विविध (भारतीय राजव्यवस्था) भाग-I

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21. भारत के संविधान के निम्नलिखित में से किस प्रावधान के लिए संसद के विशेष बहुमत और राज्यों की सहमति की आवश्यकता होती है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 22 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) राष्ट्रपति के चुनाव
Solution:
  • राष्ट्रपति चुनाव के प्रावधानों में संशोधन के लिए संसद के प्रत्येक सदन में विशेष बहुमत एवं आधे से अधिक राज्यों की विधानमंडलों का साधारण बहुमत भी होना अनिवार्य है।
  • प्रस्ताव पारित होने के पश्चात उसे राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाता है
  • राष्ट्रपति द्वारा विधेयक पर हस्ताक्षर होने पर वह संविधान संशोधन हो जाता है।
  • निम्नलिखित प्रावधानों में संशोधन हेतु उपर्युक्त प्रक्रिया अनिवार्य है।
    • अनुच्छेद 54 - राष्ट्रपति का निर्वाचन
    • अनुच्छेद 55 - राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया
    • अनुच्छेद 73 - संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार
    • अनुच्छेद 162 - राज्य की कार्यपालिका की शक्तियां इत्यादि।
    • वे मुख्य रूप से संघीय ढांचे से जुड़े हैं। इनमें राष्ट्रपति का निर्वाचन, संघ राज्य का क्षेत्रीय विस्तार या पुनर्गठन
    • उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की शक्तियां शामिल हैं।​
  • विशेष बहुमत की परिभाषा
    • विशेष बहुमत का अर्थ है संसद के प्रत्येक सदन में कुल सदस्यता का 50% से अधिक और उपस्थित-मतदान करने वालों का 2/3 बहुमत।
    • सामान्य संविधान संशोधनों के लिए केवल यही पर्याप्त होता है, लेकिन कुछ संशोधनों में राज्यों की मंजूरी अनिवार्य है ताकि संघीय संतुलन बना रहे।
    • अनुच्छेद 368 यह प्रक्रिया नियंत्रित करता है, जिसमें विधेयक दोनों सदनों से पारित होने के बाद राज्यों को भेजा जाता है।​​
  • राज्यों की सहमति वाले प्रमुख प्रावधान
    • अनुच्छेद 54-55 (राष्ट्रपति निर्वाचन): राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया में बदलाव।
    • अनुच्छेद 367 (संघ/राज्य क्षेत्र): नए राज्य बनाना, सीमाएं बदलना या नाम परिवर्तन।
    • अनुच्छेद 241 (अंडमान-निकोबार, दादरा-नागर हवेली आदि के प्रशासन)।
    • अनुच्छेद 246 (संघ, राज्य, समवर्ती सूचियां): विधायी शक्तियों का पुनर्वितरण।
    • अुच्छेद 263 (संघ राज्य समिति), अनुच्छेद 279A (जीएसटी परिषद), अनुच्छेद 312 (अखिल भारतीय सेवाएं)।
    • इनमें संशोधन के बाद आधे राज्यों की विधानसभाओं से साधारण बहुमत से अनुमोदन जरूरी।​
  • प्रक्रिया और उदाहरण
    • संशोधन विधेयक लोकसभा/राज्यसभा में पेश होता है, विशेष बहुमत से पारित। फिर राज्यों को 6 माह भेजा जाता है।
    • 42वें संशोधन (1976) ने कुछ प्रावधानों को राज्यों की सहमति से बाहर रखने की कोशिश की
    • लेकिन मिनर्वा मिल्स मामले (1980) में सुप्रीम कोर्ट ने संघीय प्रावधानों की रक्षा की। जीएसटी संशोधन (101वां, 2016) इसका उदाहरण है।​
  • महत्व और चुनौतियां
    • यह व्यवस्था संघवाद को मजबूत करती है, क्योंकि राज्यों की बिना सहमति केंद्र अकेला बड़ा बदलाव नहीं कर सकता।
