संसद

Total Questions: 41

21. लोक सभा का ....... वर्ष का एक निश्चित कार्यकाल होता है और राष्ट्रपति द्वारा इसे किसी भी समय भंग किया जा सकता है। [MTS (T-I) 08 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) 5
Solution:
  • लोक सभा का 5 वर्ष का एक निश्चित कार्यकाल होता है, लेकिन राष्ट्रपति द्वारा इसे किसी भी समय भंग किया जा सकता है
  • खासकर यदि मंत्रिपरिषद अपना बहुमत खो देती है।
  • सामान्य परिस्थितियों में, लोक सभा अपने पहले सत्र के लिए निर्धारित तिथि से पाँच वर्ष तक कार्य करती है।
  • इस अवधि की समाप्ति पर, यदि इससे पहले भंग नहीं किया जाता है, तो सदन स्वचालित रूप से विघटित हो जाता है।
  • कार्यकाल की परिभाषा
    • लोक सभा का सामान्य या स्थायी कार्यकाल पहली बैठक से लेकर अगले पांच वर्ष तक रहता है, यदि समय पर भंग नहीं किया गया हो.​
    • चुनाव होते हैं और लोक सभा के सदस्य निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं, आम तौर पर वयस्क मताधिकार और सरल बहुमत के आधार पर चुने जाते हैं.​
  • भंग की प्रकृति
    • राष्ट्रपति मंत्रि-परिषद की सलाह पर लोक सभा को समय से पहले भंग कर सकते हैं; यह भंग एक प्रशासनिक प्रक्रिया है
    • जो लोक सभा के अस्तित्व को समाप्त कर देती है और त्वरित चुनाव कराती है.​
    • इसके परिणामस्वरूप समस्त चल रहे कार्य और बिल-वार्ताएं जिन्हें लोक सभा के भीतर आगे बढ़ना था, समाप्त हो जाते हैं
    • हालांकि राज्य सभा में रखे गए बिल या राष्ट्रपति के सम्मुख विचाराधीन मामले पूरी तरह खत्म नहीं होते, और कभी-कभी संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाने की व्यवस्था भी संभव है.​
  • आपातकाल स्थिति में संसदीय
    • आपातकाल के दौरान लोक सभा के कार्यकाल को कानून द्वारा अधिकतम एक वर्ष तक बढ़ाने का प्रावधान है
    • आपातकाल समाप्त होने पर यह वृद्धि 6 महीनों से अधिक नहीं हो सकती.​
  • अन्य संदर्भ
    • भारतीय संसदीय संरचना में लोक सभा एक निचला सदन है और इसका प्रमुख उद्देश्य नागरिक प्रतिनिधित्व और विधेयक निर्माण है
    • लोक सभा की विघटन प्रक्रिया सीधे प्रशासनिक निर्णय से जुड़ी है.​
  • उद्धरण (आधार सूचनाओं के स्रोत)
    • लोक सभा का कार्यकाल और भंग की प्रकृति: हिंदी विकिपीडिया लेख “लोक सभा” और संबंधित पन्ने.​
    • संविधानिक ढांचा और संसदीय अधिकार: भारत का राष्ट्रीय पोर्टल (विधायिका) और अन्य संसदीय संसाधन,,.​

22. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में कहा गया है कि "राज्य सभा, यथाशक्य शीघ्र, अपने किसी सदस्य को अपना उप-सभापति (Deputy Chairman) चुनेगी और जब-जब उप-सभापति का पद रिक्त होता है तब-तब राज्य सभा किसी अन्य सदस्य को अपना उप-सभापति चुनेगी।" ? [CHSL (T-I) 20 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) अनुच्छेद 89
Solution:
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 89 में कहा गया है कि "राज्य सभा, यथाशक्य शीघ्र, अपने किसी सदस्य को अपना उप-सभापति (Deputy Chairman) चुनेगी और जब-जब उप-सभापति का पद रिक्त होता है तब-तब राज्य सभा किसी अन्य सदस्य को अपना उप-सभापति चुनेगी।
  • यह अनुच्छेद राज्य सभा के सभापति (जो उपराष्ट्रपति होते हैं) और उप-सभापति के पद का प्रावधान करता है।
  • उपराष्ट्रपति राज्य सभा का पदेन सभापति होता है।
  • राज्यसभा के सभापति के रूप में उपराष्ट्रपति सदन की प्रतिष्ठा और प्रतिष्ठा का निर्विरोध संरक्षक होता है।
  • अनुच्छेद 64: उपराष्ट्रपति राज्य सभा का पदेन अध्यक्ष होगा और लाभ का कोई अन्य पद धारण नहीं करेगा।
  • अनुच्छेद 89: संविधान के अध्यक्ष (भारत के उपराष्ट्रपति) और राज्य सभा के उपसभापति के लिए प्रावधान प्रदान करता है।
  • शक्ति और कार्य:
    • राज्यसभा के सभापति को सदन को स्थगित करने या कोरम की अनुपस्थिति की स्थिति में इसकी बैठक को स्थगित करने का अधिकार है।
    • संविधान की 10वीं अनुसूची सभापति को दल-बदल के आधार पर राज्य सभा के सदस्य की अयोग्यता के प्रश्न का निर्धारण करने का अधिकार देती है
    • सदन में विशेषाधिकार हनन का प्रश्न उठाने के लिए सभापति की सहमति आवश्यक है।
    • संसदीय समितियाँ, चाहे वे सभापति द्वारा गठित हों या सदन द्वारा, सभापति के निर्देशन में काम करती हैं।
    • वह विभिन्न स्थायी समितियों और विभागों से संबंधित संसदीय समितियों में सदस्यों को नामित करता है।
    • वह कार्य मंत्रणा समिति, नियम समिति और सामान्य प्रयोजन समिति के अध्यक्ष हैं।
    • सभापति का यह कर्तव्य है कि वह संविधान और नियमों की व्याख्या करे, जहां तक सदन के या उससे संबंधित मामलों का संबंध है
    • कोई भी ऐसी व्याख्या पर सभापति के साथ
  • किसी भी तर्क या विवाद में प्रवेश नहीं कर सकता है।
    • उन्हें राज्यसभा के सभापति के पद से तभी हटाया जा सकता है जब उन्हें भारत के उपराष्ट्रपति के पद से हटा दिया जाए।
    • जबकि संकल्प उपराष्ट्रपति को हटाने के लिए प्रभावी है, वह सभापति के रूप में सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकता है
    • हालांकि वह सदन का हिस्सा हो सकता है।
      Other Information
  • अनुच्छेद 14:
    • राज्य धर्म, जाति, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भारत के क्षेत्र के अंदर किसी भी व्यक्ति को कानून के समक्ष समानता या कानूनों के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा।
  • अनुच्छेद 377:
    •  भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक के प्रावधान के बारे में राज्य
  • अनुच्छेद 370:
    • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 ने जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा दिया जो 1947 से भारत, पाकिस्तान और चीन के बीच विवाद का विषय रहा है।
    • अनुच्छेद 370 को भारतीय संविधान के भाग XXI में "अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष प्रावधान" शीर्षक से तैयार किया गया था।
    • अनुच्छेद 370 का खंड 3 राष्ट्रपति को अनुच्छेद को निष्क्रिय घोषित करने का अधिकार देता है।
    • सरकार ने अनुच्छेद 370 को खत्म करने के बजाय, प्रावधान को अप्रभावी बनाने के लिए उसी अनुच्छेद द्वारा राष्ट्रपति को दी गई शक्ति का इस्तेमाल किया।
    • अनुच्छेद 370 को खत्म करने के लिए, अन्यथा, अनुच्छेद 368 के तहत एक संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता होगी।
    • लेकिन अनुच्छेद 370(3) का हवाला देकर सरकार ने बड़ी चतुराई से संशोधन का मार्ग छोड़ दिया है।

