संसद

Total Questions: 41

11. अध्यक्ष (Speaker) और उपाध्यक्ष (Deputy Speaker) की अनुपस्थिति में लोक सभा की अध्यक्षता कौन करता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) अध्यक्ष द्वारा मनोनीत पैनल के सदस्यों में से कोई व्यक्ति
Solution:
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 95(1) के अनुसार, अध्यक्ष (Speaker) और उपाध्यक्ष (Deputy Speaker) दोनों के पद खाली होने की स्थिति में, राष्ट्रपति लोकसभा के किसी सदस्य को कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त कर सकते हैं।
  • हालांकि, जब अध्यक्ष या उपाध्यक्ष केवल अनुपस्थित होते हैं (पद खाली नहीं होता), तो सदन की कार्यवाही का संचालन अध्यक्ष द्वारा मनोनीत सभापतियों के एक पैनल में से कोई सदस्य करता है। इस पैनल की घोषणा अध्यक्ष द्वारा सत्र की शुरुआत में की जाती है।
  • भूमिका और पदों का क्रम
    • लोक सभा अध्यक्ष: लोक सभा के निर्वाचित सदस्य द्वारा चुना जाता है और वही सदन की सामान्य कार्यवाही का अध्यक्ष होता है। अध्यक्ष के दायित्वों में नियमों की व्याख्या, सदस्यों पर आचरण निर्देश, और सदन की विधि-व्यवस्था का परिचालन शामिल है.​
    • लोक सभा उपाध्यक्ष: अध्यक्ष की अनुपस्थिति में अध्यक्ष के कर्तव्य निभाते हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर लोक सभा की अध्यक्षता करते हैं; उपाध्यक्ष स्वयं लोक सभा के सदस्य द्वारा चुने जाते हैं.​
  • अनुपस्थिति के मामलों में क्रमशः
    • नियंत्रण अगर अध्यक्ष अनुपस्थित हों: उपाध्यक्ष अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं और वे अध्यक्ष के शक्तियों का प्रयोग कर सकते हैं; आवश्यकता पड़ने पर वे सदन की बैठक चलाते हैं.​
    • अगर दोनों के सभी अनुपस्थित हों: लोक सभा की बैठकों के संचालन के लिए पैनल/कंसल्टेशन आधारित व्यवस्था होती है ताकि सदन का कार्य बाधित न हो; पैनल के सदस्यों का चयन अनुभव और संचालन क्षमताओं के आधार पर किया जाता है (यह पैनल अध्यक्ष द्वारा नियुक्त किया जाता है).​
  • संयुक्त बैठक और संसद के स्तर पर मार्गदर्शन
    • संयुक्त बैठक की अध्यक्षता सामान्यतः राज्य सभा के उपसभापति द्वारा की जा सकती है
    • खासकर तब जब लोक सभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों अनुपस्थित हों; यह स्थिति संसद की संयुक्त बैठकों के संचालन के लिए संविधानी/नियमित प्रावधानों के अनुसार होती है.​
    • राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 108 के अनुसार संयुक्त बैठक बुलाई जा सकती है; पर सामान्य प्रथाओं में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष की अनुपस्थिति में सबसे वरिष्ठ पदाधिकारी द्वारा ही अध्यक्षीय भूमिका निभाई जाती है, ताकि संचालन बाधित न हो.​
  • भूमिका और सीमा
    • पैनल की संरचना: अध्यक्ष पैनल के सदस्य, जो दस से अधिक नहीं होते, उपलब्ध सदस्यता के भीतर चयनित होते हैं
    • ताकि सदन के परिचालन में क्रमिक शुरुआत बनी रहे.​
    • निष्क्रियता की स्थिति: अध्यक्ष या उपाध्यक्ष में से कोई एक नहीं होने पर भी संसद के कामकाज को सुचारु बनाये रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था होती है जो लोकतंत्र में राजनीतिक संतुलन बनाए रखती है.​

12. भारत की पार्लियामेंट को ....... भी कहा जाता है। [MTS (T-I) 10 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) संसद
Solution:
  • 'पार्लियामेंट' शब्द अंग्रेजी का है, जिसका हिंदी अनुवाद 'संसद' है। यह भारत की सर्वोच्च विधायी संस्था है।
  • भारत की पार्लियामेंट को अक्सर “लोकसभा” और “राज्यसभा” से मिलकर बना हुआ संघीय विधानमंडल कहा जाता है।
  • सरल शब्दों में, इसे कभी-कभी संसद कहा जाता है, जिसे भारतीय संविधान के भीतर कानून बनाने और सरकार की पहल को संचालित करने की धुरी माना जाता है। नीचे विस्तृत विवरण दिया गया है।