    • हालांकि, राजनीतिक गतिरोध से संशोधन रुक सकते हैं। कुल 106 संशोधन हुए, जिनमें से कुछ (जैसे 7वां, 1992 का 73-74वां) राज्यों की मंजूरी के बाद ही लागू।​

22. भारत के संविधान में सरकार के कितने स्तरों का उल्लेख किया गया है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) तीन
Solution:
  • भारत में शासन के तीन स्तर केंद्र सरकार, राज्य सरकार और स्थानीय सरकार हैं। केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करती है
  • राज्य सरकार राज्य स्तर पर कार्य करती है और स्थानीय सरकार ग्राम या नगर स्तर पर कार्य करती है।
  • केंद्र सरकार
    • केंद्र सरकार पूरे राष्ट्र के शासन के लिए उत्तरदायी है और सातवीं अनुसूची की संघ सूची के विषयों जैसे रक्षा, विदेश नीति और मुद्रा पर कानून बनाती है।
    • इसका नेतृत्व राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री करते हैं, जिसमें संसद विधायी शक्तियां संभालती है। यह स्तर राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा सुनिश्चित करता है।​
  • राज्य सरकारें
    • राज्य सरकारें राज्य-विशिष्ट मुद्दों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि पर शासन करती हैं
    • जो सातवीं अनुसूची की राज्य सूची में आते हैं। प्रत्येक राज्य में राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में विधानसभा कार्य करती है।
    • समवर्ती सूची के विषयों पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं।​
  • स्थानीय सरकारें
    • मूल संविधान में स्थानीय स्तर का स्पष्ट उल्लेख नहीं था, लेकिन 1992 के 73वें संशोधन ने पंचायती राज संस्थाओं (भाग IX, अनुच्छेद 243-243O) और 74वें संशोधन ने नगरपालिकाओं (भाग IXA, अनुच्छेद 243P-243ZG) को संवैधानिक दर्जा दिया।
    • ये ग्रामीण और शहरी स्थानीय आवश्यकताओं जैसे जल आपूर्ति, स्वच्छता और विकास योजनाओं का प्रबंधन करती हैं।
    • यह तीसरा स्तर जनता को सीधे शक्ति प्रदान करता है।​
  • शक्तियों का विभाजन
    • संविधान की सातवीं अनुसूची संघ सूची (97 विषय), राज्य सूची (66 विषय) और समवर्ती सूची (47 विषय) के माध्यम से शक्तियों का स्पष्ट विभाजन करता है।
    • केंद्र को वित्तीय श्रेष्ठता प्राप्त है, लेकिन राज्य स्वायत्तता बनाए रखते हैं।
    • विवादों का निपटारा सर्वोच्च न्यायालय करता है। यह व्यवस्था संघीय ढांचे को मजबूत बनाती है।

23. छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा में जनजातीय कल्याण मंत्रियों को ....... द्वारा नियुक्त किया जाता है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर (III-पाली), 03 दिसंबर 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) राज्यपाल
Solution:
  • छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा में जनजातीय कल्याण मंत्रियों को राज्यपाल (मुख्यमंत्री की सलाह पर) द्वारा नियुक्त किया जाता है।
  • राज्यपाल द्वारा नियुक्ति
    • यह प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(1) के तहत लागू होता है
    • जो इन राज्यों में जनजातीय कल्याण के लिए विशेष रूप से एक मंत्री की व्यवस्था करता है।
    • राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर इस नियुक्ति को औपचारिक रूप देता है, लेकिन संवैधानिक रूप से यह उसकी जिम्मेदारी है।​
  • संवैधानिक आधार
    • मूल रूप से यह प्रावधान बिहार, मध्य प्रदेश और ओडिशा के लिए था, लेकिन 94वें संविधान संशोधन अधिनियम (2006) द्वारा बिहार को इससे बाहर कर दिया गया।
    • छत्तीसगढ़ और झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद यह चार राज्यों—छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा—पर लागू हो गया।
    • यह मंत्री जनजातीय कल्याण के अलावा अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों के कल्याण का भी प्रभार संभाल सकता है।​
  • नियुक्ति प्रक्रिया
    • राज्यपाल को इन मंत्रियों की नियुक्ति और बर्खास्तगी का अधिकार प्राप्त है, जो मुख्यमंत्री की सिफारिश पर आधारित होता है।
    • मुख्यमंत्री राज्य सरकार का वास्तविक प्रमुख होता है और वह मंत्रिमंडल गठन में सलाहकार की भूमिका निभाता है
    • लेकिन अंतिम स्वीकृति राज्यपाल की होती है। यह व्यवस्था इन राज्यों में बड़ी जनजातीय आबादी को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है
    • जहां अनुसूचित जनजातियां महत्वपूर्ण हैं।​
  • अन्य विकल्पों का खंडन
    • मुख्यमंत्री नियुक्ति की सलाह देता है, लेकिन स्वयं नियुक्त नहीं करता।
    • प्रधानमंत्री का इससे कोई सीधा संबंध नहीं है, क्योंकि यह राज्य स्तर का मामला है।
    • आदिवासी विकास परिषद केवल सलाहकारी भूमिका निभाती है और नियुक्ति का अधिकार नहीं रखती।​
  • महत्वपूर्ण भूमिका
    • ये मंत्री राज्य में जनजातीय समुदायों की नीतियों, विकास कार्यक्रमों और कल्याण योजनाओं का प्रबंधन करते हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, छत्तीसगढ़ में आदिवासी मंत्रणा परिषद जैसी संस्थाएं नीतिगत सलाह देती हैं
    • लेकिन नियुक्ति राज्यपाल के हाथ में रहती है। यह प्रणाली जनजातीय हितों की रक्षा सुनिश्चित करती है।​

24. निम्नलिखित में से कौन-सी भारतीय संविधान की एक मुख्य विशेषता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) यह दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है।
Solution:
  • भारतीय संविधान की मुख्य विशेषता उसका दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान होना है।
  • यह विभिन्न देशों के संविधानों से प्रेरित होकर तैयार किया गया है। इसमें कठोरता और लचीलापन दोनों का अनूठा मिश्रण मौजूद है।​
  • संघीय संरचना
    • संविधान भारत को संघीय ढांचा प्रदान करता है, जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का स्पष्ट विभाजन है।
    • हालांकि, इसमें एकात्मक विशेषताएं भी हैं, जैसे एकल नागरिकता और एकीकृत न्यायपालिका। आपातकालीन प्रावधानों से केंद्र की शक्तियां बढ़ जाती हैं।​
  • संसदीय प्रणाली
    • कार्यपालिका विधायिका के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी है, जो ब्रिटिश मॉडल पर आधारित है।
    • राष्ट्रपति नाममात्र का प्रमुख होता है, जबकि वास्तविक शक्ति प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास रहती है।
    • सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार सभी नागरिकों को समान मतदान का अधिकार देता है।​
  • मौलिक अधिकार और निर्देशक सिद्धांत
    • भाग III में छह मौलिक अधिकार सुनिश्चित किए गए हैं, जिनकी रक्षा सर्वोच्च न्यायालय करता है।
    • राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांत सामाजिक-आर्थिक न्याय के लिए मार्गदर्शक हैं, हालांकि वे विधायी रूप से बाध्यकारी नहीं हैं।
    • धर्मनिरपेक्षता सभी धर्मों को समान सम्मान देती है।​
  • स्वतंत्र न्यायपालिका
    • एकीकृत न्यायपालिका संविधान की संरक्षक है, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय शीर्ष पर है।
    • यह न्यायिक समीक्षा के माध्यम से कानूनों की संवैधानिकता जांचती है।
    • मौलिक कर्तव्य नागरिकों की जिम्मेदारियां निर्धारित करते हैं।

25. निम्नलिखित में से कौन-सा जोड़ा गलत है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) भाग II - मौलिक कर्तव्य
Solution:
  • सही सुमेलन है -
भागविषय
A. VIIIकेन्द्रशासित प्रदेश
B. IIनागरिकता
C. Iसंघ और उसका राज्य क्षेत्र
D. IIIमौलिक अधिकार
  • गलत जोड़ा
    • सूरजमुखी - सम्पुट यह जोड़ा गलत है। सूरजमुखी (Helianthus annuus) का फल सायकोनियम (Cypsela) होता है, न कि सम्पुट। सम्पुट फल के उदाहरण कपास और धतूरा हैं।​​
  • अन्य जोड़ों की पुष्टि
    • अमरूद एक बहबीजी बेरी फल है, जिसमें कई बीज अंदर विकसित होते हैं। आम एक अस्थि फल (ड्रूप) है
    • जिसमें बाहरी मांसल भाग और कठोर गुठली होती है। अनन्नास एक सोरोसिस फल है, जो कई फूलों के संलयन से बनता है। ये सभी जोड़े सही हैं।​​
  • विस्तृत वर्गीकरण
    • फल वर्गीकरण में बेरी (जैसे टमाटर, अमरूद), अस्थि फल (जैसे आड़ू, आम), सोरोसिस (जैसे अनन्नास, अंजीर) और सम्पुट (जैसे धतूरा) शामिल हैं।
    • सूरजमुखी का सायकोनियम एक प्रकार का शुष्क फल है, जिसमें बीज अलग रहता है।​
  • अमरूद – बेरी (सही जोड़ा)
    • अमरूद का फल रसीला, पतली बाहरी त्वचा वाला और अंदर अनेक बीजों से भरा होता है, जो बेरी (Berry) की मुख्य विशेषता है।
    • बेरी फल में बीज पूरा गूदे में डूबे होते हैं, जैसे अमरूद, टमाटर, अंगूर आदि, इसलिए “अमरूद – बेरी” जोड़ा सही है।
  • आम – अस्थि फल (ड्रूप) (सही जोड़ा)
    • आम के फल में तीन भाग स्पष्ट होते हैं – बाहरी मृदु छिलका (एपिकर्प), बीच में रसदार गूदा (मेसोकार्प) और अंदर कठोर गुठली (एंडोकार्प) जिसमें बीज होता है
    • यह संरचना अस्थि फल की पहचान है।
    • इस प्रकार जिन फलों में बाहर गूदा और भीतर कठोर गुठली हो, उन्हें ड्रूप/अस्थि फल कहा जाता है, जैसे आम, आड़ू, बेर आदि, इसलिए “आम – अस्थि फल” जोड़ा सही है।
  • अनन्नास – सोरोसिस (सही जोड़ा)
    • अनन्नास का फल एक-एक फूल का नहीं, बल्कि पूरी पुष्पक्रम (inflorescence) के अनेक छोटे-छोटे फूलों के आपस में मिल जाने से बनता है
    • ऐसे संयुक्त फल को सोरोसिस (sorosis) कहा जाता है।
    • अनन्नास में पूरी पुष्पधुरी, पुष्पदल और फल एक ही ठोस संरचना बनाते हैं, इस वजह से “अनन्नास – सोरोसिस” जोड़ा सही माना जाता है।
  • सूरजमुखी – सम्पुट (गलत जोड़ा, सही क्या है?)
