विविध (अर्थव्यवस्था) भाग-III

Total Questions: 50

11. निम्नलिखित में से किसे सबसे अधिक तरल संपत्ति माना जाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) मुद्रा
Solution:
  • मुद्रा सभी परिसंपत्तियों में सबसे तरल संपत्ति होता है। तरल- संपत्ति एक ऐसी संपत्ति है
  • जिसे कम समय में आसानी से किसी अन्य संपत्ति या वस्तु के साथ विनिमय किया जा सकता है।
  • भारत में तरल संपत्ति की मांग और समय देनदारियों के अनुपात को वैधानिक तरलता अनुपात के रूप में जाना जाता है।
  • तरलता का अर्थ
    • तरलता किसी संपत्ति को उसके बाजार मूल्य पर न्यूनतम हानि के साथ नकदी में बदलने की आसानी को दर्शाती है।
    • जितनी जल्दी और कम जोखिम के साथ यह प्रक्रिया होती है, संपत्ति उतनी ही अधिक तरल होती है।
    • मुद्रा इसकी पराकाष्ठा है क्योंकि यह पहले से ही कानूनी निविदा के रूप में स्वीकार्य है और लेन-देन के लिए तैयार रहती है।
  • क्यों मुद्रा सर्वोच्च?
    • मुद्रा (नकद, बैंक खाते में बैलेंस) को बेचने या परिवर्तित करने की कोई जरूरत नहीं पड़ती; यह अंतिम लक्ष्य है।
    • अन्य संपत्तियां जैसे स्टॉक, बॉन्ड या प्राप्य खाते नकदी में बदलने में समय, बाजार जोखिम या मूल्यहानि का सामना कर सकती हैं।
    • उदाहरण: ATM से नकदी निकालना तत्काल है, जबकि सोना बेचने में बाजार मूल्यांकन और खरीदार ढूंढना पड़ता है।
  • व्यावहारिक उदाहरण
    • व्यक्तिगत वित्त में, आपातकालीन फंड के लिए केवल नकद या समकक्ष रखना सुरक्षित है
    • क्योंकि यह बिना इंतजार के उपलब्ध होता है। व्यवसायों में, मुद्रा तरलता अनुपात (करंट रेशियो) को मजबूत बनाती है।
    • वैश्विक स्तर पर, IMF जैसी संस्थाएं भी देशों की तरलता का आकलन नकद भंडार से करती हैं।
  • अन्य संपत्तियों से तुलना
    • सोना/बिटकॉइन: बाजार अस्थिरता के कारण कम तरल; बिक्री में मूल्य नुकसान संभव।​
    • चेक/टी-बिल: उच्च तरल लेकिन मुद्रा से थोड़ा नीचे, क्योंकि क्लियरिंग समय लगता है।
    • भूमि/फर्नीचर: अचल संपत्ति के रूप में सबसे कम तरल, महीनों लग सकते हैं।

12. ....... क्षेत्र, भारत में श्रम शक्ति का सबसे बड़ा नियोक्ता है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 17 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) कृषि
Solution:
  • 'कृषि' क्षेत्र भारत में श्रम शक्ति का सबसे बड़ा नियोक्ता है।
  • यह प्राथमिक क्षेत्र के अंतर्गत आता है। कृषि क्षेत्र में देश की लगभग आधी से अधिक श्रम शक्ति कार्यरत है।
  • कृषि क्षेत्र भारत में श्रम शक्ति का सबसे बड़ा नियोक्ता है।
    • यह क्षेत्र कुल कार्यबल का लगभग 42-58% हिस्सा रोजगार देता है
