विविध (अर्थव्यवस्था) भाग-III

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31. निम्नलिखित में से कौन-सा सरकारी बजट में गैर-ऋण पूंजी प्राप्ति का उदाहरण है? [MTS (T-I) 05 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) सरकारी-स्वामित्व वाली भूमि की ब्रिकी
Solution:
  • पूंजी प्राप्तियों के वर्गीकरण में ही ऋण पूंजी प्राप्तियां तथा गैर-ऋण पूंजी प्राप्तियां आती हैं।
  • गैर-ऋण पूंजी प्राप्तियां वे प्राप्तियां हैं, जिनके भुगतान हेतु सरकार पर भविष्य में कोई दायित्व नहीं बनता
  • जैसे ऋण की अग्रिम राशि की वसूली, विनिवेश अर्थात सरकारी स्वामित्व वाली भूमि की बिक्री तथा बोनस शेयरों का निर्गमन, आदि इसके उदाहरण हैं।
  • सरकारी बजट प्राप्तियों का वर्गीकरण
    • सरकारी बजट की प्राप्तियां दो मुख्य श्रेणियों में बांटी जाती हैं: राजस्व प्राप्तियां और पूंजीगत प्राप्तियां।
    • पूंजीगत प्राप्तियां वे होती हैं जो सरकार की देनदारियों को बढ़ाती हैं
    • उसके वित्तीय संपत्तियों (जैसे भूमि, शेयर) को कम करती हैं, और ये गैर-आवर्ती प्रकृति की होती हैं।
    • इनमें ऋण प्राप्तियां (जैसे उधार) और गैर-ऋण पूंजी प्राप्तियां (जो कोई भविष्य की देनदारी नहीं पैदा करतीं) शामिल हैं।
  • गैर-ऋण पूंजी प्राप्ति क्या है?
    • गैर-ऋण पूंजी प्राप्तियां सरकार को परिसंपत्तियों की बिक्री, विनिवेश, पुराने ऋणों की वसूली या बोनस शेयर जारी करने से मिलती हैं।
    • ये प्राप्तियां चुकाने की जरूरत नहीं रखतीं, इसलिए राजकोषीय घाटे पर बोझ नहीं डालतीं और विभिन्न व्ययों के वित्तपोषण में सहायक होती हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (PSU) में हिस्सेदारी बेचना या सरकारी संपत्ति नीलाम करना।
  • सही उदाहरण: सरकारी भूमि की बिक्री
    • निम्नलिखित विकल्पों में से "सरकारी स्वामित्व वाली भूमि की बिक्री" गैर-ऋण पूंजी प्राप्ति का स्पष्ट उदाहरण है
    • क्योंकि यह सरकार की संपत्ति को नकदी में बदलती है बिना कोई नई देनदारी बनाए।
    • इससे सरकार को तत्काल धन मिलता है, जो पूंजीगत व्यय (जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर) में लगाया जा सकता है।
    • यह पूंजी प्राप्ति है क्योंकि भूमि जैसी स्थायी संपत्ति कम हो रही है।
  • अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
    • अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से ऋण: यह ऋण पूंजी प्राप्ति है
    • क्योंकि IMF/World Bank जैसे स्रोतों से लिया धन चुकाना पड़ता है, जो देनदारी बढ़ाता है।​
    • सरकारी बांडों पर ब्याज भुगतान: यह बजट व्यय है, न कि प्राप्ति; बांडों की बिक्री तो ऋण प्राप्ति होती है।
    • नागरिकों से कर राजस्व: यह राजस्व प्राप्ति का हिस्सा है (जैसे GST, आयकर), जो नियमित और चक्रीय होती है, पूंजीगत नहीं।​
  • महत्वपूर्णता और प्रभाव
    • गैर-ऋण पूंजी प्राप्तियां राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने में मदद करती हैं
    • क्योंकि ये बिना ब्याज बोझ के धन जुटाती हैं।
    • भारत के केंद्रीय बजट में ये कुल प्राप्तियों का महत्वपूर्ण हिस्सा (लगभग 75% गैर-ऋण भाग) बनाती हैं
    • जो विनिवेश या संपत्ति बिक्री से आती हैं। इससे ऋण पर निर्भरता कम होती है और आर्थिक स्थिरता बढ़ती है।