23. राज्य सभा द्वारा एक धन विधेयक को ....... दिनों के भीतर या तो सिफारिशों के साथ या सिफारिशों के बिना लोक सभा में वापस भेजना अनिवार्य होता है। [MTS (T-I) 19 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) 14
Solution:
  • राज्य सभा द्वारा एक धन विधेयक को 14 दिनों के भीतर या तो सिफारिशों के साथ या सिफारिशों के बिना लोक सभा में वापस भेजना अनिवार्य होता है।
  • धन विधेयक केवल लोक सभा में ही पेश किया जा सकता है, और लोक सभा की शक्तियाँ इस मामले में राज्य सभा से अधिक होती हैं।
  • यदि राज्य सभा 14 दिनों के भीतर विधेयक वापस नहीं करती है, तो उसे दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है।
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 109 के अनुसार, यदि कोई धन विधेयक लोकसभा द्वारा पारित किया जाता है और उसकी सिफारिशों के लिए राज्य सभा को भेजा जाता है,
  • यदि राज्यसभा इस अवधि के भीतर विधेयक को वापस करने में विफल रहती है, तब विधेयक को दोनों सदनों द्वारा पारित माना जाता है।
  • यदि राज्यसभा धन विधेयक पर कोई सिफारिश करना चाहती है, तब वह 14 दिन की अवधि के भीतर ऐसा कर सकती है।
  • ऐसी सिफारिशों को लोकसभा द्वारा या तो स्वीकार किया जा सकता है या अस्वीकार किया जा सकता है।
  • हालांकि, यदि राज्यसभा 14 दिनों के भीतर विधेयक को वापस करने में विफल रहती है और विधेयक को पारित माना जाता है
  • तब वह विधेयक पर कोई सिफारिश नहीं कर सकती है।
    Other Information
  • धन विधेयक एक प्रकार का वित्तीय कानून है जिसे केवल लोकसभा में पेश किया जा सकता है, राज्यसभा में नहीं।
  • यह कराधान, सरकार द्वारा धन उधार लेना, भारत की संचित निधि से व्यय आदि जैसे मामलों से संबंधित है।
  • सामान्य विधेयकों के विपरीत, धन विधेयक को राज्यसभा की मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती है।
  • हालांकि, राज्यसभा विधेयक पर सिफारिशें कर सकती है, जिसे लोकसभा स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है।
  • यदि किसी धन विधेयक के संबंध में दोनों सदनों के बीच असहमति होती है, तब इसे दोनों सदनों की संयुक्त बैठक द्वारा हल किया जाता है
  • जहां विधेयक को दोनों सदनों की कुल सदस्यों की संख्या के साधारण बहुमत से पारित किया जाता है।
  • कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, इस सवाल पर लोकसभा अध्यक्ष अंतिम प्राधिकारी है।
  • यदि इस संबंध में कोई विवाद हो तो अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होता है।

24. राज्य सभा का सदस्य बनने के लिए एक भारतीय नागरिक की न्यूनतम आयु कितनी होनी चाहिए? [MTS (T-I) 08 मई, 2023 (II-पाली), CHSL (T-I) 11 जनवरी, 2017 (III-पाली), C.P.O.S.I. (T-I) 2 जुलाई, 2017 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) 30 वर्ष
Solution:
  • राज्य सभा का सदस्य बनने के लिए एक भारतीय नागरिक की न्यूनतम आयु 30 वर्ष होनी चाहिए। यह संविधान के अनुच्छेद 84 में निर्धारित योग्यता है।
  • इसकी तुलना में, लोक सभा का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष है।
  • यह अधिक आयु सीमा राज्य सभा को संसद के ऊपरी और अधिक अनुभवी सदन के रूप में इसकी प्रकृति को दर्शाती है।
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 80 के अनुसार, राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु 30 वर्ष है।
  • राज्यसभा में अधिकतम 250 सदस्य होते हैं, जिनमें से 238 सदस्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं द्वारा चुने जाते हैं और 12 सदस्य भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किए जाते हैं।
  • राज्यसभा के सदस्य छह वर्ष के लिए कार्यकाल करते हैं, जिसमें प्रत्येक दो वर्ष में एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं, जिससे सदन में निरंतरता बनी रहती है।
  • आयु के अतिरिक्त, उम्मीदवारों को भारत का नागरिक होना चाहिए और संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून के तहत अयोग्य नहीं होना चाहिए, जैसा कि संविधान के अनुच्छेद 84 में उल्लिखित है।
  • राज्यसभा राष्ट्रीय स्तर पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने, विधायी प्रक्रिया में योगदान देने और लोकसभा द्वारा पारित विधानों की समीक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
    Other Information
  • लोकसभा
    • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 84 के अनुसार, लोकसभा का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष है।
    • लोकसभा में 545 सदस्य होते हैं, जिनमें से 543 जनता द्वारा चुने जाते हैं और 2 राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किए जाते हैं (हालांकि बाद वाला प्रावधान समाप्त कर दिया गया है)।
    • सदस्यों का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है, जब तक कि सदन पहले ही भंग न हो जाए।
    • उम्मीदवारों को भारतीय नागरिक होना चाहिए और अनुच्छेद 102 में निर्दिष्ट किसी भी कानून के तहत अयोग्य नहीं होना चाहिए।
  •  राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति
    •  भारतीय संविधान के अनुच्छेद 58 के अनुसार, भारत के राष्ट्रपति बनने के लिए न्यूनतम आयु 35 वर्ष है।
    •  राष्ट्रपति पद के लिए योग्य होने के लिए उम्मीदवार को भारत का नागरिक होना चाहिए, उम्मीदवार को लोकसभा या राज्यसभा का सदस्य बनने के योग्य होना चाहिए, और सरकार के अधीन किसी भी लाभ के पद पर नहीं होना चाहिए, जैसा कि अनुच्छेद 58 में कहा गया है।
    •  अनुच्छेद 66 के अनुसार, भारत के उपराष्ट्रपति बनने के लिए न्यूनतम आयु भी 35 वर्ष है।
  • भारत में पंचायत (स्थानीय स्वशासन):
    •  भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243F में निर्दिष्ट किया गया है कि पंचायत चुनावों में भाग लेने के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष है।
    • पंचायती राज व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन की तीन स्तरीय व्यवस्था है, जिसमें ग्राम पंचायत (गांव स्तर), पंचायत समिति (ब्लॉक स्तर) और जिला परिषद (जिला स्तर) शामिल हैं।
    • पंचायत चुनावों को नियंत्रित करने वाले विशिष्ट नियम और विनियम, जिसमें आयु और पात्रता मानदंड शामिल हैं, राज्य से राज्य में थोड़े भिन्न हो सकते हैं, क्योंकि प्रत्येक राज्य को अपने पंचायत कानून बनाने का अधिकार है।

