वैदिक काल (UPPCS) Part-1

Total Questions: 50

21. भारतीय उपमहाद्वीप में लोहे का प्रयोग कब शुरू हुआ? [68th B.P.S.C (Pre) 2022]

Correct Answer: (d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Solution:

भारतीय उपमहाद्वीप में लोहे के प्रयोग के प्रारंभ के विषय में विद्वानों में मतभेद है। कुछ विद्वानों का मत है कि विश्व में सर्वप्रथम 'हित्ती' नामक जाति ने ही लोहे का प्रयोग प्रारंभ किया था और इसके पश्चात ही विश्व के अन्य देशों में इसका प्रचलन हुआ, जबकि थाईलैंड के बनैची नामक पुरास्थल की खुदाई से ढला हुआ लोहे की प्राप्ति हुई है जिसकी तिथि 1600-1200 ई. पू. के लगभग निर्धारित की गई है। भारत में नोह (राजस्थान) के दोआब क्षेत्र से लोहा, कृष्ण लोहित मृ‌द्भांडों के साथ प्राप्त होता है, जिसकी संभावित तिथि 1400 ई.पू. के लगभग है। सर्वप्रथम उत्तर वैदिक काल (1000-600 ई.पू.) के ग्रंथों में हमें इस धातु के स्पष्ट प्रमाण प्राप्त होते हैं। अथर्ववेद में लोहा का उल्लेख 'श्यामअयस्' के रूप में प्राप्त होता है। इसमें लोहे के बने हुए फाल का भी उल्लेख प्राप्त होता है। अतरंजीखेड़ा (उत्तर प्रदेश) के उत्खनन से गेहूं, जौ तथा चावल के अवशेषों के साथ-साथ प्राचीनतम कृषि लौह उपकरण की प्राप्ति हुई है। पुरातत्वविदों ने इसका काल 1000 ई.पू. निर्धारित किया है जो अधिकांश विद्वानों के द्वारा स्वीकार्य है।

22. उपनिषद पुस्तकें हैं- [U.P.P.C.S. (Pre) 2002 & U.P.P.C.S. (Mains) 2004]

Correct Answer: (d) दर्शन पर
Solution:

उपनिषद हिंदू धर्म के वे दार्शनिक और आध्यात्मिक ग्रंथ हैं जिन्हें 'वेदांत' कहा जाता है, क्योंकि ये वेदों के अंतिम भाग और उनके ज्ञान का सार हैं। 'उपनिषद' शब्द का अर्थ है "गुरु के समीप बैठकर ज्ञान प्राप्त करना," जो प्राचीन काल की शिक्षा पद्धति को दर्शाता है।

23. उपनिषदों का मुख्य विषय है- [U.P.Lower Sub. (Pre) 1998]

Correct Answer: (b) दर्शन
Solution:

उपर्युक्त प्रश्न की व्याख्या देखें।

24. निम्नलिखित में से किस एक वैदिक साहित्य में मोक्ष की चर्चा मिलती है? [U.P.P.C.S. (Mains) 2003]

Correct Answer: (d) उपनिषद
Solution:

वैदिक साहित्य में मोक्ष की चर्चा सबसे पहले और मुख्य रूप से उपनिषदों में मिलती है। ऋग्वेद जैसे प्रारंभिक वैदिक ग्रंथों में मुख्य रूप से भौतिक सुखों, लंबी आयु और देवताओं की स्तुति पर ध्यान केंद्रित किया गया था। लेकिन उपनिषदों के काल तक आते-आते भारतीय दर्शन में गहरा बदलाव आया। यहाँ ऋषियों ने 'जन्म और मृत्यु के चक्र' (संसार) से मुक्ति और 'आत्मा का परमात्मा (ब्रह्म) में विलीनीकरण' के विचार को प्रधानता दी, जिसे मोक्ष कहा गया। यह शब्द श्वेताश्वतर उपनिषद में पहली बार आया है।

25. अध्यात्म ज्ञान के विषय में नचिकेता और यम का संवाद किस उपनिषद में प्राप्त होता है? [I.A.S. (Pre) 1997 & U.P.P.C.S. (Pre) 1999 & U.P.U.D.A./L.D.A. (Pre) 2002 & Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2005]

Correct Answer: (c) कठोपनिषद में
Solution:

अध्यात्म ज्ञान के विषय में नचिकेता और यमराज का प्रसिद्ध संवाद कठोपनिषद (जिसे कठ उपनिषद भी कहा जाता है) में मिलता है। इस उपनिषद में बालक नचिकेता अपने पिता के एक यज्ञ से उत्पन्न जिज्ञासा के कारण मृत्यु के देवता यमराज के पास पहुँचते हैं। यमराज नचिकेता की कठिन प्रतीक्षा और दृढ़ता से प्रसन्न होकर उन्हें तीन वरदान देते हैं, जिनमें से तीसरे वरदान के रूप में नचिकेता 'मृत्यु के बाद के रहस्य' और 'आत्मा के स्वरूप' का ज्ञान माँगते हैं। यमराज द्वारा दिया गया यह उपदेश ही कठोपनिषद का मुख्य आधार है, जिसमें आत्मा को अजन्मा और शाश्वत बताया गया है तथा शरीर की तुलना एक रथ से की गई है।

