विविध (अर्थव्यवस्था) भाग-II

Total Questions: 50

1. निम्न में से वह कौन-सा कारण नहीं है जिस वजह से 'अंतिम' वस्तुओं को ऐसा कहा जाता है? [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) इनका उपभोग सबसे आखिर में किया जाता है।
Solution:
  • अंतिम वस्तुओं को उपभोक्ता वस्तुओं के रूप में भी जाना जाता है
  • क्योंकि आगे इन्हें और संसाधित या परिवर्तित नहीं किया जा सकता। ये उत्पादन प्रक्रिया के अंतिम उत्पाद हैं
  • बाजार में उपयोग या विक्रय के लिए तैयार हैं। उपभोग सबसे आखिर में किया जाता है, यह गलत है
  • क्योंकि उपभोग का क्रम यह निर्धारित नहीं करता है कि कोई वस्तु अंतिम है या नहीं।
  • तथ्य-आधारित परिशोधन
    • जिन्हें आगे उत्पाद बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस कारण को अक्सर सबसे स्पष्ट और महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
    • एक अन्य महत्त्वपूर्ण कारण यह है कि अंतिम वस्तुएं बिक्री या वितरण के लिए तैयार होती हैं
    • उद्योगिक गणनाओं में इन्हीं वस्तुओं को राष्ट्रीय आय/उत्पादन के अंतर्गत शामिल किया जाता है
    • क्योंकि ये सीधे उपभोक्ता के हाथों में जाती हैं। इस दृष्टिकोण से भी इसे “अंतिम” कहा गया है।
  • वह कारण जो सामान्यतः नहीं माना जाता
    • वे “सबसे पहले उत्पादन” के क्रम में आते हैं या उनका उपयोग “योजना के शुरुआती चरण” में किया जाना चाहिए
    • यह कारण ठीक नहीं है क्योंकि यह उत्पादन क्रम का संकेत देता है, जबकि वास्तविक निर्णायक विचार यह है
    • वस्तु को अंततः उपभोक्ता द्वारा प्रत्यक्ष प्रयोजन के लिए बनाया गया हो या नहीं।
    • इसलिए यह कारण गलत समझा जा सकता है कि क्यों किसी वस्तु को अंतिम कहा गया है। [उत्पादन क्रम बनाम अंतिम उपयो
    • इसी तरह यह कहना कि अंतिम वस्तुएँ “सबसे महंगी होती हैं” या “सबसे भारी होती हैं”
    • ये मात्र गुण-विशेष हैं न कि उसके अंतिम होने के आधार। मूल्य या वजन अंतिमत्व का निर्णायक कारण नहीं होते
    • अंतिमत्व उत्पाद के चरित्र पर निर्भर करता है कि क्या उसे आगे अन्य वस्तुओं के निर्माण में उपयोग किया जाएगा या नहीं।
    • इस कथन को सामान्यतः कारण के तौर पर नहीं लिया जाता। [गुण-आधारित विशेषताओं का भ्रम]
    • कुछ संदर्भों में यह कहा जाता है कि “उत्पादन के विस्तारित चरणों से नहीं गुजरतीं”—पर यह अक्सर सही हो सकता है
    • परन्तु उसका अर्थ यह नहीं बनता कि वह कारण ही निर्णायक है कि वह अंतिम वस्तु कहलाती है
    • बल्कि यह धारण दर्शाती है कि इन वस्तुओं को आगे किसी परिवर्तन की आवश्यकता नहीं होती, और यही कारण है
    • वे अंतिम मानी जाती हैं। इस कारण को समझना आवश्यक है
    • लेकिन यह जरूरी नहीं कि यह सबसे सही कारण हो। [प्रक्रिया प्रमुखता बनाम अंतिम अवस्था]
  • समझाने के लिए एक सरल उदाहरण
    • अगर एक बिस्किट तैयार होकर सीधे बाजार में बिकती है और उपभोक्ता उसे खाना शुरू करता है
    • तो यह अंतिम वस्तु है (क्योंकि इसे आगे किसी अन्य निर्माण में उपयोग नहीं किया जाएगा)।
    • अगर वही बिस्किट किसी अन्य मिठाई के लिए घटक के रूप में इस्तेमाल होती, तो वह अंतिम वस्तु नहीं रहेगी।
    • इस अंतर के कारण “अंतिम उपयोग के लिए बनाया गया” कारण सबसे स्पष्ट और ठोस होता है। [उत्पादन-उपयोग का स्पष्ट विभाजन]
  • संक्षिप्त सार
    • अंतिम वस्तु वह है जिसे सीधे उपभोग या उपयोग के लिए बनाया गया और जिसे आगे किसी और प्रसंस्करण की आवश्यकता नहीं होती
    • यह मुख्य और सबसे मान्य कारण है कि इसे अंतिम कहा जाता है। [उत्पादन के अंतिम चरण की भूमिका]
    • जो कारण गलत या अस्पष्ट होते हैं, वे अक्सर उत्पाद के क्रम/वज़न/मूल्य जैसे गुणों पर टिका होते हैं
    • जबकि असल पहचाने जाने वाला मापदंड यह है कि वस्तु क्या भविष्य में और उपयोग के लिए भाग बनकर काम आती है या नहीं। [गुण-आधारित गलत समझ]
    • अगर आप चाहें, मैं आपके दिए गए विकल्पों के अनुसार एक साफ-सुथरी सत्यापित सूची बनाकर उसी के अनुसार स्पष्ट सर्च-आधारित उत्तर दे सकता हूँ
    • हर बिंदु के साथ तर्क भी दे दूँ। कृपया बताएँ कि आप किन-किन विकल्पों के बारे में विश्लेषण चाहते हैं।

2. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत सरकार की राष्ट्रीय पुनर्स्थापन एवं पुनर्वास नीति (2007) का उद्देश्य नहीं है? [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) पुनर्वास की परवाह किए बिना पुनर्स्थापन पर अधिक-से-अधिक ध्यान केंद्रित करना
Solution:
  • पुनर्वास और पुनर्स्थापन विधेयक, 2007 भूमि अधिग्रहण खरीद या किसी अन्य अनैच्छिक विस्थापन से विस्थापित लोगों को लाभ और मुआवजा प्रदान करता है।
  • विधेयक पुनर्वास और पुनर्स्थापन प्रक्रिया को तैयार करने, लागू करने और निगरानी करने के लिए परियोजना-विशिष्ट, राज्य और राष्ट्रीय प्राधिकरण बनाता है।
  • विधेयक में यह अपेक्षा नहीं की गई है कि इन व्यक्तियों को पुनःस्थापित किया जाए। अतः विकल्प (d) गलत है।
  • नीति के प्रमुख उद्देश्य
    • नीति के उद्देश्य विस्थापन को न्यूनतम रखने और प्रभावित परिवारों को बेहतर जीवन स्तर देने पर केंद्रित हैं।
    • विस्थापन को कम करना, गैर-विस्थापन या न्यूनतम विस्थापन विकल्पों को प्राथमिकता देना।
    • प्रभावित परिवारों की सक्रिय भागीदारी से पर्याप्त पुनर्वास पैकेज सुनिश्चित करना और शीघ्र कार्यान्वयन।
    • कमजोर वर्गों (SC/ST) के अधिकारों की रक्षा, उनके लिए विशेष देखभाल।​
    • प्रभावित परिवारों को स्थायी आय और बेहतर जीवन स्तर प्रदान करने के ठोस प्रयास।​
    • विकास योजनाओं में पुनर्वास चिंताओं का एकीकरण।​
  • जो उद्देश्य नहीं है
    • "वास्तव में पुनःस्थापन की परवाह किए बिना पुनर्वास पर अधिकतम ध्यान केंद्रित करना" यह नीति का उद्देश्य नहीं है।
    • नीति दोनों—पुनर्वास (नया स्थान प्रदान करना) और पुनर्स्थापन (आर्थिक/सामाजिक बहाली)—पर समान जोर देती है, न कि केवल पुनर्वास पर।​
  • नीति की पृष्ठभूमि
    • यह नीति 2007 में लागू हुई, जो भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की कमियों को दूर करती है।
    • यह न केवल अधिग्रहण बल्कि खरीद या अन्य अनैच्छिक विस्थापन पर भी लागू होती है।
    • राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर प्राधिकरण बनाए जाते हैं योजना के लिए।​

