रोग एवं उपचार (जीव विज्ञान)Total Questions: 3311. निम्नलिखित में से कौन-सा रोग कवक के कारण होता है? [CHSL (T-I) 21 मार्च, 2023 (I-पाली)](a) तपेदिक(b) दाद(c) हैजा(d) कोविड-19Correct Answer: (b) दादSolution:दाद (Ringworm) रोग ट्राइकोफाइटन एवं माइक्रोस्पोरम आदि जैसे कवकों द्वारा होता है।कवक बीजाणु नम तथा क्षतिग्रस्त त्वचा से होकर मनुष्य के शरीर में प्रवेश करते हैंएवं अंकुरित होकर कवक तंतुओं का निर्माण करते हैजिसके फलस्वरूप त्वचा पर भद्दे लाल रंग के चकत्ते पड़ जाते हैं जिससे खुजली होती है।यह रोग मिट्टी, संक्रमित व्यक्तियों के तौलिए, कपड़े आदि के प्रयोग से होता है।प्रमुख कवकजनित रोगएथलीट फुट (Athlete's Foot) पैरों की त्वचा को प्रभावित करता हैजहां कवक नमी वाली जगहों में पनपकर त्वचा को मोटा, फटने वाला और दर्दनाक बना देता है।गंजापन (Baldness या Tinea Capitis) सिर की त्वचा पर टिनिया कैपिटिस कवक से होता हैजो बालों के रोम को नष्ट कर बाल झड़ने का कारण बनता है।अन्य महत्वपूर्ण रोगखाज (Scabies) को कुछ स्रोतों में कवक से जोड़ा जाता है, हालांकि यह मुख्यतः माइट्स से होता हैकवक संक्रमण में त्वचा पर सफेद दाग और तेज खुजली होती है।कैंडिडिआसिस (Candidiasis) कैंडिडा नामक यीस्ट कवक से उत्पन्न होता हैजो मुंह (थ्रश), योनि या रक्तप्रवाह में फैल सकता है, जिससे जलन, सफेद कोटिंग और बुखार जैसी समस्याएं होती हैं।फंगल निमोनिया या एस्परगिलोसिस जैसे रोग फेफड़ों को प्रभावित करते हैंजहां कवक खांसी, थूक और सांस लेने में कठिनाई पैदा करता है, खासकर कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में।कारण और फैलावकवक नम, गर्म वातावरण में पनपते हैं और संक्रमित सतहों, मिट्टी या व्यक्ति से व्यक्ति संपर्क से फैलते हैंकमजोर इम्यून सिस्टम वाले व्यक्ति अधिक जोखिम में रहते हैं।ये रोग एंटीबायोटिक्स पर काम नहीं करते, बल्कि एंटी-फंगल दवाओं जैसे क्लोट्रिमाजोल या फ्लुकोनाजोल से इलाज होता है।रोकथाम के उपायस्वच्छता बनाए रखें, नम जगहों से बचें, संक्रमित व्यक्ति के सामान का उपयोग न करेंजूते-मोजे सूखे रखें ताकि कवक संक्रमण रोका जा सके।12. 2023 में, भारत सरकार ने ....... बीमारी को खत्म करने के लिए राष्ट्रव्यापी 'सर्व दवा सेवन' या मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन शुरू किया। [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (II-पाली)](a) जीका वायरस(b) थैलेसीमिया(c) लसीका फाइलेरियासिस(d) मल्टीड्रग रेजिस्टेंट ट्यूबरक्लोसिसCorrect Answer: (c) लसीका फाइलेरियासिसSolution:वर्ष 2023 में, भारत सरकार ने लसीका फाइलेरियासिस नामक बीमारी को खत्म करने के लिए राष्ट्रव्यापी 'सर्व दवा सेवन' या मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन अभियान शुरू किया।वैश्विक लक्ष्य से तीन साल पहले वर्ष 2027 तक लसीका फाइलेरियासिस को समाप्त करने का लक्ष्य है।अभियान का उद्देश्यलसीका फाइलेरिया एक परजीवी संक्रमण है जो मच्छरों (मुख्य रूप से कूलेट्स क्विंक्वेफासिएटस) के काटने से फैलता हैहाथियों की सूजन (Elephantiasis), लिम्फेडेमा तथा हाइड्रोसील जैसी स्थायी विकलांगता पैदा करता है।विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत में दुनिया के लगभग 40% फाइलेरिया प्रभावित लोग रहते हैंइसलिए 2016 तक उन्मूलन का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन चुनौतियों के कारण इसे आगे बढ़ाया गया।MDA में आबादी वाले पूरे इलाकों में और Ivermectin जैसी दवाओं का एक साथ वितरण किया जाता हैताकि संक्रमण के स्रोत को कम किया जाए—यहां तक कि स्वस्थ लोगों को भी दवा दी जाती है।2023 में प्रारंभफरवरी 2023 में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने इस राष्ट्रव्यापी अभियान का शुभारंभ कियाजो विशेष रूप से 10 फाइलेरिया प्रभावित राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड आदि) में घर-घर जाकर दवाएं वितरित करने पर केंद्रित था।कुछ जिलों में ट्रिपल ड्रग थेरेपी (Triple Drug Therapy - TDT या IDA: Ivermectin + DEC + Albendazole) का पायलट परीक्षण शुरू हुआजैसे बिहार का अरवल, झारखंड का सिमडेगा, उत्तर प्रदेश का वाराणसी, महाराष्ट्र का नागपुर और कर्नाटक का यादगीर।यह दो-दवा थेरेपी से अधिक प्रभावी साबित हुई, जिससे संक्रमण दर 80% तक तेजी से घटी।अभियान में 65% से अधिक कवरेज का लक्ष्य रखा गया।कार्यान्वयन प्रक्रियाचरणबद्ध तरीके से: उच्च जोखिम वाले ब्लॉकों में पहले दौर, फिर कम जोखिम वाले में। उदाहरण के लिएउत्तर प्रदेश में 2023 के बाद भी 2026 में 21 जिलों के 64 ब्लॉकों में फरवरी में IDA चला।दवाओं का वितरण: स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर मुफ्त दवा देते हैंगर्भवती महिलाओं, बच्चों (2 साल से कम) और गंभीर बीमारियों वालों को छोड़कर।निगरानी: माइक्रोफ्लैरिया सर्वे (Mf रेट <1% होने पर रोक), वेक्टर नियंत्रण (मच्छरदानी, लार्विसाइड) और IEC (जागरूकता) गतिविधियां।चुनौतियां: दवा अस्वीकृति (लगभग 20-30%), प्रवासी आबादी और ग्रामीण पहुंच।सरकार ने ASHA कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहन और डोर-टू-डोर फॉलो-अप बढ़ाया।उपलब्धियां और प्रगतिभारत ने 2023 तक 700+ जिलों को MDA-मुक्त घोषित किया, और 2025 तक 90% क्षेत्रों में संक्रमण दर 1% से नीचे लाई।बिहार जैसे राज्यों में भी सफलता मिली। WHO ने भारत को 2027 तक वैश्विक उन्मूलन सूची में रखा।कुल मिलाकर, MDA ने 120 मिलियन से अधिक प्रभावितों में से करोड़ों को बचाया।13. निद्रा रोग एक रोग वाहक सूक्ष्मजीवों द्वारा जनित रोग है जो किस सूक्ष्म परजीवी प्रजातियों के संक्रमण के कारण होता है? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (II-पाली)](a) जिआर्डिया डुओडेनैलिस(b) बलैंटिडायसिस कोलाई(c) साइक्लोस्पोरा केयेटेनेंसिस(d) ट्रिपैनोसोमा ब्रूसीCorrect Answer: (d) ट्रिपैनोसोमा ब्रूसीSolution:निद्रा रोग (Sleeping Sickness) / अफ्रीकी ट्रिपैनोसोमियासिस: यह एक परजीवी रोग हैजो ट्रिपैनोसोमा ब्रूसी (Trypanosoma brucei) नामक प्रोटोजोआ परजीवी के संक्रमण के कारण होता है।यह रोग त्सेत्से मक्खी (tsetse fly) के काटने से फैलता है।