Correct Answer: (c) नवंबर, 2021
Solution:- तत्कालीन कानून एवं न्याय मंत्री किरेन रिजिजू ने 30 नवंबर, 2021 को लोक सभा में उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश (वेतन एवं शर्त) संशोधन बिल, 2021 को पेश किया।
- यह विधेयक उच्च न्यायालय न्यायाधीश (वेतन एवं सेवा शर्तें) अधिनियम, 1954 और सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश (वेतन एवं सेवा शर्तें) अधिनियम, 1958 में संशोधन लाने के उद्देश्य से लाया गया.
- विधेयक का उद्देश्य
- विधेयक का मुख्य लक्ष्य न्यायाधीशों के वेतन, भत्ते और पेंशन में वृद्धि करना था, जो 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप था
- इससे मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों के मूल वेतन में लगभग 200% की बढ़ोतरी प्रस्तावित की गई
- साथ ही सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की पेंशन भी संशोधित की गई. विधेयक में धारा 16बी और 17बी जोड़कर पेंशन गणना की स्पष्टता सुनिश्चित की गई.
- संसदीय प्रक्रिया
- लोकसभा ने इस विधेयक को 8 दिसंबर 2021 को पारित किया. उसके बाद किरेन रिजिजू ने इसे राज्यसभा में पेश किया
- जहां 18 दिसंबर 2021 को इसे मंजूरी मिली और राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद यह कानून बन गया
- राज्यसभा में विपक्ष की कुछ आपत्तियों के बावजूद विधेयक बिना संशोधन के पारित हुआ.
- प्रमुख प्रावधान
- सर्वोच्च न्यायालय मुख्य न्यायाधीश: मूल वेतन ₹2.50 लाख प्रतिमाह (पहले ₹1 लाख).
- सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश: मूल वेतन ₹2.25 लाख प्रतिमाह (पहले ₹90,000).
- उच्च न्यायालय मुख्य न्यायाधीश: मूल वेतन ₹2.50 लाख प्रतिमाह.
- उच्च न्यायालय न्यायाधीश: मूल वेतन ₹2.25 लाख प्रतिमाह.
- ये संशोधन न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने और प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए आवश्यक थे.
- प्रभाव और महत्व
- इस कानून से न्यायाधीशों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई, जिससे न्यायिक स्वतंत्रता को बढ़ावा मिला
- यह 34 वर्षों बाद न्यायाधीशों के वेतन में बड़ा संशोधन था, जो महंगाई के अनुरूप था
- विधेयक की पारितगी ने केंद्र सरकार की न्यायिक सुधार प्रतिबद्धता को दर्शाया.