Correct Answer: (d) अध्यक्ष द्वारा मनोनीत पैनल के सदस्यों में से कोई व्यक्ति
Solution:- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 95(1) के अनुसार, अध्यक्ष (Speaker) और उपाध्यक्ष (Deputy Speaker) दोनों के पद खाली होने की स्थिति में, राष्ट्रपति लोकसभा के किसी सदस्य को कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त कर सकते हैं।
- हालांकि, जब अध्यक्ष या उपाध्यक्ष केवल अनुपस्थित होते हैं (पद खाली नहीं होता), तो सदन की कार्यवाही का संचालन अध्यक्ष द्वारा मनोनीत सभापतियों के एक पैनल में से कोई सदस्य करता है। इस पैनल की घोषणा अध्यक्ष द्वारा सत्र की शुरुआत में की जाती है।
- भूमिका और पदों का क्रम
- लोक सभा अध्यक्ष: लोक सभा के निर्वाचित सदस्य द्वारा चुना जाता है और वही सदन की सामान्य कार्यवाही का अध्यक्ष होता है। अध्यक्ष के दायित्वों में नियमों की व्याख्या, सदस्यों पर आचरण निर्देश, और सदन की विधि-व्यवस्था का परिचालन शामिल है.
- लोक सभा उपाध्यक्ष: अध्यक्ष की अनुपस्थिति में अध्यक्ष के कर्तव्य निभाते हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर लोक सभा की अध्यक्षता करते हैं; उपाध्यक्ष स्वयं लोक सभा के सदस्य द्वारा चुने जाते हैं.
- अनुपस्थिति के मामलों में क्रमशः
- नियंत्रण अगर अध्यक्ष अनुपस्थित हों: उपाध्यक्ष अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं और वे अध्यक्ष के शक्तियों का प्रयोग कर सकते हैं; आवश्यकता पड़ने पर वे सदन की बैठक चलाते हैं.
- अगर दोनों के सभी अनुपस्थित हों: लोक सभा की बैठकों के संचालन के लिए पैनल/कंसल्टेशन आधारित व्यवस्था होती है ताकि सदन का कार्य बाधित न हो; पैनल के सदस्यों का चयन अनुभव और संचालन क्षमताओं के आधार पर किया जाता है (यह पैनल अध्यक्ष द्वारा नियुक्त किया जाता है).
- संयुक्त बैठक और संसद के स्तर पर मार्गदर्शन
- संयुक्त बैठक की अध्यक्षता सामान्यतः राज्य सभा के उपसभापति द्वारा की जा सकती है
- खासकर तब जब लोक सभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों अनुपस्थित हों; यह स्थिति संसद की संयुक्त बैठकों के संचालन के लिए संविधानी/नियमित प्रावधानों के अनुसार होती है.
- राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 108 के अनुसार संयुक्त बैठक बुलाई जा सकती है; पर सामान्य प्रथाओं में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष की अनुपस्थिति में सबसे वरिष्ठ पदाधिकारी द्वारा ही अध्यक्षीय भूमिका निभाई जाती है, ताकि संचालन बाधित न हो.
- भूमिका और सीमा
- पैनल की संरचना: अध्यक्ष पैनल के सदस्य, जो दस से अधिक नहीं होते, उपलब्ध सदस्यता के भीतर चयनित होते हैं
- ताकि सदन के परिचालन में क्रमिक शुरुआत बनी रहे.
- निष्क्रियता की स्थिति: अध्यक्ष या उपाध्यक्ष में से कोई एक नहीं होने पर भी संसद के कामकाज को सुचारु बनाये रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था होती है जो लोकतंत्र में राजनीतिक संतुलन बनाए रखती है.