शब्द संक्षेप (परम्परागत सामान्य ज्ञान)

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11. निम्नलिखित में से कौन-सा अंतरराष्ट्रीय संगठन शतरंज का शासी निकाय है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) FIDE
Solution:
  • अंतरराष्ट्रीय शतरंज महासंघ (FIDE) शतरंज के खेल का शासी निकाय है।
  • वर्ष 1924 में स्थापित इस संगठन का वर्तमान मुख्यालय स्विट्जरलैंड में स्थित है।
  • यह विभिन्न राष्ट्रीय शतरंज संघों को जोड़ता है और अंतरराष्ट्रीय शतरंज प्रतियोगिता के शासी निकाय के रूप में कार्य करता है।
  • FIDE की स्थापना और इतिहास
    • FIDE की स्थापना 20 जुलाई 1924 को पेरिस, फ्रांस में हुई थी।
    • इसका आदर्श वाक्य "जेन्स ऊना समस" (लैटिन में "हम एक परिवार हैं") है।​
    • यह शतरंज के लिए दुनिया का सबसे पुराना अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जो अब 195 से अधिक सदस्य देशों को जोड़ता है।
  • मुख्यालय और नेतृत्व
    • FIDE का मुख्यालय लॉज़ेन (लुसाने), स्विट्जरलैंड में स्थित है।
    • वर्तमान अध्यक्ष आर्कडी ड्वोरकोविच हैं।​
    • यह एक गैर-सरकारी, गैर-लाभकारी संस्था है जो राष्ट्रीय शतरंज महासंघों को संबद्ध करती है।
  • भूमिकाएँ और जिम्मेदारियाँ
    • FIDE शतरंज के सभी अंतरराष्ट्रीय नियमों, प्रतियोगिताओं और रेटिंग सिस्टम को नियंत्रित करता है।
    • यह विश्व शतरंज चैंपियनशिप, कैंडिडेट्स टूर्नामेंट, शतरंज ओलंपियाड और अन्य प्रमुख आयोजनों का संचालन करता है।
    • खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय खिताब प्रदान करने और एलो रेटिंग की गणना में भी इसका पूर्ण नियंत्रण है।​
  • मान्यता और महत्व
    • 1999 में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) ने FIDE को शतरंज के वैश्विक शासी निकाय के रूप में आधिकारिक मान्यता दी।
    • FIDE के गठन के सम्मान में हर साल 20 जुलाई को विश्व शतरंज दिवस मनाया जाता है।​
    • यह फुटबॉल (FIFA) या क्रिकेट जैसे अन्य खेलों के महासंघों की तरह शतरंज को वैश्विक स्तर पर संगठित करता है।​
  • भारत से संबंध
    • भारत में एआईसीएफ (ऑल इंडिया चेस फेडरेशन) FIDE का राष्ट्रीय सदस्य है और घरेलू आयोजनों के लिए समन्वय करता है।​
    • FIDE ने हाल ही में गोवा में 2025 शतरंज विश्व कप ट्रॉफी का अनावरण किया, जो भारत की बढ़ती शतरंज शक्ति को दर्शाता है।​
    • भारतीय खिलाड़ी जैसे विश्वनाथन आनंद FIDE के प्रमुख आयोजनों में सक्रिय रहे हैं।​

12. स्वामी दयानंद के कुछ अनुयायियों ने D.A.V. नामक स्कूलों और कॉलेजों का एक नेटवर्क शुरू किया। D.A.V. में 'A' का पूर्णरूप क्या है? [Phase-XI 28 जून, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (a) Anglo (एंग्लो)
Solution:
  • D.A.V. दयानंद एंग्लो वैदिक का संक्षिप्त रूप है, जिसमें 'A' का पूर्ण रूप 'एंग्लो' (Anglo) है।
  • डी.ए.वी. निजी क्षेत्र में भारत का सबसे बड़ा शिक्षण संस्थान है। डी.ए.वी. की स्थापना लाला हंसराज ने 1886 ई. में लाहौर में की थी।
  • इतिहास
    • स्वामी दयानंद सरस्वती ने 1875 में आर्य समाज की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य वेदों पर आधारित शिक्षा के माध्यम से भारतीय समाज को पुनर्जागृत करना था।
