Correct Answer: (a) External Commercial Borrowings (एक्सटर्नल कॉमर्शियल बॉरोइंग)
Solution:- ECB का पूर्ण रूप एक्सटर्नल कॉमर्शियल बॉरोइंग है।
- बाह्य ऋण के संदर्भ में ECB का पूर्णरूप External Commercial Borrowing है।
- यह भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशी स्रोतों से लिए जाने वाले वाणिज्यिक उधारी को संदर्भित करता है।
- ECB क्या है?
- भारतीय कंपनियों, NBFCs और अन्य पात्र संस्थाओं द्वारा विदेशी उधारदाताओं से प्राप्त ऋण या बॉन्ड्स हैं
- जो मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा में होते हैं। ये RBI (रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया) के दिशानिर्देशों द्वारा नियंत्रित होते हैं
- व्यवसाय विस्तार, पूंजीगत व्यय, बुनियादी ढांचा विकास या पुराने ऋण के पुनर्भुगतान के लिए उपयोग किए जाते हैं।
- प्रमुख विशेषताएं
- पात्र उधारकर्ता: भारतीय कंपनियां, NBFCs, और RBI द्वारा अनुमत कुछ संस्थाएं।
- मान्यता प्राप्त उधारदाता: अंतरराष्ट्रीय बैंक, निर्यात ऋण एजेंसियां, बहुपक्षीय वित्तीय संस्थान (जैसे ADB, IFC), आपूर्तिकर्ता और विदेशी इक्विटी धारक।
- मुद्रा: मुख्यतः विदेशी मुद्रा (USD, EUR आदि), लेकिन कुछ रुपये-आधारित ECB भी अनुमत।
- परिपक्वता अवधि: न्यूनतम 3 वर्ष, अधिकतम 10 वर्ष तक (उद्देश्य के आधार पर)।
- उपकरण: बैंक ऋण, बॉन्ड्स, डिबेंचर, ट्रेड क्रेडिट (3 वर्ष से अधिक), फॉरेन करेंसी कन्वर्टिबल बॉन्ड्स आदि।
- ECB के प्रकार
- विदेशी मुद्रा ECB (FCY ECB): विदेशी मुद्रा में, स्वचालित या अनुमोदन मार्ग से।
- भारतीय रुपये ECB (INR ECB): रुपये में, विदेशी उधारदाताओं से।
- लाभ
- कम ब्याज दरें: घरेलू ऋण की तुलना में सस्ता हो सकता है, विशेषकर कम ब्याज वाले देशों से।
- लंबी अवधि: दीर्घकालिक फंडिंग उपलब्ध।
- विविधीकरण: विदेशी स्रोतों से पूंजी जुटाने का अवसर।
- भारत जैसे विकासशील देशों में बुनियादी ढांचे के लिए ECB महत्वपूर्ण हैं।
- जोखिम और चुनौतियां
- मुद्रा जोखिम: विदेशी मुद्रा में होने से रुपये के अवमूल्यन पर चुकौती महंगी हो जाती है।
- नियमन: RBI की सख्त शर्तें जैसे ऑल-इन-कॉस्ट सीमा (ब्याज + फीस), एंड-यूज प्रतिबंध (रियल एस्टेट, पूंजी बाजार में निवेश वर्जित)।
- चुकौती दबाव: आर्थिक मंदी में बाह्य दायित्व बढ़ सकता है।
- RBI समय-समय पर ECB नियमों को अपडेट करता रहता है।
- RBI नियमन
- RBI के विदेशी मुद्रा प्रबंधन विभाग (FEM) के तहत ECB को स्वचालित रूट (ऑटोमैटिक अप्रूवल) या गवर्नमेंट रूट (सरकारी अनुमति) से मंजूरी मिलती है।
- रिपोर्टिंग LRS (Loan Reporting System) के माध्यम से Form ECB, Form ECB-2 आदि के जरिए। 2026 तक, ECB भारत की कुल बाह्य ऋण का महत्वपूर्ण हिस्सा बने हुए हैं।