विविध (जीव विज्ञान) भाग-II

Total Questions: 39

31. पंखे के आकार की पत्तियों वाली सबसे प्राचीन जीवित पौधे की प्रजाति कौन-सी है जिसे आमतौर पर रक्त विकारों और स्मरण-शक्ति संबंधी विकारों के उपचार हेतु उपयोग किया जाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) जिन्को
Solution:
  • जिन्को
    •  इसका पूरा नाम जिन्को बिलोबा (Ginkgo biloba) है।
    • यह पृथ्वी पर सबसे प्राचीन जीवित वृक्ष प्रजातियों में से एक है, जिसे अक्सर "जीवित जीवाश्म" कहा जाता है।
    • इसकी पत्तियां विशिष्ट पंखे के आकार की होती हैं।
    • जिन्को के अर्क का उपयोग पारंपरिक चीनी चिकित्सा और आधुनिक हर्बल दवाओं में सदियों से किया जाता रहा है।
    • इसे विशेष रूप से रक्त परिसंचरण में सुधार, एंटीऑक्सीडेंट गुणों और संज्ञानात्मक कार्य (जैसे स्मरण-शक्ति और एकाग्रता) में संभावित सुधार के लिए जाना जाता है।
    • यह कुछ रक्त विकारों के उपचार में भी उपयोगी हो सकता है।
  • वैज्ञानिक पृष्ठभूमि
    • जिंको बिलोबा जिन्कगोएसी (Ginkgoaceae) कुल का एकमात्र जीवित प्रजाति है
    • जो डायनासोर युग से बची हुई है। इसके बीज और पत्तियाँ चीनी चिकित्सा में सदियों से प्रयुक्त होते हैं
    • विशेषकर रक्त संचार सुधारने हेतु। यह वृक्ष 50 मीटर तक ऊँचा हो सकता है
    • 1000 वर्ष से अधिक जीवित रह सकता है ।​
  • औषधीय उपयोग
    • इसका उपयोग मुख्यतः रक्त विकारों जैसे एनीमिया, हीमोफीलिया और थक्का बनने की समस्या में किया जाता है
    • क्योंकि यह रक्त वाहिकाओं को फैलाता है और प्लेटलेट्स को नियंत्रित करता है।
    • स्मृति-सम्बंधी विकारों जैसे अल्जाइमर और डिमेंशिया में भी प्रभावी माना जाता है
    • क्योंकि इसके फ्लेवोनॉइड्स मस्तिष्क में रक्त प्रवाह बढ़ाते हैं ।
    • पत्तियों का अर्क (EGb 761) एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है, जो उम्र-संबंधी स्मृति ह्रास रोकता है।​
  • पारंपरिक और आधुनिक लाभ
    • रक्त विकार: रक्त को शुद्ध करता है, सिकल सेल रोग और ल्यूकेमिया जैसे लक्षणों में सहायक।
    • स्मृति शक्ति: एकाग्रता बढ़ाता है, चक्कर और थकान दूर करता है।
    • अन्य: चिंता, अवसाद और परिधीय धमनी रोग में उपयोगी; महिलाओं में मासिक धर्म संबंधी समस्याओं में भी लाभदायक

32. आधुनिक पारिस्थितिकी के जनक कौन हैं? [CGL (T-I) 13 दिसंबर, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) ई.पी. ओड्डुम
Solution:
  • यूजीन प्लेजेंट ओड्डुम
    • उन्हें व्यापक रूप से आधुनिक पारिस्थितिकी का जनक माना जाता है।
    • उन्होंने और उनके भाई हॉवर्ड टी. ओड्डुम ने पारिस्थितिकी तंत्र अवधारणा को लोकप्रिय बनाया और पारिस्थितिकी को एक एकीकृत विज्ञान के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
