विविध (भारतीय राजव्यवस्था) भाग-I

Total Questions: 40

11. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की स्थापना किस वर्ष में की गई थी? [C.P.O.S.I. (T-I) 09 नवंबर, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) 2007 में
Solution:
  • राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की स्थापना मार्च, 2007 में संसद के एक अधिनियम 'बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005' (दिसंबर, 2005) के तहत की गई थी।
  • स्थापना का आधार
    • यह आयोग बाल अधिकार संरक्षण आयोग (CPCR) अधिनियम, 2005 के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय है
    • जिसे संसद ने दिसंबर 2005 में पारित किया था। आयोग महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन कार्य करता है
    • संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार संधि (UNCRC), 1989 के सिद्धांतों को लागू करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है, जिसे भारत ने 1992 में अनुमोदित किया।​
  • मुख्य उद्देश्य
    • आयोग का प्राथमिक कार्य सभी कानूनों, नीतियों, कार्यक्रमों और प्रशासनिक तंत्रों को भारतीय संविधान तथा UNCRC के अनुरूप सुनिश्चित करना है।
    • यह 0-18 वर्ष आयु के बच्चों के अधिकारों की रक्षा करता है, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और बाल श्रम, दुर्व्यवहार तथा तस्करी जैसे मुद्दे शामिल हैं।
    • इसके अतिरिक्त, RTE अधिनियम 2009, POCSO अधिनियम 2012 तथा किशोर न्याय अधिनियम 2015 के तहत अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।​
  • शक्तियां और कार्य
    • आयोग के पास नागरिक प्रक्रिया संहिता, 1908 के समकक्ष दीवानी अदालत की शक्तियां हैं
    • जैसे शिकायतों की जांच, साक्ष्य संग्रह और सिफारिशें। यह राज्य, केंद्र और स्थानीय निकायों में कार्यान्वयन की निगरानी करता है
    • सामाजिक अंकेक्षण आयोजित करता है। समय-समय पर स्थापना दिवस मनाए जाते हैं, जैसे 2024 में 19वां तथा 2023 में 18वां।​

12. निम्नलिखित में से कौन-सा किसी देश का मौलिक कानून है, जो सरकार के विभिन्न अंगों की रूपरेखा और प्रमुख कार्यों को निर्धारित करता है? [MTS (T-I) 08 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) संविधान
Solution:
  • संविधान, किसी भी देश का मौलिक कानून है, जो सरकार के विभिन्न अंगों की रूपरेखा और मुख्य कार्य का निर्धारण करता है।
  • साथ ही, यह सरकार एवं देश के नागरिकों के मध्य संबंध स्थापित करता है।
  • संविधान की परिभाषा
    • संविधान एक लिखित दस्तावेज़ है जो किसी देश की शासन व्यवस्था की आधारशिला होता है
    • जिसमें राज्य के सभी अंगों की संरचना, शक्तियों का विभाजन, मौलिक अधिकार, नीतिगत दिशानिर्देश और नागरिकों के कर्तव्य शामिल होते हैं।
    • भारत का संविधान विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है, जो 26 नवंबर 1949 को अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ
    • यह संघीय ढांचे के साथ संसदीय प्रणाली को स्थापित करता है। यह न केवल सरकार के अंगों को परिभाषित करता है
    • बल्कि शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत को लागू कर प्रत्येक अंग पर नियंत्रण सुनिश्चित करता है।​
  • सरकार के अंगों की रूपरेखा
    • भारतीय संविधान के अनुसार सरकार के तीन मुख्य अंग हैं: विधायिका (संसद और राज्य विधानसभाएं), कार्यपालिका (राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद) तथा न्यायपालिका (सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय)।
