विविध (जीव विज्ञान) भाग-I

Total Questions: 40

21. कुछ पौधों में हरे और कोमल तने होते हैं। वे आमतौर पर छोटे होते हैं और उनकी अधिक शाखाएं नहीं हो सकती हैं। उन्हें क्या कहा जाता है? [CHSL (T-I) 21 मार्च, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) शाक
Solution:
  • शाक (Herbs)
    • इन पौधों में हरे, कोमल और गैर-काष्ठीय तने होते हैं।
    • वे आमतौर पर छोटे होते हैं और उनकी अधिक शाखाएं नहीं हो सकती हैं।
    • इनका उपयोग अक्सर भोजन, स्वाद, दवा या सुगंध के लिए किया जाता है।
  • शाक की विशेषताएँ
    • शाक ऐसे पौधे होते हैं जिनके तने हरे, कोमल और नरम होते हैं
    • जो लकड़ी जैसे कठोर नहीं होते। ये पौधे छोटे कद के होते हैं
    • अक्सर 1 मीटर से कम ऊँचाई वाले, और इनकी शाखाएँ बहुत कम या न के बराबर होती हैं।
    • इनका जीवन चक्र छोटा होता है
    • ये वार्षिक (एक मौसम में पूरा), द्विवार्षिक (दो मौसमों में) या बारहमासी (कई मौसमों तक) हो सकते हैं
    • लेकिन सर्दियों में तना सूख जाता है।​
  • अन्य पौधों से अंतर
    • शाक को झाड़ियों, वृक्षों और लताओं से अलग पहचाना जाता है।
    • झाड़ियाँ मध्यम आकार की होती हैं जिनमें कई शाखाएँ आधार से निकलती हैं
    • तना कठोर होता है, जबकि वृक्षों का एक मोटा लकड़ी का ट्रंक होता है
    • जो वर्षों तक जीवित रहता है। लताएँ कमजोर तनों वाली होती हैं
    • जो सहारे के बिना खड़ी नहीं हो पातीं। शाक इन सबसे भिन्न होते हैं
    • क्योंकि इनका तना हरा रहता है और प्रकाश संश्लेषण करता है।​
  • उदाहरण और उपयोग
    • टमाटर, धनिया, पुदीना, तुलसी और गेहूँ जैसे पौधे शाक के अच्छे उदाहरण हैं।
    • ये पौधे भोजन, औषधि और सजावट के लिए उपयोगी होते हैं
    • जैसे तुलसी का आयुर्वेदिक महत्व या धनिया का रसोई उपयोग।
    • शाक पारिस्थिक तंत्र में मिट्टी को बाँधने और ऑक्सीजन प्रदान करने में सहायक होते हैं।

22. लाल, बैंगनी, नीले या काले रंग के फलों, सब्जियों तथा अनाज में कौन-सा प्राकृतिक जैव सक्रिय और पानी में घुलनशील फिनोलिक यौगिक उपस्थित होता है? [CHSL (T-I) 10 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) एंथोसायनिन
Solution:
  • एंथोसायनिन
    •  ये पानी में घुलनशील वर्णक हैं
    • जो पौधों को लाल, बैंगनी, नीले या काले रंग देते हैं।
    • ये फलों (जैसे ब्लूबेरी, रसभरी, चेरी), सब्जियों (जैसे लाल पत्तागोभी, बैंगन) और कुछ अनाज (जैसे काले चावल) में पाए जाते हैं।
    • एंथोसायनिन शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट होते हैं और उनके कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं।
  • रासायनिक संरचना
    • एंथोसायनिन फ्लेवोनोइड परिवार के अंतर्गत आते हैं
    • जो मुख्य रूप से एंथोसायनिडिन (जैसे सायनिडिन, डेल्फिनिडिन, माल्विडिन) नामक एग्लीकोन के ग्लाइकोसाइड रूप होते हैं।
    • ये पानी में घुलनशील होते हैं क्योंकि इनमें शर्करा अणु जुड़े रहते हैं
    • pH के आधार पर इनका रंग बदलता है—अम्लीय माध्यम में लाल, क्षारीय में नीला या हरा।
    • पौधों की कोशिका रिक्तिकाओं (वैक्यूओल) में स्थित ये यौगिक UV प्रकाश, तापमान और ऑक्सीजन से प्रभावित होते हैं।​
