UCC बिल पारित कर इसे लागू करने वाला पहला राज्य बन गया।​
  • वर्तमान स्थिति और चुनौतियाँ
    • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 के स्वतंत्रता दिवस पर UCC को "सेकुलर सिविल कोड" कहकर इसका समर्थन किया। हालांकि, इसका कार्यान्वयन विवादास्पद है
    • क्योंकि मुस्लिम पर्सनल लॉ, हिंदू कोड बिल आदि अलग-अलग समुदायों के लिए अलग कानून मौजूद हैं।
    • समर्थक इसे लैंगिक समानता (अनुच्छेद 14-15 के अनुरूप) और राष्ट्रीय एकता के लिए आवश्यक मानते हैं
    • जबकि विरोधी धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) का हवाला देते हैं।
    • केंद्र सरकार ने 22वीं कानून आयोग को UCC पर परामर्श मांगा है।

30. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39A में निम्नलिखित में से किसका उल्लेख किया गया है? [CHSL (T-I) 8 अगस्त, 2023 (III-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (I-पाली), CHSL (T-I) 30 जनवरी, 2017 (III-पाली), CGL (T-I) 6 जून, 2019 (II-पाली), C.P.O.S.I. 5 जून, 2016 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) समान न्याय को बढ़ावा देना और मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करना
Solution:
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39A में समान न्याय को बढ़ावा देने और गरीबों को मुफ्त कानूनी सहायता (Free Legal Aid) प्रदान करने का उल्लेख किया गया है।
  • यह सिद्धांत 42वें संशोधन (1976) द्वारा जोड़ा गया था। इसका उद्देश्य आर्थिक या अन्य अक्षमताओं के कारण किसी भी नागरिक को न्याय प्राप्त करने के अवसर से वंचित न होने देना है।
  •  कानूनी व्यवस्था सभी के लिए समान अवसर पर न्याय सुलभ बनाए, खासकर आर्थिक या अन्य कमजोरियों के कारण किसी को न्याय से वंचित न किया जाए।​
  • अनुच्छेद 39A का पूरा पाठ
    • अनुच्छेद 39A का मूल पाठ इस प्रकार है: "राज्य यह सुनिश्चित करेगा कि विधिक तंत्र इस प्रकार काम करे कि समान अवसर के आधार पर न्याय सुलभ हो
    • वह, विशिष्टतया, यह सुनिश्चित करने के लिए कि आर्थिक या किसी अन्य विफलता के कारण कोई भी नागरिक न्याय प्राप्त करने के अवसर से वंचित न रहे, उपयुक्त विधान या योजनाओं या किसी अन्य रीति से निःशुल्क विधिक सहायता की व्यवस्था करेगा।
    • यह संविधान के भाग IV (राज्य के नीति निर्देशक तत्वों) में 42वें संशोधन (1976) द्वारा जोड़ा गया, जो आयरिश संविधान से प्रेरित है।
    • इसका उद्देश्य गरीबों और कमजोर वर्गों को अदालतों तक पहुंच सुनिश्चित करना है।​
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और महत्व
    • संविधान सभा में मूल रूप से नीति निर्देशक तत्व सीमित थे, लेकिन इंदिरा गांधी सरकार द्वारा 1976 के आपातकाल में 42वें संशोधन से अनुच्छेद 39A जोड़ा गया, जो सामाजिक न्याय को मजबूत करने का प्रयास था।
    • सुप्रीम कोर्ट ने हुसैनारा खातून बनाम बिहार राज्य (1979) जैसे मामलों में इसे मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 21 - जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) से जोड़कर बाध्यकारी बनाया।
    • इससे कानूनी सहायता को मौलिक अधिकार का हिस्सा माना गया, जो आर्थिक न्याय (अनुच्छेद 39) को पूरक बनाता है।​
  • कार्यान्वयन और योजनाएं
    • भारत सरकार ने अनुच्छेद 39A के अनुपालन में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की स्थापना 1987 में की, जो 1995 के विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम के तहत काम करता है।
    • राज्य और जिला स्तर पर विधिक सेवा प्राधिकरण गरीबों, महिलाओं, बच्चों, विकलांगों को मुफ्त वकील, जागरूकता शिविर और लोक अदालतें प्रदान करते हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, एक गरीब मजदूर को सरकारी वकील मिलना इसी का परिणाम है।
    • हालांकि, चुनौतियां जैसे जागरूकता की कमी और संसाधनों की अपर्याप्तता बनी हुई हैं।​
  • संबंधित प्रावधान और प्रभाव
    • अनुच्छेद 39A अनुच्छेद 14 (समानता), 21 (जीवन का अधिकार) और 38 (सामाजिक न्याय) से जुड़ा है।
    • लोक अदालतों ने करोड़ों मामलों का निपटारा किया, जो न्याय की गति बढ़ाने में सहायक हैं।
    • हाल के वर्षों में डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे NALSA की ऐप और ई-विधिक सहायता ने पहुंच विस्तार की।
    • यह प्रावधान लोकतंत्र को मजबूत बनाता है, क्योंकि न्याय सबका अधिकार है।​​