    • विधायिका कानून बनाती है, कार्यपालिका उन्हें लागू करती है, जबकि न्यायपालिका विवादों का निपटारा करती है तथा संविधान की रक्षा करती है।
    • यह त्रि-स्तरीय व्यवस्था (केंद्र, राज्य और स्थानीय) को भी समाहित करती है, जिसमें 73वें और 74वें संशोधन ने पंचायतों और नगरपालिकाओं को संवैधानिक मान्यता दी।​
  • प्रमुख विशेषताएं और कार्य
    • संविधान की सर्वोच्चता सुनिश्चित करता है, जिसमें मौलिक अधिकार, नीति-निर्देशक तत्व और मौलिक कर्तव्य शामिल हैं
    • स्वतंत्र निकाय जैसे निर्वाचन आयोग, CAG और UPSC की स्थापना करता है। यह एकीकृत न्यायपालिका की व्यवस्था करता है
    • जहां सर्वोच्च न्यायालय शीर्ष पर है। शक्तियों का विभाजन संघ और राज्यों के बीच सूचियों (संघ, राज्य, समवर्ती) के माध्यम से होता है
    • जो एकात्मकता के साथ संघीय संतुलन बनाए रखता है।

13. भारत में सरकार के तीन स्तर कौन-से हैं? [MTS (T-I) 08 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) संघ सरकार, राज्य सरकार और स्थानीय सरकार
Solution:
  • भारत में शासन के तीन स्तर संघ सरकार, राज्य सरकार और स्थानीय सरकार हैं। संघ सरकार राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करती है
  • राज्य सरकार राज्य स्तर पर कार्य करती है और स्थानीय सरकार ग्राम या नगर स्तर पर कार्य करती है।
  • केंद्र सरकार
    • केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करती है और पूरे देश के हितों की रक्षा करती है। इसका मुखिया प्रधानमंत्री होता है
    • जो लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल या गठबंधन के नेता के रूप में चुना जाता है। यह सरकार विदेश नीति, रक्षा, मुद्रा, रेलवे और संचार जैसी विषयों पर कानून बनाती है।​
  • राज्य सरकार
    • राज्य सरकार राज्य स्तर पर संचालित होती है और राज्य के स्थानीय मुद्दों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और कानून-व्यवस्था का प्रबंधन करती है।
    • इसका प्रमुख मुख्यमंत्री होता है, जो विधानसभा चुनावों के बाद चुना जाता है। भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची में केंद्र, राज्य और समवर्ती सूचियों के माध्यम से शक्तियों का विभाजन किया गया है।​
  • स्थानीय सरकार
    • स्थानीय सरकार तीसरा स्तर है, जो ग्रामीण (पंचायती राज) और शहरी (नगर निगम, नगर पालिका) क्षेत्रों में कार्य करती है।
    • 73वें और 74वें संविधान संशोधन (1992) ने इन्हें संवैधानिक दर्जा दिया, जिसमें ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद शामिल हैं।
    • यह स्तर सड़क, पानी, स्वच्छता और स्थानीय विकास पर ध्यान केंद्रित करता है, तथा महिलाओं और आरक्षित वर्गों के लिए सीटें सुनिश्चित करता है।​
  • शक्तियों का विभाजन
    • भारत एक संघीय व्यवस्था अपनाता है, जहां तीनों स्तरों के बीच शक्तियां संविधान द्वारा निर्धारित हैं।
    • केंद्र सरकार को संघीय सूची के विषय, राज्यों को राज्य सूची और दोनों को समवर्ती सूची मिलती है।
    • विवादास्पद मामलों में सर्वोच्च न्यायालय फैसला करता है, जो इस बहु-स्तरीय व्यवस्था को संतुलित रखता है।​

14. भारतीय संसदीय समूह की स्थापना किस वर्ष हुई थी? [CGL (T-I) 05 दिसंबर, 2022 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) 1949
Solution:
  • भारतीय संसदीय समूह एक स्वायत्त निकाय है, जिसका गठन 16 अगस्त, 1948 को संविधान सभा द्वारा अपनाए गए एक प्रस्ताव के अनुसरण में वर्ष 1949 में किया गया था।
  • स्थापना का पृष्ठभूमि