    • खासकर ग्रामीण इलाकों में। 2023-24 के आंकड़ों के अनुसार, कृषि में ग्रामीण पुरुषों का 44.6% और महिलाओं का 70.9% योगदान है।
  • कृषि का महत्व
    • कृषि भारत की लगभग 58% आबादी के लिए प्राथमिक आजीविका स्रोत है।
    • इसमें खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन, वानिकी जैसी गतिविधियां शामिल हैं
    • जो प्राथमिक क्षेत्र का मुख्य हिस्सा बनाती हैं।
    • हालांकि जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी घटकर 15-18% रह गई है, लेकिन रोजगार में यह प्रमुख बना हुआ है।
  • रोजगार आंकड़े
    • कुल श्रम शक्ति: 2020 में लगभग 476 मिलियन श्रमिक, जिसमें कृषि को 41.19% हिस्सा।​
    • ग्रामीण क्षेत्र: पुरुषों में 44.6%, महिलाओं में 70.9% कृषि पर निर्भर।​
    • शहरी क्षेत्र: सेवा क्षेत्र प्रमुख (पुरुष 60.6%, महिला 64.9%), लेकिन कृषि राष्ट्रीय स्तर पर सबसे बड़ा।​
  • चुनौतियां
    • कृषि में अधिकांश रोजगार असंगठित और मौसमी है, जिससे आय अस्थिर रहती है।
    • 90% श्रमिक अनौपचारिक क्षेत्र में हैं, जिसमें अवैतनिक पारिवारिक श्रम बढ़ा है।
    • जलवायु परिवर्तन, छोटे जोतें और तकनीकी कमी से उत्पादकता प्रभावित होती है।
  • अन्य क्षेत्रों से तुलना
    • विनिर्माण दूसरा बड़ा नियोक्ता है, लेकिन MSME सहित 11 करोड़ लोगों को रोजगार देता है।
    • सेवा क्षेत्र शहरीकरण के साथ बढ़ रहा है
    • फिर भी कृषि का वर्चस्व बना है। प्राथमिक क्षेत्र कुल मिलाकर सबसे बड़ा नियोक्ता है।
  • सरकारी प्रयास
    • सरकार ने 2017-23 में 17 करोड़ नौकरियां जोड़ीं, जिसमें कृषि पर फोकस। '
    • मेक इन इंडिया' और MSME योजनाएं अन्य क्षेत्रों को बढ़ावा दे रही हैं। श्रम शक्ति भागीदारी दर (WPR) 51.2% से 52.2% हुई।

13. ऋण और भुगतान दायित्वों के निर्वहन में निम्नलिखित में से किसकी सार्वभौमिक स्वीकार्यता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) लीगल टेंडर मनी
Solution:
  • ऋण और भुगतान दायित्वों के निर्वहन में 'लीगल टेंडर मनी' की सार्वभौमिक स्वीकार्यता है। लीगल टेंडर मनी को कानूनी निविदा या वैध मुद्रा भी कहा जाता है।
  • वैध मुद्रा क्या है?
    • वैध मुद्रा वह धन है जिसे ऋण या दायित्व चुकाने के लिए प्रस्तुत करने पर किसी को अस्वीकार करने का अधिकार नहीं होता।
    • यह केंद्रीय बैंक या सरकार द्वारा जारी सिक्के और नोट होते हैं, जो देशभर में बिना किसी विवाद के स्वीकार किए जाते हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, भारत में भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी रुपए की नोट और सिक्के वैध मुद्रा हैं, जो सभी लेन-देन में बाध्यकारी हैं।
  • अन्य विकल्प क्यों नहीं?
