रोग एवं उपचार (जीव विज्ञान)

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31. यकृत, प्लीहा और अस्थि मज्जा की जालीय अंतः कला कोशिकाओं (reticuloendothelial cells) के भीतर आयरन के अत्यधिक जमाव के कारण कौन-सा रोग होता है? [Phase-XI 28 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) हीमोसाइडरोसिस
Solution:
  • हीमोसाइडरोसिस
    •  यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर के विभिन्न अंगों (विशेषकर यकृत, प्लीहा और अस्थि मज्जा) की रेटिकुलोएंडोथेलियल कोशिकाओं (जो पुरानी रक्त कोशिकाओं और अन्य मलबे को हटाने में मदद करती हैं
    • भीतर आयरन (लोहे) का अत्यधिक जमाव हो जाता है।
    • यह अक्सर बार-बार रक्त आधान, आनुवंशिक विकारों (जैसे थैलेसीमिया), या शरीर द्वारा आयरन के अत्यधिक अवशोषण के कारण होता है।
  • कारण
    • जो मैक्रोफेज (रेटिकुलोएंडोथेलियल सिस्टम की कोशिकाएं) द्वारा फागोसाइटोसिस के माध्यम से संसाधित होता है।
    • आयरन हेमोसिडेरिन के रूप में जमा हो जाता है
    • विशेष रूप से यकृत (कुपफर कोशिकाएं), प्लीहा और अस्थि मज्जा में। सामान्य कारणों में शामिल हैं:
    • बार-बार रक्त आधान, जैसे थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया या अन्य पुरानी एनीमिया में।​
    • पुरानी हीमोलिटिक एनीमिया, जहां आरबीसी का टूटना बढ़ जाता है।
    • अत्यधिक आयरन सप्लीमेंटेशन या आनुवंशिक विकारों से माध्यमिक प्रभाव।
    • यह प्राइमरी हीमोक्रोमैटोसिस से भिन्न है, जो आनुवंशिक होता है
    • पैरेंकीमल कोशिकाओं को प्रभावित करता है।​
  • लक्षण
    • प्रारंभिक चरण में यह बिना लक्षणों वाला हो सकता है
    • लेकिन उन्नत अवस्था में अंग क्षति से लक्षण प्रकट होते हैं। प्रमुख लक्षण:
    • थकान, कमजोरी और पीलिया।
    • श्वास संबंधी समस्याएं जैसे टैचीपनिया, डिस्पनिया, हेमोप्टाइसिस और सायनोसिस।
    • हृदय संबंधी: टैकीकार्डिया, कंजेस्टिव हार्ट फेलियर।
    • त्वचा में कांस्य रंग या फैटी लिवर के कारण पेट दर्द।
    • गंभीर मामलों में फेफड़ों में क्रैकल साउंड या बुखार।​
  • निदान
    • निदान एमआरआई, सीटी स्कैन या बायोप्सी से आयरन जमाव की पुष्टि होती है
    • जहां यकृत, प्लीहा और मज्जा में कम टी1/टी2 सिग्नल दिखता है।
    • सीरम फेरिटिन स्तर ऊंचा (>1000 ng/mL) और ट्रांसफेरिन सैचुरेशन बढ़ा हुआ पाया जाता है।
    • लिवर बायोप्सी में प्रुशियन ब्लू स्टेनिंग से हेमोसिडेरिन की पुष्टि होती है।​
  • उपचार
    • उपचार आयरन चेलेशन थेरेपी पर केंद्रित है, जैसे डेफेरॉक्सामाइन, डेफेरासिरॉक्स या डेफेरिप्रॉन, जो अंग क्षति रोकते हैं।
    • रक्त आधान कम करना और फेरिटिन मॉनिटरिंग आवश्यक है।
    • उन्नत मामलों में लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है।
    • जीवनशैली में आयरन युक्त भोजन और विटामिन सी से परहेज करें।​