  • स्रोत और उदाहरण
    • ये यौगिक ब्लूबेरी, ब्लैकबेरी, स्ट्रॉबेरी, अंगूर, काले चावल, बैंगन, लाल गोभी, चुकंदर और काले अनाज जैसे खाद्य पदार्थों में प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
    • बेरीज़, किशमिश और उष्णकटिबंधीय फलों में इनकी सांद्रता सबसे अधिक होती है
    • जबकि अनाज जैसे ब्लैक राइस और जड़ वाली सब्जियाँ भी इनके अच्छे स्रोत हैं।
    • लाल से नीले रंग की पत्तेदार सब्जियाँ इनकी उपलब्धता को और बढ़ाती हैं।​
  • जैव सक्रिय गुण
    • एंथोसायनिन शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होते हैं
    • जो फ्री रेडिकल्स को निष्क्रिय कर हृदय रोग, कैंसर और सूजन को रोकते हैं।
    • ये एंटी-एजिंग, जीवाणुरोधी, एंटीवायरल और एंटी-एलर्जिक प्रभाव भी दिखाते हैं
    • रक्त शर्करा नियंत्रण और दृष्टि सुधार में सहायक हैं।
    • पौधों में ये परागणकों को आकर्षित करते हैं और पर्यावरणीय तनाव से सुरक्षा प्रदान करते हैं।​
  • स्वास्थ्य लाभ और उपयोग
    • इनके सेवन से ऑक्सीडेटिव तनाव कम होता है, जो उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करता है।
    • खाद्य उद्योग में प्राकृतिक रंग के रूप में प्रयुक्त, ये कृत्रिम रंगों का सुरक्षित विकल्प हैं।
    • हालांकि, गर्मी और प्रकाश से इनकी मात्रा घट सकती है
    • इसलिए ताजा या हल्के पकाए रूप में सेवन उत्तम रहता है।

23. किस प्रकार की अगुणित एककोशिकीय यूकैरियोटिक कोशिकाओं का व्यास ~10µm है, और उनका लगभग आधा आयतन कप के आकार के क्लोरोप्लास्ट द्वारा घिरा होता है? [CHSL (T-I) 10 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) क्लैमाइडोमोनास
Solution:
  • क्लैमाइडोमोनास (Chlamydomonas) एक हरा शैवाल है
  • जो अगुणित एककोशिकीय यूकैरियोटिक कोशिका होता है। यह मीठे व खारे पानी दोनों में पाया जाता है।
  • इसका व्यास ~ 10µm होता है। इसका लगभग आधा आयतन कप के आकार के क्लोरोप्लास्ट द्वारा घिरा होता है
  • जो प्रकाश संश्लेषण के लिए जिम्मेदार होता है।
  • क्लैमाइडोमोनस की विशेषताएँ
    •  यह पूरी तरह से एककोशिकीय और मोबाइल होती है
    • जिसमें दो समान फ्लैजella (पूंछ जैसे अंग) आगे की ओर निर्देशित होते हैं
    • जो गति प्रदान करते हैं। कोशिका भित्ति सेल्यूलोज और अन्य पॉलीसैकेराइड्स से बनी होती है
    • जबकि साइटोप्लाज्म में एक बड़ा केंद्रक, एक बड़ा केंद्रीय वैक्यूओल, और एक प्रमुख पैराकॉन्ट्रैक्टाइल वैक्यूओल मौजूद होता है
    • जो अतिरिक्त पानी को बाहर निकालता है।​
    • क्लोरोप्लास्ट इसकी सबसे विशिष्ट विशेषता है
    • जो प्याले या कप के आकार का (cup-shaped या cuplike) होता है और कोशिका के आधे से अधिक भाग को भर लेता है।
    • यह क्लोरोप्लास्ट प्रकाश संश्लेषण का केंद्र है, जिसमें थायलाकॉइड्स से बने क्रोमाटोफोर होते हैं
    • जो क्लोरोफिल a, b और अन्य पिगमेंट्स रखते हैं।
    • एक बड़ा पाइरिनॉइड बॉडी (pyrenoid) क्लोरोप्लास्ट के केंद्र में स्टार्च संग्रहण के लिए स्थित होता है।​
  • संरचना का विस्तृत वर्णन
    • आकार और व्यास: व्यास 10 µm के आसपास, जो इसे सूक्ष्मदर्शी में आसानी से दिखने योग्य बनाता है।