  • संसद के दोनों सदस्य विधान को बनाते, संशोधित करते और स्वीकार करते हैं, तथा सरकार के वित्तीय प्रस्तावों की पुष्टि करती है.​
  • राष्ट्रपति संसद को बुलाने, सत्र अनुमत करने या लोकसभा को भंग करने जैसे अधिकार रखते हैं, जो प्रधानमंत्रि और मंत्रिपरिषद के सुझाव पर चलते हैं.​
  • लोकसभा बनाम राज्यसभा
    • लोकसभा आम जनता द्वारा प्रत्यक्ष निर्वाचित होती है और केंद्र सरकार के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाती है—बहुमत होने पर प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल का चयन और समर्थन प्राप्त करती है.​
    • राज्यसभा राज्यों की परिषद है और सदस्य स्थायी भविष्य के लिए चुने जाते हैं, ताकि राज्यों की आवाज मजबूत बनी रहे; संसद के दोनों सदनों का समन्वय कानून बनाने के लिए जरूरी होता है.​
    • संसद के वित्तीय मामलों में लोकसभा की प्राथमिक भूमिका रहती है, जबकि राज्यसभा भी वित्तीय Bills पर विचार कर सकता है और संशोधन प्रस्तावित कर सकता है.​
  • संसद क्यों महत्वपूर्ण है
    • यह लोकतंत्र की नितिगत धुरी है जो कानून बनाती है, सरकार की नीतियों की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करती है.​
    • संविधान के अनुसार संघीय विधानमंडल संसद ही है जो राष्ट्र की नीति-निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाती है.​
  • संसद के अन्य पहलू
    • संसद के सदन-विशिष्ट अधिकारों में प्रश्नकाल, स्थिर सत्र, बहस, मतदान और समितियों के माध्यम से स्वतंत्र जांच शामिल हैं, ताकि विधेयकों पर गहन विचार हो सके.​
    • राष्ट्रपति को संसद के साथ परामर्श से निर्णय लेने होते हैं, जैसे सत्रावसान, अपदस्थापन आदि हालातों में वे भूमिका निभाते हैं.​
    • ध्यान दें: यदि आप चाहें तो मैं भारतीय संसद की संरचना, प्रक्रियाएँ (जैसे विधेयक कैसे बनते हैं), या लोकसभा बनाम राज्यसभा की शक्तियों की तुलना को एक साफ-सुथरे तुलना-तालिका में प्रस्तुत कर सकता/सकती हूँ ताकि आपके अध्ययन/परीक्षा प्रयोजन के लिए सुविधाजनक हो।

13. 'संसद' शब्द ....... को संदर्भित करता है। [CGL (T-I) 01 दिसंबर, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) राष्ट्रीय विधायिका
Solution:
  • 'संसद' भारत की राष्ट्रीय विधायिका को संदर्भित करती है, जो केंद्र सरकार के स्तर पर कानून बनाने का काम करती है।
  • यह राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा से मिलकर बनती है। 
  • भारतीय संविधान निर्माताओं ने अमेरिकी मॉडल के ऊपर संसद के लिए ब्रिटिश मॉडल को चुना।
  • संसद केंद्र सरकार का विधायी अंग है और भारत की संसद देश का शीर्ष विधायी निकाय है।
  • संसद राष्ट्रीय विधायिका है, जबकि राज्य विधानमंडल को राज्य विधानमंडल के रूप में जाना जाता है।
  •  यह सरकार के संसदीय स्वरूप को अपनाने के कारण भारतीय लोकतांत्रिक राजनीतिक व्यवस्था में एक प्रमुख और प्रमुख स्थान रखता है
  • संसदीय अंग:
    • भारत के राष्ट्रपति
    • राज्य सभा (उच्च सदन)
    • लोकसभा (निम्न सदन)
    • भारतीय संसद द्विसदनीय, राज्यसभा और लोकसभा है।
      Other Information
  • यह उच्च सदन है जो भारतीय संघ के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करता है।
  • यह निम्न सदन है जो भारत के सभी नागरिकों का प्रतिनिधित्व करता है।
  • भारत के राष्ट्रपति किसी भी सदन का सदस्य नहीं होता है और संसद की किसी भी कार्यवाही में शामिल नहीं होता है।
  • परिभाषा और दायरा
    • भारत के संदर्भ में संसद दो सदनों से मिलकर बनती है: लोकसभा (लोगों का सभा) और राज्यसभा (राज्यों की परिषद), और संविधान के अनुसार यह संघीय विधायिका है
    • जिसका दायरा राष्ट्रीय स्तर पर कानून बनाना है [संदर्भ: भारतीय संविधान/संस्थागत विवरण]।
  • संरचना
    • लोकसभा: प्रत्यक्ष चुनाव से चुने गए सदस्य होते हैं और यह नीचे का, अधिक शक्तिशाली विधायी सदन माना जाता है। कई प्रकार के विधेयक पहले इसी सदन में प्रस्तुत होते हैं और टैक्स/बजट से जुड़ी प्रक्रियाओं में विशेष भूमिका रहती है [उल्लेख: लोकसभा की भूमिका]।