    • उनकी पुस्तक "फंडामेंटल्स ऑफ इकोलॉजी पारिस्थितिकी के क्षेत्र में एक मौलिक पाठ्यपुस्तक बन गई।
  • तैंसलो का योगदान
    • आर्थर तैंसलो (1871-1955) ब्रिटिश पारिस्थितिकीशास्त्री थे
    • जिन्होंने पारिस्थितिकी को एक एकीकृत विज्ञान के रूप में स्थापित किया।
    • 1935 में उनके निबंध में उन्होंने "ecosystem" शब्द प्रस्तुत किया
    • जो संयंत्रों, जंतुओं, मिट्टी, जलवायु और अन्य कारकों के बीच ऊर्जा प्रवाह और पदार्थ चक्रण को दर्शाता है।
    • इससे पहले पारिस्थितिकी केवल वर्णनात्मक थी
    • लेकिन तैंसलो ने इसे गणितीय मॉडलिंग और प्रक्रिया-आधारित विश्लेषण की ओर मोड़ा।
  • पारिस्थितिकी का ऐतिहासिक संदर्भ
    • पारिस्थितिकी की नींव 19वीं सदी में ही रखी गई थी:
    • अर्नस्ट हेकेल (Ernst Haeckel): 1866 में "पारिस्थितिकी" (Ökologie) शब्द गढ़ा
    • जो जीवों और पर्यावरण के संबंधों का अध्ययन है।
    • फ्रेडरिक फोरब्स (Frederick Forbes) और यूजीन ओडम
    • क्रमशः ऊर्जा प्रवाह और पारिस्थितिकी तंत्र पारिस्थितिकी को विकसित किया।
    • तैंसलो ने इन्हें एकीकृत कर आधुनिक रूप दिया, विशेषकर वनस्पति पारिस्थितिकी में।
  • प्रमुख अवधारणाएँ और प्रभाव
    • तैंसलो ने पारिस्थितिकी तंत्र को दो मुख्य भागों में बाँटा:
    • बायोटिक (जीवमंडल): जीव, जैसे पौधे, जंतु, सूक्ष्मजीव।
    • एबायोटिक (अजीवमंडल): मिट्टी, जल, तापमान, प्रकाश।
    • ऊर्जा का एकतरफा प्रवाह (सूर्य से उत्पादक → उपभोक्ता → अपघटक) और पदार्थों का चक्रीय प्रवाह (कार्बन, नाइट्रोजन चक्र)।
    • उनके कार्य ने जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता ह्रास और प्रदूषण अध्ययनों की नींव रखी।
    • ब्रिटिश इकोलॉजी सोसाइटी के संस्थापक होने से उन्होंने वैश्विक अनुसंधान को प्रेरित किया।
  • विरासत और आधुनिक प्रासंगिकता
    • तैंसलो की अवधारणा आज जलवायु मॉडल, संरक्षण नीतियों और सतत विकास में आधारभूत है।
    • उदाहरणस्वरूप, IPCC रिपोर्टें पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं (जैसे जल शुद्धिकरण, मिट्टी संरक्षण) पर निर्भर करती हैं।
    • ओडम भाइयों ने इसे लोकप्रिय बनाया, लेकिन तैंसलो को मूल स्रोत माना जाता है।
    • वर्तमान में (जनवरी 2026), पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापना परियोजनाएँ जैसे  उनके विचारों पर आधारित हैं।

33. बायोमास का पिरामिड एक आरेख है, जो खाद्य श्रृंखला के प्रत्येक स्तर पर जनसंख्या को दर्शाता है। इसके अनुसार, ......., उच्चतम बायोमास के साथ आधार पर अपना स्थान ग्रहण करता है/करते हैं। [CHSL (T-I) 08 जून, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) उत्पादक
