विविध (भारतीय राजव्यवस्था) भाग-II

Total Questions: 39

31. किसी राज्य की विधान परिषद में, राज्य की विधानसभा में सदस्यों की कुल संख्या के ....... से अधिक नहीं होती है। [MTS (T-I) 09 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) एक-तिहाई
Solution:
  • किसी राज्य की विधान परिषद में, राज्य की विधानसभा में सदस्यों की कुल संख्या के 1/3 से अधिक नहीं होती है
  • परंतु किसी राज्य की विधान परिषद के सदस्यों की कुल संख्या किसी भी दशा में 40 से कम नहीं होगी।
  • संवैधानिक प्रावधान
    • यह नियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 171(1) में स्पष्ट रूप से वर्णित है
    • जो विधान परिषद की संरचना को नियंत्रित करता है।
    • विधान परिषद के सदस्यों की अधिकतम संख्या विधानसभा के कुल सदस्यों का 1/3 होती है
    • लेकिन न्यूनतम संख्या 40 सदस्यों की होनी चाहिए।
    • उदाहरण के लिए, यदि किसी राज्य की विधानसभा में 300 सदस्य हैं
    • तो विधान परिषद में अधिकतम 100 सदस्य हो सकते हैं।​
  • गठन और चुनाव प्रक्रिया
    • विधान परिषद के सदस्यों का चयन अप्रत्यक्ष तरीके से होता है:
    • 1/3 सदस्य विधानसभा के चुने हुए सदस्यों द्वारा।
    • 1/3 सदस्य स्थानीय निकायों (नगरपालिकाएं, जिला बोर्ड आदि) द्वारा।
    • 1/12 सदस्य स्नातक निर्वाचकों द्वारा।
    • 1/12 सदस्य शिक्षकों द्वारा।
    • शेष 1/6 सदस्य राज्यपाल द्वारा नामित।​
    • ये सभी विधानसभा के आकार पर आधारित होते हैं
    • ताकि परिषद विधानसभा का "परमानेंट लेकिन अधीनस्थ" सदन बनी रहे।​
  • वर्तमान स्थिति और उदाहरण
    • भारत में वर्तमान में केवल 6 राज्यों में विधान परिषद है
    • उत्तर प्रदेश (100 सदस्य, विधानसभा 403), बिहार (75, विधानसभा 243), महाराष्ट्र (78, विधानसभा 288), कर्नाटक (75, विधानसभा 224), आंध्र प्रदेश (58, विधानसभा 175), और तेलंगाना (40, विधानसभा 119)। अनुच्छेद 169 के तहत संसद इनकी स्थापना या समाप्ति कर सकती है
    • यदि राज्य विधानसभा प्रस्ताव पारित करे।​
  • महत्व और भूमिका
    • विधान परिषद विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों की समीक्षा करती है
    • उन्हें विलंबित कर सकती है (लेकिन अस्वीकार नहीं), और विशेषज्ञों को विधायी प्रक्रिया में शामिल करती है।
    • यह द्विसदनीय व्यवस्था को मजबूत बनाती है
    • हालांकि यह विधानसभा से कम शक्तिशाली होती है।
    • कम भागीदारी या विवादास्पद निर्णयों के कारण कुछ राज्यों ने इसे समाप्त किया है, जैसे तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल।​

32. वर्ष 1947 में जब भारत में ब्रिटिश शासन समाप्त हुआ, तो साक्षरता दर सिर्फ ....... थी। [MTS (T-I) 03 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) 12 प्रतिशत
Solution:
  • वर्ष 1947 में जब भारत में ब्रिटिश शासन समाप्त हुआ, तो साक्षरता दर सिर्फ 12 प्रतिशत थी।
  • भारत में ब्रिटिश शासन उस अवधि को संदर्भित करता है
  • जिसके दौरान भारतीय उपमहाद्वीप ब्रिटिश साम्राज्य के औपनिवेशिक शासन के अधीन था।
  • विस्तारपूर्ण विवरण
    • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 1947 में भारत ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र हुआ था, और उस समय शिक्षा तक पहुँच बहुत सीमित थी।
    • इस अवधि में ग्रामीण और urban क्षेत्रों के बीच भी साक्षरता का स्तर अलग-थलग था
    • जिससे कुल मिलाकर साक्षरता दर लगभग 12% के आसपास मानी जाती है.