    • राज्यसभा: राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाला ऊपरी सदन है; सदस्य अप्रत्यक्ष चुनाव द्वारा चुने जाते हैं और यह स्थायित्व/वैधानिक प्रतिनिधित्व का समर्थक है। कई मामलों में राज्यों और केंद्र के बीच संतुलन बनाए रखने की भूमिका है [उल्लेख: राज्यसभा की भूमिका]।
  • प्रमुख कार्य
    • कानून निर्माण: दोनों सदनों द्वारा पसमे के बाद राष्ट्रपति के assent से कानून बनते हैं; वित्तीय विधेयकों के लिए विशेष प्रक्रियाएं होती हैं।
    • निगरानी और जवाबदेही: प्रश्नकाल, बहस, स्थायी कमिटियाँ आदि के जरिये सरकार की कार्यशीलता की निगरानी।
    • जनप्रतिनिधित्व: संसद जनता की आवाज़ को नीतिगत प्रक्रियाओं में समायोजित करती है।
  • राष्ट्रपति की भूमिका (संविधानिक संदर्भ)
    • संसद के प्रमुख निर्णयों, सत्र बुलाने/समाप्त करने, या लोकसभा को भंग करने जैसे संस्थागत कदमों में राष्ट्रपति का प्रासंगिक भूमिका रहती है
    • जो परामर्श के अधीन होती है। भारत के संदर्भ में यह भूमिका संविधान के अनुसार निर्धारित है [संविधान/संस्थागत लेख]।
    • यदि चाहें, तलछट में एक स्पष्ट तुलना तालिका दे सकता हूँ जिसे लोकसभा बनाम राज्यसभा के प्रमुख अंतर, सदस्यता और प्रक्रियाओं के आधार पर दिखाया गया हो।
    • साथ ही संसद से जुड़े संविधान के प्रमुख अनुच्छेद (जैसे अनुच्छेद 79-122) के संक्षिप्त सार भी दे सकता हूँ ताकि कानूनी संदर्भ स्पष्ट रहे।

14. भारतीय संविधान का निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद भारत की द्विसदनी संसद का प्रावधान करता है? [CGL (T-I) 17 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) अनुच्छेद 79
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 79 स्पष्ट रूप से कहता है कि "संघ के लिए एक संसद होगी जो राष्ट्रपति और दो सदनों से मिलकर बनेगी जिनके नाम राज्य सभा और लोक सभा होंगे"। यह भारत में द्विसदनीय व्यवस्था की नींव रखता है।
  • नीचे स्पष्ट, विस्तृत भागों में संक्षेप दिया गया है:
  • द्विसदनी संसद का ढांचा
    • भारत की संसद दो सदनों में बंटी है: लोक सभा (लोगों का प्रतिनिधित्व) और राज्य सभा (राज्यों के प्रतिनिधियों का प्रतिनिधित्व) । दिया गया विवरण द्विसदनी संरचना को परिभाषित करता है.​
    • राज्य सभा के सदस्य राज्यों के प्रतिनिधित्व, और लोक सभा के सदस्य निर्वाचन-प्रणालियाँ संविधान-निर्माण के साथ स्पष्ट की गईं हैं ।​
  • अनुच्छेद 80 का केंद्रópयोग
    • अनुच्छेद 80 संसद के लिए पद-निर्धारण, सदस्यों की संख्या और निर्वाचन-तंत्र के कुछ मापदंड प्रदान करता है ताकि संसदीय संरचना द्विसदनी बनी रहे ।​
    • यह अनुच्छेद द्विसदन को संरचना-आधारित रूप से स्थापित करता है, परंतु पूर्ण कानूनी विवरण के लिए संविधान के भाग 2, 4, 6, और अन्य संबंधित अनुच्छेदों के साथ पढ़ना आवश्यक है ।​
  • अन्य प्रावधान जो द्विसदनी संसद से जुड़े हैं
    • समय-सारिणी-संशोधन (संविधान संशोधन के कारण) और संसद की संयुक्त बैठकों के नियम, न्यूनतम बहुमत, और विशेष बहुमत की आवश्यकताएँ—ये सब संविधान के कई अनुच्छेदों में मिलते हैं, और द्विसदनी संसद के कार्यान्वयन के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।​
    • राष्ट्रपति के नेतृत्व में संसद के सत्र/भंग/आह्वान की शक्तियाँ भी द्विसदनी संसद के प्रावधानों के साथ संबद्ध हैं।​
  • संदर्भ और विस्तृत पढ़ाई के बिंदु
    • भारतीय संविधान की प्रमुख संरचना और द्विसदनी संसद के प्रावधानों को समझने के लिए निम्न सामग्री उपयोगी हो सकती है
    • संविधान के भाग और अनुच्छेद-वार संरचना (भाग 1–22, अनुच्छेद 52–151 आदि) ।​
    • द्विदलीय संसद के सिद्धांत और राष्ट्रपति-संस्थापन-कार्यान्वयन के नियम ।​
    • द्विसदनी संसद के बारे में समुचित पाठ्य सामग्री (विकिपीडिया, साक्षात्कारित पाठ्य संदर्भ) ।​

