राज्य की नीति के निदेशक तत्व

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31. भारतीय संविधान के निम्नलिखित में से कौन-सा राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों का एक उदारवादी सिद्धांत है? [CHSL (T-I) 9 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) समान नागरिक संहिता को संरक्षित रखना
Solution:
  • राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों (DPSP) में समान नागरिक संहिता (UCC) को संरक्षित रखना (अनुच्छेद 44) एक उदारवादी सिद्धांत है।
  • उदारवादी सिद्धांत उन सिद्धांतों को संदर्भित करते हैं जो तर्कसंगतता, आधुनिकता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर आधारित हैं।
  • UCC, जिसका उद्देश्य धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा देना और सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करना है, इस श्रेणी में आता है।
  • समान न्याय (a) और सामाजिक कल्याण (c) समाजवादी सिद्धांत हैं।
  • भारतीय संविधान के राज्य की नीति के निदेशक तत्व (Directive Principles of State Policy - DPSP) भाग IV (अनुच्छेद 36 से 51) में वर्णित हैं
  • जो राज्य को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश प्रदान करते हैं। ये तत्व न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं
  • लेकिन सरकार की नीतियों को प्रभावित करते हैं। इन्हें सामान्यतः समाजवादी, गांधीवादी और उदारवादी (Liberal) सिद्धांतों में वर्गीकृत किया जाता है।​
  • उदारवादी सिद्धांत क्या हैं?
    • उदारवादी सिद्धांत मुख्य रूप से व्यक्तिगत स्वतंत्रता, समान कानूनी ढांचा, अंतरराष्ट्रीय शांति और प्रशासनिक सुधारों पर जोर देते हैं
    • जो पश्चिमी उदारवादी विचारधारा से प्रेरित हैं।
    • ये समाजवादी सिद्धांतों (जैसे संपत्ति वितरण) या गांधीवादी सिद्धांतों (जैसे ग्राम स्वराज) से भिन्न हैं
    • क्योंकि ये राज्य के हस्तक्षेप को सीमित रखते हुए कानूनी समानता और वैश्विक सहयोग पर केंद्रित हैं।
    • अनुच्छेद 44, 50 और 51 उदारवादी सिद्धांतों के प्रमुख उदाहरण हैं।​
  • प्रमुख उदारवादी सिद्धांत
    • अनुच्छेद 44: समान नागरिक संहिता - राज्य पूरे भारत में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) लागू करने का प्रयास करेगा।
    • यह व्यक्तिगत कानूनों (जैसे हिंदू, मुस्लिम) को एकीकृत करने का उदारवादी प्रयास है, जो लिंग समानता और धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा देता है।​
    • अनुच्छेद 50: न्यायपालिका का कार्यपालिका से पृथक्करण - राज्य सार्वजनिक सेवाओं में न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग करने के लिए कदम उठाएगा।
    • इससे स्वतंत्र न्याय व्यवस्था सुनिश्चित होती है, जो लोकतंत्र का उदारवादी आधार है।​
    • अनुच्छेद 51: अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा - राज्य अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा को बढ़ावा देगा, राष्ट्रों के बीच विवादों का शांतिपूर्ण समाधान करेगा और संयुक्त राष्ट्र जैसे संगठनों का सम्मान करेगा। यह वैश्विक सहयोग का उदारवादी सिद्धांत है।​
  • वर्गीकरण का आधार
    • DPSP का वर्गीकरण औपचारिक नहीं है, लेकिन विद्वान इन्हें स्रोत और प्रकृति के आधार पर विभाजित करते हैं।
    • उदारवादी सिद्धांत आयरलैंड संविधान से प्रेरित हैं, जबकि समाजवादी (अनुच्छेद 38-39) समाजवाद पर और गांधीवादी (अनुच्छेद 40, 43, 46-48) ग्रामीण विकास
    • आधारित हैं। उदाहरण के लिए, अनुच्छेद 44 उदारवादी है क्योंकि यह कानूनी एकरूपता पर जोर देता है, न कि आर्थिक पुनर्वितरण पर।​​
  • महत्व और कार्यान्वयन
