Correct Answer: (c) डॉ. कन्हैयालाल मानेकलाल मुंशी
Solution:- भारतीय विद्या भवन भारत का एक शैक्षिक न्यास (ट्रस्ट) है।
- इसकी स्थापना कन्हैयालाल मानेकलाल (माणिकलाल) मुंशी ने 7 नवंबर, 1938 को महात्मा गांधी की प्रेरणा से की थी।
- सरदार वल्लभभाई पटेल तथा राजगोपालाचारी जैसी महान विभूतियों के सक्रिय योगदान से भारतीय विद्या भवन गांधीजी के आदर्शों पर चलते हुए आगे बढ़ा।
- स्थापना का इतिहास
- लोग नई भारत की कल्पना कर रहे थे। मुंशी जी ने इसे भारतीय संस्कृति, शिक्षा और मूल्यों को संरक्षित करने के लिए बनाया
- आधुनिकता के साथ भारतीय जड़ें मजबूत रहें।
- सरदार वल्लभभाई पटेल और सी. राजगोपालाचारी जैसे नेताओं ने इसका सक्रिय समर्थन किया।
- संस्थापक का परिचय
- डॉ. कन्हैयालाल मुंशी एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी, लेखक, राजनीतिज्ञ और शिक्षाविद् थे।
- वे संविधान सभा के सदस्य रहे और संविधान निर्माण में योगदान दिया।
- गुजराती साहित्य में उनकी रचनाएँ प्रसिद्ध हैं, और उन्होंने भारतीय विद्या भवन को एक सांस्कृतिक मिशन के रूप में देखा।
- गांधीजी के आशीर्वाद से शुरू हुआ यह प्रयास आज वैश्विक स्तर पर फैला है।
- उद्देश्य और गतिविधियाँ
- भवन का मुख्य लक्ष्य शिक्षा और संस्कृति को बढ़ावा देना है।
- यह आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय परंपराओं को जोड़ता है, जैसे संस्कृत कक्षाएँ इंजीनियरिंग कॉलेजों के साथ।
- यह स्कूल, कॉलेज, पुस्तक प्रकाशन (भवन बुक यूनिवर्सिटी के तहत 1800+ किताबें) और पत्रिकाएँ (जैसे भवन जर्नल) चलाता है।
- देशभर में 350+ संस्थान इससे जुड़े हैं, जो नैतिक और सांस्कृतिक शिक्षा देते हैं।
- प्रमुख केंद्र और विकास
- मुंबई मुख्यालय के अलावा दिल्ली केंद्र 1950 में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने स्थापित किया
- जो 4.84 एकड़ में फैला है। नागपुर जैसे स्थानों में सांस्कृतिक केंद्र हैं
- जिनका उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 2023 में किया।
- भवन ने स्वतंत्रता के बाद शिक्षा के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए।
- वर्तमान स्थिति
- आज भवन एक प्रमुख शैक्षिक ट्रस्ट है, जो भारतीय मूल्यों को वैश्विक संदर्भ में प्रचारित करता है।
- यह विद्यालयों में आधुनिक विज्ञान, कला, वाणिज्य के साथ गीता कक्षाएँ और ललित कला की शिक्षा देता है।
- संस्था का योगदान शिक्षा को सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में अद्वितीय है।