15. 2022 में लोक सभा में पारित कौन-सा विधेयक भारत के एक राज्य/केंद्रशासित प्रदेश के तीन नगर निगमों के एकीकरण से संबंधित है? [MTS (T-I) 19 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) दिल्ली नगर निगम (संशोधन) विधेयक
Solution:
  •  दिल्ली नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2022 को 29 मार्च 2022 को लोकसभा में पेश किया गया था।
  • इस विधेयक का उद्देश्य दिल्ली के तीन नगर निगमों - उत्तरी दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली और पूर्वी दिल्ली नगर निगमों को एक एकल, एकीकृत 'दिल्ली नगर निगम' में मिलाना था।
  • यह राष्ट्रीय राजधानी में नगरपालिका प्रशासन को सुव्यवस्थित करने के लिए किया गया था।
  • तीन मौजूदा निगम उत्तरी दिल्ली नगर निगम, दक्षिणी दिल्ली नगर निगम और पूर्वी दिल्ली नगर निगम है।
  • प्रस्तावित विलय से राष्ट्रीय राजधानी में नगरपालिका सेवाओं की दक्षता और प्रभावशीलता में सुधार होने की उम्मीद है।
    Other Information
  •  भारत की राजधानी दिल्ली देश महाद्वीप के उत्तर में स्थित है।
  •  14 फरवरी 2015 से दिल्ली के वर्तमान मुख्यमंत्री आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल हैं।
  •  26 मई, 2022 को श्री विनय कुमार सक्सेना दिल्ली के 22वें उपराज्यपाल बने।
  • किस विधेयक के बारे में है
    • नगर पालिकाएं (संशोधन) विधेयक, 2022: इसका उद्देश्य दिल्ली के तीन नगर निगमों बदले हुए संरचना के आधार पर नगरपालिका निगमों के बीच समन्वय और एकीकृत प्रशासन व्यवस्था स्थापित करना था
    • यह नीतिगत कदम दिल्ली की स्थानीय शासन व्यवस्था को केंद्रीकृत और अधिक सक्षम बनाने की दिशा में था.​
  • यह क्यों आया
    • दिल्ली में चार आयुक्तीय नगर निगमों के साथ तीन नगर निगमों के विभाजन से प्रशासनिक गतिविधियाँ, बजट नियंत्रण, और योजना-प्रक्रिया में विभाजनकारी प्रभाव डालती थीं
    • एकीकृत संरचना से सेवाओं के एक समान वितरण, कर संग्रह में दक्षता और योजनाओं की समन्वयिता बढ़ने की उम्मीद थी.​
  • विधेयक की प्रक्रिया और स्थिति
    • केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत यह बिल में 24-25 मार्च 2022 के आसपास चर्चा में रहा और संसद के आगामी चरणों के लिए आगे बढ़ा था
    • दायरे और प्रस्तावित बदलावों पर राज्य-स्तरीय प्रतिक्रिया और केंद्रीय-राज्य के बीच समन्वय की चर्चा भी सक्रिय रही.​
  • प्रमुख बिंदु और प्रभाव
    • उद्देश्य: तीन नगर निगमों की एकीकृत प्रशासनिक इकाई बनाकर सेवाओं की दक्षता बढ़ाना, योजना-निर्माण और बजट आवंटन में एकरूपता लाना.​
    • संभावित प्रभाव: नागरिक सेवाओं की गति और गुणवत्ता में सुधार, शुल्क/कर संग्रह व्यवस्था का एकीकरण, और प्रशासनिक निर्णयों की स्पष्टता बढ़ना; साथ ही स्थानीय शासन के वित्तीय और संस्थागत ढांचे में समन्वय बढ़ना.​
  • संदर्भित स्रोत (कन्टेक्स्ट के अनुसार)
    • नगर निगमों के एकीकरण पर में बिल प्रस्तुत और चर्चा की गई; यह "नगरपालिकाएं (संशोधन) विधेयक, 2022" के रूप में जाना गया.​
    • मीडिया कवरेज में इसे दिल्ली के तीन नगर निगमों के एकीकरण से जोड़ा गया है और Bill के पेश होने के पीछे प्रशासनिक दक्षता और सेवा वितरण में सुधार का तर्क दिया गया
  • यदि चाहें, नीचे शामिल कर सकते हैं:
    • विधेयक की पूर्ण पाठ और वर्तमान स्थिति का उद्धार: सदन में पारित होने के बाद राज्यसभा में क्या कदम उठे, क्या यथार्थ में अधिनियम बना या नहीं, आदि।
    • दिल्ली नगर निगम (मोनो-या अन्य संरचना) के मौजूदा संरचना से जुड़े इतिहास और पूर्व के संशोधनों का संपूर्ण सार।

16. मंत्रिपरिषद में प्रधानमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या लोक सभा के सदस्यों की कुल संख्या के ....... प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। [MTS (T-I) 10 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) पंद्रह