    • ये सिद्धांत कल्याणकारी राज्य की स्थापना में सहायक हैं, हालांकि गैर-कानूनी बाध्यकारी होने के कारण सरकारें इन्हें धीरे-धीरे लागू करती हैं।
    • अनुच्छेद 44 पर बहस जारी है (जैसे गोवा में लागू), जबकि अनुच्छेद 50 काफी हद तक साकार हो चुका है।
    • सर्वोच्च न्यायालय ने केशवानंद भारती मामले में इन्हें संविधान की मूल संरचना का हिस्सा माना।

32. कामकाजी महिलाओं के लिए काम करने की परिस्थितियां उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके यौन उत्पीड़न की रोकथाम और इसके लिए संगठन में व्यवस्था करना भी शामिल है, यह ....... के अंतर्गत आता है। [CHSL (T-I) 9 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) अनुच्छेद 42
Solution:
  • संविधान के अनुच्छेद 42 के तहत कहा गया है कि राज्य काम की न्यायसंगत और मानवोचित दशाओं को सुनिश्चित करने के लिए और प्रसूति सहायता के लिए उपबंध करेगा।
  • इसके तहत कामकाजी महिलाओं के लिए काम करने की परिस्थितियां उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके यौन उत्पीड़न की रोकथाम और उसके लिए संगठन की व्यवस्था करना भी शामिल है।
  •  जिसमें उनके यौन उत्पीड़न की रोकथाम और संगठन में इसके लिए आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee - ICC) जैसी व्यवस्था स्थापित करना शामिल है।
  • यह प्रावधान राज्य की नीति के निदेशक सिद्धांतों (Directive Principles of State Policy - DPSP) का हिस्सा है, जो भाग IV (अनुच्छेद 36-51) में वर्णित हैं।
  • अनुच्छेद 42 स्पष्ट रूप से कहता है कि "राज्य, उद्योगों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए न्यायपूर्ण और मानवीय दशाएं प्रदान करने और मातृत्व सहायता (maternity relief) प्रदान करने का प्रयास करेगा।"​
  • अनुच्छेद 42 का विस्तृत विवरण
    • अनुच्छेद 42 दो मुख्य भागों पर केंद्रित है: (1) श्रमिकों के लिए न्यायपूर्ण कार्य स्थितियां, जो कामकाजी महिलाओं सहित सभी को प्रभावित करती हैं
    • जिसमें सुरक्षित वातावरण, उचित कार्य घंटे, स्वास्थ्य सुविधाएं और उत्पीड़न-मुक्त माहौल शामिल हैं
    • मातृत्व लाभ, जो गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व और प्रसवोत्तर अवकाश प्रदान करता है। यौन उत्पीड़न की रोकथाम आधुनिक व्याख्या का हिस्सा है
    • जो 2013 के यौन उत्पीड़न रोकथाम अधिनियम (POSH Act) से जुड़ती है। यह अधिनियम अनुच्छेद 42 से प्रेरित है
    • हर संगठन (10 या अधिक कर्मचारियों वाले) में ICC गठित करने का बाध्य करता है, जो शिकायतों की जांच करती है।​
  • संबंधित कानून और कार्यान्वयन
    • मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 (संशोधित 2017): अनुच्छेद 42 पर आधारित, कामकाजी महिलाओं को 26 सप्ताह का सशुल्क मातृत्व अवकाश देता है।
    • यह नियोक्ताओं को क्रेच सुविधा प्रदान करने के लिए भी बाध्य करता है (50+ कर्मचारी)।
    • POSH अधिनियम, 2013: कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न को परिभाषित करता है (शारीरिक संपर्क, मांगें, अश्लील टिप्पणियां आदि)।
    • ICC में कम से कम आधी महिलाएं होनी चाहिए, और शिकायत 90 दिनों के अंदर दर्ज हो सकती है। उल्लंघन पर जुर्माना या लाइसेंस रद्दीकरण हो सकता है।
    • मूल अधिकारों से संबंध: अनुच्छेद 14 (समानता), 15 (भेदभाव निषेध), 19(1)(g) (व्यवसाय का अधिकार) और 21 (जीवन-स्वतंत्रता) के साथ जुड़ा, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने विशाखा मामले (1997) में निर्देश दिया।​
  • महत्व और चुनौतियां
    • ये प्रावधान महिलाओं को कार्यबल में सशक्त बनाते हैं, लेकिन DPSP गैर-न्यायिक होने से कार्यान्वयन राज्य पर निर्भर है।