    • स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद 1947 में अंतर-संसदीय संघ (IPU) और राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (CPA) ने भारत से सदस्यता और अपनी शाखाओं की मांग की।
    • संविधान सभा (विधान) द्वारा 16 अगस्त 1948 को अपनाए गए प्रस्ताव के अनुसरण में 1949 में इसकी स्थापना हुई।
    • इसका उद्देश्य भारतीय सांसदों को वैश्विक संसदीय गतिविधियों में भागीदारी सुनिश्चित करना था।​
  • उद्देश्य और कार्य
    • IPG का मुख्य कार्य भारतीय संसद को IPU और CPA जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों से जोड़ना है।
    • यह सांसदों को विदेशी यात्राओं, सम्मेलनों और द्विपक्षीय संसदीय समूहों के माध्यम से वैश्विक मुद्दों पर चर्चा का अवसर प्रदान करता है।
    • लोकसभा अध्यक्ष इसके अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति उपाध्यक्ष होते हैं।​
  • महत्वपूर्ण विशेषताएं
    • यह संसद का एक गैर-राजनीतिक निकाय है जो सभी दलों के सांसदों को एकजुट करता है।
    • IPU की भारतीय शाखा के रूप में कार्य करता है और CPA की भारत शाखा के साथ समन्वय रखता है।
    • समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय संसदीय सम्मेलनों में भारत का प्रतिनिधित्व करता है।​
  • वर्तमान संदर्भ
    • IPG आज भी सक्रिय है और भारतीय लोकतंत्र को वैश्विक मंच पर मजबूत करता है। यह संसदीय कूटनीति का महत्वपूर्ण साधन है।​

15. भारतीय संविधान के अनुसार, सरकार के कितने अंग हैं? [MTS (T-I) 12 जुलाई, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) तीन
Solution:
  • भारतीय संविधान के अनुसार, सरकार के तीन अंग हैं। इन तीन अंगों में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका शामिल हैं।
  • विधायिका
    • विधायिका कानून बनाने का कार्य करती है। केंद्र में यह संसद (लोकसभा और राज्यसभा) है
    • जबकि राज्यों में विधानसभा या विधानसभा और विधान परिषद। यह निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा संचालित होती है।​
  • कार्यपालिका
    • कार्यपालिका कानूनों को लागू करने और प्रशासन चलाने के लिए जिम्मेदार है।
    • केंद्र स्तर पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद तथा राज्य स्तर पर राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद शामिल हैं।
    • राष्ट्रपति औपचारिक प्रमुख है, जबकि वास्तविक शक्तियाँ मंत्रिपरिषद के पास हैं।​
  • न्यायपालिका
    • न्यायपालिका कानूनों की व्याख्या करती है, विवादों का निपटारा करती है और संवैधानिकता की जाँच करती है।
    • सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय इसकी प्रमुख संस्थाएँ हैं, जो स्वतंत्र रूप से कार्य करती हैं। ये अंग एक-दूसरे पर Checks and Balances बनाए रखते हैं।​
    • जो कानूनों को लागू करने और प्रशासन चलाने के लिए जिम्मेदार है। यह दो मुख्य प्रकार की होती है
    • राजनीतिक कार्यपालिका (प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद) और स्थायी कार्यपालिका (नौकरशाही)।​
  • घटक
    • केंद्र स्तर पर: राष्ट्रपति (औपचारिक प्रमुख), उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद (वास्तविक कार्यकारी), अटॉर्नी जनरल।
    • राज्य स्तर पर: राज्यपाल (औपचारिक प्रमुख), मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद, महाधिवक्ता।
    • स्थायी: IAS, IPS जैसे सिविल सेवक जो नीतियों को अमल में लाते हैं।​
  • शक्तियाँ
    • कार्यपालिका की प्रमुख शक्तियाँ विधायी, प्रशासनिक, वित्तीय, सैन्य और कूटनीतिक हैं।
