संगठन एवं संस्थान (परम्परागत सामान्य ज्ञान)

Total Questions: 11

1. शिक्षा और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए भारतीय विद्या भवन की स्थापना किसने की ? [MTS (T-I) 05 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) डॉ. कन्हैयालाल मानेकलाल मुंशी
Solution:
  • भारतीय विद्या भवन भारत का एक शैक्षिक न्यास (ट्रस्ट) है।
  • इसकी स्थापना कन्हैयालाल मानेकलाल (माणिकलाल) मुंशी ने 7 नवंबर, 1938 को महात्मा गांधी की प्रेरणा से की थी।
  • सरदार वल्लभभाई पटेल तथा राजगोपालाचारी जैसी महान विभूतियों के सक्रिय योगदान से भारतीय विद्या भवन गांधीजी के आदर्शों पर चलते हुए आगे बढ़ा।
  • स्थापना का इतिहास
    •  लोग नई भारत की कल्पना कर रहे थे। मुंशी जी ने इसे भारतीय संस्कृति, शिक्षा और मूल्यों को संरक्षित करने के लिए बनाया
    • आधुनिकता के साथ भारतीय जड़ें मजबूत रहें।
    • सरदार वल्लभभाई पटेल और सी. राजगोपालाचारी जैसे नेताओं ने इसका सक्रिय समर्थन किया।
  • संस्थापक का परिचय
    • डॉ. कन्हैयालाल मुंशी एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी, लेखक, राजनीतिज्ञ और शिक्षाविद् थे।
    • वे संविधान सभा के सदस्य रहे और संविधान निर्माण में योगदान दिया।
    • गुजराती साहित्य में उनकी रचनाएँ प्रसिद्ध हैं, और उन्होंने भारतीय विद्या भवन को एक सांस्कृतिक मिशन के रूप में देखा।
    • गांधीजी के आशीर्वाद से शुरू हुआ यह प्रयास आज वैश्विक स्तर पर फैला है।
  • उद्देश्य और गतिविधियाँ
    • भवन का मुख्य लक्ष्य शिक्षा और संस्कृति को बढ़ावा देना है।
    • यह आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय परंपराओं को जोड़ता है, जैसे संस्कृत कक्षाएँ इंजीनियरिंग कॉलेजों के साथ।
    • यह स्कूल, कॉलेज, पुस्तक प्रकाशन (भवन बुक यूनिवर्सिटी के तहत 1800+ किताबें) और पत्रिकाएँ (जैसे भवन जर्नल) चलाता है।
    • देशभर में 350+ संस्थान इससे जुड़े हैं, जो नैतिक और सांस्कृतिक शिक्षा देते हैं।
  • प्रमुख केंद्र और विकास
    • मुंबई मुख्यालय के अलावा दिल्ली केंद्र 1950 में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने स्थापित किया
    • जो 4.84 एकड़ में फैला है। नागपुर जैसे स्थानों में सांस्कृतिक केंद्र हैं
    • जिनका उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 2023 में किया।
    • भवन ने स्वतंत्रता के बाद शिक्षा के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए।
  • वर्तमान स्थिति
    • आज भवन एक प्रमुख शैक्षिक ट्रस्ट है, जो भारतीय मूल्यों को वैश्विक संदर्भ में प्रचारित करता है।
    • यह विद्यालयों में आधुनिक विज्ञान, कला, वाणिज्य के साथ गीता कक्षाएँ और ललित कला की शिक्षा देता है।
    • संस्था का योगदान शिक्षा को सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में अद्वितीय है।

2. निम्नलिखित में से कौन अहमदाबाद शहर में नृत्य, नाटक, संगीत और कठपुतली में छात्रों को प्रशिक्षित करने पर ध्यान केंद्रित करने वाली संस्था 'दर्पण एकेडमी ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स' की संस्थापक और निदेशक थीं? [Phase-XI 30 जून, 2023 (II-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 22 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) मृणालिनी साराभाई
Solution:
  • 'मृणालिनी साराभाई' अहमदाबाद शहर में, दर्पण अकादमी ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स की संस्थापक और निदेशक थीं
  • जो नृत्य, रंगमंच, संगीत और कठपुतली सिखाने के लिए एक स्कूल है।