3. 'मौद्रिक भ्रम' (money illusion) की अवधारणा सर्वप्रथम किसने दी ? [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) इरविंग फिशर
Solution:
  • मौद्रिक भ्रम शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले अमेरिकी अर्थशास्त्री इरविंग फिशर ने अपनी किताब 'स्टैबिलाइजिंग द डॉलर' में किया था।
  • यह एक आर्थिक सिद्धांत है, जो यह मानता है कि लोगों में अपनी संपत्ति और आय को वास्तविक शर्तों के बजाए नाममात्र डॉलर के संदर्भ में देखने की प्रवृत्ति होती है।
  • अवधारणा का परिचय
    • मौद्रिक भ्रम एक संज्ञानात्मक पूर्वाग्रह (Cognitive Bias) है, जिसमें लोग नाममात्र मूल्य (Nominal Value) पर ध्यान केंद्रित करते हैं
    • बजाय वास्तविक मूल्य (Real Value) के। उदाहरणस्वरूप, यदि मुद्रास्फीति के कारण किसी की आय दोगुनी हो जाती है
    • लेकिन वस्तुओं की कीमतें भी उतनी ही बढ़ जाती हैं, तो व्यक्ति खुद को अधिक धनी समझ सकता है
    • जबकि उसकी क्रय शक्ति वही रहती है। फिशर ने इसे मुद्रा की स्थिरता से जोड़ा, ताकि डॉलर की क्रय शक्ति स्थिर रहे।
  • इरविंग फिशर का योगदान
    • इरविंग फिशर (1867-1947) येल विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री थे
    • जिन्होंने मौद्रिक सिद्धांतों पर महत्वपूर्ण कार्य किया।
    • "Stabilizing the Dollar" में उन्होंने तर्क दिया कि मुद्रा की अस्थिरता (जैसे महंगाई या अवमूल्यन) लोगों को भ्रमित करती है
    • जिससे वे आर्थिक निर्णय गलत लेते हैं। 1928 की पुस्तक "The Money Illusion" में उन्होंने इसकी मनोवैज्ञानिक जड़ों को स्पष्ट किया
    • जैसे कि लोग संख्याओं को देखकर संतुष्ट हो जाते हैं बिना मुद्रास्फीति समायोजन के। फिशर ने सुझाव दिया कि मुद्रा को मूल्य स्थिरता के साथ जोड़ा जाए।
  • कारण और कारक
    • मौद्रिक भ्रम के प्रमुख कारण हैं:
    • वित्तीय शिक्षा की कमी: अधिकांश लोग मुद्रास्फीति या वास्तविक आय की अवधारणा से अपरिचित होते हैं।​
    • कीमतों की स्थिरता (Price Stickiness): कई वस्तुओं की कीमतें तुरंत नहीं बदलतीं, जिससे भ्रम बढ़ता है।​
    • सामाजिक तुलना: लोग दूसरों की नाममात्र आय से अपनी तुलना करते हैं।​
    • मितिभ्रम: मस्तिष्क सरल संख्याओं को प्राथमिकता देता है।​
  • प्रभाव अर्थव्यवस्था पर
    • यह भ्रम मजदूरी वार्ता, निवेश और उपभोग को प्रभावित करता है।
    • उदाहरण के लिए, महंगाई के समय लोग नाममात्र वेतन वृद्धि से खुश होकर बचत कम कर देते हैं।
    • समष्टि अर्थशास्त्र में यह नीति निर्माण को जटिल बनाता है, क्योंकि लोग वास्तविक प्रभाव नजरअंदाज करते हैं।
    • जॉन मेनार्ड कीन्स और मिल्टन फ्रीडमैन जैसे अर्थशास्त्रियों ने बाद में इसे अपनाया, लेकिन फिशर इसके जनक माने जाते हैं।
  • उदाहरण
    • मान लीजिए, 2020 में आपकी आय ₹50,000 मासिक थी और 2026 में ₹1,00,000 हो गई।
    • लेकिन 10% वार्षिक मुद्रास्फीति से वास्तविक क्रय शक्ति घट सकती है।
    • भ्रम में व्यक्ति अधिक खर्च करेगा, बिना वास्तविकता जाने।
    • भारत में 2020-2025 की महंगाई (औसत 5-6%) ने कईयों को ऐसा भ्रम दिया।​
  • इससे बचाव
    • वास्तविक आय की गणना करें: नाममात्र आय को मुद्रास्फीति सूचकांक से समायोजित करें।
    • सूचकांकित निवेश अपनाएं, जैसे CPI-लिंक्ड बॉन्ड।
    • आर्थिक शिक्षा ग्रहण करें। फिशर ने मुद्रा सुधार का समर्थन किया।​

4. किसी व्यक्ति के दस रुपये का सिक्का रखने के लिए तैयार होने के पीछे का क्या कारण है? [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2013 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) इसका मूल्य जारी करने वाले प्राधिकरण द्वारा समर्थित होता है।
Solution:
  • भारत सरकार द्वारा सिक्का निर्माण अधिनियम, 2011 की धारा 6 के तहत जारी सिक्के भुगतान अथवा अग्रिम के तौर पर वैध मुद्रा होंगे
  • अर्थात मूल्य जारी करने वाले प्राधिकरण द्वारा समर्थित होता है; इसीलिए लोग सिक्का रखने को तैयार होते हैं।
  • कारण क्या हैं
    • व्यवहारिकConvenience और जागरूकता का मिश्रण: कुछ दुकानदार या बस ऑपरेटर आदि 10-रुपए सिक्का लेने से कतराते हैं
    • क्योंकि उन्हें यह मानना लगता है कि सिक्का नकली है या अब चलन से बाहर हो गया है।
    • जबकि निष्कर्ष यह है कि सिक्का वैध है और चलन में है
    • यह धारणा गलत हो सकती है और लोगों को गलत सूचना से बचना चाहिए .
    • कानूनी स्थिति स्पष्ट है: RBI ने स्पष्ट किया है कि 10 रुपये के सिक्के पूरी तरह मान्य हैं
    • उन्हें लेने से मना करना दंडनीय क्रिया हो सकता है
    • सिक्के चलन में हैं और छिटपुट प्रतिरोध के बावजूद इनके उपयोग में बाधा नहीं होनी चाहिए , .
  • क्या करना चाहिए यदि किसी ने सिक्का लेने से इनकार कर दिया
    • शांत स्तर बनाए रखें और दुकानदार को सिक्का दिखाकर वैधता समझाएं; अधिकांश बार स्थिति स्पष्ट हो जाएगी .
    • यदि फिर भी इनकार जारी रहे, आप RBI द्वारा निर्धारित शिकायत चैनलों के माध्यम से जानकारी दे सकते हैं
    • मुद्रा के दायरे में सिक्के मान्य हैं और किसी भी असहयोग के विरुद्ध उचित कदम उठाने की व्यवस्था है .
    • स्थानीय व्यापारियों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए आप निर्धारित सरकारी निर्देशों के अनुसार शिकायत कर सकते हैं ताकि समस्या का समाधान हो सके .
  • कौन-सी धारणा सही है
    • दस रुपये का सिक्का मान्य है और देशभर में चलन में है; इसे लेने से इनकार करना उचित नहीं है
    • कानून इसे अवैध नहीं ठहराता, बल्कि सिक्का वैध मुद्रा है .
  • तत्काल उदाहरण
    • छोटे दुकानदारों द्वारा सिक्के न लेने के कई इतिहासिक 사례 सामने आए हैं, पर RBI/सरकार ने बार-बार स्पष्ट किया है कि सिक्का चलन में है
    • इसे स्वीकार किया जाना चाहिए; अगर किसी से असहमति हो तो संबंधित शिकायतें दर्ज कराई जा सकती हैं , .
  • एक सहज गाइड
    • अगर आप 10-रुपे का सिक्का किसी मौजूदा रसीद/লেন लौटाते समय दे रहे हैं
    • उसे साफ-सुथरे हाथों से दें ताकि वह स्वीकार किया जा सके .
    • अगर आपका दुकानदार लगातार इनकार करता है
    • आप RBI या उपभोक्ता अधिकारों के हेल्पलाइन/शिकायत पोर्टल से मदद मांग सकते हैं
    • यह विशेष रूप से सिक्के संबंधी चलन में लौटने के मुद्दे के समाधान के लिए है , .