    • उनके अनुयायियों, जैसे लाला हंसराज, लाला लाजपत राय और भाई परमानंद ने 1886 में लाहौर में "दयानंद एंग्लो वैदिक कॉलेज ट्रस्ट एंड मैनेजमेंट सोसाइटी" की स्थापना की।
    • पहला D.A.V. स्कूल उसी वर्ष लाहौर में खुला, जहां लाला हंसराज ने अवैतनिक प्रधानाचार्य के रूप में कार्य किया।
  • 'A' का अर्थ: Anglo
    • D.A.V. का पूरा नाम Dayanand Anglo Vedic है, जहां 'D' स्वामी दयानंद के लिए, 'A' Anglo (अंग्रेजी शिक्षा पद्धति के लिए) और 'V' Vedic (वैदिक मूल्यों के लिए) है।
    • "Anglo" शब्द 19वीं सदी के संदर्भ में आधुनिक अंग्रेजी शिक्षा को दर्शाता है
    • जिसे वैदिक सिद्धांतों के साथ जोड़ा गया ताकि छात्र आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी सीख सकें साथ ही भारतीय संस्कृति व नैतिकता ग्रहण करें।
    • यह संयोजन स्वामी दयानंद के "वेदों की ओर लौटो" के आह्वान को आधुनिक बनाता है।
  • विस्तार और महत्व
    • आज D.A.V. कॉलेज मैनेजिंग कमिटी (DAVCMC) दुनिया का सबसे बड़ा गैर-सरकारी शैक्षिक संगठन है
    • जो भारत में 900+ स्कूल, 75+ कॉलेज और एक विश्वविद्यालय संचालित करता है।
    • यह नेपाल, सिंगापुर, यूके, अमेरिका आदि देशों में भी फैला है, जहां 20 लाख से अधिक छात्र पढ़ते हैं।
    • संस्थान अंग्रेजी को मुख्य भाषा बनाते हैं, लेकिन हिंदी, संस्कृत या क्षेत्रीय भाषा अनिवार्य रखते हैं
    • साथ ही चरित्र निर्माण और सामाजिक सेवा पर जोर देते हैं। वार्षिक बजट 2000 करोड़ रुपये से अधिक है।
  • उद्देश्य और दर्शन
    • DAV संस्थानों का लक्ष्य स्वामी दयानंद के विचारों पर आधारित समग्र शिक्षा देना है
    • ज्ञान, संस्कार और चरित्र निर्माण। यह आधुनिक शिक्षा (विज्ञान, तकनीक) को वैदिक मूल्यों (सत्य, अहिंसा, सेवा) से जोड़ता है।
    • उदाहरणस्वरूप, छात्रों को शपथ दिलाई जाती है जो नैतिकता सिखाती है।
    • यह नेटवर्क स्वतंत्रता संग्राम में भी सक्रिय रहा, जहां लाला लाजपत राय जैसे नेताओं ने योगदान दिया।

13. बाजार मूल्य पर जी.एन.पी. (GNP) का मापन कैसे किया जाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 22 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) बाजार मूल्य पर जी.डी.पी. (GDP) + विदेशों से प्राप्त शुद्ध कारक आय
Solution:
  • बाजार मूल्य पर जीएनपी की गणना बाजार कीमतों पर सकल घरेलू उत्पाद में विदेशों से प्राप्त शुद्ध कारक आय को जोड़कर किया जाता है।
  • GNP की मूल अवधारणा
    • GNP बाजार मूल्य पर उस समयावधि में देश के निवासियों (नागरिकों) द्वारा उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य दर्शाता है
    • चाहे उत्पादन देश के अंदर हो या विदेश में। बाजार मूल्य का अर्थ है वस्तु या सेवा की वह कीमत जो बाजार में बिक्री पर प्राप्त होती है
    • जिसमें उत्पादन कर (indirect taxes) शामिल होते हैं लेकिन सब्सिडी नहीं घटाई जाती।
    • यह GDP से भिन्न है क्योंकि GDP केवल देश की भौगोलिक सीमाओं के अंदर उत्पादन को गिनता है
    • जबकि GNP निवासियों की वैश्विक आर्थिक गतिविधियों को ध्यान में रखता है।
    • भारत में केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) ने जनवरी 2015 से राष्ट्रीय आय की गणना बाजार मूल्य पर शुरू की है।
  • GNP की गणना का मुख्य सूत्र