    • लिंग असमानता: पुरुषों की साक्षरता दर अपेक्षाकृत ऊँची रही, जबकि महिलाओं में साक्षरता दर नीचे थी
    • यह लिंग अंतर स्वतंत्रता के पहले दशकों के दौरान एक प्रमुख चुनौती बना रहा.
    • पाठ्यक्रम और शिक्षा व्यवस्था का अवसान: उस समय की शिक्षा नीति और प्रबंधन में विविधता और संसाधनों की कमी के कारण लक्षित लक्ष्य (जन शिक्षा, सार्वभौमिक पहुँच) कठिन रहे, जिससे व्यापक साक्षरता सुनिश्चित नहीं हो पाई.
    • स्वतंत्रता के बाद परिवर्तन का आरम्भ: स्वतंत्रता के बाद शिक्षा क्षेत्र ने गति पकड़ी, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर साक्षरता दर में वृद्धि हो सके
    • 1980s के बाद के नीतिगत प्रयासों और राष्ट्रीय कार्यक्रमों ने संकेतक सुधारना शुरू किया, परन्तु 12% से आगे बढ़ना धीमे क्रम में ही आगे बढ़ा.
  • महत्वपूर्ण बिंदु
    • 1947 के आस-पास की साक्षरता दर एक संकेतक है कि औपनिवेशिक काल की शिक्षा तक सीमित पहुँच कैसे विकसित राष्ट्र के लिए बाधा बनी रही
    • इसके बाद के दशकों में देश ने व्यापक शिक्षा-व्यवस्था बनाने की दिशा में कदम उठाए.

33. ऐसे अपराध, जिनके लिए पुलिस न्यायालय के आदेश के बिना किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकती है, उसे ....... कहते हैं। [MTS (T-I) 02 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) संज्ञेय अपराध
Solution:
  • ऐसे अपराध, जिनके लिए पुलिस न्यायालय के आदेश के बिना किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकती है
  • उसे संज्ञेय अपराध कहते हैं। संज्ञेय अपराधों में हत्या, बलात्कार, चोरी, अपहरण, व्यपहरण आदि शामिल हैं।
  • संक्षिप्त उत्तर: ऐसा अपराध जिन्हें पुलिस अदालत के आदेश के बिना गिरफ्तारी कर सकती है
  • उन्हें संज्ञेय अपराध (arrestable offenses) कहते हैं।
  • विस्तृत विवरण:
    • संज्ञेय अपराध क्या हैं: कानून के अनुसार कुछ अपराध ऐसे होते हैं जिनमें पुलिस को सीधे गिरफ्तार का अधिकार होता है
    • अदालत के वारंट या न्यायालय के आदेश की आवश्यकता नहीं होती।
    • यह व्यवस्था दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC) की धारा 154/151, आदि के अंतर्गत स्पष्ट की जाती है
    • जनता के जीवन, संपत्ति या सुरक्षा को तत्काल खतरे में डालने वाले अपराधों के लिए विशेष रूप से लागू होती है।
    • क्यों और कब लागू होती है: जब किसी अपराध की संगीनता या तात्कालिकता यह हो कि सार्वजनिक सुरक्षा या कानून-व्यवस्था पर तत्काल असर हो सकता है, तब पुलिस बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है।
    • इससे सामान्यतः संदेहास्पद गतिविधियों की त्वरित रोकथाम और अपराधियों को तत्काल हिरासत में लेने में मदद मिलती है।
  • गिरफ्तारी के दिशानिर्देश (सार):
    • गिरफ्तारी के समय अधिकारी की पहचान स्पष्ट होनी चाहिए और वारंट की आवश्यकता नहीं रहती।
    • गिरफ्तारी का कारण स्पष्ट रूप से बताए बिना नहीं किया जाना चाहिए।
    • गिरफ्तारी के बाद 24 घंटे के भीतर हिरासत, मेडिकल चेक और मजिस्ट्रेट की संतुष्टि के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करनी चाहिए।
    • गिरफ्तारी के बाद उचित बयान, नोटिस और गिरफ्तारी-मेमो जैसी रिकॉर्डिंग आवश्यक हो सकती है।