Solution:
  • बायोमास का पिरामिड एक आरेख है, जो खाद्य श्रृंखला के प्रत्येक स्तर पर जनसंख्या को दर्शाता है।
  • इसके अनुसार, उत्पादक उच्चतम बायोमास के साथ आधार पर अपना स्थान ग्रहण करते हैं।
  • बायोमास पिरामिड को निर्धारित करने के लिए
  • प्रायः प्रत्येक पोषण स्तर पर मौजूद समस्त जीवों को एकत्रित कर उनके शुष्क भार का मापन किया जाता है।
  • घास के मैदान तथा वन के पारिस्थितिक तंत्र में उत्पादकों का जीवभार सबसे अधिक होता है।
  • बायोमास पिरामिड की परिभाषा
    • यह आमतौर पर ग्राम प्रति वर्ग मीटर (g/m²) या किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर (kg/m²) में मापा जाता है।
    • उत्पादक (जैसे पौधे और शैवाल) आधार पर होते हैं
    • क्योंकि उनका बायोमास सबसे अधिक होता है, जबकि उच्च स्तरों पर यह क्रमिक रूप से घटता जाता है।​
  • संरचना और स्तर
    • पिरामिड निम्नलिखित स्तरों पर आधारित होता है:
    • आधार स्तर (उत्पादक): पौधे सूर्य प्रकाश से ऊर्जा बनाते हैं, इसलिए उनका बायोमास सबसे ज्यादा होता है।
    • प्राथमिक उपभोक्ता (शाकाहारी): घास, पत्तियां आदि खाते हैं।
    • द्वितीयक उपभोक्ता (मांसाहारी): शाकाहारी को खाते हैं।
    • तृतीयक उपभोक्ता (शीर्ष मांसाहारी): सबसे कम बायोमास।​
    • ऊर्जा का केवल 10% ही अगले स्तर पर स्थानांतरित होता है
    • बाकी चयापचय या अपशिष्ट के रूप में नष्ट हो जाता है।​
  • प्रकार: सीधा और उल्टा
    • स्थलीय पारिस्थितिक तंत्रों (जैसे जंगल) में पिरामिड सीधा होता है
    • जहां उत्पादकों का बायोमास सबसे अधिक होता है।
    • जलीय पारिस्थितिक तंत्रों (जैसे समुद्र) में कभी-कभी उल्टा हो सकता है
    • क्योंकि फाइटोप्लांकटन का बायोमास कम लेकिन प्रजनन दर अधिक होती है।​
  • महत्व और उदाहरण
    • यह पिरामिड ऊर्जा प्रवाह, पारिस्थितिक संतुलन और प्रदूषण प्रभाव को समझने में मदद करता है।
    • उदाहरणस्वरूप, एक जंगल में पेड़ों का बायोमास हिरणों से लाखों गुना अधिक होता है।
    • अपघटक (जीवाणु, कवक) पिरामिड के बाहर मृत पदार्थ को विघटित करते हैं।​

34. कौन से जलीय सूक्ष्मजीव पादपप्लवक खाते हैं और फिर मछली, क्रस्टेशियाई और अन्य बड़ी प्रजातियों के लिए भोजन बन जाते हैं? [C.P.O.S.I. (T-I) 11 नवंबर, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) प्राणिप्लवक
Solution:
  • प्राणिप्लवक
    • ये छोटे, तैरने वाले जानवर होते हैं
    • जो जलीय वातावरण में रहते हैं। वे अक्सर पादपप्लवक (phytoplankton) को खाते हैं
    • (जो सूक्ष्म जलीय पौधे होते हैं जो प्रकाश संश्लेषण करते हैं
    • जलीय खाद्य श्रृंखला का आधार होते हैं