  • भारत सरकार ने मृणालिनी साराभाई को वर्ष 1965 में पद्मश्री पुरस्कार और वर्ष 1992 में पद्म भूषण राष्ट्रीय नागरिक पुरस्कार से सम्मानित किया था।
  • संस्थान का परिचय
    • दर्पण एकेडमी ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स गुजरात के अहमदाबाद में 1949 में स्थापित एक प्रमुख बहु-विषयक संस्थान है।
    • यह नृत्य (जैसे भरतनाट्यम और कथकली), नाटक, संगीत तथा कठपुतली कला में पारंपरिक भारतीय कलाओं के साथ-साथ समकालीन और प्रयोगात्मक कार्यों को बढ़ावा देता है।
    • संस्थान सामाजिक परिवर्तन के लिए कला को माध्यम बनाता है और छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करता है।
  • मृणालिनी साराभाई का जीवन और योगदान
    • मृणालिनी साराभाई (11 मई 1918 - 21 जनवरी 2016) एक प्रसिद्ध भारतीय शास्त्रीय नर्तकी, कोरियोग्राफर और प्रशिक्षक थीं।
    • उन्होंने अपने पति विक्रम साराभाई (भारत के प्रमुख वैज्ञानिक) के साथ मिलकर दर्पण एकेडमी की स्थापना की और लंबे समय तक इसके निदेशक रहीं।
    • उन्होंने 300 से अधिक नृत्य-नाटकों की कोरियोग्राफी की, नृत्य को कहानी कहने के माध्यम के रूप में विकसित किया
    • कई पुस्तकें लिखीं जिनमें उनकी आत्मकथाएँ शामिल हैं।
    • उनके योगदान के लिए उन्हें 1965 में पद्म श्री और 1992 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
  • संस्थान का विकास और विरासत
    • एकेडमी की स्थापना के बाद मृणालिनी ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
    • उनकी पुत्री मल्लिका साराभाई ने पिछले तीन दशकों से इसका संचालन किया है।
    • संस्थान प्रतिवर्ष विक्रम साराभाई इंटरनेशनल आर्ट्स फेस्टिवल (इंटरआर्ट) आयोजित करता है
    • मृणालिनी साराभाई अवॉर्ड फॉर क्लासिकल एक्सीलेंस देता है।
    • यह भारत में प्रदर्शन कलाओं के संरक्षण और नवाचार का केंद्र बना हुआ है।

3. वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून की स्थापना इम्पीरियल वन अनुसंधान संस्थान के रूप में की गई थी। किस वर्ष इसे 'इम्पीरियल वन अनुसंधान संस्थान' के रूप में स्थापित किया गया था? [Phase-XI 28 जून, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) 1906
Solution:
  • भारतीय वन अनुसंधान संस्थान देहरादून में स्थित है। यह 1878 ई. में वन विद्यालय के रूप में स्थापित किया गया था
  • बाद में वर्ष 1906 में इसका नाम बदलकर इम्पीरियल वन अनुसंधान संस्थान कर दिया गया।
  • स्थापना का इतिहास
    •  जिसे जर्मन वन वैज्ञानिक डिट्रिच ब्रैंडिस ने शुरू किया था।
    • 5 जून 1906 को भारत सरकार ने इसे पूर्ण अनुसंधान संस्थान के रूप में पुनर्गठित कर 'इम्पीरियल फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट' नाम दिया
    • देश में वानिकी अनुसंधान को वैज्ञानिक आधार प्रदान किया जा सके।
    • शुरुआत में इसका प्रबंधन इंस्पेक्टर जनरल ऑफ फॉरेस्ट्स करते थे
    • लेकिन 1908 में शोध और प्रशासनिक जिम्मेदारियां अलग कर दी गईं।
  • भवन निर्माण और विकास
    • संस्थान का भव्य भवन, जो 450 एकड़ में फैला है, सी.जी. ब्लूमफील्ड द्वारा डिजाइन किया गया था
    • सरदार रंजीत सिंह के नेतृत्व में 1929 तक पूरा हुआ।
    • वायसराय लॉर्ड इरविन ने 7 नवंबर 1929 को इसका उद्घाटन किया।
    • स्वतंत्रता के बाद यह भारतीय वानिकी अनुसंधान संस्थान बना और 1991 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला।
  • महत्वपूर्ण भूमिका
    • एफआरआई भारतीय वन सेवा और राज्य वन सेवा के प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र है
    • जो वानिकी, पर्यावरण और लकड़ी विज्ञान पर शोध करता है।
    • 1986 में भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) के गठन के बाद यह उसके अधीन आया