    • ग्रामीण क्षेत्रों और असंगठित क्षेत्र में जागरूकता कम है, जबकि कॉर्पोरेट में ICC प्रभावी हैं। सरकारें नीतियों जैसे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ से इन्हें मजबूत करती हैं।
    • सर्वोच्च न्यायालय ने इसे संविधान की मूल संरचना का हिस्सा माना।​

33. भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद सभी श्रमिकों के लिए जीवनयापन योग्य वेतन और सामाजिक और सांस्कृतिक अवसरों के साथ एक सभ्य जीवन स्तर सुरक्षित करता है? [MTS (T-I) 05 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) अनुच्छेद 43
Solution:
  • अनुच्छेद 43 सभी श्रमिकों के लिए जीवनयापन योग्य वेतन (living wage), काम की सभ्य स्थितियाँ, और सामाजिक एवं सांस्कृतिक अवसरों के साथ एक सभ्य जीवन स्तर सुनिश्चित करने का प्रावधान करता है।
  • इसका उद्देश्य केवल न्यूनतम मजदूरी नहीं, बल्कि इतना पारिश्रमिक सुनिश्चित करना है जिससे श्रमिक और उनके परिवार गरिमा और सामाजिक भागीदारी के साथ जीवन यापन कर सकें।
  • अनुच्छेद 43 का पाठ
    • यह अनुच्छेद राज्य को निर्देश देता है कि वह सभी श्रमिकों—कृषि, उद्योग या अन्य क्षेत्रों में कार्यरत—के लिए उचित जीवन निर्वाह मजदूरी, सभ्य कार्य की स्थितियां, अवकाश का पूर्ण आनंद और सामाजिक-सांस्कृतिक अवसर प्रदान करने का प्रयास करे।
    • विशेष रूप से, ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देकर श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने का प्रावधान है।
    • यह नीति निर्देशक तत्वों (Directive Principles of State Policy) का हिस्सा है, जो भाग IV में आता है।​
  • महत्व और उद्देश्य
    • अनुच्छेद 43 का मुख्य उद्देश्य श्रमिक वर्ग के आर्थिक-सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देना है
    • ताकि वे केवल जीविका ही न चला सकें बल्कि सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग ले सकें और सम्मानजनक जीवन जी सकें।
    • यह आयरिश संविधान से प्रेरित है और सामाजिक न्याय की दिशा में राज्य की जिम्मेदारी निर्धारित करता है। हालांकि यह न्यायोचित नहीं है
    • लेकिन अदालतें इसे नीति निर्माण में मार्गदर्शक मानती हैं।​​
  • संबंधित कानून और क्रियान्वयन
    • इस अनुच्छेद को न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948, वेतन भुगतान अधिनियम 1936 और हाल की चार श्रम संहिताओं (जैसे वेतन संहिता 2019) के माध्यम से लागू किया जाता है
    • जो सभी श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षित कार्यस्थल प्रदान करती हैं।
    • अनुच्छेद 42 (कार्य की न्यायसंगत स्थितियां) और 39 (समान कार्य के लिए समान वेतन) से यह जुड़ा हुआ है।
    • सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में इसे मजबूरन लागू करने के आदेश दिए हैं।​
  • चुनौतियां और वर्तमान स्थिति
    • क्रियान्वयन में चुनौतियां जैसे असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का बहुमत, क्षेत्रीय असमानताएं और मुद्रास्फीति बनी हुई हैं
    • लेकिन श्रम सुधारों से सुधार हो रहा है। यह अनुच्छेद श्रमिक उत्थान का आधार बना हुआ है।

34. पोषण अभियान 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों के पोषण स्तर को प्राप्त करने का एक कार्यक्रम है। भारतीय संविधान का निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद पोषण स्तर को बढ़ाने के लिए प्रावधान करता है? [CHSL (T-I) 14 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) अनुच्छेद 47
Solution:
  • संविधान के अनुच्छेद 47 के तहत पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊंचा करने तथा लोक स्वास्थ्य का सुधार करने का राज्य का कर्तव्य है।