    • ये शक्तियाँ मंत्रिपरिषद के पास केंद्रित हैं, जो लोकसभा के प्रति उत्तरदायी है। उदाहरणस्वरूप, आपातकाल घोषित करना, संधियाँ करना और बजट प्रस्तुत करना।​

16. आधुनिक भारतीय भाषाओं का दूसरा सबसे बड़ा परिवार कौन-सा है? [MTS (T-I) 12 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) द्रविड़ियन (द्रविड़)
Solution:
  • आधुनिक भारतीय भाषाओं का दूसरा सबसे बड़ा परिवार द्रविड़ियन (द्रविड़) है। इस परिवार की सदस्य भाषाएं अधिकतर दक्षिण भारत में बोली जाती हैं।
  • इस परिवार का सबसे बड़ा सदस्य तमिल भाषा है, जो तमिलनाडु में बोली जाती है।
  • प्रमुख भाषा परिवार
    • भारत में भाषाओं को चार मुख्य परिवारों में वर्गीकृत किया जाता है, जिनमें सबसे बड़ा इंडो-यूरोपीय (भारोपीय या आर्य) परिवार है
    • जिसमें हिंदी, बंगाली, मराठी, गुजराती, पंजाबी आदि शामिल हैं। द्रविड़ परिवार दूसरा सबसे बड़ा है
    • जो लगभग 25% भारतीय आबादी द्वारा बोला जाता है। ऑस्ट्रिक (निषाद) और सिनो-तिब्बती (किराता) परिवार तीसरे और चौथे स्थान पर हैं।​
  • द्रविड़ परिवार की विशेषताएँ
    • द्रविड़ भाषाएँ दक्षिणी और मध्य भारत, श्रीलंका, पाकिस्तान, नेपाल तथा बांग्लादेश के कुछ भागों में बोली जाती हैं।
    • इनमें agglutinative संरचना प्रमुख है, अर्थात् शब्दों में प्रत्यय जोड़कर अर्थ बदला जाता है।
    • तमिल इस परिवार की सबसे पुरानी और शुद्ध भाषा मानी जाती है, जबकि तेलुगु संख्यात्मक दृष्टि से सबसे बड़ी है।​
  • प्रमुख भाषाएँ और वितरण
    • तमिल: तमिलनाडु की राजभाषा, लगभग 7 करोड़ से अधिक वक्ता।
    • तेलुगु: आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में प्रचलित, 8 करोड़ से अधिक बोलने वाले।
    • कन्नड़: कर्नाटक की मुख्य भाषा।
    • मलयालम: केरल में बोली जाती, द्रविड़ परिवार की सबसे छोटी प्रमुख भाषा।
  • अन्य विवरण
    • द्रविड़ भाषाओं की उत्पत्ति प्रागैतिहासिक है और इनका इंडो-यूरोपीय परिवार से कोई संबंध नहीं।
    • ये भाषाएँ साहित्यिक रूप से समृद्ध हैं, जैसे तमिल का संगम साहित्य। कुल मिलाकर, द्रविड़ परिवार भारत की भाषाई विविधता का महत्वपूर्ण अंग है।​
  • उद्गम और प्रारंभिक विकास
    • द्रविड़ भाषाएँ मूल रूप से दक्षिणी भारत, विशेषकर गोदावरी नदी के ऊपरी भाग को अपना प्रोटो-होमलैंड मानती हैं।
    • अध्ययनों से पता चलता है कि 500 ईसा पूर्व के आसपास प्रोटो-उत्तरी, प्रोटो-केन्द्रीय और प्रोटो-दक्षिणी द्रविड़ में विभेदन हुआ।
    • ब्राहुई भाषा (पाकिस्तान में बोली जाने वाली) इस परिवार की उत्तर की ओर फैलाव को दर्शाती है।
    • पौराणिक कथाओं में कुमारी कंडम (कुरी खंडम) को जन्मस्थान कहा जाता है, लेकिन वैज्ञानिक रूप से सिन्धु घाटी या दक्षिण भारत ही प्रमुख हैं।​
  • ऐतिहासिक प्रसार
    • आर्य आगमन से पूर्व द्रविड़ भाषाएँ संभवतः पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में प्रचलित थीं
    • लेकिन इंडो-आर्यन भाषाओं के प्रभाव से ये मुख्यतः दक्षिण की ओर सिमट गईं। तमिल सबसे प्राचीन साहित्यिक रूप है
    • जिसका संगम साहित्य 2000 वर्ष से अधिक पुराना है। 7वीं शताब्दी में "द्रविड़" शब्द का प्रथम प्रयोग कुमारिल भट्ट की रचना में तमिल तक सीमित था
    • जबकि आधुनिक वर्गीकरण 19वीं शताब्दी में फ्रांसिस व्हिटनी बाउटलर द्वारा हुआ।​
  • प्रमुख विशेषताएँ और सबूत
    • यह परिवार agglutinative व्याकरण वाला है, जिसमें ध्वन्यात्मक समानताएँ जैसे कंठ्य नासिका ध्वनियाँ प्रोटो-द्रविड़ से विकसित हुईं।
    • ब्राहुई और कुरुख जैसी भाषाएँ उत्तर तथा मध्य भारत/नेपाल में इसके अवशेष हैं। कुल 80 से अधिक भाषाएँ, जिनमें 250 मिलियन वक्ता हैं।