25. भारत के राष्ट्रपति द्वारा "राज्य सभा" में कितने सदस्यों को नामित किया जा सकता है? [MTS (T-I) 19 जून, 2023 (III-पाली), MTS (T-I) 17 मई, 2023 (III-पाली), MTS (T-I) 6 सितंबर, 2023 (III-पाली), MTS (T-I) 5 अक्टूबर, 2017 (III-पाली), MTS (T-I) 13 अप्रैल, 2021 (II-पाली), CHSL (T-I) 14 अक्टूबर, 2020 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) 12
Solution:
  • भारत के राष्ट्रपति द्वारा राज्य सभा में 12 सदस्यों को नामित किया जा सकता है। ये सदस्य ऐसे व्यक्ति होते हैं
  • जिन्हें कला, साहित्य, विज्ञान, और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होता है।
  • नामांकन की यह शक्ति सदन में विशिष्ट ज्ञान और विविध अनुभव वाले व्यक्तियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए दी गई है।
  • संविधान के अनुच्छेद 80 के अनुसार राज्य सभा की अधिकतम सदस्य संख्या 250 निर्धारित है. यह संख्या वास्तविक संसद-सदनों में स्थिर रहती है
  • भले ही कुछ समयावधि में कुछ सदस्यों के स्थान परिवर्तन हो या कुछ लोगों की नियुक्ति/पदस्थापन हो जाएं.​
  • अनुच्छेद 80 के अनुसार:
    • 238 सदस्य राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों के प्रतिनिधि होते हैं.​
    • 12 सदस्य भारत के राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत होते हैं.​
  • राष्ट्रपति द्वारा नामित किए जाने वाले 12 सदस्यों के बारे में सामान्यत:
    • चयन ऐसे व्यक्तियों के लिए किया जाता है जो संसद के बाहर कांग्रेस/केंद्रीय सरकार से दूरी बनाकर विभिन्न क्षेत्रों—जैसे विज्ञान, शिक्षा, कला, साहित्य, सामाजिक सेवा, आर्थिक योगदान, आदि—में उल्लेखनीय योगदान कर चुके हों और संसद के ऊपरी सदन (राज्य सभा) के deliberations और विविधता/विशेषज्ञता को बढ़ावा दे सकें ।​
    • कुछ स्रोतों में यह भी उल्लेख मिलता है कि वर्तमान संरचना में राज्य सभा में 245 सदस्य सक्रिय हो सकते हैं (यह संख्या समय-समय पर अधिनियम/सरकारी निर्णयों के अनुसार कम या अधिक हो सकती है), पर स्थिर नियम के अनुसार कुल मानक संख्या 250 बनती है और 12 मनोनीत सदस्य इस खांचे को पूरा करते हैं ।​
    • राज्यों के प्रतिनिधि के तौर पर चुने जाने वाले सदस्य विभिन्न राज्यों/केंद्रीय क्षेत्रीय परिषदों के प्रतिनिधित्व को संतुलित करने के उद्देश्य से चुने जाते हैं
    • ताकि संघीय संरचना के भीतर राज्यों का प्रतिनिधित्व किया जा सके।​
  • टिप्पणियाँ और संदर्भ
    • राज्य सभा की अधिकतम संख्या 250 निर्धारित करने वाला आधिकारिक परिपत्र/सूचना अनुच्छेद 80 है, जिसमें 238 राज्यों/संघ-राज्यों के प्रतिनिधि और 12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य शामिल होते हैं.​
    • कुछ समवर्ती स्रोतों में स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान स्थितियों में राज्य सभा की वास्तविक सदस्य संख्या 245 हो सकती है
    • किन्तु यह किसी विशेष समय के परिसीमन के अनुसार बदल सकती है; मूल संरचना फिर भी 250 सदस्य के भीतर ही रहती है.​
    • यदि चाहें, इन बिंदुओं के साथ मैं एक साफ-सुथरे तुलना-तालिका या उपयुक्त संदर्भ-योग्यता (उद्धरण सहित) देकर आपको एक पूर्ण संदर्भ-गाइड बना सकता हूँ, या आप किसी विशेष राज्य/उत्पादन के मनोनीत व्यक्तियों के उदाहरण भी चाहें तो बताइए.