32. किस पौधे को एक हानिकारक खर-पतवार माना जाता है जिसमें परभक्षियों से बचने के लिए रासायनिक रक्षा तंत्र होता है? [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) कैलोट्रोपिस
Solution:
  • कैलोट्रोपिस (Calotropis) एपोसिनेसी परिवार में फूल वाले पौधों की एक प्रजाति है
  • जिसे मिल्कवीड के रूप में भी जाना जाता है। यह एक हानिकारक खरपतवार है
  • जिसमें परभक्षियों से बचने के लिए रासायनिक रक्षा तंत्र (जहरीले ग्लाइकोसाइड) होता है।
  • विशेषताएं
    • यह पौधा मोटे तने वाली झाड़ी के रूप में उगता है जो 4 मीटर तक ऊंचा हो सकता है।
    • इसकी पत्तियां मोटी, चमकदार और रसदार होती हैं
    • दूधिया रस (लेटेक्स) निकलता है जो सफेद या हल्का पीला होता है।
    • फूल बैंगनी-सफेद होते हैं, और फल बालदार होते हैं जिनमें बीज हवा से फैलते हैं।​
  • रासायनिक रक्षा तंत्र
    • कैलोट्रोपिस में कार्डेनोलाइड्स नामक विषैले यौगिक मौजूद होते हैं
    • जो हृदय को प्रभावित करते हैं।
    • यह दूधिया रस परभक्षी जानवरों जैसे मवेशियों या बकरियों को खाने पर उन्हें बीमार कर देता है या मार सकता है
    • जिससे वे इस पौधे से दूर रहते हैं। अन्य रसायन पाचन रोकते हैं या प्रजनन बाधित करते हैं।​
  • हानिकारक खरपतवार के रूप में प्रभाव
    • यह तेजी से फैलता है, फसलों को दबाता है और मिट्टी की उर्वरता घटाता है।
    • कृषि भूमि, बगीचों और सड़क किनारों पर घुसपैठ करता है।
    • इसके बीज हवा से दूर तक फैलते हैं, जिससे नियंत्रण कठिन होता है।​
  • पारिस्थितिक और आर्थिक नुकसान
    • मवेशी इसे नहीं खाते, जिससे चरागाह कम हो जाते हैं।
    • त्वचा पर रस लगने से जलन होती है, और धुआं सांस की समस्याएं पैदा कर सकता है।
    • भारत जैसे क्षेत्रों में यह प्रमुख समस्या है, जहां इसे उखाड़ना या रासायनिक नियंत्रण से रोका जाता है।​

33. निम्नलिखित में से कौन-सा मुख कैंसर का प्रेरक कारक है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) तंबाकू
Solution:
  • तंबाकू: तंबाकू का सेवन, चाहे वह धूम्रपान (सिगरेट, बीड़ी, हुक्का) के माध्यम से हो या चबाने वाले तंबाकू (जैसे गुटखा, खैनी) के माध्यम से, मुख कैंसर (Oral Cancer) का सबसे बड़ा और प्रमुख प्रेरक कारक है।
  • तंबाकू में मौजूद कार्सिनोजेनिक रसायन सीधे मुंह, गले और अन्नप्रणाली की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं
  • जिससे कैंसर विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • मुख कैंसर क्या है?
    • मुख कैंसर मुंह के किसी भी हिस्से जैसे होंठ, जीभ, मसूड़े, गालों की आंतरिक परत, मुंह की छत या तल में विकसित होने वाला कैंसर है।
    • यह स्क्वैमस कोशिकाओं से शुरू होता है, जहां डीएनए में परिवर्तन ट्यूमर बनाते हैं।
    • ज्यादातर मामले 40 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में पाए जाते हैं।​
  • मुख्य प्रेरक कारक
    • तंबाकू सबसे बड़ा जोखिम कारक है, क्योंकि इसमें निकोटीन और अन्य carcinogens मौजूद होते हैं
    • जो कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुंचाते हैं। भारत में 70% से अधिक केस तंबाकू से जुड़े हैं
    • चाहे सिगरेट, बीड़ी, गुटखा या पान मसाला ही क्यों न हो।​
  • अन्य महत्वपूर्ण कारक
    • शराब का सेवन: लंबे समय तक शराब पीने से मुंह की कोशिकाएं कमजोर हो जाती हैं
    • तंबाकू के साथ मिलकर खतरा कई गुना बढ़ जाता है।​
    • HPV संक्रमण: ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) जीभ और गले के कैंसर से जुड़ा है, जो ओरल संपर्क से फैलता है।​
    • सूर्य की किरणें: लंबे समय तक धूप में रहने से होंठों का कैंसर हो सकता है।​
    • खराब मौखिक स्वच्छता: टेढ़े दांत, गलत डेंटचर या बार-बार जलन से ऊतक क्षतिग्रस्त होते हैं।​
    • आनुवंशिक कारक: परिवार में सिर-गर्दन कैंसर का इतिहास जोखिम दोगुना कर देता है।​
  • रोकथाम के उपाय
    • तंबाकू और शराब से पूरी तरह परहेज करें, अच्छी मौखिक सफाई रखें, HPV वैक्सीन लें और नियमित दंत चिकित्सक जांच कराएं।
    • स्वस्थ आहार जैसे फल-सब्जियां जोखिम कम करते हैं। शुरुआती पहचान से इलाज आसान हो जाता है।​