कारण और परजीवीट्रिपैनोसोमा ब्रूसी मुख्य रूप से दो उप-प्रजातियों में सक्रिय होता हैट्रिपैनोसोमा ब्रूसी गैम्बिएन्से (T. b. gambiense) और ट्रिपैनोसोमा ब्रूसी रोडेसीएन्से जो क्रमशः पश्चिम और पूर्वी अफ्रीका में प्रचलित हैं।यह फ्लैजेलेटेड प्रोटोजोआ किंगडम प्रोटिस्टा से संबंधित हैरक्त, लसीका तथा मस्तिष्क-मेरु रज्जु द्रव में रहकर गुणन करता है।संक्रमण त्सेत्से मक्खी के काटने से होता हैजो परजीवी को अपने लार ग्रंथि में ले जाती है और काटते समय इंजेक्ट कर देती है।लक्षण और चरणरोग दो चरणों में विकसित होता है।प्रथम चरण (हेमो-लिम्फैटिक) में बुखार, सिरदर्द, जोड़ों में दर्द, लसीका ग्रंथियों का सूजन (विंटरबॉटम्स सूजन) और थकान जैसे लक्षण दिखते हैं।द्वितीय चरण (न्यूरोलॉजिकल) में परजीवी रक्त-मस्तिष्क अवरोध पार कर मेनिन्जो-एन्सेफेलाइटिस पैदा करता हैजिससे गहन नींद, भ्रम, कोमा और मृत्यु हो सकती हैयही कारण है कि इसे "निद्रा रोग" कहा जाता है। अनुपचारित मामलों में मृत्यु दर 100% तक होती है।फैलाव और महामारी विज्ञानयह रोग मुख्यतः उप-सहारा अफ्रीका के ग्रामीण, गरीब क्षेत्रों में सीमित हैजहां त्सेत्से मक्खी पाई जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 2025 तक लगभग 1,000 नए मामले सालाना दर्ज होते हैंलेकिन यह उन्मूलन के करीब है। पशुओं (जैसे गाय) में भी फैलता है, जो जलाशय का काम करते हैं।निदान और उपचारनिदान रक्त, चैनल द्रव या CSF में परजीवी का सूक्ष्मदर्शी परीक्षण, PCR या सेरोलॉजिकल टेस्ट से होता है।प्रारंभिक चरण में सूरामिन या पेंटामिडाइन, जबकि उन्नत चरण में मेलार्सोप्रोल या एफ्लॉर्निथाइन प्रभावी हैं।नई दवा फेक्सिनिडाज़ोल एकल खुराक में पूर्ण उपचार प्रदान करती है।रोकथामरोकथाम में त्सेत्से मक्खी नियंत्रण (कीटनाशक जाल, कीट नाशक), सुरक्षात्मक कपड़े, कीड़ों से बचाव क्रीम और स्क्रीनिंग शामिल है।अफ्रीका में सक्रिय निगरानी और जलाशयों का प्रबंधन महत्वपूर्ण है।14. अंकुशकृमि (हुकवर्म) नामक सूत्रकृमि परजीवी किस प्रजाति से संबंधित है, जो आमतौर पर संक्रमित मिट्टी से फैलते हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 2023 (II-पाली)](a) फेरेटिमा(b) हिरुडिनेरिया(c) फेसिओला(d) ऐन्किलोस्टोमाCorrect Answer: (d) ऐन्किलोस्टोमाSolution:अंकुशकृमि (Hookworm): यह एक प्रकार का परजीवी कृमि है जो मनुष्यों की आंतों में रहता है।मुख्य प्रजातियां जो मनुष्यों को संक्रमित करती हैंवे ऐन्किलोस्टोमा डुओडेनैल (Ancylostoma duodenale) और नेकेटर अमेरिकेनस (Necator americanus) हैं।ये परजीवी संक्रमित मिट्टी के संपर्क में आने से फैलते हैं, आमतौर पर नंगे पैर चलने से।वर्गीकरण इसकी प्रमुख प्रजातियाँ Ancylostoma duodenale (पुरानी दुनिया में आम) और नई दुनिया में प्रचलित) हैंजो दोनों ही मानव परजीवी के रूप में कार्य करती हैं।ये कृमि द्विपक्षीय सममित, अंग तंत्र स्तर वाले और पूर्ण आहारनाल वाले होते हैं, जिसमें पेशीय ग्रसनी प्रमुख होती है।शारीरिक विशेषताएँमादा कृमि 10-13 मिमी लंबी और 0.6 मिमी मोटी होती हैजबकि नर छोटे (8-11 मिमी) और पतले होते हैं, जिनके पीछे तरल कूप (copulatory bursa) होता है।