    • बाजार मूल्य पर GNP की गणना का सरल सूत्र है:
    • GNP (बाजार मूल्य पर) = GDP (बाजार मूल्य पर) + विदेश से शुद्ध कारक आय (NFIA)
    • यहां NFIA = (देश के निवासियों द्वारा विदेश में अर्जित आय) - (विदेशी निवासियों द्वारा देश में अर्जित आय)।
    • कारक आय में लाभांश, ब्याज, लाभ और मजदूरी शामिल होती है।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि भारत का GDP 200 लाख करोड़ रुपये है और NFIA 10 लाख करोड़ रुपये है
    • तो GNP लगभग 210 लाख करोड़ रुपये होगा।
    • यह सूत्र GNP को GDP से अलग करता है, जो देश की आर्थिक सीमाओं तक सीमित रहता है।
  • चरण:
    • प्रत्येक क्षेत्र में कुल उत्पादन मूल्य घटाकर मध्यवर्ती खपत (intermediate consumption) निकालें।
    • GVA को जोड़कर कुल GVA प्राप्त करें।
    • उत्पाद कर जोड़ें (बाजार मूल्य के लिए)।
    • GDP प्राप्त होने पर NFIA जोड़ें।
    • उदाहरण: यदि कपड़ा उद्योग में कच्चे माल की लागत 20 रुपये और बिक्री मूल्य 100 रुपये है, तो GVA 80 रुपये है। सभी क्षेत्रों का योग GNP बनाता है।​
  • व्यय विधि (Expenditure Method)
    • C: निजी उपभोग व्यय।
    • I: सकल घरेलू निवेश (निजी + सार्वजनिक)।
    • G: सरकारी व्यय।
    • X - M: शुद्ध निर्यात।
    • NFIA जोड़ने से GNP बाजार मूल्य पर प्राप्त होता है। यह विधि मांग पक्ष को दर्शाती है।
  • आय विधि (Income Method)
    • सभी कारकों की आय को जोड़ा जाता है:
    • GNP = वेतन + लाभांश + अटकी हुई आय + ब्याज + किराया + मिश्रित आय + NFIA
    • यह उत्पादन के लिए भुगतान की गई कुल आय को मापता है। बाजार मूल्य के लिए उत्पाद कर जोड़े जाते हैं।​
  • बाजार मूल्य बनाम कारक लागत
    • बाजार मूल्य: कारक लागत (वेतन, ब्याज आदि) + अप्रत्यक्ष कर - सब्सिडी।
    • यह उपभोक्ता द्वारा भुगतान की गई वास्तविक कीमत है।
    • कारक लागत: केवल उत्पादन कारकों को भुगतान, बिना कर।
    • भारत में पहले कारक लागत पर गणना होती थी
    • अब बाजार मूल्य पर। GVA में उत्पाद कर जोड़कर बाजार मूल्य GNP प्राप्त होता है।​
  • महत्वपूर्ण अवधारणाएं और समायोजन
    • सकल बनाम निवल: GNP सकल है (depreciation शामिल); NNP = GNP - मूल्यह्रास।
    • प्रत्यक्ष कर NFIA में शामिल नहीं: केवल कारक आय।
    • आंकड़ों के स्रोत: भारत में CSO, RBI और NSSO डेटा का उपयोग। IMF GNP पर PPP आधारित रैंकिंग करता है।
    • GNP देश की वैश्विक निर्भरता और उत्पादन गुणवत्ता दिखाता है।
  • उदाहरण: भारत का GNP
    • मान लीजिए 2025-26 में भारत का GDP (बाजार मूल्य) 300 लाख करोड़ रुपये है।
    • NFIA 5 लाख करोड़ (प्रवासी भारतीयों की आय अधिक)। GNP = 305 लाख करोड़।
    • व्यय विधि से: C (200) + I (50) + G (40) + (X-M) (10) + NFIA (5) = 305। यह विकास दर, निर्भरता और नीति निर्माण में उपयोगी है।

14. SEBI में 'E' से क्या तात्पर्य है ? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) एक्सचेंज (Exchange)
Solution:
  • SEBI (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) का संक्षिप्त रूप है। यह 12 अप्रैल, 1988 में स्थापित किया गया था।
  • SEBI का पूरा नाम और अर्थ
    • SEBI का पूरा नाम Securities and Exchange Board of India है