  • पोषण अभियान 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों के पोषण स्तर प्राप्त करने का राज्य का एक कार्यक्रम है जो उपर्युक्त प्रावधान के तहत चलाया जा रहा है।
  • अनुच्छेद 43 का पाठ
    • यह अनुच्छेद राज्य को निर्देश देता है कि वह सभी श्रमिकों—कृषि, उद्योग या अन्य क्षेत्रों में कार्यरत—के लिए उचित जीवन निर्वाह मजदूरी, सभ्य कार्य की स्थितियां, अवकाश का पूर्ण आनंद और सामाजिक-सांस्कृतिक अवसर प्रदान करने का प्रयास करे।
    • विशेष रूप से, ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देकर श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने का प्रावधान है।
    • यह नीति निर्देशक तत्वों (Directive Principles of State Policy) का हिस्सा है, जो भाग IV में आता है।​
  • महत्व और उद्देश्य
    • अनुच्छेद 43 का मुख्य उद्देश्य श्रमिक वर्ग के आर्थिक-सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देना है
    • ताकि वे केवल जीविका ही न चला सकें बल्कि सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग ले सकें और सम्मानजनक जीवन जी सकें।
    • यह आयरिश संविधान से प्रेरित है और सामाजिक न्याय की दिशा में राज्य की जिम्मेदारी निर्धारित करता है। हालांकि यह न्यायोचित नहीं है
    • लेकिन अदालतें इसे नीति निर्माण में मार्गदर्शक मानती हैं।​​
  • संबंधित कानून और क्रियान्वयन
    • इस अनुच्छेद को न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948, वेतन भुगतान अधिनियम 1936 और हाल की चार श्रम संहिताओं (जैसे वेतन संहिता 2019) के माध्यम से लागू किया जाता है
    • जो सभी श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षित कार्यस्थल प्रदान करती हैं।
    • अनुच्छेद 42 (कार्य की न्यायसंगत स्थितियां) और 39 (समान कार्य के लिए समान वेतन) से यह जुड़ा हुआ है।
    • सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में इसे मजबूरन लागू करने के आदेश दिए हैं।​
  • चुनौतियां और वर्तमान स्थिति
    • क्रियान्वयन में चुनौतियां जैसे असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का बहुमत, क्षेत्रीय असमानताएं और मुद्रास्फीति बनी हुई हैं
    • लेकिन श्रम सुधारों से सुधार हो रहा है। यह अनुच्छेद श्रमिक उत्थान का आधार बना हुआ है।

35. भारतीय संविधान के राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों की श्रेणी में निम्नलिखित में से किसे शामिल नहीं किया गया है? [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) नेहरूवादी
Solution:
  • राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों (DPSP) को उनकी प्रकृति और प्रेरणा के आधार पर मुख्य रूप से तीन व्यापक श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है: समाजवादी (b), उदारवादी (c), और गांधीवादी (d) सिद्धांत।
  • इन श्रेणियों का उपयोग केवल अध्ययन की सुविधा के लिए किया जाता है। 'नेहरूवादी' सिद्धांतों को आधिकारिक तौर पर DPSP की वर्गीकृत श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है।
  • भारतीय संविधान के भाग IV (अनुच्छेद 36 से 51) में राज्य की नीति के निदेशक सिद्धांत (Directive Principles of State Policy - DPSP) शामिल हैं
  • जो राज्य को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश प्रदान करते हैं।
  • ये सिद्धांत आयरिश संविधान से प्रेरित हैं और न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, लेकिन कानून निर्माण में मौलिक हैं।​
  • श्रेणियाँ
    • DPSP को मुख्यतः तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है: समाजवादी, गांधीवादी तथा उदारवादी/पश्चिमी सिद्धांत।