इनके मुँह में काटने वाले अंकुश या दाँत जैसे अग्रभाग होते हैंजो आंत की दीवार से चिपककर रक्त शोषण करते हैं। शरीर बेलनाकार, भूरा और नुकीले सिरे वाला होता हैसाथ ही एकल उदर नली अपशिष्ट उत्सर्जन के लिए मौजूद रहती है।जीवन चक्रजीवन चक्र मल-मिट्टी-त्वचा के माध्यम से पूर्ण होता है: मादा कृमि प्रतिदिन 5000-30,000 अंडे क्षुद्रांत्र में देती हैजो मल के साथ बाहर निकलते हैं। गर्म-नम मिट्टी में 1-2 दिनों में लार्वा बनते हैंजो 5-10 दिनों में संक्रामक (filariform) अवस्था प्राप्त कर लेते हैं।ये लार्वा नंगे पैरों वाली त्वचा (आमतौर पर पैर) से प्रवेश कर रक्तप्रवाह से फेफड़ों और अंततः क्षुद्रांत्र पहुँचते हैंजहाँ परिपक्व होकर परजीवी जीवन शुरू करते हैं।संक्रमण का प्रसारयह मृदा-संचारित हेल्मिन्थ (soil-transmitted helminth) है, जो दूषित मिट्टी से फैलता हैविशेषकर नंगे पैर चलने, अस्वच्छता और खराब स्वच्छता वाले क्षेत्रों में।गर्म, नम जलवायु (उष्णकटिबंधीय क्षेत्र) में प्रचुर, जैसे भारत, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका।मनुष्यों के अलावा कुत्ते-बिल्लियाँ भी संवाहक हो सकते हैं।लक्षण और प्रभावसंक्रमण के प्रारंभिक चरण में त्वचा पर खुजली, फुंसी या "ground itch" होता हैफेफड़ों में पहुँचने पर खाँसी।आंत में बसने पर एनीमिया (रक्तकीयता), कुपोषण, पेटदर्द, दस्त, थकान और बच्चों में शारीरिक-मानसिक विकास रुकना।भारी संक्रमण से प्रोटीन की कमी, हृदयभार और मृत्यु भी संभव।रोकथाम और उपचाररोकथाम के लिए जूते पहनना, शौचालय उपयोग, मिट्टी दूषण रोकना और स्वच्छता।उपचार में एल्बेंडाजोल या मेबेंडाजोल जैसी दवाएँ प्रभावी, जो कृमि को नष्ट करती हैं।सामूहिक दवा वितरण (mass deworming) विकासशील देशों में प्रचलित।15. मानव शरीर में अत्यधिक मात्रा में कैडमियम की उपस्थिति के कारण कौन-सा रोग होता है? [CHSL (T-I) 4 अगस्त, 2023 (II-पाली)](a) एक्जिमा(b) इटाई-इटाई(c) मिनीमाता(d) रक्ताल्पताCorrect Answer: (b) इटाई-इटाईSolution:इटाई-इटाई नामक बीमारी के लिए कैडमियम धातु उत्तरदायी होता है।यह रोग कैडमियम के दीर्घकालीन विषाक्तता से होता है।सर्वप्रथम यह रोग जापान के टोयोटा प्रांत में देखा गया था।खनन कार्य के द्वारा नदियों में कैडमियम के विमोचन से यह रोग फैला था।इटाई-इटाई रोग का इतिहासयह रोग पहली बार 1960 के दशक में जापान के तोयामा प्रांत के जिन्जू नदी क्षेत्र में देखा गया थाजहां औद्योगिक कचरे से कैडमियम प्रदूषित पानी चावल के खेतों में मिल गया था।महिलाओं और बच्चों में यह अधिक प्रभावित करने वाला पाया गया क्योंकि वे प्रदूषित चावल का अधिक सेवन करती थीं।जापान सरकार ने इसे अपनी चार प्रमुख प्रदूषणजन्य बीमारियों में शामिल किया।कारण और कैडमियम का स्रोतकैडमियम एक भारी धातु है जो बैटरी, प्लास्टिक, धातु कोटिंग और औद्योगिक प्रक्रियाओं में उपयोग होता है।यह हवा, पानी और भोजन (जैसे चावल, सब्जियां, सीफूड) के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है।