संसद

Total Questions: 41

31. प्रारूपण समिति ने भारतीय संविधान का पहला प्रारूप कब प्रकाशित किया था? [CGL (T-I) 17 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) फरवरी, 1948 में
Solution:
  • प्रारूपण समिति (Drafting Committee) ने भारतीय संविधान का पहला प्रारूप फरवरी, 1948 में प्रकाशित किया था।
  • इस प्रारूप को भारत के लोगों को आठ महीने की अवधि के लिए विचार करने और संशोधन सुझाने के लिए प्रस्तुत किया गया था।
  • इस पर प्राप्त सुझावों के आधार पर एक दूसरा प्रारूप अक्टूबर 1948 में प्रकाशित किया गया था।
  •  समिति की अध्यक्षता डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने की, जिन्हें भारतीय संविधान का मुख्य वास्तुकार माना जाता है।
  •  प्रारूप समिति में अम्बेडकर सहित सात सदस्य थे, और यह संविधान का प्रारूप तैयार करने के लिए उत्तरदायी था जो भारतीय लोगों की आकांक्षाओं और मूल्यों को प्रतिबिंबित करेगा।
  •  भारतीय संविधान का पहला मसौदा फरवरी 1948 में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की अध्यक्षता वाली प्रारूप समिति द्वारा प्रकाशित किया गया था।
    Other Information
  •  अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर, एन. गोपालस्वामी, बी.आर. अम्बेडकर, के.एम. मुंशी, मोहम्मद सादुल्ला, बी.एल. मित्तर, और डी.पी. खेतान प्रारूप समिति के सात सदस्यों में से थे।
  •  उद्घाटन बैठक 30 अगस्त, 1947 को आयोजित की गई थी।
  •  21 फरवरी, 1948 को संविधान का प्रारंभिक प्रारूप समिति द्वारा जारी किया गया था।
  •  लगभग आठ महीने तक इस प्रारूप की विवेचना की गयी।
  •  1947 में इसकी स्थापना हुयी थी और दो साल, ग्यारह महीने और अठारह दिनों के समयकाल में प्रारूप समिति द्वारा भारतीय संविधान का संपूर्ण प्रारूप तैयार किया गया था।
  • संरचना समिति ने भारतीय संविधान का पहला मसौदा या प्रारूप अक्टूबर 1948 में प्रकाशित किया था।
  • इस मसौदे को लेकर जनता और प्रतिनिधियों से सुझाव लेने के लिए जगह-जगह चर्चा का समय दिया गया और उसके आधार पर आवश्यक संशोधनों के साथ दूसरा प्रारूप तैयार किया गया
  • जिसे जनवरी 1949 तक समिति ने प्रस्तुत किया और 26 नवंबर 1949 को संविधानसभा द्वारा पारित किया गया। [संघीय इतिहास/संविधान सभा के निर्माण संबंधी विश्लेषण]
  • संरचना समिति और प्रारूप निर्माण का संक्षिप्त क्रम:
    • जुलाई 1946: संविधान सभा में प्रारूप समिति के गठन का प्रस्ताव; बी.आर. आंबेडकर की अध्यक्षता में प्रारूप समिति बनी. [आमतौर पर यही संदर्भ है कि प्रारूप समिति 1946-1947 में सक्रिय रही]
    • अक्टूबर 1948: पहला मसौदा या प्रारूप प्रकाशित हुआ, जिससे व्यापक टिप्पणी/सुझाव आमंत्रित किए गए. [यह वर्ष-तिथि स्पष्ट रूप से सामान्य इतिहास में दर्ज है]
    • फिर 1948-1949 में संशोधन के साथ दूसरा मसौदा प्रकाशित हुआ, और 26 नवंबर 1949 को संविधान को पारित किया गया. [संविधान सभा के माध्यम से 1949 में पारित]