    • प्राणिप्लवक बदले में, मछली के लार्वा, छोटी मछली, क्रस्टेशियन (जैसे झींगा) और अन्य बड़े जलीय जीवों के लिए एक महत्वपूर्ण खाद्य स्रोत बन जाते हैं।
    • वे जलीय खाद्य जालों में एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं।
  • प्राणिप्लवक की संरचना
    • ये प्राथमिक उपभोक्ता होते हैं जो फाइटोप्लांकटन जैसे मुक्त-प्रवाहित शैवाल को ग्रहण करते हैं
    • जबकि द्वितीयक उपभोक्ता अन्य प्राणिप्लवक को खाते हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, कोपिपॉड्स और क्रिल विशाल समूहों में पाए जाते हैं जो खाद्य श्रृंखला को ऊर्जा हस्तांतरित करते हैं।​
  • खाद्य श्रृंखला में भूमिका
    • खाद्य श्रृंखला में प्राणिप्लवक मध्यवर्ती प्रजाति (intermediate species) के रूप में कार्य करते हैं
    • जो प्लवकीय शैवाल से ऊर्जा लेकर बड़ी मछलियों, कांगर ईल, जेलिफ़िश और अकशेरूकीय शिकारियों तक पहुंचाते हैं।
    • क्रस्टेशियाई लार्वा, जैसे नॉप्लियस, डायटम और अन्य सूक्ष्मजीवों को खाते हैं
    • छोटी मछलियों के लिए भोजन बनते हैं। इससे मत्स्य उद्योग को आर्थिक लाभ होता है
    • क्योंकि उनके विशाल समूह सागर का रंग बदल देते हैं, मछुआरों को संकेत देते हुए।​
  • पारिस्थितिक महत्व

    • प्राणिप्लवक जल की स्पष्टता और पोषक तत्व प्रदूषण के संकेतक होते हैं
    • जहां उनकी प्रजाति संरचना पर्यावरणीय परिवर्तनों को दर्शाती है।
    • फाइटोप्लांकटन प्रकाश संश्लेषण से ऑक्सीजन उत्पन्न करते हैं
    • जिसे ज़ूप्लांकटन ग्रहण कर बड़ी प्रजातियों तक ले जाते हैं, समुद्री जैव विविधता को संतुलित रखते हुए।
    • क्रिल जैसे प्राणिप्लवक मानव भोजन और जलीय खेती में भी उपयोगी हैं।​

35. जीवोम (बायोम) को किस प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) अपनी वनस्पति, मिट्टी, जलवायु और वन्य जीवन की विशेषता वाला एक बड़ा क्षेत्र
Solution:
  • जीवोम
    • एक जीवोम पृथ्वी पर एक बड़ा क्षेत्रीय या वैश्विक पारिस्थितिक समुदाय है
    • जो अपनी विशिष्ट वनस्पति, मिट्टी के प्रकार, जलवायु (विशेषकर तापमान और वर्षा) और वन्य जीवन के प्रकारों से परिभाषित होता है।
    • उदाहरणों में टुंड्रा, टैगा (बोरियल वन), समशीतोष्ण पर्णपाती वन, घास के मैदान, रेगिस्तान, उष्णकटिबंधीय वर्षावन और जलीय जीवोम शामिल हैं।
    • यह एक व्यापक भौगोलिक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है
    • जहाँ समान पर्यावरणीय परिस्थितियाँ समान प्रकार के अनुकूलित जीवन रूपों का समर्थन करती हैं।
  • जीवोम की परिभाषा
    • जो विशिष्ट अजैविक कारकों जैसे तापमान, वर्षा, मिट्टी और भौगोलिक स्थिति पर आधारित होता है।
    • इसमें पौधों, जानवरों और सूक्ष्मजीवों का ऐसा समुदाय रहता है
