विविध (भारतीय राजव्यवस्था) भाग-I

Total Questions: 40

31. निम्नलिखित में से कौन-सा संवैधानिक निकायों का प्रमुख पहलू है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) संविधान में उल्लिखित
Solution:
  • संवैधानिक निकाय भारत जैसे लोकतांत्रिक देश का अभिन्न अंग है।
  • भारत सरकार में निहित संवैधानिक निकाय भारत के संविधान द्वारा स्थापित संस्थान है।
  • संवैधानिक निकायों की शक्तियां संविधान में वर्णित है
  • ये निकाय किसी भी अन्य सरकारी संगठनों या गैर-संवैधानिक निकायों की तुलना में अत्यंत शक्तिशाली हैं।
  • परिभाषा और महत्व
    • संवैधानिक निकाय वे संस्थाएं हैं जो संविधान द्वारा स्थापित या उनके लिए प्रावधान किए गए हैं
    • जैसे चुनाव आयोग (अनुच्छेद 324), संघ लोक सेवा आयोग (अनुच्छेद 315-323), और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG, अनुच्छेद 148)। ये लोकतंत्र में जांच-प्रत्येक और संतुलन बनाए रखते हैं, शासन को निष्पक्ष बनाते हैं।​
    • अन्य विकल्पों से अंतर
    • संसद द्वारा बनाया गया: यह वैधानिक निकायों का लक्षण है, जैसे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, जो संसद के कानून से स्थापित होते हैं।​
    • राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री द्वारा निर्मित: संवैधानिक निकायों का निर्माण संविधान के प्रावधानों से होता है, न कि व्यक्तिगत निर्णय से।​
    • अस्थायी स्थिति: ये स्थायी होते हैं, संविधान के अस्तित्व तक बने रहते हैं।​
  • प्रमुख उदाहरण
    • वित्त आयोग (अनुच्छेद 280): केंद्र-राज्य वित्तीय संसाधनों का बंटवारा।​
    • राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (अनुच्छेद 338): SC/ST अधिकारों की रक्षा।​
      ये निकाय राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त होकर संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करते हैं।

32. भारत का संविधान एक ....... एकीकृत न्यायिक प्रणाली प्रदान करता है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) त्रिस्तरीय
Solution:
  • भारत का संविधान एक त्रिस्तरीय एकीकृत न्यायिक प्रणाली प्रदान करता है।
  •  यह प्रणाली सर्वोच्च न्यायालय को शीर्ष पर रखते हुए उच्च न्यायालयों और अधीनस्थ अदालतों को एक पदानुक्रम में जोड़ती है
  • जिससे पूरे देश में कानून की एकरूप व्याख्या सुनिश्चित होती है।​
  • एकीकृत प्रणाली की परिभाषा
    • एकीकृत न्यायिक प्रणाली का अर्थ है कि संघीय ढांचे के बावजूद, भारत में अलग-अलग राज्य न्यायपालिकाएं नहीं हैं
    • बल्कि एक ही संरचना पूरे देश पर लागू होती है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय सभी निचली अदालतों पर बाध्यकारी होते हैं
    • जो कानूनी एकरूपता बनाए रखते हैं। यह व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत उच्चतम न्यायालय के फैसलों को कानून का दर्जा देती है।​
  • संरचना और पदानुक्रम
    • सर्वोच्च न्यायालय: शीर्ष अदालत, जो संविधान की व्याख्या करती है और अपीलों पर फैसला लेती है (अनुच्छेद 124-147)।​
    • उच्च न्यायालय: प्रत्येक राज्य या समूह के लिए (अनुच्छेद 214-231), जो राज्य स्तर पर मूल और अपीलीय क्षेत्राधिकार रखते हैं।​
    • जिला एवं अधीनस्थ अदालतें: जिला न्यायाधीश के नेतृत्व में सिविल, आपराधिक और अन्य मामले संभालती हैं; ग्राम न्यायालय छोटे विवाद निपटाते हैं।​
  • विशेषताएं और महत्व
    • यह प्रणाली विधायी, कार्यकारी और न्यायिक अंगों के बीच शक्तियों का पृथक्करण सुनिश्चित करती है
    • साथ ही न्यायपालिका की स्वतंत्रता को मूल संरचना का हिस्सा बनाती है। उच्च न्यायाधीशों की नियुक्ति कॉलेजियम प्रणाली से होती है
    • जो राजनीतिक हस्तक्षेप रोकती है। इससे संविधान की सर्वोच्चता और मौलिक अधिकारों की रक्षा होती है।​