    • संवैधानिक सुरक्षा: अत्यधिक गिरफ्तारी से जुड़े अधिकार अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) तथा अनुच्छेद 22 (हिरासत के नियम) में संरक्षित रहते हैं।
    • बिना कारण या अनुचित तरीके से गिरफ्तारी होने पर व्यक्ति अदालत में आवेदन कर सकता है
    • अधिकारियों के अधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा उठा सकता है।
    • BNSS/समान कानून संदर्भ: 2023-24 के कुछ प्रावधानों का उल्लेख भी किया गया है
    • बिना वारंट गिरफ्तारी के कुछ स्थितियों में पुलिस के पास और स्पष्ट अधिकार हों
    • परन्तु इन नियमों के लागू होने और व्यावहारिक प्रभाव के लिए स्थानीय कानून और न्यायालयी निर्णयों को देखना जरूरी है।
  • नोट्स और सावधानियाँ:
    • अक्सर सवाल के स्रोत के हिसाब से “संज्ञेय अपराध” (sajnye ya sanjey aparadh) शब्द प्रमुख होता है
    • जिसका मतलब वह अपराध है जो पुलिस को तुरंत संज्ञान लेकर गिरफ्तारी करने का अधिकार देता है।
    • कानून के किस संस्करण/संशोधन के तहत এটি मायने रखता है
    • क्षेत्र (राज्य/केंद्रीय) और न्यायालयी निर्णयों के अनुसार फर्क हो सकता है।
    • इसलिए स्थानीय CRPC, BNSS के प्रावधानों और ताजा अदालत के फैसलों को संदर्भित करना उचित रहेगा।
    • यदि गिरफ्तारी अवैध मानी जाए या अधिकारों का उल्लंघन हो
    • तो शिकायत और न्यायिक सहायता के विकल्प उपलब्ध हैं
    • संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन पर अदालत सीधा हस्तक्षेप कर सकती है।

34. मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 एक ही बार में तीन बार तलाक कहकर दिए गए तत्काल तलाक (instant divorce) को शून्य और अवैध घोषित करता है। यह मौखिक रूप से तीन तलाक देने वाले पति के लिए ....... तक की कैद की सजा और जुर्माने का प्रावधान करता है। [MTS (T-I) 19 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) 3 वर्ष
Solution:
  • मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 एक ही बार में तीन बार तलाक कहकर दिए गए
  • तत्काल तलाक (instant divorce) को शून्य और अवैध घोषित करता है।
  • यह मौखिक रूप से तीन तलाक देने वाले पति के लिए 3 वर्ष तक की कैद की सजा और जुर्माने का प्रावधान करता है।
  • परिभाषा और उद्देश्य
    • उद्देश्य: विवाहित मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा करना और अवैध तीन तलाक की पद्धति को रोकना।
    • यह कानून तीन तलाक के किसी भी रूप (मौखिक, लिखित, इलेक्ट्रॉनिक आदि) को अवैध बनाता है.​
    • लागू क्षेत्र: भारत के मुस्लिम समुदाय पर यह लागू होता है
    • विशेषकर तलाक-निरस्ती के मामलों में हस्तांतरित अधिकारों और संरक्षणों के लिए नियम बनाता है.​
  • मुख्य प्रावधान
    • अपराध की प्रकृति: तीन तलाक की घोषणा संज्ञेय अपराध मानी जाएगी, यानी पुलिस द्वारा बिना वारंट गिरफ्तारी संभव है.​
    • सजा: दोषीhusband को तीन साल तक की कैद और जुर्माने की सजा हो सकती है.​
    • जमानत: आमतौर पर मजिस्ट्रेट ही आरोपी की जमानत मंजूर कर सकता है
    • मामले की सुनवाई और शमन जैसे नियम भी कानून में स्पष्ट हैं.​
    • रख-रखाव और संरक्षण: विवाह-विरक्ति के बाद पीड़िता को वैधानिक संरक्षण और निर्वाह भत्ता जैसी राहों का अधिकार प्राप्त रहता है
    • अदालत और प्रशासन इस पर उचित कदम उठाते हैं.​