32. विद्युत क्षेत्र की पुर्नोत्थान वितरण क्षेत्र योजना के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है? [MTS (T-I) 05 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

1. प्रधानमंत्री ने 2022 में बिजली मंत्रालय की प्रमुख पुनर्स्थान वितरण क्षेत्र योजना शुरू की।

2. इस योजना का उद्देश्य वितरण कंपनियों की परिचालन दक्षताओं और वित्तीय स्थायित्व में सुधार करना है।

3. वित्त वर्ष 2022-23 से वित्त वर्ष 2027-28 तक, इस योजना का लक्ष्य डिस्कॉम्स (DISCOMs) को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।

4. इस योजना के तहत पूरे देश में उपभोक्ताओं को 25 करोड़ प्रीपेड स्मार्ट मीटर उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।

Correct Answer: (b) 1, 2 और 4
Solution:
  • प्रधानमंत्री ने जुलाई, 2022 में विद्युत (बिजली) मंत्रालय की प्रमुख पुर्नोत्थान वितरण क्षेत्र योजना का शुभारंभ किया।
  • इसका उद्देश्य डिस्कॉम की परिचालन दक्षताओं और वित्तीय स्थिरता में सुधार करना है।
  • यह योजना वर्ष 2025-26 तक उपलब्ध रहेगी। इस योजना अवधि के दौरान 25 करोड़ प्रीपेड स्मार्ट मीटर स्थापित करने की योजना है।
  • योजना का परिचय
    • पुनरोत्थान वितरण क्षेत्र योजना (RDSS), जिसे अंग्रेजी में Revamped Distribution Sector Scheme कहा जाता है
    • जून 2021 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी।
    • इसका मुख्य उद्देश्य डिस्कॉम्स को सशर्त वित्तीय सहायता देकर बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, AT&C हानियों को कम करना और लागत-राजस्व अंतर को शून्य करना है।
    • योजना की अवधि वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक है, जिसमें कुल परिव्यय 3.03 लाख करोड़ रुपये से अधिक का है।
  • प्रमुख उद्देश्य
    • AT&C हानियों में कमी: 2024-25 तक अखिल भारतीय स्तर पर इन्हें 12-15% तक घटाना।
    • वित्तीय स्थिरता: 2024-25 तक ACS-ARR अंतर को शून्य करना, जिससे डिस्कॉम्स आत्मनिर्भर बनें।​
    • उपभोक्ता सेवाओं में सुधार: बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और सामर्थ्य बढ़ाना।​
  • मुख्य घटक
    • योजना के प्रमुख घटक निम्न हैं:
    • स्मार्ट मीटरिंग: लगभग 25 करोड़ स्मार्ट प्री-पेड मीटर लगाना, जिसमें पहले चरण में 10 करोड़ मीटर 2023 तक।
    • यह उपभोक्ता मीटर और सिस्टम मीटर दोनों को कवर करता है, जिसमें 250 मिलियन परिवार शामिल हैं।
    • फीडर वर्गीकरण और सौरकरण: असंबद्ध फीडरों को अलग करना, विशेषकर कृषि फीडरों को।
    • 10,000 कृषि फीडरों को सौर ऊर्जा से जोड़ना, जिससे किसानों को दिन में सस्ती/निःशुल्क बिजली मिले।
    • पीपीपी मोड: सार्वजनिक-निजी साझेदारी से स्मार्ट मीटरिंग को बढ़ावा, उपभोक्ताओं को अपनी खपत पर नियंत्रण।
    • प्राथमिकता: अमृत शहर, केंद्र शासित प्रदेश, MSME, सरकारी कार्यालय।​
  • इससे जुड़ी पूर्व योजनाएं
    • RDSS ने एकीकृत विद्युत विकास योजना (IPDS), दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (DDUGJY) और सौभाग्य योजना को समाहित कर लिया है।
    • IPDS शहरी नेटवर्क मजबूती पर केंद्रित था
    • जबकि DDUGJY ग्रामीण फीडर अलगाव और मीटरिंग पर।​
  • कार्यान्वयन और नोडल एजेंसियां
    • आरईसी (Rural Electrification Corporation) और पीएफसी (Power Finance Corporation) नोडल एजेंसियां हैं।
    • जून 2026 तक स्मार्ट मीटर लक्ष्य पूरा करने का प्रयास है।
    • योजना सुधार-आधारित है, जहां वित्तीय सहायता पूर्व-योग्यता और न्यूनतम उपलब्धि पर निर्भर।
  • किसानों और उपभोक्ताओं के लिए लाभ
    • किसानों को समर्पित फीडरों से विश्वसनीय बिजली और अतिरिक्त आय (सौर से) मिलेगी।
    • उपभोक्ता प्री-पेड मीटर से खपत नियंत्रित कर सकेंगे, जो ऊर्जा दक्षता बढ़ाएगा।​
    • यह योजना विद्युत क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है
    • हालांकि 2026 तक इसके पूर्ण प्रभाव का मूल्यांकन बाकी है।

33. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत के छः डाक व्यवहार के मार्ग (six communication mail channels) का हिस्सा नहीं है? [MTS (T-I) 05 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) मासिक चैनल
Solution:
  • बड़े शहरों व नगरों में डाक-संचार में शीघ्रता हेतु, हाल ही में छः डाक मार्ग बनाए गए हैं।
  • इन्हें राजधानी चैनल, मेट्रो चैनल, ग्रीन चैनल, बिजनेस चैनल, बल्क मेल चैनल तथा पीरिऑडिकल चैनल के नाम से जाना जाता है।
  • छह चैनलों का विवरण
    • ये चैनल विभिन्न प्रकार के मेल की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किए गए हैं, जो देश भर में कुशल वितरण सुनिश्चित करते हैं।
    • मेट्रो चैनल: बड़े महानगरों (मेट्रो शहरों) के बीच तेज़ डिलीवरी के लिए।
    • राजधानी चैनल: दिल्ली सहित प्रमुख राजधानियों को जोड़ने वाला, विशेष रूप से 6 राज्यों की राजधानियों तक।​
    • बिजनेस चैनल (व्यावसायिक चैनल): व्यवसायिक पत्राचार के लिए प्राथमिकता वाली सेवा।
    • बल्क मेल चैनल: बड़ी मात्रा में मेल (जैसे विज्ञापन या समूह पत्र) के लिए।​
    • पीरियोडिकल चैनल (आवधिक चैनल): पत्रिकाओं और समाचार पत्रों जैसी नियमित प्रकाशनों के लिए।
    • एक्सप्रेस चैनल: अति तीव्र डिलीवरी की आवश्यकता वाले मेल के लिए।​
  • कौन-सा हिस्सा नहीं है?
    • मासिक चैनल इन छह मान्यता प्राप्त संचार मेल चैनलों का हिस्सा नहीं है।
    • यह कोई आधिकारिक चैनल नहीं माना जाता, जबकि अन्य सभी विशिष्ट उद्देश्यों के लिए स्थापित हैं।
    • कभी-कभी साप्ताहिक चैनल या ग्रीन चैनल जैसे अन्य नाम भी प्रश्नों में आते हैं, लेकिन वे भी इन छह में शामिल नहीं।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • भारतीय डाक प्रणाली 1854 में स्थापित हुई और दुनिया का सबसे बड़ा नेटवर्क है
    • जिसमें 1.55 लाख से अधिक डाकघर हैं। ये चैनल शहरीकरण और व्यावसायिक आवश्यकताओं के बढ़ने पर विकसित हुए
    • जो पारंपरिक डाक को आधुनिक बनाते हैं।
    • डिजिटल युग में भी ई-पोस्ट जैसी सेवाओं से इन्हें मजबूती मिली है।