32. भारत के संविधान का कौन-सा अनुच्छेद संसद के सत्रों से संबंधित है? [C.P.O.S.I. (T-I) 11 नवंबर, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) अनुच्छेद 85
Solution:
  • भारत के संविधान का अनुच्छेद 85 संसद के सत्रों सत्रावसान  और लोक सभा के विघटन से संबंधित है
  • यह अनुच्छेद राष्ट्रपति को यह शक्ति देता है कि वह समय-समय पर संसद के प्रत्येक सदन को आहूत करे।
  • हालांकि, दो सत्रों के बीच की अवधि छह महीने से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  • संविधान के अनुच्छेद संसद के सत्रों से सीधे जुड़ते नहीं हैं; संसद के सत्रों के आयोजन और संसदीय प्रक्रियाओं से संबंधी प्रावधान सामान्यतः संविधान के
  • अनुच्छेदों की संरचना के भीतर संघ/राज्य सरकारों की कार्यप्रणाली, लोकसभा-राज्यसभा के संचालन, नियम-अनुशासन आदि से जुड़ते हैं।
  • अगर आप “कौन-सा अनुच्छेद संसद के सत्रों से संबंधित है” पूछ रहे हैं, तो स्पष्ट उत्तर एक विशिष्ट अनुच्छेद के बजाय संसद के संचालन से जुड़े प्रावधानों के समूह के संदर्भ में होता है

  • संसद के नियम और प्रक्रियाओं से जुड़ा भाग:

    • संविधान के कुछ अनुच्छेदों से संसद के बैठे रहने, अवकाश, बदले हुए सत्र और अध्यादेशों के प्रावधानों को नियंत्रित करने वाले नियम सामान्यतः बनते हैं (उदा. राष्ट्रपति के आह्वान पर संसद के विशेष सत्र, नियम-उल्लंघन आदि का प्रावधान).

  • अध्यादेशों के प्रावधान:

    • अनुच्छेद 123 राष्ट्रपति को जबानी अध्यादेश जारी करने की शक्ति देता है

    • जो सामान्य सत्र के बीच शासकीय शासन-व्यवस्था से जुड़ा है, पर यह सीधे “सत्र” के आयोजन का भाग नहीं है, बल्कि एक विशेष सत्ता-प्रयोग है।

  • बजट, वार्षिक वित्तीय विवरण, वित्तीय नियंत्रण आदि:
    • अनुच्छेदों के अंतर्गत वार्षिक बजट, संसद के वार्षिक सत्रों में विधेयक पारित करने की प्रक्रिया आदि का मार्गदर्शन बनते हैं।

    • यदि आपके लिए संक्षिप्त, स्पष्ट संदर्भ-योग्य जानकारी है, तो नीचे प्रमुख बिंदुओं को देखें:
    • संसद के संचालनों से जुड़ी प्रावधानों के लिए संविधान का एक स्पष्ट एकीकरण नहीं है, बल्कि इसे संसद के संविधानिक अधिकारों, नियमों और नागरिक-राज्यत्व से जोड़ा गया है।

    • उदाहरण स्वरूप, अध्यादेश जारी करने की राष्ट्रपति की शक्ति अनुच्छेद 123 से संचालित होती है

    • जो सत्र के भीतर नहीं बल्कि सत्र-बीच के शासन-निर्णयों को संभव बनाती है ।​

    • संसद के भीतर सत्र चलाने के लिए आवश्यक प्रक्रियात्मक ढांचे अक्सर संसद-नियमों और आचार संहिता से संचालित होते हैं

    • इन्हें संविधान की लक्ष्यों-नीतियों के अनुरूप लागू किया जाता है ।​

    • यदि आप चाहें, तो अधिक सटीक उत्तर के लिए निम्न स्पष्टीकरण दें:
    • क्या आप संविधान के कौन-से भाग/अनुच्छेदों के बारे में जानना चाहते हैं (जैसे अनुच्छेद 74–75, 123 आदि) जो संसद के संचालन से जुड़ते हैं?

    • क्या आप हिंदी में विस्तृत अनुच्छेद-वार व्याख्या, उदाहरण और संबंधित अदालतों के निर्णयों के संदर्भ के साथ चाहते हैं?

    • क्या आप एपिसोडिक (सरल) सार चाहिए या संपूर्ण अनुच्छेद-वार विवरण चाहते हैं?