17. प्रतिस्पर्धा (संशोधन) विधेयक, 2022 का उद्देश्य लेन-देन के मूल्य के आधार पर विलय और अधिग्रहण को विनियमित करना हैं और यह कहता है कि 2,000 करोड़ रु. से अधिक के सौदे मूल्य वाले किसी भी लेन-देन के लिए भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की स्वीकृति (approval) आवश्यक होगी। मंजूरी में तेजी लाने के लिए, प्रस्तावित कानून यह भी कहता है कि सीसीआई (CCI) के लिए इस तरह के लेन-देन पर आदेश पारित करने की समय सीमा 210 कार्य दिवसों से घटाकर ....... दिवस कर दी जाएगी। [MTS (T-I) 02 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) 150
Solution:
  • प्रतिस्पर्धा (संशोधन) विधेयक [The Competition (Amend- ment) Bill], 2022 का उद्देश्य लेन-देन के मूल्य के आधार पर विलय और अधिग्रहण को विनियमित करना है
  • यह कहता है कि 2,000 करोड़ रु. से अधिक के सौदे मूल्य वाले किसी भी लेन-देन के लिए भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की स्वीकृति आवश्यक होगी।
  • मंजूरी में तेजी लाने के लिए, प्रस्तावित कानून यह भी कहता है कि सीसीआई (CCI) के लिए इस तरह के लेन-देन पर आदेश पारित करने की समय सीमा 210 कार्य दिवसों से घटाकर 150 दिवस कर दी जाएगी।
  • समय सीमा में कमी
    • मंजूरी प्रक्रिया को तेज करने के लिए विधेयक CCI को ऐसे लेन-देन पर आदेश पारित करने की समय सीमा 210 कार्य दिवसों से घटाकर 150 कार्य दिवस कर देता है।
    • यह बदलाव विलय-अधिग्रहण की प्रक्रिया को सुगम बनाता है, जिससे व्यवसायों को जल्दी निर्णय मिल सके।
    • पहले चरण की प्रारंभिक समीक्षा की समय सीमा भी 30 कार्य दिवसों से घटाकर 30 कैलेंडर दिवस कर दी गई है।​
  • प्रमुख प्रावधान
    • सौदा मूल्य सीमा: 2,000 करोड़ रुपये से अधिक के किसी भी अधिग्रहण, विलय या समामेलन के लिए CCI को सूचित करना जरूरी
    • भले ही संपत्ति या टर्नओवर सीमा न हो।
    • डील वैल्यू थ्रेशोल्ड: यह विशेष रूप से डिजिटल और तकनीकी क्षेत्रों के 'किलर एक्विजिशन' को रोकने के लिए डिजाइन किया गया
    • जहां स्टार्टअप्स का मूल्यांकन उच्च होता है।​
    • अन्य बदलाव: कुछ अपराधों को डिक्रिमिनलाइज किया गया, जुर्माने बढ़ाए गए, और CCI के पास स्टैंडस्टिल ऑर्डर जारी करने की शक्ति मजबूत की गई।​
  • पृष्ठभूमि और प्रभाव
    • यह विधेयक 2023 में अधिनियम के रूप में पारित हुआ, जो बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करता है।
    • पहले अधिनियम में केवल संपत्ति/टर्नओवर आधार था, जो डिजिटल बाजारों में अप्रभावी था।
    • अब बिग टेक कंपनियों जैसे गूगल, फेसबुक के सौदों पर बेहतर नजर रखी जा सकेगी।​
  • कार्यान्वयन स्थिति
    • अधिनियम 18 मई 2023 से लागू हो चुका है, और CCI ने इसके तहत कई नोटिफिकेशन जारी किए हैं।
    • इससे M&A सौदों में पारदर्शिता बढ़ी है, लेकिन छोटे सौदों पर अनावश्यक बोझ की आशंका भी है।​

18. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत में एक संवैधानिक निकाय नहीं है? [Phase-XI 28 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) राज्य मानवाधिकार आयोग
Solution:
  • राज्य मानवाधिकार आयोग एक गैर-संवैधानिक निकाय है, जबकि 'संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोग' (अनुच्छेद 315), भारतीय निर्वाचन आयोग (अनुच्छेद 324) संवैधानिक संस्थाएं हैं।
  • भारतीय संविधान में संवैधानिक निकाय वे हैं जो सीधे संविधान के अनुच्छेदों के तहत स्थापित होते हैं
  • जैसे चुनाव आयोग (अनुच्छेद 324), CAG (अनुच्छेद 148), UPSC (अनुच्छेद 315) आदि।