26. एक राज्य सभा सदस्य का कार्यकाल कितने वर्षों का होता है? [MTS (T-I) 15 जून, 2023 (III-पाली), CHSL (T-I) 9 जनवरी, 2017 (I-पाली), C.P.O.S.I. (T-I) 5 जून, 2016 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) छः वर्ष
Solution:
  • एक राज्य सभा सदस्य का कार्यकाल छः वर्ष का होता है।
  • राज्य सभा जिसे उच्च सदन भी कहा जाता है, एक स्थायी सदन है और यह कभी भंग नहीं होती है।
  • इसके एक-तिहाई सदस्य हर दूसरे वर्ष सेवानिवृत्त हो जाते हैं
  • उनके स्थान पर नए सदस्य चुने जाते हैं, जिससे निरंतरता बनी रहती है।
  • राज्य सभा के सदस्य 6 वर्ष की अवधि के लिए चुने जाते हैं।
  • राज्य सभा जिसे राज्य परिषद के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय संसद का ऊपरी सदन है।
  • लोकसभा के विपरीत, राज्यसभा एक स्थायी निकाय है और इसे भंग नहीं किया जा सकता
  • लेकिन इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो वर्ष में सेवानिवृत्त हो जाते हैं।
  • सदस्यों का चुनाव राज्य विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा तथा संघ शासित प्रदेशों के लिए निर्वाचन मंडल के सदस्यों द्वारा एकल संक्रमणीय मत प्रणाली के माध्यम से किया जाता है।
    Other Information
  • राज्य सभा का गठन 3 अप्रैल 1952 को हुआ था।
  • यह भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करता है।
  • भारत का उपराष्ट्रपति राज्य सभा का पदेन सभापति होता है।
  • राज्य सभा का सदस्य होने के लिए व्यक्ति की आयु कम से कम 30 वर्ष होनी चाहिए, वह भारत का नागरिक होना चाहिए, तथा उसके पास संसद द्वारा निर्धारित अन्य योग्यताएं होनी चाहिए।
  • राज्य सभा की अधिकतम सदस्य संख्या 250 है, जिनमें से 238 सदस्य राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं
  • 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किये जाते हैं।

