Solution:संविधान के अनु. 112(3) के अनुसार, भारत की संचित निधि पर भारित व्यय इस प्रकार हैं-(a) राष्ट्रपति की उपलब्धियां और भत्ते तथा उसके पद से संबंधित अन्य व्यय
(b) राज्य सभा के सभापति और उपसभापति के तथा लोक सभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन और भत्ते;
(c) ऐसे ऋण भार जिनका दायित्व भारत सरकार पर है, जिनके अंतर्गत ब्याज, निक्षेप निधि भार और मोचन भार तथा उधार लेने और ऋण सेवा तथा ऋण मोचन से संबंधित अन्य व्यय हैं;
(d) (i) उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को या उनके संबंध में संदेय वेतन, भत्ते और पेंशन; (ii) फेडरल न्यायालय के न्यायाधीशों को या उनके संबंध में संदेय पेंशन; (iii) उस उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को या उनके संबंध में दी जाने वाली पेंशन, जो भारत के राज्य क्षेत्र के अंतर्गत किसी क्षेत्र के संबंध में अधिकारिता का प्रयोग करता है या जो भारत डोमिनियन के राज्यपाल वाले प्रांत के अंतर्गत किसी क्षेत्र के संबंध में इस संविधान के प्रारंभ से पहले किसी भी समय अधिकारिता का प्रयोग करता था;
(e) भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक को या उनके संबंध में संदेय वेतन, भत्ते और पेंशन ;
(f) किसी न्यायालय या माध्यस्थम्, अधिकरण के निर्णय, डिक्री या पंचाट की तुष्टि हेतु अपेक्षित राशियां;
(g) कोई अन्य व्यय जो इस संविधान द्वारा या संसद की विधि
द्वारा इस प्रकार भारित घोषित किया जाता है (यथा- अनुच्छेद 322 के तहत संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों को संदेय वेतन, भत्ते और पेंशन)।
नोट-भारत के उपराष्ट्रपति राज्य सभा के सभापति के रूप में वेतन व भत्ते प्राप्त करते हैं।