    • जो पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत कार्य करता है।
    • आज यह छह संग्रहालयों (जैसे पैथोलॉजी, साइलिकulture) वाला प्रमुख अनुसंधान केंद्र है।

4. भारत का पहला महिला संगठन, भारत स्त्री महामंडल की स्थापना ....... के द्वारा की गई थी। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) सरला देवी चौधरानी
Solution:
  • भारत स्त्री महामंडल भारत में एक महिला संगठन था, जिसकी स्थापना 'सरला देवी चौधरानी' ने वर्ष 1910 में प्रयागराज में की थी।
  • स्थापना का विवरण
    •  इसका केंद्र लाहौर में नवंबर 1910 में एक निजी बैठक में गठित किया गया
    • जबकि उद्घाटन सत्र दिसंबर 1910 में इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में आयोजित हुआ।
    • सरला देवी चौधरानी, जो रवींद्रनाथ टैगोर की भतीजी थीं, ने इस संगठन की नींव रखी।
    • उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता जनजीरा की बेगम साहिबा (एक मुस्लिम महिला) ने की
    • भोपाल की नवाब बेगम भी उपस्थित रहीं, जो उस समय की एक दुर्लभ हिंदू-मुस्लिम एकता को दर्शाता है।
  • सरला देवी चौधरानी का परिचय
    • सरला देवी का जन्म 1872 में हुआ था। वे फारसी, फ्रेंच और संस्कृत की विद्वान थीं
    • साथ ही साहित्य, संगीत और कला में रुचि रखती थीं। उनकी शादी आर्य समाजी नेता रामभुज चौधरी से हुई।
    • स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रहते हुए उन्होंने 1915 में अखिल भारतीय क्रांतिकारी पार्टी का भी गठन किया और क्रांतिकारियों की गुप्त सहायता की।
  • उद्देश्य और गतिविधियाँ
    • संगठन का मुख्य लक्ष्य महिलाओं की नैतिक और भौतिक प्रगति था।
    • यह हर जाति, धर्म, वर्ग और दल की महिलाओं को एकजुट कर महिलाओं की शिक्षा, सुधार और मानवता की प्रगति के लिए कार्य करने पर केंद्रित था।
    • उस समय स्त्री शिक्षा बहुत पिछड़ी थी, इसलिए शिक्षा को बढ़ावा देना प्राथमिकता थी।
    • संगठन ने लाहौर, दिल्ली, कराची, अमृतसर, हैदराबाद, कानपुर, कलकत्ता, हजारीबाग, मिदनापुर आदि शहरों में शाखाएँ खोलीं।
    • इसमें कोई ब्रिटिश सदस्य नहीं था, जो स्वदेशी भावना को दर्शाता है।
  • ऐतिहासिक महत्व
    • यह भारत का पहला अखिल भारतीय स्तर का महिला संगठन था
    • जो 20वीं सदी के प्रारंभिक महिला आंदोलन की आधारशिला बना।
    • इसने महिलाओं को सामाजिक और राजनीतिक मंच प्रदान किया
    • जो बाद के आंदोलनों जैसे ऑल इंडिया विमेंस कॉन्फ्रेंस (1927) के लिए प्रेरणा बना।

5. कौन-सा संगठन राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO) और अन्य स्रोतों से एकत्र आंकड़ों के आधार पर भारत में आधिकारिक निर्धनता आकलन जारी करता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) नीति आयोग
Solution:
  • आधिकारिक निर्धनता आकलन अब नीति आयोग द्वारा राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO) द्वारा एकत्र आंकड़ों के आधार पर जारी किया जाता है।
  • भारत में राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO) और अन्य स्रोतों से एकत्र आंकड़ों के आधार पर आधिकारिक निर्धनता (गरीबी) आकलन जारी करने वाला प्रमुख संगठन नीति आयोग (NITI Aayog) है।
  • यह NSSO के बड़े पैमाने पर घरेलू उपभोग सर्वेक्षणों के डेटा का उपयोग करके गरीबी रेखा, गरीबी अनुपात और बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) जैसी रिपोर्टें प्रकाशित करता है।​
  • NSSO की भूमिका
    • NSSO (अब राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन के रूप में जाना जाता है, जो सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन है