    • समाजवादी सिद्धांत आर्थिक समानता पर जोर देते हैं (अनु. 38-39), गांधीवादी ग्रामीण विकास और पंचायती राज पर (अनु. 40, 43, 46-48), जबकि उदारवादी पर्यावरण संरक्षण, अंतरराष्ट्रीय शांति आदि पर केंद्रित हैं (अनु. 47-51)।​
  • शामिल सिद्धांत
    • समाजवादी: आर्थिक न्याय, संपदा वितरण, समान वेतन (अनु. 39, 39A)।
    • गांधीवादी: ग्राम पंचायतों का संगठन (अनु. 40), कुटीर उद्योग (अनु. 43), पशु संरक्षण (अनु. 48)।
    • उदारवादी: समान न्याय प्रणाली (अनु. 39A), शिक्षा का अधिकार (अनु. 45), पर्यावरण संरक्षण (अनु. 48A), अंतरराष्ट्रीय शांति (अनु. 51)।​
  • क्या शामिल नहीं
    • प्रश्न में "निम्नलिखित में से किसे शामिल नहीं किया गया" संकेत देता है कि विकल्प दिए बिना सामान्यतः "नागरिकों को राज्य के विरुद्ध विद्रोह का अधिकार" या "संपत्ति का अधिकार" (जो पहले मौलिक था, अब अनु. 300A) को DPSP में शामिल नहीं माना जाता, क्योंकि DPSP राज्य के कर्तव्य हैं
    • व्यक्तिगत अधिकार। ये मौलिक अधिकारों (भाग III) या मूल कर्तव्यों (अनु. 51A) से भिन्न हैं।​

36. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 43B के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) यह सहकारी संगठन से संबंधित है।
Solution:
  • अनुच्छेद 43B राज्य को सहकारी समितियों (Co-operative Societies) के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कामकाज, लोकतांत्रिक नियंत्रण और पेशेवर प्रबंधन को बढ़ावा देने का निर्देश देता है।
  • इसे 97वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2011 द्वारा DPSP में शामिल किया गया था, इसलिए कथन (a) और (c) गलत हैं।
  • अनुच्छेद 43B का पाठ
    • अनुच्छेद 43B स्पष्ट रूप से कहता है कि राज्य सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कार्य, लोकतांत्रिक नियंत्रण, स्वायत्त प्रबंधन और पेशेवर प्रबंधन को बढ़ावा देने का प्रयास करेगा।
    • यह प्रावधान संविधान के भाग IV (अनुच्छेद 36 से 51) में सम्मिलित है, जो गैर-न्यायिक सिद्धांत हैं।
    • इनका उल्लंघन अदालतों द्वारा दंडनीय नहीं होता, लेकिन ये राज्य नीतियों को निर्देशित करते हैं।​
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • यह अनुच्छेद 97वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2011 द्वारा जोड़ा गया था, जो सहकारी समितियों को संवैधानिक दर्जा प्रदान करता है।
    • इस संशोधन ने भाग IXB (अनुच्छेद 243ZH से 243ZT) भी जोड़ा, जिसमें सहकारिता समितियों के गठन, चुनाव और प्रबंधन के प्रावधान हैं।
    • हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में इस संशोधन के कुछ हिस्सों को असंवैधानिक घोषित किया, लेकिन अनुच्छेद 43B बरकरार है।​
  • महत्वपूर्ण विशेषताएं
    • स्वैच्छिक गठन: सदस्यों की इच्छा से समितियों का निर्माण।
    • लोकतांत्रिक नियंत्रण: सदस्यों द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों का प्रबंधन।
    • पेशेवर प्रबंधन: कुशल प्रबंधकों की नियुक्ति।
    • यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, कृषि और छोटे उद्योगों को सहायता प्रदान करने में सहायक है।​

37. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 43B ....... का प्रावधान करता है। [MTS (T-I) 04 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) सहकारी समितियों को बढ़ावा देने
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 43B राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों के तहत सहकारी समितियों को बढ़ावा देने का प्रावधान करता है।