Solution:
  • यह प्रावधान भारतीय संविधान में 91वें संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा जोड़ा गया था। इसके तहत, अनुच्छेद 75(1A) में यह निर्धारित किया गया
  • केंद्रीय मंत्रिपरिषद में मंत्रियों की कुल संख्या (प्रधानमंत्री सहित) लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15% से अधिक नहीं हो सकती।
  • यह प्रावधान दलबदल और बड़ी मंत्रीपरिषदों पर अंकुश लगाने के लिए किया गया था।
  •  प्रधानमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या लोकसभा के सदस्यों की कुल संख्या के 15% से अधिक नहीं होनी चाहिए ।​
  • किन अधिनियमों से जुड़ी है: अनुच्छेद 75 और 164 का संदर्भ इस नियम से जुड़ा है; 91वां संशोधन इस 15% के निर्णय को स्पष्ट करता है ।​
  • राज्य मंत्रिपरिषद के लिए अलग नियम: राज्यों के मंत्रिपरिषद की संख्या भी विधानसभा सदस्यों के 15% से अधिक नहीं होनी चाहिए, पर राज्यों के मामलों में कुछ अन्य भी शर्तें और न्यूनतम संख्या की बातें भी कही जाती हैं
  • (जैसे कुछ संदर्भों में 12 मंत्री न कम हों आदि—यह राज्य-स्तर के प्रावधानों से जुड़ा विषय है) ।​
  • विस्तार से समझना
  •  2003 के 91वें संशोधन ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद के आकार पर मजबूत सीमा रखी ताकि एक अत्यंत बड़ी सरकार से होने वाले व्यय और प्रशासनिक अकार्यक्षमता से बचा जा सके ।​
  • व्यवहारिक प्रभाव:
  • वास्तविकता में मंत्रिपरिषद का आकार प्रधानमंत्री के पास उपलब्ध संसाधन, निर्णय-निर्भरता और संसद सदस्यता से जुड़े नियम के अनुरूप तय किया जाता है
  • निर्वाचन क्षेत्र के विभिन्न जनप्रतिनिधियों के मिश्रण के कारण आकार संतुलित रखना सरकार के लिए आवश्यक रहता है ।​
  • यदि चाहें तो:
  • आप चाहें तो मैं इस प्रश्न के साथ भारत की लोकसभा की वर्तमान सदस्य संख्या के आधार पर सीधे एक गणना भी करके दिखा दूं, ताकि आपका उत्तर ठोस संख्या के रूप में मिल जाए।

17. 2022 में लोक सभा में पारित कौन-सा विधेयक राष्ट्रीय रेल एवं परिवहन संस्थान, वडोदरा (एक मानित विश्वविद्यालय) को गति शक्ति विश्वविद्यालय में बदलने की मांग करता है? [MTS (T-I) 10 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक
Solution:
  • केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2022 को 3 अगस्त, 2022 को लोकसभा में पारित किया गया था।
  • इस विधेयक ने 'राष्ट्रीय रेल एवं परिवहन संस्थान', वडोदरा को एक केंद्रीय विश्वविद्यालय, जिसका नाम 'गति शक्ति विश्वविद्यालय' रखा गया, के रूप में स्थापित करने का प्रावधान किया।
  • यह विश्वविद्यालय परिवहन से संबंधित शिक्षा, अनुसंधान और कौशल विकास पर केंद्रित है।
  •  केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक में राष्ट्रीय रेल और परिवहन संस्थान को केंद्रीय विश्वविद्यालय में परिवर्तित करके गुजरात के वडोदरा में गति शक्ति विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रावधान है।
  • गति शक्ति विश्वविद्यालय परिवहन, लॉजिस्टिक्स और संबद्ध क्षेत्रों में अनुसंधान और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करेगा।
  • विनियोग विधेयक एक ऐसा विधेयक है जो सरकार को वित्तीय वर्ष के दौरान अपने खर्चों को पूरा करने के लिए भारत की संचित निधि से पैसा निकालने का अधिकार देता है।
  • प्रतिस्पर्धा (संशोधन) विधेयक ई-कॉमर्स और डिजिटल बाजारों के लिए प्रावधान करने के लिए प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 में संशोधन करना चाहता है।
  • विश्वविद्यालय कानून (संशोधन) विधेयक एक काल्पनिक विकल्प है और इसका अस्तित्व नहीं है।
    Other Information
  • 13 दिसंबर, 2023 को केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2023 को राज्यसभा द्वारा मंजूरी दे दी गई।