    • जहाँ 'S' का मतलब Securities (प्रतिभूतियाँ), 'E' का मतलब Exchange (विनिमय बोर्ड या एक्सचेंज), और 'BI' का मतलब Board of India (भारत का बोर्ड) है।
    • यह भारत का प्रमुख पूंजी बाजार नियामक है जो स्टॉक एक्सचेंज, ब्रोकरों और निवेशकों को नियंत्रित करता है।
    • SEBI की स्थापना अप्रैल 1988 में एक प्रशासनिक निकाय के रूप में हुई
    • लेकिन 30 जनवरी 1992 को SEBI अध्यादेश के माध्यम से इसे पूर्ण वैधानिक दर्जा मिला। इसका मुख्यालय मुंबई में है।
  • SEBI की स्थापना का इतिहास
    • SEBI की स्थापना 1980 के दशक में पूंजी बाजार में बढ़ते घोटालों और अनियमितताओं के कारण हुई।
    • पहले Controller of Capital Issues इसकी भूमिका निभाता था।​
    • 1992 के SEBI अधिनियम ने इसे स्वतंत्र नियामक बनाया, जिसमें अर्ध-विधायी, अर्ध-कार्यकारी और अर्ध-न्यायिक शक्तियाँ शामिल हैं।
    • यह स्टॉक मार्केट की निगरानी करता है और निवेशकों को धोखाधड़ी से बचाता है।
  • SEBI के मुख्य उद्देश्य
    • निवेशक संरक्षण: निवेशकों को सही जानकारी देना और धोखाधड़ी रोकना।​
    • बाजार विकास: प्रतिभूति बाजार को बढ़ावा देना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
    • नियमन: स्टॉक एक्सचेंज, म्यूचुअल फंड, ब्रोकरों पर नियंत्रण।​
  • SEBI की संरचना और शक्तियाँ
    • SEBI में एक अध्यक्ष और अधिकतम 6 सदस्य होते हैं, जिन्हें केंद्र सरकार नियुक्त करती है।​
    • इसकी शक्तियाँ: विनियम बनाना, जांच करना, जुर्माना लगाना, और बाजार उल्लंघनों पर कार्रवाई। केंद्र सरकार नीतिगत निर्देश दे सकती है।
    • बोर्ड का प्रबंधन सदस्यों के हाथ में है, और यह शाखा कार्यालय दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई में चलाता है।​
  • SEBI के प्रमुख कार्य
    • स्टॉक एक्सचेंजों (जैसे NSE, BSE) को मंजूरी और निगरानी।
    • IPO, म्यूचुअल फंड, पोर्टफोलियो मैनेजरों का नियमन।
    • अनैतिक व्यापार (इंसाइडर ट्रेडिंग) रोकना।
    • SEBI ने T+1 सेटलमेंट, ESG डिस्क्लोजर जैसे सुधार किए हैं।
  • महत्वपूर्ण तथ्य
    • वित्त: केंद्र सरकार अनुदान देती है।
    • शक्तियाँ: दस्तावेज जब्त करना, बाजार निलंबित करना।​
    • SEBI ने 1980-90 के हर्षद मेहता जैसे घोटालों के बाद बाजार को मजबूत बनाया।​

15. एचवाईवी (HYV) बीजों का पूर्णरूप क्या है, जो हरित क्रांति के क्रियान्वयन में आवश्यक थे? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) High Yielding Variety seeds (हाई यील्डिंग वैराइटी सीड्स)
Solution:
  • HYV, हाई यील्डिंग वैराइटी सीड्स का संक्षिप्त रूप है।
  • भारत में हरित क्रांति के दौरान गेहूं के लिए उच्च उपज वाली किस्मों (HYV) की शुरुआत की गई।
  • ये बीज बेहतर गुणवत्ता वाले हैं, जो फसलों में अधिशेष और स्वस्थ उत्पादन को बढ़ावा देते हैं।
  • HYV बीजों की उत्पत्ति
    • हरित क्रांति 1960 के दशक में भारत में शुरू हुई, जब देश को खाद्यान्न संकट का सामना करना पड़ रहा था।
    • नॉर्मन बोरलॉग को विश्व स्तर पर हरित क्रांति का जनक कहा जाता है
    • जिन्होंने मैक्सिको में गेहूं के उच्च उपज वाले बीज विकसित किए।
    • भारत में एम.एस. स्वामीनाथन ने इन बीजों को अपनाकर गेहूं और चावल की नई किस्में विकसित कीं