27. निम्न में से क्या अखिल भारतीय सेवाओं का हिस्सा नहीं होता है? [C.P.O.S.I. (T-I) 09 नवंबर, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) भारतीय अभियंत्रण सेवा
Solution:
  • भारतीय अभियंत्रण सेवा अखिल भारतीय सेवाओं का हिस्सा नहीं होती है। संविधान के अनुच्छेद 312 के तहत वर्तमान में केवल तीन अखिल भारतीय सेवाएँ हैं:
  • भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)
  • भारतीय पुलिस सेवा (IPS)
  • भारतीय वन सेवा (IFS)
  • अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्य केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के अधीन महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हैं।
  • भारत में तीन अखिल भारतीय सेवाएं हैं।
  • अधिकारियों को किसी भी विभाग, सरकार या मंत्रालय को आवंटित किया जा सकता है।
  • अन्य सेवाएं विशेष मंत्रालयों को आवंटित की जाती हैं और केवल अन्य मंत्रालयों में प्रतिनियुक्ति पर हो सकती हैं।
    Other Information
  •  यह अखिल भारतीय सेवा नहीं है।
    • भारत सरकार की कार्यकारी शाखा की केंद्रीय सिविल सेवाओं में से एक है।
    • अखिल भारतीय सेवाओं की सामान्य असाधारण विशेषता यह है कि इन सिविल सेवाओं के लिए चुने गए उम्मीदवारों को केंद्र या केंद्र सरकार द्वारा भर्ती किया जाता है।
    • इन अखिल भारतीय सेवाओं की शक्तियों, उद्देश्य और जिम्मेदारियों का वर्णन अखिल भारतीय सेवा अधिनियम, 1951 में किया गया है।
  • अखिल भारतीय सेवाएं क्या हैं
    • वे सेवाएं हैं जिनकी भर्ती संघीय स्तर पर केंद्र सरकार द्वारा होती है, लेकिन उनके राज्य सरकारों के अंतर्गत भी लगाए जाते हैं। इसका उद्देश्य केन्द्र-राज्य के बीच समन्वय और एक समान सेवा मानक बनाए रखना है.​
    • प्रमुख सदस्य: भारतीय प्रशासनिक सेवा भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय वन सेवा आदि शामिल हैं; इन सेवाओं के अधिकारी कैडर-आधारित नियुक्तियों के माध्यम से राज्यों में तैनात होते हैं पर उनकी सेवा-शर्तें केंद्र द्वारा विनियमित और नियंत्रित होती हैं.​
  • अखिल भारतीय सेवा नहीं कौनसी
    • भारतीय विदेश सेवा में नहीं आती; यह केंद्रीय सेवाओं में आती है और केंद्र सरकार के अंतर्गत कार्य करती है, किन्तु राज्यों में नहीं होता—यह नहीं है.​
    • अन्य केंद्रीय सेवाएं जैसे भारतीय रक्षा लेखा सेवा, रेलवे शिक्षा/कार्मिक सेवाएं इत्यादि AIS के बाहर आती हैं; ये केंद्र-केन्द्रित सेवाएं होती हैं और राज्यों के कैडरों में तैनाती नहीं होतीं.​
  • संविधान और नियमन
    •  निर्माण और नियंत्रण संसद द्वारा अधिनियमित विधि से होता है; केंद्र सरकार के पदों की भर्ती और सेवाशर्तों को विनियमित करने के लिए नियम बना सकती है.​
    • राज्य सेवाओं के साथ समन्वय और स्थानांतरण के मुद्दों पर भी केंद्र-राज्य परामर्श और अनुशासनात्मक प्रावधान लागू होते हैं ताकि एकीकृत मानक बना रहे.​
  • क्यों यह सवाल अलग है
    • अक्सर के प्रश्नों में पूछा जाता है कि “निम्नलिखित में से कौन अखिल भारतीय सेवा है या नहीं है,