    • सूरजमुखी के पुष्पक्रम में जो “बीज” दिखते हैं वे वास्तव में सायकोनियम (cypsela) प्रकार के सूखे फल होते हैं, न कि सम्पुट (capsule)।
    • सम्पुट फल वे होते हैं जो पकने पर ऊपर या किनारों से फटकर बीज निकालते हैं
    • (जैसे धतूरा, कपास), जबकि सूरजमुखी के फल नहीं फटते, इसीलिए “सूरजमुखी – सम्पुट” जोड़ा गलत है
    • इसकी जगह “सूरजमुखी – सायकोनियम (Cypsela)” सही होगा।

26. ....... को यह निर्देश देने का अधिकार है कि संसद का अधिनियम राज्य में अनुसूचित क्षेत्र पर लागू नहीं होता है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) राज्यपाल
Solution:
  • अनुच्छेद 244(1) के अधीन संविधान की पांचवीं अनुसूची, अनुसूचित क्षेत्रों की विशेष समस्याओं के लिए विधान हेतु विशेष उपबंधों की व्यवस्था करती है।
  • राज्यपाल को यह निर्देश देने का अधिकार है कि संसद का अधिनियम राज्य में अनुसूचित क्षेत्र पर लागू नहीं होता है।
  • संवैधानिक आधार
    • भारतीय संविधान की पांचवीं अनुसूची अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन एवं नियंत्रण से संबंधित है
    • जो असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम (जिनमें छठी अनुसूची लागू है) को छोड़कर अन्य राज्यों पर लागू होती है।
    • इस अनुसूची के पैराग्राफ 5(1) के तहत राज्यपाल को विशेष शक्तियां प्रदान की गई हैं
    • जिसमें संसद या राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए गए किसी भी अधिनियम को अनुसूचित क्षेत्रों पर लागू न करने या संशोधनों के साथ लागू करने का निर्देश देना शामिल है।
    • यह प्रावधान जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक, सामाजिक एवं आर्थिक विशिष्टताओं की रक्षा के लिए बनाया गया है
    • ताकि सामान्य कानून उनकी स्थानीय परिस्थितियों से मेल न खाएं।​
  • राज्यपाल की शक्तियों का विस्तार
    • राज्यपाल इस निर्देश को जनजाति सलाहकार परिषद (Tribes Advisory Council) से परामर्श के बाद जारी कर सकता है
    • जो अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए सलाह देती है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है
    • सभी केंद्रीय एवं राज्य कानून डिफ़ॉल्ट रूप से अनुसूचित क्षेत्रों पर लागू होते हैं
    • जब तक राज्यपाल द्वारा विशिष्ट अधिसूचना जारी न की जाए जो उन्हें लागू न करने या संशोधित करने का आदेश दे।
    • उदाहरणस्वरूप, मध्य प्रदेश या ओड़िशा जैसे राज्यों में राज्यपाल ने कई कानूनों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप समायोजित किया है
    • जैसे कराधान या भूमि सुधार संबंधी अधिनियम।​
  • महत्व एवं सीमाएं
    • यह शक्ति अनुसूचित क्षेत्रों में शांति, सुरक्षा एवं जनजातीय स्वायत्तता सुनिश्चित करने के लिए है
    • लेकिन राज्यपाल मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकता।
    • पांचवीं अनुसूची के पैरा 5(1) के अनुसार, राज्यपाल नए कानून नहीं बना सकता
    • केवल मौजूदा कानूनों का अनुप्रयोग नियंत्रित कर सकता है।
    • वर्तमान में भारत के 10 राज्यों (आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओड़िशा, राजस्थान और तेलंगाना) में अनुसूचित क्षेत्र घोषित हैं
    • जहां यह प्रावधान सक्रिय है।​