  • यह सिद्धांत विशेष रूप से सहकारी समितियों के कामकाज में स्वायत्तता और व्यावसायिक दक्षता सुनिश्चित करने पर जोर देता है।
  • इस सिद्धांत को शामिल करने का उद्देश्य सहकारी आंदोलन को संवैधानिक संरक्षण प्रदान करना था।
  • अनुच्छेद 43B का पूर्ण पाठ
    • अनुच्छेद 43B कहता है: "राज्य सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कार्यप्रणाली, लोकतांत्रिक नियंत्रण तथा पेशेवर प्रबंधन को बढ़ावा देने का प्रयास करेगा।
    • यह प्रावधान 97वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2011 द्वारा भाग IV में जोड़ा गया, जो 15 फरवरी 2012 से प्रभावी हुआ।
    • इसका उद्देश्य सहकारी समितियों को आर्थिक लोकतंत्र और सामूहिक कल्याण के सशक्त साधन के रूप में मजबूत बनाना है, विशेषकर ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में।​
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • यह अनुच्छेद सहकारी क्षेत्र में राजनीतिक हस्तक्षेप, कमजोर शासन और अक्षमताओं को दूर करने के लिए लाया गया।
    • संशोधन ने अनुच्छेद 19(1)(c) में सहकारी समितियों के गठन के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में शामिल किया तथा भाग IXB (अनुच्छेद 243ZH से 243ZT) जोड़ा, जो सहकारियों के शासन, चुनाव और जवाबदेही पर विस्तृत नियम देता है।
    • हालांकि, संघ बनाम राजेंद्र एन. शाह (2021) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सहकारियों से संबंधित कुछ प्रावधानों को असंवैधानिक ठहराया, किंतु अनुच्छेद 43B अप्रभावित रहा।​
  • महत्व और उद्देश्य
    • स्वैच्छिक गठन: सहकारी समितियां स्वतंत्र इच्छा से बनीं, बाध्यता से नहीं।​
    • स्वायत्तता और लोकतंत्र: स्वतंत्र कार्यप्रणाली, सदस्यों द्वारा लोकतांत्रिक नियंत्रण सुनिश्चित।​
    • पेशेवर प्रबंधन: प्रशिक्षण और कुशल प्रबंधन के माध्यम से दक्षता बढ़ाना।​
      ये सिद्धांत राज्य को नीतियां बनाते समय मार्गदर्शन देते हैं, हालांकि गैर-न्यायोचित हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, महाराष्ट्र के किसान समूह सस्ते बीज खरीदने हेतु सहकारी बनाते हैं, जहां राज्य पंजीकरण और प्रशिक्षण सहायता देता है।​
  • संदर्भ में स्थान
    • अनुच्छेद 43B अनुच्छेद 43A (कार्यकर्ताओं की उद्योग प्रबंधन में भागीदारी) के बाद तथा 44 (समान नागरिक संहिता) से पहले आता है।
    • यह भाग IV (अनुच्छेद 36-51) का हिस्सा है, जो राज्य के कल्याणकारी दायित्वों पर जोर देता है।
    • सहकारिता भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण है, जो ग्रामीण विकास को गति देती है।

38. सरकारी योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का उद्देश्य किसानों के लिए फसल बीमा सेवा उपलब्ध कराना है। इस प्रकार के सरकारी प्रयास भारतीय संविधान के निदेशक सिद्धांतों के ....... के अंतर्गत आते हैं। [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) अनुच्छेद 48
Solution:
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसे सरकारी प्रयास मुख्य रूप से अनुच्छेद 48 के अंतर्गत आते हैं।
  • यह अनुच्छेद राज्य को कृषि और पशुपालन को आधुनिक तथा वैज्ञानिक प्रणालियों से संगठित करने का निर्देश देता है।
  • फसल बीमा योजना, कृषि को जोखिम से बचाकर और स्थिरता प्रदान करके, आधुनिक कृषि प्रबंधन का एक अभिन्न अंग है।
  • जिससे उनकी आय स्थिर रहे और कृषि में निरंतरता बनी रहे। यह योजना 2016 में शुरू हुई थी
  • केंद्र तथा राज्य सरकारें मिलकर किसानों से नाममात्र प्रीमियम लेती हैं, जबकि अधिकांश प्रीमियम का बोझ सरकार वहन करती है।​
  • संवैधानिक आधार