    • यह प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं से बड़ा लेकिन बहुकोशिकीय पादप कोशिकाओं से छोटा होता है।​
    • क्लोरोप्लास्ट का आकार: कप के आकार का (cup-shaped), जो कोशिका के anterior (सामने) भाग को ढक लेता है।
    • यह लगभग 50% आयतन घेरता है, जिससे प्रकाश अवशोषण अधिकतम होता है।
    • सामान्य क्लोरोप्लास्ट 5-10 µm के होते हैं, लेकिन यहां यह विशाल और प्रमुख है।​
    • प्रजनन: अगुणित (haploid) जीवन चक्र के कारण मुख्य रूप से अलैंगिक प्रजनन लेकिन तनाव में संयुग्मन भी।
    • zygospore बनता है जो आराम की अवस्था प्रदान करता है।​
    • आवास और पारिस्थितिकी: फ्री-फ्लोटिंग या benthic, प्रकाश की ओर धनात्मक फोटोटैक्सिस दिखाती है।
    • यह मॉडल ऑर्गेनिज्म है जेनेटिक्स और सेल बायोलॉजी अध्ययन के लिए।​
  • क्लोरोप्लास्ट की भूमिका
    • कप के आकार का क्लोरोप्लास्ट प्रकाश संश्लेषण के लिए अनुकूलित है
    • जहां थायलाकॉइड्स लाइट-हैर्वेस्टिंग कॉम्प्लेक्स बनाते हैं।
    • पाइरिनॉइड CO2 फिक्सेशन में मदद करता है, स्टार्च जमा करता है।
    • यह संरचना क्लैमाइडोमोनस को स्वपोषी (autotrophic) बनाती है
    • हालांकि हेटरोट्रॉफिक मोड भी संभव। सामान्य पादप कोशिकाओं में क्लोरोप्लास्ट छोटे (3-10 µm) और बहु होते हैं
    • लेकिन यहां एकल विशाल क्लोरोप्लास्ट प्रमुख है।

24. मेलाटोनिन, डोपामाइन, नॉरएड्रेनालाईन और थायरॉक्सिन सहित हमारे मस्तिष्क के रासायनिक संदेशवाहकों के उत्पादन के लिए कौन-सा अमीनो अम्ल आवश्यक है? [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) फेनिल ऐतानिन
Solution:
  • मेलाटोनिन, डोपामाइन, नॉरएड्रेनालाईन और थायरॉक्सिन सहित हमारे मस्तिष्क के रासायनिक संदेशवाहकों के उत्पादन के लिए फेनिल एलानिन नामक अमीनो अम्ल आवश्यक है।
  • यह मस्तिष्क और शरीर की तंत्रिका कोशिकाओं के बीच संकेतों को स्थानांतरित करने में मदद करता है।
  • यह याद्दाश्त में सुधार करने, भूख के दर्द को कम करने और मेलेनिन के उत्पादन को उत्तेजित करने में भी मदद करता है
  • जो त्वचा को उसका रंग देता है
  • न्यूरोट्रांसमीटर संश्लेषण
    • मेलाटोनिन ट्रिप्टोफैन से सीधे बनता है
    • ट्रिप्टोफैन → सेरोटोनिन → मेलाटोनिन), लेकिन प्रश्न के संदर्भ में ये सभी जैसे पथों से जुड़े हैं।​
    • थायरॉक्सिन (T4) टायरोसिन से थायरॉइड ग्रंथि में आयोडीन के साथ बनता है।​
  • अमीनो अम्ल स्रोत और भूमिका
    • फेनिलअलानीन आवश्यक अमीनो अम्ल है जो शरीर में टायरोसिन में बदल जाता है
    • इसलिए आहार से इसे लेना जरूरी होता है।​
    • टायरोसिन मस्तिष्क के रासायनिक संदेशवाहकों के लिए सीधा पूर्ववर्ती है
    • जो तनाव, मूड और चयापचय को नियंत्रित करता है।​
    • ट्रिप्टोफैन मेलाटोनिन के लिए विशेष है
    • लेकिन प्रश्न सभी को एक साथ कवर करने वाला अमीनो अम्ल पूछता है
    • जो फेनिलअलानीन/टायरोसिन पथ है।​
  • जैव रासायनिक पथ का विवरण
    • डोपामाइन पथ: टायरोसिन → L-DOPA (टायरोसिन हाइड्रॉक्सिलेज एंजाइम से) → डोपामाइन।
    • नॉरएड्रेनालाईन: डोपामाइन → नॉरएड्रेनालाईन (डोपामाइन बीटा-हाइड्रॉक्सिलेज से)।