  • यह विधेयक तेलंगाना के मुलुगु में सम्मक्का सरक्का केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम, 2009 में संशोधन करता है।
  • 7 दिसंबर, 2023 को लोकसभा ने विधेयक पारित कर दिया।
  • इस बिल के रास्ते से वड़ोदरा के संस्थान को केंद्रीय विश्वविद्यालय-स्थिति में परिवर्तन कर उसे गति शक्ति विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित किया गया था
  • उसकी वैधानिक स्थिति को ऐसा रूप देना चाहा गया था। विधायक पृष्ठभूमि के अनुसार यह कदम परिवहन, तकनीक और प्रबंधन से जुड़ी शिक्षा, अनुसंधान और दक्षता विकास के लिए एक केंद्र बनाने के उद्देश्य से किया गया था। नीचे प्रमुख बिंदु दिए गए हैं।
  • ग्रहणीय परिचय
    • बिल का नाम और उद्देश्य: केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2022 के जरिये गति शक्ति विश्वविद्यालय (Gati Shakti University) के रूप में स्थापित करने का ढांचा निर्मित किया गया। यह योजना राष्ट्रीय रेल और परिवहन संस्थान, वड़ोदरा को केंद्रीय विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित कर उसे गति शक्ति विश्वविद्यालय में बदले जाने का मार्ग प्रशस्त करती है.​
    • स्थिति और पठन-वस्तु:  गति शक्ति विश्वविद्यालय परिवहन, तकनीक और प्रबंधन से संबंधित विषयों में उच्च स्तरीय शिक्षा, अनुसंधान और कौशल विकास कर सकेगा,
    • आवश्यक होने पर भारत के भीतर या विदेशों में इसके केंद्र भी स्थापित कर सकेगा. यह केंद्रित वित्त पोषण रेल मंत्रालय के माध्यम से किया जाएगा
    • विश्वविद्यालय को यूजीसी अधिनियम के अनुरूप मान्यता प्राप्त होगी.​
  • लोकसभा में पारित होने के संदर्भ
    • पारित तिथि और संदर्भ: केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2022 लोकसभा द्वारा पारित हुआ और बाद में अन्य विधिक प्रक्रियाओं के साथ पास हुआ/आगे बढ़ा गया। PIB/सरकारी अधिसूचनाओं के अनुसार यह बिल 2022 में लोकसभा में पारित हुआ था.​
    • प्रभावी ढांचे: बिल के अनुसार गति शक्ति विश्वविद्यालय केंद्रीय सरकार के वित्त पोषण से संचालित होगा और रेल मंत्रालय की पहल के साथ इसे शासनिक संरचना मिल सकेगी, जिससे अनुभवजनित और अकादमिक दायरे दोनों में वृद्धि संभव हो सके.​
  • सम्बद्ध स्रोतों के निष्कर्ष
    • गति शक्ति विश्वविद्यालय की स्थापना और संरचना के ऐतिहासिक संदर्भ: 2017-2019 के आसपास वड़ोदरा में रेलवे के राष्ट्रीय अाकादमी के साथ शिक्षा-परिवहन के क्षेत्र में उच्चस्तरीय संस्थान की कल्पना/स्वीकृति के बारे में विभिन्न सरकारी बयानों और विश्लेषणों में उल्लेख है, जिसे बिल के माध्यम से आगे बढ़ाने की दिशा दिखाई देती है.​
    • 2022 में संशोधन बिल के पारित होने के बाद यह बदलाव कानून के हिस्से के रूप में मान्य हो जाता/हो सकता है
    • भारत सरकार के शिक्षण-नियामक ढांचे के अनुरूप इसे लागू किया गया/जाने की संभावना है.​
  • महत्वपूर्ण नोट
    • आपके प्रश्न में “2022 में लोक सभा में पारित कौन-सा विधेयक” पूछा गया है, इसका स्पष्ट उत्तर केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2022 है
    • जिसमें गति शक्ति विश्वविद्यालय के रूपांतरण की योजना का आधार रखा गया। यह जानकारी सरकारी प्रेस रिलीज़, सरकार-सम्बन्धी पब्लिक रिकॉर्ड और शिक्षा-नीति विश्लेषणों में संगत रूप से दी जाती है.​

18. संविधान द्वारा निम्नलिखित में से किनके लिए लोक सभा और विधानसभाओं में सीटों के आरक्षण का प्रावधान किया गया है? [C.P.O.S.I. (T-1) 09 नवंबर, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) अनुसूचित जनजातियों
Solution:
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 330 (लोकसभा के लिए) और अनुच्छेद 332 (राज्यों की विधानसभाओं के लिए) अनुसूचित जातियों (SCs) और अनुसूचित जनजातियों (STs) के लिए सीटों के आरक्षण का प्रावधान करते हैं। यह प्रावधान उनके उचित प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए है।