    • बॉन्ड: ये ऋण प्रतिभूतियां हैं जो सरकार या कंपनियां जारी करती हैं
    • लेकिन इन्हें सीधे भुगतान के लिए स्वीकार नहीं किया जाता। इन्हें बाजार में बेचकर ही नकद में बदला जा सकता है।​
    • मकान: अचल संपत्ति ऋण के बदले संपार्श्विक हो सकती है, लेकिन यह सीधा भुगतान माध्यम नहीं है क्योंकि इसकी कीमत और स्वीकार्यता पर विवाद हो सकता है।​
    • भूमि संपत्ति: भूमि मूल्यवान है, लेकिन वस्तु है, न कि सार्वभौमिक विनिमय माध्यम। इसे बेचने में समय लगता है और सभी पक्ष स्वीकार नहीं करते।​
  • कानूनी आधार और महत्व
    • कानून द्वारा वैध मुद्रा को भुगतान का अनिवार्य साधन बनाया जाता है
    • आर्थिक लेन-देन सुगम और स्थिर रहे। भारत के रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट, 1934 की धारा 26 के तहत आरबीआई के नोट वैध मुद्रा हैं
    • जिन्हें अस्वीकार करना अपराध है। यह आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करता है
    • क्योंकि बिना इसके ऋण चुकाने में असमंजस पैदा हो सकता है। वैश्विक स्तर पर भी, प्रत्येक देश की अपनी मुद्रा ही ऋण निर्वहन का सार्वभौमिक साधन है।
  • व्यावहारिक उदाहरण
    • मान लीजिए कोई दुकानदार आपको 1000 रुपये का सामान बेचता है
    • आप भुगतान के लिए बॉन्ड या भूमि देते हैं—वह इन्हें अस्वीकार कर सकता है
    • लेकिन वैध नोट देकर आप दायित्व पूरा कर लेते हैं। इसी कारण मुद्रा अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

14. निम्नलिखित में से किस नीति में घरेलू अर्थव्यवस्था को वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ एकीकृत करना शामिल है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) भूमंडलीकरण (वैश्वीकरण)
Solution:
  • घरेलू अर्थव्यवस्था को विश्व अर्थव्यवस्था के साथ एकीकृत करने की प्रक्रिया को वैश्वीकरण (भूमंडलीकरण) कहा जाता है।
  • वैश्वीकरण सीमाओं के पार सामाजिक, सांस्कृतिक, तकनीकी विचारों के आदान-प्रदान को सक्षम बनाता है।
  • वैश्वीकरण की परिभाषा
    • वैश्वीकरण वह नीति है जिसमें घरेलू अर्थव्यवस्था को विश्व अर्थव्यवस्था के साथ एकीकृत किया जाता है।
    • यह सीमाओं के पार वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी, प्रौद्योगिकी और श्रम की स्वतंत्र आवाजाही को सुगम बनाता है।
    • इसका मुख्य उद्देश्य एक परस्पर जुड़ी विश्व अर्थव्यवस्था बनाना है, जो संचार और परिवहन तकनीकों से प्रेरित होता है।
  • भारत में वैश्वीकरण का संदर्भ
    • भारत में 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद वैश्वीकरण को अपनाया गया
    • जब उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (LPG) नीति शुरू हुई।
    • इसमें विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI), व्यापार बाधाओं में कमी और निर्यात संवर्धन शामिल था।
    • परिणामस्वरूप, भारत का वैश्विक व्यापार हिस्सा बढ़ा, जैसे सेवा निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि।
  • वैश्वीकरण के लाभ
    • आर्थिक विकास और नवाचार को बढ़ावा, जैसे भारत में आईटी क्षेत्र का उदय।
    • सांस्कृतिक आदान-प्रदान और रोजगार सृजन, विशेषकर निर्यात-उन्मुख उद्योगों में।
    • हालांकि, असमानता और सांस्कृतिक समरूपता जैसी चुनौतियां भी उत्पन्न होती हैं।
  • वैश्वीकरण की प्रक्रिया