    • थायरॉक्सिन: टायरोसिन + आयोडीन → T4 (थायरोग्लोबुलिन में)।
    • मेलाटोनिन: ट्रिप्टोफैन → 5-HTP → सेरोटोनिन → मेलाटोनिन (पीनियल ग्रंथि में)।​
    • ये पथ मस्तिष्क और अंतःस्रावी तंत्र में ऊर्जा, नींद और हार्मोन संतुलन बनाए रखते हैं।
  • आहार स्रोत
    • मुख्य स्रोत: मांस, अंडे, डेयरी, सोया, बादाम।
    • कमी से न्यूरोट्रांसमीटर असंतुलन हो सकता है।​

25. मानव फेफड़ों द्वारा छोड़ी गई वायु में कार्बन डाइऑक्साइड का प्रतिशत कितना होता है? [CHSL (T-I) 21 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) 4.4 प्रतिशत
Solution:
  • मानव फेफड़ों द्वारा ली गई वायु में (अंतःश्वासित) कार्बन डाइऑक्साइड का प्रतिशत लगभग 0.04 प्रतिशत है
  • फेफड़ों द्वारा छोड़ी गई वायु में कार्बन डाइऑक्साइड का प्रतिशत लगभग 4.4 प्रतिशत होता है।
  • उच्छ्वसित वायु की संरचना
    • उच्छ्वसित हवा में मुख्य गैसों का अनुपात निम्नलिखित होता है:
    • नाइट्रोजन: लगभग 74-78%
    • ऑक्सीजन: 13-16% (सांस लेने वाली हवा में 21% से कम)
    • कार्बन डाइऑक्साइड: 4-5.3%
    • जल वाष्प: 5-6%
    • आर्गन: लगभग 1%​
    • यह संरचना फेफड़ों में गैस विनिमय के कारण बनती है
    • जहाँ शरीर द्वारा उपयोग की गई ऑक्सीजन कम हो जाती है और चयापचय से उत्पन्न CO₂ बढ़ जाता है।​
  • शारीरिक प्रक्रिया
    • श्वसन के दौरान, कोशिकाएँ ऊर्जा उत्पादन (ATP) के लिए ग्लूकोस को ऑक्सीजन के साथ जलाते हैं
    • जिससे CO₂ उत्पन्न होती है। यह CO₂ रक्त के माध्यम से फेफड़ों तक पहुँचती है।
    • फेफड़ों के एल्वियोली (वायु थैलियाँ) में, CO₂ रक्त से हवा में स्थानांतरित हो जाती है।
    • हर मिनट आराम की स्थिति में लगभग 200-250 मिलीलीटर CO₂ बाहर निकलती है
    • जो कुल उच्छ्वसित हवा का 4-5% बनाती है।
    • व्यायाम के समय यह मात्रा बढ़कर 100 लीटर हवा प्रति मिनट तक हो सकती है।​
  • रक्त में CO₂ का परिवहन
    • रक्त में CO₂ तीन रूपों में संचालित होती है, जो फेफड़ों तक पहुँचने में सहायक है:
    • घुली हुई अवस्था में प्लाज्मा में: 7%
    • बाइकार्बोनेट आयन (HCO₃⁻) के रूप में: 70%
    • हीमोग्लोबिन से बंधी कार्बामिनोहिमोग्लोबिन के रूप में: 23%​
    • फेफड़ों में पहुँचकर यह CO₂ मुक्त होकर हवा में मिल जाती है।

26. WHO के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का BMI 18.5 से कम है तो उसे ....... के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। [CHSL (T-I) 13 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) सामान्य से कम वजन
Solution:
  • BMI (Body Mass Index) किसी व्यक्ति के वजन को किलोग्राम में ऊंचाई के वर्ग मीटर से विभाजित करने पर प्राप्त किया जाता है। WHO के अनुसार, बी.एम.आई. का वर्गीकरण-
  • BMI 18.5 से कम - सामान्य से कम वजन
  • BMI 18.5 से 24.9 - सामान्य (स्वस्थ) वजन
  • BMI 25.0 से 29.9 - अधिक वजन
  • BMI 30 या 30 से अधिक - मोटापा की सीमा
  • अतः WHO के अनुसार, बी.एम.आई. 18.5 से कम, 'सामान्य से कम वजन' के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
  • बीएमआई क्या है?
