Correct Answer: (a) कुचिपुड़ी और भरतनाट्यम
Solution:- मल्लिका साराभाई एक भारतीय कुचिपुड़ी और भरतनाट्यम नृत्यांगना हैं।
- कला क्षेत्र में प्रदर्शन में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्म भूषण (2010) से सम्मानित किया गया था।
- नृत्य शैलियों का विवरण
- मल्लिका साराभाई मुख्यतः कुचिपुड़ी के लिए विख्यात हैं, जो आंध्र प्रदेश का एक प्रमुख शास्त्रीय नृत्य रूप है।
- यह शैली अपने गतिशील आंदोलनों, अभिव्यंजक हस्त मुद्राओं (मुद्राओं) और नाटकीय कथा-प्रसंगों के लिए प्रसिद्ध है
- जो अक्सर हिंदू पौराणिक कथाओं जैसे रामायण या महाभारत के दृश्यों को जीवंत करती है।
- कुचिपुड़ी में नर्तक तेज फुटवर्क, घुमावदार मुद्राएं और तेलुगु संगीत की संगत पर नृत्य करते हैं, जो इसे भरतनाट्यम से अधिक नाटकीय बनाता है।
- वह भरतनाट्यम में भी निपुण हैं, जो तमिलनाडु की प्राचीनतम शास्त्रीय नृत्य शैली है।
- भरतनाट्यम में जटिल फुटवर्क (नट्टुवंगम), सुंदर हस्त मुद्राएं, नेत्र अभिनय (नट्टाराध्यम) और भावपूर्ण अभिनय का समावेश होता है
- जो भक्ति रस से ओतप्रोत होता है। मल्लिका ने दोनों शैलियों को मिलाकर आधुनिक सामाजिक मुद्दों जैसे पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण और राजनीतिक व्यंग्य पर प्रदर्शन तैयार किए
- जो पारंपरिक नृत्य को समकालीन बनाते हैं।
- पद्म भूषण और कला योगदान
- उन्हें 2010 में प्रदर्शन कला में योगदान के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उनके दशकों लंबे करियर को मान्यता देता है
- जिसमें अहमदाबाद के दर्पण अकादमी (जिसकी वह निर्देशक हैं) के माध्यम से नृत्य शिक्षा और सामाजिक जागरूकता का प्रसार शामिल है।
- उन्होंने पीटर ब्रुक के महाभारत में द्रौपदी की भूमिका निभाई और फ्रांसीसी 'पामे डी'ओर' जैसे अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त किए।
- पारिवारिक पृष्ठभूमि और विरासत
- मल्लिका विक्रम साराभाई (भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक) और मृणालिनी साराभाई (प्रसिद्ध भरतनाट्यम नर्तकी) की पुत्री हैं।
- दर्पण अकादमी की स्थापना उनकी मां ने की थी, जहां मल्लिका ने नृत्य को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाया।
- उन्होंने यूनेस्को के साथ विश्व सांस्कृतिक विरासत पर काम किया और विश्व आर्थिक मंच में भाग लिया।
- उनके प्रदर्शन जैसे "शक्ति: द पावर ऑफ वुमन" महिला अधिकारों पर केंद्रित हैं।
- अन्य उपलब्धियां
- सामाजिक कार्य: नृत्य के जरिए भ्रष्टाचार, पर्यावरण संरक्षण और लिंग असमानता जैसे मुद्दों पर व्यंग्यात्मक प्रस्तुतियां।
- फिल्म और थिएटर: कई नाटकों और फिल्मों में अभिनय, जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना।
- शिक्षा और नेतृत्व: केरल कलामंडलम की कुलाधिपति रहीं, जहां उन्होंने प्रदर्शन कला को नई दिशा दी।