    • यह विदेशी व्यापार और निवेश पर केंद्रित है, जिसमें टैरिफ कम करना, कोटा हटाना और WTO जैसे समझौते शामिल हैं।
      भारत में हाल के वर्षों में यूरोपीय संघ, ब्रिटेन जैसे देशों के साथ FTA ने इसे मजबूत किया।
      परिणाम: 2025 तक सेवा निर्यात में 6.5% वृद्धि और विदेशी मुद्रा भंडार 701 अरब डॉलर से अधिक।
  • निष्कर्षस्वरूप प्रभाव
    • वैश्वीकरण ने भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत बनाया
    • लेकिन व्यापार घाटा चुनौती बनी हुई है।
    • यह घरेलू मांग और निर्यात संतुलन पर निर्भर करता है।

15. देशों को जोड़ने से भूमंडलीकरण का परिणाम ....... होगा। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) उत्पादकों के बीच अधिक प्रतिस्पर्धा
Solution:
  • देशों को जोड़ने से भूमंडलीकरण का परिणाम यह होगा कि उत्पादकों के बीच अधिक प्रतिस्पर्धा होगी।
  • भूमंडलीकरण में केवल वस्तुओं और पूंजी का ही संचलन नहीं होता, अपितु लोगों का भी संचलन होता है।
  • आर्थिक परिणाम
    • भूमंडलीकरण देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी आदान-प्रदान को बढ़ाता है
    • जिससे वैश्विक बाजार बनता है। निर्माता विभिन्न देशों से प्रतिस्पर्धा करते हैं
    • जो बेहतर उत्पाद, कम कीमतें और नवाचार को प्रोत्साहित करता है।
    • उदाहरणस्वरूप, विश्व बैंक के अनुसार, यह उपभोक्ताओं को विविध विकल्प प्रदान करता है
    • जबकि MSMEs को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार का अवसर मिलता है।​
  • सकारात्मक प्रभाव
    • देशों की परस्पर निर्भरता बढ़ती है, जैसे जापान भारत की कपास पर निर्भर होता है।​
    • आर्थिक विकास तेज होता है; विकासशील देशों में FDI 1970 में 2.2 अरब डॉलर से 1997 में 154 अरब डॉलर हो गया।​
    • तकनीकी प्रगति और रोजगार के नए अवसर सृजित होते हैं, खासकर भारत जैसे देशों में।​
  • नकारात्मक प्रभाव
    • भूमंडलीकरण असमानता को बढ़ावा देता है, जहां विकसित देश लाभान्वित होते हैं
    • विकासशील देश चुनौतियों का सामना करते हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियां स्थानीय उद्योगों को नुकसान पहुंचा सकती हैं
    • आर्थिक असमानता सामाजिक अस्थिरता का कारण बनती है।
  • राजनीतिक प्रभाव
    • राष्ट्रों की संप्रभुता कम होती है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं जैसे WTO और UN नियम बनाती हैं।
    • सहयोग बढ़ता है, लेकिन शक्तिशाली देशों का प्रभाव मजबूत होता है।​
  • सांस्कृतिक प्रभाव
    • लोगों के बीच विचारों, कला और लोक संस्कृति का आदान-प्रदान होता है
    • लेकिन स्थानीय संस्कृतियां प्रभावित हो सकती हैं। यात्रा और मीडिया से वैश्विक एकरूपता आती है।
  • भारत पर प्रभाव
    • भारत में भूमंडलीकरण ने निर्यात बढ़ाया, विदेशी वस्तुएं उपलब्ध हुईं
    • भारतीयों को वैश्विक रोजगार मिला। हालांकि, छोटे उद्योगों को प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा।
    • कुल मिलाकर, यह आर्थिक एकीकरण का परिणाम है जो अवसर और चुनौतियां दोनों लाता है।​

16. बेरोजगारी का निम्नलिखित में से कौन-सा प्रकार लोगों द्वारा बेहतर नौकरियों की तलाश में स्वेच्छा से नौकरियां छोड़ने का परिणाम है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) घर्षणात्मक बेरोजगारी
Solution:
  • घर्षणात्मक बेरोजगारी तब होती है, जब श्रमिक अपनी वर्तमान नौकरी को छोड़कर दूसरी नौकरी को खोजने की प्रक्रिया में होते हैं
  • वे स्वेच्छा से नौकरियां छोड़कर बेहतर नौकरियों की तलाश करते हैं।
  • घर्षणात्मक बेरोजगारी की परिभाषा
    • घर्षणात्मक बेरोजगारी तब होती है
    • जब कार्यरत व्यक्ति अपनी वर्तमान नौकरी छोड़कर बेहतर अवसरों, अधिक वेतन वाली नौकरियों या अपने कौशल के अनुकूल पदों की तलाश में सक्रिय रूप से खोज करते हैं। यह स्वैच्छिक प्रक्रिया है
    • क्योंकि श्रमिक खुद नौकरी बदलना चुनते हैं, न कि बाध्य होकर। यह आमतौर पर अल्पकालिक होती है
    • जैसे कुछ सप्ताह या महीनों तक, जब तक नई नौकरी नहीं मिल जाती।
  • कारण और विशेषताएं
    • यह बेरोजगारी नौकरी बाजार में जानकारी की कमी, नौकरी खोज के समय या श्रमिकों की भौगोलिक गतिशीलता से उत्पन्न होती है।
    • उदाहरणस्वरूप, एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर उच्च वेतन वाली कंपनी में जाने के लिए पुरानी नौकरी छोड़ सकता है।
    • यह अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद मानी जाती है
    • क्योंकि इससे श्रमिक अधिक उत्पादक भूमिकाओं में पहुंचते हैं। युवा श्रमिकों और शिक्षित वर्ग में यह अधिक प्रचलित है।
  • आर्थिक महत्व
    • यह बेरोजगारी पूर्ण रोजगार का हिस्सा मानी जाती है, क्योंकि यह श्रम बाजार की स्वस्थ गतिशीलता दर्शाती है।
    • प्राकृतिक बेरोजगारी दर में इसका योगदान रहता है, जो 4-5% तक हो सकता है।
    • नीतिगत रूप से, इसे कम करने के बजाय सुविधाजनक बनाया जाता है
    • जैसे ऑनलाइन जॉब पोर्टल्स या करियर काउंसलिंग से। भारत जैसे विकासशील देशों में, जहां युवा आबादी अधिक है
    • यह बेरोजगारी कौशल विकास और बाजार सूचना से प्रभावित होती है।

17. हरित क्रांति के परिणामस्वरूप, भारत अपनी स्थिति को ....... में बदलने में सक्षम था। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) खाद्य की कमी वाले देश से एक अग्रणी कृषि राष्ट्र
Solution:
  • भारत में हरित क्रांति के परिणामस्वरूप खाद्यान्न (विशेषकर गेहूं और चावल) के उत्पादन में भारी वृद्धि हुई
  • जिसके परिणामस्वरूप भारत अपनी स्थिति को 'खाद्य की कमी वाले देश से एक अग्रणी राष्ट्र' में बदलने में सक्षम था।
  • हरित क्रांति का पृष्ठभूमि
    • हरित क्रांति 1960 के दशक में शुरू हुई, जब नॉर्मन बोरलॉग द्वारा विकसित उच्च उपज वाली गेहूं की किस्मों (HYV) को भारत लाया गया।
    • 1965-66 में एमएस स्वामीनाथन की मदद से इसे पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लागू किया गया।
    • पहले भारत को PL-480 के तहत अमेरिका से गेहूं आयात करना पड़ता था, जिसे "भिखारी का कटोरा" कहा जाता था।
  • प्रमुख परिणाम
    • खाद्यान्न उत्पादन में भारी वृद्धि हुई; 1960-61 में 50 मिलियन टन से बढ़कर 1970-71 में 108 मिलियन टन हो गया।​
    • गेहूं उत्पादन 2.5 गुना बढ़ा, भारत आत्मनिर्भर और अधिशेष उत्पादक बना।
    • अकाल और कुपोषण कम हुए, खाद्य सुरक्षा मजबूत हुई।​
  • आर्थिक प्रभाव
    • हरित क्रांति ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया।
    • किसानों की आय बढ़ी, जिससे ग्रामीण बुनियादी ढांचा जैसे सड़कें, बिजली और सिंचाई विकसित हुई।
    • जजमानी प्रथा और वस्तु-विनिमय समाप्त हुए, एकल परिवार बढ़े।
    • हालांकि, बड़े किसानों को अधिक लाभ मिला, छोटे किसान भूमिहीन हुए।