27. निम्नलिखित में से कौन-सी विशेषता 'समानतावादी समाज बनाने' का अर्थ बताती है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 29 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) मौलिक अधिकार
Solution:
  • 'समतावादी समाज बनाने' का अर्थ मौलिक अधिकार बताते हैं।
  • समतावादी समाज में लिंग, जाति, धर्म या आयु की परवाह किए बिना सभी को समान माना जाता है।
  • समतावादी समाज में वर्ग व्यवस्था नहीं होती है, बल्कि आय और धन तक अपेक्षाकृत समान पहुंच होती है।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • समानतावादी समाज की प्रमुख विशेषता विशेषाधिकारों का पूर्ण अंत है, जहां जन्म, जाति, लिंग, धन या पारिवारिक पृष्ठभूमि के आधार पर कोई भेदभाव न हो ।
    • सभी को व्यक्तित्व के समस्त विकास के लिए समान अवसर मिलते हैं, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे संसाधनों तक बराबर पहुंच सुनिश्चित होती है ।
    • आर्थिक शोषण की अनुपस्थिति होती है, अर्थात् धन और संसाधनों का पुनर्वितरण अमीरों से गरीबों की ओर होता है ताकि आय असमानता मिटे ।​
  • आर्थिक आधार
    • इस समाज में उत्पादन सामूहिक स्वामित्व और केंद्रीय नियोजन पर आधारित होता है जो पूंजीवाद की असमानताओं को जड़ से समाप्त करता है ।
    • प्रगतिशील कराधान, राष्ट्रीयकरण और कल्याणकारी कार्यक्रमों से धन का न्यायपूर्ण वितरण सुनिश्चित किया जाता है, जिससे सभी की मूलभूत आवश्यकताएं पूरी हों ।
    • मार्क्सवादी दृष्टि में, निजी संपत्ति का उन्मूलन कर 'योग्यतानुसार काम और आवश्यकतानुसार वितरण' का सिद्धांत लागू होता है ।​
  • सामाजिक आयाम
    • सभी व्यक्तियों को समान सामाजिक सम्मान प्राप्त होता है, और शोषण या भेदभावपूर्ण दृष्टिकोण निषिद्ध होते हैं ।
    • जाति उत्पीड़न, लिंग भेदभाव या वर्ग विभाजन जैसी कुरीतियां समाप्त हो जाती हैं, जिससे सहयोग और सामूहिक कल्याण प्रधान हो ।
    • लोकतंत्र, नागरिक स्वतंत्रताओं और समानता को सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने में एकीकृत किया जाता है ।​
  • राजनीतिक संरचना
    • शक्ति लोगों में निहित होती है, जहां समान अवसरों के साथ निर्णय-प्रक्रिया में सबकी भागीदारी सुनिश्चित होती है ।
    • मजबूत श्रमिक संघ और सामाजिक सुरक्षा जाल कमजोर वर्गों की रक्षा करते हैं । कुल मिलाकर, यह समाज व्यक्तिगत हितों पर सामूहिक हित को प्राथमिकता देता है
    • जिससे सच्ची समानता की स्थापना होती है

28. सर्वोच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार की गारंटी निम्नलिखित में से किसके द्वारा दी जाती है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) राष्ट्रपति
Solution:
  • उच्चतम न्यायालय के पास उन मामलों में विशेष परामर्शी क्षेत्राधिकार है
  • जिन्हें विशेष रूप से संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत भारत के राष्ट्रपति द्वारा भेजा जा सकता है।
  • संविधान के अनुच्छेद 317(1) और अन्य विधियों के तहत इस न्यायालय में संदर्भ या अपील के प्रावधान हैं।
  • भारत के सर्वोच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार की गारंटी संविधान के अनुच्छेद 131 से 147 तक के प्रावधानों द्वारा दी जाती है
  • जो इसे मूल, अपीलीय, सलाहकारी और अन्य विशेष शक्तियों से युक्त बनाते हैं।
