Correct Answer: (d) आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम
Solution:- आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम वर्ष 2022 में पारित हुआ, जिसने बंदी पहचान अधिनियम, 1920 को प्रतिस्थापित किया
- जो औपनिवेशिक समय का कानून था। वर्ष 2022 का यह अधिनियम पुलिस अधिकारियों को आपराधिक मामलों में दोषी ठहराये गए
- गिरफ्तार किए गए या मुकदमे का सामना कर रहे लोगों का माप लेने का अधिकार देता है।
- भूमिका और उद्देश्य
- यह विधेयक देश की पुलिस और जेल प्रशासन के लिए बायोमेट्रिक और शरीर के माप लेने की व्यापक संभावनाओं को सक्षम बनाता है
- ताकि अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी प्रक्रियाओं में तेजी लाई जा सके।
- इससे पहले के कैदी पहचान अधिनियम, 1920 सीमित दायरे में फिंगरप्रिंट और फुटप्रिंट तक सीमित था
- नए प्रस्ताव का उद्देश्य दायरे और तकनीकों को बढ़ाना था.
- 1920 अधिनियम का خلف क्या था
- 1920 को आधुनिकताओं के अभाव के कारण समय-समय पर संशोधन की जरूरत पड़ती थी।
- इसके इतिहास में 1980s के दशक में विधि आयोग की 87वीं रिपोर्ट और 1980 के राम बाबू मिश्र मामले की दृष्टि से समय-समय पर प्रतिक्रियात्मक संशोधन पर विचार किया गया था
- ताकि पहचान के मानक और तकनीकी उपाय व्यापक बन सकें.
- प्रावधानों का दायरा
- कानून में “माप” के संग्रह के दायरे को विस्तृत करने की बात की गई, ताकि उंगलियों के निशान, फिंगरप्रिंट, फोटो, आयरिस स्कैन, अन्य जैविक नमूने, आदि सहित अति-आधुनिक डेटा-संग्रह संभव हो सके
- इससे पहचान की प्रक्रिया में गहराई और विविधता आती है
- ये परिवर्तन पुराने अधिनियम के सीमित दायरे को हटाने की कोशिश हैं
- इसकी तुलना में 1920 अधिनियम अधिकांश समय तक सीमित फिंगरप्रिंट/फुटप्रिंट रिकॉर्डिंग तक सीमित था.
- वैधानिक और प्रशासनिक प्रभाव
- गृह मंत्रालय और संबंधित प्रशासनिक इकाइयों के लिए यह जरूरी बनाता है
- वे बायोमेट्रिक डेटा के संग्रह, भंडारण और प्रबंधन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे और सुरक्षा-नियमों को मजबूत करें
- यह कानूनी फ्रेमवर्क केंद्र सरकार और राज्यों के बीच समन्वय के साथ क्रियान्वित करने की उम्मीद करता है.
- पंजाब, उत्तर प्रदेश आदि के संदर्भ
- 1920 अधिनियम के इतिहास में उत्तर प्रदेश राज्य बनाम राम बाबू मिश्रा जैसे प्रमुख न्यायिक निर्णयों ने पहचान के दायरे और माप-तत्वों के उपयोग पर सवाल उठाए, जिससे नए विधेयक की ज़रूरत स्पष्ट हुई
- इन फैसलों के बाद साफ तौर पर कहा गया कि मौजूदा अधिनियम को आधुनिक तकनीकों के अनुकूल ढाला जाए ताकि गिरफ्तार, दोषी या हिरासत में रखे गए सभी व्यक्तियों की पहचान बेहतर तरीके से की जा सके.
- संगत वैधानिक संकेत और संदिग्ध दायरे
- 2022 के आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक के बारे में कई स्रोत बताते हैं
- यह 1920 के अधिनियम को निरस्त/ प्रतिस्थापित करने के लिए प्रस्तावित था
- ताकि शरीर-नमूना लेने के पारंपरिक प्रमाणों से आगे बढ़कर जैविक नमूनों और अन्य मापों के रिकॉर्डिंग की अनुमति मिल सके
- इसके साथ संपूर्ण सुरक्षा-नियमन और डेटा-प्रबंधन के मानक भी मजबूत करने का प्रयास है.
- बिल के राजनीतिक संदर्भ
- 2022 में यह बिल संसद में पेश हुआ और पारित हुआ; यह बताता है
- केंद्र सरकार ने पहचान से जुड़े पुराने कानूनों के स्थान पर नया framework स्थापित करने के उद्देश्य से कदम उठाए
- मीडिया और अध्ययन स्रोत इस परिवर्तन को 1920 अधिनियम के प्रतिस्थापन के रूप में परखते हैं.
- संदिग्ध मामलों और आलोचनात्मक चिंताएं
- इस प्रकार के बिल अक्सर जैविक नमूनों/डेटा संग्रह को लेकर निजता, सुरक्षा, और दुरुपयोग के जोखिमों पर बहस को जन्म देते हैं
- कुछ विश्लेषक इसे व्यक्तियों के अधिकारों पर प्रभाव के साथ देखते हैं
- जबकि अन्य इसे अपराध-निवारण और त्वरित पहचान के लाभ के तौर पर प्रस्तुत करते हैं
- इस तनावपूर्ण विमर्श को बिल के पाठ और संसदीय बहस में साफ देखा जा सकता है