33. राष्ट्रपति को निम्नलिखित में से किसके परामर्श से दोनों सदनों की संयुक्त बैठक के संबंध में प्रक्रिया के लिए नियम बनाने की शक्ति प्राप्त है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 3 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) सभापति और अध्यक्ष
Solution:
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 118(3) के अनुसार, राष्ट्रपति राज्य सभा के सभापति और लोक सभा अध्यक्ष से परामर्श करने के पश्चात, दोनों सदनों की संयुक्त बैठकों से संबंधित और उनमें परस्पर संचार से संबंधित प्रक्रिया के नियम बना सकेगा।
  •  यह शक्ति राष्ट्रपति को राज्यसभा के सभापति (जो उपराष्ट्रपति भी होते हैं) और लोकसभा के अध्यक्ष के परामर्श से प्रयोग करने का अधिकार देता है।​
  • संवैधानिक प्रावधान
    • अनुच्छेद 108 संसद के दोनों सदनों के बीच किसी विधेयक पर गतिरोध की स्थिति में संयुक्त बैठक बुलाने का प्रावधान करता है
    • जबकि अनुच्छेद 118 संसदीय प्रक्रिया के नियम बनाने की शक्ति प्रदान करता है। अनुच्छेद 118(3) स्पष्ट रूप से कहता है
    • राष्ट्रपति, राज्यसभा के सभापति और लोकसभा के अध्यक्ष के साथ परामर्श करने के बाद, संयुक्त बैठक की प्रक्रिया के लिए नियम बना सकते हैं।
    • ये नियम संसद की कार्यवाही को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए आवश्यक होते हैं, जैसे मतदान की प्रक्रिया, बहस का संचालन आदि।​
  • शक्ति प्रयोग की प्रक्रिया
    • राष्ट्रपति इस शक्ति का प्रयोग औपचारिक रूप से करते हैं, लेकिन वास्तविक परामर्श राज्यसभा सभापति और लोकसभा अध्यक्ष के साथ होता है।
    • संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करते हैं, और यदि वे अनुपस्थित हों तो उपाध्यक्ष।
    • नियम बनाने से पहले तीनों पक्षों के बीच विस्तृत चर्चा होती है ताकि दोनों सदनों के हित संतुलित रहें।
    • यह प्रक्रिया संसदीय लोकतंत्र की संघीय संरचना को मजबूत करती है।​
  • ऐतिहासिक महत्व
    • भारतीय संसद में अब तक 3 संयुक्त बैठकें आयोजित हो चुकी हैं—1961 (डाउरी विधेयक), 1978 (बैंकिंग सर्विस विधेयक) और 2002 (प्रिवेंशन ऑफ टेररिज्म विधेयक)।
    • इनमें नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रपति द्वारा बनाए गए नियम महत्वपूर्ण रहे।
    • यह व्यवस्था ब्रिटिश संसदीय परंपरा से प्रेरित है, लेकिन भारतीय संदर्भ में अनुकूलित।​

