विविध (जीव विज्ञान) भाग-II

Total Questions: 39

1. तरल अपशिष्ट जल के ऊपर तैरने वाले वसा, ग्रीस और तेल जैसे ठोस पदार्थ ....... कहलाते हैं। [CGL (T-I) 21 अप्रैल, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) स्लज
Solution:
  • स्लज (Sludge)
    • अपशिष्ट जल उपचार प्रक्रिया के दौरान, जो अर्ध-ठोस घोल (slurry) बचता है
    • उसे स्लज कहते हैं। इसमें वसा, तेल, ग्रीस (FOG), कार्बनिक पदार्थ और अन्य निलंबित कण शामिल होते हैं
    • जो तरल से अलग हो जाते हैं। जब अपशिष्ट जल को स्थिर रखा जाता है
    • तो हल्के पदार्थ जैसे वसा, तेल, ग्रीस ऊपर तैरकर एक परत बनाते हैं
    • जिसे अक्सर "स्कम" (scum) कहा जाता है, जबकि भारी ठोस पदार्थ नीचे बैठ जाते हैं। ये दोनों स्लज का ही हिस्सा हैं।
  • आपंक क्या है?
    • आपंक (scum) वे हल्के तैरते हुए पदार्थ होते हैं जो अपशिष्ट जल (सीवेज) की सतह पर जमा हो जाते हैं
    • मुख्य रूप से वसा, तेल और ग्रीस (FOG - Fats, Oils, Grease) से बने होते हैं।
    • ये पदार्थ पानी से कम घनत्व वाले होने के कारण ऊपर तैरते हैं और जल प्रवाह को बाधित कर सकते हैं।​
  • अपशिष्ट जल उपचार में भूमिका
    • अपशिष्ट जल शोधन संयंत्रों में प्राथमिक उपचार के दौरान स्किमिंग टैंक या आपंक हटाने वाले चैंबर का उपयोग किया जाता है
    • जहां ये पदार्थ सतह पर इकट्ठे होकर हटाए जाते हैं।
    • यह प्रक्रिया जल को आगे के उपचार के लिए तैयार करती है
    • अन्यथा ये पदार्थ पाइपलाइनों में जमाव पैदा कर रुकावट उत्पन्न करते हैं।​
  • अन्य विकल्पों से अंतर
    • खाद: विघटित कार्बनिक पदार्थों से बनी मिट्टी सुधारक सामग्री।​
    • पीट: आंशिक विघटित पौधों वाली मिट्टी की सतही परत।​
    • यूरिया: नाइट्रोजनयुक्त उर्वरक।​
    • ये सभी आपंक से भिन्न हैं, जो विशेष रूप से तैरते अपघटनों को संदर्भित करता है।​
  • महत्वपूर्ण तथ्य
    • अपशिष्ट जल मुख्यतः घरेलू मल और औद्योगिक बहिष्कार से आता है
    • जिसे 15-20 वर्षों के लिए डिज़ाइन उपचार इकाइयों द्वारा साफ किया जाता है।
    • आपंक हटाना न केवल जल गुणवत्ता सुधारता है बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायक है।​

2. ....... फूल का मादा जनन अंग है। [MTS (T-I) 16 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) स्त्रीकेसर
Solution:
  • स्त्रीकेसर (Pistil/Carpel): यह फूल का मादा प्रजनन अंग है। इसमें आमतौर पर तीन मुख्य भाग होते हैं:
  • वर्तिकाग्र (Stigma): चिपचिपा सिरा जो पराग को प्राप्त करता है।
  • वर्तिका (Style): वर्तिकाग्र को अंडाशय से जोड़ने वाला डंठल।
  • अंडाशय (Ovary): सूजा हुआ आधार जिसमें बीजांड (जो निषेचन के बाद बीज में विकसित होते हैं) होते हैं।
  • जायांग की संरचना
    • जायांग तीन मुख्य भागों से मिलकर बनता है: अंडाशय, वर्तिका और वर्तिकाग्र।
    • अंडाशय फूलगंड (पुष्पासन) से जुड़ा निचला फूला हुआ भाग होता है