  • प्रशासनिक और ट्रैक्शनल प्रभाव
    • अधिनियम के तहत तलाक-घोषणा एक संज्ञेय अपराध है
    • जिससे पुलिस और न्यायिक प्रणाली के माध्यम से तेजी से कदम उठाने की व्यवस्था बनती है.​
    • यह कानून सतर्कता के साथ लागू होता है
    • ताकि महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अन्याय को रोका जा सके और न्यायिक प्रक्रिया में महिला-आधारित संरक्षण मजबूत हो.​
  • कानूनी इतिहास और संदर्भ
    • संसद ने जुलाई 2019 में बिल पारित किया; कानून 2019 में अधिनियम बनकर लागू हुआ
    • तत्काल तलाक को निष्फल/अवैध घोषित करते हुए दंड-प्रावधान जोड़ा गया.​
    • 2017 के उच्चतम न्यायालय निर्णय (शायद संदर्भ में) तीन तलाक को असंवैधानिक बताता है
    • कानूनानुसार 2019 का अधिनियम विशिष्ट दंड-प्रावधानों के साथ इसे अपराध बनाता है.​
  • महत्वपूर्ण धाराओं का सार
    • त्रिपलक तलाक: मौखिक, लिखित या इलेक्ट्रॉनिक किसी भी माध्यम से दिया गया तीन तलाक अवैध है और शून्य माना जाएगा.​
    • सजा की सीमा: तीन साल तक की कैद तथा जुर्माना; यह संज्ञेय अपराध है और गिरफ्तारी बिना वारंट संभव हो सकती है.​
    • संरक्षण और भरण-पोषण: पीड़िता के अधिकारों के लिए निर्वाह भत्ता और अन्य संरक्षण के उपाय कानून के दायरे में आते हैं.​

35. 2022 में संसद में पारित निम्नलिखित में से किस विधेयक ने 'बंदी पहचान अधिनियम, 1920' को प्रतिस्थापित किया है? [MTS (T-I) 15 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम
Solution:
  • आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम वर्ष 2022 में पारित हुआ, जिसने बंदी पहचान अधिनियम, 1920 को प्रतिस्थापित किया
  • जो औपनिवेशिक समय का कानून था। वर्ष 2022 का यह अधिनियम पुलिस अधिकारियों को आपराधिक मामलों में दोषी ठहराये गए
  • गिरफ्तार किए गए या मुकदमे का सामना कर रहे लोगों का माप लेने का अधिकार देता है।
  • भूमिका और उद्देश्य
    • यह विधेयक देश की पुलिस और जेल प्रशासन के लिए बायोमेट्रिक और शरीर के माप लेने की व्यापक संभावनाओं को सक्षम बनाता है
    • ताकि अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी प्रक्रियाओं में तेजी लाई जा सके।
    • इससे पहले के कैदी पहचान अधिनियम, 1920 सीमित दायरे में फिंगरप्रिंट और फुटप्रिंट तक सीमित था
    • नए प्रस्ताव का उद्देश्य दायरे और तकनीकों को बढ़ाना था.​
  • 1920 अधिनियम का خلف क्या था
    • 1920 को आधुनिकताओं के अभाव के कारण समय-समय पर संशोधन की जरूरत पड़ती थी।
    • इसके इतिहास में 1980s के दशक में विधि आयोग की 87वीं रिपोर्ट और 1980 के राम बाबू मिश्र मामले की दृष्टि से समय-समय पर प्रतिक्रियात्मक संशोधन पर विचार किया गया था
    • ताकि पहचान के मानक और तकनीकी उपाय व्यापक बन सकें.​
  • प्रावधानों का दायरा
    • कानून में “माप” के संग्रह के दायरे को विस्तृत करने की बात की गई, ताकि उंगलियों के निशान, फिंगरप्रिंट, फोटो, आयरिस स्कैन, अन्य जैविक नमूने, आदि सहित अति-आधुनिक डेटा-संग्रह संभव हो सके
    • इससे पहचान की प्रक्रिया में गहराई और विविधता आती है
    • ये परिवर्तन पुराने अधिनियम के सीमित दायरे को हटाने की कोशिश हैं
    • इसकी तुलना में 1920 अधिनियम अधिकांश समय तक सीमित फिंगरप्रिंट/फुटप्रिंट रिकॉर्डिंग तक सीमित था.​