  • लोक सभा सीटों का आरक्षण संविधान-निर्धारित जिलों/राज्यों के भीतर आबंटन के अनुसार होता है और समय-समय पर लोक सभा सीटों के वितरण के अनुरूप संशोधित होता है।
  • राज्य विधानसभाएँ:
    • प्रत्येक राज्य की विधान सभा के लिए आरक्षण के नियम संविधान की चौथी अनुसूची, अनुच्छेद 332 (लोक सभा के समतुल्य) और अनुच्छेद 334 (अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिए सीटों की समय-सीमा) के अंतर्गत निर्धारित हैं।
    • राज्यों में SC/ST के लिए स्पष्ट आरक्षण निर्धारित है, जबकि अन्य में OBC के लिए क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था भी पाई जाती है।
  • महत्वपूर्ण अवधारणाएँ
  • स्थानीय/राज्यवार अनुपात:
    • SC/ST के लिए सीटें राज्य के सामाजिक-आर्थिक संकेतकों के अनुसार आवंटित होती हैं।
    • उदाहरणार्थ, राज्यों में SC/ST के प्रतिशत के हिसाब से विधानसभाओं की सीटों का एक भाग नियमित रूप से आरक्षित रहता है।
  • ओबीसी आरक्षण:
    • केंद्र सरकार/राज्य सरकार के नियमों के अनुसार OBC आरक्षण की सीमा राज्यों के भीतर भिन्न-भिन्न हो सकती है
    • कभी-कभी संविधानिक संशोधनों के द्वारा बढ़ाई या घटाई जा सकती है।
  • आरक्षण की समय-सीमा:
    • कुछ क्षेत्रों में आरक्षण की अवधि संविधान द्वारा निर्धारित होती है
    • कई बार विधानसभा के गठन/विधायन के समय भी आरक्षण की पुनर्मिन्चय/नवीनीकरण आवश्यक होता है।
    • विस्तृत विवरण
  • संविधान के स्थापना-प्रावधान:
    • लोक सभा के लिए केन्द्रीय स्तर पर SC/ST/OBC के लिए सीटें आरक्षित रखने का उद्देश्य सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है।
    • राज्य विधानसभाओं में भी इसी प्रकार के आरक्षण के प्रावधान से जनजातीय और सामाजिक-नागरिक वर्गों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है।
  • चयन प्रक्रिया:
    • लोक सभा के सांसद प्रत्यक्ष निर्वाचन के द्वारा चुने जाते हैं, जबकि राज्य विधानसभाओं के सदस्य देश/राज्य की विधानसभा के लिए आयोजित प्रत्यक्ष-निर्वाचन के साथ चुने जाते हैं।
    • आरक्षण की रूपरेखा प्रत्येक राज्य की जनसंख्या और सामाजिक-आर्थिक संरचना के अनुसार बनाई जाती है।
  • अनुपात और विविधता:
    • आरक्षित सीटों के प्रतिशत विविध राज्यों में भिन्न होते हैं ताकि विविधता और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व बना रहे।
    • यह नीति समता और सामाजिक न्याय के लक्ष्य के अनुरूप डिज़ाइन की गई है।
  • उद्धरण और स्रोत कैसे देखें
    • संविधान की चौथी अनुसूची, अनुच्छेद 330-334 और संबंधित प्रावधान आरक्षित सीटों की व्यवस्था को निर्धारित करते हैं।
    • हर राज्य की विधान सभा के भीतर SC/ST/OBC आरक्षण के वितरण के बारे में राज्य विधान सभा की वेबसाइट/राज्य की आधिकारिक दस्तावेज़ देखें।
  • यदि चाहें, एक चरणबद्ध पाठ योजना बनाकर आप अपने राज्य के संदर्भ में:
    • किस अनुच्छेद/अनुसूची में किन सीटों का आरक्षण है
    • कितने प्रतिशत आरक्षित सीटें हैं
    • कब से लागू है/कब तक वैधता
    • किन वर्गों के लिए कितनी सीटें आवंटित हैं
  • स्रोत-उद्धृत जानकारी
    • संविधान के अनुच्छेदों और चौथी अनुसूची के सार-सार: यह जानकारी सामान्य सार्वजनिक संवीधानिक सारों में उपलब्ध है.​
    • लोक सभा और राज्य विधान सभाओं में आरक्षण के व्यावहारिक विवरण: भारत के राष्ट्रीय पोर्टल और अन्य शैक्षिक संसाधनों में भी विशिष्ट उदाहरण मिलते हैं
    • यदि आप अपने विशिष्ट राज्य का नाम दें, तो उससे सम्बंधित सटीक आरक्षित सीटों के प्रतिशत और वर्तमान प्रावधानों के साथ एक संपूर्ण, राज्य-विशिष्ट विवरण दे सकता हूँ।
    • लोक सभा (16वीं/17वीं लोक सभा सहित सामान्य प्रावधान): संविधान के अनुच्छेद 330, 332 और 233 आदि से लोक सभा के लिए SC, ST और OBC के आरक्षण का प्रावधान बनता है।

19. लोक सभा के पीठासीन अधिकारी को ....... कहा जाता है। [MTS (T-I) 09 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) लोक सभा अध्यक्ष (स्पीकर)