33. किसी सदन के सत्रावसान और एक नए सत्र में उसके पुनः समवेत होने के बीच की अवधि को कहा जाता है- [JE सिविल परीक्षा 23 मार्च, 2021 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) अवकाश
Solution:
  • किसी सदन के सत्रावसान (Prorogation) और एक नए सत्र में उसके पुनः समवेत (Reassembly) होने के बीच की अवधि को अवकाश (Recess) कहा जाता है।
  • 'सत्रावसान' का अर्थ है सत्र की समाप्ति, जो राष्ट्रपति द्वारा की जाती है
  • जबकि 'अवकाश' वह समय है जब सदन वास्तव में कार्य नहीं कर रहा होता है।
  • सत्रावसान और पुनः संयोजन के बीच के समय को अवकाश कहा जाता है।
    •  भारत में, संसद प्रत्येक वर्ष तीन सत्र आयोजित करती है:
    • बजट सत्र: जनवरी या फरवरी से मई।
    • मानसून सत्र: जुलाई से अगस्त या सितंबर।
    • शीतकालीन सत्र: नवंबर से दिसंबर।
    • भारतीय संसद का एक सत्र वह अवधि है जिसके दौरान एक सदन लगभग हर दिन निर्बाध रूप से व्यवसाय का प्रबंधन करने के लिए मिलता है।
    •  संसद के सभी सदस्यों को मिलने के लिए बुलाने की प्रक्रिया को संसद का सम्मन कहा जाता है।
    • संसद की संयुक्त बैठक भारत के राष्ट्रपति (अनुच्छेद 108) द्वारा बुलाई जाती है
    • इसकी अध्यक्षता लोकसभा के अध्यक्ष या, उनकी अनुपस्थिति में, लोकसभा के उपाध्यक्ष द्वारा, या उनकी अनुपस्थिति में, राज्यसभा के उपसभापति द्वारा की जाती है।
      Other Information
  •  भारत की संसद भारत गणराज्य का सर्वोच्च विधायी निकाय है।
  • यह भारत के राष्ट्रपति और दो सदनों: राज्यसभा और लोकसभा से बना एक द्विसदनीय विधायिका है।
  • सदन: राज्य सभा (उच्च सदन); लोकसभा (निम्न सदन)
  • स्थापित: 26 जनवरी 1950
  • सीटें: 788: 245 राज्यसभा के सदस्य; लोकसभा के 543 सदस्य
  •  लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला
  • लोकसभा अगला चुनाव: मई 2024
  •  लोकसभा मतदान प्रणाली जो ज्यादा मत पाया वह जीता (फ़र्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट)
  • राज्यसभा मतदान प्रणाली: एकल संक्रमणीय वोट