28. भारतीय संविधान का निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद राज्य सभा की अधिकतम संख्या 250 निर्धारित करता है? [Phase-XI 30 जून, 2023 (IV-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) अनुच्छेद 80
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 80 राज्य सभा की अधिकतम संख्या 250 निर्धारित करता है।
  • इन 250 सदस्यों में से, 238 सदस्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि होते हैं (जो अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं
  • 12 सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा नामित किया जाता है
  • राज्यसभा की 250 सीटों में से 12 सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किया जाता है।
  • 238 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि हैं।
  • राज्यसभा भारतीय संसद का उच्च सदन है।
  • राज्यसभा में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि और भारत के राष्ट्रपति द्वारा नामित व्यक्ति शामिल होते हैं।
  • भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है।
  • राज्यसभा भी अपने सदस्यों में से एक उपसभापति चुनती है।
  • सभापति, राज्य सभा और उपसभापति, राज्य सभा इसकी बैठकों की अध्यक्षता करते हैं।
    Other Information
  •  भारतीय संविधान का अनुच्छेद 81 लोक सभा, लोकसभा की संरचना को परिभाषित करता है।
  •  प्रतिनिधि सभा में 550 से अधिक सदस्य निर्वाचित नहीं होंगे, जिनमें 20 से कम सदस्य प्रदेशों से होंगे।
  •  अनुच्छेद 83 संसद के सदनों की अवधि।
    •  राज्यों की परिषद विघटन के अधीन नहीं होगी
    •  लेकिन यथासंभव उसके एक-तिहाई सदस्य संसद द्वारा कानून द्वारा इस संबंध में किए गए
    • प्रावधानों के बाद हर दूसरे वर्ष की समाप्ति पर जितनी जल्दी हो सके सेवानिवृत्त हो जाएंगे।
    • अनुच्छेद 85 संसद के सत्र, सत्रावसान और विघटन।
    • राष्ट्रपति समय-समय पर संसद के प्रत्येक सदन को ऐसे समय और स्थान पर बैठक के लिए बुलाएगा।
    • जैसा कि वह उचित समझे, लेकिन एक सत्र में इसकी अंतिम बैठक और अगले सत्र में इसकी पहली बैठक के लिए नियुक्त तिथि के बीच छह महीने का अंतर नहीं होगा।

29. राज्य सभा को भारत के संविधान के अनुच्छेद 312 के तहत कौन-सी विशेष शक्ति प्राप्त है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) नई अखिल भारतीय सेवा का सृजन करने की
Solution:
  • राज्य सभा को भारत के संविधान के अनुच्छेद 312 के तहत नई अखिल भारतीय सेवा का सृजन करने की विशेष शक्ति प्राप्त है।
  • यह एक अद्वितीय शक्ति है जो केवल राज्य सभा के पास है।
  • यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से यह घोषित करती है
  • राष्ट्रीय हित में ऐसा करना आवश्यक या समीचीन है, तो संसद कानून द्वारा एक या अधिक अखिल भारतीय सेवाओं का सृजन कर सकती है।
  • इस शक्ति का प्रयोग उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित करके किया जाता है।
  • अखिल भारतीय सेवाएँ भारत के लिए अद्वितीय हैं और इनमें भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) और भारतीय वन सेवा (आईएफएस) जैसी सेवाएँ शामिल हैं।
  • नई अखिल भारतीय सेवाओं की स्थापना का उद्देश्य भारत के राज्यों में प्रशासन का एक समान स्तर सुनिश्चित करना है।
    Other Information
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 312:
    •  यह विधेयक संसद को नई अखिल भारतीय सेवाएं बनाने का अधिकार देता है
    • बशर्ते कि राज्य सभा दो-तिहाई बहुमत से इस आशय का प्रस्ताव पारित कर दे।
    •  अखिल भारतीय सेवाएँ पूरे देश में शासन के उच्च मानकों और प्रशासन में एकरूपता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • अखिल भारतीय सेवाएँ:
    •  ये सेवाएँ संघ और राज्य दोनों के लिए समान हैं।
    •  इन सेवाओं के अधिकारी केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों दोनों के अधीन कार्य करते हैं, जिससे केन्द्र और राज्यों के बीच सेतु सुनिश्चित होता है।
    • आईएएस, आईपीएस और आईएफएस मौजूदा अखिल भारतीय सेवाएं हैं।
  • राज्य सभा की भूमिका:
    •  राज्य सभा भारतीय संसद का ऊपरी सदन है और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करता है।
    •  इसमें ऐसे प्रस्ताव पारित करने की शक्ति है जिससे नई अखिल भारतीय सेवाओं का सृजन हो सके।
    •  इससे यह सुनिश्चित होता है कि ऐसी महत्वपूर्ण सेवाओं के सृजन और संचालन में राज्यों की भी भागीदारी हो।

30. संसद में प्रयुक्त होने वाली शब्दावली के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) केवल A
Solution:

भारत में प्रमुख संसदीय शब्दावली को समझना

  • प्रश्न में हमसे भारतीय संसद में प्रयुक्त विशिष्ट शब्दावली को उनके वर्णनों से मिलान करने वाले युग्मों की सत्यता का मूल्यांकन करने के लिए कहा गया है। आइए प्रत्येक युग्म का परीक्षण करें।
  • कथन 'ए' में विनियोग विधेयक को "भारत की संचित निधि से निकासी या विनियोग का प्रावधान करने के लिए पारित धन विधेयक" के रूप में वर्णित किया गया है।
  • लोकसभा में अनुदान मांगों पर मतदान के बाद विनियोग विधेयक पेश किया जाता है।
  • यह विधेयक संसद द्वारा अनुमोदित व्यय को पूरा करने के लिए सरकार को भारत की संचित निधि से धन निकालने के लिए अधिकृत करता है।
  • भारत के संविधान के अनुसार, भारत की संचित निधि से धन निकालने को अधिकृत करने वाले विधेयक को धन विधेयक के रूप में वर्गीकृत किया जाता है ।
  • इसलिए, विनियोग विधेयक के लिए दिया गया विवरण सही है। यह वास्तव में एक धन विधेयक है जो स्वीकृत व्ययों को पूरा करने के लिए भारत की संचित निधि से धन निकालने या विनियोग करने के लिए अधिनियमित किया जाता है।
  • सरकार के वार्षिक बजट में व्यय का अनुमान शामिल होता है।
  • ये अनुमान अनुदान मांगों के रूप में लोक सभा में प्रस्तुत किए जाते हैं ।
  • प्रत्येक अनुदान मांग में किसी विशेष मंत्रालय या विभाग या सेवा के लिए प्रस्तावित व्यय का विवरण होता है।
  • इन मांगों में संबंधित मंत्रालय/विभाग के नियोजित और गैर-नियोजित दोनों व्यय शामिल हैं।
  • लोक सभा इन अनुदान मांगों पर चर्चा करती है और मतदान करती है।

संशोधन तालिका: संसदीय शर्तें

अवधिसही विवरणप्रश्न की प्रासंगिकता
विनियोग विधेयकधन विधेयक, भारत की संचित निधि से मतदान अनुदानों और भारित व्ययों के लिए निकासी को अधिकृत करता है।कथन 'ए' में इसे समेकित निधि से निकासी हेतु धन विधेयक के रूप में सही ढंग से वर्णित किया गया है।
अनुदान की मांगलोकसभा में प्रस्तुत अनुमानित व्यय का विवरण, किसी मंत्रालय/विभाग के कुल व्यय (ऐतिहासिक रूप से नियोजित और गैर-नियोजित) को कवर करता है।कथन B गलत है क्योंकि यह केवल नियोजित व्यय को निर्दिष्ट करता है।
लघु अवधि चर्चाकिसी सदस्य के नोटिस द्वारा शुरू की गई अत्यावश्यक सार्वजनिक महत्व की चर्चा के लिए 50 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता नहीं होती है।कथन C गलत है क्योंकि इसमें 50 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता का उल्लेख है।

भारतीय संसद में सरकारी वित्त को संभालने के लिए विशिष्ट प्रक्रियाएं हैं:

  • वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट): सरकार द्वारा प्रस्तुत, यह वित्तीय वर्ष के लिए अनुमानित प्राप्तियों और व्यय को दर्शाता है।
  • अनुदानों की मांगें: व्यय का विस्तृत अनुमान मंत्रालयवार मतदान के लिए लोक सभा में प्रस्तुत किया गया।
  • विनियोग विधेयक: अनुदान मांगों पर मतदान के बाद पारित; सरकार को भारत की संचित निधि से धन निकालने का अधिकार देता है।
  • वित्त विधेयक: बजट के साथ ही प्रस्तुत किया जाता है; इसमें करों के आरोपण, निरसन, छूट, परिवर्तन या विनियमन के प्रस्ताव होते हैं। यह वित्तीय वर्ष के लिए सरकार के वित्तीय प्रस्तावों को प्रभावी बनाता है।
  • भारत की संचित निधि: भारत सरकार का मुख्य खाता। सरकार द्वारा प्राप्त सभी राजस्व, उसके द्वारा लिए गए ऋण और ऋणों की वसूली से प्राप्तियाँ इसी निधि में जमा होती हैं। सरकार के सभी कानूनी व्यय इसी निधि से पूरे किए जाते हैं। संसद द्वारा विनियोग अधिनियम के माध्यम से अनुमति के बिना इस निधि से कोई भी धनराशि नहीं निकाली जा सकती।