• बृहदारण्यक उपनिषद: यह सबसे विशाल और प्राचीन उपनिषद है, जिसमें प्रसिद्ध मंत्र "तमसो मा ज्योतिर्गमय" और 'अहं ब्रह्मास्मि' (मैं ही ब्रह्म हूँ) का उल्लेख मिलता है।

• छांदोग्य उपनिषद: यह सामवेद से संबंधित है और इसमें 'तत्त्वमसि' (वह तुम ही हो) के महावाक्य के साथ-साथ उद्दालक आरुणि और उनके पुत्र श्वेतकेतु का प्रसिद्ध संवाद मिलता है।

• केन उपनिषद: 'केन' (किसके द्वारा) शब्द से शुरू होने वाला यह उपनिषद इस प्रश्न पर केंद्रित है कि मन और प्राण को शक्ति देने वाली वह परम सत्ता (ब्रह्म) कौन है।

26. नचिकेता आख्यान का उल्लेख मिलता है- [U.P.P.C.S. (Mains) 2006]

Correct Answer: (c) कठोपनिषद में
Solution:

कठोपनिषद में यम और नचिकेता का संवाद उल्लिखित है। इसमें आचार्य यम ने नचिकेता को उपदेश दिया है-"न इस आत्मा का कभी जन्म होता है और न इसकी कभी मृत्यु होती है। यह अजन्मा, नित्य तथा शाश्वत है।" "कठोपनिषद' कृष्ण यजुर्वेद का उपनिषद है।

27. उपनिषद काल के राजा अश्वपति शासक थे- [U.P.P.C.S. (Pre) 1999]

Correct Answer: (b) केकय के
Solution:

उपनिषद काल के प्रसिद्ध राजा अश्वपति केकय देश (या कैकेय राज्य) के शासक थे। वे एक दार्शनिक राजा थे जिनका उल्लेख मुख्य रूप से छान्दोग्य उपनिषद में मिलता है जहाँ वे 'वैश्वानर विद्या' (ब्रह्म के ज्ञान) के ज्ञाता के रूप में जाने जाते हैं और ऋषियों को भी शिक्षा देते थे।

28. निम्नलिखित में से वैदिक साहित्य का सही क्रम कौन-सा है? [U.P.P.C.S. (Mains) 2014]

Correct Answer: (a) वैदिक संहिताएं, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद
Solution:

वैदिक साहित्य का सही और कालक्रमानुसार (Chronological) क्रम इस प्रकार है: वेदिक संहिताएँ (वेद), ब्राह्मण, ग्रंथ, आरण्यक और उपनिषद। इस क्रम में सबसे पहले वेदों का मंत्र भाग (संहिता) आता है फिर उनकी व्याख्या (ब्राह्मण) तत्पश्चात दार्शनिक चिंतन (आरण्यक) और अंत में ज्ञान के गूढ़ सिद्धांत (उपनिषद/वेदांत) आते हैं।

29. आरंभिक वैदिक साहित्य में सर्वाधिक वर्णित नदी है- [I.A.S. (Pre) 1996]

Correct Answer: (a) सिंधु
Solution:

आरंभिक वैदिक साहित्य (विशेषकर ऋग्वेद) में सर्वाधिक वर्णित नदी सिंधु है। इसे 'नदीतमा' या सबसे महत्वपूर्ण नदी माना गया है जो ऋग्वैदिक आर्यों की भौगोलिक आर्थिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र थी। हालाँकि सबसे पवित्र नदी का दर्जा सरस्वती (नदीतमा) को दिया गया है लेकिन सर्वाधिक बार वर्णन सिंधु नदी का ही है।

यहाँ वैदिक नदियों से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य दिए गए हैं जो परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाते हैं:

नदी का विवरणनदी का नाम
सर्वाधिक वर्णित नदीसिंधु (Indus)
सबसे पवित्र नदीसरस्वती (इसे 'नदीतमा' या नदियों में सर्वश्रेष्ठ कहा गया है)
गंगा का उल्लेखकेवल 1 बार
यमुना का उल्लेखकेवल 3 बार

30. वैदिक नदी अस्किनी की पहचान निम्नांकित नदियों में से किस एक के साथ की जाती है ? [U.P.P.S.C. (GIC) 2010]

Correct Answer: (c) चेनाब
Solution:

वैदिक नदी अस्किनी की पहचान आधुनिक चेनाब (Chenab) नदी के साथ की जाती है। ऋग्वेद के 'नदी सूक्त' में सप्त-सिंधु क्षेत्र की नदियों का वर्णन मिलता है, जहाँ उनके प्राचीन नामों का उल्लेख है।

प्रमुख वैदिक नदियों और उनके वर्तमान नामों की सूची नीचे दी गई है:

वैदिक नामआधुनिक नाम
अस्किनीचेनाब
परुष्णीरावी
वितस्ताझेलम
विपाशाव्यास
शतद्रुसतलुज
कुभाकाबुल
सदानीरागंडक