  • वैधानिक और प्रशासनिक प्रभाव
    • गृह मंत्रालय और संबंधित प्रशासनिक इकाइयों के लिए यह जरूरी बनाता है
    • वे बायोमेट्रिक डेटा के संग्रह, भंडारण और प्रबंधन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे और सुरक्षा-नियमों को मजबूत करें
    • यह कानूनी फ्रेमवर्क केंद्र सरकार और राज्यों के बीच समन्वय के साथ क्रियान्वित करने की उम्मीद करता है.​
  • पंजाब, उत्तर प्रदेश आदि के संदर्भ
    • 1920 अधिनियम के इतिहास में उत्तर प्रदेश राज्य बनाम राम बाबू मिश्रा जैसे प्रमुख न्यायिक निर्णयों ने पहचान के दायरे और माप-तत्वों के उपयोग पर सवाल उठाए, जिससे नए विधेयक की ज़रूरत स्पष्ट हुई
    • इन फैसलों के बाद साफ तौर पर कहा गया कि मौजूदा अधिनियम को आधुनिक तकनीकों के अनुकूल ढाला जाए ताकि गिरफ्तार, दोषी या हिरासत में रखे गए सभी व्यक्तियों की पहचान बेहतर तरीके से की जा सके.​
  • संगत वैधानिक संकेत और संदिग्ध दायरे
    • 2022 के आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक के बारे में कई स्रोत बताते हैं
    • यह 1920 के अधिनियम को निरस्त/ प्रतिस्थापित करने के लिए प्रस्तावित था
    • ताकि शरीर-नमूना लेने के पारंपरिक प्रमाणों से आगे बढ़कर जैविक नमूनों और अन्य मापों के रिकॉर्डिंग की अनुमति मिल सके
    • इसके साथ संपूर्ण सुरक्षा-नियमन और डेटा-प्रबंधन के मानक भी मजबूत करने का प्रयास है.​
  • बिल के राजनीतिक संदर्भ
    • 2022 में यह बिल संसद में पेश हुआ और पारित हुआ; यह बताता है
    • केंद्र सरकार ने पहचान से जुड़े पुराने कानूनों के स्थान पर नया framework स्थापित करने के उद्देश्य से कदम उठाए
    • मीडिया और अध्ययन स्रोत इस परिवर्तन को 1920 अधिनियम के प्रतिस्थापन के रूप में परखते हैं.​
  • संदिग्ध मामलों और आलोचनात्मक चिंताएं
    • इस प्रकार के बिल अक्सर जैविक नमूनों/डेटा संग्रह को लेकर निजता, सुरक्षा, और दुरुपयोग के जोखिमों पर बहस को जन्म देते हैं
    • कुछ विश्लेषक इसे व्यक्तियों के अधिकारों पर प्रभाव के साथ देखते हैं
    • जबकि अन्य इसे अपराध-निवारण और त्वरित पहचान के लाभ के तौर पर प्रस्तुत करते हैं
    • इस तनावपूर्ण विमर्श को बिल के पाठ और संसदीय बहस में साफ देखा जा सकता है

36. भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की किस योजना के तहत जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल ने स्थानीय कला और जम्मू और कश्मीर ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूहों के कारीगरों के समर्थन के लिए श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उम्मीद मार्केट प्लेस (UMEED Market Place) का उद्घाटन किया? [MTS (T-I) 05 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) अवसर योजना (AVSAR Scheme)
Solution:
  • भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की अवसर योजना (AVSAR Scheme) के तहत जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल ने स्थानीय कला
  • जम्मू और कश्मीर ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूहों के कारीगरों के समर्थन के लिए श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे
  • उम्मीद मार्केट प्लेस (UMEED Market Place) का उद्घाटन किया।
  • पूरा विवरण