  • ये निकाय स्वतंत्रता, निष्पक्षता और संवैधानिक सुरक्षा के साथ कार्य करते हैं। सांविधिक निकाय संसदीय अधिनियमों से बने होते हैं
  • जैसे भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) जो प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के तहत स्थापित है।​
  • CCI का दर्जा
    • CCI एक सांविधिक (statutory) निकाय है, न कि संवैधानिक। यह कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के अधीन कार्य करता है
    • बाजार में प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए विलय-अधिग्रहण, एकाधिकार आदि की जांच करता है। इसका गठन संसद द्वारा पारित कानून से हुआ, संविधान से नहीं।​
  • प्रमुख संवैधानिक निकाय
    • चुनाव आयोग: स्वतंत्र चुनाव कराने के लिए।
    • संघ लोक सेवा आयोग: सिविल सेवाओं की भर्ती।
    • नियंत्रक एवं महालेखाकार: सरकारी खातों की ऑडिट।
    • वित्त आयोग: केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध।
      CCI इनमें से कोई नहीं है।​
  • अन्य उदाहरण
    • सांविधिक निकायों में SEBI, TRAI, CCI शामिल हैं, जबकि संवैधानिक निकाय सीमित हैं।
    • प्रश्न के संदर्भ में CCI भारत में संवैधानिक निकाय नहीं है।​

19. भारत में निम्नलिखित में से कौन-सा एक संवैधानिक निकाय नहीं है? [Phase-XI 28 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
Solution:
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग एक गैर-संवैधानिक (सांविधिक) निकाय है, इसका गठन 12 अक्टूबर, 1993 को किया गया।
  • जबकि वित्त आयोग (अनुच्छेद 280), राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (अनुच्छेद 338) तथा संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोग (अनुच्छेद 315) संवैधानिक निकाय हैं।
  • भारत में संवैधानिक निकाय वे संस्थाएं हैं जिनका उल्लेख भारतीय संविधान में स्पष्ट रूप से किया गया है
  • इनकी स्थापना तथा कार्यप्रणाली संविधान के अनुच्छेदों द्वारा नियंत्रित होती है। उपयोगकर्ता के प्रश्न में विकल्पों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है
  • लेकिन सामान्यतः इस प्रकार के प्रश्नों में योजना आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग या राष्ट्रीय महिला आयोग जैसे गैर-संवैधानिक निकायों को शामिल किया जाता है
  • क्योंकि ये संसद द्वारा पारित अधिनियमों के माध्यम से स्थापित होते हैं, न कि संविधान द्वारा।​
  • प्रमुख संवैधानिक निकाय
    • संवैधानिक निकायों में चुनाव आयोग (अनुच्छेद 324), संघ लोक सेवा आयोग (अनुच्छेद 315-323), वित्त आयोग (अनुच्छेद 280), नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (अनुच्छेद 148), राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (अनुच्छेद 338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (अनुच्छेद 338A) और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (अनुच्छेद 338B) शामिल हैं।
    • ये निकाय स्वतंत्रता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, तथा इन्हें हटाने या बदलने के लिए संविधान संशोधन आवश्यक होता है।
    • इनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और ये सरकार के विभिन्न कार्यों में जांच व संतुलन की भूमिका निभाते हैं।​
  • गैर-संवैधानिक निकाय के उदाहरण
    • योजना आयोग (1950 में कैबिनेट प्रस्ताव द्वारा स्थापित, बाद में नीति आयोग में परिवर्तित) एक प्रमुख गैर-संवैधानिक निकाय था
    • क्योंकि इसका कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं था। इसी प्रकार, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993), राष्ट्रीय महिला आयोग (राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990) और भाषाई अल्पसंख्यक आयोग संसदीय अधिनियमों द्वारा बने हैं।
