Correct Answer: (a) नेतृत्व शैलियों के प्रति प्रतिबंधक दृष्टिकोण का उदय
Solution:- भारतीय अर्थव्यवस्था पर वैश्वीकरण के सकारात्मक प्रभावों में सापेक्ष अभाव में वृद्धि, रोजगार में महिला भागीदारी में वृद्धि, बाल मजदूरी की समाप्ति को दर्शाता है
- जबकि नेतृत्व शैलियों के प्रति प्रतिबंधक दृष्टिकोण का उदय नकारात्मक प्रभावों को दर्शाता है।
- आर्थिक असमानता में वृद्धि
- वैश्वीकरण ने धन के संकेंद्रण को तेज कर दिया है
- जहां शहरी अभिजात वर्ग और बड़े उद्योगों को अधिक लाभ हुआ, जबकि ग्रामीण एवं सीमांत समुदाय पीछे रह गए।
- इससे अमीर-गरीब के बीच आय असमानता बढ़ी है
- क्योंकि वैश्विक कंपनियां उच्च कुशल श्रमिकों को प्राथमिकता देती हैं
- जिससे असंगठित क्षेत्र प्रभावित होता है। उदाहरणस्वरूप, IT और सेवा क्षेत्रों में वृद्धि हुई, लेकिन कृषि और लघु उद्योगों में गरीबी उन्मूलन विफल रहा।
- पारंपरिक उद्योगों का क्षय
- वैश्विक प्रतिस्पर्धा से हस्तशिल्प, हथकरघा और लघु उद्योग हाशिए पर धकेल दिए गए
- क्योंकि सस्ते आयातित उत्पाद बाजार पर हावी हो गए।
- छोटे उत्पादकों को पूंजी व प्रौद्योगिकी की कमी के कारण बहुराष्ट्रीय कंपनियों से मुकाबला नहीं कर पाते
- जिससे नौकरियां विलुप्त हुईं। विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स और वस्त्र उद्योगों में सस्ते आयात ने स्थानीय इकाइयों को बंद होने पर मजबूर किया।
- वैश्विक निर्भरता के जोखिम
- भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर अत्यधिक निर्भर हो गया है
- जो कोविड-19 जैसी महामारियों या भू-राजनीतिक तनावों से बाधित हो जाती हैं।
- फार्मास्यूटिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्र प्रभावित हुए, जिससे उत्पादन बाधित हुआ।
- इसके अलावा, विदेशी पूंजी (FPI) पर निर्भरता बढ़ी; अक्टूबर 2024 में इक्विटी बाजार से 10,428 मिलियन डॉलर का बहिर्वाह हुआ, जिससे रुपया कमजोर हुआ।
- श्रम शोषण एवं रोजगार हानि
- बहुराष्ट्रीय कंपनियां सस्ते श्रम की तलाश में भारत आती हैं
- लेकिन कम मजदूरी और खराब कार्यस्थितियों से श्रमिक शोषित होते हैं।
- नौकरी विस्थापन बढ़ा, क्योंकि सस्ते आयात से घरेलू उद्योग बंद हुए।
- कृषि क्षेत्र को भी उपेक्षा मिली, जो अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा है।
- पर्यावरणीय एवं सांस्कृतिक हानि
- औद्योगिक विस्तार से प्रदूषण और संसाधनों का दोहन बढ़ा।
- विदेशी संस्कृति के प्रभाव से पारंपरिक मूल्य कमजोर हुए, तथा उपभोक्तावाद ने टिकाऊ जीवनशैली को प्रभावित किया।
- साइबर सुरक्षा खतरे भी बढ़े, क्योंकि डिजिटल एकीकरण तेज हुआ लेकिन विनियमन कमजोर रहा।