Correct Answer: (a) मार्च, 2024
Solution:- जून, 2021 में भारत सरकार ने FAME इंडिया स्कीम II (Faster Adoption and Manufacturing of Electric Vehicles in India) का विस्तार किया
- जिसका उद्देश्य मार्च, 2024 तक इलेक्ट्रिक वाहनों के विकास को बढ़ावा देना है।
- इस योजना में इलेक्ट्रिक वाहनों को खरीदने के लिए सब्सिडी दी जाती है, ताकि देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्रोत्साहन मिल सके।
- FAME-II योजना का पृष्ठभूमि
- FAME-II (Faster Adoption and Manufacturing of Electric Vehicles in India Phase-II) राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान (NEMMP) का हिस्सा है।
- इसे 1 अप्रैल 2019 से शुरू किया गया था, मूल बजट 10,000 करोड़ रुपये का था
- जिसे बाद में 11,500 करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया। योजना का फोकस सार्वजनिक और साझा परिवहन के विद्युतीकरण पर रहा
- जैसे e-बसें, e-2 व्हीलर, e-3 व्हीलर और e-4 व्हीलर।
- जून 2021 का विस्तार विशेष रूप से इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर सब्सिडी बढ़ाने के लिए था।
- जून 2021 विस्तार की मुख्य विशेषताएँ
- इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों (e-2W) के लिए सब्सिडी को 10,000 रुपये प्रति kWh से बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति kWh कर दिया गया, जो 50% की वृद्धि थी।
- अधिकतम सब्सिडी वाहन की लागत का 40% तक सीमित की गई (पहले 20%)।
- इसका उद्देश्य EV की अपनायी बढ़ाना था, खासकर दोपहिया सेगमेंट में, जो भारत में सबसे बड़ा बाजार है।
- योजना के लक्ष्य और समर्थन
- योजना ने निम्नलिखित लक्ष्यों को लक्षित किया:
- 7,090 e-बसें
- 5 लाख e-3 व्हीलर
- 55,000 e-4 व्हीलर पैसेंजर कारें
- 10 लाख e-2 व्हीलर
- इसके अलावा, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी प्रोत्साहन दिया गया
- जिसमें 10,985 EV चार्जिंग स्टेशन मंजूर किए गए। कुल मिलाकर, 16.15 लाख से अधिक EV को प्रोत्साहन मिला।
- उपलब्धियों और प्रभाव
- FAME-II के तहत 14.27 लाख e-2W, 1.59 लाख e-3W, 22,548 e-4W और 5,131 e-बसों को सब्सिडी मिली।
- यह योजना भारत को स्वच्छ परिवहन की ओर ले गई, प्रदूषण कम करने और आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद की।
- हालांकि, योजना मार्च 2024 में समाप्त हो गई, उसके बाद PM E-DRIVE जैसी नई योजनाएँ शुरू हुईं।
- सब्सिडी योग्यता और प्रक्रिया
- सब्सिडी केवल उन्नत बैटरी (A+ श्रेणी) वाले वाहनों पर मिलती थी।
- यह डिमांड इंसेंटिव के रूप में सीधे खरीद पर दी जाती थी।
- पोर्टल fame2.heavyindustries.gov.in के माध्यम से ट्रैक किया जाता था।