5. आयात प्रतिस्थापन रणनीति को सामान्यतः ....... कहा जाता है। [CHSL (T-I) 02 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) अंतर्मुखी व्यापार रणनीति
Solution:
  • आयात प्रतिस्थापन रणनीति एक सरकारी नीति को संदर्भित करती है
  • जिसका उद्देश्य घरेलू स्तर पर उत्पादित वस्तुओं के साथ आयातित वस्तुओं को प्रतिस्थापित करके घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है।
  • इसे अंतर्मुखी व्यापार रणनीति के रूप में भी जाना जाता है
  • जिसका उद्देश्य घरेलू स्तर पर उन वस्तुओं का उत्पादन करना है, जिन्हें हमारे देश में आयात किया जाता है।
  • व्यापक विवरण
    • परिभाषा: ISI एक आर्थिक रणनीति है जिसमें एक देश घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देकर विदेशी आयात के बजाय स्थानीय वस्तुएँ बनाकर प्रयोग करता है
    • विदेशी निर्भरता कम हो और आर्थिक स्वंत्रता बढ़े.​
    • मुख्य उद्देश्य: घरेलू उद्योगों को संरक्षण देना, रोजगार सृजन करना, और दीर्घकालिक विकास के लिए घरेलू उत्पादन क्षमता विकसित करना
    • साथ ही विदेशी मुद्रा भंडार और व्यापार घाटे को नियंत्रित करना भी लक्ष्य होता है.
  • उपायों के उदाहरण:
    • आयात शर्तों पर उच्च सीमा शुल्क और अन्य शुल्क लगाना ताकि आयात महंगे हों और स्थानीय उत्पादन प्रतिस्पर्धी बने (उच्च आयात शुल्क, कोटा आदि).
    • आयात पर प्रतिबंध लगाना या कुछ महंगी वस्तुओं के आयात को रोकना ताकि घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन मिले ।​
    • घरेलू उद्योगों को सब्सिडी, ऋण की सहायता, और प्रौद्योगिकी समर्थन देकर लागत घटाना और दक्षता बढ़ाना ।
    • स्थानीय कच्चे माल के उपयोग को बढ़ावा देना ताकि आयात पर निर्भरता घटे और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला मजबूत हो ।​
  • लाभ और जोखिम:
    • लाभ: आत्मनिर्भरता बढ़ना, रोजगार अवसर बढ़ना, नया उद्योग विकसित होना, दीर्घकालिक औद्योगिक आधार मजबूत होना.
    • जोखिम: संरक्षणवाद की प्रवृत्ति से प्रतिस्पर्धात्मकता कम हो सकती है
    • उत्पादन महंगा पड़ सकता है, कृषि/उद्योग के बीच संसाधनों का इष्टतम आवंटन न हो सकता है
    • स्पष्ट रूप से नीति के संतुलित और समयबद्ध होने की जरूरत है ।
  • उच्च-स्तरीय प्रभाव समझाने के लिए एक दृश्य (उदाहरण)
    • अगर भारत जैसे देश आयात प्रतिस्थापन योजना अपनाता है
    • तो शुरुआती वर्षों में कुछ ऑटोमोबाइल, रक्षा, या वस्त्र जैसे क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन बढ़ सकता है
    • फिर धीरे-धीरे तकनीकी उन्नयन और गुणवत्ता सुधार से इन क्षेत्रों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है
    • जिससे आयात पर निर्भरता घटती है। यह प्रक्रिया समुचित योजना
    • उद्योग-विशिष्ट नीति मॉडल और निर्यात-प्रधान तरलता के साथ संतुलित होनी चाहिए
    • उपभोक्ता विकल्पों में कमी न आएं और कीमतें नियंत्रण में रहें ।