    • जैसे मेक्सिकन गेहूं की किस्में (Lerma Rojo और Sonora 64)।
    • तीसरी पंचवर्षीय योजना (1961-66) के दौरान 1965-66 में इन्हें बड़े पैमाने पर वितरित किया गया।
  • HYV बीजों की विशेषताएं
    • उच्च उत्पादकता: सामान्य बीजों से 2-3 गुना अधिक उपज, जैसे गेहूं में 1 हेक्टेयर से 17-20 क्विंटल तक।​
    • रोग प्रतिरोधक क्षमता: कीटों, रोगों और सूखे के प्रति मजबूत, लेकिन इन्हें रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और नियमित सिंचाई की जरूरत होती है।
    • छोटा कद और मजबूत तना: पौधे छोटे होते हैं, जिससे वे अपनी उपज का बोझ सहन कर पाते हैं बिना गिरे।​
    • संवेदनशीलता: ये 'चमत्कारी बीज' कहलाए क्योंकि सही प्रबंधन से चमत्कारिक परिणाम देते थे, लेकिन मिट्टी की उर्वरता घटने पर प्रभाव कम हो जाता।​
  • हरित क्रांति में भूमिका
    • हरित क्रांति की रणनीति में HYV बीज मुख्य घटक थे
    • जिन्हें रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों, उन्नत सिंचाई (ट्यूबवेल, नहरें) और बहु-फसली खेती के साथ जोड़ा गया।
    • पहले चरण (1965-1970) में इन्हें पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे सिंचित क्षेत्रों में सीमित रखा गया।
    • मुख्य फसलें गेहूं, चावल, ज्वार, बाजरा और मक्का रहीं।
    • 1967-68 तक गेहूं उत्पादन 11 मिलियन टन से बढ़कर 20 मिलियन टन हो गया।
  • प्रभाव और उपलब्धियां
    • उत्पादन वृद्धि: 1960 के दशक में भारत खाद्यान्न आयात पर निर्भर था, लेकिन 1970 तक आत्मनिर्भर हो गया।
    • चावल उत्पादन 34 मिलियन टन से 36 मिलियन टन और गेहूं 10 से 23 मिलियन टन हुआ।​
    • आर्थिक लाभ: किसानों की आय बढ़ी, विशेषकर बड़े किसानों की; ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर सुधरा।​
    • क्षेत्रीय असमानता: लाभ मुख्यतः उत्तरी और दक्षिणी राज्यों तक सीमित रहा, छोटे किसान और पूर्वी/मध्य भारत पिछड़ गए।​
  • चुनौतियां और सीमाएं
    • HYV बीजों ने मिट्टी की उर्वरता घटाई, जल स्तर गिराया और रासायनिक उपयोग से पर्यावरणीय क्षति की।
    • ये दलहनों-तिलहनों पर कम प्रभावी रहे, जिससे खाद्यान्न-संतुलन बिगड़ा।
    • छोटे किसानों को इन्हें अपनाने के लिए पूंजी की कमी रही।
    • फिर भी, ये भारत को अकालमुक्त बनाने वाले प्रमुख कारक बने।

16. एफडीआई (FDI) का पूर्णरूप है ....... I [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (Foreign Direct Investment)
Solution:
  • एफडीआई (FDI) का पूर्ण रूप फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (विदेशी प्रत्यक्ष निवेश) है।
  • एफडीआई किसी देश के एक फर्म या व्यक्ति द्वारा दूसरे देश में स्थित व्यावसायिक गतिविधियों में किया गया निवेश।
  • परिभाषा
    • एफडीआई एक देश की कंपनी या व्यक्ति द्वारा दूसरे देश में व्यावसायिक गतिविधियों में किया गया दीर्घकालिक निवेश है
    • जिसमें प्रबंधन नियंत्रण या महत्वपूर्ण हिस्सेदारी शामिल होती है। यह सामान्यतः 10% या अधिक इक्विटी शेयर के माध्यम से होता है
    • जो निवेशक को निर्णय लेने में प्रभाव देता है।
    • ओईसीडी के अनुसार, यह निवेश तकनीक हस्तांतरण, रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है।
  • प्रकार
    • ग्रीनफील्ड FDI: नई सुविधाएं या कारखाने स्थापित करना।