Solution:
  • लोक सभा का पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) 'लोक सभा अध्यक्ष' (Speaker) कहलाता है।
  • वह सदन की कार्यवाही का संचालन करता हैनियमों की व्याख्या करता है और सदन में अनुशासन बनाए रखता है।
  • स्पीकर
  •  लोकसभा का स्पीकर लोकसभा का पीठासीन अधिकारी होता है।
  •  स्पीकर का चुनाव सामान्यतः सामान्य चुनाव के बाद लोकसभा की पहली बैठक में किया जाता है।
  •  लोकसभा के स्पीकर का चुनाव लोकसभा के सभी सदस्यों द्वारा किया जाता है।
  •  लोकसभा की पहली बैठक की अध्यक्षता प्रोटेम स्पीकर करते हैं।
  •  वह तब तक लोकसभा के पीठासीन अधिकारी रहेंगे जब तक कि लोकसभा का निर्वाचित स्पीकर अपना स्थान ग्रहण नहीं कर लेता।
  •  लोकसभा स्पीकर के पास यह चुनने की शक्ति है कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं। उनका निर्णय अंतिम है न्यायालय में उस पर प्रश्न नहीं उठाया जा  सकता।
    Other Information
  • लोकसभा
  • लोकसभा भारत की द्विसदनीय संसद का निचला सदन है।
  •  लोकसभा का हिंदी नाम लोक सभा द्वारा 14 मई, 1954 को अपनाया गया था।
  •  लोकसभा का पूरा कार्यकाल 5 वर्ष का होता है।
  •  1971 से 1977 तक पांचवीं लोकसभा (5 वर्ष 10 महीने और 6 दिन) भारत की सबसे लंबी लोकसभा है।
  •  1998 से 1999 तक बारहवीं लोकसभा (1 वर्ष 1 महीना और 4 दिन) भारत की सबसे छोटी लोकसभा है।
  •  लोकसभा का गठन संविधान के अनुच्छेद 81 के तहत किया जाता है।
  •  जी. वी. मावलंकर लोकसभा के जनक हैं।
  •  लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 552 निर्धारित है।
  •  धन विधेयक केवल लोकसभा में ही पेश किया जा सकता है. राज्यसभा में नहीं।
  •  राष्ट्रीय आपातकाल को समाप्त करने का प्रस्ताव लोकसभा द्वारा पारित किया जा सकता है।
  •   उत्तर प्रदेश में लोकसभा की सर्वाधिक सदस्य संख्या है।

20. लोक सभाध्यक्ष अपना इस्तीफा निम्न में से किसे सौंप सकते हैं? [MTS (T-I) 18 अक्टूबर, 2021 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) लोक सभा के उपाध्यक्ष
Solution:
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94(ख) के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) किसी भी समय लोकसभा के उपाध्यक्ष (Deputy Speaker) को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकता है।
  • इसी तरह, उपाध्यक्ष अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंपता है।
  • अध्यक्ष का चयन लोकसभा द्वारा उसके सदस्यों के बीच से प्रथम बैठक के उपरांत किया जाता है।
  • यदि अध्यक्ष का पद रिक्त हो जाता है, तो लोकसभा रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए किसी अन्य सदस्य का चुनाव करती है।
  • अक्ष्यक्ष के चुनाव की तारीख राष्ट्रपति द्वारा तय की जाती है।
  • लोकसभा के कार्यकाल तक अध्यक्ष पद पर आसीन रहते हैं।
  • उन्हें निम्नलिखित तीन स्थिति में से किसी में अपना पद पहले छोड़ना होगा -
  • लोकसभा का सदस्य बनने की स्थिति में।
  • लोकसभा उपाध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप कर।
  • लोकसभा के सभी सदस्यों के बहुमत द्वारा पारित किसी प्रस्ताव द्वारा हटाया जाना।
  • 14 दिन पहले इस आशय की अग्रिम सूचना देने के बाद ही इस तरह के प्रस्ताव को प्रस्तुत किया जा सकता है।
  • जब तक पदच्युति का प्रस्ताव विचाराधीन है, तबतक वह सभा की अध्यक्षता नहीं कर सकते हैं।
  • वह ऐसे समय में सदन की कार्यवाही में भाग ले सकते हैं और बराबर मत होने की स्थिति को छोड़कर पहली स्थिति में मतदान कर सकते हैं।
    Other Information
  •  लोकसभा के उपाध्यक्ष लोकसभा अध्यक्ष को अपना त्याग-पत्र देते हैं।
  •  राष्ट्रपति भारत के उपराष्ट्रपति को अपना त्याग-पत्र देते हैं।
  •  भारत के मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रपति को अपना त्याग-पत्र देते हैं।