    • इस प्रकार के सरकारी प्रयास भारतीय संविधान के निदेशक सिद्धांतों के राज्य नीति के निदेशक तत्त्वों के अंतर्गत आते हैं
    • विशेष रूप से अनुच्छेद 39 के अधीन, जो राज्य को आर्थिक व्यवस्था का संचालन इस प्रकार करने का निर्देश देता है
    • जिसमें उत्पादन के साधनों का अधिकतमकरण हो और धन-सम्पदा का संकेंद्रण न हो।
    • अनुच्छेद 48A कृषि और पशुपालन के संरक्षण को बढ़ावा देने पर जोर देता है
    • जबकि अनुच्छेद 47 जन स्वास्थ्य के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए पोषण स्तर और जीवन स्तर में सुधार का आदेश देता है
    • जो अप्रत्यक्ष रूप से किसानों की सुरक्षा से जुड़ा है।​
  • योजना के उद्देश्य विस्तार से
    • प्राकृतिक आपदाओं जैसे सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि, बेमौसम बारिश आदि से फसल क्षति पर त्वरित मुआवजा सुनिश्चित करना।​
    • किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, बेहतर बीजों और उच्च मूल्य वाले inputs अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना, जिससे जोखिम कम हो।​
    • कृषि ऋण प्रवाह को सुगम बनाना, क्योंकि बीमा के अभाव में किसान कर्ज के जाल में फंस जाते हैं।​
    • यह योजना खरीफ, रबी और व्यावसायिक फसलों को कवर करती है तथा क्षेत्र-आधारित मूल्यांकन से दावों का तेज निपटान करती है।​
  • कवरेज प्रीमियम संरचना
    • योजना बुवाई पूर्व से कटाई उपरांत तक सभी गैर-प्रतिबंधित जोखिमों को शामिल करती है।
    • प्रीमियम दरें खरीफ फसलों के लिए 2%, रबी के लिए 1.5% और व्यावसायिक के लिए 5% हैं, शेष सरकार वहन करती है।
    • 2024-25 में उच्च नामांकन दर्ज हुआ, जो डिजिटल सुधारों का परिणाम है।​
  • प्रभाव उपलब्धियां
    • पीएमएफबीवाई ने किसानों की आय स्थिरता सुनिश्चित की है और 2025 तक लाखों हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया।
    • यह "एक राष्ट्र, एक फसल, एक प्रीमियम" सिद्धांत पर कार्य करती है, जो समानता लाती है।
    • हालांकि, जलवायु संकट के कारण इसमें किसान-समर्थक परिवर्तन किए जा रहे हैं।

39. भारतीय संविधान में राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है? [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) 'संविधान की नवीन विशेषता' के रूप में वर्णित है।
Solution:
  • संविधान सभा के सदस्य और कानूनी विशेषज्ञ डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों (DPSP) को भारतीय संविधान की 'नवीन विशेषता' (Novel Feature) के रूप में वर्णित किया था।
  • DPSP संविधान के भाग IV (न कि भाग II) में अनुच्छेद 36 से 51 तक निहित हैं, और इसे आयरलैंड से लिया गया है (न कि सोवियत संघ से)।
  • जो राज्य को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए नीतियां बनाने का मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
  • ये सिद्धांत आयरलैंड के संविधान से प्रेरित हैं और मौलिक अधिकारों (भाग III) के पूरक के रूप में कार्य करते हैं, लेकिन इनका न्यायालय द्वारा प्रवर्तन नहीं हो सकता।​
  • मुख्य विशेषताएं
    • ये सिद्धांत राज्य को निर्देश देते हैं कि कानून निर्माण और प्रशासन में इन्हें मूलभूत मानकर कार्य किया जाए, हालांकि अनुच्छेद 37 स्पष्ट करता है
    • ये न्यायिक रूप से प्रवर्तनीय नहीं हैं।
    • राज्य का अर्थ यहां केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, स्थानीय निकाय और सभी सरकारी अधिकारी हैं, जैसा अनुच्छेद 36 में परिभाषित है।
    • इनका उद्देश्य कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना है, जिसमें समान जीविका साधन, संपदा वितरण और गांधीवादी सिद्धांत शामिल हैं।​
  • वर्गीकरण