    • यह जानकारी इससे जुड़ी मीडिया कवरेज में स्पष्ट है कि श्रीनगर के अलावा जम्मू एयरपोर्ट पर भी इसी प्रकार का मंच शुरू किया गया है
    • ताकि 20 जिलों के उत्पादों को एक ही स्थान पर लाया जा सके ।​
    • उद्घाटन कार्यक्रम: जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल (Lieutenant Governor) Manoj Sinha ने श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर UMEED Market Place का उद्घाटन किया।
    • उद्घाटन के समय SHG (Self Help Group) सदस्य और स्थानीय कारीगर उपस्थित थे
    • उपराज्यपाल ने उन्हें नया मार्केटप्लेस उपलब्ध होने पर बधाई दी।
    • इससे SHG के सदस्यों को व्यापक दर्शक और यात्रियों तक पहुँचना संभव हुआ
    • ग्रामीण हस्तशिल्प उत्पाद किफायती दामों पर उपलब्ध कराये जाने लगे ।​
    • लाभ और उद्देश्य: UMEED Market Place SHG सदस्यों के जीवनयापन को सुदृढ़ करने के लिए एक मजबूत विपणन प्लेटफॉर्म देता है
    • ताकि उनके हस्तशिल्प उत्पादों को एयरपोर्ट पर आने-जाने वाले यात्रियों के बीच बिक्री के अवसर मिलें, bulk orders और कॉर्पोरेट गिफ्टिंग जैसी मांगों के लिए भी सुविधाओं का विकास हो।
    • यह कदम ग्रामीण विकास और पंरपरागत कलाओं के संरक्षण में योगदान देता है और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करता है ।​
    • अन्य संदर्भ: ऐसे मार्केटप्लेस की शुरुआत जम्मू और कश्मीर की विकास-आधारित पहलों के साथ जुड़ी रिपोर्टों में भी दर्ज है
    • जिसमें SHG को मिलने वाले दृश्यता और लाभ के बारे में बताया गया है।
    • मीडिया ने ग्रामीण उत्पादों को एक व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुँचाने वाले इस मॉडल की प्रशंसा की है ।​
  • स्पष्ट निष्कर्ष
    • उद्घाटन कार्यक्रम AVSAR योजना के अंतर्गत किया गया; उपराज्यपाल ने श्रीनगर एयरपोर्ट पर UMEED Market Place का उद्घाटन किया ताकि जम्मू-कश्मीर के SHG कारीगरों के उत्पाद यात्रियों तक पहुँच सकें और उनका विक्रय अवसर बढ़े ।​
    • यह मार्केटप्लेस 20 जिलों के उत्पादों को एक जगह प्रदर्शित करने का उद्देश्य रखता है
    • ग्रामीण कला को बड़े मंच पर प्रस्तुत करने के लिए एक प्रदर्शन/बेचान का केंद्र बन जाता है ।​
    • SHG सदस्यों के लिए रोजगार, मूल्य श्रृंखला सुदृढ़ीकरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था में योगदान जैसे लाभ स्पष्ट रूप से उल्लेखित हैं
    • इससे कई हजार महिलाओं और पुरानी सामाजिक-आर्थिक संरचनाओं को सक्षम बनाने की दिशा में कदम माना गया है ।​

37. भारत के किस पड़ोसी देश की आधिकारिक भाषा 'धिवेही (Dhivehi)' है? [MTS (T-I) 05 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) मालदीव
Solution:
  • भारत के पड़ोसी देश मालदीव की आधिकारिक भाषा धिवेही (Dhivehi) है। मालदीव का राष्ट्रीय पेड़ नारियल का वृक्ष है।
  • धिवेही (Dhivehi) मालदीव की आधिकारिक भाषा है। यह एक इंडो-आर्यन भाषा है
  • मालदीव गणराज्य के नागरिकों द्वारा मुख्य रूप से बोली जाती है
  • सरकार, शिक्षा और प्रशासनिक कार्यों में भी इसका प्रयोग किया जाता है।
  • धिवेही भाषा का लिखना थाना (Thaana) लिपि में किया जाता है, जो दाएं से बाएं लिखी जाती है।
  • धिवेही के अतिरिक्त मिनिकोय द्वीप (भारत) जैसे कुछ क्षेत्रों में इसे बोली जाने वाली भाषाओं में से एक माना जाता है