34. भारत में सूक्ष्म वित्त संस्थानों की संवहनीयता (sustainability) से संबंधित आयाम क्या है? [MTS (T-I) 04 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) दाता निधि पर निर्भरता
Solution:
  • सूक्ष्म वित्त संस्थान एक वित्तीय संगठन है, जो अल्प आय वाली आबादी को वित्तीय सेवाएं प्रदान करता है।
  • इन सेवाओं में सूक्ष्म ऋण, सूक्ष्म बचत तथा सूक्ष्म बीमा सम्मिलित होते हैं। इसकी संवहनीयता से संबंधित आयाम दाता निधि पर निर्भरता है।
  • वित्तीय संवहनीयता
    • वित्तीय स्थिरता MFIs का मूल आधार है, जिसमें राजस्व मॉडल की स्वतंत्रता प्रमुख है।
    • दानदाताओं पर अत्यधिक निर्भरता जोखिम पैदा करती है, क्योंकि फंडिंग बंद होने पर संकट उत्पन्न हो सकता है
    • इसलिए ग्राहक बचत, विविध वित्तपोषण और उच्च वसूली दर (90% से ऊपर) आवश्यक हैं।
    • ऋण पोर्टफोलियो की गुणवत्ता और परिचालन स्व-निर्भरता अनुपात जैसे संकेतक ब्याज आय से सभी लागतों को कवर करने में मदद करते हैं।
    • उच्च ब्याज दरें (24-36%) चुनौती हैं, लेकिन पारदर्शी मूल्य निर्धारण से यह संभव होता है।
  • सामाजिक संवहनीयता
    • MFIs का उद्देश्य गरीबों का सशक्तिकरण है, इसलिए ग्राहक प्रभाव (client impact) आयाम महत्वपूर्ण है।
    • वित्तीय साक्षरता की कमी से अति-ऋणग्रस्तता (multiple lending) बढ़ती है, जिसे SHG-BLP मॉडल से कम किया जा सकता है।
    • सामाजिक प्रदर्शन स्कोरकार्ड के माध्यम से प्रभाव मापन (जैसे महिला सशक्तिकरण, उद्यमिता वृद्धि) लंबी अवधि की वफादारी सुनिश्चित करता है।
    • NABARD और RBI की योजनाएं जैसे NRLM इसमें सहायक हैं।
  • परिचालन संवहनीयता
    • ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की कमी (परिवहन, संचार) संचालन को प्रभावित करती है।
    • डिजिटल परिवर्तन (मोबाइल बैंकिंग, UPI) और फिनटेक एकीकरण से लागत घटी है (operational cost per borrower <₹500)।
    • मानव संसाधन प्रबंधन, जिसमें क्षेत्रीय कर्मचारियों की क्षमता निर्माण और कम टर्नओवर (15% से नीचे), कुशल JO (joint liability groups) प्रबंधन सुनिश्चित करता है।​
  • नियामकीय और जोखिम संवहनीयता
    • RBI के NBFC-MFI दिशानिर्देश (प्राथमिकता ऋण 75%, ब्याज कैप 26% + मार्जिन) विनियमन प्रदान करते हैं
    • लेकिन राज्य-स्तरीय विसंगतियां समस्या हैं। राजनीतिक हस्तक्षेप (ऋण माफी) और अति-ऋणग्रस्तता जोखिम प्रबंधन (credit bureau linkage) से नियंत्रित होते हैं।
    • कॉर्पोरेटाइजेशन (Bandhan, Equitas जैसे IPO) ने पूंजी जुटाई आसान की, लेकिन जोखिम पूल विविधीकरण आवश्यक है।​
  • बाह्य पर्यावरणीय आयाम
    • आर्थिक उतार-चढ़ाव (COVID-19 जैसी महामारी) से प्रभावित होने पर पुनर्भुगतान योजनाएं (moratorium) सहायक हैं।
    • जलवायु जोखिम (कृषि-आधारित ग्राहक) के लिए हरित सूक्ष्मवित्त उत्पाद विकसित हो रहे हैं।​
    • सरकार-बैंक साझेदारी (priority sector lending 75% MFI ऋणों के लिए) और Jan Dhan Yojana एकीकरण से पहुंच बढ़ी है (6 करोड़+ गैर-कृषि उद्यम)।