34. भारत के संविधान का कौन-सा अनुच्छेद राष्ट्रपति को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाने की शक्ति प्रदान करता है? [C.P.O.S.I. (T-I) 10 नवंबर, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) अनुच्छेद 108
Solution:
  • भारत के संविधान का अनुच्छेद 108 राष्ट्रपति को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) बुलाने की शक्ति प्रदान करता है।
  • यह शक्ति तब प्रयोग की जाती है जब साधारण विधेयक पर दोनों सदनों के बीच असहमत हो जाती है।
  • राष्ट्रपति इस गतिरोध को हल करने के लिए संयुक्त बैठक आहूत कर सकता है।
  •  इस अनुच्छेद के अनुसार, राष्ट्रपति को विधेयक पर विचार-विमर्श करने और मतदान के उद्देश्य से दोनों सदनों का संयुक्त सत्र बुलाने का अधिकार प्राप्त है।
  • अनुच्छेद 108 के अनुसार राष्ट्रपति को संयुक्त बैठक बुलाने की अधिकारिता है ताकि विधेयक पर विचार-विमर्श और के लिए दोनों सदनों को एक जगह लाया जा सके।
  • यह विशेष रूप से तब प्रयोग होता है जब विधेयक पर दोनों सदनों के बीच असहमति हो या किसी विशेष मुद्दे पर एक साथ आवश्यक हो ।​
  • संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा के अध्यक्ष द्वारा या उनकी अनुपस्थिति में लोकसभा के उपाध्यक्ष द्वारा की जाती है
  • राज्यसभा के अध्यक्ष यहाँ संयुक्त बैठक की अध्यक्षता नहीं करते ।​
  • यह शक्ति संविधान की अन्य पार्लियामेंटरी प्रक्रियाओं के साथ संगत रूप से प्रयोग की जाती है और राष्ट्रपति के पास संसद के संचालन के लिए अलग-अलग संवैधानिक भी हैं
  • जैसे कि सत्र बुलाना, संशोधन विधेयक के प्रस्तुत होने से लेकर विघटन तक के अधिकार। हालांकि अनुच्छेद 108 विशेष रूप से संयुक्त बैठक से संबंधित है ।​
  • Other Information 
  • अनुच्छेद 108 के भीतर संयुक्त बैठक बुलाने का अधिकार राष्ट्रपति को दिया गया है ताकि विधेयक पर विचार-विमर्श और मतदान संभव हो ।​
  • संयुक्त बैठक के संचालन की प्रक्रिया में अध्यक्षता लोकसभा के अध्यक्ष द्वारा की जाती है, यदि वे उपस्थित हों; अन्यथा लोकसभा के उपाध्यक्ष/राज्यसभा के उपाध्यक्ष की वैकल्पिकता संभव है ।​
  • इस विषय पर पाठ्य सामग्री और अभ्यास प्रश्न भी उपलब्ध हैं जो अनुच्छेद 108 के बारे में स्पष्ट व्याख्या देते हैं ।​

35. कौन-सा अनुच्छेद 'संविधान में संशोधन करने के लिए संसद की शक्ति तथा इसके लिए प्रक्रिया' से संबंधित है? [CGL (T-I) 03 दिसंबर, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) अनुच्छेद 368
Solution:
  • अनुच्छेद 368 'संविधान में संशोधन करने के लिए संसद की शक्ति तथा इसके लिए प्रक्रिया' से संबंधित है।
  • यह अनुच्छेद संसद को संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन करने की शक्ति प्रदान करता है
  • बशर्ते यह संशोधन संविधान के मूल ढाँचे को परिवर्तित न करे, जैसा कि केशवानंद भारती मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने स्थापित किया था।
  • संविधान के भाग में अनुच्छेद 368 संविधान और इसकी प्रक्रियाओं में संशोधन करने के लिए संसद की शक्ति से संबंधित है।
  • इसमें कहा गया है कि संसद इस उद्देश्य के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किसी भी प्रावधान को जोड़ने, बदलने या निरस्त करने के माध्यम से संविधान में संशोधन कर सकती है।
  • हालांकि, संसद उन प्रावधानों में संशोधन नहीं कर सकती है जो संविधान के मूल ढांचे का निर्माण करते हैं।
  • यह सर्वोच्च न्यायालय द्वारा केशवानंद भारती मामले (1973) में फैसला सुनाया गया था।
    Other Information
  • अनुच्छेद 343 के अनुसार -
  •  संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी।
  • संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप होगा।
  •  अनुच्छेद 361 के अनुसार,
  • राष्ट्रपति, या किसी राज्य के राज्यपाल या राजप्रमुख, अपने कार्यालय की शक्तियों और कर्तव्यों के प्रयोग और प्रदर्शन हेतु या किसी भी कार्य के लिए या उसके द्वारा किए जाने वाले किसी भी कार्य के लिए किसी भी अदालत के प्रति जवाबदेह नहीं होंगे।
  • अनुच्छेद 352 के तहत,
  • भारत या उसके किसी भाग की सुरक्षा को युद्ध या बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह से खतरा होने पर राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकता है।
  • यह ध्यान दिया जा सकता है कि राष्ट्रपति युद्ध या बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह की वास्तविक घटना से पूर्व राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकता है यदि वह संतुष्ट है कि आसन्न खतरा है।
  • राष्ट्रपति युद्ध, बाहरी आक्रमण, सशस्त्र विद्रोह, या उसके आसन्न खतरे के आधार पर विभिन्न उद्घोषणाएँ भी जारी कर सकता है, चाहे उसके द्वारा पहले से जारी
  • उद्घोषणा हो या न हो और ऐसी उद्घोषणा संचालन में हो।
  •  यह प्रावधान 38वें संशोधन अधिनियम 1975 के द्वारा जोड़ा गया था।
  •  जब किसी राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा 'युद्ध' या 'बाहरी आक्रमण के आधार पर की जाती है, तो इसे 'बाह्य आपातकाल' के रूप में जाना जाता है।
  •  दूसरी ओर, जब इसे 'सशस्त्र विद्रोह' के आधार पर घोषित किया जाता है, तो इसे 'आंतरिक आपातकाल' के रूप में जाना जाता है।