    • भारत में सामाजिक-आर्थिक डेटा संग्रह का प्राथमिक स्रोत है।
    • यह नियमित रूप से घरेलू उपभोग व्यय, रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा पर नमूना सर्वेक्षण करता है
    • जैसे 75वां दौर (2017-18) जो उपभोग पैटर्न पर केंद्रित था। इन आंकड़ों के बिना आधिकारिक गरीबी अनुमान संभव नहीं
    • क्योंकि गरीबी रेखा उपभोग स्तर (कैलोरी-आधारित न्यूनतम आवश्यकताओं) पर आधारित होती है।
  • नीति आयोग का कार्य
    • नीति आयोग, जो 2015 में योजना आयोग का स्थान ले चुका है, NSSO के अलावा NFHS (राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण) जैसे अन्य स्रोतों से डेटा लेकर आधिकारिक अनुमान जारी करता है।
    • उदाहरणस्वरूप, राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (N-MPI) रिपोर्ट 2023 में नीति आयोग ने पाया कि 2013-14 से 2022-23 के बीच 24.82 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले।
    • यह आकलन स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के 12 संकेतकों पर आधारित होता है।
    • योजना आयोग के समय भी यही प्रक्रिया थी, लेकिन अब नीति आयोग इसे कार्यान्वित करता है।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • स्वतंत्रता के बाद: योजना आयोग ने 1962 से आधिकारिक गरीबी आकलन शुरू किया, जो NSSO सर्वेक्षणों पर निर्भर था।
    • प्रमुख समितियां: अलघ समिति (1979), लकड़ावाला समिति (1993), तेंदुलकर समिति (2009) ने विधियों को परिष्कृत किया।
    • तेंदुलकर पद्धति वर्तमान में उपयोग में है, जो मिश्रित संदर्भ उपभोग पर आधारित है।
    • रुझान: 2011-12 में गरीबी दर 21.9% थी (तेंदुलकर के अनुसार), लेकिन 2017-18 NSSO डेटा विवादास्पद रहा क्योंकि ग्रामीण-शहरी उपभोग असंगत पाया गया।
    • नवीनतम MPI रिपोर्ट्स नीति आयोग से आती हैं।​
  • प्रक्रिया का विवरण
    • डेटा संग्रह: NSSO देशभर से यादृच्छिक नमूने (लगभग 1 लाख घर) लेता है।
    • गरीबी रेखा निर्धारण: ग्रामीण क्षेत्र में ₹32/दिन, शहरी में ₹47/दिन (2011-12 मूल्य, मुद्रास्फीति समायोजित) जैसे थ्रेशोल्ड।
    • अनुमान जारी: नीति आयोग कार्य बल गठित कर विश्लेषण करता है और रिपोर्ट प्रकाशित करता है
    • जो नीति-निर्माण (जैसे PM Garib Kalyan Anna Yojana) के लिए आधार बनती है। अन्य संगठन जैसे RBI या CSO सहायक भूमिका निभाते हैं।

6. राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी निम्नलिखित में से किस राज्य में स्थित है? [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) उत्तर प्रदेश
Solution:
  • राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, उत्तर प्रदेश के वर्तमान प्रयागराज में अवस्थित है।
  • गौरतलब है कि वर्ष 1930 में स्थापित यह भारत की सबसे पुरानी विज्ञान अकादमी है।
  • स्थापना और इतिहास
    • इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय वैज्ञानिकों के शोध कार्यों को प्रकाशित करने का मंच प्रदान करना और उनके बीच वैज्ञानिक विचारों का आदान-प्रदान बढ़ावा देना था।
    • समय के साथ यह अकादमी 'थिंक टैंक' के रूप में विकसित हुई
    • जो सामाजिक-वैज्ञानिक मुद्दों पर सलाह देती है। स्वतंत्रता के बाद सरकार ने इसे महत्वपूर्ण भूमिका दी।​​
  • स्थान विवरण
    • अकादमी का मुख्यालय प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में है। यह 5, सर सैयद मार्ग पर स्थित है।
    • प्रयागराज एक ऐतिहासिक शहर है, जो गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम के लिए प्रसिद्ध है।
    • अकादमी के अतिरिक्त क्षेत्रीय केंद्र भी हैं, लेकिन मुख्यालय यहीं है।