    • ब्राउनफील्ड FDI: मौजूदा कंपनियों में निवेश या अधिग्रहण।
    • संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर): स्थानीय कंपनियों के साथ साझेदारी।​
  • भारत में एफडीआई
    • भारत में एफडीआई को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
    • अप्रैल 2000 से दिसंबर 2019 तक कुल एफडीआई 6,58,893 मिलियन डॉलर रही।
    • वित्त वर्ष 2024-25 में महाराष्ट्र और कर्नाटक को 51% हिस्सा मिला।
    • जून 2025 तक निवल एफडीआई में 96% गिरावट आई, लेकिन सकल में वृद्धि हुई।
  • महत्व
    • एफडीआई आर्थिक विकास, रोजगार, तकनीकी उन्नति और विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाता है।
    • यह FPI (विदेशी पोर्टफोलियो निवेश) से अलग है, क्योंकि FPI केवल शेयर खरीद पर आधारित होता है बिना नियंत्रण के।

17. SEZ में E का क्या अर्थ है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) Economic (इकोनॉमिक)
Solution:
  • SEZ (स्पेशल इकोनॉमिक जोन) विशेष आर्थिक क्षेत्र का संक्षिप्त रूप है। इसमें 'E' का अर्थ इकोनॉमिक है।
  • SEZ की परिभाषा
    • विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) देश के अंदर एक सीमांकित भौगोलिक क्षेत्र होता है
    • जहाँ व्यापार, वाणिज्य और औद्योगिक गतिविधियों के लिए बाकी देश से अलग, उदार नियम-कानून लागू होते हैं।
    • ये क्षेत्र विदेशी निवेश आकर्षित करने, निर्यात बढ़ाने और आर्थिक विकास को गति देने के लिए बनाए जाते हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, SEZ में कर छूट, शुल्क-मुक्त आयात और सरलीकृत प्रक्रियाएँ उपलब्ध होती हैं।
  • भारत में SEZ का इतिहास
    • भारत में पहली SEZ नीति 2000 में घोषित की गई, लेकिन वर्तमान रूप 2005 के विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम से मिला।
    • यह अधिनियम निर्यात संवर्धन, रोजगार सृजन, FDI आकर्षण और बुनियादी ढांचे के विकास पर केंद्रित है।
    • 2005 से अब तक भारत में 270+ SEZ अधिसूचित हो चुके हैं, जिनमें गुजरात, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य प्रमुख हैं।
  • SEZ के उद्देश्य
    • निर्यात बढ़ावा: SEZ इकाइयों को निर्यात पर केंद्रित नीतियाँ, जैसे शून्य-रेटेड आपूर्ति (GST में छूट)।​
    • रोजगार सृजन: लाखों नौकरियाँ पैदा की गईं, विशेषकर विनिर्माण और IT क्षेत्र में।
    • FDI आकर्षण: सरलीकृत भूमि, श्रम कानून और कर अवकाश (MAT छूट आदि)।
    • आर्थिक विकास: व्यापार संतुलन सुधार, GDP में योगदान और नवाचार केंद्र।
  • SEZ में विशेष सुविधाएँ
    • SEZ इकाइयों को निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:
    • कच्चे माल पर ड्यूटी-फ्री आयात।
    • पूंजीगत संपत्तियों पर 100% FDI।
    • एकल खिड़की प्रणाली से मंजूरी (SEZ बोर्ड द्वारा)।
    • बिजली, पानी जैसी सुविधाएँ सस्ती दरों पर।
  • चुनौतियाँ और सुधार
    • SEZ मॉडल सफल रहा, लेकिन भूमि अधिग्रहण विवाद, अप्रयुक्त भूमि (करीब 40%) और वैश्विक मंदी जैसी समस्याएँ रहीं।
    • हाल के सुधारों में 2021 के बदलाव से SEZ इकाइयों को डोमेस्टिक टैरिफ एरिया (DTA) में स्थानांतरण की अनुमति मिली। 2026 तक नए नियम निर्यात लक्ष्यों को लचीला बना रहे हैं।​
  • वैश्विक उदाहरण