35. एसएचजी बैंक लिंकेज आंदोलन (SHG Bank linkage movement) के महत्वपूर्ण लक्ष्य का नेतृत्व आरबीआई (RBI) के समर्थन से ....... ने किया था। [MTS (T-I) 04 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) नाबार्ड
Solution:
  • एसएचजी बैंक लिंकेज आंदोलन / परियोजना नाबार्ड द्वारा शुरू की गई थी और अब यह दुनिया की सबसे बड़ी माइक्रोफाइनेंस परियोजना बन गई है।
  • इस कार्यक्रम के तहत बैंकों को एसएचजी के लिए बचत खाता खोलने की अनुमति दी गई है।
  • आंदोलन का परिचय
    • ए जो ग्रामीण गरीबों, खासकर महिलाओं को औपचारिक बैंकिंग से जोड़ता है। यह 1992 में नाबार्ड द्वारा शुरू किया गया पायलट प्रोजेक्ट था
    • जिसमें स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को बैंकों से सीधे ऋण उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
    • आरबीआई ने बैंकों को SHGs को ऋण देने की अनुमति देकर और मास्टर सर्कुलर जारी कर इसकी नींव मजबूत की।
  • नाबार्ड की प्रमुख भूमिका
    • नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक) ने इस आंदोलन को उत्प्रेरक के रूप में चलाया, जिसमें रिफाइनेंस सुविधा, प्रशिक्षण और प्रचार का काम किया।
    • आरबीआई के सहयोग से नाबार्ड ने बैंकों को SHGs से जोड़ने के लिए दिशानिर्देश दिए
    • जैसे सरल प्रक्रियाएं और बिना गारंटी के ऋण। इससे SHGs की ऋण राशि में वृद्धि हुई, गैर-उत्पादक ऋण कम हुए और वसूली दर लगभग 100% पहुंची।
  • आरबीआई का समर्थन
    • आरबीआई ने 1992 से ही सर्कुलर जारी कर बैंकों को SHGs को बचत खाते खोलने और ऋण देने की छूट दी
    • साथ ही प्रक्रियाओं को सरल बनाया। 2008-09 के बजट में वित्त मंत्री ने कुल वित्तीय समावेशन का लक्ष्य रखा
    • जिसमें SHGs के आय-सृजन, सामाजिक जरूरतों (घर, शिक्षा, विवाह) और कर्ज समापन को शामिल किया गया।
    • हाल के मास्टर सर्कुलर (जैसे 2019 और उसके बाद) में भी SHGs के लिए प्रोत्साहन और प्रक्रिया सरलीकरण पर जोर दिया गया।
  • महत्वपूर्ण उपलब्धियां
    • वित्तीय समावेशन: करोड़ों ग्रामीण महिलाओं को बैंकिंग से जोड़ा गया, लेन-देन लागत घटी।
    • महिला सशक्तीकरण: SHGs ने उत्पादक गतिविधियों (कृषि, पशुपालन) को बढ़ावा दिया, आय स्तर ऊंचा किया।
    • विकास: शुरुआती पायलट से अब देशव्यापी कार्यक्रम, जिसमें DAY-NRLM जैसी योजनाएं जुड़ीं। गरीब राज्यों (बिहार, मध्य प्रदेश) में तेज वृद्धि हुई।​
    • परिणाम: SHGs की ऋण राशि में भारी उछाल, सब्सिडी-आधारित से व्यावसायिक ऋण की ओर बदलाव।​
  • चुनौतियां और विस्तार
    • हालांकि सफल, लेकिन कुछ राज्यों में सब्सिडी निर्भरता रही।
    • नाबार्ड और आरबीआई ने NGOs, IBA के साथ मिलकर फॉर्म और प्रक्रियाओं को एकसमान किया।
    • आज यह गरीबी उन्मूलन और महिला सशक्तीकरण का सबसे प्रभावी टूल है।
    • 2025 तक जारी मास्टर सर्कुलर SHGs को समग्र क्रेडिट कवरेज सुनिश्चित करते हैं।