    • जिसमें एक या अधिक बीजांड विकसित होते हैं। वर्तिका अंडाशय और वर्तिकाग्र को जोड़ने वाली नलिका जैसी संरचना है
    • जबकि वर्तिकाग्र इसका ऊपरी चिपचिपा और रोमयुक्त भाग है जो परागकणों को ग्रहण करता है।​
  • कार्य और महत्व
    • वर्तिकाग्र परागण के दौरान परागकणों को पकड़ता है
    • जो वर्तिका के माध्यम से अंडाशय तक पहुँचते हैं। अंडाशय में स्थित बीजांडों में मादा युग्मकोशिका (अंडाणु) होती है
    • जो निषेचन के बाद बीज में बदल जाती है और अंडाशय फल बन जाता है।
    • यह संरचना फूलों में द्विलिंगी या एकलिंगी प्रजनन को संभव बनाती है।​
  • विकास प्रक्रिया
    • जायांग का विकास मादा युग्मकोद्भिद (एम्ब्रायो सैक) के रूप में होता है
    • जिसमें मेगास्पोरोजेनेसिस और मेगागैमेटोजेनेसिस शामिल हैं।
    • एक मेगास्पोर माता से विकसित होकर 7-कोशिका और 8-नाभिकीय एम्ब्रायो सैक बनाता है
    • जो निषेचन के लिए तैयार रहता है।​

3. निम्नलिखित में से कौन-सा विष पैदा करने वाला वो जीवाणु है जो मलाई, पनीर और दूध को खराब कर उनका स्वाद कड़वा या खट्टा कर देता है? [CHSL (T-I) 07 जून, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) बैसिलस सेरिअस (Bacillus cereus)
Solution:
  • बैसिलस सेरिअस
    •  यह एक प्रसिद्ध खाद्य-जनित रोगजनक है
    • जो डेयरी उत्पादों (दूध, क्रीम, पनीर), चावल और अन्य खाद्य पदार्थों को दूषित कर सकता है।
    • यह विषाक्त पदार्थ (उल्टी पैदा करने वाले एमीटिक टॉक्सिन और दस्त पैदा करने वाले डायरिया टॉक्सिन) पैदा करता है
    • जो खाद्य विषाक्तता का कारण बन सकते हैं। डेयरी उत्पादों में इसकी वृद्धि से खराबी हो सकती है
    • जिसमें कड़वाहट, खट्टापन और जमना शामिल है, जिससे वे उपभोग के लिए अनुपयुक्त हो जाते हैं।
  • जीवाणु की पहचान
    • यह जीवाणु दूध उत्पादों में विषाक्त पदार्थ उत्पन्न करता है, जिससे स्वाद बिगड़ जाता है।
    • बैसिलस सेरियस ग्राम-पॉजिटिव, रॉड के आकार का, बीजाणु-निर्माण करने वाला और मोटाइल होता है
    • जो मिट्टी, भोजन और समुद्री स्पंज में सामान्य रूप से पाया जाता है।
    • इसका नाम "सेरियस" लैटिन शब्द से आया है, जो रक्त agar पर मोमी उपनिवेशों को दर्शाता है।​
  • खराब होने की प्रक्रिया
    • बैसिलस सेरियस दूध और डेयरी उत्पादों में बढ़ता है तथा दो प्रकार के विष पैदा करता है
    • इमेटिक (उल्टी पैदा करने वाला) और डायरियल (दस्त पैदा करने वाला), जो स्वाद को कड़वा या खट्टा कर देते हैं।
    • यह क्रीम, पनीर और दूध में विशेष रूप से सक्रिय रहता है, जहां यह प्रोटीन और वसा को तोड़ता है।
    • अन्य जीवाणु जैसे लैक्टोबैसिलस दूध को दही बनाते हैं
    • (खट्टा स्वाद लेकिन उपयोगी किण्वन), जबकि यह हानिकारक क्षरण करता है।​
  • विशेषताएं और प्रभाव
    • यह ऐच्छिक रूप से ऐनरोबिक और बीटा-हेमोलिटिक होता है
    • जो खाद्य जनित रोगों का कारण बनता है। दूध उत्पादों में इसके बीजाणु लंबे समय तक जीवित रहते हैं