  • सामाजिक परिवर्तन
    • छोटे-मध्यम किसानों की स्थिति सुधरी, शिक्षा और राजनीतिक चेतना बढ़ी।​
    • ग्रामीण गरीबी घटी, लेकिन असमानता बढ़ी क्योंकि यह पंजाब-हरियाणा तक सीमित रही।​
  • पर्यावरणीय प्रभाव
    • रासायनिक उर्वरक-कीटनाशकों से मिट्टी की उर्वरता घटी
    • जलभराव और प्रदूषण बढ़ा। सूक्ष्मजीव नष्ट हुए, जिससे दीर्घकालिक उपज प्रभावित हुई।
  • क्षेत्रीय असमानताएं
    • हरित क्रांति मुख्यतः गेहूं-चावल पर केंद्रित रही, पूर्वी और दक्षिणी भारत पिछड़ गए। पंजाब में जलस्तर गिरा, मोनोक्रॉपिंग बढ़ी।
  • दीर्घकालिक महत्व
    • भारत विश्व का प्रमुख कृषि उत्पादक बना, निर्यात शुरू हुआ।
    • यह आत्मनिर्भर भारत की नींव बनी, लेकिन सतत कृषि की चुनौतियां बनी रहीं।
    • कुल मिलाकर, यह भारत को भुखमरी से बचाने वाली क्रांति थी।

18. भारत में संरचनात्मक बेरोजगारी में योगदान देने वाला प्राथमिक कारक क्या है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) प्रौद्योगिकी में प्रगति
Solution:
  • भारत में संरचनात्मक बेरोजगारी में योगदान देने वाला प्राथमिक कारक प्रौद्योगिकी में प्रगति/ तकनीकी परिवर्तन है।
  • जैसे-जैसे उद्योग एक प्रक्रिया से दूसरी प्रक्रिया की ओर बढ़ते हैं
  • तकनीकी क्षमताओं का उपयोग करते हैं, बहुत सारी नौकरियां और भूमिकाएं अप्रचलित हो जाती हैं
  • तकनीकी प्रगति का प्रभाव
    • तकनीकी प्रगति भारत में संरचनात्मक बेरोजगारी का प्राथमिक कारक है
    • क्योंकि स्वचालन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटलीकरण पारंपरिक नौकरियों को विस्थापित कर रहे हैं।
    • उद्योगों जैसे विनिर्माण, सेवा और कृषि में मशीनें तथा सॉफ्टवेयर नियमित कार्यों को संभालने लगे हैं
    • जिससे मैनुअल श्रम की मांग घट गई है।
    • PLFS 2022-23 के आंकड़ों के अनुसार, कार्यबल का 88.2% हिस्सा निम्न-कौशल वाली नौकरियों (Skill Level 1 और 2) में लगा है
    • जो उच्च-कौशल वाले श्रमिकों की कमी को दर्शाता है।
    • इसके परिणामस्वरूप, डेटा विश्लेषण, सॉफ्टवेयर विकास और रोबोटिक्स जैसे विशेष कौशलों की मांग बढ़ रही है
    • लेकिन अधिकांश श्रमिक इनके लिए तैयार नहीं हैं। डिजिटल डिवाइड ग्रामीण और निम्न-आय वर्गों को और प्रभावित करता है, जहां तकनीक तक पहुंच सीमित है।​
  • कौशल और शिक्षा में कमी
    • शिक्षा प्रणाली का नौकरी-उन्मुख न होना कौशल बेमेल को बढ़ावा देता है, जिससे युवाओं में उच्च बेरोजगारी दर है।
    • अपर्याप्त व्यावसायिक प्रशिक्षण और अल्पकालिक कौशल कार्यक्रमों का अप्रभावी क्रियान्वयन प्रशासनिक लालफीताशाही तथा समन्वय की कमी से होता है।
    • कृषि पर अत्यधिक निर्भरता भी एक कारक है
    • जहां मौसमी रोजगार और कम उत्पादकता संरचनात्मक असंतुलन पैदा करती है।
    • जनसंख्या वृद्धि के कारण श्रम आपूर्ति अवसरों से अधिक है
    • लेकिन असंगठित क्षेत्र का प्रभुत्व (रोजगार का बड़ा हिस्सा) स्थिर आय और सुरक्षा की कमी को जन्म देता है।
  • श्रम बाजार की कठोरताएं
    • श्रम बाजार की कठोरता, जैसे भौगोलिक असंतुलन (ग्रामीण क्षेत्रों में अवसरों की कमी), नियामक चुनौतियां और जाति-आधारित सामाजिक बाधाएं संरचनात्मक बेरोजगारी को गहराती हैं।
    • महिलाओं और निम्न जातियों को पितृसत्तात्मक मानदंड तथा भेदभाव का सामना करना पड़ता है।