    • जो उस वातावरण के अनुकूल होता है, और इनका बायोमास पौधों का प्रमुख रहता है।
    • सभी पारिस्थितिक तंत्र मिलकर जीवोम बनाते हैं, जो अंततः पूरे जीवमंडल का हिस्सा होते हैं।​
  • जीवोम का निर्माण
    • जीवोम का निर्माण जैविक (पौधे, जंतु, सूक्ष्मजीव) और अजैविक (जलवायु, मिट्टी, जल) घटकों की निरंतर पारस्परिक क्रिया से होता है।
    • किसी बड़े क्षेत्र में कई पारिस्थितिक तंत्र एकत्र होकर ऊर्जा और पदार्थों का आदान-प्रदान करते हैं
    • जिससे एक एकीकृत इकाई बनती है।
    • उदाहरणस्वरूप, एक रेगिस्तानी जीवोम में सूखा वातावरण सभी जीवों को समान अनुकूलन विकसित करने के लिए मजबूर करता है।​​
  • जीवोम के प्रकार
    • जीवोमों को मुख्यतः तीन श्रेणियों में बांटा जाता है: स्थलीय (टेरेस्ट्रियल), जलीय मीठे पानी के, और समुद्री।
    • स्थलीय जीवोम: इनमें उष्णकटिबंधीय वर्षावन, सवाना घासभूमि, रेगिस्तान, टुंड्रा और टैगा वन शामिल हैं
    • जहाँ जलवायु प्रमुख कारक है।​
    • मीठे पानी के जीवोम: नदियां, झीलें और आर्द्रभूमि जैसे क्षेत्र, जो ताजे पानी पर निर्भर होते हैं।
    • समुद्री जीवोम: महासागर और तटीय क्षेत्र, जो लवणीय जल और ज्वार-भाटा से प्रभावित होते हैं।​
  • प्रमुख उदाहरण
    • उष्णकटिबंधीय वर्षावन जीवोम उच्च जैव विविधता वाला होता है
    • जहाँ पूरे वर्ष गर्मी और भारी वर्षा रहती है, जैसे अमेज़न बेसिन।
    • टुंड्रा जीवोम में ठंडा तापमान और पर्माफ्रॉस्ट मिट्टी पेड़ों के विकास को रोकती है
    • जबकि रेगिस्तानी जीवोम कम वर्षा के कारण कंटीले पौधे और ऊंट जैसे अनुकूलित जीव रखता है।
    • वन जीवोम में विविध वृक्ष और पक्षी पाए जाते हैं।​
  • महत्व और विशेषताएँ
    • जीवोम वैश्विक पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखते हैं
    • ऑक्सीजन उत्पादन, जल चक्र और कार्बन संग्रहण में योगदान देते हैं।
    • इनकी सीमाएँ धुंधली होती हैं और मानवीय गतिविधियाँ जैसे वनों की कटाई इन्हें प्रभावित करती हैं।
    • प्रत्येक जीवोम की वनस्पति और जलवायु पैटर्न अद्वितीय होते हैं, जो जैव विविधता को परिभाषित करते हैं।​

36. हीमोग्लोबिन के निर्माण के लिए निम्नलिखित में से किसकी आवश्यकता होती है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) Fe
Solution:
  • Fe (लौह / Iron)
    • हीमोग्लोबिन एक प्रोटीन है जो लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाता है
    • पूरे शरीर में ऑक्सीजन ले जाने के लिए जिम्मेदार होता है।
    • हीमोग्लोबिन का केंद्रीय घटक एक हीम समूह होता है, जिसमें एक लौह (Fe) परमाणु होता है।
    • यह लौह परमाणु ही ऑक्सीजन से अस्थायी रूप से जुड़ता है।
    • लौह की कमी से एनीमिया होता है, एक ऐसी स्थिति जिसमें शरीर में पर्याप्त स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं नहीं होती हैं।