    • जिससे स्टोरेज के दौरान खराबी तेजी से फैलती है। माइक्रोकोकस जैसे अन्य जीवाणु भी विषाक्तता पैदा कर सकते हैं
    • लेकिन बैसिलस सेरियस डेयरी के लिए मुख्य दोषी है।

4. जीवन की वह अवधि, जब शरीर प्रजनन परिपक्यता की ओर ले जाने वाले परिवर्तनों से गुजरता है, कहलाती है- [MTS (T-I) 04 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) किशोरावस्था
Solution:
  • किशोरावस्था (Adolescence)
    • यह शारीरिक और मनोवैज्ञानिक विकास का एक संक्रमणकालीन चरण है
    • जो आमतौर पर यौवन से कानूनी वयस्कता तक की अवधि के दौरान होता है।
    • यह महत्वपूर्ण हार्मोनल परिवर्तनों की विशेषता है
    • जो द्वितीयक यौन विशेषताओं के विकास और प्रजनन परिपक्वता की प्राप्ति की ओर ले जाते हैं।
    • इसमें विकास में तेजी, शारीरिक संरचना में परिवर्तन और प्रजनन प्रणाली का परिपक्व होना शामिल है
  • किशोरावस्था की परिभाषा
    • यह लगभग 11 वर्ष की उम्र से शुरू होकर 18-19 वर्ष तक चलती है
    • हालांकि हर व्यक्ति में इसकी अवधि भिन्न हो सकती है।
    • इस दौरान शरीर यौवन (puberty) के माध्यम से प्रजनन परिपक्वता प्राप्त करता है
    • जिससे व्यक्ति संतानोत्पत्ति योग्य बन जाता है।​
  • शारीरिक परिवर्तन
    • किशोरावस्था में हार्मोनल बदलावों के कारण कई शारीरिक परिवर्तन होते हैं।
    • लड़कों में वाणी मोटी होना, चेहरे और शरीर पर बाल आना, कंधों का चौड़ा होना, तथा लिंग और वृषण का विकास प्रमुख हैं।
    • लड़कियों में स्तनों का विकास, कूल्हों का चौड़ा होना, जननांगों में परिवर्तन और ऋतुस्राव (मासिक धर्म) की शुरुआत होती है।
    • दोनों लिंगों में लंबाई में तेज वृद्धि, जांघों और बगल में बाल आना तथा त्वचा पर मुंहासे जैसी समस्याएं आम हैं।
    • ये परिवर्तन प्रजनन परिपक्वता की ओर इशारा करते हैं।​
  • मानसिक और भावनात्मक प्रभाव
    • इस अवस्था में भावनात्मक उतार-चढ़ाव आम होते हैं, जैसे अचानक गुस्सा, उदासी या उत्साह।
    • किशोर स्वयं को नई पहचान खोजने की कोशिश करते हैं
    • जिससे माता-पिता या साथियों से टकराव हो सकता है।
    • मानसिक परिपक्वता धीरे-धीरे आती है, और निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है।
    • पोषण, व्यायाम और नींद की पर्याप्तता इन बदलावों को संतुलित रखने में सहायक होती है।

5. मानव शरीर का सामान्य तापमान ....... होता है। [MTS (T-I) 02 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) 37° C
Solution:
  • मानव शरीर का औसत सामान्य तापमान आमतौर पर 37 डिग्री सेल्सियस (°C) के रूप में स्वीकार किया जाता है
  • जो 98.6 डिग्री फ़ारेनहाइट (°F) के बराबर है।
  • सामान्य तापमान सीमा
    • सामान्य तापमान वयस्कों में 36.1°C से 37.2°C (97°F से 99°F) तक माना जाता है
    • बच्चों में यह 36.6°C से 38°C तक हो सकता है
    • यह सीमा मौसम, समय, शारीरिक गतिविधि और मापने के स्थान पर निर्भर करती है ।​
  • मापने के स्थान अनुसार अंतर