    • बीएमआई व्यक्ति के वजन (किलोग्राम में) को उसकी ऊंचाई (मीटर में वर्ग) से विभाजित करके निकाला जाता है
    • WHO इसे वयस्कों (18 वर्ष से अधिक) के लिए मानक माप मानता है
    • जो शरीर में वसा की मात्रा का अनुमान लगाता है। यह लिंग, उम्र या नस्ल से स्वतंत्र है
    • लेकिन एशियाई लोगों के लिए थोड़े संशोधित मानदंड हो सकते हैं।​
  • अल्पवजन के स्वास्थ्य जोखिम
    • BMI 18.5 से कम होने पर शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है
    • जिससे प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है। जोखिमों में शामिल हैं:
    • कमजोरी और थकान: मांसपेशियों की हानि, ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियां कमजोर)।
    • प्रजनन समस्याएं: महिलाओं में मासिक धर्म अनियमितता, पुरुषों में हार्मोन असंतुलन।
    • संक्रमण का खतरा: एनीमिया, तपेदिक या HIV जैसी बीमारियां।
    • दीर्घकालिक प्रभाव: हृदय रोग, बांझपन और मृत्यु दर में वृद्धि।​
  • अल्पवजन के कारण
    • आहार संबंधी: अपर्याप्त कैलोरी, वेजिटेरियन डाइट में प्रोटीन कमी।
    • चिकित्सीय: हाइपरथायरॉइडिज्म, कैंसर, डायबिटीज, आंतों की बीमारियां या भूख न लगना (एनोरेक्सिया)।
    • अन्य: अत्यधिक व्यायाम, तनाव, आनुवंशिक कारक या दवाओं के साइड इफेक्ट्स।​
  • जांच और सलाह
    • BMI अकेला पर्याप्त नहीं; कमर की माप, डेक्सा स्कैन या रक्त परीक्षण आवश्यक। डॉक्टर से परामर्श लें:
    • उपचार: पोषक युक्त आहार (दूध, अंडे, नट्स, फल), सप्लीमेंट्स (मल्टीविटामिन)।
    • वजन बढ़ाने का लक्ष्य: प्रति सप्ताह 0.5-1 किग्रा, संतुलित व्यायाम के साथ।
    • रोकथाम: WHO की सलाह से पोषण कार्यक्रम, संतुलित भोजन।
    • भारत में NFHS सर्वेक्षण अल्पवजन की समस्या को रेखांकित करते हैं।​

27. बड़ी मात्रा में, ....... कैंसर कोशिकाओं को मारती है या उनके डीएनए (DNA) को नष्ट करके उनकी वृद्धि को धीमा कर देती है। कैंसर कोशिकाएं जिनका डीएनए इतना क्षतिग्रस्त हो जाता है कि उन्हें ठीक नहीं किया जा सकता, विभाजित होना बंद हो जाती हैं या नष्ट हो जाती हैं। जब क्षतिग्रस्त कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं, तो वे टूट जाती हैं और शरीर द्वारा बाहर निकाल दी जाती हैं। [CHSL (T-I) 09 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) विकिरण चिकित्सा
Solution:
  • विकिरण चिकित्सा (Radiation Therapy) कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए शरीर के एक विशिष्ट क्षेत्र पर लक्षित विकिरण का उपयोग करती है।
  • इस प्रकार कैंसर कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं या टूट जाती हैं तथा शरीर द्वारा बाहर निकाल दी जाती हैं।
  • विकिरण चिकित्सा कैसे काम करती है
    • क्षतिग्रस्त डीएनए को ठीक न कर पाने पर कोशिकाएं विभाजन बंद कर देती हैं
    • अपोप्टोसिस (आत्महत्या जैसी प्रक्रिया) के माध्यम से नष्ट हो जाती हैं।