  • हीमोग्लोबिन क्या है
    • जो चार सबयूनिट्स से मिलकर बनता है। प्रत्येक सबयूनिट में एक हीम समूह होता है
    • जिसमें लौह आयन (Fe²⁺) ऑक्सीजन को बांधता है।
    • यह प्रोटीन फेफड़ों से ऑक्सीजन को पूरे शरीर तक पहुंचाता है और कार्बन डाइऑक्साइड को वापस लाता है।​
  • निर्माण प्रक्रिया
    • हीमोग्लोबिन का निर्माण अस्थि मज्जा में एरिथ्रोपोiesis प्रक्रिया के दौरान होता है।
    • हीम संश्लेषण: ग्लाइसिन और सक्सिनाइल CoA से शुरू होकर प्रोट्रोपोर्फिरिन IX बनता है
    • जिसमें लौह तत्व अंतिम चरण में जुड़ता है।
    • ग्लोबिन संश्लेषण: अमीनो अम्ल श्रृंखलाओं से α और β चेन बनते हैं।
    • सहायक पदार्थ: फोलिक अम्ल और B12 DNA संश्लेषण के लिए आवश्यक हैं
    • जो RBC परिपक्वता सुनिश्चित करते हैं। कमी से मेगालोब्लास्टिक एनीमिया होता है।​
  • आवश्यक पोषक तत्व
    • हीमोग्लोबिन निर्माण के लिए प्रमुख पदार्थ निम्न हैं:
    • लौह तत्व (आयरन): हीम का केंद्र बिंदु, मुख्य रूप से हेम (मांसाहारी) और नॉन-हेम (शाकाहारी) रूप में
    • कमी से माइक्रोसाइटिक हाइपोक्रोमिक एनीमिया। स्रोत: पालक, गुड़, मांस, दालें।​
    • फोलिक अम्ल (विटामिन B9): RBC विभाजन के लिए। स्रोत: हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें।​
    • विटामिन B12: परिपक्वता के लिए। स्रोत: अंडे, दूध, मांस।​
    • विटामिन C: आयरन अवशोषण बढ़ाता है। अन्य: कॉपर, प्रोटीन।​
  • कमी के कारण और प्रभाव
    • आयरन की कमी सबसे सामान्य है, विशेषकर महिलाओं, बच्चों और शाकाहारियों में।
    • रक्तस्राव, कुपोषण या अवशोषण दोष से होता है।
    • लक्षण: थकान, सांस फूलना, पीलापन। गर्भावस्था में फोलिक अम्ल की मांग बढ़ती है।​
  • बढ़ाने के उपाय
    • आहार में आयरन-युक्त भोजन लें, विटामिन C के साथ।
    • सप्लीमेंट्स डॉक्टर की सलाह से। नियमित जांच से बचाव।​

37. एक ऐसे शैवाल की पहचान कीजिए, जो युग्मकों के असमयुग्म की संलयन से गुजरता है। [Phase-XI 28 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) वॉलवॉक्स
Solution:
  • वॉलवॉक्स (Volvox)
    • यह एक कॉलोनियल हरा शैवाल है जो अंडयुग्मकी (Oogamy) प्रजनन प्रदर्शित करता है
    • जो असमयुग्मकी का एक चरम रूप है, जहाँ मादा युग्मक बहुत बड़ा और गैर-गतिशील होता है
    • जबकि नर युग्मक छोटा और गतिशील होता है। हालांकि यह असमयुग्मकी के तहत आता है
    • यूडोरिना अधिक विशिष्ट रूप से असमयुग्मकी का उदाहरण है
    • जहाँ दोनों युग्मकों में गतिशीलता हो सकती है लेकिन आकार भिन्न होता है, या एक बड़ा और एक छोटा गतिमान युग्मक।
  • शैवाल में असमयुग्मी संलयन क्या है?