    • मुख (ओरल) तापमान 36.6°C से 38°C रहता है, जबकि गुदा (रिक्टल) तापमान लगभग 0.5°C अधिक होता है
    • बगल (एक्सिलरी) माप 36.1°C से 37.2°C तक होता है, जो सबसे कम सटीक माना जाता है
    • कान या माथे से डिजिटल थर्मामीटर द्वारा मापा तापमान भी विश्वसनीय होता है ।​
  • तापमान नियंत्रण प्रक्रिया
    • शरीर हाइपोथैलेमस नामक मस्तिष्क भाग द्वारा तापमान को नियंत्रित रखता है
    • जो होमियोस्टेसिस बनाए रखता है । पसीना आने पर तापमान कम होता है
    • जबकि ठंड में कंपन से गर्मी पैदा होती है । यह संतुलन चयापचय, पर्यावरण और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है ।​
  • बुखार और असामान्यताएँ
    • 100.4°F (38°C) या इससे अधिक तापमान को बुखार माना जाता है
    • जो संक्रमण का संकेत हो सकता है । हाइपोथर्मिया 35°C से नीचे और हाइपरथर्मिया 40°C से ऊपर खतरनाक है
    • उम्र बढ़ने पर सामान्य तापमान थोड़ा कम हो जाता है ।​

6. घोंघे पशु जगत के किस संघ की उदाहरण है? [MTS (T-I) 20 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) मोलस्क
Solution:
  • मोलस्क (Mollusca)
    • यह अकशेरुकी जानवरों का एक बड़ा संघ है।
    • इसमें घोंघे, स्लग, सीप, क्लैम, ऑक्टोपस और स्क्विड शामिल हैं।
    • इनकी विशेषता एक नरम शरीर, आमतौर पर एक कैल्शियमयुक्त खोल द्वारा संरक्षित (हालांकि कुछ
    • जैसे स्लग और ऑक्टोपस में कम या आंतरिक खोल होते हैं
    • गति के लिए एक पेशी पैर और एक मेंटल होता है। घोंघे मोलस्क के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
    • घोंघे पशु जगत के मोलस्का (Mollusca) संघ के प्रमुख उदाहरण हैं।
    • यह संघ अकशेरुकी जीवों का दूसरा सबसे बड़ा समूह है
    • जिसमें घोंघे गैस्ट्रोपोडा (Gastropoda) वर्ग के अंतर्गत आते हैं।​
  • मोलस्का संघ की विशेषताएँ
    • मोलस्का संघ के जीवों का शरीर नरम होता है, जो प्रायः एक कठोर खोल से ढका रहता है।
    • इनमें एक मांसल पैर, रेडुला नामक दांतों वाली जीभ जैसी संरचना और विशिष्ट पाचन तंत्र मौजूद होता है।
    • यह संघ आर्थ्रोपोडा के बाद सबसे बड़ा है और इसमें लगभग 23% समुद्री प्रजातियाँ शामिल हैं।​
  • घोंघे का वर्गीकरण
    • घोंघे गैस्ट्रोपोडा वर्ग के अंतर्गत आते हैं, जिसमें 65,000 से 80,000 ज्ञात प्रजातियाँ हैं।
    • ये कीड़ों के बाद सबसे विविध समूह हैं और भूमि, समुद्र तथा मीठे जल में पाए जाते हैं।
    • स्लग भी इसी वर्ग के हैं, लेकिन इनमें खोल अनुपस्थित या कम विकसित होता है।​

7. रोग उत्पन्न करने वाले सूक्ष्म जीवों को ....... कहा जाता है। [MTS (T-I) 16 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) रोग जनक
Solution:
  • रोग जनक
    •  यह शब्द विशेष रूप से किसी भी सूक्ष्मजीव (जैसे बैक्टीरिया, वायरस, कवक, या परजीवी) या अन्य एजेंट को संदर्भित करता है
    • जो एक मेजबान जीव में बीमारी का कारण बन सकता है।
  • रोगजनक क्या हैं?