शरीर में यह मुख्य रूप से गुर्दों और लीवर में जमा होता हैजहां यह मेटालोथियोनिन प्रोटीन से बंध जाता है। लंबे समय तक संचय से गुर्दे की नलिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं(ट्यूबुलर डिसफंक्शन), जो कैल्शियम के अवशोषण को प्रभावित करता है।लक्षण और प्रभावप्रारंभिक लक्षण: पेट दर्द, उल्टी, मतली, दस्त, थकान और सिरदर्द।गुर्दे पर प्रभाव: प्रोटीनुरिया (मूत्र में प्रोटीन), ग्लूकोसुरिया और अमीनोएसिडुरिया।गुर्दे की ट्यूबलर क्षति से हड्डियों का विघटन (osteomalacia) होता है।हड्डी संबंधी समस्याएं: हड्डियों में तेज दर्द (जिसे "इटाई-इटाई" अर्थात "ऐंठन-ऐंठन" कहा जाता हैजोड़ों में सूजन, हड्डी टूटना और विकृति। महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस बढ़ जाता है।अन्य प्रभाव: फेफड़ों में क्षति (श्वसन समस्या, खांसी), उच्च रक्तचाप, कैंसर का जोखिम (विशेषकर फेफड़े और प्रोस्टेट), और लीवर क्षति। क्रॉनिक एक्सपोजर से COPD और ऑस्टियोपोरोसिस होता है।निदान और उपचाररक्त, मूत्र या बालों के नमूनों से कैडमियम स्तर मापा जाता है।गुर्दे की जांच के लिए क्रिएटिनिन क्लियरेंस टेस्ट और बीटा-2 माइक्रोग्लोबुलिन टेस्ट उपयोगी हैं।उपचार में कैडमियम स्रोत से दूरी, चेलेशन थेरेपी (जैसे EDTA) और सहायक उपचार शामिल हैंलेकिन क्षतिग्रस्त ऊतकों का पूर्ण पुनर्स्थापन मुश्किल है। रोकथाम मुख्य उपाय है।रोकथाम के उपायऔद्योगिक उत्सर्जन नियंत्रण और पानी शुद्धिकरण।खाद्य पदार्थों में कैडमियम सीमा (WHO: 0.003 mg/kg शरीर भार प्रतिदिन)।धूम्रपान त्यागें (सिगरेट में कैडमियम अधिक) और प्रदूषित क्षेत्रों से बचें।16. निम्नलिखित में से कौन-सा रोग एक संक्रमित मादा फ्लेबोटोमाइन बालू मक्खी (phlebotomine sandfly) के काटने से फैलता है, जिसमे अनियमित ज्वर, वजन घटने तथा प्लीहा और यकृत के आकार में वृद्धि जैसे लक्षण दिखाई देते हैं? [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (I-पाली)](a) अतिसार(b) एनाप्लास्मोसिस(c) जापानी मस्तिष्क ज्वर(d) आंत का लीशमैनियासिस/कालाजार उन्मूलनCorrect Answer: (d) आंत का लीशमैनियासिस/कालाजार उन्मूलनSolution:कालाजार अर्थात आंत का लीशमेनियासिस रोग लीशमेनिया (Leishmania) नामक प्रोटोजोआ परजीवी के कारण होता है।यह रोग संक्रमित मादा फ्लेबोटीमाइन बालू मक्खी (Phlebotomine sandfly) के काटने से फैलता हैजिसमें अनियमित ज्वर, वजन घटने तथा प्लीहा और यकृत के आकार में वृद्धि जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।कारण और संचरणयह रोग विशेष रूप से फ्लेबोटोमाइन सैंडफ्लाई प्रजाति की मादा बालू मक्खी के काटने से फैलता हैजो लीशमैनिया परजीवी को ले जाती है। बालू मक्खियां नम, गंदे और मिट्टी वाले क्षेत्रों में पनपती हैंजैसे कच्चे घर या खंडहर। भारत में बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और बंगाल के कुछ हिस्सों में यह अधिक प्रचलित है।लक्षणों का विस्तारअनियमित ज्वर: बुखार महीनों तक चलता है, जो शाम या रात में बढ़ता है और कभी-कभी ठीक हो जाता है।वजन घटना: भूख न लगना और तेजी से कमजोरी आना।प्लीहा-यकृत वृद्धि: प्लीहा बहुत बड़ा हो जाता है (स्प्लेनोमेगाली), यकृत भी बढ़ता है, जिससे पेट फूल जाता है।