  • कार्य और महत्व
    • NASI वैज्ञानिक सम्मेलन, सेमिनार, कार्यशालाएं आयोजित करती है। यह फेलोशिप, पदक प्रदान करती है
    • विज्ञान शिक्षा को बढ़ावा देती है। यह विभिन्न विज्ञान क्षेत्रों के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों को फेलो के रूप में सम्मानित करती है। सरकार को वैज्ञानिक नीतियों पर सलाह भी देती है।​​
  • अन्य संबंधित संस्थाएं
    • ध्यान दें कि भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (INSA) अलग संस्था है, जो नई दिल्ली में स्थित है।
    • INSA की स्थापना 1935 में हुई थी। NASI प्रयागराज-केंद्रित है
    • जबकि INSA राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करती है। दोनों विज्ञान प्रगति में योगदान देते हैं।

7. निम्नलिखित में से किस व्यापार समझौते का उद्देश्य व्यापार के लिए क्षेत्र की क्षमता को अधिकतम करने और अपने लोगों के विकास को प्राप्त करने के लिए अंतः सार्क आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है? [CGL (T-I) 21 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) SAFTA
Solution:
  • दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (SAFTA) का उद्देश्य दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) के देशों के बीच अंतः सार्क आर्थिक सहयोग को मजबूत बनाकर व्यापार के लिए क्षेत्र की क्षमता को बढ़ाना और लोगों के विकास को हासिल करना है। यह समझौता वर्ष 2006 में लागू हुआ था।
  • उत्तर: दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (SAFTA)
    • निम्नलिखित में से वह व्यापार समझौता जो "व्यापार के लिए क्षेत्र की क्षमता को अधिकतम करने और अपने लोगों के विकास को प्राप्त करने के लिए अंतः-सार्क आर्थिक सहयोग को मजबूत करना" उद्देश्य रखता है
    • वह दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (South Asian Free Trade Area - SAFTA) है।
    • यह समझौता दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) के सदस्य देशों के बीच आर्थिक एकीकरण का प्रमुख साधन है।
  • SAFTA का परिचय
    • SAFTA एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौता है
    • जो SAARC के आठ सदस्य देशों—भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, मालदीव और अफगानिस्तान—के बीच कार्य करता है।
    • इसका हस्ताक्षर 2004 में इस्लामाबाद SAARC शिखर सम्मेलन में हुआ था और इसे 1 जनवरी 2006 से लागू किया गया।
    • SAFTA का मूल लक्ष्य क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा देकर आर्थिक विकास सुनिश्चित करना है
    • जिसमें टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को धीरे-धीरे कम या समाप्त करना शामिल है।
    • इससे अंतः-क्षेत्रीय व्यापार में वृद्धि हुई है, हालांकि पूर्ण क्षमता अभी प्राप्त नहीं हुई।
  • SAFTA के मुख्य उद्देश्य
    • क्षेत्रीय व्यापार क्षमता अधिकतम化: सदस्य देशों के बीच वस्तुओं के व्यापार पर टैरिफ को 2016 तक 0-5% तक कम करना, जिससे निर्यात-आयात बढ़े।​
    • अंतः-SAARC आर्थिक सहयोग मजबूत करना: आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देकर सामूहिक आत्मनिर्भरता हासिल करना, जिसमें सेवाएं, निवेश और व्यापार सुविधा शामिल हैं।​
    • लोगों के विकास को प्राप्त करना: व्यापार वृद्धि से रोजगार सृजन, गरीबी उन्मूलन और सामाजिक-आर्थिक प्रगति सुनिश्चित करना।​
  • SAFTA की विशेषताएं और प्रावधान
    • टैरिफ न्यूनीकरण: विकासशील देशों (जैसे भारत, पाकिस्तान) को 7 वर्षों में और कम विकसित देशों (LDCs जैसे नेपाल, भूटान) को 10 वर्षों में टैरिफ शून्य करना।​