34. निम्नलिखित में से किस अधिनियम के द्वारा सरकार प्रतिबंधात्मक व्यापार पर रोक लगाती है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 14 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) एम.आर.टी.पी. (MRTP) अधिनियम
Solution:
  • एकाधिकारवादी और प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार कानून (एमआरटीपी) वर्ष 1969 में लागू किया गया था।
  • यह कानून यह सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया था कि आर्थिक प्रणाली के संचालन के परिणामस्वरूप कुछ लोगों के हाथों में आर्थिक शक्ति का संकेंद्रण न हो।
  • यह अधिनियम आर्थिक शक्ति के संकेंद्रण को रोकने, एकाधिकार को नियंत्रित करने और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाया गया था।​
  • अधिनियम का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
    • यह अधिनियम 27 दिसंबर 1969 को पारित हुआ और पूरे भारत (जम्मू-कश्मीर को छोड़कर) में लागू हुआ।
    • संविधान के नीति निर्देशक तत्वों (अनुच्छेद 39) से प्रेरित होकर इसे बनाया गया, जो आर्थिक प्रणाली के संचालन से कुछ हाथों में शक्ति केंद्रित न होने का निर्देश देता है।
    • प्रतिबंधात्मक व्यापार प्रथाओं (RTP) को धारा 2(o) में परिभाषित किया गया, जिसमें प्रतिस्पर्धा को रोकने, विकृत करने या सीमित करने वाली गतिविधियां शामिल हैं
    • जैसे क्षेत्रीय विभाजन, मूल्य नियंत्रण या उत्पाद बिक्री पर अनुचित शर्तें।​
  • प्रमुख प्रावधान
    • आयोग की स्थापना: भारत सरकार ने एकाधिकार एवं प्रतिबंधात्मक व्यापार आयोग (MRTPC) गठित किया, जिसमें एक अध्यक्ष और 2-8 सदस्य होते हैं।
    • यह आयोग शिकायतों की जांच करता, आदेश जारी करता और उल्लंघन पर जुर्माना या व्यवसाय प्रतिबंध लगाता।​
    • प्रतिबंधात्मक प्रथाएं: अधिनियम ने अनुचित व्यापार प्रथाओं (UTP) को भी कवर किया, जैसे भ्रामक विज्ञापन या गुणवत्ता में कमी।
    • धारा 36A में UTP को विस्तार से परिभाषित किया गया।​
    • एकाधिकार नियंत्रण: बड़े उद्योगों (नेट संपत्ति ₹10 करोड़ से अधिक) पर विस्तार प्रतिबंध लगाया गया। धारा 38 में लोकहित की उपधारणा दी गई।​
  • कार्यान्वयन और सीमाएं
    • सरकार केंद्रीय सरकार के माध्यम से अधिनियम लागू करती, जहां MRTPC जांच के बाद निर्देश देता।
    • हालांकि, 1991 के उदारीकरण के बाद यह अप्रभावी हो गया क्योंकि यह आकार पर केंद्रित था, न कि व्यवहार पर।
    • 2002 में इसे प्रतिस्थापित कर प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 लाया गया
    • जो CCI (Competition Commission of India) के माध्यम से RTP पर अधिक प्रभावी रोक लगाता है।
    • फिर भी, MRTP ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रहा।

35. निम्नलिखित में से सरकार का मुखिया कौन है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) प्रधानमंत्री
Solution:
  • भारतीय संसदीय व्यवस्था के अंतर्गत सरकार का मुखिया (Head of Government) प्रधानमंत्री होता है।
  • भारत के प्रधान मंत्री भारत सरकार के प्रमुख हैं।
  • प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी।
  • वह मंत्रिपरिषद के प्रमुख भी हैं।
  • भाग V के अनुच्छेद 74 से अनुच्छेद 78 तक प्रधान मंत्री और मंत्रिपरिषद से संबंधित हैं
  • वह कैबिनेट के अध्यक्ष हैं और कैबिनेट की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं।
  • प्रधानमंत्री संसद के निचले सदन का नेता होता है।
  • वह केंद्र सरकार के और विदेशी संबंधों में भी मुख्य प्रवक्ता हैं।
  • वह भारत के राष्ट्रपति के मुख्य सलाहकार के रूप में कार्य करता है।
  • प्रधान मंत्री अपना इस्तीफा भारत के राष्ट्रपति को सौंपता है।
  • वह परमाणु कमान प्राधिकरण, नीति आयोग, कैबिनेट की नियुक्ति समिति, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग और कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के
    प्रमुख हैं।
  • वह संघ के मामलों के प्रशासन से संबंधित मंत्रिमंडल के सभी निर्णयों को संप्रेषित करता है और राष्ट्रपति से कानून के लिए प्रस्ताव करता है
  • इसलिए राष्ट्रपति और मंत्रिमंडल के बीच कड़ी के रूप में कार्य करता है।
  • प्रधानमंत्री की मृत्यु या इस्तीफा स्वतः ही मंत्रिपरिषद के विघटन का कारण बनता है।
  • भारत का प्रधान मंत्री बनने के लिए उसे 30 वर्ष की आयु पूरी करनी चाहिए, यदि वह राज्य सभा का सदस्य है या 25 वर्ष का हो सकता है
  • यदि वह लोकसभा का सदस्य है।
  • भारत के राष्ट्रपति राज्य के प्रमुख और सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर होते हैं।

36. राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति ....... द्वारा की जाती है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) राज्यपाल
Solution:
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 316(1) के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग या संयुक्त लोक सेवा आयोग (दो या दो से अधिक राज्यों के लिए) के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है
  • जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।
  • राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है।
  • यह प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 316 में वर्णित है
  • जो लोक सेवा आयोगों की संरचना और नियुक्ति प्रक्रिया को नियंत्रित करता है।​
  • नियुक्ति प्रक्रिया
    • राज्यपाल को अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति का पूर्ण अधिकार प्राप्त है
    • जिसमें आयोग के सदस्यों की संख्या भी उनके विवेक पर निर्भर करती है।
    • संविधान में सदस्यों की न्यूनतम योग्यता निर्दिष्ट नहीं है
    • लेकिन कम से कम आधे सदस्यों का भारत या राज्य सरकार के अधीन 10 वर्ष का सेवा अनुभव होना आवश्यक है।
    • राज्यपाल सेवा शर्तें, जैसे कार्यकाल (6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु तक, जो पहले हो), वेतन और भत्ते निर्धारित करते हैं।​
  • कार्यकाल और सेवा शर्तें
    • अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल निश्चित है, लेकिन वे राज्यपाल को अपना त्यागपत्र दे सकते हैं।
    • पद पर रहते हुए वे कोई सवेतन रोजगार नहीं कर सकते।
    • हालांकि नियुक्ति राज्यपाल द्वारा होती है, लेकिन बर्खास्तगी केवल राष्ट्रपति के आदेश पर संभव है
    • यदि वे दिवालिया घोषित हों, मानसिक अस्वस्थता हो या कदाचार सिद्ध हो।​
  • महत्वपूर्ण अंतर
    • संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) या संयुक्त आयोग के अध्यक्ष-सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं
    • जबकि राज्य स्तर पर यह राज्यपाल का दायित्व है। मुख्यमंत्री या मंत्रिमंडल सिफारिशें कर सकता है
    • लेकिन अंतिम निर्णय राज्यपाल का होता है, जो आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है।​
  • आयोग की भूमिका
    • राज्य लोक सेवा आयोग राज्य सरकार के पदों पर भर्ती परीक्षाएं आयोजित करता है
    • जो निष्पक्षता बनाए रखने में महत्वपूर्ण है। यह संवैधानिक निकाय होने से स्वायत्त रहता है और रिपोर्ट विधानसभा को प्रस्तुत करता है।​

37. निम्नलिखित में से कौन-सा/से सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र के आदर्शों को बढ़ावा देने के लिए है/हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत
Solution:
  • राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों को भारतीय संविधान में शामिल किए जाने के उद्देश्य हैं-सामाजिक और आर्थिक प्रजातंत्र को स्थापित करना।
  • यह उद्देश्य एक कल्याणकारी राज्य की स्थापना में सहायक है, जिसका संविधान निर्माता एक कल्याणकारी राज्य की स्थापना के लिए प्रावधान करना चाहते थे।
  • भारतीय संविधान के नीति निर्देशक तत्व (DPSP) सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र के आदर्शों को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख प्रावधान हैं
  • विशेष रूप से अनुच्छेद 38 से 47 तक। ये तत्व राज्य को सामाजिक न्याय, आर्थिक समानता और कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए दिशानिर्देश प्रदान करते हैं
  • जो राजनीतिक लोकतंत्र को पूर्णता प्रदान करने में सहायक हैं।​
  • प्रमुख नीति निर्देशक तत्व
    • नीति निर्देशक तत्व भाग IV (अनुच्छेद 36-51) में वर्णित हैं, जिन्हें डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र का चार्टर कहा।
    • अनुच्छेद 38 राज्य को सामाजिक व्यवस्था बनाने का निर्देश देता है जो सभी नागरिकों को न्याय सुनिश्चित करे।
    • अनुच्छेद 39 आर्थिक नीतियों में समानता, संसाधनों का समान वितरण, धन संकेंद्रण रोकना और जीविका के साधन प्रदान करना सुनिश्चित करता है।​
  • अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान
    • अनुच्छेद 41 से 43 श्रमिकों के अधिकार, शिक्षा, रोजगार, उचित मजदूरी और ग्राम पंचायतों को आर्थिक संगठन बनाने पर जोर देते हैं।
    • अनुच्छेद 45 बच्चों को मुफ्त शिक्षा, अनुच्छेद 46 SC/ST और कमजोर वर्गों के शोषण रोकने तथा अनुच्छेद 47 पोषण स्तर सुधारने के लिए हैं।
    • ये सभी सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को दूर कर समावेशी विकास को बढ़ावा देते हैं।​
  • कार्यान्वयन के उदाहरण
    • ये आदर्श योजनाओं में दिखते हैं जैसे मनरेगा (अनुच्छेद 39-41), शिक्षा का अधिकार अधिनियम (अनुच्छेद 45), खाद्य सुरक्षा कानून (अनुच्छेद 47) और आयुष्मान भारत।
    • हालांकि ये न्यायोचित नहीं हैं, न्यायालय इन्हें मौलिक अधिकारों के साथ जोड़कर लागू करवाते हैं, जैसे गोलकनाथ मामले में।​
  • महत्व और चुनौतियां
    • ये प्रावधान भारत को गांधीवादी समाजवाद की ओर ले जाते हैं
    • लेकिन कार्यान्वयन में भ्रष्टाचार, संसाधन कमी और संघीय ढांचे की चुनौतियां हैं।
    • फिर भी, ये लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं।​

38. उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश (वेतन और सेवा की शर्तें) संशोधन विधेयक, 2021 को कानून और न्याय मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा ....... में लोक सभा में पेश किया गया था। [Phase-XI 28 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) नवंबर, 2021
Solution:
  • तत्कालीन कानून एवं न्याय मंत्री किरेन रिजिजू ने 30 नवंबर, 2021 को लोक सभा में उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश (वेतन एवं शर्त) संशोधन बिल, 2021 को पेश किया।
  • यह विधेयक उच्च न्यायालय न्यायाधीश (वेतन एवं सेवा शर्तें) अधिनियम, 1954 और सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश (वेतन एवं सेवा शर्तें) अधिनियम, 1958 में संशोधन लाने के उद्देश्य से लाया गया.​
  • विधेयक का उद्देश्य
    • विधेयक का मुख्य लक्ष्य न्यायाधीशों के वेतन, भत्ते और पेंशन में वृद्धि करना था, जो 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप था
    • इससे मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों के मूल वेतन में लगभग 200% की बढ़ोतरी प्रस्तावित की गई
    • साथ ही सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की पेंशन भी संशोधित की गई. विधेयक में धारा 16बी और 17बी जोड़कर पेंशन गणना की स्पष्टता सुनिश्चित की गई.​
  • संसदीय प्रक्रिया
    • लोकसभा ने इस विधेयक को 8 दिसंबर 2021 को पारित किया. उसके बाद किरेन रिजिजू ने इसे राज्यसभा में पेश किया
    • जहां 18 दिसंबर 2021 को इसे मंजूरी मिली और राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद यह कानून बन गया
    • राज्यसभा में विपक्ष की कुछ आपत्तियों के बावजूद विधेयक बिना संशोधन के पारित हुआ.​
  • प्रमुख प्रावधान
    • सर्वोच्च न्यायालय मुख्य न्यायाधीश: मूल वेतन ₹2.50 लाख प्रतिमाह (पहले ₹1 लाख).​
    • सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश: मूल वेतन ₹2.25 लाख प्रतिमाह (पहले ₹90,000).​
    • उच्च न्यायालय मुख्य न्यायाधीश: मूल वेतन ₹2.50 लाख प्रतिमाह.​
    • उच्च न्यायालय न्यायाधीश: मूल वेतन ₹2.25 लाख प्रतिमाह.​
    • ये संशोधन न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने और प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए आवश्यक थे.​
  • प्रभाव और महत्व
    • इस कानून से न्यायाधीशों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई, जिससे न्यायिक स्वतंत्रता को बढ़ावा मिला
    • यह 34 वर्षों बाद न्यायाधीशों के वेतन में बड़ा संशोधन था, जो महंगाई के अनुरूप था
    • विधेयक की पारितगी ने केंद्र सरकार की न्यायिक सुधार प्रतिबद्धता को दर्शाया.​