6. निम्नलिखित में से कौन-सा लोगों के जीवन स्तर का आकलन करने का एक सबसे अच्छा संकेतक है? [CHSL (T-I) 02 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) जीवन सूचकांक की भौतिक गुणवत्ता
Solution:
  • जीवन स्तर से तात्पर्य किसी निश्चित जनसंख्या को उपलब्ध भौतिक वस्तुओं और सेवाओं की मात्रा और गुणवत्ता से है।
  • इसका आकलन करने का सबसे अच्छा संकेतक जीवन सूचकांक की भौतिक गुणवत्ता है
  • क्योंकि यह मानव जीवन के तीन बुनियादी आयामों बुनियादी साक्षरता, जीवन प्रत्याशा और शिशु मृत्यु दर को ध्यान में रखता है।
  • PQLI के बारे में
    • मूल विचार: जीवन स्तर को तीन मुख्य आयामों के माध्यम से मापा जाता है
    • स्वास्थ्य (जीवन प्रत्याशा), शिक्षा (प्रौढ़ साक्षरता या शिक्षा स्तर) और बच्चों की मृत्यु दर।
    • यह तीनों घटक एक साथ मिलकर लोगों की वास्तविक जीवन स्थितियों का आकलन करते हैं,
    • बहुआयामी परिप्रेक्ष्य देता है, खासकर उन देशों में जहाँ आय वितरण समान नहीं है और स्वास्थ्य-शिक्षा-आय के बीच असमानताएं हैं।
    • सूचकांक बनाते समय डाटा की उपलब्धता और तुलनात्मकता देश-दर-देश भिन्न हो सकती है; कुछ क्षेत्रों में स्वास्थ्य या शिक्षा के डेटा सीमित हो सकते हैं।
  • HDI के बारे में
    • HDI संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा विकसित एक व्यापक सूचक है
    • जो जीवन प्रत्याशा, शिक्षा (लोगों की औसत शिक्षा और हमारी अनुमानित शिक्षा के वर्षों) और उसी देश की प्रति व्यक्ति GMP/GNI आय पर आधारित है।
    • बहु-घटक और तुलनात्मक रूप से मानकीकृत है, जिससे देशों के बीच विकास का व्यापक, सांख्यिकीय तुलना संभव है।
    • आय-आधारित हिस्से के कारण कुछ सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को पूरी तरह नहीं पकड़ पाता
    • स्वास्थ्य-गुणवत्ता और जीवन की असमानताओं का पूर्ण संकेत नहीं दे पाता।
  • अन्य संकेतक और कौन कब बेहतर है
    • जीवन स्तर के अन्य संकेतक जैसे साक्षरता दर, मातृ एवं नवजात मृत्यु दर, पोषण स्थिति आदि व्यक्तिगत रूप से महत्वपूर्ण हैं
    • वे एक साथ मिलकर “जीवन स्तर” की पूरी दास्तान नहीं दिखाते जब तक कि वे इन तीन व्यापक आयामों के साथ संयुक्त न हों।
    • निर्भर करता है यूज़र के उद्देश्य पर: नीति-निर्माताओं के लिए HDI अधिक सामान्यीकृत और तुलनात्मक है
    • शोध या क्षेत्रीय परियोजनाओं के लिए PQLI स्वास्थ्य-शिक्षा-जनसंख्या-आय के एक साथ असर को पकड़ सकता है।
  • व्यवहारिक उपयोग
    • नीति-निर्माण:HD I और PQLI जैसे सूचक आधुनिक शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, और गरीबी उन्मूलन के कार्यक्रमों के प्रभाव को ट्रैक करने में मदद करते हैं।
    • शिक्षा एवं स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्राथमिकता तय करते समय ये संकेतक संभावित क्षेत्रीय और सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को उजागर करते हैं।
  • एक उदाहरण के साथ समझना
    • अगर एक क्षेत्र में जीवन प्रत्याशा कम है, पर शिक्षा बेहतर है और मातृत्व/शिशु मृत्यु दर मध्य स्तर पर है
    • HDI इसे कई आयामों में दिखा सकता है
    • जबकि PQLI स्वास्थ्य-शिक्षा-शिशु मृत्यु दर तीनों के संयुक्त प्रभाव से वास्तविक जीवन गुणवत्ता को दर्शाने में अधिक केंद्रित हो सकता है।
  • आखिर में: किस संकेतक को चुनना चाहिए?
    • यदि आपका उद्देश्य देश-स्तर की तुलनात्मक प्रगति को एक सरल, बहु-आयामी मीट्रिक में देखना है, HDI सबसे व्यापक और मानकीकृत विकल्प है।
    • अगर आप स्वास्थ्य, शिक्षा और बच्चों की मृत्यु दर जैसे ठोस, क्षेत्रीय-फोकस्ड डेटा से जीवन गुणवत्ता को अधिक सीधे मापना चाहते हैं, तो PQLI बेहतर हो सकता है।