    • चीन का शेन्ज़ेन SEZ एक छोटे गाँव से वैश्विक हब बना, जो भारत के लिए प्रेरणा है।
    • अन्य देश जैसे UAE (जेबेल अली) और वियतनाम में भी SEZ ने तेज विकास किया। भारत में मुंद्रा (गुजरात) और चेन्नई SEZ प्रमुख हैं।

18. भारत ने 1991 में NEP की घोषणा की। NEP का अर्थ .......... है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) New Economic Policy (न्यूइकोनॉमिक पॉलिसी)
Solution:
  • भारत ने अपनी नई आर्थिक नीति वर्ष 1991 (New Economic Policy) में प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के काल में प्रारंभ की। NEP का पूर्ण रूप है-न्यू इकोनॉमिक पॉलिसी।
  • पृष्ठभूमि
    • 1991 में भारत को विदेशी मुद्रा भंडार की भारी कमी, भुगतान संतुलन संकट और उच्च मुद्रास्फीति का सामना करना पड़ा।
    • तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने जुलाई 1991 में इस नीति को लागू किया।
    • यह नियोजित अर्थव्यवस्था से बाजार-उन्मुख अर्थव्यवस्था की ओर बड़ा बदलाव था।
  • मुख्य विशेषताएं
    • नीति को मुख्य रूप से तीन स्तंभों पर आधारित किया गया:
    • उदारीकरण: सरकारी नियंत्रण कम करना, लाइसेंस राज समाप्त करना, औद्योगिक लाइसेंसिंग केवल 18 क्षेत्रों तक सीमित करना (बाद में घटाकर 3)।
    • निजीकरण: सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में विनिवेश, निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन।
    • वैश्वीकरण: विदेशी निवेश को आमंत्रित करना, आयात शुल्क घटाना, विदेशी व्यापार नीति उदार बनाना।
  • उद्देश्य
    • अर्थव्यवस्था को स्थिर करना और मुद्रास्फीति नियंत्रित करना।
    • भुगतान संतुलन सुधारना, निर्यात बढ़ाना।
    • आर्थिक विकास दर को 5-6% तक ले जाना और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाना।
    • निजी क्षेत्र की भूमिका मजबूत करना।
  • प्रभाव
    • GDP वृद्धि दर 1991 के बाद औसतन 6-7% रही।
    • विदेशी निवेश बढ़ा, IT और सेवा क्षेत्रों का उदय हुआ।
    • गरीबी दर घटी, मध्यम वर्ग का विस्तार।
    • हालांकि, असमानता बढ़ी और कृषि-ग्रामीण क्षेत्र प्रभावित रहे।

19. 'BPO' का पूर्णरूप क्या है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 3 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) Business Process Outsourcing (बिजनेस प्रॉसेस आउटसोर्सिंग)
Solution:
  • BPO, बिजनेस प्रॉसेस आउटसोर्सिंग का संक्षिप्त रूप है।
  • जब कंपनियां अपने व्यवसाय संबंधी कार्यों को करने के लिए किसी तीसरे पक्ष का उपयोग करती है, तो उसे बीपीओ कहलाता है।
  • BPO की परिभाषा
    • BPO में कंपनियां ग्राहक सेवा, डेटा प्रविष्टि, लेखा-जोखा या मानव संसाधन जैसे कार्यों को तीसरे पक्ष को आउटसोर्स करती हैं
    • मुख्य व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित कर सकें। यह लागत कम करने, दक्षता बढ़ाने और विशेषज्ञता प्राप्त करने का तरीका है।
    • भारत जैसे देशों में BPO उद्योग बहुत बड़ा है, खासकर आईटी-सक्षम सेवाओं (ITES) के रूप में।
  • BPO के प्रकार
    • बैक-ऑफिस BPO: आंतरिक कार्य जैसे वित्त, HR और डेटा प्रबंधन शामिल हैं।
    • फ्रंट-ऑफिस BPO: ग्राहक-संपर्क सेवाएं जैसे कॉल सेंटर और तकनीकी सहायता।