36. संविधान द्वारा राज्य सभा के मामले में किस प्रकार की चुनावी प्रणाली अपनाई गई है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 22 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) आनुपातिक प्रतिनिधित्व
Solution:
  • संविधान द्वारा राज्य सभा के मामले में आनुपातिक प्रतिनिधित्व की चुनावी प्रणाली अपनाई गई है।
  • यह चुनाव एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote) के माध्यम से होता है।
  • यह प्रणाली राज्यों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करती है
  • यह व्यवस्था लोक सभा में अपनाए गए फर्स्ट पास्ट द पोस्ट  सिस्टम से भिन्न है।
  • राज्यसभा:
    • राज्यसभा या 'राज्यों का परिषद' भारतीय संसद का दूसरा सदन है, जिसका उद्गम मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों, 1919 से है।
    •  संसद के दूसरे सदन के रूप में राज्यसभा का उद्देश्य एक स्थायी सदन के रूप में कुछ भूमिकाएँ निभाने का है।
    •  यह लोकसभा की तरह कभी भंग नहीं होती है।
    •  इसे संसद का उच्च सदन कहा जाता है और यह कभी भग नहीं होता है।
    •  इसके सदस्यों का प्रत्येक दो वर्षों में एक-तिहाई भाग अवकाश ग्रहण करता है. पुनरीक्षणात्मक सदन (लोकसभा द्वारा पारित विधेयकों पर पुनर्विचार करना), और संसद द्वारा पारित कानूनों की अंतर्निहित नीतियों में निरंतरता की एक डिग्री प्रदान करता है।
    • इसके सदस्य 30 वर्ष से कम आयु के नहीं होने चाहिए।
      Other Information
  •  संवेदनशील वर्गों का प्रतिनिधित्व:
    •  महिलाओं, धार्मिक, जातीय और भाषाई अल्पसंख्यक समूहों का लोकसभा में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है (प्रथम-अतीत-पोस्ट चुनाव प्रणाली के कारण)।
    •  राज्यसभा के लिए चुनाव का एक अप्रत्यक्ष रूप (आनुपातिक प्रतिनिधित्व के माध्यम से), इसलिए, उन्हें राष्ट्र की कानून-निर्माण प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिलेगा।
    • इस प्रकार, राज्यसभा उन लोगों के लिए जगह बना सकती है जो लोकप्रिय जनादेश जीतने में सक्षम नहीं हो सकते हैं।
  • राज्यसभा की विशेष शक्तियां:
    •  उच्च सदन के पास कुछ विशेष शक्तियाँ भी हैं,
    •  किसी विषय को राज्य सूची से संघ सूची में एक निर्दिष्ट अवधि के लिए स्थानांतरित करने की शक्ति (अनुच्छेद 249)।
    •  अतिरिक्त अखिल भारतीय सेवाएँ बनाने के लिए (अनुच्छेद 312)I
    •  अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल को सीमित अवधि के लिए अनुमोदित करने के लिए जब लोकसभा भंग हो।