36. वित्तीय वर्ष (fiscal year) क्या है? [MTS (T-I) 04 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) सरकार के लिए वित्तीय रिपोर्टिंग अवधि को दर्शाने वाला वर्ष
Solution:
  • वित्तीय वर्ष एक वर्ष की अवधि है, जिसका उपयोग कंपनियां और सरकारें वित्तीय नियोजन और बजट बनाने के लिए करती हैं
  • अर्थात यह सरकार के लिए वित्तीय रिपोर्टिंग अवधि को दर्शाने वाला वर्ष है।
  • परिभाषा
    •  यह सामान्यतः 12 महीने या 52-53 सप्ताह का होता है
    • लेकिन इसकी शुरुआत और समाप्ति संगठन की नीतियों या कानूनों पर निर्भर करती है।
    • उदाहरणस्वरूप, भारत में वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से अगले वर्ष 31 मार्च तक चलता है, जो ब्रिटिश उपनिवेशकाल से चली आ रही परंपरा है।
  • उद्देश्य और महत्व
    • वित्तीय वर्ष का मुख्य उद्देश्य वित्तीय डेटा को व्यवस्थित रूप से ट्रैक करना, वार्षिक रिपोर्ट तैयार करना, बजट बनाना और कर चुकाना है।
    • यह व्यवसायों को मौसमी उतार-चढ़ाव से निपटने, निवेशकों को पारदर्शी जानकारी देने और सरकारी नीतियां लागू करने में मदद करता है।
    • भारत जैसे कृषि-प्रधान देश में अप्रैल-मार्च का चयन इसलिए किया गया क्योंकि यह फसल चक्र से मेल खाता है।
  • भारत में विस्तृत विवरण
    • भारत में वित्तीय वर्ष चार तिमाहियों (Quarters) में बांटा जाता है:
    • Q1: अप्रैल-जून
    • Q2: जुलाई-सितंबर
    • Q3: अक्टूबर-दिसंबर
    • Q4: जनवरी-मार्च
    • यह अवधि आयकर रिटर्न दाखिल करने, GST फाइलिंग और कंपनी बैलेंस शीट तैयार करने के लिए अनिवार्य है।
    • वर्तमान में (जनवरी 2026), FY 2025-26 चल रहा है, जो 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक है।
    • मूल्यांकन वर्ष (Assessment Year या AY) FY के ठीक बाद आता है, जैसे FY 2025-26 के लिए AY 2026-27।
  • लाभ और चुनौतियां
  • लाभ:
    • मौसमी प्रभावों को समायोजित करता है।
    • सटीक वित्तीय विश्लेषण संभव।
    • निवेशक विश्वास बढ़ाता है।
  • चुनौतियां:
    • अंतरराष्ट्रीय तुलना कठिन।
    • -年中 में बदलाव महंगा।
    • व्यक्तियों को दोहरी ट्रैकिंग करनी पड़ती है।​

37. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत में सूक्ष्म वित्त संस्थानों (MFIs) का एक आयाम है? [MTS (T-I) 04 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच
Solution:
  • ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच भारत में सूक्ष्म वित्त संस्थाओं का एक आयाम है
  • अर्थात यह वित्तीय कंपनियां उन लोगों को छोटे ऋण प्रदान करती हैं, जो समाज के वंचित और कमजोर वर्गों से हैं
  • जिनके पास बैंकिंग सुविधाओं तक पहुंच उपलब्ध नहीं है।
  • MFIs का परिचय
    • सूक्ष्म वित्त संस्थान (MFIs) वे संगठन हैं जो कम आय वाले व्यक्तियों, विशेष रूप से ग्रामीण और हाशिए पर पड़े समुदायों को वित्तीय सेवाएं देते हैं।
    • इनका मुख्य फोकस वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना है, जहां पारंपरिक बैंक नहीं पहुंच पाते।
    • उदाहरण के लिए, ये बिना गारंटी के छोटे ऋण प्रदान करते हैं, जो स्व-रोजगार और छोटे व्यवसायों को बढ़ावा देते हैं।
  • मुख्य आयाम
    • भारत में MFIs के प्रमुख आयाम निम्नलिखित हैं:
    • ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच: MFIs का प्राथमिक लक्ष्य वंचित ग्रामीण इलाकों में वित्तीय सेवाएं पहुंचाना है
    • जहां बैंकिंग सुविधाएं सीमित हैं। यह उनका सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।​
    • महिला सशक्तीकरण: अधिकांश MFIs महिलाओं को ऋण देकर उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाते हैं, जो सामाजिक समानता को बढ़ावा देता है।​
    • गरीबी उन्मूलन: छोटे ऋणों से ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलता है, जिससे जीवन स्तर सुधरता है।
    • वित्तीय समावेशन: ये संस्थान बचत, बीमा और सूक्ष्म निवेश जैसी सेवाएं भी प्रदान करते हैं, जो ऋण पर निर्भरता कम करती हैं।​
  • विस्तृत आंकड़े
    • 31 मार्च 2024 तक, भारत में 168 MFIs सक्रिय हैं, जो 29 राज्यों, 4 केंद्र शासित प्रदेशों और 563 जिलों में फैले हैं।
    • इनका ऋण पोर्टफोलियो 4.33 लाख करोड़ रुपये का है और 3 करोड़ से अधिक ग्राहक जुड़े हैं। ये आंकड़े MFIs की व्यापक पहुंच दर्शाते हैं।
  • नियामक ढांचा
    • RBI NBFC-MFI ढांचे (2014) के तहत MFIs को विनियमित करता है
    • जिसमें ग्राहक संरक्षण, उचित ब्याज दरें और ऋण वसूली के नियम शामिल हैं। यह सुनिश्चित करता है
    • सेवाएं नैतिक हों। MFIs को स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के साथ भी जुड़ना पड़ता है।
  • चुनौतियां
    • MFIs को उच्च परिचालन लागत, सब्सिडी पर निर्भरता और पूंजी की कमी का सामना करना पड़ता है।
    • केवल एक तिहाई MFIs ही पूरी तरह लाभप्रद हैं। इसके अलावा, अत्यधिक ऋण और जबरन वसूली जैसी समस्याएं भी हैं।
  • लाभ और प्रभाव
    • MFIs ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है, विशेष रूप से कृषि और लघु व्यवसायों में।
    • उदाहरणस्वरूप, बंधन बैंक जैसे MFI ने बैंक बनकर अपनी पहुंच बढ़ाई।
    • भविष्य में इन्हें बीमा और निवेश सेवाओं का विस्तार करना चाहिए।​