    • ऑफशोर BPO: कार्य विदेशी देशों (जैसे भारत) में स्थानांतरित किया जाता है।
    • नीर्शोर/ओनशोर BPO: कार्य उसी देश या पड़ोसी देश में।
  • BPO के फायदे
    • BPO कंपनियों को 24/7 सेवाएं, कम लागत (भारत में मजदूरी सस्ती होने से), गुणवत्ता सुधार और वैश्विक प्रतिभा तक पहुंच प्रदान करता है।
    • इससे व्यवसाय अपनी कोर क्षमताओं पर फोकस कर पाते हैं। हालांकि, डेटा सुरक्षा और सांस्कृतिक अंतर चुनौतियां हो सकती हैं।
  • BPO से संबंधित अन्य शब्द
    • KPO (Knowledge Process Outsourcing): उच्च-स्तरीय कार्य जैसे अनुसंधान और विश्लेषण।​
    • ITES: BPO का आईटी-संबंधित रूप, जिसमें सॉफ्टवेयर सहायता शामिल है।​
    • HRO: केवल HR प्रक्रियाओं का आउटसोर्सिंग।​
  • भारत में BPO का महत्व
    • भारत विश्व का BPO हब है, नासिक, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में लाखों नौकरियां पैदा करता है।
    • BPO जॉब्स के लिए 12वीं पास या ग्रेजुएशन पर्याप्त, अच्छी संचार स्किल्स जरूरी।​

20. FII में 'F' का तात्पर्य किससे है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) Foreign (फॉरेन)
Solution:
  • FII, फॉरेन इंडस्ट्रियल इन्वेस्टर का संक्षिप्त रूप है। विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार संचालित संस्थागत संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं
  • जो विदेशी वित्तीय बाजारों में महत्वपूर्ण वित्तीय संसाधनों का निवेश करते हैं।
  • FII की पूरी परिभाषा
    • FII का पूरा नाम Foreign Institutional Investor (विदेशी संस्थागत निवेशक) है। यह वे बड़ी विदेशी संस्थाएं या निवेश फंड हैं
    • जो अपने देश के बाहर, जैसे भारत में, शेयर बाजार, बॉन्ड या अन्य वित्तीय साधनों में निवेश करती हैं।
    • इनका मुख्य उद्देश्य पोर्टफोलियो में विविधता लाना, लाभ कमाना और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के विकास का फायदा उठाना होता है।
    • भारत में ये निवेशक SEBI (सेबी) के सख्त नियमों के तहत काम करते हैं और पंजीकरण अनिवार्य है।
  • FII के प्रकार और निवेश के क्षेत्र
    • FII दो श्रेणियों में बंटे होते हैं: पंजीकृत FII (Category I) जैसे पेंशन फंड, म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां; और अन्य FII (Category II) जैसे हेज फंड या प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स।
    • ये प्राइमरी मार्केट (IPO, बॉन्ड इश्यू) और सेकेंडरी मार्केट (NSE, BSE पर ट्रेडिंग) दोनों में निवेश करते हैं।​
    • सीमाएं: किसी कंपनी में अधिकतम 10% हिस्सेदारी तक (कुल FII के लिए 24-49% तक सेक्टर के अनुसार), सरकारी सिक्योरिटीज में भी निवेश संभव।
  • FII का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
    • FII विदेशी पूंजी लाकर रुपये को मजबूत करते हैं, बाजार में तरलता बढ़ाते हैं
    • कंपनियों को विकास के लिए फंड प्रदान करते हैं। हालांकि, इनके अचानक खरीद-बिक्री से शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव आता है
    • जैसे FII बिकवाली पर सेंसेक्स गिरना। 2025 तक भारत में FII निवेश बढ़ा है
    • लेकिन वैश्विक घटनाओं (जैसे US ब्याज दरें) से प्रभावित होता है। ये DII (घरेलू संस्थागत निवेशक) के विपरीत होते हैं, जो स्थानीय रहते हैं।