37. निम्नलिखित में से कौन संसद की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता करता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20, 30 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) लोक सभा अध्यक्ष
Solution:
  • संसद की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोक सभा अध्यक्ष (Speaker of the Lok Sabha) करता है।
  • यह प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 118(4) में निहित है। यदि लोक सभा अध्यक्ष अनुपस्थित होता है
  • तो लोक सभा का उपाध्यक्ष अध्यक्षता करता है। यदि दोनों अनुपस्थित हों, तो राज्य सभा का उप-सभापति अध्यक्षता करता है।
  •  भारतीय संविधान के अनुच्छेद 108 में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक का प्रावधान है।
  • एक संयुक्त सत्र बुलाया जा सकता है:
    • यदि किसी विधेयक को एक सदन द्वारा पारित कर दूसरे सदन में स्थानांतरित कर दिया जाता है और दूसरा सदन इस विधेयक को अस्वीकार कर देता है
    • सदन विधेयक में किए गए संशोधनों पर सहमत नहीं हैं, या
    • दूसरे सदन द्वारा पारित किए बिना विधेयक को प्राप्त किए बिना छह महीने से अधिक समय बीत गया।
    • किसी विधेयक पर गतिरोध की स्थिति में राष्ट्रपति संसद की संयुक्त बैठक बुला सकता है।
    • लोकसभा का अध्यक्ष दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता करता है।
      Other Information
  • लोकसभा अध्यक्ष के बारे में
    • लोकसभा, जो देश में सर्वोच्च विधायी निकाय है, अपने अध्यक्ष को चुनती है जो सदन के दिन-प्रतिदिन के कामकाज की अध्यक्षता करते हैं।
    • सदन के अध्यक्ष का चुनाव नवगठित सदन के पहले कार्यों में से एक है।
    • अध्यक्ष का कार्यालय एक संवैधानिक कार्यालय है।
    • अध्यक्ष संवैधानिक प्रावधानों और लोकसभा में प्रक्रिया और कार्य संचालन के नियमों द्वारा निर्देशित होता है।
    • स्पीकर को देश में वरीयता के वारंट में बहुत ऊपर रखा जाता है यानी रैंक 6 पर।
    • संसदीय कार्यवाही के सुचारू संचालन में अध्यक्ष की सहायता करने के लिए पर्याप्त शक्तियाँ अध्यक्ष के कार्यालय में निहित हैं।
    • संविधान में यह प्रावधान है कि अध्यक्ष के वेतन और भत्तों पर संसद द्वारा मतदान नहीं किया जाना है और भारत की संचित निधि से प्रभारित किया जाना है।
    • लोकसभा कक्ष में, पूरे सदन के एक कमांडिंग दृश्य को सक्षम करने के लिए अध्यक्ष की कुर्सी विशिष्ट रूप से रखी जाती है।
    • संसदीय गतिविधियों, अभ्यास और प्रक्रिया पर लोकसभा के महासचिव और सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अध्यक्ष की सहायता की जाती है।
    • अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष कार्यों का निर्वहन करता है। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों की अनुपस्थिति में अध्यक्षों के पैनल का एक सदस्य सदन की अध्यक्षता करता है।