    • वैश्विक प्रवृत्ति होने के बावजूद, भारत की विशाल जनसंख्या इस समस्या को अधिक गंभीर बनाती है।
    • नई नौकरियां बनती हैं, लेकिन अलग कौशलों की जरूरत होती है, जिसके लिए निरंतर पुनर्कौशल化 आवश्यक है।​
  • प्रभाव और चुनौतियां
    • यह बेरोजगारी निर्धनता बढ़ाती है, श्रमिक शोषण को प्रोत्साहित करती है
    • आर्थिक वृद्धि को बाधित करती है। कार्यबल को फिर से कौशल प्रदान करने के लिए बड़े निवेश, शिक्षा सुधार और डिजिटल समावेशन की जरूरत है।

19. निम्नलिखित में से किसे सरकारी प्रतिबंधों में छूट के रूप में संदर्भित किया जाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) उदारीकरण
Solution:
  • सामाजिक या आर्थिक नीति के क्षेत्रों में सरकारी प्रतिबंधों में छूट को 'उदारीकरण' के रूप में जाना जाता है।
  • यह व्यवसाय उद्यम के सुचारु संचालन पर अनावश्यक नियंत्रण और प्रतिबंधों को समाप्त करने की प्रक्रिया को संदर्भित करता है।
  • परिभाषा
    • उदारिकरण आर्थिक नीतियों में सरकारी हस्तक्षेप और नियंत्रणों को कम करने की प्रक्रिया है
    • जिसे अक्सर "सरकारी प्रतिबंधों में ढील" कहा जाता है। इसमें व्यापारिक बाधाओं को दूर करना
    • उद्योगों पर विनियमन शिथिल करना और निजी क्षेत्र को अधिक स्वतंत्रता देना शामिल होता है।
    • इसका मुख्य उद्देश्य आर्थिक विकास को गति देना, दक्षता बढ़ाना और विदेशी निवेश आकर्षित करना है।
  • भारत में उदारीकरण का इतिहास
    • भारत में आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत 1991 में हुई
    • जब देश गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा था—विदेशी मुद्रा भंडार घटकर मात्र दो सप्ताह के आयात के बराबर रह गया था।
    • तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में नई आर्थिक नीति (NEP) लागू की गई
    • जो नियोजित अर्थव्यवस्था से बाजार-उन्मुख अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण का प्रतीक बनी।
    • इसने औद्योगिक लाइसेंस राज को समाप्त किया
    • आयात शुल्कों को कम किया (1991 में औसत 300% से घटाकर अब लगभग 10-15%) और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के लिए द्वार खोले।​
  • प्रमुख सुधार
    • औद्योगिक डी-लाइसेंसिंग: 800 से अधिक उद्योगों से लाइसेंस की आवश्यकता हटा दी गई, जिससे निजी कंपनियां आसानी से उत्पादन शुरू कर सकीं।
    • व्यापार उदारीकरण: निर्यात-आयात लाइसेंस प्रणाली खत्म की गई, क्वोटा हटाए गए और मुक्त व्यापार क्षेत्र (EOU/STP) को बढ़ावा मिला।
    • वित्तीय क्षेत्र: बैंकों का राष्ट्रीयकरण उलटा गया, निजी और विदेशी बैंकों को अनुमति दी गई, तथा स्टॉक मार्केट में कंप्यूटरीकरण हुआ।
    • परिणाम: जीडीपी वृद्धि दर 1991 के 1.1% से बढ़कर 1990 के दशक में 6% हो गई, विदेशी मुद्रा भंडार $5.8 अरब से $300 अरब से अधिक हो गया।
  • वैश्विक संदर्भ
    • विश्व स्तर पर उदारीकरण 1980 के दशक में रोनाल्ड रीगन (अमेरिका) और मार्गरेट थैचर (ब्रिटेन) की नीतियों से जुड़ा
    • जहां नियंत्रण हटाकर मुक्त बाजार को प्राथमिकता दी गई। विकासशील देशों में IMF/विश्व बैंक की शर्तों पर लागू हुआ। हालांकि, आलोचनाएं भी हैं
    • यह असमानता बढ़ा सकता है और छोटे उद्योगों को नुकसान पहुंचा सकता है।
    • भारत में, 1991 के बाद गरीबी दर 45% से घटकर 21% हो गई, लेकिन ग्रामीण-शहरी असमानता बनी रही।​