    • रोगजनक जैविक इकाइयाँ हैं जो मेजबान के सामान्य शारीरिक कार्यों में हस्तक्षेप करके रोग उत्पन्न करती हैं।
    • बैक्टीरिया, वायरस, कवक, प्रोटोजोआ और परजीवी इनके प्रमुख उदाहरण हैं।
    • ये संक्रामक एजेंट के रूप में कार्य करते हुए संक्रमण फैलाते हैं, जैसे हवा, पानी, भोजन या संपर्क से।​
  • रोगजनकों के प्रकार
    • बैक्टीरिया: एककोशिकीय जीव जो टाइफाइड, तपेदिक या गले के संक्रमण जैसी बीमारियाँ पैदा करते हैं।
    • इन्हें एंटीबायोटिक्स से नियंत्रित किया जा सकता है।​
    • वायरस: गैर-जीवित कण जो कोविड-19, इन्फ्लूएंजा, चेचक या एचआईवी जैसे रोग उत्पन्न करते हैं।
    • ये कोशिकाओं के अंदर ही गुणन करते हैं।​​
    • कवक (फंगस): लगभग 300 प्रजातियाँ मनुष्यों को प्रभावित करती हैं, जैसे फेफड़ों के संक्रमण।
    • इनके बीजाणु हवा में फैलते हैं।​
    • प्रोटोजोआ और अन्य परजीवी: मलेरिया या अमीबा डिसेंट्री जैसी बीमारियाँ इन्हीं से होती हैं।
    • ये मुख्यतः दूषित पानी या कीटों से फैलते हैं।​​
  • रोग उत्पत्ति की प्रक्रिया
    • रोगजनक मेजबान के शरीर में प्रवेश कर ऊतकों को नुकसान पहुँचाते हैं
    • विषाक्त पदार्थ छोड़ते हैं। प्रतिरक्षा तंत्र एंटीबॉडी बनाकर इनका मुकाबला करता है
    • लेकिन कमजोर प्रतिरक्षा में रोग गंभीर हो जाता है।
    • उदाहरणस्वरूप, बैक्टीरिया टॉक्सिन्स उत्पन्न कर कोशिकाओं को मार डालते हैं।​
  • बचाव और उपचार
    • टीकाकरण, स्वच्छता, स्वच्छ जल और उचित भोजन से इनसे बचा जा सकता है।
    • एंटीबायोटिक्स बैक्टीरिया पर, एंटीवायरल वायरस पर प्रभावी हैं।
    • हालांकि, अत्यधिक एंटीबायोटिक्स से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ रही है।​

8. निम्नलिखित में से किस रोग को टीकाकरण द्वारा रोका नहीं जा सकता है? [CGL (T-I) 12 अप्रैल, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) बेरी-बेरी
Solution:
  • बेरी-बेरी
    • यह थियामिन (विटामिन बी1) की कमी से होने वाला रोग है।
    • यह हृदय प्रणाली और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है।
    • चूंकि यह एक पोषण संबंधी कमी से होने वाला रोग है
    • इसलिए इसे टीकाकरण द्वारा नहीं रोका जा सकता है।
    • टीकाकरण निष्क्रिय या निष्क्रिय रोगजनकों के कमजोर रूपों को शरीर में प्रविष्ट करके प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्तेजित करता है
    • भविष्य में उस रोग के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सके।
  • कारण और प्रकार
    • बेरी बेरी मुख्य रूप से थायमिन की कमी के कारण होता है
    • जो चावल-आधारित आहार या शराब की अधिकता से प्रभावित लोगों में आम है।
    • इसके दो मुख्य प्रकार हैं: 'गीला' बेरी बेरी जो हृदय और परिसंचरण तंत्र को प्रभावित करता है
    • 'सूखा' बेरी बेरी जो तंत्रिका तंत्र पर असर डालता है।