  • लेकिन भारत के भीतर आधिकारिक क्षेत्र के संदर्भ में Maldives के अलावा कोई अन्य देश इसे आधिकारिक भाषा नहीं देता।
  • यह जानकारी कला और इतिहास के संदर्भों में भी बार-बार उल्लेखित है ।​
  • संक्षिप्त विवरण
    • नाम: धिवेही (Dhivehi) या मालदीवियन
    • देश: मालदीव (official language)
    • भाषा family: इंडो-आर्यन
    • लिपि: Thaana (दाएं से बाएं)
    • सह-अस्तित्व: मालदीव के अलावा मिनीकॉय (भारत) में भी बोली जाने के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हैं
    • आधिकारिक स्थिति मालदीव में ही है ।​

38. वह सबसे शक्तिशाली हथियार कौन-सा है, जो संसद को कार्यकारी जवाबदेही सुनिश्चित करने में सक्षम बनाता है? [MTS (T-I) 04 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) अविश्वास प्रस्ताव
Solution:
  • अविश्वास प्रस्ताव वह सबसे शक्तिशाली हथियार है, जो संसद को कार्यकारी जवाबदेही सुनिश्चित करने में सक्षम बनाता है।
  • अविश्वास प्रस्ताव एक संसदीय प्रस्ताव है
  • जिसे पारंपरिक रूप से विपक्ष द्वारा संसद में सत्ता पक्ष या सरकार पर संसद के विश्वास की परीक्षा की जाती है।
  • इसके पारित हो जाने पर सरकार गिर जाती है।
  • यदि पारित हो जाता है, तो पूरी सरकार को इस्तीफा देना पड़ता है
  • जिससे कार्यकारी की सत्ता सीधे प्रभावित होती है।
  • यह संसदीय लोकतंत्र की मूल भावना को मजबूत बनाता है
  • जहां सरकार लोकसभा के बहुमत पर टिकी रहती है।​
  • अविश्वास प्रस्ताव का महत्व
    • अविश्वास प्रस्ताव अनुच्छेद 75 के तहत मंत्रिपरिषद की सामूहिक जिम्मेदारी सुनिश्चित करता है।
    • लोकसभा में 50 सदस्यों के समर्थन से पेश होता है और साधारण बहुमत से पारित होने पर सरकार गिर जाती है।
    • ऐतिहासिक रूप से, 1963, 1999, 2018 जैसे वर्षों में इसका उपयोग हुआ, जिसने सरकारों को जवाबदेह बनाया।​
  • कार्यान्वयन प्रक्रिया
    • पेशी: लोकसभा अध्यक्ष की अनुमति से 50 सदस्यों द्वारा।
    • चर्चा: 2 दिनों तक बहस, फिर मतदान।
    • परिणाम: बहुमत न मिलने पर सरकार गिरती है; विपक्ष अक्सर इसका उपयोग सरकार को दबाव में लाने के लिए करता है।
    • यदि पारित न हो, तो प्रस्तावक को 6 माह तक नया प्रस्ताव पेश करने की मनाही।​
  • ऐतिहासिक उदाहरण
    • 1979: चरण सिंह सरकार पर अविश्वास पारित, इस्तीफा।
    • 1999: वाजपेयी सरकार 1 वोट से हारी।
    • 2018: मोदी सरकार ने विश्वास मत जीता, लेकिन विपक्ष ने पेश किया।
    • ये उदाहरण दर्शाते हैं कि यह हथियार कार्यकारी को निरंतर सतर्क रखता है।​
  • चुनौतियां और सुधार
    • हालांकि शक्तिशाली, राजनीतिक गठबंधनों के कारण इसका दुरुपयोग होता है।
    • मजबूत समितियों और डिजिटल पारदर्शिता से इसे और प्रभावी बनाया जा सकता है।
    • संसद कार्यपालिका को राजनीतिक रूप से जवाबदेह रखती है, जबकि न्यायपालिका कानूनी।​

39. अपर्णा भट्ट बनाम मध्य प्रदेश राज्य के मामले में, 2021 में सर्वोच्च न्यायालय ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के उस निर्णय को रद्द कर दिया, जिसमें जमानत के लिए शर्त के रूप में ....... निर्धारित किया गया था। [CHSL (T-I) 08 जून, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) राखी बांधना
Solution:
  • अपर्णा भट्ट बनाम मध्य प्रदेश राज्य के मामले में मार्च, 2021 में सर्वोच्च न्यायालय ने छेड़छाड़ के आरोपी को पीड़िता से राखी बंधवाने की शर्त पर जमानत देने के मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्णय को रद्द कर दिया था।
  • उच्च न्यायालय की पूर्व निर्णय: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने ऐसी शर्तें लगाईं
  • जिन्हें आरोपी की जमानत के लिए मानक प्रक्रियात्मक मानदंडों से बाहर माना गया था
  • जिनमें पूर्वाग्रह/अदालत-निर्दिष्ट मानदंड का अभाव दिख रहा था।
  • ध्यान रहे कि यह विशिष्ट निर्णय जमानत-शर्तों के स्वरूप, अनुपयुक्त दंड-विधि के प्रयोग या आरोपी के आत्म-प्रतिष्ठान/कंटेम्पलेटेड आचरण से जुड़ा था।
  • सुप्रीम कोर्ट का निस्तारण: 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने उस उच्च न्यायालय के निर्णय को रद्द कर दिया
  • प्रभावी रूप से समीक्षा-याचिका पर पुनर्विचार कर उच्च न्यायालय के निर्धारणों को पलट दिया/हटाया।
  • परिणामस्वरूप जमानत के पूर्व निर्धारित शर्तों को वैधता या विश्वसनीयता के मानदंडों के अनुरूप पुनःका-निर्णय की आवश्यकता पड़ी।
  • कारण और तर्क: सुप्रीम कोर्ट ने यह माना कि उच्च न्यायालय द्वारा जमानत-शर्तें निर्धारित करते समय मौलिक अधिकारों, कानूनी मानदंडों और प्रासंगिक कानून के अभिप्रायों की अवहेलना/कमियों की गईं या शर्तें आरोपी के पक्ष के प्रतिकूल/अतार्किक रूप से रखी गईं।
  • न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जमानत अर्जी में तीन बातें महत्वपूर्ण होती हैं
  • अपराध-प्रकृति, पुनरावृत्ति/आरोप के जोखिम, और अदालत/जमानत-आवेदक के अधिकारों के संतुलन के सिद्धांत।
  • परिणाम कैसे प्रभावित होते हैं: इस निर्णय से जमानत-शर्तों में न्यायिक कानून-निर्वहन के दायरे में स्पष्टता आईजमानत-शर्तें अधिक निष्पक्ष, व्यवहारिक और कानून-संगत बननी चाहिए। साथ ही यह संदेश देता है कि अदालतें है
  • जमानत-निर्णय करते समय अन्यायपूर्ण या असमंजसपूर्ण शर्तें नहीं लगा सकतीं
  • विशेषकर POCSO मामलों में जहां सुरक्षा, बचाव और संविधानिक अधिकारों का संतुलन जरूरी है।
  • मानक भूमिका और दायरे
    • क्या शामिल था: जमानत के लिए शर्तें आम तौर पर सुरक्षा, मिसाल-रहे संचालन, और अपराध-गति पर नियंत्रण से जुड़ी हो सकती हैं।
    • लेकिन शर्तों की वैधता स्थानीय कानून के अनुसार होनी चाहिए, और आरोपी के मौलिक अधिकारों का अतिक्रमण नहीं होना चाहिए।
    • क्या नहीं था/क्या बदला गया: सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ने उच्च न्यायालय की कुछ “उचित नहीं” मानी जाने वाली शर्तों को निरस्त
    •  पुनः सोचने को कहा ताकि भविष्य में ऐसी शर्तों से तर्क-वितर्क न हो और मानक प्रक्रियात्मक उपाय सुनिश्चित हों।
  • नोट्स और सावधानियाँ
    • स्रोतों के अनुसार उपरोक्त विवरण लोकप्रिय मीडिया और कानूनी-व्याख्या साइटों पर आधारित है
    • सटीक अदालत-आदेश की शब्दशः प्रति पाने के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड, सुप्रीम Court की जर्नल या MP HC के आदेश देखें ।​
    • इस प्रकार के मामलों में अदालत का निर्णय तथ्य-स्थिति, आरोपों की प्रकृति, और पीड़िता के संरक्षण के अवसरों पर निर्भर रहता है
    • अतः हर नवीन निर्णय में समान शर्तों की समीक्षा होनी चाहिए ।​