7. बैंकिंग एजेंट के रूप में नियुक्त की गई महिला एसएचजी (SHG) सदस्य को ....... कहा जाता है। [CHSL (T-I) 02 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) बैंक सखी
Solution:
  • बैंकिंग एजेंट के रूप में नियुक्त की गई महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) सदस्य को 'बैंक सखी' कहा जाता है।
  • ये महिलाएं बैंक और ग्रामीण जनसंख्या खासकर महिलाओं के बीच एक सेतु का काम करती हैं, जो बैंकिंग प्रक्रियाओं से परिचित नहीं होती हैं।
  • विस्तृत विवरण:
    • पृष्ठभूमि: भारत में स्व- सहायता समूह (SHG) बैंकों के साथ सीधे जुड़कर वित्तीय सेवाओं के वितरण में सहायता करते हैं
    • ऐसे समूह की एक सदस्य जो बैंकिंग एजेंट के रूप में काम करती है, उसे बैंक सखी कहा जाता है
    • [SHG बैंक लिंकेज प्रोग्राम का उद्देश्य, महिलाओं को ऋण पहुँच और वित्तीय समावेशन बढ़ावा देता है].
    • भूमिका और कार्य: बैंक सखी SHG सदस्य के रूप में रहती है
    • बैंकिंग सेवाओं का स्थानीय स्तर पर क्रियान्वयन, ऋण वितरण, बचत प्रेरणा, और बैंकिंग से जुड़ी बुनियादी जानकारी साझा करना जैसे कार्य करती है
    • वह NRLM/Day-NRLM और बैंकों के बीच एक लोकल एजेण्ट की तरह काम करती है.
    • लाभ और उद्देश्य: SHG के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों में प्रोत्साहित करना
    • वित्तीय समावेशन बढ़ाना और ऋण पहुंच सुनिश्चित करना बैंक सखी के माध्यम से अधिक सहज होता है.
    • नोट: कुछ स्रोत इसे “बैंक सखी” के रूप में स्पष्ट करते हैं कि यह एक एसएचजी सदस्य है
    • जो बैंकिंग एजेंट के रूप में कार्य करता है; अन्य जगह इसे बैंकिंग एजेंट-के रूप में विशिष्ट किया गया है ताकि भ्रम कम हो सके.
  • उपयुक्त उदाहरण:
    • यदि किसी SHG सदस्य को बैंक से छोटे ऋण दिलाने, बचत प्रोत्साहित करने और क्लियर-आउटकम्स के लिए स्थानीय स्तर पर सहायता करनी हो
    • तो वह बैंक सखी बन सकती है और बैंक को FIELD-LEVEL सपोर्ट देगी.
  • ध्यान दें:
    • SHG-आधारित मॉडल में “बैंक सखी” एक मानक परिघटना है
    • जो महिलाओं के वित्तीय भागीदारी को बढ़ाने के लिए स्थापित की गई है
    • उसका नामकरण और संदर्भ स्थान-विशिष्ट हो सकता है, लेकिन सामान्य रूप से यही शीर्षक प्रचलित है.

8. निम्नलिखित में से क्या आयात प्रतिस्थापन नीति के अनुरूप है? [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) शुल्क एवं कोटा
Solution:
  • आयात प्रतिस्थापन नीति, घरेलू उत्पादन के साथ आयात को प्रतिस्थापित करके घरेलू उद्योग की रक्षा करता है।
  • ठीक इसी प्रकार सरकार आयातित वस्तुओं पर टैरिफ और कोटा लगाकर आयात को महंगा कर देती है
  • जिससे आयात हतोत्साहित होता है और घरेलू उद्योग प्रतिस्पर्धा से बच जाते हैं।
  • मुख्य सिद्धांत और उपाय
    • घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता देना: आयात पर निर्भरता घटाने के लिए देश के भीतर समान वस्तुओं का निर्माण बढ़ाने पर जोर दिया जाता है.
    • सरकारी सहायतियाँ और टारिफ/क्वाटा: घरेलू उद्योगों को subsidies, कर राहत, प्रोत्साहन, और आयात पर शुल्क/क्वाटा जैसी नीतियाँ दी जाती हैं
    • घरेलू उत्पादन конкурент Positioned हो सके.
    • निर्यात-उन्मुखता बनाम आयात-प्रतिस्थापन: आयात प्रतिस्थापन को कभी-कभी निर्यात संवर्धन के विरुद्ध समझा जाता है
    • नीति-न तुलनात्मक रूप से घरेलू उत्पादन को मजबूत कर विदेशी बाजारों में भी प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दे सकती है.​
  • उपयोगी लाभ (pros)
    • आत्मनिर्भरता में वृद्धि: आयात कम करने से विदेशी निर्भरता घटती है और देश اپنی अर्थव्यवस्था को अधिक आत्मनिर्भर बनाता है.​
    • रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास: घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने से रोजगार के अवसर बनते हैं और औद्योगिक क्षमताओं में वृद्धि होती है.​
    • प्रौद्योगिकी और कौशल का विकास: नई प्रौद्योगिकियों और उद्योगों के विकास के अवसर बढ़ते हैं, जिसके कारण दीर्गकालिक प्रदर्शन में सुधार हो सकता है.​
  • जोखिम और सीमाएँ (cons)
    • संरक्षणवाद का जोखिम: अत्यधिक संरक्षण से घरेलू कंपनियाँ अत्यक्षमतारहित और कम प्रतिस्पर्धी हो सकती हैं, जिससे उत्पादकता घट सकती है.​
    • लागत बढ़ना और उत्पादकता का दबाव: आयात घटाने के कारण कुछ वस्तुओं की उत्पादन लागत बढ़ सकती है, जो उपभोक्ता prices पर असर डालती है.​
    • अविकसित प्रतिस्पर्धा: यदि घरेलू उद्योग पर्याप्त दक्ष नहीं हैं तो वे वैश्विक बाजारों में टिक नहीं पाते, जिससे दीर्घकालिक समृद्धि पर असर पड़ सकता है.​
  • व्यवहार में भारत में आयात प्रतिस्थापन
    • ऐतिहासिक संदर्भ में भारत ने 1950–1990 के दौरान औद्योगीकरण के उद्देश्य से आयात प्रतिस्थापन को अपनाया
    • जिसमें शिशु उद्योगों की रक्षा व घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित किया गया था; इसके लिए टैरिफ, कोटा, सब्सिडी आदि उपाय अपनाए गए थे.​​
    • इसके लाभों में घरेलू उत्पादन के लिए वातावरण बनना और विदेशी मुद्रा के प्रवाह पर नियंत्रण शामिल है
    • जबकि नुकसान में संरक्षित उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता में कमी और उपभोक्ता विकल्पों का घटना शामिल हो सकता है.​
  • यदि प्रस्ताव या नीति में प्रमुख बिंदु हों:
    • घरेलू उत्पादन बढ़ाने के बारे में स्पष्ट योजना
    • आयात पर सीमाओं (टैरिफ/क्वाटा) की चर्चा
    • शिशु उद्योगों की रक्षा के लिए समय-सीमित संरक्षण का उल्लेख
    • रोजगार और तकनीकी उन्नति के लाभों का उल्लेख
    • तो वह आयात प्रतिस्थापन नीति के अनुरूप अधिक संभावना है.
  • उल्लेखित स्रोतों के आधार पर निष्कर्ष
    • आयात प्रतिस्थापन का उद्देश्य आयात कम करके घरेलू उद्योगों को संरक्षण देना है
    • जिससे आत्मनिर्भरता और रोजगार बढ़ सकता है
    • साथ ही संरक्षित उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता घटने, कीमतों में वृद्धि और दीर्घकालिक अविकसित प्रतिस्पर्धा जैसी सावधानियाँ भी महत्व रखती हैं.​