अन्य लक्षणों में एनीमिया, त्वचा का कालापन (ग्रेग्रेस हाइपरपिगमेंटेशन), थकान और कभी-कभी खांसी शामिल हैं।बिना इलाज के यह घातक हो सकता है।निदान और उपचारनिदान रक्त, हड्डी का मज्जा या प्लीहा के ऊतक की जांच से होता है, जहां परजीवी के एलडी बॉडीज दिखते हैं।उपचार में एम्फोटेरिसिन बी या मिल्टेफोसिन जैसी दवाएं दी जाती हैं।भारत सरकार ने कालाजार उन्मूलन कार्यक्रम चलाया है, जिसमें मक्खी नियंत्रण और मरीजों को मुआवजा शामिल है।रोकथाम के उपायघरों में बालू मक्खी को मारने वाली दवाओं का छिड़काव।नेटिंग, साफ-सफाई और मिट्टी प्लास्टरिंग।लंबे समय बुखार पर तुरंत चिकित्सा जांच। यह रोग मानव से मानव में सीधे नहीं फैलता, केवल मक्खी वाहक है।17. निम्न में से वह कौन-सा वंशानुगत रक्त विकार है, जो हीमोग्लोबिन जीन को प्रभावित करता है और जिसके परिणामस्वरूप अप्रभावी रक्ताणु की उत्पत्ति होती है? [CHSL (T-I) 14 अगस्त, 2023 (II-पाली)](a) सोमेटोस्टेटिनोमा(b) वेनौस थाम्बोसिस(c) पॉलीसिथेमिया वेरा(d) थैलेसीमियाCorrect Answer: (d) थैलेसीमियाSolution:थैलेसीमिया वंशानुगत रक्त विकार है, जो हीमोग्लोबिन जीन को प्रभावित करता हैजिसके परिणामस्वरूप अप्रभावी रक्ताणु की उत्पत्ति होती है।इससे रोगी के शरीर में अत्यधिक अरक्तता (Anemia) उत्पन्न हो जाने से अतिरिक्त रुधिर की आवश्यकता पड़ती है।कारण और आनुवंशिकताजबकि बीटा-थैलेसीमिया क्रोमोसोम 11 पर HBB जीन को।अप्रभावी हीमोग्लोबिन के कारण लाल रक्त कोशिकाएं छोटी, पतली और कमजोर हो जाती हैंजो जल्दी नष्ट हो जाती हैं (हेमोलिटिक एनीमिया)।प्रकार और लक्षणबीटा-थैलेसीमिया मेजर (Cooley's Anemia): गंभीर रूप, बचपन में लक्षण दिखते हैंपीला पड़ना, विकास रुकना, हड्डी विकृति, प्लीहा वृद्धि।बीटा-थैलेसीमिया माइनर: हल्का वाहक रूप, हल्का एनीमिया लेकिन बिना लक्षण।अल्फा-थैलेसीमिया: चार जीन प्रभावित होने पर Hb Bart's हाइड्रोप्स फेटालिस (भ्रूण मृत्यु)।अन्य लक्षण: थकान, सांस फूलना, चेहरे की हड्डियां विकृत, आयरन ओवरलोड से हृदय/यकृत क्षति।निदान और उपचारनिदान Hb इलेक्ट्रोफोरेसिस, CBC, जेनेटिक टेस्टिंग से होता है।उपचार में बार-बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन, आयरन चेलेशन थेरेपी (डेफेरासिरॉक्स), हाइड्रोक्सीयूरिया और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट शामिल हैं।जीन थेरेपी (जैसे Zynteglo) नई प्रगति है। भारत में 10,000 से अधिक बच्चे सालाना प्रभावित होते हैं।रोकथाम और प्रबंधनप्रिकंजEPTल डायग्नोसिस, जेनेटिक काउंसलिंग और स्क्रीनिंग से रोकथाम संभव।स्वस्थ आहार, संक्रमण से बचाव और नियमित जांच आवश्यक।बिना उपचार के मृत्यु दर ऊंची है, लेकिन आधुनिक चिकित्सा से सामान्य जीवन संभव।18. निम्नलिखित में से कौन सा रोग मच्छर के काटने से नहीं होता है? [CHSL (T-I) 09 मार्च, 2023 (III-पाली)](a) हेपेटाइटिस(b) मलेरिया(c) फीलपांव(d) डेंगूCorrect Answer: (a) हेपेटाइटिसSolution:हेपेटाइटिस वायरस जनित बीमारी है, जिसके कारण यकृत में सूजन और जलन होती है।