  • ये प्रावधान न्यायालय को स्वतंत्र रूप से कार्य करने और संविधान की सर्वोच्चता सुनिश्चित करने की गारंटी प्रदान करते हैं ।
  • अनुच्छेद 124 न्यायाधीशों की नियुक्ति और शर्तों को निर्धारित कर स्वतंत्रता को मजबूत करता है
  • जबकि अनुच्छेद 129 इसे अभिलेख न्यायालय (Court of Record) घोषित कर उसके निर्णयों को अकाट्य बनाता है ।​
  • मूल क्षेत्राधिकार
    • अनुच्छेद 131 सर्वोच्च न्यायालय को मूल क्षेत्राधिकार प्रदान करता है
    • जिसमें केंद्र सरकार और राज्यों के बीच, या राज्यों के आपसी विवादों का सीधा निपटारा शामिल है ।
    • यह गारंटी सुनिश्चित करती है कि संघीय विवादों में न्यायालय सर्वोच्च प्राधिकारी बने, बिना उच्च न्यायालयों के माध्यम से जाए ।
    • राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति निर्वाचन विवाद भी इसी के अंतर्गत आते हैं, जो न्यायिक स्वायत्तता को मजबूत करते हैं ।​
  • अपीलीय क्षेत्राधिकार
    • अनुच्छेद 132 से 134 अपीलीय क्षेत्राधिकार की गारंटी देते हैं, जिसमें संवैधानिक, दीवानी, फौजदारी और उच्च न्यायालयों से विशेष अनुमति पर अपील शामिल है ।
    • अनुच्छेद 136 के तहत विशेष अपील अधिकार न्यायालय को व्यापक विवेक प्रदान करता है, जो सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होता है ।
    • यह व्यवस्था निचले न्यायालयों के निर्णयों की समीक्षा सुनिश्चित कर एकरूपता लाती है ।​
  • सलाहकारी और अन्य शक्तियाँ
    • अनुच्छेद 143 राष्ट्रपति को सलाहकारी राय मांगने का अधिकार देता है, जो क्षेत्राधिकार को विस्तारित करता है ।
    • नुच्छेद 32 मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए रिट जारी करने की गारंटी देता है, जबकि अनुच्छेद 142 पूर्ण न्याय के लिए व्यापक शक्तियाँ प्रदान करता है ।
    • न्यायालय अवमानना के लिए दंड (अनुच्छेद 129) और संविधान व्याख्या का अंतिम अधिकार रखता है, जो इसकी सर्वोच्चता की गारंटी है ।​
  • स्वतंत्रता की गारंटी
    • संविधान न्यायालय को कार्यपालिका से अलग रखता है, जिसमें न्यायाधीशों का कार्यकाल 65 वर्ष तक या अच्छे आचरण तक सुनिश्चित होता है ।
    • संसद द्वारा क्षेत्राधिकार सीमित करने का प्रयास (अनुच्छेद 247 के बावजूद) असंवैधानिक माना जाता है ।
    • कुल मिलाकर, ये प्रावधान सर्वोच्च न्यायालय को संविधान का संरक्षक बनाते हैं ।

29. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प भारतीय संविधान की विशेषता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) कठोर भी और लचीला भी
Solution:
  • कठोर भी और लचीला भी भारतीय संविधान की विशेषता है।
  • भारतीय संविधान की विशेषताओं पर चर्चा करते हुए, यह स्पष्ट है कि प्रश्न में दिए गए विकल्पों का उल्लेख नहीं है
  • लेकिन सामान्यतः इस प्रकार के प्रश्न बहुविकल्पीय होते हैं जहां संविधान की प्रमुख विशेषताओं जैसे संघीय ढांचा, संसदीय प्रणाली, मौलिक अधिकार आदि की पहचान की जाती है।​
  • प्रमुख विशेषताएं
    • भारतीय संविधान विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है, जिसमें वर्तमान में 25 भाग, 465 अनुच्छेद और 12 अनुसूचियां हैं।
    • यह कठोरता और लचीलेपन का अनूठा मिश्रण है, जहां कुछ प्रावधानों में संशोधन कठिन है जबकि अन्य आसान।