    • संवेदनशील सूची: घरेलू उद्योगों की रक्षा के लिए कुछ वस्तुओं को टैरिफ से छूट, लेकिन इसे समय के साथ कम करना।​
    • गैर-टैरिफ बाधाएं हटाना: क्वांटिटेटिव प्रतिबंध, मानक और नियमों को सरल बनाना।​
    • व्यापार सुविधा: सीमा शुल्क प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण और पारगमन सुविधाएं।​
    • संरक्षण उपाय: आयात में अचानक वृद्धि पर सुरक्षा कवच।​
  • SAFTA का कार्यान्वयन और प्रगति
    • 2006 से लागू होने के बाद, SAFTA ने अंतः-क्षेत्रीय व्यापार को 5% से बढ़ाकर 10-15% तक पहुंचाया, लेकिन वैश्विक औसत (50%) से कम है।
    • भारत ने सबसे अधिक योगदान दिया, लेकिन राजनीतिक तनाव (जैसे भारत-पाकिस्तान) और गैर-टैरिफ बाधाओं ने बाधा डाली।
    • हाल के वर्षों में, डिजिटल व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला एकीकरण पर जोर बढ़ा है।
    • 2026 तक, SAFTA को SAARC आर्थिक संघ की ओर विस्तारित करने की चर्चा है।
  • SAFTA बनाम अन्य SAARC समझौते
    • SAFTA SAPTA (1993, प्राथमिक व्यापार समझौता) का उन्नत रूप है, जो सीमित था।
    • अन्य जैसे SAARC विकास कोष व्यापार पर केंद्रित नहीं। प्रश्न का उद्देश्य स्पष्ट रूप से SAFTA से मेल खाता है।
  • चुनौतियां और भविष्य
    • चुनौतियां: सीमित संपर्क, विश्वास की कमी, असमान अर्थव्यवस्थाएं। भारत BIMSTEC जैसे विकल्पों पर जोर दे रहा
    • लेकिन SAFTA क्षेत्रीय एकीकरण का आधार बनी हुई।
    • भविष्य में, डिजिटल अर्थव्यवस्था और हरित व्यापार से क्षमता बढ़ सकती है।
    • SAFTA ने दक्षिण एशिया को वैश्विक व्यापार में मजबूत किया, लेकिन पूर्ण सफलता के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति जरूरी।

8. भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद, एक स्वायत्त संगठन, भारत सरकार द्वारा ....... में स्थापित किया गया था [CHSL (T-I) 9 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) 1972
Solution:
  • भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद एक स्वायत्त संगठन है, जिसकी स्थापना सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के तहत वर्ष 1972 में की गई थी।
  • परिषद का मुख्य उद्देश्य इतिहास अनुसंधान को बढ़ावा देना और इतिहास के यथार्थ एवं वैज्ञानिक लेखन को बढ़ावा तथा प्रोत्साहन देना है।
  • स्थापना का इतिहास
    • जिसमें प्रो. नरेंद्र सिंह, डॉ. नूर-उल-हसन, श्री वीराराघवन और श्रीमती एस. दुरैस्वामी जैसे सदस्य शामिल थे।
    • शिक्षा एवं समाज कल्याण मंत्रालय (वर्तमान शिक्षा मंत्रालय) ने इसे सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के तहत पंजीकृत किया।
    • इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है, और यह उच्च शिक्षा विभाग से अनुदान प्राप्त करता है।
  • उद्देश्य और कार्य
    • परिषद् का मुख्य लक्ष्य इतिहास के क्षेत्र में शोध को दिशा देना
    • वस्तुनिष्ठ इतिहास लेखन को प्रोत्साहित करना तथा शोधकर्ताओं को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करना है। इसके प्रमुख कार्यों में शामिल हैं:​
    • इतिहास अनुसंधान कार्यक्रमों का प्रायोजन और संस्थानों को सहायता।
    • शोधकर्ताओं के लिए छात्रवृत्तियाँ, फेलोशिप और ग्रांट प्रदान करना।
    • संगोष्ठियाँ, कार्यशालाएँ और सम्मेलन आयोजित करना।
    • स्रोत सामग्री का संग्रहण, प्रकाशन और अभिलेखागारों का सर्वेक्षण।
    • राष्ट्रीय स्तर पर इतिहासकारों की सूची तैयार करना तथा प्रलेखन केंद्र विकसित करना।​
  • संगठन संरचना
    • ICHR एक स्वायत्त निकाय है जो शिक्षा मंत्रालय के पर्यवेक्षण में कार्य करता है।