38. लोक सभा और राज्य सभा की संयुक्त बैठक के लिए भारतीय संसद के ....... कोरम की आवश्यकता होती है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) 10%
Solution:
  • लोक सभा और राज्य सभा की संयुक्त बैठक के लिए भारतीय संसद के 1/10 (दसवाँ भाग) कोरम की आवश्यकता होती है
  • न कि किसी प्रतिशत के रूप में दिए गए विकल्पों में से। चूँकि 1/10 भाग 10% के बराबर होता है, इसलिए यह विकल्प सही है।
  • यह कोरम सदन की कुल सदस्य संख्या के आधार पर गिना जाता है, ताकि बैठक को कानूनी रूप से वैध माना जा सके।
  • संयुक्त बैठक के लिए संविधान के अनुच्छेद 100(3) के अनुसार दोनों सदनों के कुल सदस्य का 1/10 हिस्सा कोरम (quorum) आवश्यक होता है।
  • यदि लोकसभा और राज्य सभा दोनों की संयुक्त बैठक बुलानी पड़े तो समिति के गठन और निर्णय प्रक्रिया इस कोरम के आधार पर ही संचालित होती है।नीचे संक्षेप में पूरी जानकारी दी जा रही है:
  • कोरम की परिभाषा: संसद के दोनों सदनों के कुल सदस्य संख्या में से दसवां हिस्सा। यह अनुच्छेद 100(3) के अंतर्गत निर्धारित है।
  • संचालन भूमिका: संयुक्त बैठक तब तक शुरू नहीं हो सकती जब तक कोरम पूरा न हो; यानी पर्याप्त सदस्य उपस्थित नहीं होंगे तो बैठक नहीं शुरू होगी।
  • निर्णय प्रक्रिया: संयुक्त बैठक में मतदान के दौरान सदनों के मतों की संयुक्त गिनती होती है; सामान्य कानून के मामले में बहुमत से निर्णय होता है
  • वित्त विधेयक/राज्यों से जुड़ी खास परिस्थितियों में नियम अलग हो सकते हैं (धन विधेयक के मामले में राज्य सभा की भूमिका और प्रक्रियात्मक प्राथमिकताएं भी लागू हो सकती हैं)।
  • स्थायित्व मुद्दा: संयुक्त बैठक किसी विशिष्ट समय के लिए बुलायी जाती है, जब द्विदलीय मतभेद या विधेयकों के पारित होने में गतिरोध होता है
  • इसके लिए कोरम पूरे रहते हुए भी सदस्य संख्या और समय-सीमा जैसी व्यवस्थाओं का पालन किया जाता है।

39. निम्नलिखित में से कौन-सी भारत की संसदीय सरकार की विशेषता नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 14 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) राज्य सभा का विघटन
Solution:
  • राज्य सभा का विघटन भारत की संसदीय सरकार की विशेषता नहीं है। राज्य सभा संसद का स्थायी सदन है
  • यह कभी भंग (Dissolved) नहीं होता है। संसदीय सरकार की प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं
  • बहुमत दल का शासन
  • विधायिका में मंत्रियों की सदस्यता
  • नाममात्र (राष्ट्रपति) और वास्तविक (प्रधानमंत्री) कार्यपालकों की उपस्थिति
  • सामूहिक उत्तरदायित्व
    •  भारत की संसदीय प्रणाली में, राज्यसभा (राज्यों का परिषद) एक स्थायी निकाय है और इसे भंग नहीं किया जा सकता है।
    • राज्यसभा एक सतत सदन है, जिसका अर्थ है कि यह विघटन के अधीन नहीं है। हालाँकि, इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में सेवानिवृत्त होते हैं।
    • भारतीय संविधान के अनुसार राज्यसभा का विघटन संभव नहीं है, जो इसे लोकसभा से अलग बनाता है, जिसे भंग किया जा सकता है।
    •  यह विशेषता यह सुनिश्चित करती है कि भारतीय संसद में हमेशा एक कार्यशील विधायी निकाय अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का निर्वाह करने के लिए मौजूद रहे।
      Other Information
  • नाममात्र और वास्तविक कार्यपालिकाओं की उपस्थिति
    •  भारत की संसदीय प्रणाली में, नाममात्र कार्यपालिका (राष्ट्रपति) और वास्तविक कार्यपालिका (प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद) के बीच स्पष्ट अंतर है।
    •  राष्ट्रपति राज्य का औपचारिक प्रमुख है, जबकि प्रधानमंत्री सरकार का प्रमुख है और वास्तविक कार्यकारी शक्तियों का प्रयोग करता है।
  •  मंत्रियों का विधानमंडल में सदस्यता
    • भारत में मंत्रियों को संसद के किसी भी सदन के सदस्य होने की आवश्यकता होती है।
    • यदि कोई मंत्री नियुक्ति के समय सदस्य नहीं है, तो उसे पद पर बने रहने के लिए छह महीने के भीतर सदस्य बनना होगा।
  • बहुमत दल का शासन
    • भारत बहुमत दल के शासन का पालन करता है, जहाँ लोकसभा में बहुमत वाली पार्टी सरकार बनाती है।
    • प्रधानमंत्री आमतौर पर लोकसभा में बहुमत वाली पार्टी या गठबंधन का नेता होता है।