    • असमयुग्मी संलयन वह प्रक्रिया है जिसमें दो युग्मक आकार, आकृति या गतिशीलता में भिन्न होते हैं
    • लेकिन दोनों प्रजनन कोशिकाएँ होती हैं।
    • शैवालों में लैंगिक प्रजनन मुख्य रूप से इसोगैमी (समान युग्मक), एनिसोगैमी (असमान युग्मक) और ऊगैमी (एक बड़ा स्थिर अंडाणु और छोटा शुक्राणु) तीन प्रकारों में होता है।
    • एनिसोगैमी समयुग्मी (isogamy) और विषमयुग्मी (oogamy) का मध्यवर्ती रूप है
    • जहाँ युग्मक आकार में असमान होते हैं।​
  • यूडोरिना की संरचना और जीवन चक्र
    • यूडोरिना कॉलोनियल शैवाल है, जो 16 से 32 कोशिकाओं वाली गोलाकार कॉलोनी बनाता है।
    • वनस्पतिक प्रजनन जूपोरस्पोर (zoopores) द्वारा होता है।
    • लैंगिक प्रजनन में कुछ कॉलोनियाँ नर युग्मक (छोटे, द्विमस्तकी, गतिशील) उत्पन्न करती हैं
    • जबकि अन्य मादा युग्मक (बड़े, स्थिर) बनाती हैं। ये युग्मक संलयन से जाइगोट बनाते हैं
    • जो मीसिस के बाद नए कॉलोनियों को जन्म देता है। यह हेप्लो-डिप्लो जीवन चक्र प्रदर्शित करता है।​
  • अन्य उदाहरण और तुलना
    • समयुग्मी शैवाल: स्पाइरोगायरा, उलोथ्रिक्स – युग्मक समान आकार के।​
    • विषमयुग्मी शैवाल: फ्यूकोस (भूरे शैवाल) – एक बड़ा अंडाणु और छोटा शुक्राणु।​
    • यूडोरिना की विशिष्टता: यह वोल्वोक्स जीनस का सरल रूप है, जहाँ कॉलोनी स्तर पर युग्मक भेदभाव होता है।

38. एक बहुकोशिकीय तंतुमय हरा शैवाल कौन-सा है, जिसमें बेलनाकार कोशिकाओं की पतली अशाखित श्रृंखलाएं होती हैं और जो धाराओं और तालाबों की सतह के पास तैरते हुए समूहों के रूप में पाया जाता है? [Phase-XI 28 जून, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) स्पाइरोगाइरा
Solution:
  • स्पाइरोगाइरा (Spirogyra) एक बहुकोशिकीय (Multicellular) ततुंमय (Filamentous) हरा शैवाल है
  • जिसमें बेलनाकार कोशिकाओं की पतली अशाखित श्रृंखलाएं (Unbranched chains) होती हैं
  • जो धाराओं और तालाबों की सतह के पास तैरते हुए समूहों के रूप में पाया जाता है।
  • संरचना
    • जो बेलनाकार कोशिकाओं से मिलकर बनी होती हैं।
    • प्रत्येक कोशिका में एक बड़ा केंद्रक और सर्पिल आकार का क्लोरोप्लास्ट (स्पाइरल क्लोरोप्लास्ट) मौजूद होता है
    • जो इसे अपना नाम देता है—ग्रीक शब्द 'स्पाइरा' (सर्पिल) और 'गायरा' (शैवाल) से।
    • कोशिकाएं एक-दूसरे से सटकर जुड़ी रहती हैं, और कोशिका भित्ति मुख्य रूप से सेलुलोस से बनी होती है
    • जो शैवालों की सामान्य विशेषता है।​
  • निवास स्थान
    • यह शैवाल धाराओं, तालाबों, नदियों और अन्य स्थिर मीठे जल स्रोतों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है
    • विशेषकर सतह के निकट तैरते हुए पुंज (मास) के रूप में।
    • प्रकाश संश्लेषण के दौरान उत्पन्न ऑक्सीजन बुलबुले इन पुंजों को ऊपर उठाते हैं
    • जिससे ये जल सतह पर जमा हो जाते हैं और हरे रंग की चादर जैसी दिखाई देते हैं।
    • यह प्रदूषण रहित स्वच्छ जल को इंगित करता है
    • हालांकि अधिक पोषक तत्वों वाली स्थितियों में भी फलता-फूलता है।​
  • प्रजनन
    • स्पाइरोगाइरा लैंगिक और अलैंगिक दोनों प्रकार के प्रजनन करता है।
    • अलैंगिक प्रजनन तंतु के सरल विखंडन (fragmentation) से होता है