9. निम्नलिखित में से कौन-सी एक अंतरण अदायगी है? [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

A. बेरोजगारी भत्ता

B. छात्रवृत्ति

C. सेवानिवृत्ति पेंशन

Correct Answer: (d) सभी A, B और C
Solution:
  • सामाजिक सुरक्षा के तहत प्राप्त होने वाला अंतरण भुगतान जैसे-बेरोजगारी, छात्रवृत्ति, बीमाभत्ता, बुढ़ापे में प्राप्त होने वाली पेंशन तथा सार्वजनिक ऋण पर ब्याज सकल राष्ट्रीय उत्पाद में शामिल नहीं होते
  • क्योंकि प्राप्तकर्ता इनके बदले कोई सेवा प्रदान नहीं करते हैं। अतः विकल्प (d) सही उत्तर है।
  • विस्तारपूर्ण विवरण:
    • परिभाषा: अंतरण अदायगी ऐसी वित्तीय सहायता होती है जो सरकार या अन्य संस्थाएं सीधे नागरिकों या परिवारों को देती हैं
    • वे बाजार-आधारित वस्तुओं/सेवाओं के लिए भुगतान करें या जीवनयापन में सहायता पाएं
    • जबकि यह राष्ट्रीय आय के उत्पादन में शामिल नहीं मानी जाती।
    • उदाहरण: वृद्धावस्था पेंशन, बेरोजगारी भत्ता, सामाजिक सुरक्षा योजना, बच्चों के लिए लाभ आदि।
    • ये रकम सीधे उपभोक्ता के पास पहुँचती है
    • यह उत्पादन के वास्तविक घटक (जैसे उत्पादक सेवाओं के मूल्य) नहीं बनती—बल्कि राजस्व/वितरण के तौर पर जाती है।
  • प्रकार और उद्देश्य:
    • वृद्धावस्था पेंशन: बुजुर्ग लोगों के जीवन-यापन के लिए नियमित वित्तीय सहायता।
    • बेरोजगारी भत्ता: कामकाजी तबके के बीच रोजगार खोजने में सहयोग और वित्तीय सुरक्षा।
    • सामाजिक सुरक्षा अदायगी: विभिन्न आयु/वर्ग के लोगों को सुरक्षा कवरेज और मौद्रिक सहायता।
    • बच्चों के लिए योजनाओं में खर्च: शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण से जुड़ी सरकारी सहायता।
    • राष्ट्रीय आय पर प्रभाव: इन अंतरण अदायगियों को राष्ट्रीय आय के गणना में शामिल नहीं किया जाता क्योंकि यह उत्पादन के द्वारा नहीं बनती
    • बल्कि सामाजिक-कल्याण के लिए आवंटित पैसा है।
    • गलत विकल्प से स्पष्टता: कई बार लोग इसे अन्य प्रकार के भुगतान (जैसे बाजार-आधारित बिक्री, सेवाओं का मूल्य) से भ्रमित करते हैं
    • लेकिन अंतरण अदायगी की खास बात यह है
    • यह सीधे लाभार्थी को दी जाती है और उत्पादक आर्थिकी में “उत्पादन के माध्यम से” नहीं जुड़ी होती।
  • उदाहरण के साथ समझना:
    • अगर सरकार बुजुर्गों को मासिक पेंशन देती है, तो यह एक अंतरण अदायगी है
    • क्योंकि पैसा सीधे बुजुर्ग के खाते में जाता है और इसका उत्पादन के मूल्य-निर्माण से सीधा संबंध नहीं है।
    • अगर सरकार शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति देती है, या बेरोजगारी भत्ता देती है, तो ये भी अंतरण अदायगी मानी जाएंगी।