20. भारत में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों की स्थापना के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) इनकी स्थापना आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य को पूरा करने के लिए की गई है।
Solution:
  • भारत में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों की स्थापना आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्यों का पूरा करने के लिए की गई थी।
  • सही कथन
    • केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों की स्थापना के संबंध में सही कथन यह है
    • वे आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य को पूरा करने के लिए स्थापित किए गए हैं।
    • ये उपक्रम ऊर्जा, रक्षा, भारी उद्योग और बुनियादी ढांचे जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देकर आयात निर्भरता कम करते हैं।
    • वे बड़े पैमाने पर निवेश के माध्यम से राष्ट्र की आर्थिक प्रगति को गति प्रदान करते हैं और रोजगार सृजन तथा कौशल विकास में योगदान देते हैं।​
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • स्वतंत्रता के बाद भारत ने मिश्रित अर्थव्यवस्था अपनाई, जहां सार्वजनिक क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई।
    • औद्योगिक नीति संकल्प 1948 और 1956 में सार्वजनिक क्षेत्र को आधारभूत उद्योगों (जैसे इस्पात, कोयला, बिजली) के लिए चुना गया
    • निजी क्षेत्र की सीमाओं को पार किया जा सके। डॉ. वी. कृष्णमूर्ति को भारत में सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों का जनक माना जाता है
    • जिन्होंने इनकी स्थापना और प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • वर्गीकरण और श्रेणियां
    • CPSEs को उनके प्रदर्शन के आधार पर महारत्न, नवरत्न और मिनिरत्न में वर्गीकृत किया जाता है।​
    • महारत्न (2010 से): उच्चतम स्वायत्तता, जैसे ONGC, NTPC।
    • नवरत्न (1997 से): परिचालन स्वतंत्रता, जैसे BEL, HAL।​
    • मिनिरत्न (1997 से): सीमित स्वायत्तता।​
    • ये श्रेणियां CPSEs को निवेश, संयुक्त उद्यम और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सशक्त बनाती हैं।​
    • CPSEs राष्ट्रीय खजाने में लाभांश, कर और राजस्व के रूप में योगदान देते हैं।
    • वे वित्तीय संकटों में अर्थव्यवस्था को स्थिर रखते हैं और लाखों प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करते हैं।
    • रणनीतिक क्षेत्रों जैसे रक्षा और ऊर्जा में ये राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।​
  • अन्य कथनों की असत्यता
    • निजी क्षेत्र के महत्व को कम करना: गलत, क्योंकि CPSEs निजी क्षेत्र के साथ सह-अस्तित्व में हैं और प्रतिस्पर्धा बढ़ाते हैं।​
    • केवल लाभ कमाने हेतु: गलत, मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय विकास है, लाभ द्वितीयक।​
    • ये उपक्रम सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियां हैं जहां केंद्र सरकार की 51% या अधिक हिस्सेदारी होती है।
  • वर्तमान स्थिति (जनवरी 2026 तक)
    • लगभग 300 से अधिक CPSEs हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
    • हाल के वर्षों में विनिवेश और सुधारों से उनकी दक्षता बढ़ी है
    • लेकिन आत्मनिर्भरता ही मूल उद्देश्य बना हुआ है। NTPC जैसी कंपनियां वैश्विक स्तर पर अग्रणी हैं।