40. भारत में सरकार की संसदीय प्रणाली निम्नलिखित में से किस संसदीय सरकार के पैटर्न पर आधारित है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 14 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) ब्रिटेन
Solution:
  • भारत में सरकार की संसदीय प्रणाली ब्रिटेन (British) की संसदीय सरकार के पैटर्न पर आधारित है।
  • भारतीय संविधान निर्माताओं ने वेस्टमिंस्टर मॉडल (Westminster Model) को अपनाया, जिसमें प्रधानमंत्री सरकार का प्रमुख होता है
  • वह लोक सभा के प्रति उत्तरदायी होता है, जबकि राष्ट्रपति केवल नाममात्र का प्रमुख होता है।
  • भारत ने ब्रिटिश संसदीय प्रणाली को अपनाया क्योंकि यह उन भारतीय नेताओं से परिचित थी जो ब्रिटिश कानूनी और संसदीय परंपराओं से परिचित थे।
  • भारतीय संसदीय प्रणाली में दो सदन शामिल हैं: लोकसभा (जनता का सदन) और राज्यसभा (राज्यों की परिषद), जो ब्रिटिश संसद के हाउस ऑफ कॉमन्स और हाउस ऑफ लॉर्ड्स के समान हैं।
  • भारत का राष्ट्रपति देश का संवैधानिक प्रमुख है, जो ब्रिटिश सम्राट के समान है, जबकि भारत का प्रधानमंत्री सरकार का प्रमुख है, जो ब्रिटिश प्रधानमंत्री के समान है।
    Other Information
  •  संसदीय प्रणाली:
    • संसदीय प्रणाली लोकतांत्रिक शासन की एक प्रणाली है जहाँ कार्यपालिका शाखा अपनी वैधता विधायिका (संसद) से प्राप्त करती है और उसके प्रति जवाबदेह होती है;
    • कार्यपालिका और विधायिका शाखाएँ इस प्रकार परस्पर जुड़ी हुई हैं।
    • ससदीय प्रणाली में, राज्य का प्रमुख आमतौर पर सरकार के प्रमुख से अलग होता है। सरकार का प्रमुख आमतौर पर प्रधानमंत्री होता है, जिसे राज्य के प्रमुख द्वारा नियुक्त किया जाता है।
  • लोकसभा:
    • लोकसभा, या जनता का सदन भारत की द्विसदनीय संसद का निचला सदन है। इसके सदस्य भारत के लोगों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं।
    • लोकसभा कानून बनाने और लोगों के हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए जिम्मेदार है। इसमें महत्वपूर्ण शक्तियाँ हैं, जिसमें धन विधेयक पारित करने और सरकार को जवाबदेह ठहराने की क्षमता शामिल है।
  • राज्यसभा:
    • राज्यसभा, या राज्यों की परिषद, भारत की द्विसदनीय संसद का ऊपरी सदन है। इसके सदस्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधान सभाओं द्वारा चुने जाते हैं।
    • राज्यसभा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करती है और लोकसभा द्वारा पारित विधान के लिए एक संशोधन कक्ष के रूप में कार्य करती है।
  • प्रधानमंत्री:
    • भारत का प्रधानमंत्री सरकार का प्रमुख होता है और राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है। प्रधानमंत्री आमतौर पर लोकसभा में बहुमत वाली पार्टी या गठबंधन का नेता होता है।
    • प्रधानमंत्री सरकार की कार्यपालिका शाखा का नेतृत्व करता है, सरकारी नीति निर्धारित करता है और अंतर्राष्ट्रीय मामलों में देश का प्रतिनिधित्व करता है।
  • राष्ट्रपति:
    • भारत का राष्ट्रपति राज्य का प्रमुख होता है और संसद के दोनों सदनों और राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधान सभाओं के सदस्यों से मिलकर बनने वाले एक निर्वाचक मंडल द्वारा चुना जाता है।
    • राष्ट्रपति के पास कई प्रकार की शक्तियों और कार्य हैं, जिनमें प्रधानमंत्री की नियुक्ति, औपचारिक मामलों में देश का प्रतिनिधित्व करना और सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर के रूप में कार्य करना शामिल है।