10. इनमें से कौन-सा हरित क्रांति के प्रभावों में से एक नहीं है? [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) नकद भुगतान से वस्तु (अनाज) द्वारा भुगतान में बदलाव।
Solution:
  • हरित क्रांति से तात्पर्य उच्च उपज देने वाली किस्म के बीजों, विशेषकर गेहूं और चावल के उपयोग से खाद्यान्न उत्पादन में हुई बड़ी वृद्धि से है।
  • संक्षिप्त उत्तर
    • इनमें से हरित क्रांति के प्रभावों में से “भूजल स्तर की स्थिरता बढ़ना” एक प्रभाव नहीं है।
    • असल में भूजल स्तर अक्सर गिरा है debido अधिक पानी की मांग और असमान सिंचाई के कारण जबकि हरित क्रांति मुख्यतः उत्पादन बढ़ाने पर केंद्रित थी।
  • हरित क्रांति क्या है
    • हरित क्रांति 1960-70 के दशक में उन्नत बीज (HYV), उर्वरक, कीटनाशक, सिंचाई सुविधाओं और आधुनिक कृषि पद्धतियों के प्रयोग से कृषि उत्पादकता बढ़ाने की एक योजना थी।
    • इसका उद्देश्य खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाकर खाद्य सुरक्षा मजबूत करना था.
    • इसके जनक के तौर पर Norman Borlaug को प्रमुख माना जाता है, जिन्होंने इसे भारत में शुरू किया और बाद में देशभर में फैलाया.
  • हरित क्रांति के मुख्य लाभ
    • कृषि उत्पादन में वृद्धि: गेहूं, चावल समेत प्रमुख खाद्यान्नों की उपज में तेज वृद्धि हुई, जिससे भारत बड़े खाद्यान्न उत्पादक देश के रूप में उभरा.
    • किसानों की आय में सुधार: शुरुआत के वर्षों में कुछ किसान-समूह की आय बढ़ी और क्षेत्रीय बाजार-चालनaye का विस्तार हुआ.
  • हरित क्रांति के प्रमुख नकारात्मक प्रभाव
    • क्षेत्रीय असमानता: वे क्षेत्र जहाँ पहले से कृषि-उन्नतियाँ अधिक थीं, वहाँ उपज बढ़ी; अन्य क्षेत्रों में लाभ कम रहा, जिससे ग्रामीण आय असमान बनी.
    • भूमिगत जल पर दबाव: अधिक सिंचाई और HYV किस्मों के कारण भूजल निकासी तेज हुई
    • जिससे भूजल स्तर गिरने की प्रवृत्ति बढ़ी और कुछ इलाकों में जल-संकट पैदा हुआ.
    • रासायनिक उर्वरक/कीटनाशक निर्भरता: उन्नत रसायनों का व्यापक इस्तेमाल हुआ, जिससे पर्यावरणीय और स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम बढ़े.​​
    • खाद्य विविधता पर प्रभाव: संयुक्त मुख्य खाद्यान्न के अलावा दलहन, तिलहन आदि की उन्नति तुलनात्मक रूप से सीमित रही
    • जिससे फसल-आय में विविधता घट सकती है.
  • आपके प्रश्न के अनुरूप स्पष्ट स्पष्टीकरण
    • अगर विकल्प में भूजल गिरावट, रसायनों का बढ़ता उपयोग, ग्रामीण असमानता आदि शामिल हैं
    • तो वे हरित क्रांति के नकारात्मक प्रभाव के रूप में माने जाते हैं। लेकिन भूजल स्थिरता (या बढ़ोतरी) एक सामान्यतः मान्य प्रभाव नहीं है
    • ऐसे में यह विकल्प “हरित क्रांति के प्रभावों में से एक नहीं है” के तौर पर सबसे उपयुक्त होगा.
  • एक उदाहरण के साथ समझना
    • कल्पना करें कि एक उपज-उन्मुख जिला में HYV बीज और सिंचाई की आधुनिक सुविधाओं के कारण उत्पादन दोगुना हो गया
    • उसी जिले में groundwater levels गिरने लगे क्योंकि किसान अधिक पानी निकाल रहे थे
    • जबकि कुछ दूसरेistricts में सिंचाई अवसंरचना तक नहीं पहुंची।
    • यह दर्शाता है कि हरित क्रांति ने क्षेत्रीय असमानता और भूजल दबाव को बढ़ाया, जबकि भूजल स्थिरता नहीं बनाई.
  • नोट्स और संदर्भ
    • हरित क्रांति के औपचारिक ऐतिहासिक विवरण, लाभ और नुकसान Drishti IAS, Doubtnut आदि स्रोतों में स्पष्ट रूप से दर्ज हैं
    • जहाँ उत्पादन-लाभ, क्षेत्रीय असमानता, और जल-रसायन-आश्रितता के विषय उठते हैं.​
    • भूजल गिरावट और पानी की अधिक मांग पर भी कई विश्लेषणों में जोर है, जो हरित क्रांति के आलोचनात्मक प्रभावों में प्रमुख स्थान लेते हैं.
    • यदि आप चाहें, मैं इन्हीं विषयों के आधार पर एक विस्तृत-व्याख्या सूची/नोट्स बना सकता हूँ
    • जिसमें परीक्षा-के-तत्व, सवाल-उत्तर-फॉर्मेट और दृष्टांत शामिल हों।