    • यह संक्रामक नहीं है, इसलिए टीका अप्रभावी है।​
  • उपचार विधि
    • इसे थायमिन की गोली, इंजेक्शन या अंतःशिरा द्वारा आसानी से ठीक किया जाता है
    • जो कमी को पूरा करता है। गंभीर मामलों में तत्काल उपचार आवश्यक होता है।​
  • अन्य उदाहरण
    • कैंसर जैसे रोग भी सामान्यतः टीकाकरण से नहीं रोके जाते
    • हालांकि HPV या हेपेटाइटिस B टीके कुछ प्रकारों को रोक सकते हैं।
    • ये UIP (सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम) का हिस्सा नहीं हैं।​

9. लेड क्रोमेट जो विषैला और कैंसरकारी (कार्सिनोजेनिक) होता है, ....... पाउडर की मिलावट के लिए प्रयोग किया जाता है। [C.P.O.S.I. (T-I) 10 नवंबर, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) हल्दी
Solution:
  • लेड क्रोमेट
    •  यह एक पीला वर्णक है जो कभी-कभी अवैध रूप से खाद्य पदार्थों, विशेष रूप से हल्दी पाउडर में मिलावट के रूप में उपयोग किया जाता है
    • ताकि इसके रंग को बढ़ाया जा सके और इसे अधिक आकर्षक बनाया जा सके।
    • लेड (सीसा) एक भारी धातु है और क्रोमेट एक कार्सिनोजेनिक (कैंसरकारी) यौगिक है।
    • दोनों ही मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक हानिकारक हैं
    • जिससे विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं
    • जिनमें न्यूरोलॉजिकल क्षति, किडनी की समस्याएं और कैंसर शामिल हैं।
  • मिलावट का कारण
    • निर्माता हल्दी पाउडर में लेड क्रोमेट मिलाते हैं
    • यह बाजार में अधिक आकर्षक लगे और ग्राहक इसे ताजा व शुद्ध समझें
    • प्राकृतिक हल्दी का रंग हल्का होता है, जबकि यह मिलावट चटकदार पीला रंग देती है
    • जिससे बिक्री बढ़ती है। भारत जैसे देशों में, विशेषकर बिहार और बांग्लादेश के जिलों में, यह आम समस्या है
    • जहां खड़ी और पिसी हल्दी दोनों प्रभावित होती हैं।​
  • स्वास्थ्य जोखिम
    • लेड क्रोमेट अत्यधिक विषैला है और क्रोमियम-6 के कारण कैंसरकारी (कार्सिनोजेनिक) माना जाता है।
    • इसके सेवन से पेट दर्द, उल्टी, सिरदर्द, चक्कर, याददाश्त कमजोरी, लिवर-किडनी क्षति, एनीमिया, लकवा, प्रजनन समस्याएं और बच्चों में मानसिक विकास रुकना जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
    • लंबे समय तक उपयोग से फेफड़े, पेट, मूत्राशय का कैंसर, गर्भस्थ शिशु में विकृति और न्यूरोलॉजिकल नुकसान होता है।
    • फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने इसे खाद्य पदार्थों में गैरकानूनी घोषित किया है।​
  • पहचान के तरीके
    • घर पर परीक्षण के लिए हल्दी पाउडर को पानी में घोलें; अगर गाढ़ा पीला अवक्षेप गिरता है
    • तो लेड क्रोमेट की संभावना है।
    • वैज्ञानिक रूप से एक्स-रे पाउडर विवर्तन या रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी से पता लगाया जा सकता है।
    • शुद्ध हल्दी चुनें जो ऑर्गेनिक प्रमाणित हो और चमकदार न लगे।​