    • ये वैधानिक निकाय कहलाते हैं और संविधान में इनका प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं होता, जिससे इन्हें अपेक्षाकृत कम स्थायित्व प्राप्त होता है।​
  • अंतर की तुलना
    • यदि प्रश्न के विकल्प दिए जाते, जैसे नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, राष्ट्रीय भाषाई अल्पसंख्यक आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, तो सही उत्तर "राष्ट्रीय भाषाई अल्पसंख्यक आयोग" या "राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग" होता, क्योंकि ये वैधानिक हैं।​

20. जब कई राजनीतिक पार्टियां एक आम सहमति कार्यक्रम के एजेंडे के आधार पर सरकार बनाने और राजनीतिक शक्ति का प्रयोग करने के लिए हाथ मिलाती हैं, तो इसे क्या कहा जाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 22 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) गठबंधन सरकार
Solution:
  • जब कई राजनीतिक पार्टियां एक आम सहमति कार्यक्रम के एजेंडे के आधार पर सरकार बनाने और राजनीतिक शक्ति का प्रयोग करने के लिए हाथ मिलाती हैं
  • तो उसे गठबंधन सरकार कहा जाता है।
  • गठबंधन सरकार की परिभाषा
    • गठबंधन सरकार वह सरकार होती है जिसमें दो या अधिक राजनीतिक दल मिलकर विधानसभा या संसद में बहुमत जुटाते हैं
    • एक साझा न्यूनतम कार्यक्रम (कॉमन मिनिमम प्रोग्राम) पर आधारित नीतियां लागू करते हैं।
    • यह आमतौर पर बहुदलीय प्रणाली वाले देशों जैसे भारत में देखने को मिलती है
    • जहां कोई दल अकेले बहुमत न ला सके। गठबंधन के सदस्य दल अपनी वैचारिक मतभेदों को दरकिनार कर सत्ता साझा करते हैं
    • जिससे सरकार चलाने के लिए निरंतर समन्वय की जरूरत पड़ती है।​
  • गठबंधन सरकार का गठन कैसे होता है
    • चुनाव पूर्व गठबंधन: पार्टियां चुनाव से पहले ही हाथ मिला लेती हैं, संयुक्त घोषणापत्र जारी करती हैं
    • वोट बांटने से बचती हैं। इससे मतदाताओं को एकजुट अपील करने में आसानी होती है।
    • चुनाव पश्चात गठबंधन: चुनाव परिणाम आने के बाद दल बहुमत जुटाने के लिए गठबंधन बनाते हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि कोई गठबंधन को कुल सीटों का बहुमत मिले, तो उसका नेता सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाता है।
    • गठबंधन दलों के बीच लिखित या मौखिक समझौता होता है, जिसमें मंत्रालयों का बंटवारा, नीतिगत प्राथमिकताएं और समर्थन की गारंटी शामिल होती है।​
  • विशेषताएं और महत्व
    • गठबंधन सरकारें विविधता को प्रतिबिंबित करती हैं और छोटे दलों को सत्ता में भागीदारी का मौका देती हैं।
    • न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर आधारित होने से नीतियां सर्वसम्मति वाली बनती हैं, जो अत्यधिक ध्रुवीकरण रोकती हैं।
    • हालांकि, इनमें स्थिरता की कमी हो सकती है क्योंकि कोई साझेदार दल समर्थन वापस ले सकता है।
    • भारत में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस (यूपीए) इसके प्रमुख उदाहरण हैं।​
  • फायदे और नुकसान
    • फायदे: बहुलवाद को बढ़ावा, नीतिगत समझौता, क्षेत्रीय दलों की आवाज मजबूत। राष्ट्रीय संकट (जैसे युद्ध) में एकजुटता प्रदान करती हैं।
    • नुकसान: निर्णय लेने में देरी, आंतरिक कलह, अल्पकालिकता। कभी-कभी सत्ता के लोभ में वैचारिक समझौता करना पड़ता है।
      भारतीय संदर्भ में 1989 के बाद गठबंधन राजनीति प्रमुख हो गई, जब कांग्रेस का एकछत्र वर्चस्व समाप्त हुआ।​