    • क्षतिग्रस्त कोशिकाएं टूटकर शरीर से बाहर निकाल दी जाती हैं, जिससे ट्यूमर का आकार कम होता है।​
  • डीएनए क्षति की प्रक्रिया
    • कैंसर कोशिकाएं तेजी से विभाजित होती हैं
    • इसलिए वे विकिरण के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं
    • हालांकि स्वस्थ कोशिकाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। विकिरण डीएनए में एकल या द्वि-रज्जु विखंडन पैदा करता है
    • जो डीएनए मरम्मत तंत्र को अभिभूत कर देता है। परिणामस्वरूप, कोशिकाएं या तो स्थायी रूप से रुक जाती हैं
    • (सेनेसेंस) या नष्ट हो जाती हैं, जिससे कैंसर नियंत्रित होता है।​
  • प्रकार और तकनीकें
  • बाह्य विकिरण चिकित्सा: मशीन से शरीर के बाहर से किरणें भेजी जाती हैं
  • जैसे IMRT या स्टीरियोटैक्टिक रेडियोसर्जरी जो सटीक लक्ष्यीकरण करती हैं।​
  • आंतरिक विकिरण चिकित्सा: रेडियोएक्टिव पदार्थ सीधे ट्यूमर के पास रखे जाते हैं, जैसे ब्रैकीथेरेपी।​
  • सिस्टेमिक विकिरण: रेडियोएक्टिव दवाएं निगलकर या इंजेक्शन से ली जाती हैं।​
  • ये तकनीकें ट्यूमर को सटीक निशाना बनाती हैं ताकि स्वस्थ ऊतकों को कम नुकसान हो।​
  • लाभ और सीमाएं
  • विकिरण चिकित्सा सर्जरी के साथ या अकेले 50% से अधिक कैंसर मामलों में उपयोगी है
  • विशेष रूप से मस्तिष्क, गर्भाशय ग्रीवा या प्रोस्टेट कैंसर में। हालांकि, अधिक विकिरण स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है
  • जिससे थकान, त्वचा जलन या दीर्घकालिक जोखिम जैसे कैंसर का खतरा बढ़ता है।
  • आधुनिक तकनीकें जैसे नैनोकण विकिरण के प्रभाव को बढ़ा सकते हैं।​

28. ....... रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें एक प्राणी की कोशिकाओं की जीवित अवस्था को नियंत्रित करने में विभिन्न प्रकार की रासायनिक अभिक्रियाएं शामिल होती हैं। [CHSL (T-I) 17 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) उपापचय
Solution:
  • उपापचय (Metabolism) रासायनिक प्रक्रिया है
  • जिसमें एक प्राणी की कोशिकाओं की जीवित अवस्था को नियंत्रित करने में विभिन्न प्रकार की रासायनिक अभिक्रियाएं शामिल होती हैं।
  • उपापचय प्रक्रिया दो प्रकार की होती है
  • अपचयन/अपचय तथा उपचयन/उपचय (Anabolism) शरीर में उपचय में वृद्धि एवं मरम्मत के लिए
  • भोजन से प्राप्त पोषक पदार्थों से जीव पदार्थ के जटिल घटकों का संश्लेषण होता है
  • अपचय में विविध जैव-क्रियाओं के लिए आवश्यक ऊर्जा के उत्पादन हेतु पोषक पदार्थों का दहन या जारण  होता है।
  • उपापचय की परिभाषा
    • जो जीवन-निर्वहन संबंधी परिवर्तनों को संदर्भित करता है।
    • इसमें पोषक तत्वों का टूटना, नई संरचनाओं का निर्माण और ऊर्जा का रूपांतरण शामिल होता है।
    • यह प्रक्रिया एंजाइमों द्वारा नियंत्रित होती है जो अभिक्रियाओं को तेज करती हैं।​
  • उपापचय के प्रकार
    • उपापचय को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया जाता है:
    • अपचय : जटिल यौगिकों का सरल पदार्थों में टूटना, जैसे ग्लूकोज का ऑक्सीजन के साथ विघटन ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए।​