    • इसमें एक कार्यकारी समिति, शासी निकाय और विभिन्न समितियाँ हैं।
    • हाल ही में प्रोफेसर रघुवेंद्र तंवर को तीन वर्ष के लिए अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
    • इसके क्षेत्रीय केंद्र पुणे (महाराष्ट्र), बेंगलुरु (कर्नाटक) और गुवाहाटी (असम) में स्थित हैं।
  • उपलब्धियाँ और योगदान
    • परिषद् ने सैकड़ों शोध परियोजनाओं को वित्त पोषित किया है और इतिहास लेखन में नई दिशाएँ प्रदान की हैं।
    • यह प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक भारतीय इतिहास के वैज्ञानिक अध्ययन को बढ़ावा देती है।
    • 2023 में अपनी 52वीं स्थापना वर्षगाँठ मनाई गई, जिसमें शैक्षिक भ्रमण और कार्यक्रम आयोजित किए गए।

9. "उन्नत हल्का हेलीकॉप्टर (Advanced Light Helicopter (ALH) MK III" किस संगठन द्वारा निर्मित किया गया है? [CHSL (T-I) 17 मार्च, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) एचएएल
Solution:
  • हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा स्वदेशी रूप से निर्मित एएलएच एमके-III हेलीकॉप्टर में अत्याधुनिक उपकरण लगे हैं
  • जिसमें उन्नत रडार के साथ-साथ इलेक्ट्रो ऑप्टिकल सेंसर, शक्ति इंजन, फुल ग्लास कॉकपिट, उच्च तीव्रता वाली सर्च लाइट, उन्नत संचार प्रणाली, स्वचालित पहचान प्रणाली और साथ ही खोज और बचाव होमर शामिल हैं।
  • HAL का परिचय
    • यह भारत सरकार के स्वामित्व वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है
    • जो विमान, हेलीकॉप्टर और उनके उपकरणों का डिज़ाइन, विकास एवं निर्माण करती है।
    • HAL ने ALH श्रृंखला को मूल रूप से डिज़ाइन किया
    • जिसे ध्रुव के नाम से भी जाना जाता है, और MK III इसकी उन्नत संस्करण है।
  • ALH MK III की विशेषताएँ
    • यह ट्विन-इंजन वाला मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर है
    • जिसमें शक्ति इंजन, पूर्ण ग्लास कॉकपिट, उन्नत रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर, उच्च तीव्रता वाली सर्चलाइट, आधुनिक संचार प्रणाली और खोज-बचाव होमर जैसी अत्याधुनिक सुविधाएँ हैं।
    • यह नौसेना, थलसेना, वायुसेना और तटरक्षक बल के लिए उपयोगी है
    • जिसमें समुद्री निगरानी, तटीय सुरक्षा, खोज-बचाव, परिवहन और सर्वेक्षण जैसे कार्य शामिल हैं।
    • MK III पूर्व मॉडलों की तुलना में बेहतर इंजन, एवियोनिक्स और मिशन-विशिष्ट उपकरणों से लैस है।
  • उपयोगकर्ता और परिचालन
    • भारतीय नौसेना ने 2021 में विशाखापत्तनम के आईएनएस देगा में तीन ALH MK III को शामिल किया
    • जो पूर्वी नौसेना कमान की क्षमता बढ़ाते हैं। तटरक्षक बल ने भी भुवनेश्वर, पोरबंदर, चेन्नई और कोच्चि में इन्हें तैनात किया है।
    • यह हेलीकॉप्टर दिन-रात संचालन, लंबी दूरी की खोज-बचाव और आक्रामक भूमिकाओं में सक्षम है।
    • हाल ही में 2025 में तटरक्षक के एक ALH MK III दुर्घटना की खबर भी आई।
  • विकास और महत्व
    • ALH कार्यक्रम DRDO के सहयोग से शुरू हुआ, लेकिन HAL ने इसका पूरा निर्माण किया, जो आत्मनिर्भर भारत अभियान का हिस्सा है।
    • यह हेलीकॉप्टर विभिन्न मौसमों में उच्च प्रदर्शन के लिए जाना जाता है
    • भारतीय सशस्त्र बलों की विविध आवश्यकताओं को पूरा करता है।
    • HAL ने सैकड़ों इकाइयाँ बनाई हैं, जो भारत की एयरोस्पेस स्वावलंबन को मजबूत करती हैं।

10. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) का निम्नलिखित में से कौन-सा पद इसके संगठन चार्ट के स्तर 1 (शीर्ष स्तर) का पद है? [CHSL (T-I) 14 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) सचिव डीडी तथा आर. एंड डी.