    • संघात्मकता के साथ एकात्मक विशेषताएं जैसे एकल नागरिकता, एकीकृत न्यायपालिका और केंद्र द्वारा राज्यपालों की नियुक्ति इसे विशिष्ट बनाती हैं।​
  • संसदीय प्रणाली
    • संविधान ब्रिटिश मॉडल पर आधारित संसदीय शासन प्रणाली अपनाता है
    • जिसमें राष्ट्रपति नाममात्र का प्रमुख और प्रधानमंत्री वास्तविक कार्यकारी होता है।
    • विधायिका के प्रति कार्यपालिका की सामूहिक जिम्मेदारी और बहुमत की सरकार इसकी आधारशिला हैं।
    • केंद्र और राज्यों दोनों में यह प्रणाली लागू है।​
  • न्यायपालिका और अधिकार
    • एकीकृत एवं स्वतंत्र न्यायपालिका संविधान की रीढ़ है, जहां सर्वोच्च न्यायालय शीर्ष पर है
    • उच्च न्यायालय राज्य स्तर पर। मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 12-35) नागरिकों को न्यायोचित हैं
    • जबकि नीति निर्देशक तत्व सामाजिक-आर्थिक न्याय सुनिश्चित करते हैं।
    • धर्मनिरपेक्षता, सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार और एकल नागरिकता भी प्रमुख हैं।​
  • अन्य अनूठी बातें
    • आपातकालीन प्रावधान संघीय से एकात्मक व्यवस्था में परिवर्तन की अनुमति देते हैं।
    • मौलिक कर्तव्य (42वें संशोधन द्वारा जोड़े गए) और पंचायती राज जैसे त्रिस्तरीय शासन इसे गतिशील बनाते हैं।
    • संविधान विभिन्न देशों से प्रेरित है, जैसे अमेरिका से मौलिक अधिकार, आयरलैंड से नीति तत्व।​

30. निम्नलिखित में से किसे संसदीय शासन प्रणाली का एक अवगुण माना जा सकता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) अस्थिर सरकार
Solution:
  • व्यापक प्रतिनिधित्व, जिम्मेदार सरकार एवं निरंकुशता को रोकना संसदीय शासन प्रणाली का गुण माना जाता है
  • परंतु अस्थिर सरकार को संसदीय प्रणाली का एक अवगुण माना जाता है।
  • संसदीय प्रणाली में सरकार सीधे तौर पर संसद, विशेषकर निचले सदन के समर्थन पर निर्भर होती है, जिससे अक्सर अस्थिरता पैदा होती है।
  • यदि सत्तारूढ़ दल संसद का विश्वास खो देता है तो बार-बार चुनाव और सरकार में परिवर्तन हो सकता है।
  • संसदीय प्रणालियों में गठबंधन सरकारें आम बात हैं, जिसके परिणामस्वरूप समझौतावादी और अस्थिर शासन हो सकता है।
  • राजनीतिक अस्थिरता दीर्घकालिक नीति नियोजन और कार्यान्वयन में चुनौतियों को जन्म दे सकती है।
    Other Information
  •  व्यापक प्रतिनिधित्वः
    • यह संसदीय प्रणाली का एक लाभ है जहां समाज के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व निर्वाचित सदस्यों के माध्यम से होता है।
    • यह एक विविध एवं समावेशी सरकार सुनिश्चित करता है।
  •  निरंकुशता को रोकता है:
    • संसदीय प्रणाली में कार्यपालिका विधायिका के प्रति जवाबदेह होती है, जिससे सत्तावादी शासन को रोकने में मदद मिलती है।
    • नियमित चुनाव और संसदीय निगरानी जांच और संतुलन सुनिश्चित करते हैं।
  •  उत्तरदायी सरकार:
    • कार्यपालिका संसद के प्रति तथा उसके माध्यम से मतदाताओं के प्रति जवाबदेह होती है।
    • यह जवाबदेही सुनिश्चित करती है कि सरकार लोगों की आवश्यकताओं के प्रति जिम्मेदार और उत्तरदायी बनी रहे।
  • अस्थिर सरकार:
    • यह एक दोष है, क्योंकि सरकार में बार-बार परिवर्तन से नीतियों और शासन में असंगति पैदा हो सकती है।
    • निरंतरता की कमी के कारण यह दीर्घकालिक योजना और विकास में बाधा उत्पन्न कर सकता है।