38. निदेशक सिद्धांतों को मोटे तौर पर तीन व्यापक श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। निम्नलिखित में से कौन-सा इस वर्गीकरण का हिस्सा नहीं है? [MTS (T-I) 04 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) सत्तावादी
Solution:
  • भारतीय संविधान में निदेशक सिद्धांतों को उनके वैचारिक स्रोत और उद्देश्यों के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
  • ये निर्देश निम्नलिखित रूप में वर्गीकृत किए गए हैं-समाजवादी सिद्धांत, गांधीवादी सिद्धांत, उदारवादी सिद्धांत। सत्तावादी सिद्धांत इसके वर्गीकरण का हिस्सा नहीं है।
  • मानक वर्गीकरण
    • ये तीन श्रेणियाँ निदेशक सिद्धांतों के मूलभूत विभाजन को दर्शाती हैं, जो अनुच्छेद 36 से 51 तक वर्णित हैं।
    • समाजवादी सिद्धांत आर्थिक समानता और कल्याणकारी राज्य पर केंद्रित हैं
    • जैसे धन के संकेंद्रण को रोकना (अनु. 39)। गांधीवादी सिद्धांत ग्रामीण विकास, पंचायती राज और शराबबंदी जैसे गांधीजी के विचारों से प्रेरित हैं
    • अनु. 40, 47)। उदारवादी सिद्धांत व्यक्तिगत स्वतंत्रता, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हैं (अनु. 41, 45)।
  • गलत विकल्प
    • प्रश्न के संदर्भ में, "आधिकारिक" (Official या Authoritarian) इस वर्गीकरण का हिस्सा नहीं है।
    • यह कोई मानक श्रेणी नहीं है और संविधान की व्याख्या में कहीं प्रयुक्त नहीं होती।
    • कुछ स्रोतों में विकल्पों के रूप में "सत्तावादी" (Authoritarian) या इसी प्रकार के शब्द आते हैं
    • aलेकिन ये गलत हैं क्योंकि DPSP लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित हैं, न कि सत्तावादी विचारधारा पर।