मलेरिया मादा एनाफिलीज मच्छर, डेंगू एडीज एजिप्टी मच्छर और फीलपांव क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है।मच्छर जनित रोगमच्छरों के काटने से कई घातक रोग फैलते हैं, जैसे मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, जापानी एन्सेफलाइटिस और फाइलेरिया।मलेरिया एनोफिलीज मच्छर से प्लास्मोडियम परजीवी के कारण होता हैजिसमें तेज बुखार, ठंड लगना और कमजोरी जैसे लक्षण दिखते हैं।डेंगू और चिकनगुनिया एडीज मच्छरों से वायरस के माध्यम से फैलते हैंजो जोड़ों में दर्द, बुखार और प्लेटलेट्स की कमी पैदा करते हैं।जापानी एन्सेफलाइटिस क्यूलेक्स मच्छर से ब्रेन को प्रभावित करता है, जिससे दौरे, कोमा या मौत का खतरा रहता है।पीलिया का कारणपीलिया या हेपेटाइटिस (विशेषकर A और E प्रकार) मच्छरों से नहीं, बल्कि दूषित पानी, भोजन या अस्वच्छता से फैलता है।यह हेपेटाइटिस वायरस के कारण लीवर की सूजन पैदा करता हैजिसमें पेशाब का पीला रंग, थकान, उल्टी और आंखों का पीलापन प्रमुख लक्षण हैं।अन्य प्रकार जैसे B और C खून या शारीरिक तरल पदार्थों से संचारित होते हैं, लेकिन मच्छर कभी इसका वाहक नहीं बनते।अन्य सामान्य भ्रमकई MCQ प्रश्नों में विकल्पों के रूप में टायफॉइड या सोने की बीमारी (ट्राइपैनोसोमियासिस) भी आते हैंलेकिन सोने की बीमारी टसे-तसे मक्खी से फैलती है, न कि मच्छर से।टायफॉइड सलमोनेला बैक्टीरिया से दूषित भोजन से होता है।इनमें से कोई भी मच्छर जनित नहीं है, लेकिन पीलिया सबसे आम उदाहरण हैजो भारतीय संदर्भ में अक्सर पूछा जाता है।19. निम्नलिखित में से कौन-सा संचारी रोगों का एक उदाहरण नहीं है? [MTS (T-I) 15 मई, 2023 (II-पाली)](a) मधुमेह(b) चेचक(c) खांसी-जुकाम(d) क्षय रोगCorrect Answer: (a) मधुमेहSolution:संचारी रोग (Communicable Diseases): वे रोग हैंजो व्यक्ति से व्यक्ति या किसी वाहक (जैसे मच्छर) के माध्यम से फैल सकते हैं।मधुमेह (Diabetes): यह एक गैर-संचारी रोग (Non-Communicable Disease - NCD) है।यह एक चयापचय विकार है जिसमें शरीर या तो पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं करता हैइंसुलिन का ठीक से उपयोग नहीं कर पाता है। यह व्यक्ति से व्यक्ति में नहीं फैलता।गैर-संचारी रोग क्या हैं?गैर-संचारी रोग (Non-Communicable Diseases या NCDs) वे रोग हैंजो संक्रमणजन्य नहीं होते और एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलते।इनके मुख्य कारण आनुवंशिक कारक, अस्वास्थ्यकर जीवनशैली (जैसे मोटापा, धूम्रपान, शराब), पोषण की कमी या अंगों की असामान्य कार्यप्रणाली होते हैं।मधुमेह इंसुलिन उत्पादन या उपयोग में कमी से होता है, न कि किसी रोगाणु से।अन्य उदाहरण हैं कैंसर, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, गठिया, मेरास्मस (कुपोषण) और रतौंधी।मधुमेह क्यों संचारी नहीं है?मधुमेह (Diabetes) टाइप 1 या टाइप 2 के रूप में होता हैलेकिन यह कभी संचारी नहीं माना जाता क्योंकि इसमें कोई बैक्टीरिया या वायरस शामिल नहीं होता।टाइप 1 ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया से और टाइप 2 जीवनशैली से जुड़ा है।विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, यह वैश्विक महामारी हैजो 422 मिलियन से अधिक लोगों को प्रभावित करती हैलेकिन रोकथाम जीवनशैली परिवर्तन, दवाओं और निगरानी से होती है, न कि टीकाकरण या अलगाव से।सामान्य भ्रम और उदाहरण तुलनालोग कभी-कभी सोचते हैं कि खांसी या थकान जैसे लक्षण संचारी रोगों के कारण होते हैंलेकिन मधुमेह में ये चयापचय असंतुलन से आते हैं। निम्न तालिका से स्पष्ट अंतर समझें:20. पारिगर्भिक (क्वाशियोरकर) के बारे में सही विकल्प का चयन कीजिए। [CGL (T-I) 21 जुलाई, 2023 (I-पाली)]कथन A : यह आहार में वसा की कमी के कारण होने वाला कुपोषण का एक रूप है।कथन B : जिन बच्चों को पारिगर्भिक रोग हो जाता है, वे ठीक से बढ़ या विकसित नहीं हो पाते हैं और अपने शेष जीवन के लिए नाटे रह सकते हैं।(a) केवल कथन B सही है।(b) कथन A और B दोनों सही हैं।(c) केवल कथन A सही है।(d) कथन A और B दोनों गलत हैं।Correct Answer: (a) केवल कथन B सही है।Solution:पारिगर्भिक (क्वाशियोरकर) एक प्रकार का कुपोषण है, जिसमें प्रोटीन की कमी होती है।अतः कथन (A) गलत है। जिन बच्चों में क्वाशियोरकर रोग हो जाता हैवे ठीक से बढ़ या विकसित नहीं हो पाते हैंअपने शेष जीवन के लिए नाटे (बौने) रह सकते हैं। अतः कथन (B) सही उत्तर है।कारणजो विकासशील देशों में अकाल, गरीबी या कार्बोहाइड्रेट-प्रधान आहार (जैसे केवल चावल या मक्का) से उत्पन्न होता है।संक्रमण जैसे डायरिया, खसरा या मलेरिया पोषक तत्वों के अवशोषण को बाधित कर स्थिति को और खराब करते हैंजबकि सामाजिक-आर्थिक कारक जैसे खाद्य असुरक्षा इसे बढ़ावा देते हैं।लक्षणइस रोग की पहचान चेहरे, पैरों और पेट में सूजन (एडीमा) से होती हैजो प्रोटीन की कमी से तरल पदार्थ का ऊतकों में संचय कारण बनता है।बच्चे दुबले-पतले लगते हैं लेकिन पेट फूला हुआ और त्वचा पर रंगहीन धब्बे या छिलना दिखता हैबाल पतले, सफेद या टूटे हुए हो जाते हैं।अन्य लक्षणों में भूख की कमी, थकान, यकृत वृद्धि और प्रतिरक्षा प्रणाली की कमजोरी शामिल है।निदाननिदान मुख्यतः शारीरिक जांच, आहार इतिहास और रक्त परीक्षण से किया जाता हैजिसमें सीरम प्रोटीन (विशेषकर एल्ब्यूमिन) का स्तर कम पाया जाता है।सूजन मापना, एनीमिया जांच और अन्य कुपोषण मार्कर जैसे प्री-एल्ब्यूमिन स्तर सहायक होते हैंकभी-कभी इमेजिंग जैसे अल्ट्रासाउंड यकृत की स्थिति की पुष्टि करता है।उपचारउपचार चरणबद्ध होता हैप्रारंभिक रूप से IV द्रव और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन, उसके बाद प्रोटीन-समृद्ध फॉर्मूला मिल्क (जैसे RUTF) का धीरे-धीरे परिचय।विटामिन, खनिज पूरक और एंटीबायोटिक्स संक्रमण नियंत्रण के लिए आवश्यक हैंपूर्ण पुनर्वास में संतुलित आहार बहाली शामिल है।सफलता दर उच्च है यदि जल्दी शुरू किया जाए, लेकिन देरी से जटिलताएँ जैसे हृदय विफलता हो सकती हैं।रोकथामइसे संतुलित आहार (दूध, अंडे, दालें, मांस) सुनिश्चित कर रोका जा सकता हैविशेषकर स्तनपान और पूरक आहार पर जोर देकर।सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम, शिक्षा और खाद्य सुरक्षा उपाय गरीब समुदायों में प्रभावी हैं।Submit Quiz« Previous1234Next »