  • रोकथाम और सलाह
    • FSSAI नियमों के तहत मिलावट पर सख्ती है, लेकिन बाजार जांच जरूरी।
    • उपभोक्ता प्रमाणित ब्रांड चुनें, घरेलू परीक्षण करें और संदिग्ध हल्दी की शिकायत दर्ज कराएं।
    • वैश्विक अध्ययनों में हल्दी के 30% नमूनों में यह मिलावट पाई गई है।
    • शुद्ध हल्दी के फायदे जैसे एंटीऑक्सीडेंट गुण बनाए रखने के लिए सावधानी बरतें।​

10. आलू में स्टार्च ....... के साथ अभिक्रिया करने के बाद नीले रंग में परिवर्तित हो जाता है। [MTS (T-I) 12 जुलाई, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) आयोडीन
Solution:
  • आयोडीन (Iodine)
    • स्टार्च की उपस्थिति का पता लगाने के लिए आयोडीन परीक्षण एक क्लासिक रासायनिक परीक्षण है।
    • जब आलू (या किसी अन्य स्टार्च युक्त पदार्थ) पर आयोडीन घोल की कुछ बूंदें डाली जाती हैं
    • तो स्टार्च और आयोडीन के बीच एक रासायनिक प्रतिक्रिया होती है
    • जिसके परिणामस्वरूप एक गहरा नीला-काला रंग बनता है।
    • यह रंग आयोडीन के अणुओं के स्टार्च के हेक्सिल सर्पिल के अंदर फंसने के कारण होता है।
  • अभिक्रिया का आधार
    • आलू में स्टार्च मुख्य रूप से एमाइलोज और एमाइलोपेक्टिन नामक दो पॉलीसैकेराइड्स से बना होता है
    • जिनमें ग्लूकोज इकाइयाँ α-1,4 ग्लाइकोसिडिक बंधनों से जुड़ी होती हैं।
    • आयोडीन (I₂) जब स्टार्च के एमाइलोज भाग के हेलिकल संरचना में प्रवेश करता है
    • तो यह उसके अंदर फंस जाता है और एक स्टार्च-आयोडीन कॉम्प्लेक्स बनाता है।
    • यह कॉम्प्लेक्स प्रकाश की तरंगदैर्ध्य को अवशोषित करके नीला-काला रंग उत्पन्न करता है
    • जो चार्ज ट्रांसफर कॉम्प्लेक्स के कारण होता है।​​
  • प्रयोग प्रक्रिया
    • इस परीक्षण को करने के लिए एक छिला हुआ आलू का टुकड़ा लें
    • उस पर आयोडीन घोल (कीटाणुनाशक टिंचर या लुगोल का आयोडीन) की 2-3 बूंदें डालें।
    • कुछ ही सेकंड में आलू का हिस्सा नीला-काला हो जाएगा। यदि स्टार्च की मात्रा अधिक हो, तो रंग गहरा नीला होता है
    • जबकि कम स्टार्च पर हल्का नीला। गर्म करने पर यह रंग गायब हो जाता है
    • क्योंकि कॉम्प्लेक्स टूट जाता है, लेकिन ठंडा होने पर फिर लौट आता है।​
  • वैज्ञानिक महत्व
    • यह परीक्षण स्कूल प्रयोगशालाओं में जैव रसायन और खाद्य परीक्षण के लिए उपयोगी है।
    • आलू के अलावा चावल, रोटी या अन्य स्टार्चयुक्त पदार्थों पर भी यही होता है
    • जबकि ग्लूकोज या प्रोटीन पर कोई रंग परिवर्तन नहीं होता।
    • आयोडीन स्टार्च का संवेदनशील संकेतक है क्योंकि यह 0.0005% स्टार्च की मात्रा का भी पता लगा सकता है।​
  • अन्य संबंधित तथ्य
    • कभी-कभी आलू स्वयं नीला पड़ जाता है, लेकिन यह chilling injury के कारण होता है
    • जब ठंड में स्टार्च शुगर में बदल जाता है, न कि आयोडीन से।
    • स्टार्च की यह संपत्ति खाद्य उद्योग में गुणवत्ता जांच के लिए भी प्रयुक्त होती है।​