    • जहां टूटे हुए टुकड़े नई श्रृंखलाओं में विकसित हो जाते हैं। लैंगिक प्रजनन संयुग्मन (conjugation) द्वारा होता है
    • जिसमें दो समानांतर तंतुओं की कोशिकाएं संयुग्मन नलिकाओं (conjugation tubes) के माध्यम से जुड़ती हैं
    • सामग्री का आदान-प्रदान कर जाइगोट (zygospore) बनाती हैं, जो प्रतिकूल परिस्थितियों में सहनशील रहता है।​
  • महत्व
    • यह शैवाल जैविक प्रदर्शन के लिए प्रयोगशालाओं में लोकप्रिय है
    • जहां इसकी कोशिकाओं को माइक्रोस्कोप से आसानी से देखा जा सकता है।
    • पारिस्थितिक तंत्र में यह प्राथमिक उत्पादक के रूप में कार्य करता है
    • जो जलीय जीवों के लिए भोजन और ऑक्सीजन प्रदान करता है।
    • हालांकि, अत्यधिक वृद्धि से जल प्रदूषण का संकेत मिल सकता है।​

39. निम्नलिखित में से कौन-सी ग्रीन हाउस गैस वातावरण में सर्वाधिक प्रचुर मात्रा में है? [CGL (T-I) 05 दिसंबर, 2022 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) जल वाष्प
Solution:
  •  (Water Vapor - H₂O)
    • यह पृथ्वी के वायुमंडल में सबसे प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली ग्रीनहाउस गैस है।
    • यह प्राकृतिक रूप से वाष्पीकरण और संघनन चक्र के माध्यम से मौजूद होती है।
    • जल वाष्प वातावरण में सबसे शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है
    • क्योंकि यह पृथ्वी की सतह से निकलने वाली अवरक्त विकिरण (गर्मी) को अवशोषित करती है
    • फिर उसे वायुमंडल में वापस विकीर्ण करती है, जिससे वार्मिंग प्रभाव पैदा होता है।
    • हालांकि, इसकी मात्रा और वितरण सीधे तापमान से संबंधित होते हैं
    • जिससे यह एक प्रतिक्रिया तंत्र बन जाता है (जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है
    • अधिक पानी वाष्पीकृत होता है, जिससे अधिक वार्मिंग होती है)।
  • वातावरण में सांद्रता की तुलना
    • वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा निम्नलिखित है (2022-2023 के आंकड़ों के अनुसार):
    • कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂): 418 ppm – कुल ग्रीनहाउस प्रभाव में 64% योगदान, सबसे प्रचुर।​
    • मीथेन (CH₄): 1,923 ppb (भाग प्रति बिलियन) – CO₂ से कम, लेकिन प्रति अणु अधिक शक्तिशाली।​
    • नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O): 336 ppb – लंबे समय तक वायुमंडल में रहती है।​
    • जलवाष्प: सबसे अधिक मात्रा (1-4%), लेकिन मानवीय उत्सर्जन सीमित; यह प्राकृतिक चक्र का हिस्सा है।​
  • CO₂ के स्रोत और प्रभाव
    • CO₂ मुख्य रूप से कोयला, तेल और गैस जलाने, सीमेंट उत्पादन तथा वनों की कटाई से उत्सर्जित होती है।
    • यह वातावरण में 100-300 वर्ष तक रह सकती है, जिससे वैश्विक तापमान वृद्धि का प्रमुख कारण बनती है।
    • संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2022 में इन गैसों की सांद्रता पूर्व-औद्योगिक स्तर से 150% अधिक हो गई।​
  • अन्य गैसों से तुलना क्यों कम?
    • मीथेन और N₂O की सांद्रता CO₂ से बहुत कम है
    • हालांकि मीथेन CO₂ से 25 गुना अधिक गर्मी फंसाती है।
    • फिर भी, मात्रा में CO₂ का वर्चस्व है। जलवाष्प को कभी-कभी सबसे प्रचुर माना जाता है
    • लेकिन यह ग्रीनहाउस गैसों की सूची में मानवीय प्रभाव वाली गैस नहीं गिनी जाती।​