    • समाजवादी सिद्धांत: अनुच्छेद 38-39 में सामाजिक-आर्थिक न्याय, संपदा का समान वितरण और कमजोर वर्गों का संरक्षण।​
    • गांधीवादी सिद्धांत: अनुच्छेद 40-48 में ग्राम पंचायतें, कुटीर उद्योग, पशु संरक्षण और शराबबंदी जैसे प्रावधान।​
    • उदारवादी-बौद्धिक सिद्धांत: अनुच्छेद 50-51 में न्यायपालिका का कार्यपालिका से पृथक्करण, अंतरराष्ट्रीय शांति और पर्यावरण संरक्षण।​
  • महत्व और आलोचना
    • ये सिद्धांत विधायिका और कार्यपालिका के लिए मानदंड निर्धारित करते हैं, जिनकी सफलता चुनावों में परखी जाती है, जैसा डॉ. अंबेडकर ने कहा।
    • आलोचना होती है कि ये गैर-प्रवर्तनीय हैं, लेकिन व्यावहारिक रूप से इनसे कई कानून बने हैं
    • जैसे भूमि सुधार। 42वें, 44वें और 97वें संशोधनों से इनकी संख्या बढ़ी, और कुछ मौलिक अधिकारों में बदले गए।​
  • सही कथन की पहचान
    • प्रश्न विकल्प-आधारित लगता है, लेकिन दिए बिना सामान्य सही कथन है: DPSP न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं है
    • फिर भी नीति निर्माण में बाध्यकारी हैं। अन्य सामान्य सही तथ्य: ये आयरलैंड से लिए गए हैं और मौलिक अधिकारों से असंगत कानून बना सकते हैं
    • (अनुच्छेद 31C)। पूर्ण विवरण में ये संविधान का नैतिक आधार हैं।

40. भारतीय संविधान के निम्नलिखित में से कौन-सी राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों की एक विशेषता है? [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) लागू नहीं किए जा सकते।
Solution:
  • राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों (DPSP) की एक मुख्य विशेषता यह है कि वे न्यायालय द्वारा लागू नहीं किए जा सकते (गैर-न्यायसंगत)
  • इसका मतलब है कि यदि राज्य इन सिद्धांतों को लागू नहीं करता है तो किसी नागरिक को कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं है
  • वह इसे लागू कराने के लिए न्यायालय जा सके। ये सिद्धांत सरकारों के लिए केवल नैतिक और राजनीतिक निर्देश हैं।
  • भारतीय संविधान के राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों (Directive Principles of State Policy - DPSP) की एक प्रमुख विशेषता यह है
  • ये न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं। अनुच्छेद 37 स्पष्ट रूप से कहता है कि ये सिद्धांत राज्य के लिए मौलिक हैं
  • कानून निर्माण में उनका पालन कर्तव्यपूर्ण है, लेकिन इन्हें अदालत में लागू नहीं कराया जा सकता।​
  • गैर-प्रवर्तनीयता
    • ये सिद्धांत मौलिक अधिकारों (भाग III) से भिन्न हैं, जो न्यायिक रूप से लागू होते हैं, जबकि DPSP नैतिक और नीतिगत दिशानिर्देश हैं।
    • राज्य इनका उल्लंघन करने पर चुनावों में जवाबदेह होता है, लेकिन कोई कानूनी दंड नहीं।
    • आयरलैंड के संविधान से प्रेरित ये सिद्धांत कल्याणकारी राज्य स्थापित करने के लिए हैं।​
  • अन्य विशेषताएं
    • व्यापक दायरा: अनुच्छेद 36-51 में समाजवादी, गांधीवादी और उदारवादी सिद्धांत शामिल, जैसे समान संपदा वितरण (अनु. 39) और ग्राम पंचायतें (अनु. 40)।​
    • राज्य की परिभाषा: केंद्र, राज्य सरकारें, स्थानीय निकाय और अधिकारी सभी सम्मिलित।​
    • मौलिक अधिकारों से पूरक: अनुच्छेद 31C के तहत DPSP लागू करने वाले कानून मौलिक अधिकारों के विरुद्ध संरक्षित।​
  • महत्वपूर्णता
    • ये सिद्धांत विधायिका को सामाजिक-आर्थिक न्याय का मार्गदर्शन देते हैं, जिससे भूमि सुधार, शिक्षा अधिकार जैसे कानून बने।
    • हालांकि आलोचना होती है कि ये 'मृत अक्षर' हैं, लेकिन संविधान सभा ने इन्हें जानबूझकर गैर-कानूनी बनाया ताकि संसदीय संप्रभुता बनी रहे।
    • कुल मिलाकर, DPSP भारत को लोकतांत्रिक समाजवाद की दिशा देते हैं।