39. जुलाई, 2021 में केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री के रूप में किसे नियुक्त किया गया था? [Phase-XI 30 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) किरेन रिजिजू
Solution:
  • जुलाई, 2021 में केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री के रूप किरेन रिजिजू को नियुक्त किया गया था। वर्तमान में विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल हैं।
  • नियुक्ति का संदर्भ
    • यह नियुक्ति नरेंद्र मोदी सरकार के कैबिनेट विस्तार के दौरान की गई, जिसमें रविशंकर प्रसाद ने कानून मंत्री पद से इस्तीफा दिया था
    • रिजिजू इससे पहले युवा मामले एवं खेल के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) थे, और उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया
    • अरुणाचल प्रदेश से लोकसभा सांसद रिजिजू ने इस भूमिका में न्यायिक सुधारों पर जोर दिया.​
  • कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियां
    • रिजिजू के कार्यकाल (2021-2023) में उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों (वेतन और सेवा शर्तें) संशोधन विधेयक, 2021 को पेश किया गया
    • जिसे लोकसभा में 30 नवंबर 2021 को प्रस्तुत किया [ से पूर्व संदर्भ].
    • उन्होंने न्यायपालिका में रिक्तियों को भरने और डिजिटल न्याय प्रणाली को मजबूत करने के प्रयास किए [ से पूर्व संदर्भ]. मई 2023 में अर्जुन राम मेघवाल ने उनका स्थान लिया.​
  • राजनीतिक पृष्ठभूमि
    • किरेन रिजिजू भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं, जो 2004 से अरुणाचल पश्चिम से सांसद रहे. पहले उन्होंने गृह राज्य मंत्री जैसे पद संभाले
    • बाद में पृथ्वी विज्ञान मंत्री बने. उनका जुलाई 2021 का नियुक्ति न्याय मंत्रालय को नई दिशा देने का प्रयास था.

40. केरल राज्य बनाम लीसम्मा जोसेफ मामला किससे संबंधित है? [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) विकलांग व्यक्ति
Solution:
  • केरल राज्य बनाम लीसम्मा जोसेफ मामला विकलांग व्यक्ति से संबंधित है। इस मामले में उच्चतम न्यायालय ने अभिनिर्धारित किया
  • संविधान का अनुच्छेद 16(4) राज्य को नागरिकों के किसी भी पिछड़े वर्ग के पक्ष में पदोन्नति के मामलों में आरक्षण के प्रावधान करने का अधिकार देता है
  • इसके दायरे में विकलांग व्यक्तियों को भी शामिल किया गया है, भले ही उनकी प्रकृति कुछ भी हो। प्रतिष्ठान चाहे निजी या सार्वजनिक क्षेत्र के हो।
  • पृष्ठभूमि
    • लीसम्मा जोसेफ एक विकलांग कर्मचारी थीं, जो केरल सरकार के अधीन कार्यरत थीं।
    • उन्होंने पदोन्नति में आरक्षण का दावा किया, लेकिन राज्य सरकार ने इसे अस्वीकार कर दिया था।
    • केरल उच्च न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला दिया, जिसके बाद राज्य सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा।​
  • सर्वोच्च न्यायालय का फैसला
    • 28 जून 2021 को सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने फैसला सुनाया कि विकलांग व्यक्ति संविधान के अनुच्छेद 16(4) के तहत पदोन्नति में आरक्षण के हकदार हैं।
    • न्यायालय ने विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 34(1) की संवैधानिकता की पुष्टि की और कहा कि सार्वजनिक रोजगार में समान अवसरों में विकलांगों के लिए आरक्षण शामिल है।​
  • कानूनी आधार
    • फैसले में अनुच्छेद 16(4) को पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का आधार माना गया, जिसमें विकलांग व्यक्ति आते हैं।
    • अधिनियम 2016 ने 1995 के पुराने कानून को बदल दिया और 21 प्रकार की विकलांगताओं को मान्यता दी।
    • न्यायालय ने राज्य को डेटा संग्रह करने और रोस्टर तैयार करने का निर्देश दिया।​
  • महत्वपूर्ण प्रभाव
    • यह फैसला विकलांगों के रोजगार अधिकारों को मजबूत करता है और संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन का अनुपालन सुनिश्चित करता है।
    • कई अन्य मामलों में इसका हवाला दिया गया, जैसे छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के निर्णयों में।