39. किस भारतीय मंत्रालय ने कृषि कानून निरसन विधेयक (Farm Laws Repeal Bill), 2021 पेश किया? [MTS (T-I) 13 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय
Solution:
  • कृषि कानून निरसन विधेयक (Farm Laws Repeal Bill), 2021 कृषि मंत्री द्वारा लोक सभा में पेश किया गया था।
  • यह विधेयक देशभर में किसानों के व्यापक विरोध के बीच लागू किए गए तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त करने का प्रयास करता है।
  • पृष्ठभूमि
    • यह विधेयक सितंबर 2020 में पारित तीन विवादास्पद कृषि कानूनों
    • कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम, 2020; किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा पर करार अधिनियम, 2020;
    • आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 2020—को निरस्त करने के लिए लाया गया।
    • इन कानूनों के खिलाफ किसानों का लंबा आंदोलन चला, जो दिल्ली की सीमाओं पर 2020-2021 तक जारी रहा।
    • 19 नवंबर, 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित कर कानूनों को वापस लेने की घोषणा की, जिसके बाद कैबिनेट ने मंजूरी दी।
  • संसदीय प्रक्रिया
    • लोकसभा में मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा पेश विधेयक पर विपक्ष के हंगामे के बीच ध्वनिमत से पारित हुआ।
    • उसके बाद राज्यसभा में भी उसी दिन पारित कराया गया
    • जहां कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने उपचुनाव नतीजों का हवाला देकर सरकार पर निशाना साधा।
    • 1 दिसंबर, 2021 को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की मंजूरी मिली, और यह कृषि कानून निरसन अधिनियम, 2021 बन गया।
  • मंत्रालय की भूमिका
    • कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय कृषि नीतियों, किसान कल्याण योजनाओं और संबंधित विधेयकों के लिए जिम्मेदार है।
    • इसने 2020 के कानून बनाए और बाद में निरसन विधेयक भी पेश किया।
    • अन्य मंत्रालय जैसे वित्त, ग्रामीण विकास या पंचायती राज इससे जुड़े नहीं थे।
  • प्रभाव
    • निरसन से किसान आंदोलन समाप्ति की दिशा में बढ़ा, लेकिन किसान संगठनों ने एमएसपी की गारंटी जैसे मुद्दे उठाए।
    • यह घटना भारतीय कृषि नीति में किसानों की राजनीतिक ताकत को रेखांकित करती है।​

40. किस राज्य में जूट मिलों की अधिकतम संख्या (2022 तक) है? [MTS (T-I) 05 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) पश्चिम बंगाल
Solution:
  • भारत की कुल जूट मिलों में से अधिकतम जूट मिलें पश्चिम बंगाल में हैं और बंगाल अभी भी भारतीय जूट उद्योग का केंद्र है।
  • अकेले पश्चिम बंगाल की कच्चे जूट उत्पादन में 50 प्रतिशत से अधिक की भागेदारी है।
  • राज्यवार स्थिति
    • भारत में कुल लगभग 108 जूट मिलें हैं, जिनमें से अधिकांश (लगभग 60-70) पश्चिम बंगाल में हैं।
    • ये मिलें मुख्य रूप से हुगली नदी के किनारे कोलकाता के आसपास केंद्रित हैं, जो कच्चे माल की उपलब्धता और परिवहन सुविधा प्रदान करती हैं।
    • अन्य राज्य जैसे असम, बिहार, ओडिशा और आंध्र प्रदेश भी जूट उत्पादन करते हैं, लेकिन मिलों की संख्या कम है।
  • भौगोलिक कारण
    • पश्चिम बंगाल की उपजाऊ गंगा डेल्टा मिट्टी, गर्म-आर्द्र जलवायु (24-37°C तापमान, 150-200 सेमी वर्षा) जूट की खेती के लिए आदर्श है।​
    • राज्य भारत के कुल जूट उत्पादन का 81% योगदान देता है
    • जो मिलों को निरंतर कच्चा माल उपलब्ध कराता है।​
    • ब्रिटिश काल से ही यह क्षेत्र जूट प्रसंस्करण का केंद्र रहा है।​
  • आर्थिक महत्व
    • जूट उद्योग यहाँ 3.5-4 लाख लोगों को रोजगार देता है और राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
    • उत्पाद: बोरे, बैग, रस्सियाँ आदि; भारत विश्व का सबसे बड़ा जूट उत्पादक है।​
    • सरकारी सहायता: भारतीय जूट निगम मूल्य नियंत्रण करता है; सब्सिडी और आधुनिकीकरण योजनाएँ चल रही हैं।