Solution:
  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) का सचिव डीडी तथा आर. एंड डी. पद इसके संगठन चार्ट के स्तर 1 (शीर्ष स्तर) का पद है।
  • डीआरडीओ की स्थापना वर्ष 1958 में की गई थी, इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है।
  • DRDO संगठन चार्ट का अवलोकन
    • DRDO का संगठन चार्ट स्पष्ट रूप से पदानुक्रमित संरचना दर्शाता है, जहाँ स्तर 1 पर केवल एक ही पद होता है।
    • यह Secretary, Department of Defence Research & Development (DD R&D) और Chairman, DRDO के रूप में जाना जाता है।
    • यह पद भारत सरकार के कैबिनेट सचिव स्तर (लेवल 17) का होता है और Distinguished Scientist (DS) ग्रेड के वैज्ञानिक को नियुक्त किया जाता है।
    • यह पद न केवल DRDO का नेतृत्व करता है बल्कि रक्षा अनुसंधान विभाग का भी प्रमुख होता है, जो विभिन्न सरकारी नीतियों के साथ समन्वय सुनिश्चित करता है।
  • पद की जिम्मेदारियाँ
    • इस पद का धारक DRDO की 50+ प्रयोगशालाओं, क्लस्टर्स और परियोजनाओं का समग्र पर्यवेक्षण करता है।
    • इसमें मिसाइल, विमानन, इलेक्ट्रॉनिक्स, सामग्री विज्ञान आदि क्षेत्रों में रक्षा प्रौद्योगिकियों का विकास शामिल है।
    • साथ ही, यह तीनों सेनाओं (सेना, नौसेना, वायुसेना) की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नीतिगत निर्णय लेता है।
    • उदाहरणस्वरूप, यह BrahMos जैसी परियोजनाओं और अन्य महादिगेशकों (DG) के साथ तालमेल बनाता है।
  • स्तर 2 और निचले स्तरों से अंतर
    • स्तर 1 के ठीक नीचे स्तर 2 पर Director Generals (DGs) होते हैं
    • जैसे DG(BrahMos), DG(HR), DG(PC&SI), DG(R&M), DG(TM), DG(SAM) आदि।
    • ये वैज्ञानिक G या H ग्रेड के होते हैं और विभिन्न कॉर्पोरेट क्लस्टर्स या टेक्नोलॉजी डोमेन क्लस्टर्स का नेतृत्व करते हैं।
    • स्तर 3 पर Directors (Corporate) और लैब डायरेक्टर्स आते हैं
    • जैसे CEMILAC, DMRL, VRDE आदि।
    • इस प्रकार, स्तर 1 शीर्ष प्रबंधकीय और नीतिगत पद है, जबकि निचले स्तर कार्यान्वयन पर केंद्रित होते हैं।​
  • वर्तमान और ऐतिहासिक संदर्भ
    • वर्तमान में यह पद डॉ. समीर वी. कामत द्वारा संभाला जा रहा है, जो एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक हैं।
    • ऐतिहासिक रूप से, DRDO की स्थापना 1958 में हुई थी और यह पद हमेशा से शीर्ष स्तर का रहा है।
    • संगठन चार्ट में DG(BrahMos) को कभी-कभी स्तर 1 के समानांतर दिखाया जाता है
    • लेकिन आधिकारिक रूप से Secretary DD R&D & Chairman DRDO ही स्तर 1 का एकमात्र पद है।
  • DRDO की संरचना का विस्तार
    • DRDO को दो मुख्य अपेंडिक्स में विभाजित किया गया है: अपेंडिक्स A (कॉर्पोरेट क्लस्टर्स) और अपेंडिक्स B (टेक्नोलॉजी डोमेन क्लस्टर्स)।
    • स्तर 1 से शुरू होकर, यह नेवल आर्मामेंट्स, एरोनॉटिकल सिस्टम्स, मिसाइल सिस्टम्स आदि तक फैला है।
    • कुल मिलाकर, यह पद DRDO को आत्मनिर्भर रक्षा प्रौद्योगिकी की दिशा में ले जाता है।
    • यह जानकारी DRDO की आधिकारिक वेबसाइट और संगठन चार्ट दस्तावेजों पर आधारित है।