    • उपचय: सरल पदार्थों से जटिल अणुओं का निर्माण
    • जैसे प्रोटीन संश्लेषण, जिसमें ऊर्जा का उपयोग होता है।​
    • ये दोनों एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं और कोशिकीय श्वसन, प्रकाश संश्लेषण जैसी प्रक्रियाओं में कार्य करते हैं।
  • उपापचय का महत्व
    • उपापचय जीव की जीवित अवस्था को नियंत्रित करता है
    • जैसे भोजन की मात्रा, आकार और आकृति को प्रभावित करता है।
    • यह ऊर्जा के एक रूप से दूसरे रूप में स्थानांतरण सुनिश्चित करता है।
    • असंतुलन से रोग जैसे मधुमेह या मोटापा हो सकता है।​​
  • उपापचय प्रक्रिया के चरण
    • रासायनों का अवशोषण: भोजन से प्राप्त पदार्थ कोशिकाओं में प्रवेश करते हैं।
    • चरणबद्ध अभिक्रियाएं: एंजाइम श्रृंखला द्वारा रसायन दूसरे में बदलते हैं।​
    • ऊर्जा उत्पादन: ATP के रूप में ऊर्जा मुक्त होती है या उपयोग की जाती है।

29. ....... जातियां वे प्रजातियां हैं जो अब उन जगहों में भी नहीं देखने को मिलती जहां वे पहले पाई जाती थीं। [CHSL (T-I) 20 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) लुप्त
Solution:
  • लुप्त (Extinct) प्रजातियां
    • ये वे प्रजातियां हैं जिनकी पृथ्वी पर कोई भी जीवित सदस्य नहीं बचा है।
    • वे अब कहीं भी नहीं पाई जाती हैं
    • यहां तक कि उन स्थानों पर भी नहीं जहां वे ऐतिहासिक रूप से मौजूद थीं।
  • विलुप्त प्रजातियाँ (Extinct Species)
    • जातियाँ या प्रजातियाँ वे हैं जो अब पृथ्वीa पर कहीं भी अस्तित्व में नहीं पाई जातीं
    • भले ही वे पहले उन जगहों पर प्रचुर मात्रा में मौजूद होती थीं।
    • इन्हें विलुप्त प्रजातियाँ कहा जाता है, जहाँ उस प्रजाति का कोई भी जीवित सदस्य शेष नहीं रहता।
    • यह जैव विविधता के संदर्भ में एक गंभीर स्थिति दर्शाता है
    • क्योंकि ये प्रजातियाँ पूरी तरह से समाप्त हो चुकी होती हैं।​
  • विलुप्ति के कारण
    • विलुप्ति मुख्य रूप से आवास हानि से होती है, जैसे जंगलों की कटाई या शहरीकरण।
    • अन्य प्रमुख कारणों में प्रदूषण, विदेशी प्रजातियों का आक्रमण
    • अत्यधिक शिकार या व्यावसायिक दोहन, तथा जलवायु परिवर्तन शामिल हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, डायनासोर लाखों वर्ष पूर्व विलुप्त हुए
    • जबकि हाल के उदाहरणों में पैसेंजर कबूतर या थाइलैंड का जिब्बॉन शामिल हैं।​​
  • उदाहरण और ऐतिहासिक संदर्भ

    • प्रागैतिहासिक काल में शेरों की कई शक्तिशाली प्रजातियाँ जैसे मुजबाक लायन (लगभग 30,000 वर्ष पूर्व विलुप्त) यूरोप और एशिया में पाई जाती थीं।
    • मनुष्य की 9 प्रजातियों में से 8, जैसे निएंडरथल और डेनिसोवन्स, तीन लाख वर्ष पूर्व से विलुप्त हो चुकी हैं
    • केवल होमो सेपियन्स बची है। आधुनिक समय में IUCN के अनुसार 96,500 प्रजातियों में से 26,500 विलुप्ति के कगार पर हैं
    • जिसमें 40% स्तनधारी प्रभावित हैं।​​
  • संरक्षण की आवश्यकता
    • विलुप्त प्रजातियों की रोकथाम हेतु प्रोजेक्ट टाइगर जैसे प्रयास आवश्यक हैं
    • जो आवास संरक्षण पर केंद्रित हैं।
    • IUCN रेड लिस्ट जैसी वैश्विक निगरानी से भविष्य की विलुप्ति रोकी जा सकती है।
    • ये प्रजातियाँ पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए महत्वपूर्ण होती हैं
    • अतः मानवीय हस्तक्षेप से इन्हें बचाना जरूरी है।

30. इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सी एक दुर्लभ प्रजाति है? [CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) एशियाई भैंस
Solution:
  • दुर्लभ प्रजातियां जीवों का एक समूह हैं, जो बहुत ही कम आबादी, दुर्लभ या कभी-कभार पाए जाते हैं।
  • इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) के अनुसार, एशियाई भैंस दुर्लभ प्रजाति है।
  • आई.यू.सी.एन. प्राकृतिक दुनिया की स्थिति और इसे सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक उपायों पर वैश्विक प्राधिकरण है।
  • IUCN रेड लिस्ट श्रेणियां
    • IUCN की रेड लिस्ट प्रजातियों के संरक्षण की स्थिति का वैश्विक मूल्यांकन करती है। मुख्य श्रेणियां इस प्रकार हैं:
    • Extinct (EX): पूर्ण रूप से विलुप्त।
    • Critically Endangered (CR): अत्यधिक खतरे में।
    • Endangered (EN): संकटग्रस्त।
    • Vulnerable (VU): कमजोर (जिसमें दुर्लभ प्रजातियां आ सकती हैं)।
    • Near Threatened (NT): निकट संकटग्रस्त।
    • Least Concern (LC): चिंता की कोई बात नहीं।​
    • दुर्लभ प्रजातियां अक्सर Vulnerable श्रेणी में आती हैं
    • जैसे हिमालयी भूरा भालू, जंगली एशियाई भैंसा, रेगिस्तानी लोमड़ी और हॉर्नबिल।​
  • सामान्य उदाहरण
    • भारतीय संदर्भ में निम्नलिखित प्रजातियां IUCN के अनुसार दुर्लभ मानी जाती हैं:
    • हिमालयी भूरा भालू: हिमालय क्षेत्र में सीमित आबादी, आवास हानि से खतरा।​
    • जंगली एशियाई भैंसा: घासभूमियों में दुर्लभ, मानव गतिविधियों से प्रभावित।​
    • रेगिस्तानी लोमड़ी: थार जैसे शुष्क क्षेत्रों में पाई जाती है, शिकार का शिकार।​
    • हॉर्नबिल: जंगलों में फलाहारी पक्षी, वनों की कटाई से दुर्लभ।​
    • ये प्रजातियां कम आबादी के कारण नकारात्मक कारकों से जल्दी प्रभावित हो सकती हैं।​
  • प्रश्न के विकल्पों का विश्लेषण
    • यदि प्रश्न में विकल्प दिए गए हैं
    • जैसे गंगा नदी डॉल्फिन, नीली भेड़, ए
    • शियाई भैंस, लायन टेल्ड मकाक), तो शेर के मुंह जैसा बंदर (लायन टेल्ड मकाक) को IUCN के अनुसार दुर्लभ प्रजाति माना जाता है।
    • अन्य विकल्प जैसे गंगा डॉल्फिन Critically Endangered है।​
  • संरक्षण महत्व
    • IUCN रेड लिस्ट 2025 तक 1,72,620 प्रजातियों का मूल्यांकन कर चुकी है
    • जिनमें 48,646 खतरे में हैं। दुर्लभ प्रजातियों का संरक्षण जैव विविधता बनाए रखने के लिए आवश्यक है
    • क्योंकि ये पारिस्थितिकी तंत्र के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।​